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दिल्ली के महाकांड-1: इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद का इतिहास

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31 अक्टूबर 1984 को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही दो अंगरक्षकों, बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने कर दी थी। इंदिरा गांधी जब अपने सरकारी आवास से बाहर निकल रही थीं, तभी बेअंत सिंह ने रिवॉल्वर से गोलियां चलाईं और उसके बाद सतवंत सिंह ने स्टेनगन से 25 गोलियां चलाकर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायल इंदिरा गांधी को तुरंत एम्स ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।

हत्या की साजिश में केहर सिंह और बलबीर सिंह का भी नाम सामने आया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि सितंबर 1984 में एक धार्मिक प्रतीकात्मक घटना ने बेअंत सिंह और सतवंत सिंह को हत्या के लिए प्रेरित किया।

घटना के तुरंत बाद आईटीबीपी के जवानों ने मौके पर पहुंचकर दोनों हत्यारों को पकड़ने की कोशिश की। इस दौरान बेअंत सिंह भागने की कोशिश में मारा गया, जबकि सतवंत सिंह को जिंदा गिरफ्तार किया गया।

हत्या के बाद न्यायिक प्रक्रिया ने तेजी पकड़ी। सतवंत सिंह और केहर सिंह को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा। अंततः 6 जनवरी 1989 को तिहाड़ जेल में उन्हें फांसी दे दी गई।

यह हत्या न केवल भारतीय राजनीति में एक काला अध्याय बनी, बल्कि इसके बाद देश ने सिख विरोधी दंगों का भी दर्द झेला। हजारों निर्दोष सिखों की हत्या ने भारतीय समाज को झकझोर कर रख दिया।

ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर बनने पर देवकीनंदन ठाकुर का बयान

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एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर बनने पर प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जब कोई अभिनेत्री संत बनती है, तो समाज उसकी प्रशंसा करता है। लेकिन जब संत कथा कहते हैं, तो लोग उस पर ध्यान नहीं देते। यह समाज की भक्ति और अध्यात्म के प्रति सोच को दर्शाता है।

देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन धर्म और मंदिरों की सुरक्षा के लिए ‘सनातन बोर्ड’ के गठन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने लोगों से 27 जनवरी को सेक्टर-17 स्थित शांति सेवा शिविर में होने वाली सनातन धर्म संसद में भाग लेने की अपील की।

मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह भक्ति और श्रद्धा को प्रभावित करता है। उनका मानना है कि धर्म का संचालन धर्माचार्यों के माध्यम से होना चाहिए, न कि उन लोगों द्वारा जो धर्म को सही से नहीं समझते।

उन्होंने अन्नदान को सबसे बड़ा दान बताते हुए कहा कि भूखे को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य है। इसके अलावा, उन्होंने समाज को ब्राह्मण और गाय की हत्या न करने की भी सीख दी।

झारखंड में अफसरों को ठगने वाला गिरोह भंडाफोड़: 5 गिरफ्तार, कई IPS भी बने शिकार

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झारखंड पुलिस ने अफसरों को मनचाही पोस्टिंग और स्थानांतरण का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। रांची पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पांच शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच के दौरान कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के ठगी के शिकार होने की बात सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में अयान सरकार, चंदन लाल, सूर्यप्रभात, कैप्टन सिंह सलूजा और सज्जाद उर्फ मुन्ना शामिल हैं। ये आरोपी व्हाट्सएप चैट के जरिए अधिकारियों के साथ लेनदेन और पोस्टिंग की बातें करते थे। पुलिस इन चैट्स को खंगाल रही है।

जांच में यह भी पता चला कि अयान सरकार भाजपा नेता बाबूलाल सोरेन के कारोबारी साझेदार हैं, जबकि सूर्यप्रभात भाजपा युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुका है। कैप्टन सिंह सलूजा और सूर्यप्रभात भाजपा के एक राज्यसभा सदस्य के करीबी बताए जाते हैं।

पुलिस ने कोतवाली थाने में मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। ठगी के शिकार अधिकारियों की पहचान की जा रही है।

बागपत जैन महोत्सव में हादसा: 7 की मौत, 65 फीट ऊंचा मंच ढहा

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बागपत के बड़ौत तहसील में जैन धर्म के महोत्सव के दौरान बड़ा हादसा हो गया। 65 फीट ऊंचा लकड़ी का मंच अचानक ढह गया, जिसमें 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना सुबह 7 से 8 बजे के बीच हुई, जब श्रद्धालु भगवान आदिनाथ की प्रतिमा तक पहुंचने के लिए मचाननुमा लकड़ी की सीढ़ियों से चढ़ रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भगवान की 4-5 फीट ऊंची प्रतिमा 65 फीट ऊंचे मंच पर रखी गई थी। भारी संख्या में श्रद्धालु मंच पर चढ़ने लगे, जिससे वजन बढ़ गया और मचान अचानक नीचे गिर गया। हादसे में गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं को इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती किया गया है।

स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए खून से लथपथ घायलों को ठेलों और अन्य साधनों से अस्पताल पहुंचाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को तुरंत राहत कार्य करने के निर्देश दिए हैं। रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी भी घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे।

चंदेरी: जहां सतीत्व और स्वाभिमान की रक्षा के लिए सोलह सौ वीरांगनाओं ने किया जौहर

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हितानंद शर्मा-विनायक फीचर्स
स्‍वदेश, स्‍वाभिमान और स्‍वतंत्रता की रक्षा करने के भारतीयों के संकल्‍प और संघर्ष विश्‍व इतिहास में अनूठे हैं। किसी छोटे से कालखंड नहीं बल्कि यह हजार वर्षों के सतत संघर्ष की शौर्यगाथा है। संस्‍कृति और धर्म की रक्षा के लिए पुरुष, स्‍त्री, युवा, बच्‍चे, वृद्ध सभी के बलिदान प्रणम्‍य हैं। अपने स्‍वत्‍व, स्वाभिमान और सतीत्व की रक्षा के इस संघर्ष में स्‍त्र‍ियों ने भी सदैव त्‍याग और बलिदान का मार्ग चुना। पहले अपने परिवार के पुरुषों का संबल बन कर विजय की कामना के साथ उनके भाल पर तिलक कर युद्ध क्षेत्र में भेजा। दुर्भाग्‍य से यदि विजयश्री न मिली तो किले में ही स्‍वयं की अस्मिता की हर कीमत पर रक्षा की। भारत की महान बेटियों ने अग्नि की भस्म बन जाना स्वीकार किया लेकिन अपनी मृत देह को भी शत्रु को स्पर्श नहीं करने दिया। मध्‍यकालीन बर्बर आक्रांताओं से अपनी अस्मिता की रक्षा करने के लिए इन महान भारतीय नारियों ने जौहर के अग्निपथ पर चलने में एक क्षण की देरी भी नहीं की। जौहर की ऐतिहासिक घटनाओं के ये उदाहरण केवल भारत में ही मिलते हैं।

मध्‍यकालीन बर्बर मुगल आक्रांताओं से युद्ध में पराजय के बाद अपनी अस्मिता बचाने के लिए सिंध, ग्‍वालियर, रणथंभौर, चित्‍तौड़, चंदेरी सहित अन्‍य कई स्‍थानों पर वीरांगना नारियों ने जौहर कर अपना आत्‍मोत्‍सर्ग किया। इनमें चंदेरी का जौहर सबसे बड़ा जौहर रहा। चंदेरी वर्तमान में अशोकनगर जिले में स्थित एक नगर है। इसी चंदेरी के दुर्ग में राजपूताने की 1600 से अधिक वीरांगनाओं ने एक साथ अग्निकुंड में अग्निदाह कर मृत्‍यु को स्‍वीकार किया। मालवा की राजधानी रहे चंदेरी का मजबूत दुर्ग आज भी राजा मेदिनी राय के पराक्रम और वीरता की गाथा कहता है। इसी दुर्ग के खूनी दरवाजे में 1600 से अधिक वीरांगना नारियों के बलिदान की करुण किन्‍तु पराक्रमी कथा भी लिखी है।

496 वर्ष बीत गए हैं। यह इतिहास के उस कालखंड की राजा मेदिनी राय और रानी मणिमाला की वीरता और शौर्य के साथ करुणा से भरी गाथा है। चंदेरी में तब राजा मेदिनी राय का शासन था। उनकी रानी मणिमाला भी उन्‍हीं की तरह स्‍वाभिमानी थी। चंदेरी सामरिक, व्‍यापारिक और मालवा में प्रवेश की दृष्टि से अति महत्‍वपूर्ण था। विध्वंसक विस्तारवादी नीति के साथ आक्रांता बाबर मालवा पर अपनी कुदृष्टि डाल चुका था। वह दिसंबर 1527 में अपनी सेना लेकर चंदेरी की ओर बढ़ा। उसने इस युद्ध को जेहाद घोषित किया। 20 जनवरी 1528 को उसने राजा मेदिनी राय को एक पत्र भेजा जिसमें आत्‍मसमर्पण कर मुगल राज्‍य की अधीनता स्‍वीकार करने का प्रस्‍ताव था। बदले में शमशाबाद की जागीर देने का भी प्रस्‍ताव था। राजा मेदिनी राय स्‍वाभिमानी राजा थे, उन्‍होंने अधीनता का यह प्रस्‍ताव अस्‍वीकार कर दिया। शत्रु बिल्कुल निकट आ गया था यह देख उन्होंने युद्ध की तैयारी और तेज कर दी।

मेवाड़ के राणा सांगा इसके पूर्व 16 मार्च 1527 को बाबर के विरुद्ध राजपूत शक्ति की खानवा के युद्ध में पराजय देख चुके थे, राजा मेदिनी राय भी इस युद्ध में वीरता से लड़े थे। खानवा के युद्ध के बाद राजपूत शक्ति कमजोर पड़ जाने से राणा सांगा की ओर से भी सहायता मिलना संभव नहीं हो रहा था। पराजय लगभग तय थी फि‍र भी वीर मेदिनीराय ने झुकने के स्‍थान पर युद्ध का विकल्‍प चुना। एक वीर योद्धा युद्ध लड़ कर विजय प्राप्त करने या वीरगति को प्राप्त हो जाने के लिए सदैव उन्मुख रहता है। युद्ध की घोषणा कर दी गई।

27 जनवरी को सूर्य उदय होते ही युद्ध शुरू हुआ। तीसरे दिन 29 जनवरी को भीषण और निर्णायक युद्ध हुआ। पराक्रम से लड़ते हुए राजा मेदिनीराय वीरगति को प्राप्त हुए। राजा की मृत्यु और बाबर के महल की ओर आने की सूचना जैसे ही रानी मणिमाला के पास पंहुची तो उन्‍होंने 1600 क्षत्राणियों और अपने सतीत्व की रक्षा हेतु जौहर का निर्णय लिया। महल के अंदर बनाए गए जौहर कुंड में प्रज्‍जवलित अग्नि में एक-एक कर सभी क्षत्राणियों ने समिधा के समान स्वयं की आहुति दे दी। अग्नि की लपटें कई कोस दूर तक दिखाई दे रही थी। जब यह दृश्‍य महल में आए बर्बर बाबर ने देखा तो वह भी कांप गया। उसके साथ आई उसकी चौथी बीबी दिलावर बेगम वहीं बेहोश होकर गिर गयी। इस प्रकार इन महान नारियों ने अपने स्वाभिमान और सतीत्व की रक्षा के लिए स्वयं को बलिदान कर दिया।

चंदेरी के दुर्ग में ऐतिहासिक जौहर की यह गाथा क्षत्राणियों ने अपने रक्‍त से लिखी है। यह भारत की नारियों का अपनी अस्मिता और सतीत्‍व की रक्षा के लिए किए गए आत्‍मोत्‍सर्ग का ऐसा उदाहरण है जिसकी दूसरी मिसाल विश्‍व इतिहास में नहीं मिलती। इसी जौहर की स्मृति में किले में एक स्मारक बनाया गया है और प्रतिवर्ष इन वीरांगनाओं को श्रृद्धांजलि देने आयोजन होते हैं। यह स्‍मारक इस बात का संदेश देता है कि भारतीयों ने बिना झुके अपना बलिदान देकर भी देश, धर्म, संस्‍कृति और स्‍वाभिमान को बचाए रखा। ऐसे ही अनगिनत बलिदानों की बुनियाद पर आज भारतीय समाज सुखी और स्‍वतंत्र जीवन जी रहा है। चंदेरी का यह जौहर वास्‍तव में देश के स्‍वाभिमान के लिए प्रेरणा है।

गणतंत्र दिवस 2025: सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की झांकी प्रथम, मंईयां सम्मान योजना पर बनी झांकी को दूसरा स्थान

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रांची: गणतंत्र दिवस 2025 के राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार द्वारा ध्वजारोहण के बाद 11 विभागीय झांकियों का प्रदर्शन किया गया। इन झांकियों ने झारखंड की संस्कृति, विकास और सशक्तिकरण की झलक पेश की।

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की झांकी प्रथम
प्रथम स्थान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की झांकी को मिला। इस झांकी में “स्वर्णिम झारखंड” की विरासत और विकास को दर्शाया गया। झांकी ने राज्य के औद्योगिक विकास में रतन टाटा के योगदान को सम्मानित करते हुए झारखंड की संस्कृति और सरकारी प्रयासों को प्रदर्शित किया।

दूसरा स्थान: महिला सशक्तिकरण पर आधारित झांकी
महिला, बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा विभाग की झांकी को दूसरा स्थान मिला। इस झांकी ने “मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना” पर फोकस किया, जिसमें 18-50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को आर्थिक सहायता के रूप में प्रति वर्ष ₹30,000 प्रदान करने का उद्देश्य है। झांकी ने महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन को केंद्र में रखा।

तीसरा स्थान: बालिका शिक्षा पर झांकी
स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की झांकी ने “बालिका शिक्षा: अब हर एक बच्ची बनेगी सशक्त” विषय पर बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित सरकारी कार्यक्रमों को प्रदर्शित किया। इस झांकी को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।

गणतंत्र दिवस के इस भव्य आयोजन ने झारखंड की सांस्कृतिक और विकासात्मक उपलब्धियों को खूबसूरती से दर्शाया और राज्य के प्रगति के पथ पर बढ़ने के संकल्प को बल दिया।

बिना ओटीपी के अकाउंट से पैसे उड़ाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 10 करोड़ की ठगी में 6 साइबर अपराधी गिरफ्तार

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झारखंड के जामताड़ा से पुलिस ने 10 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के मास्टरमाइंड सहित 6 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 14 मोबाइल, 23 सिम कार्ड, एक ड्रोन कैमरा, एक डीएसएलआर कैमरा, दो चारपहिया वाहन, 10 एटीएम कार्ड और करीब 1 लाख रुपये नगद बरामद हुए हैं।

यह गिरोह एपेक फाइल मैसेज के जरिए लोगों के फोन पर लिंक भेजता था। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता, उसके फोन का पूरा डेटा इन अपराधियों के पास पहुंच जाता था। इसके बाद, बिना ओटीपी के ही वे बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे।

गिरोह का नेटवर्क और ठगी का तरीका

गिरोह ने पीएम किसान योजना, फसल बीमा योजना और नेशनलाइज्ड बैंकों के लाभुकों की डिटेल्स तक पहुंच बना ली थी। पुलिस ने बताया कि इन अपराधियों ने देशभर में करीब 415 साइबर अपराधों को अंजाम दिया, जिसमें 10 करोड़ रुपये की ठगी हुई। इनके जब्त मोबाइल में लगभग 2,700 पीड़ितों के डेटा और ढाई लाख से अधिक मैसेज मिले हैं।

एसपी का बयान

जामताड़ा एसपी एहतेशाम वकारीब ने इस कार्रवाई को पुलिस की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने बताया, “गिरोह एपेक लिंक के जरिए फोन की पूरी जानकारी चुरा लेता था और बिना ओटीपी के खातों से पैसा निकाल लेता था।”

गिरफ्तार अपराधियों में मोहम्मद महबूब आलम, सफाउद्दीन अंसारी, आरिफ अंसारी, जैस्मिन अंसारी, शेख बलाल और अजय मंडल के नाम शामिल हैं। एसपी ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहायता

मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सीआईडी ने गृह मंत्रालय और भारतीय साइबर अपराध समन्वय से तकनीकी सहायता मांगी है। गिरोह के अपराध क्षेत्र झारखंड के गिरिडीह, जामताड़ा, सारठ, धनबाद और देवघर में सक्रिय थे।

इस घटना ने साइबर सुरक्षा और ठगी रोकने के उपायों को मजबूत करने की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सिवान में कथित जहरीली शराब का कहर, एक की मौत, SP ने दिया नया मोड़

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बिहार के सिवान जिले में गोरियाकोठी थाना क्षेत्र के छितौली गांव के मुसहर टोला से कथित जहरीली शराब के कारण एक व्यक्ति की मौत और दूसरे के बीमार होने का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान 35 वर्षीय वीरेन्द्र सहनी (पश्चिम चंपारण निवासी) के रूप में हुई है, जबकि दूसरे व्यक्ति, देवा सहनी (कुशीनगर निवासी), की हालत नाजुक बनी हुई है।

ग्रामीणों के अनुसार, दोनों ने मुसहर टोला में कथित तौर पर शराब पी थी। इसके बाद वीरेंद्र सहनी की तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, देवा सहनी का इलाज जारी है।

गांव में शराब का अवैध कारोबार

छितौली गांव के मुखिया और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि मुसहर टोला में शराब का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। उनका कहना है कि यहां सैकड़ों मजदूर आते हैं, और हर घर में शराब बेची जाती है। ग्रामीणों का दावा है कि प्रशासन इस क्षेत्र में कभी सक्रिय नहीं रहता, जिससे इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।

प्रशासन का पक्ष

हालांकि, इस घटना पर सिवान एसपी अमितेश कुमार ने नई जानकारी दी। उन्होंने कहा, “पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की मौत सिर में गहरी चोट लगने से हुई है। हालांकि, वह शराब के नशे में था। मामले में संदेह के आधार पर जांच जारी है।”

एसपी ने कहा कि मृतक का शराब पीना संदेहजनक है और इस घटना को लेकर तरह-तरह की कहानियां बनाई जा रही हैं। मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त जांच का आदेश दिया है।

शराबबंदी पर सवाल

घटना ने बिहार में शराबबंदी की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां राज्य में शराबबंदी लागू है, वहां मुसहर टोला जैसे इलाकों में शराब का खुलेआम बिकना सरकार और प्रशासन की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

यह घटना न केवल अवैध शराब कारोबार के खतरों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि शराबबंदी के बावजूद, इस तरह के मामलों पर पूरी तरह नियंत्रण पाने में प्रशासन नाकाम रहा है।

लंदन से आए न्यूरो साइंटिस्ट ने महाकुंभ की भव्यता की सराहना, भारतीय चाय को बताया ‘सबसे बेहतरीन’

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प्रयागराज में चल रहे दिव्य और अलौकिक महाकुंभ मेले ने न केवल भारत, बल्कि विदेशों से आए लोगों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया है। लंदन से आए प्रसिद्ध न्यूरो साइंटिस्ट डॉक्टर इतिएल ड्रॉर ने महाकुंभ मेले और भारतीय संस्कृति की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

डॉ. ड्रॉर ने महाकुंभ को “भावनाओं और ऊर्जा का अतुल्य संगम” बताते हुए कहा कि यह आयोजन अद्वितीय है। उन्होंने भारतीय युवाओं की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने और उनकी ऊर्जा की प्रशंसा की। साथ ही, उन्होंने भारत की चाय को “दुनिया की सबसे बेहतरीन चाय” कहा, जो हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

डॉ. ड्रॉर ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद के समय भारत के साथ हुए अन्याय का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भारत की संपत्तियों का दुरुपयोग कर अपनी कॉलोनियों का विकास किया। इसके बावजूद आज भारत की संस्कृति और आध्यात्मिकता विश्व में सबसे अलग और अद्वितीय है।

उन्होंने कहा कि वह 60-70 से अधिक देशों में घूम चुके हैं, लेकिन भारत जैसा अनोखा और प्रेरणादायक देश उन्होंने कहीं नहीं देखा। महाकुंभ में अनुभव की गई दिव्यता और यहां के लोगों की गर्मजोशी ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।

ब्राह्मण समाज के लिए अनोखी पहल: चार बच्चों पर स्वर्ण, तीन पर रजत पदक

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गाजियाबाद: विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर ब्रह्मऋषि विभूति बीके शर्मा हनुमान ने ब्राह्मण समाज की जनसंख्या बढ़ाने के लिए एक अनोखी योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत विप्र (ब्राह्मण) समाज के उन परिवारों को विशेष सम्मान दिया जाएगा जो अधिक बच्चे पैदा करेंगे।

सम्मान और पुरस्कार:

  1. तीन बच्चे होने पर रजत (चांदी) पदक प्रदान किया जाएगा।
  2. चार बच्चे होने पर स्वर्ण (सोने) का पदक दिया जाएगा।
  3. महिलाओं को उनके स्वास्थ्य और पोषण के लिए काजू, बादाम, देसी घी और मखाने जैसी चीजें प्रदान की जाएंगी।

उद्देश्य और अपील:

बीके शर्मा हनुमान ने कहा कि ब्राह्मण समाज की जनसंख्या में गिरावट हो रही है, जो चिंताजनक है। उन्होंने अपील की कि परिवार बढ़ाने से न केवल ब्राह्मण समाज मजबूत होगा, बल्कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।

योजना का मकसद:

इस योजना का उद्देश्य ब्राह्मण परिवारों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करना है ताकि समाज की नई पीढ़ी अपना गोत्र, सूत्र, और संस्कारों की रक्षा कर सके। इसके साथ ही बच्चों को सही शिक्षा और प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया है।

निष्कर्ष:

बीके शर्मा हनुमान की यह पहल समाज में चर्चा का विषय बन गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस योजना को लेकर समाज में कैसी प्रतिक्रिया होती है।

मस्जिद में लाउडस्पीकर का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद में लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति के लिए दायर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों में पूजा या प्रार्थना के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग किसी का कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पूजा स्थल ईश्वर की आराधना के लिए होते हैं, और लाउडस्पीकर का उपयोग तभी उचित है जब वह आसपास के निवासियों के लिए परेशानी का कारण न बने।

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र और जस्टिस डोनादी रमेश की डिवीजन बेंच ने पीलीभीत निवासी मुख्तियार अहमद की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। सरकारी वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता न तो मस्जिद का मुतवल्ली है और न ही उसका मालिक।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि मई 2022 में दिए गए एक फैसले में कहा गया था कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर का उपयोग मौलिक अधिकार नहीं है। इस फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को कोई राहत देने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट के इस फैसले ने धार्मिक स्थलों में लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर कानूनी दृष्टिकोण को और स्पष्ट कर दिया है।

पटना के बीएन कॉलेज हॉस्टल में शराब पार्टी का भंडाफोड़, 5 छात्र गिरफ्तार

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पटना: गणतंत्र दिवस और सरस्वती पूजा से पहले पटना पुलिस ने बीएन कॉलेज हॉस्टल में छापेमारी कर पांच छात्रों को शराब पीते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से आधी बोतल विदेशी शराब भी बरामद की। पकड़े गए छात्रों ने पुलिस से माफी मांगते हुए कहा कि उनकी परीक्षा है और करियर बर्बाद हो जाएगा।

पुलिस ने शुक्रवार देर रात यह कार्रवाई सूचना मिलने पर की। छापेमारी के दौरान हॉस्टल में भगदड़ मच गई, हालांकि कुछ छात्र भागने में कामयाब रहे। गिरफ्तार छात्रों को पीरबहोर थाना ले जाया गया, जहां ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में शराब पीने की पुष्टि हुई।

टाउन डीएसपी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है। पुलिस ने जैक्सन और मिंटो हॉस्टल में भी तलाशी अभियान चलाया, लेकिन वहां से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।

इस घटना ने बीएन कॉलेज हॉस्टल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराब हॉस्टल में कैसे पहुंची और क्या इसके लिए हॉस्टल प्रबंधन जिम्मेदार है? पुलिस यह भी जांच कर रही है कि शराब की आपूर्ति किसने की और यह कहां से लाई गई थी।

पूर्व नक्सली संजय पोटाम तीसरी बार राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित, नक्सलियों को ढेर करने वाली महिला DSP अंजू कुमारी भी होंगी सम्मानित

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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सरेंडर नक्सली से पुलिस अधिकारी बने संजय पोटाम को तीसरी बार राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया जा रहा है। पहले नक्सली संगठन के सदस्य रहे संजय ने 2013 में दंतेवाड़ा पुलिस के सामने सरेंडर किया था और इसके बाद कई नक्सलियों को ढेर करने और सरेंडर करवाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी पुख्ता सूचनाओं और साहसिक कार्यों के चलते यह सम्मान उन्हें तीसरी बार मिला है।

इस सूची में दंतेवाड़ा की महिला डीएसपी अंजू कुमारी का नाम भी शामिल है। उन्होंने 18 दिसंबर 2021 को पोटाली के जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान का नेतृत्व करते हुए अदम्य साहस दिखाया और दो सशस्त्र नक्सलियों को मार गिराया। डीआरजी टीम को लीड करते हुए उनके योगदान को गणतंत्र दिवस 2025 के अवसर पर सराहा गया है।

दंतेवाड़ा जिले से कुल 9 पुलिस अफसरों और कर्मचारियों को राष्ट्रपति वीरता पदक से नवाजा जा रहा है। इसमें डीएसपी अंजू कुमारी, निरीक्षक संजय पोटाम, उप निरीक्षक चैतराम गुरूपंच, हेड कांस्टेबल हेमला नंदू, प्यारस मिंज, कमलेश मरकाम, कांस्टेबल मनोज पुनेम, और मरणोपरांत प्रधान आरक्षक बुधराम कोरसा शामिल हैं।

दंतेवाड़ा एसपी गौरव रॉय और एएसपी आरके बर्मन ने कहा कि यह गणतंत्र दिवस दंतेवाड़ा पुलिस के लिए गर्व का क्षण है। सुरक्षा बलों की वीरता ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई है।

Republic Day 2025: दुमका के पुलिस लाइन मैदान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तिरंगा फहराया

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दुमका: झारखंड की उपराजधानी दुमका में गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह पुलिस लाइन मैदान में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तिरंगा फहराया और परेड का निरीक्षण किया। इस अवसर पर रंगारंग झांकियां निकाली गईं, जिसमें राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और विकास योजनाओं की झलक देखने को मिली।

गणतंत्र दिवस समारोह के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया और कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समारोह में भाग लेने के लिए एक दिन पहले ही दुमका पहुंचे थे।

गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने दुमका में वन विभाग के एक गेस्ट हाउस का उद्घाटन भी किया। इस ऐतिहासिक दिन पर कई गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति ने समारोह को और अधिक भव्य बना दिया।

झारखंड में 76वां गणतंत्र दिवस: मोरहाबादी मैदान में राज्यपाल संतोष गंगवार ने किया झंडोत्तोलन

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रांची: झारखंड में गणतंत्र दिवस के अवसर पर हर्षोल्लास का माहौल है। मुख्य समारोह राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित किया गया। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने तिरंगा फहराया और परेड की सलामी ली। समारोह में कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं।

76वें गणतंत्र दिवस के मौके पर बंगाल पुलिस की बटालियन ने भी परेड में हिस्सा लिया। विभिन्न विभागों की आकर्षक झांकियां प्रदर्शित की गईं, जिनमें राज्य की सांस्कृतिक और विकास योजनाओं की झलक देखने को मिली।

समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। मोरहाबादी मैदान को किले में तब्दील कर दिया गया और हर कोने पर पुलिस बल तैनात किया गया। ट्रैफिक रूट में भी बदलाव किया गया ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।