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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थाई सदस्यता देना ही होगा

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उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को तीसरी बार संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की 75वीं बैठक को संबोधित किया। उन्होंने दुनिया के देशों को कहा कि भारत सैकड़ों वर्षों तक विश्व का नेतृत्व करता रहा और सैकड़ों साल तक गुलाम रहा। जब हम मजबूत थे तो सताया नहीं, जब मजबूर थे तो बोझ नहीं बने।

सबसे बड़े लोकतंत्र, 18 फीसदी आबादी और चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था को नजरअंदाज नहीं कर सकते 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थाई सदस्यता देने के मामले पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कब तक इंतजार करता रहेगा। अगर आप दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र,  दुनिया की 18 फीसदी आबादी और विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जगह नहीं देना चाहते तो दुनिया आपसे सवाल करेगी, हमसे नहीं । जवाब आपको देना है, हमें नहीं । 

भारत को जगह दिए बिना सुरक्षा परिषद की प्रासंगिकता पर सवाल 

मोदी ने कहा- 1945 की दुनिया आज से एकदम अलग थी। साधन, संसाधन सब अलग थे। ऐसे में विश्व कल्याण की भावना के साथ जिस संस्था का गठन हुआ, वो भी उस समय के हिसाब से ही थी। आज हम बिल्कुल अलग दौर में हैं। 21वीं सदी में हमारे वर्तमान की, भविष्य की आवश्यकताएं और चुनौतियां अलग हैं। आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थतियों में हुआ था, वह आज भी प्रासंगिक है। सब बदल जाए और हम ना बदलें तो बदलाव लाने की ताकत भी कमजोर हो जाती है।

 यूएन के प्रयासों पर सवाल: 

75 साल में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों को मूल्यांकन करें, तो तमाम उपलब्धियां हैं। लेकिन, कई उदाहरण हैं, जो गंभीर आत्ममंथन की आ‌वश्यकता खड़ी करते हैं। कहने को तो तृतीय विश्वयुद्ध नहीं हुआ। पर अनेकों युद्ध हुए, गृह युद्ध हुए, आतंकी हमलों ने दुनिया को थर्रा कर रख दिया, खून की नदियां बहती रहीं। इन हमलों में जो मारे गए, वो हमारे आपकी तरह इंसान ही थे। वो लाखों मासूम बच्चे, जिन्हें दुनिया पर छा जाना था, वो दुनिया छोड़कर चले गए। कितने ही लोगों को अपने जीवन भर की पूंजी गंवानी पड़ी, घर छोड़ना पड़ा। आज ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे। कोरोना से दुनिया 8-9 महीने से संघर्ष कर रहा है। इस महामारी से निबटने के लिए संयुक्त राष्ट्र का प्रभावशाली नेतृत्व कहां था ?

 यूएन की रिफॉर्म की प्रॉसेस और भारत की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था, प्रक्रिया में बदलाव आज समय की मांग है। भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र के रिफॉर्म को लेकर चल रही प्रॉसेस के पूरा होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। आखिर कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के डिसीजन मेकिंग स्ट्रक्चर से अलग रखा जाएगा। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, विश्व की 18 फीसदी से ज्यादा जनसंख्या, सैकड़ों भाषाओं-बोलियों, अनेकों पंथ, अनेकों विचारधारा वाला देश। जो देश वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व सैकड़ों वर्षों तक करता रहा और सैकड़ों साल तक गुलाम रहा। जब हम मजबूत थे तो सताया नहीं, जब मजबूर थे तो बोझ नहीं बने।

भारत संयुक्त राष्ट्र में अपनी भूमिका को देख रहा है 

जिन आदर्शों के साथ संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ, उससे भारत की दार्शनिक सोच बहुत मिलती है। इसी हॉल में ये शब्द अनेकों बार गूंजा है कि वसुधैव कुटुंबकम। हम पूरे विश्व को परिवार मानते हैं। ये हमारी संस्कृति, संस्कार और सोच का हिस्सा है। भारत ने हमेशा विश्वकल्याण को ही प्राथमिकता दी है। हमने शांति की स्थापना के लिए 50 पीस कीपिंग मिशन में अपने जांबाज भेजे। हमने शांति की स्थापना में अपने सबसे ज्यादा वीर सैनिकों को खोया है। आज हर भारतवासी संयुक्त राष्ट्र में अपने योगदान, भूमिका को देख रहा है।

 कोरोना के मुश्किल समय में भारत ने 150 देशों को दवाएं भेजी

 महामारी के मुश्किल समय में भी भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने 150 देशों को दवाइयां भेजी हैं। आज मैं आज वैश्विक समुदाय को एक और आश्वासन देना चाहता हूं कि भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और डिलिवरी की क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के काम आएगी। हम भारत में और अपने पड़ोस में फेज थ्री क्लीनिकल ट्रायल पर बढ़ रहे हैं। वैक्सीन की डिलिवरी के लिए कोल्ड चेन और स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने में भारत सभी की मदद करेगा।

स्थायी सदस्य के तौर पर जिम्मेदारी निभाएगा भारत

अगले साल जनवरी से भारत सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने की प्रतिष्ठा और इसके अनुभव को हम विश्व हित के लिए इस्तेमाल करेंगे। हमारा मार्ग जनकल्याण से जगकल्याण का है। भारत की आवाज हमेशा शांति सुरक्षा और समृद्धि के लिए उठेगी। भारत की आवाज मानवता, मानवजाति और आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ रही है।

 भारत ने अपने नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव किया

4-5 साल में 400 मिलियन से ज्यादा लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना, सिर्फ 4-5 साल में 600 मिलियन लोगों को खुले में शौच से मुक्त करना, 2-3 साल में 500 मिलियन से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज से जोड़ना आसान नहीं था, पर हमने कर के दिखाया।

सब बदले, हम न बदलें तो बदलाव की ताकत कमजोर होती है: 

1945 की दुनिया आज से एकदम अलग थी। साधन, संसाधन सब अलग था। ऐसे में विश्व कल्याण की भावना के साथ जिस संस्था का गठन हुआ, वो भी उस समय के हिसाब से ही थी। आज हम बिल्कुल अलग दौर में हैं। 21वीं सदी में हमारे वर्तमान की, भविष्य की आवश्यकताएं और चुनौतियां अलग हैं। आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थितियों में हुआ था, वह आज भी प्रासंगिक है। सब बदल जाए और हम ना बदलें तो बदलाव लाने की ताकत भी कमजोर हो जाती है।

तलाकशुदा महिला का आठ साल तक करता रहा यौन शोषण, अब उसके बच्चे पर बुरी नजर

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उज्ज्वल दुनिया /रांची:पटना एम्स में तैनात तलाकशुदा महिला के बच्चे को जान से मारने की धमकी देकर पिछले 8 वर्षों से उससे शारीरिक संबंध बनाने साथ ही बच्चे के साथ भी रेप का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित महिला के द्वारा रांची के चुटिया थाने में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की खबर है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ कर गहनता से छानबीन की जा रही है।

]पीड़ित महिला के आरोपों के अनुसार संजीव कुमार करीब 8 साल से उसके साथ नजदीकियां बढ़ाते हुए जबरन शारीरिक संबंध बना रहा था। आरोपित ने महिला के बच्चे को जान से मारने की धमकी देकर उसको अपने हवस का शिकार बनाया है। पीड़िता के मुताबिक आरोपित की नजर उसकी संपत्ति पर थी और उसी वजह से वह उससे शादी करना चाहता था और मना करने पर उसके बच्चे के साथ मारपीट करता था। जबरदस्ती महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाता था।
महिला ने कहा कि आरोपित संजीव कुमार ने उसको और उसके बच्चे को जबरदस्ती 24 सितंबर को पटना से रांची लाया।उसे पटना से रांची स्थित एक होटल में ले आया फिर उसके साथ गलत काम किया।

पीड़िता का बयान है कि उसे डरा धमका कर उसके पैसे से ऐश करता था। बच्चे को जान से मारने की धमकी देकर पीड़िता के एटीएम कार्ड भी ले लिया है। पीड़िता के अनुसार, एक माह पहले आरोपी ने जबरन उसे डरा धमका कर रजिस्ट्री ऑफिस में शादी करने के लिए आवेदन दिया था। जब पीड़िता ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया तो वह पटना आ गया। फिर आरोपी संजीव कुमार ने उसे और उसके बेटे को जबरन रांची ले गया और उससे रेप भी किया।

जेपी नड्डा की नई टीम में रघुवर दास और अन्नपूर्णा देवी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

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समीर उरावं अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए 

उज्ज्वल दुनिया /नई दिल्ली ।  भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शनिवार को राष्ट्रीय टीम घोषित कर दी। राष्ट्रीय महासचिव पद से राम माधव, पी मुरलीधर राव, सरोज पांडेय और अनिल जैन की जगह नए चेहरों को मौका दिया गया है। जेपी नड्डा की टीम में कुल 12 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आठ राष्ट्रीय महासचिव, 13 राष्ट्रीय सचिव और 23 राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए गए हैं।
ये बने राष्ट्रीय उपाध्यक्षडॉ. रमन सिंह, वसुंधरा राजे सिंधिया, राधा मोहन सिंह, बैजयंत जय पांडा, रघुबर दास, मुकुल रॉय, रेखा वर्मा, अन्नपूर्णा देवी, डॉ. भारती बेन शियाल, डीके अरुणा, एम चौबा एओ, अब्दुल्ला कुट्टी

ये बने राष्ट्रीय महामंत्री

भूपेंद्र यादव, अरुण सिंह, कैलाश विजयवर्गीय, दुष्यंत कुमार गौतम, डी पुरुन्देश्वरी, सीटी रवि, तरुण चुग, दिलीप सैकिया

ये बने राष्ट्रीय मंत्री

विनोद तावड़े, विनोद सोनकर, विश्वेश्वर टुडू, सत्या कुमार, सुनील देवधर, अरविंद मेनन, हरीश द्विवेदी, पंकजा मुंडे, ओम प्रकाश ध्रुवे, अनुपम हाजरा, डॉ. नरेंद्र सिंह, विजया रहाटकर, डॉ. अलका गुर्जर

ये बने राष्ट्रीय प्रवक्ता

अनिल बलूनी, संजय मयूख, संबित पात्रा, सुधांशु त्रिवेदी, शाहनवाज हुसैन, राजीव प्रताप रूडी, नलिन एस कोहली, राजीव चंद्रशेखर, गौरव भाटिया, जफर इस्लाम, टॉम वडक्कन, संजू वर्मा, गोपाल कृष्ण अग्रवाल, इकबाल सिंह लालपुरा, सरदार आरपी सिंह, राज्यवर्धन सिंह राठौर, अपराजिता सारंगी, हिना गावित, गुरुप्रकाश, मम्होनलुमो किकन, नुपूर शर्मा, राजू बिष्ट, केके शर्मा

अन्य पदों पर हुई नियुक्तियां

बीएल संतोष राष्ट्रीय महासचिव संगठन पद पर बरकरार रहेंगे। उनके साथ राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी सतीश, सौदान सिंह और शिव प्रकाश का भी पद बरकरार है। बीजेपी आईटी सेल हेड पद पर अमित मालवीय भी बरकरार हैं। तेजस्वी सूर्या को भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। ओबीसी मोर्चा का अध्यक्ष डॉ. के लक्ष्मण और किसान मोर्चा का अध्यक्ष राजकुमार चाहर और अनुसूचित जाति मोर्चा का लाल सिंह आर्य और अनुसूचित जनजाति का समीर ओरांव को अध्यक्ष बनाया गया है। जमाल सिद्दीकी को अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। कोषाध्यक्ष पद पर राजेश अग्रवाल की नियुक्ति हुई है।

स्वच्छ भारत में अस्वच्छ बॉलीवुड का क्या काम: केंद्रीय मंत्री

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जोधपुर । बॉलीवुड में चल रहे अवैध ड्रग्स मामले को लेकर गोरखपुर से सांसद और मशहूर अभिनेता रवि किशन ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की। शेखावत ने कहा कि स्वच्छ भारत में अस्वच्छ बॉलीवुड का कोई काम नहीं है। 

शेखावत ने कहा कि सांसद रवि किशन द्वारा बॉलीवुड में चल रहे अवैध ड्रग्स मामले को लेकर संसद में उठाए गए गंभीर मुद्दे ने देश का ध्यान आकर्षित किया है। हमारी युवा पीढ़ी बॉलीवुड के कलाकारों से प्रभावित रहती है, ऐसे में सांसद रवि किशन द्वारा कलाकारों की साफ छवि को लेकर देश की संसद में चिंता व्यक्त करना सराहनीय है। शेखावत ने कहा कि मैं सांसद रवि किशन को इस अत्यावश्यक विषय पर पहल करने की बधाई देता हूं। पिछले दिनों शेखावत ने ट्वीट करके अभिनेत्री कंगना रनौत का समर्थन भी किया था। उन्होंने कहा था कि जहां हमारी सरकार देश के लोगों को स्वच्छ भारत देने के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं वास्तव में नशा मुक्त स्वच्छ भारत को प्राप्त करने के लिए हमें राष्ट्र के हर कोने में पद्मश्री कंगना रनौत जैसे साहसी और राष्ट्रवादी लोगों की आवश्यकता है।

पठानकोट सेक्टर से सेना ने पकड़ा पाकिस्तानी कबूतर

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चंडीगढ़ । भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित बमियाल सेक्टर में शनिवार सुबह एक पाकिस्तानी कबूतर संदिग्ध हालत में पकड़ा गया है। पठानकोट जिला लंबे समय से पाकिस्तानी आतंकियों के निशाने पर है। पाकिस्तानी कबूतर पर सियालकोट की मोहर लगी हुई है। दावा किया जा रहा है कि बीएसएफ ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है।बुधवार रात भी इस तरह का घटनाक्रम हो चुका है। गश्त के दौरान बीएसएफ ने टिंडा फारवर्ड पोस्ट के पास पाकिस्तान की तरफ से आए लाइट लगे गुब्बारे पकड़े थे। शनिवार को हुए घटनाक्रम के बारे में पठानकोट के एसपी ऑपरेशन हेमपुष्प शर्मा ने बताया कि एक कबूतर बार-बार एरिया में चक्कर काट रहा था। इसे देखकर बीएसएफ के जवान सतर्क हो गए और उन्होंने उसे पकड़ लिया। कबूतर की जांच करने पर पाया गया कि यह पाकिस्तान की तरफ से भेजा गया है। प्रारंभिक जांच के मुताबिक इसके पंखों पर सियालकोट ग्रुप के नाम की मुहर लगी हुई है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा यह जांच की जा रही है कि कबूतर में किसी तरह की चिप या डिवाइस तो नहीं लगी है। कबूतर को स्कैन किया जा रहा है। इसके अलावा कबूतर की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।

एनसीबी ने साढ़े 5 घंटे तक किया फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण से पूछताछ

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सारा अली खान, श्रद्धा कपूर से पूछताछ जारी

मुंबई, 26 सितंबर (हि.स.)।  सुशांत सिंह मौत प्रकरण में ड्रग्स एंगल की छानबीन में शनिवार को नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण से साढ़े 5 घंटे तक गहन पूछताछ की है। लेकिन एनसीबी दीपिका से पूछताछ से संतुष्ट नहीं हुई है, इसलिए फिर से उनको बुला सकती है। इसी मामले में फिल्म अभिनेत्री श्रद्धा कपूर, सारा अली खान और प्रियंका प्रकाश से एनसीबी की पूछताछ जारी है। एनसीबी ने इन सबका मोबाइल फोन बरामद कर लिया है।  सुशांत सिंह मौत मामले में ड्रग्स एंगल की जांच कर रही एनसीबी ने सबसे पहले फिल्म अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को चैट के आधार पर गिरफ्तार किया था। रिया से पूछताछ ने बाद एनसीबी ने इस मामले में क्वान टैलेंट कंपनी की मैनेजर जया साहा से पूछताछ किया था। जया साहा ने दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर के नाम एनसीबी को बताए थे। जया साहा ने ड्रग संबंधी मोबाइल चैट भी एनसीबी को सबूत के दौर पर दिया। इस चैट ग्रुप की एडमिन दीपिका पादुकोण थीं। इतने सबूत मिलने के बाद शनिवार को एनसीबी ने दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, श्रद्धा कपूर और करिश्मा प्रकाश को छानबीन के लिए बुलाया था। सूत्रों के अनुसार दीपिका ने पूछताछ में व्हाट्सअप ग्रुप की बात स्वीकार कर ली है। दीपिका ने एनसीबी को बताया कि चैट में प्रयुक्त माल शब्द का मतलब ड्रग नहीं है, वह सिगरेट की बात कर रही थीं। इसी तरह उन्होंने कभी भी ड्रग न लेने की बात एनसीबी को बताया है। पूछताछ करते समय एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर के.पी.एस.मलहोत्रा खुद उपस्थित थे। एनसीबी ने दीपिका से दर्जनों सवाल किए लेकिन दीपिका ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। एनसीबी की टीम फिल्म अभिनेत्री सारा अली खान, श्रद्धा कपूर व करिश्मा प्रकाश से पूछताछ कर रही है। सारा अली खान ने बताया कि वह सुशांत सिंह के साथ लिव इन रिलेशन में थीं। सारा ने एनसीबी को बताया कि वह सुशांत के साथ थाईलैंड गई थीं और सुशांत शुटिंग के दौरान ड्रग का सेवन करते थे। एनसीबी की पूछताछ अब भी जारी है। 

आरोप

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कोलकाता, बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार दुर्गा पूजा समितियों को वित्तीय सहायता देने की घोषणा कर ‘‘घूस’’ देने का प्रयास कर रही है । उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस इन घोषणाओं के जरिए खुद को भाजपा की तुलना में ‘‘हिंदुत्व के बड़े पैराकार’’ की तरह पेश करना चाहती है।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता व बहरामपुर से सांसद चौधरी ने कहा कि भाजपा के साथ हिंदुत्व के लिए होड़ में उतरने के बजाए राज्य सरकार को रोजगार सृजन और उद्योगों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘कल हमने देखा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दुर्गा पूजा समितियों को 50,000 रुपये तथा अन्य सौगात देने की घोषणा की। इससे पहले इमामों और मुअज्जिनों को भत्ता देकर राज्य सरकार ने खुद को मुस्लिमों का मसीहा घोषित करने का प्रयास किया।’’

कांस्टेबल ने की खुदकुशी

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रादाबाद । मुरादाबाद के पुलिस लाइन में एक हेड कांस्टेबल ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली और मौत को गले लगा लिया। 42 साल के मजहर हुसैन ने 10 दिनों की छुट्टी के बाद बुधवार को ड्यूटी ज्वाइन की थी। गुरुवार को उन्होंने खुदकुशी कर ली।

घटना के समय मौजूद एक अन्य हेड कांस्टेबल पीतांबर सिंह ने कहा, मैं ड्यूटी से लौटा ही था और अपने दोपहर के भोजन के बाद बैरक में लेट गया। मजहर भी कुछ ही मीटर की दूरी पर अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था। अचानक मुझे एक बंदूक की आवाज सुनाई दी। शुरू में मुझे लगा कि यह कांच के टूटने की आवाज थी, लेकिन जब मैंने करीब से देखा तो पता चला कि हुसैन खून से लथपथ हैं।

आईजी (मुरादाबाद रेंज) रमित शर्मा, एसएसपी प्रभाकर चौधरी और पुलिस अधीक्षक (शहर) अमित कुमार आनंद सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए। ये सभी पुलिस लाइंस में एक बैठक में मौजूद थे।

आईजी रमित शर्मा ने कहा, फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए हैं। परिवार को सूचित कर दिया गया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उस समय मौजूद अन्य पुलिस कर्मियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं जिन्होंने मौत से पहले हुसैन से बात की थी।

हुसैन बरेली के रहने वाले थे, जबकि उनका परिवार पीलीभीत में रहता था। हुसैन पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं।

महिला अपराध पर योगी सरकार सख्त

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफबढ़ रहे अपराधों के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काफी सख्ती दिखाई है। उन्होंने महिलाओं, बच्चियों से छेड़खानी, दुर्व्यहार, अपराध और यौन अपराध में लिप्त अपराधियों के पोस्टर शहर के सार्वजनिक स्थानों पर लगाने का आदेश दिया है, ताकि ऐसे लोगों को समाज के सामने लाकर शर्मिदा किया जा सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद अब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वाले उपद्रवियों के पोस्टर की तरह ही मनचलों, शोहदों और दुराचारियों के पोस्टर पूरे शहर में लगेंगे।

इस आदेश के तहत अब महिलाओं से दुर्व्यवहार करने वालों को महिला पुलिसकर्मियों से ही दंडित कराया जाएगा। सरकार का कहना है कि ऐसा कदम इसलिए उठाया जा रहा है, ताकि महिलाओं व बच्चियों से बुरा व्यवहार करने वालों को पूरा समाज जान सके।

सरकार का मकसद है कि दुराचियों के नाम व पहचान उजागर की जाए। सरकार का दावा है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए एंटी-रोमियो स्क्वायड ने बेहतरीन काम किया है। स्क्वायड ने मनचलों और महिलाओं के साथ अपराध करने वालों की कमर तोड़ दी है। वैसे ही राज्य के हर जिले की पुलिस अभियान चलाती रहे।

पत्रकारिता का मौजूदा स्वरूप मालिक के संपादक बनने की वजह : केएन गोविंदाचार्य

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राजीव मिश्र (हिन्दुस्तान समाचार)

पटना, 26 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक, राष्ट्रीय चिंतक और विचारक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि पत्रकारिता का मौजूदा स्वरूप मालिक के संपादक बनने की वजह है। टीवी पत्रकारिता में कंटेंट का अभाव और आवाज पर जोर है। इससे उसकी विश्वसनीयता कमजोर हुई है। लेकिन, आज भी प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता ज्यादा है और उसे बनाये रखने की जरूरत है।

प्रतियोगिता के दौर में आपाधापी बढ़ी है। इससे तथ्य कमजोर हो गये हैं या कह सकते हैं गुम हो गये हैं। उन्होंने कहा कि भावना से शहीद हुआ जा सकता है, पर विजयी नहीं। विजयी होने के लिए संयम और धैर्य की जरूरत है और यह हर क्षेत्र में लागू होता है। शुक्रवार की शाम वे हिन्दुस्थान समाचार के दफ्तर में अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे।

अपने अध्ययन अवकाश के 20 साल पूरा होने पर गंगा किनारे अध्ययन यात्रा पर निकले राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक, राष्ट्रीय चिंतक और विचारक केएन गोविंदाचार्य बक्सर, आरा होते हुए पटना पहुंचे। उन्होंने बताया कि अध्ययन यात्रा पर निकलने का उद्देश्य 20 वर्ष पूर्व की गई यात्रा के परिपेक्ष्य में वर्तमान समय को देखना और दर्ज करना है। पटना से मुंगेर, भागलपुर, साहेबगंज, फरक्का होते हुए उनकी यात्रा संपन्न होगी।

गोविंदाचार्य ने कहा कि संस्कार से देश का विकास होगा। बिना संस्कारों के भारत का निर्माण नहीं कर सकते हैं। गंगा जी और गौमाता की चिंता किए बगैर स्वदेशी विकास संभव नहीं है। यहां की परंपरा और कृषि को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि नक्सली, वामपंथी जैसी ताकतें नये सिरे से एकजुट होने का प्रयास कर रही हैं और देश को अस्थिर करने के फिराक में हैं।

तीन तलाक, अनुच्छेद 370 समाप्त करना नरेंद्र मोदी सरकार के सांस्कृतिक और साहसिक कदम

गोविंदाचार्य ने कहा कि तीन तलाक और अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के अलावा राम मंदिर, नई शिक्षा नीति ये कुछ बड़े काम हुए हैं। इसके बारे में पहले सिर्फ चर्चा हुआ करती थी, लेकिन अब बदलाव हुए हैं। इससे उत्साह है। यह नरेंद्र मोदी सरकार का सांस्कृतिक और साहसिक कदम है। इससे देश का आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का आत्मनिर्भर भारत का संकल्प अच्छा है।

अलविदा एसपी बालासुब्रमण्यम…

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देवांशु झा की कलम से…..

तब वह आवाज़ नयी थी मेरे लिए। परंतु वह अंदाज़ नया नहीं था। मैं मानता था कि गायक के ऊपर मुहम्मद रफ़ी की शैली का बहुत प्रभाव है। यह बात अस्सी के उत्तरार्द्ध और नब्बे के पूर्वार्द्ध की है। मेरा आकलन सही था। एसपीबी एक बार सारेगामा में जज बनकर आए। करीब बाईस-तेईस साल पुरानी घटना है। तब उन्होंने सोनू के यह पूछे जाने पर कि वह अपना आदर्श किसे मानते हैं या किसका गायन उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करता है? एसपीबी ने तत्क्षण कहा था; नन अदर देन रफ़ी! मैं घर बैठे वह शो देखकर मंद-मंद मुस्कुरा रहा था।(वह वीडियो अब भी मौजूद है) फिर उन्होंने दीवाना हुआ बादल को सुने जाने का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया और गाकर भी बताया कि वह क्यों रफ़ी के बड़े प्रशंसक थे।

एसपीबी एक जटिल गायक हैं। उनकी आवाज़ अधिकतर मौकों पर बहुत तीखी सुनाई देती है। वह अपने पिच से स्वाभाविक रूप से ऊपर गाते हैं और बहुत ऊपर ले जाते हैं परंतु नीचे के स्वरों को गाते हुए आश्चर्यजनक रूप से मधुर भी हो जाते हैं। वह एक खिलाड़ी गायक रहे जिन्हें शब्दों से खेलना, उसे कतिपय नाटकीयता से मंडित करना मोहता था। वह इस कला के महारथी थे। निस्संदेह रफ़ी के बाद इस कला के सबसे बड़े महारथी। ध्यान रहे मैं पुरुष गायकों की बात कर रहा हूं।

एसपीबी ने हिन्दी में कम ही गाने गाए। लेकिन जो कुछ भी गाकर वह गए, सब स्मृति में रह गया। हिन्दी पट्टी में वह सागर और एक दूजे के लिए.. से जाने गए। एक दूजे के लिए फिल्म में उन्होंने तेरे मेरे बीच में..बहुत बढ़िया गाया। जिसे स्वयं लता विलक्षण गा चुकी हैं। फिर सागर फिल्म के गाने यादगार हैं। इसके बाद वह बहुत सुनाई नहीं पड़ते। तब हिन्दी में रफ़ी और किशोर की कमी ऐतिहासिक रूप असह्य आवाज़ के स्वामियों शब्बीर और अज़ीज़ से पूरी की गई थी। यह एक पहेली ही है मेरे लिए कि उन घटिया गायकों को क्यों उतने गाने मिले? एसपीबी  हिन्दी में फिर सलमान की फिल्मों के साथ लौटे। और वहां भी कुछ कर्णप्रिय गाने उनके नाम दर्ज हैं। गर्दिश आदि में भी उनका गाया हुआ बहुत अच्छा है।

एक किस्सा है कि पंचम ने उन्हें एक कठिन गाना दिया। एसपीबी ने कहा कि अरे यह तो बहुत मुश्किल है, मैं कैसे गाऊंगा? पंचम ने अपने अंदाज़ में मीठी गाली देते हुए कहा; इसीलिए तो तुम्हें इतनी दूर मद्रास से यहां बुलवाया क्योंकि तुम ही गा सकते हो! निश्चय ही एसपीबीएस ऊपर नीचे को बहुत सफलता से बांधते थे।

वह दक्षिण के सिने संसार के अधिपति गायक रहे। उन्होंने सबसे बड़े सितारों के लिए गाने गाए। तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सभी भाषाओं को स्वर दिया। सबसे जटिल, सबसे नाटकीय और सबसे लोकप्रिय गाने उनके ही हिस्से में आए। एसपीबी का जादू कुछ ऐसा चला कि हर दौर का बड़ा और प्रतिभाशाली गायक अपना श्रेष्ठ देने से रह गया। उसके हिस्से का कुछ अच्छा गायन भी एसपीबी के हिस्से में चला गया। जो कि अच्छा नहीं हुआ! 

दक्षिण के लोक की आवाज़ है एसपीबीएस। वह आवाज़ येसुदास की नहीं है। येसुदास की आवाज़ पवित्र है। एसपीबीएस की आवाज़ दक्षिण के अत्यंत भावप्रधान सिनेमाई दृश्यों, क्षण-प्रतिक्षण बदलते बिम्बों और संवेदनाओं के अनुरूप है। उस आवाज़ को मैं येसुदास के शुद्ध स्वर के समकक्ष तो नहीं रख सकूंगा लेकिन यथेष्ट आदर के साथ याद रखूंगा। जहां तक मैं समझता हूं वह एक भद्र मनुष्य भी थे। उनके चेहरे पर बिखरी पीली हंसी इसका सबूत देती है। 

मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि उनके गायन का सबसे अच्छा समय जा चुका था। अब वह कोई विशिष्ट गायन करते ऐसा नहीं! वह एक पार्श्वगायक के रूप में निचोड़े जा चुके थे। उस बुढ़ाते कंठ से अब कुछ नया टपकना तो संभव नहीं था किन्तु उन्हें कुछ वर्ष और रहना था। उनका होना नए गायकों और संगीत की संस्कृति के लिए प्रेरणादायी होता। वह एक ईमानदार गुरु और शिक्षक भी थे। उन्होंने भरा-पूरा, समृद्ध जीवन जिया। सम्मान और प्रेम के शिखर पर रहे। ईश्वर उन्हें अपनी शरण में लें!

मोदी सरकार राज्यों के खिलाफ कर रही गुंडागर्दी

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नये तरह की महाजनी प्रथा की शुरुआत कर रही है मोदी सरकार 

उज्ज्वल दुनिया/रांची । सीएम हेमंत सोरेन ने किसान बिल के बहाने केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का रवैया तानाशाही और गुंडागर्दी वाला है । वे बातें तो को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म की करते हैं,  लेकिन उनके काम करने का तरीका नन- को-ऑपरेटिव वाला है । हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र के विषय पर मोदी सरकार मनमाना फैसला ले रही है , लेकिन जो विषय राज्यों और केन्द्र दोनों को मिलकर लेना है, उसपर भी दिल्ली की तानाशाह सरकार खुद ही निर्णय ले रही है ।

नये तरह की महाजनी प्रथा शुरू कर रही है मोदी सरकार 

हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड गठन का आंदोलन महाजनी प्रथा के खिलाफ भी था । लेकिन आज जो हालात बन रहे हैं उससे तो यही लग रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार एक नये तरह की महाजनी प्रथा की शुरुआत कर रही है । उदाहरण के लिए हेमंत सोरेन ने किसान बिल का हवाला दिया । 

मंगरा उरावं अंबानी और अडानी के खिलाफ केस लड़ सकेगा क्या? 

सीएम हेमंत सोरेन ने एक काल्पनिक नाम मंगरा उरावं का उदाहरण दिया । उन्होंने पूछा कि झारखंड का एक छोटा किसान मंगरा उरावं  अंबानी और अडानी जैसे कॉर्पोरेट के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए एग्रीमेंट साइन करता है । मान लिया कि कंपनी ने एग्रीमेंट की शर्तों को तोड़ दिया । या किसान को पैसे नहीं दिए ? ऐसे में मंगरा न्याय के लिए कहां जाएगा । क्या वो कंपनी के खिलाफ़ कोर्ट में लड़ सकेगा?  हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाते-जाते उसका चप्पल घिस जाएगा । उसे मिलेगी तो सिर्फ तारीख पर तारीख । किसान बिल में ये क्यों नहीं लिखा है कि किसान को हर हाल में एमएसपी से ज्यादा पैसा मिलेगा? 

दूसरी बार सत्ता पाते ही मोदीजी ने इरादे साफ कर दिए थे 

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि दूसरी बार सत्ता मिलते ही नरेन्द्र मोदी ने संसद में एक लंबा-चौड़ा भाषण दिया था । उसमें उन्होंने कहा था कि बड़े रिफॉर्म के लिए तैयार रहिए । उसमें उन्होंने साफ कहा था कि कृषि , मजदूर सभी उनके निशाने पर हैं । लेबर कानून, किसान बिल उसी की एक कड़ी है । हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड का किसान पंजाब के किसान से अलग है । गुजरात का किसान बंगाल के किसान से अलग है । उनकी जरूरतें अलग है। लेकिन मोदी सरकार ने तो किसी भी राज्य की सरकार से बात करना तक जरुरी नहीं समझा । उन्होंने तो किसानों तक से बात नहीं की । अब हर रोज आकर सफाई दे रहे हैं । खुद को किसानों का हितैषी बता रहे हैं । 

2014 से जो बीजेपी के पार्टनर थे, उनपर फैसला बीजेपी को ही करना है

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कुशवाहा और चिराग पासवान पर सवाल पूछने पर नीतीश ने कहा

उज्ज्वल दुनिया/पटना। विधानसभा चुनाव की घोषणा भले ही हो गई हो लेकिन एनडीए में सीट बंटवारे पर अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह साफ कर दिया है कि एनडीए में सीटों के तालमेल पर कोई बातचीत नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह सच्चाई है कि एनडीए में अब तक सीट बंटवारे पर कोई बातचीत नहीं हुई है । मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद उन कयासों पर विराम लग गया है, जो लगातार फार्मूले के बिनाह पर सीट बांटने का दावा कर रहे थे।

इतना ही नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए के सहयोगी दलों को लेकर भी साफ शब्दों में अपनी राय जाहिर की है । मुख्यमंत्री ने कहा है कि एनडीए में 2014 से जो बीजेपी के पार्टनर रहे हैं, उन पर फैसला भारतीय जनता पार्टी को करना है । नीतीश कुमार ने कहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले जो बीजेपी का साथ छोड़ कर चले गए और जो रह गए दोनों के ऊपर बीजेपी को ही फैसला करना है।

यह पूछे जाने पर कि क्या जीतन राम मांझी की एंट्री के बाद उन्हें रामविलास पासवान की जरूरत नहीं है । नीतीश कुमार ने कहा कि ऐसा नहीं है । उन्हें बीजेपी के पूर्व से सहयोगी रहे दलों के ऊपर कुछ भी नहीं कहना है । बीजेपी इस मामले को खुद से देख रही होगी और संभव है कि उनसे बातचीत भी हुई होगी।

नीतीश कुमार ने कहा है कि अगर वह सत्ता में दोबारा आएं तो एक बार फिर से बिहार के विकास को आगे बढ़ाया जायेगा । युवाओं के लिए कौशल विकास मंत्रालय की अलग से स्थापना की जाएगी । युवाओं का स्किल डेवलपमेंट किया जा सके, इसके लिए सरकार नीति बनाकर आगे बढ़ेगी और नए मंत्रालय के जरिए इस पर काम किया जायेगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में चुनाव के लिए उनकी पार्टी जनता दल यूनाईटेड पूरी तरह से तैयार है । राज्य के विकास के लिए अब तक उनकी पार्टी और सरकार ने जो काम किया है, वह जनता के सामने हैं और आगे भी बिहार के विकास के लिए काम करते रहेंगे।

चुनाव की घोषणा होते ही जोश में आए लालू, ट्वीट कर लिखा

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उज्ज्वल दुनिया/रांची । बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के बाद राजनीतिक गलियारों में काफी उत्साह का माहौल है. पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी काफी जोश में दिखाया दे रहे हैं. हमेशा से ही अपने अलग अंदाज में जनता के साथ जुड़ाव रखने वाले लालू ने ट्वीट कर बिहार के लोगों से उठने और तैयारी करने की बात कही है.

लालू यादव ने ट्वीट कर लिखा है कि “उठो बिहारी, करो तैयारी। जनता का शासन अबकी बारी, बिहार में बदलाव होगा। अफ़सर राज ख़त्म होगा, अब जनता का राज होगा।” सीधे तौर पर लालू ने नीतीश कुमार के ऊपर निशाना साधा है. सीएम नीतीश की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा है कि बिहार को मुख्यमंत्री नीतीश नहीं अफसर चला रहे हैं.

पापा के सपनों को जरूर पूरा करूंगा

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उज्ज्वल दुनिया/पटना । बिहार में विधानसभा के तारीखों के एलान होने के बाद एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान इमोशनल हो गए हैं । चिराग ने कहा कि वह अपने पापा का सपना पूरा करेंगे । चिराग ने कहा कि बिहार चुनाव की तारीख़ों की घोषणा हो गई है । बिहार चुनाव प्रधानमंत्री के विकसित बिहार के सपने और अपने राम विलास पासवान के 50 वर्षों के कार्यों को बिहारवासियों के सामने रखने का अवसर है ।

चिराग ने कहा कि चुनाव की घोषणा के इस महत्वपूर्ण अवसर पर थोड़ा भावुक भी हूं । पापा अस्पताल में हैं और मार्गदर्शन करने वाले उनके शब्दों की कमी महसूस कर रहा हूं । बिहारियों के लिए उनकी कल्पना को साकार करने की कोशिश करूंगा । पिछले 50 साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब आप सब के नेता और मेरे पापा इस चुनाव में बिहार में उपस्थित नहीं हो पाएंगे । मुझे विश्वास है की वो जल्द डिजिटल माध्यम सभी बिहार वासीयों से जुड़ेंगे । पिछले कई दिनों में पापा के पुराने मित्रों व सहयोगियों ने मुझे फ़ोन कर उनका हाल समाचार जाना । सबके मन में पापा के प्रति आदर देख कर उनका बेटा होने पर गर्व होता है ।