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थाने में तो जाना पड़ेगा’, Ranveer Allahbadia मामले में SC ने दिया आदेश; कहा- ‘कुछ भी बोलने का लाइसेंस नहीं’

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देश की शीर्ष अदालत ने यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत तो दे दी लेकिन कई सख्त टिप्पणियां दीं। अदालत ने आदेश दिया कि रणवीर और उसके सहयोगी अगले आदेश तक कोई शो नहीं करेंगे। वह पासपोर्ट सरेंडर करेगा और सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बगैर देश छोड़कर नहीं जाएगा। कोर्ट ने याचिका पर महाराष्ट्र और असम को नोटिस भी जारी किया।

By Jagran News
Edited By: Swaraj Srivastava
Updated: Tue, 18 Feb 2025 11:30 PM (IST)

रणवीर को देश छोड़ने की इजाजत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से दी राहत
स्थानीय पुलिस से संपर्क करने को कहा

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट ने अभिभावकों के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया को अश्लील भाषा इस्तेमाल करने के लिए मंगलवार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी बोलने का लाइसेंस नहीं मिल जाता।

शीर्ष अदालत ने कहा कि उसके दिमाग में गंदगी भरी है, जो उसने शो पर उगल दी। रणवीर की मानसिकता को विकृत और भाषा को निंदनीय करार देते हुए कोर्ट ने कहा कि उसकी भाषा बेटियों, बहनों, माता-पिता और यहां तक कि समाज को भी शर्मिंदगी महसूस कराती है।

गिरफ्तारी से अंतरिम राहत

हालांकि, बाद में कोर्ट ने जांच में सहयोग करने के निर्देश के साथ रणवीर को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी। लेकिन साथ ही आदेश दिया कि रणवीर और उसके सहयोगी अगले आदेश तक कोई शो नहीं करेंगे। वह पासपोर्ट सरेंडर करेगा और सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बगैर देश छोड़कर नहीं जाएगा।

जांच में सहयोग करने का आदेश

कोर्ट ने रणवीर के खिलाफ गुवाहाटी, मुंबई और जयपुर में दर्ज प्राथमिकियों में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, साथ ही कहा है कि इंडिया गॉट लैटेंट शो के आधार पर उसके खिलाफ कोई नई प्राथमिकी नहीं दर्ज की जाएगी।

आदेश दिया है कि वह जांच अधिकारी के बुलाने पर जांच में सहयोग करेगा। थाने में उसके साथ कोई वकील नहीं जाएगा। वह ठाणे पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी को पासपोर्ट जमा कराएगा और कोर्ट की इजाजत के बिना देश नहीं छोड़ेगा।

कोर्ट ने की अहम टिप्पणी

सोमवार को वकील डॉक्टर अभिनव चंद्रचूड़ ने कहा कि वह उसे सही नहीं ठहरा रहे, लेकिन उसके खिलाफ जो अश्लीलता फैलाने का मामला दर्ज हुआ है, वह नहीं बनता।

कोर्ट का फिर सवाल था कि अगर इस भाषा को अश्लील और अभद्र नहीं कहा जाएगा तो किसे कहा जाएगा? अश्लीलता और अभद्रता के क्या मानक हैं?

चंद्रचूड़ ने कहा कि इसे अश्लील नहीं, बल्कि लस्टफुल सेक्स थॉट कह सकते हैं। लेकिन कोर्ट की नाराजगी बरकरार रही और पूछा कि ऐसे व्यक्ति को क्यों राहत देनी चाहिए?

अदालत ने जताई नाराजगी

पीठ ने कहा कि उन्हें मालूम है कि उसने कहां से नकल की है, लेकिन जिन दूसरे समाजों में ऐसे प्रोग्राम होते हैं, वहां पूरे प्रकाशन लिए जाते हैं, चेतावनी और डिस्क्लेमर जारी होते हैं, जो यहां नहीं थे।

वकील ने कहा कि यह प्रोग्राम रिस्ट्रेक्टेड था, वयस्कों के लिए था और भुगतान करने पर ही पहुंच थी, लेकिन किसी पेड सब्सक्राइबर ने 10 सेकंड का क्लिप लीक कर दिया।

रणवीर को धमकियों और उसके लिए बुरी बातों पर कोर्ट ने कहा कि जैसे आपने सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसा किया, हो सकता है वैसे ही वो भी कर रहे हों।

ट्रम्प ने भारतीय चुनाव में अमेरिकी फंडिंग पर सवाल उठाया, कहा – भारत के पास बहुत पैसा, 182 करोड़ क्यों?

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4 घंटे पहले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत में मतदान को बढ़ाने के लिए मिलने वाली 182 करोड़ रुपए की फंडिंग पर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा,

“हम भारत को 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर क्यों दे रहे हैं? उनके पास बहुत ज्यादा पैसा है। भारत दुनिया के सबसे अधिक टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक हैं, खासतौर पर हमारे लिए। मैं भारत और उनके PM का सम्मान करता हूं, पर 182 करोड़ क्यों?”

ट्रम्प के सहयोगी इलॉन मस्क ने फंडिंग रद्द की

ट्रम्प के सहयोगी इलॉन मस्क ने शनिवार को भारत को दी जाने वाली 182 करोड़ रुपए की फंडिंग रद्द कर दी। मस्क के नेतृत्व वाले डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DoGE) ने शनिवार को यह फैसला लिया।

DoGE ने एक लिस्ट जारी की है, जिसमें डिपार्टमेंट की तरफ से 15 तरह के प्रोग्राम्स की फंडिंग रद्द की गई है। इनमें एक प्रोग्राम दुनियाभर में चुनाव प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए था, जिसका फंड 4200 करोड़ रुपए था। इस फंड में भारत की हिस्सेदारी 182 करोड़ रुपए थी।

DoGE ने पोस्ट किया- “अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों पर होने वाले सभी खर्चे रद्द।”

BJP ने चुनाव में फंडिंग पर सवाल उठाए

BJP नेता अमित मालवीय ने DoGE के फैसले पर प्रतिक्रिया दी और भारत के चुनाव में 182 करोड़ की फंडिंग को लेकर सवाल उठाया।

उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया- “21 मिलियन डॉलर (182 करोड़ रुपए) वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए? यह साफ तौर पर देश की चुनावी प्रक्रिया में बाहरी दखल है। इस फंड से किसे फायदा होगा? जाहिर है इससे सत्ताधारी (BJP) पार्टी को तो फायदा नहीं होगा।”

एक दूसरे पोस्ट में मालवीय ने कांग्रेस पार्टी और जॉर्ज सोरोस पर भारतीय चुनाव में हस्तक्षेप का आरोप लगाया।

कुरैशी बोले- रिपोर्ट में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं

पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा,

“2012 में मेरे चुनाव आयुक्त रहते अमेरिकी एजेंसी की तरफ से भारत में मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए करोड़ों डॉलर की फंडिंग वाली मीडिया रिपोर्ट में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।”

उन्होंने बताया कि IFES (इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स) के साथ जो समझौता हुआ था, वह सिर्फ चुनावी ट्रेनिंग और संसाधनों के लिए था, इसमें किसी भी वित्तीय फंडिंग की बात नहीं थी।

बांग्लादेश को मिलने वाली फंडिंग भी बंद

DoGE की लिस्ट में बांग्लादेश को मिलने वाली 251 करोड़ रुपए की फंडिंग भी शामिल है। यह फंड बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल को मजबूत करने के लिए दिया जा रहा था।

यह फंडिंग ऐसे समय में रोकी गई है, जब बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार गिराने में अमेरिका के डीप स्टेट को संदिग्ध माना जा रहा है।

जब मोदी की अमेरिका विजिट के दौरान ट्रम्प से इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि “बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन में अमेरिका का हाथ नहीं है।”

ट्रम्प ने कहा,

“इसमें हमारे डीप स्टेट का कोई रोल नहीं था। यह ऐसी बात है, जिस पर भारतीय PM लंबे समय से काम कर रहे हैं। इस पर कई साल से काम हो रहा है। मैं इसके बारे में पढ़ता रहा हूं, लेकिन बांग्लादेश के मुद्दे पर PM मोदी बात करें तो बेहतर होगा।”

हालांकि, यह साफ नहीं है कि ट्रम्प ने भारत की तरफ से कौन से काम का जिक्र किया था। इसके बाद PM मोदी और ट्रम्प की मुलाकात हुई, जिसमें दोनों ने बांग्लादेश के हालात पर चर्चा की थी।

 

फर्जी आईपीएस अधिकारी का भंडाफोड़, पुलिस ने उतरवाई वर्दी

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एटा, उत्तर प्रदेश: जलेसर थाना क्षेत्र में एक फर्जी आईपीएस अधिकारी पुलिस पर रौब झाड़ रहा था, लेकिन पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए उसकी सच्चाई उजागर कर दी। मामले का खुलासा होने के बाद उसकी वर्दी उतरवा दी गई और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

कैसे हुआ खुलासा?

शनिवार देर शाम थाना प्रभारी डॉ. सुधीर कुमार जलेसर कस्बे में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे खड़ी एक टैक्सी कार पर उनकी नजर पड़ी। जब चालक से गाड़ी हटाने को कहा गया, तो उसमें बैठे शख्स ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए गाड़ी को हटाने से इनकार कर दिया।

पुलिस को उसके हावभाव और गाड़ी में रखी आईपीएस टोपी देखकर शक हुआ। तुरंत उसे थाने लाया गया, जहां सीओ नितीश गर्ग ने पूछताछ की। सवालों के जवाब में वह गुमराह करने की कोशिश करता रहा, लेकिन पुलिस की कड़ाई के आगे उसकी पोल खुल गई।

वर्दी उतरवाई गई, रिपोर्ट दर्ज

जब उसकी पहचान हेमंत प्रताप सिंह बुंदेला (निवासी झांसी चुंगी नाका, थाना व जिला ललितपुर) के रूप में हुई, तो पुलिस ने उसकी वर्दी सील कर दी और फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज कर लिया

रिश्तेदार के विवाद में समझौता कराने आया था

जांच में पता चला कि आरोपी किसी रिश्तेदार के विवाद में समझौता कराने के लिए जलेसर आया था।

अस्पताल में भर्ती

गिरफ्तारी के दौरान आरोपी को सीने में दर्द की शिकायत हुई। पहले उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन हालत में सुधार न होने पर एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा में भर्ती कराया गया।

क्या होगी कार्रवाई?

आरोपी पर फर्जीवाड़ा और पुलिस को गुमराह करने का मामला दर्ज किया गया है। उसकी अस्पताल से छुट्टी के बाद जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।

झारखंड में सोने की खदानों की खोज: खूंटी, सरायकेला और रांची में संभावनाएं

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रांची: झारखंड में सोने और रेयर मेटल की खदानों की खोज तेज हो गई है। खूंटी, सरायकेला और रांची जिलों में झारखंड सरकार की नवगठित कंपनी झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (JEMCL) सोने की खदानों की संभावनाओं की जांच कर रही है।

खूंटी में सोने की खदान की संभावना

JEMCL खूंटी जिले के उलीहुरांग क्षेत्र में सोने की खदान की खोज कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो-तीन महीनों में अन्वेषण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी और फिर खदान की नीलामी की प्रक्रिया शुरू होगी।

अन्य इलाकों में भी अन्वेषण जारी

खूंटी के अलावा, सरायकेला और रांची के पोंडेपाई, बरोदाटोली और हुरुंरगाडीह में भी सोने की खदान की संभावना तलाशी जा रही है। इन क्षेत्रों में साइट की जांच पूरी हो चुकी है और मिट्टी के सैंपल की टेस्टिंग जारी है।

अनगड़ा में रेयर मेटल की खोज

रांची जिले के अनगड़ा में रेयर मेटल ब्लॉक की खोज भी चल रही है। अन्वेषण कार्य पूरा होते ही रिपोर्ट तैयार कर सरकार को दी जाएगी।

JEMCL की अन्य परियोजनाएं

JEMCL फिलहाल 15 प्रमुख खनिज परियोजनाओं पर काम कर रही है, जिनमें शामिल हैं:

  • बॉक्साइट ब्लॉक: लोहरदगा (हरहरा, कालहारी, खमार, पुलुंग, रुदनी)
  • लिथियम व रेयर मेटल: कोडरमा (दुधाकोला)
  • लाइमस्टोन ब्लॉक: गढ़वा (धुरकी)
  • काइनाइट ब्लॉक: पूर्वी सिंहभूम (बेनगरिया)
  • चाइना क्ले: साहिबगंज, लोहरदगा
  • स्टोन ब्लॉक: सरायकेला, गुमला

JEMCL की भूमिका

JEMCL की एमडी आकांक्षा रंजन के अनुसार, सोने समेत अन्य खनिजों के अन्वेषण के बाद सरकार को रिपोर्ट दी जाती है। इसके आधार पर सरकार तय करती है कि संबंधित ब्लॉक में खनिज दोहन की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ाई जाए।

झारखंड के लिए क्या है महत्व?

अगर झारखंड में सोने की खदानें मिलती हैं, तो यह राज्य के आर्थिक विकास के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। इससे खनन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

झारखंड में घुसे बांग्लादेशी आतंकवादी, पाकुड़ में दी ट्रेनिंग, ATS अलर्ट जारी

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रांची: झारखंड ATS को एक चौंकाने वाली जानकारी मिली है कि बांग्लादेश से कुछ आतंकवादी राज्य में घुसे थे और पाकुड़ में ट्रेनिंग देकर वापस चले गए। यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा माना जा रहा है। ATS ने राज्यभर में सभी SP और DIG को अलर्ट कर दिया है।

भारत विरोधी साजिश का खुलासा

सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद प्रतिबंधित संगठन भारत विरोधी आतंकी साजिशें रच रहे हैं। जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) का आतंकी अब्दुल मम्मन अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। वह मुर्शिदाबाद के धुलियान होते हुए 6 जनवरी को पाकुड़ पहुंचा, जहां उसने JAHA-India संगठन के 15 सदस्यों को ट्रेनिंग दी और फिर 7 जनवरी को बांग्लादेश लौट गया।

इस्लामी दावत केंद्र में हुई बैठक

ATS के मुताबिक, 6 जनवरी को पाकुड़ के दुबराजपुर स्थित इस्लामी दावत केंद्र में JMB और JAHA-India के सदस्यों के बीच बैठक हुई। अब्दुल मम्मन ने इस बैठक में हिस्सा लिया और कई कैडरों को आतंकी प्रशिक्षण दिया। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बैठक में मुर्शिदाबाद के जलंगी इलाके के कई लोग भी शामिल हुए थे।

ATS ने किया अलर्ट जारी

ATS ने सभी जिलों के SP और DIG को अलर्ट जारी करते हुए कहा कि इस मामले में खुफिया जानकारी एकत्र करें और सतर्क रहें। सुरक्षा एजेंसियों को निवारक और एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

पाकुड़ में सक्रिय रहा JMB

सूत्रों के अनुसार, JMB लंबे समय से संथाल परगना क्षेत्र, खासकर साहिबगंज और पाकुड़ में सक्रिय रहा है। ATS ने इस संगठन से जुड़े संदिग्धों की पहचान करने के लिए जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।

दुमका कोर्ट में पेशी के बाद बोलीं दीपिका, केंद्र पर बकाया हो जाएगा 2.36 लाख करोड़

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दुमका: झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी के बाद केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का केंद्र पर बकाया जल्द ही 2.36 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। वित्त विभाग इसका ब्योरा तैयार कर रहा है।

केंद्र सरकार पर सौतेले व्यवहार का आरोप

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड के विकास कार्यों के लिए आवश्यक राशि नहीं दे रही है। कोयले की रॉयल्टी के रूप में 1.36 लाख करोड़ रुपए पहले से बकाया था, जो अब बढ़कर 2.36 लाख करोड़ होने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम आवास योजना, मनरेगा, नल-जल योजना और बाल विकास परियोजना की राशि भी झारखंड को नहीं मिल रही है।

झारखंड सरकार की योजनाओं का बचाव

मंत्री ने राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को जनहितकारी बताते हुए कहा कि बिजली बिल माफी और मंईयां सम्मान योजना महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उठाया गया कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों की भूमि रही है और जरूरत पड़ी, तो वे अपने हक के लिए आंदोलन करेंगे।

कोर्ट में पेशी और बयान

दीपिका पांडेय सिंह समेत छह लोगों ने दुमका एमपी-एमएलए कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया। 2017 में महगामा में हुए एक सड़क जाम मामले में उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन्होंने अपने बयान में कहा कि उन्हें इस केस में झूठा फंसाया गया है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़, 18 की मौत, कई घायल

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नई दिल्ली: शनिवार रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अचानक मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए। इस हादसे में कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। चश्मदीदों का कहना है कि यह घटना कुंभ मेले के लिए उमड़ी भारी भीड़ के कारण हुई।

घटना का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रयागराज जाने वाली स्पेशल ट्रेन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्टेशन पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि प्लेटफॉर्म नंबर 12 से कुंभ स्पेशल ट्रेन के जाने की सूचना दी गई थी, लेकिन बाद में इसे प्लेटफॉर्म 16 से रवाना किया गया। प्लेटफॉर्म बदलने की वजह से अचानक भीड़ उमड़ पड़ी और भगदड़ मच गई।

चश्मदीदों का बयान
स्टेशन पर काम करने वाले कुली और यात्रियों ने बताया कि भीड़ इतनी अधिक थी कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। एक कुली, बुरहान ने बताया, “हमने कई शवों को अपने हाथों से उठाया। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी हुई। स्थिति इतनी भयावह थी कि लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए।”

एक अन्य कुली, मोहम्मद हाशिम ने बताया, “हमने कई बेहोश बच्चों को बाहर निकाला। एक चार साल की बच्ची बेहोश थी, जब उसकी सांस वापस आई तो उसकी माँ खुशी से रोने लगी।”

प्रशासन की प्रतिक्रिया
रेलवे अधिकारियों ने प्लेटफॉर्म बदलने की बात से इनकार किया है। उनका कहना है कि भगदड़ यात्रियों के बीच घबराहट की वजह से हुई। प्रशासन का कहना है कि घायलों को लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है और घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

लोगों में आक्रोश
हादसे के बाद यात्रियों और उनके परिजनों में आक्रोश देखा गया। कई लोगों ने रेलवे प्रशासन पर अव्यवस्था का आरोप लगाया। जीतेश मीणा नाम के कुली ने बताया, “अगर पहले से तैयारी होती, तो यह हादसा नहीं होता। हमें छठ पूजा के दौरान जैसी व्यवस्थाएं देखने को मिलती हैं, वैसी ही यहां भी होनी चाहिए थी।”

निष्कर्ष
यह हादसा दर्शाता है कि भीड़ नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे को और अधिक कड़े उपाय करने की ज़रूरत है। इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए प्रशासन को सुनियोजित ढंग से भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था करनी होगी।

75 साल पीछे है भारत का यह गांव, न बिजली और ना ही मोबाइल नेटवर्क

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महराजगंज: उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के चौक रेंज के जंगलों में स्थित वनटांगियां गांव कंपार्ट 24 आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। विकास के तमाम दावों के बावजूद यहां के लोग बिजली, सड़क और मोबाइल नेटवर्क जैसी आवश्यक सुविधाओं से अब भी महरूम हैं।

बिजली और नेटवर्क का अभाव

गांव के निवासी रोशन लाल ने बताया कि गांव में मुख्य सड़क के अलावा कोई भी सड़क नहीं है, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। वर्षों पहले लगाए गए सोलर पैनल अब खराब हो चुके हैं, जिससे गांव में अंधकार छाया रहता है। मोबाइल नेटवर्क भी यहां नहीं मिलता, जिससे बाहरी दुनिया से संपर्क कर पाना मुश्किल हो जाता है।

शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं

गांव में प्राथमिक विद्यालय तो है, लेकिन अध्यापकों की कमी और जर्जर भवनों के कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है। आंगनबाड़ी केंद्र भी वर्षों से बंद पड़ा है, जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषण संबंधी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

सरकारी दावों की हकीकत

हालांकि सरकार और प्रशासन की ओर से समय-समय पर विकास कार्यों के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। गांव के लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं, जिससे उनका जीवन आसान हो सके।

मृत्यु, पुनर्जन्म और मोक्ष – आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टिकोण

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जातस्य हि ध्रुवो मृत्युः ध्रुवं जन्म मृतस्य च।

न त्वं शोचितुमर्हसि॥ (गीता 2/27)

अर्थात जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात पुनर्जन्म भी सुनिश्चित है। अतः अपने अपरिहार्य कर्तव्यपालन में तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।


मृत्यु: जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सत्य

मृत्यु जीवन का संभवतः सबसे महत्वपूर्ण आविष्कार है। यह परिवर्तन का वाहक है। हर सुबह यदि हम स्वयं से यह प्रश्न करें – “अगर आज मेरे जीवन का अंतिम दिन हो, तो क्या मैं वही करना चाहूंगा जो आज करने जा रहा हूँ?” – तो इस विचार पर चिंतन निश्चित रूप से हमारे जीवन में बदलाव लाएगा। मृत्यु एक अटल सत्य है, जिसे नकारा नहीं जा सकता। यह विचार हमें या तो उत्साह से भर सकता है या नैराश्य में डुबो सकता है।

मृत्यु का चिंतन जीवन को सीमितता का अहसास कराता है। जब राजा परीक्षित को ज्ञात हुआ कि उनकी मृत्यु मात्र सात दिनों में निश्चित है, तो उन्होंने वही किया जो उन्हें सर्वोत्तम लगा – उन्होंने आत्मज्ञान की खोज में अपना समय लगाया।


भारतीय दर्शन में आत्मा का स्वरूप

भारतीय दर्शन में आत्मा को नित्य, अजर-अमर और अविनाशी माना गया है। कठोपनिषद् (1/2/18) में कहा गया है:

न जायते म्रियते वा विपश्चिन्नायं कुतश्चिन्न बभूव कश्चित्। अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥

अर्थात आत्मा का जन्म या मृत्यु नहीं होती। यह सदा रहने वाली है। शरीर के नष्ट होने पर भी आत्मा नष्ट नहीं होती।


पुनर्जन्म: भारतीय दर्शन की महत्वपूर्ण अवधारणा

पुनर्जन्म भारतीय दर्शन की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो यह मानती है कि आत्मा एक शरीर को त्यागकर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है। यह विचार हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

ऋग्वेद में पुनर्जन्म को आत्मा की यात्रा के रूप में वर्णित किया गया है:

“जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर नये वस्त्र धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर को त्यागकर नये शरीर को धारण करती है।”

बृहदारण्यक उपनिषद में भी इस विचार का समर्थन किया गया है कि आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर नए शरीर में प्रवेश करती है।


मोक्ष: अंतिम लक्ष्य

सनातन धर्म में मोक्ष को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का अंतिम लक्ष्य माना गया है। मोक्ष प्राप्त करने के बाद आत्मा किसी नए शरीर में प्रवेश नहीं करती, बल्कि वह ब्रह्म में विलीन हो जाती है।

मोक्ष के चार प्रमुख मार्ग माने गए हैं:

  1. कर्मयोग – निष्काम भाव से कर्म करना
  2. ज्ञानयोग – आत्मा और ब्रह्म का ज्ञान प्राप्त करना
  3. भक्तियोग – ईश्वर की भक्ति और समर्पण
  4. राजयोग – ध्यान और साधना द्वारा आत्मबोध

भगवद गीता (2.47) में श्रीकृष्ण कहते हैं:

“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” अर्थात मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, लेकिन कर्म के फल की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।


मोक्ष प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग: कर्मयोग

गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्मयोग का उपदेश देते हुए कहा कि निष्काम कर्म ही मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है। जब कोई व्यक्ति अपने कर्मों को ईश्वर को समर्पित करता है, तो अहंकार नष्ट हो जाता है, जिससे वह जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त हो जाता है।

“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥” (गीता 18/66)

अर्थात सभी धर्मों को त्यागकर मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा, तुम शोक मत करो।


निष्कर्ष

मृत्यु, पुनर्जन्म और मोक्ष सनातन धर्म के गूढ़ रहस्य हैं। मृत्यु से भयभीत होने की बजाय हमें इसे आत्मज्ञान प्राप्त करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। पुनर्जन्म की अवधारणा हमें यह सिखाती है कि हमारे कर्मों का प्रभाव केवल इस जन्म तक सीमित नहीं होता, बल्कि वे हमारे अगले जन्म को भी प्रभावित करते हैं। अंततः, मोक्ष ही हमारा अंतिम लक्ष्य है, जहाँ आत्मा जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर परमात्मा में विलीन हो जाती है।

इसलिए, कर्मयोग को अपनाकर, निष्काम भाव से कर्म करते हुए, भक्ति और ज्ञान को साधन बनाकर हम मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं।

 

तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण की मंजूरी के बाद किसकी उड़ी नींद? ट्रंप का फैसला बनेगा गेमचेंजर

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भारत को आखिरकार 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड्स में से एक तहव्वुर राणा को न्याय के कठघरे में लाने का मौका मिल गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। यह फैसला भारत के लिए न केवल आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए भी न्याय की ओर एक कदम है, जिन्होंने 2008 के भयावह हमलों में अपने प्रियजनों को खोया था।

तहव्वुर राणा, जो कि पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, वर्तमान में लॉस एंजेलिस के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद है। उसे 26/11 हमलों की साजिश में शामिल होने के आरोप में भारत को सौंपा जा रहा है। माना जाता है कि राणा ने पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों की मदद से इस भीषण हमले की योजना बनाई थी।

भारत की कूटनीतिक जीत, आतंकवादियों की मुश्किलें बढ़ीं

भारत कई वर्षों से राणा के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा था। पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान इस विषय पर विशेष रूप से चर्चा हुई थी। ट्रंप प्रशासन ने प्रत्यर्पण की मंजूरी देते हुए कहा कि भारत को और भी आतंकवादियों की सुपुर्दगी दी जा सकती है। ट्रंप ने कहा,

“हम एक बेहद खतरनाक व्यक्ति (तहव्वुर राणा) को भारत भेज रहे हैं। और भी कई लोग हैं जिनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर विचार चल रहा है। भारत के साथ मिलकर अपराध और आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”

इस फैसले के बाद अमेरिका में मौजूद अन्य भगोड़े अपराधियों और आतंकवादियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भारत ने अमेरिका को 10 प्रमुख अपराधियों और आतंकवादियों की एक सूची सौंपी है, जिनका प्रत्यर्पण जल्द किया जा सकता है।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, उन्होंने अन्य नामों का खुलासा करने से इनकार कर दिया।

“हां, प्रत्यर्पण को लेकर अन्य अनुरोध भी हैं, लेकिन मैं अभी उन नामों का खुलासा नहीं कर सकता। हमारी सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है।”

भारत की प्रत्यर्पण सूची: कौन-कौन है निशाने पर?

तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के बाद अब भारत की नजर कई अन्य अपराधियों और आतंकवादियों पर है, जो अमेरिका समेत विभिन्न देशों में छिपे हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम हैं:

🔹 गोल्डी बरार: पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मास्टरमाइंड, जो अमेरिका में छिपा हुआ है।
🔹 अनमोल बिश्नोई: कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई, जिसे हाल ही में अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था।
🔹 अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर और माफिया सरगनाओं के कई अन्य नाम, जिनका प्रत्यर्पण जल्द किया जा सकता है।

भारत सरकार की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न देशों को भेजे गए 178 प्रत्यर्पण अनुरोधों में से 65 अमेरिका को भेजे गए थे। हालांकि, अमेरिका ने 2002 से 2018 के बीच केवल 11 प्रत्यर्पण अनुरोधों को स्वीकार किया था।

अमेरिका ने किन अपराधियों को प्रत्यर्पित करने से इनकार किया?

हालांकि, तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अमेरिका ने अब तक कुछ प्रमुख अपराधियों को भारत को सौंपने से इनकार कर दिया है। इनमें शामिल हैं:

डेविड कोलमैन हेडली: तहव्वुर राणा का सहयोगी और 26/11 हमलों का मुख्य साजिशकर्ता। अमेरिका ने उसे प्रत्यर्पित करने से इनकार कर दिया है, लेकिन उसे वहां 35 साल की सजा सुनाई गई है।
वॉरेन एंडरसन: 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के आरोपी यूनियन कार्बाइड के पूर्व सीईओ, जिनका प्रत्यर्पण अनुरोध अमेरिका ने अस्वीकार कर दिया था।

राणा का प्रत्यर्पण क्यों है अहम?

26/11 मुंबई हमले न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक काला अध्याय हैं। इस हमले में 166 लोगों की जान गई थी, जिसमें 6 अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। राणा का प्रत्यर्पण आतंकवाद के खिलाफ भारत की मुहिम में मील का पत्थर साबित होगा।

यह सिर्फ एक अपराधी को भारत लाने का मामला नहीं है, बल्कि यह आतंकवादियों और उनके आकाओं को यह संदेश देने का प्रतीक है कि दुनिया अब उन्हें छिपने का मौका नहीं देगी।

क्या होगा आगे?

तहव्वुर राणा के भारत पहुंचने के बाद, उस पर भारतीय कानूनों के तहत मुकदमा चलेगा। इस मामले में कई नई परतें खुल सकती हैं और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के बारे में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत आगे किन अन्य अपराधियों और आतंकवादियों का प्रत्यर्पण कराने में सफल होता है। लेकिन एक बात तो तय है—अब आतंकियों के लिए दुनिया छोटी होती जा रही है, और भारत उन्हें किसी भी कोने से निकाल लाने के लिए पूरी तरह तैयार है!

UP: 1899 में बनी मस्जिद और मंदिर पर चला बुलडोजर, प्रशासनिक कार्रवाई से रातोंरात ढहाए गए धर्मस्थल!

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सीतापुर में ऐतिहासिक मंदिर-मस्जिद पर चला बुलडोजर, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई!

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने ओवरब्रिज की सर्विस लेन में आ रहे एक सदी पुरानी मस्जिद और एक मंदिर पर बुलडोजर चला दिया। यह कार्रवाई शुक्रवार देर रात पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी में पूरी की गई।

1899 की ऐतिहासिक मस्जिद और मंदिर हुए धराशायी!

सीतापुर के सिधौली कोतवाली क्षेत्र में एक महत्वाकांक्षी ओवरब्रिज निर्माण योजना पर काम चल रहा है। इस परियोजना के लिए सर्विस लेन बनाई जानी है, लेकिन इसके रास्ते में एक मंदिर और एक मस्जिद आ रहे थे। प्रशासन ने नियमों का पालन करते हुए दोनों संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया।

इसमें सबसे बड़ी चर्चा का विषय वह मस्जिद रही, जो आजादी से पहले 1899 में बनाई गई थी। मस्जिद के अवशेषों में साल 1899 की ईंटें मिलीं, जो इसकी ऐतिहासिकता को प्रमाणित करती हैं। प्रशासन ने धार्मिक सौहार्द बनाए रखते हुए मंदिर और मस्जिद दोनों को हटाने का फैसला किया और दोनों पक्षों को मुआवजा भी दिया गया।

रातोंरात बुलडोजर एक्शन, नहीं हुआ कोई विरोध!

शुक्रवार देर रात पुलिस-प्रशासन की देखरेख में बुलडोजर चला और दोनों धार्मिक स्थलों को शांतिपूर्ण तरीके से ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। इंस्पेक्टर बलवंत शाही ने बताया कि यह कार्रवाई सभी पक्षों की सहमति से की गई और कोई भी व्यवधान उत्पन्न नहीं हुआ।

मुआवजा और प्रशासन का रुख

प्रशासन ने इस ध्वस्तीकरण से पहले दोनों धर्मस्थलों के प्रबंधन से विस्तृत चर्चा की और सहमति लेने के बाद ही कार्रवाई की गई।

  • मस्जिद के लिए प्रशासन ने 48 लाख रुपये का मुआवजा दिया।
  • मंदिर प्रबंधन को भी उचित मुआवजा प्रदान किया गया।
  • प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि स्थानीय समुदायों के बीच कोई टकराव न हो और धार्मिक भावनाओं का सम्मान बना रहे।

विकास बनाम विरासत – आगे क्या?

इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों के लिए सरकार कोई समझौता नहीं करेगीओवरब्रिज का निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास राज्य की प्राथमिकताओं में से एक है और यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी अवैध निर्माण या बाधा इसके आड़े न आए।

लेकिन, इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है – क्या ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए विकास संभव नहीं? 1899 की मस्जिद और मंदिर को गिराने से यह बहस फिर से छिड़ गई कि आधुनिक विकास और ऐतिहासिक विरासत के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए

जनता की प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल

इस कार्रवाई पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह विकास के लिए जरूरी कदम था, जबकि कुछ का कहना है कि इतिहास और आस्था को बचाने के उपाय भी किए जा सकते थे। हालांकि, प्रशासन ने इस मामले में पूरी सावधानी और निष्पक्षता बरतते हुए दोनों पक्षों की सहमति से ही कार्रवाई की है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की गति तेज़ हो चुकी है और सरकार निर्णायक फैसले ले रही है। यह कार्रवाई दर्शाती है कि राज्य सरकार बुनियादी ढांचे के निर्माण में कोई बाधा स्वीकार नहीं करेगी, चाहे वह कितनी भी ऐतिहासिक या धार्मिक रूप से संवेदनशील क्यों न हो।

आगे देखने वाली बात यह होगी कि ऐसे मामलों में प्रशासन भविष्य में क्या रुख अपनाएगा – क्या विरासत और विकास के बीच कोई नया समाधान निकलेगा, या फिर इसी तरह बुलडोजर चलता रहेगा?

महाकुंभ से मालामाल हुआ यूपी: सीएम योगी ने बताया 3 लाख करोड़ की कमाई का गणित

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आयोजित महाकुंभ ने राज्य की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त लाभ पहुंचाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि इस आयोजन से यूपी को करीब 3 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ हुआ है। लखनऊ में फ्लाईओवर लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि 50-55 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

महाकुंभ से यूपी की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा

सीएम योगी ने कहा कि 15 हजार करोड़ रुपये के खर्च से 3 लाख करोड़ रुपये का लाभ मिला, जो उत्तर प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। महाकुंभ के नाम पर दिए गए बजट से सिर्फ प्रयागराज में महाकुंभ आयोजन ही नहीं, बल्कि पूरे शहर का सुंदरीकरण भी किया गया।

उन्होंने बताया कि प्रयागराज में सर्वाधिक श्रद्धालु सड़क मार्ग से पहुंचे, जिसके लिए बेहतर सड़क परिवहन की व्यवस्था की गई थी। रेलवे और हवाई मार्ग से भी बड़ी संख्या में लोग आए, जिससे यात्रा और पर्यटन क्षेत्र में भी वृद्धि हुई।

विपक्ष के आरोपों पर सीएम योगी का जवाब

महाकुंभ के आयोजन को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार धार्मिक आयोजनों की ब्रांडिंग कर रही है और इसे जरूरत से ज्यादा महत्व दे रही है। हालांकि, सीएम योगी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महाकुंभ से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को ऐतिहासिक लाभ हुआ है और इस आयोजन ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत किया है।

प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या को मिला सीधा फायदा

सीएम योगी ने बताया कि महाकुंभ के चलते प्रयागराज के अलावा अयोध्या और वाराणसी में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं। लाखों श्रद्धालु महाकुंभ के बाद सीधे रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे, जिससे वहां के स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिला। इसी तरह, काशी विश्वनाथ मंदिर और अन्य तीर्थ स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

डबल इंजन सरकार का असर

सीएम योगी ने केंद्रीय मंत्रियों राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी का धन्यवाद करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण यूपी में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि लखनऊ में एयरो सिटी और एआई सिटी के रूप में नए प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं, जो भविष्य में राज्य की आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेंगे।

महाकुंभ से उत्तर प्रदेश को क्यों हुआ इतना फायदा?

  • तीर्थयात्रा और धार्मिक पर्यटन में वृद्धि, जिससे स्थानीय व्यापारियों, होटल, ट्रांसपोर्ट और रेस्तरां व्यवसायों को लाभ हुआ।
  • पर्यटकों के बढ़ते प्रवाह से आर्थिक गतिविधियों में इजाफा हुआ।
  • बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महाकुंभ की ब्रांडिंग, जिससे विदेशी श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में आए।

निष्कर्ष

महाकुंभ 2025 ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, इस आयोजन ने सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी यूपी को समृद्ध बनाया है। विपक्ष के आरोपों के बावजूद सरकार इसे उत्तर प्रदेश के विकास का एक बड़ा कदम मान रही है।

मंदिर निर्माण का आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

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मंदिर बनाने से क्या होगा?

संजय कुमार विनीत
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक

भारत का इतिहास और सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है। हमारे प्राचीन मंदिर केवल पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक केंद्र के रूप में भी कार्य करते रहे हैं। धार्मिक पर्यटन हमारे देश के पर्यटन व्यवसाय का एक बड़ा हिस्सा है, जिससे भारी मात्रा में आर्थिक लाभ उत्पन्न होता है। प्राचीन काल में भारतीय लोग मंदिर रहित स्थान को मानव निवास के लिए अनुपयुक्त मानते थे। वर्तमान में, अनुमान है कि भारत में धार्मिक पर्यटन का हिस्सा घरेलू पर्यटन में 60 प्रतिशत है, जबकि 11 प्रतिशत विदेशी सैलानी धार्मिक उद्देश्य से आते हैं।

अयोध्या में नवनिर्मित श्रीराम मंदिर ने न केवल अयोध्या के बहुआयामी विकास में योगदान दिया है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव डाला है। इसलिए, जो लोग यह कहते हैं कि “मंदिर बनाने से क्या होगा?” उन्हें इस तथ्य को समझना चाहिए कि मंदिरों का निर्माण आर्थिक समृद्धि और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण कारक होता है।

राम मंदिर निर्माण का प्रभाव

अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हुआ। हालांकि, इसके बावजूद इस पर अनेक आलोचनाएँ की गईं। परंतु, इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि राम मंदिर के निर्माण से बड़ी संख्या में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों का आगमन हुआ है। इससे स्थानीय व्यापार, होटल, रेस्तरां और परिवहन सेवाओं सहित आतिथ्य अवसंरचना का विकास हुआ, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हुए और आर्थिक वृद्धि को बल मिला।

भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदिरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वित्त वर्ष 2022-23 में केवल छह बड़े हिंदू मंदिरों ने 24,000 करोड़ रुपये का चढ़ावा अर्जित किया था। कुंभ मेले जैसे धार्मिक आयोजनों से भी भारी आर्थिक गतिविधियाँ उत्पन्न होती हैं। 2019 के प्रयागराज कुंभ मेले ने लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये की आय उत्पन्न की थी, जबकि 2025 के महाकुंभ से 20 लाख करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया जा रहा है।

मंदिरों की आर्थिक शक्ति

राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) के अनुसार, 2022 में मंदिर अर्थतंत्र भारत की अर्थव्यवस्था में 3.02 लाख करोड़ रुपये का योगदान दे रहा था, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 2.32 प्रतिशत है। इस सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय तीर्थयात्री प्रतिदिन लगभग 1316 करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जो वार्षिक रूप से 4.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचता है।

जहाँ भी बड़े मंदिर स्थित हैं, वहाँ श्रद्धालुओं और सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, 2022 में 14.33 करोड़ भारतीय और 64.4 लाख विदेशी पर्यटकों ने मंदिरों और तीर्थ स्थलों का भ्रमण किया, जिससे 1.35 लाख करोड़ रुपये की आमदनी हुई। महाकुंभ में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है, जिनमें से कम से कम 10 प्रतिशत श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या भी जाएंगे।

मंदिरों का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

‘मंदिर’ का अर्थ होता है—मन से दूर कोई स्थान। इसे देवालय, शिवालय, रामद्वारा, गुरुद्वारा, जिनालय आदि नामों से भी जाना जाता है। हालांकि, आजकल लोग मंदिरों की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्ता से अपरिचित हैं। मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं होते, बल्कि वे सामुदायिक एकता, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समृद्धि के भी केंद्र होते हैं।

राम मंदिर और महाकुंभ का प्रभाव

महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अयोध्या, काशी और विंध्यवासिनी मंदिर का भी रुख कर रही है। इससे न केवल धार्मिक बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अनुमान है कि महाकुंभ के दौरान राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर और विंध्यवासिनी मंदिर के आसपास हजारों करोड़ की आर्थिक गतिविधियाँ संचालित होंगी।

भारत में मंदिरों के पुनर्निर्माण और संरक्षण की पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार मंदिरों के आर्थिक प्रभाव को समझते हुए योजनाबद्ध तरीके से उनके विकास को प्रोत्साहित कर रही है। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए महाकाल लोक, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारनाथ पुनर्निर्माण, ओंकारेश्वर में एकात्म धाम, कश्मीर में शारदा पीठ का पुनरोद्धार, उत्तराखंड में कैलाश दर्शन जैसी अनेक पहलें मंदिरों को सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक दृष्टिकोण से सशक्त कर रही हैं।

निष्कर्ष

कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों की भांति, धार्मिक सेवाओं और मंदिरों का भी एक विशिष्ट अर्थशास्त्र होता है। मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि वे आर्थिक समृद्धि और सांस्कृतिक उत्थान के प्रतीक भी हैं। इसलिए, जो लोग कहते हैं कि “मंदिर बनाने से क्या होगा?” उन्हें यह समझना चाहिए कि मंदिरों के निर्माण से न केवल आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक उन्नति भी संभव होती है।

तीन दिन में ही लोगों को हुआ गलती का अहसास… पूर्व सीएम आतिशी ने दिल्ली को यूपी बनाने का किया दावा

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नई दिल्ली: दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि दिल्ली की जनता को अपनी गलती का अहसास हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के सत्ता में आते ही राजधानी में लंबे-लंबे पावर कट शुरू हो गए हैं, जिससे आम जनता परेशान हो रही है।

आतिशी ने कहा कि 8 फरवरी को चुनाव परिणाम के तुरंत बाद ही बीजेपी ने दिल्ली सचिवालय और मंत्रियों के दफ्तरों को सील करवा दिया था ताकि आम आदमी पार्टी के मंत्री वहां प्रवेश न कर सकें। उन्होंने दावा किया कि अब जनता को समझ आ गया है कि उसने गलत निर्णय ले लिया है।

बिजली संकट पर बीजेपी को घेरा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतिशी ने कहा, “दिल्ली में पिछले तीन दिनों से लगातार बिजली कटौती हो रही है। 9 फरवरी को सैनिक एन्क्लेव गार्डन में चार घंटे तक पावर कट रहा, 12 फरवरी को उत्तमनगर में रातभर बिजली नहीं थी। ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं जहां लोग बिजली कंपनियों से शिकायत कर रहे हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार बिजली व्यवस्था को मॉनिटर कर रही थी, लेकिन अब तीन दिन में ही पावर सेक्टर का संतुलन बिगड़ गया है। उन्होंने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल सरकार दिन-रात बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही थी, लेकिन बीजेपी के आते ही यह संकट गहरा गया है।

दिल्ली को यूपी बनाने का आरोप

आतिशी ने आगे कहा कि बीजेपी ने सत्ता संभालते ही दिल्ली को उत्तर प्रदेश बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, “दिल्ली की जनता ने 24 घंटे बिजली की आदत डाल ली थी, लेकिन अब वह भी खतरे में है। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो जल्द ही दिल्ली में भी यूपी जैसे हालात हो जाएंगे।”

क्या कह रही है बीजेपी?

भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिजली कटौती किसी सरकार की वजह से नहीं, बल्कि तकनीकी कारणों से होती है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी हार स्वीकार नहीं कर पा रही है, इसलिए झूठे आरोप लगा रही है।

हालांकि, बिजली संकट और नई सरकार को लेकर दिल्ली की जनता की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में तय करेगी कि यह केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति है या हकीकत में दिल्ली को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है।

ट्रंप, एलन मस्क, वाल्ट्ज… अमेरिका में पीएम मोदी की बैक-टू-बैक मुलाकात, 24 घंटे में भारत को क्या मिला

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ट्रंप, एलन मस्क, वाल्ट्ज… अमेरिका में पीएम मोदी की बैक-टू-बैक मुलाकात, 24 घंटे में भारत को क्या मिला?

वाशिंगटन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका दौरा कूटनीति और रणनीतिक बैठकों से भरपूर रहा। बीते 24 घंटों में उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, बिजनेसमैन एलन मस्क, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज समेत कई प्रमुख हस्तियों से मुलाकात कर भारत के हितों को प्राथमिकता दी। इन बैठकों से न केवल भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती मिली बल्कि व्यापार, रक्षा, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में कई बड़े फैसले भी हुए।

ट्रंप से द्विपक्षीय वार्ता – नए व्यापार मार्ग और रक्षा सौदे पर चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने वाशिंगटन डीसी के ब्लेयर हाउस में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अहम बैठक की। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बाद उनकी पहली मुलाकात थी। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:

  • भारत और अमेरिका मिलकर नए व्यापार मार्ग (ट्रेड रूट) पर काम करने को तैयार हुए, जो भारत से इजरायल, इटली होते हुए अमेरिका तक जाएगा।
  • अमेरिका भारत को F-35 स्टील्थ फाइटर जेट और अन्य आधुनिक हथियारों की बड़ी सैन्य बिक्री करेगा।
  • अवैध रूप से रह रहे भारतीयों को वापस भेजने के लिए भारत तैयार होगा।
  • 26/11 हमले के दोषी तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित किया जाएगा।

एलन मस्क से मुलाकात – क्या भारत में टेस्ला का विस्तार होगा

एलन मस्क अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सबसे प्रभावशाली बिजनेसमैन माने जा रहे हैं। पीएम मोदी और टेस्ला-एक्स (Twitter) के मालिक एलन मस्क की इस मुलाकात के रणनीतिक मायने बड़े हैं।

  • मस्क के चीन में बड़े बिजनेस हैं, लेकिन अमेरिका-चीन तनाव के कारण भारत उनके लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है।
  • भारत में टेस्ला के विस्तार और निवेश को लेकर चर्चा हुई।
  • मोदी ने मस्क के परिवार के साथ भी बातचीत की, जिससे रिश्तों में अनौपचारिक गर्माहट भी दिखाई दी।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज से रणनीतिक वार्ता

ब्लेयर हाउस में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज के साथ बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-अमेरिका रक्षा, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की।

  • रणनीतिक टेक्नोलॉजी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
  • छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों, नागरिक परमाणु ऊर्जा और आतंकवाद से निपटने पर चर्चा हुई।
  • पीएम मोदी ने वाल्ट्ज को भारत का एक महान मित्र बताया।

विवेक रामास्वामी से चर्चा – इनोवेशन और बायोटेक्नोलॉजी पर फोकस

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय मूल के अमेरिकी एंटरप्रेन्योर विवेक रामास्वामी से भी मुलाकात की। रामास्वामी ने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भाग लिया था, लेकिन बाद में डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया।

  • भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर चर्चा हुई।
  • इनोवेशन, बायोटेक्नोलॉजी और आंत्रप्रेन्योरशिप के महत्व पर बात हुई।
  • तकनीकी और वैज्ञानिक विकास में भारत की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

मोदी का 24 घंटे में दमदार डिप्लोमैटिक परफॉर्मेंस

पीएम मोदी का अमेरिका में पहला 24 घंटे बेहद व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा। इन बैक-टू-बैक हाई-प्रोफाइल बैठकों ने दिखाया कि भारत अब झुकने के मूड में नहीं और अपने हितों को सर्वोपरि रखेगा।

  • व्यापार और रक्षा में बड़ी डील्स पक्की हुईं
  • टेस्ला और अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए भारत बना आकर्षण का केंद्र
  • सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर भारत को मिली मजबूत अमेरिकी सहमति

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस यात्रा के आने वाले 24 घंटों में भारत को और क्या बड़े फायदे मिलते हैं।