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भारत को अपने स्वयं के AI मॉडल विकसित करने चाहिए, भारतीय भाषाओं पर देना चाहिए जोर: निरंजन राजाध्यक्ष

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भारत को अपने स्वयं के AI मॉडल विकसित करने चाहिए, भारतीय भाषाओं पर देना चाहिए जोर: निरंजन राजाध्यक्ष

मुंबई: तेजी से बदलती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में भारत अपनी भूमिका को कैसे मजबूत कर सकता है, इस पर अर्थशास्त्री और अरथा ग्लोबल के कार्यकारी निदेशक, निरंजन राजाध्यक्ष ने विशेष चर्चा की। उन्होंने ETV भारत को दिए गए एक साक्षात्कार में बताया कि भारत को अपने स्वयं के AI मॉडल विकसित करने चाहिए और उन्हें भारतीय भाषाओं के डेटा पर प्रशिक्षित करना चाहिए।

AI पर भारत की रणनीति क्या होनी चाहिए?

निरंजन राजाध्यक्ष ने बताया कि AI के तीन प्रमुख पहलू हैं, जिन पर नीति निर्माताओं को ध्यान देने की आवश्यकता है—

  1. भू-राजनीतिक प्रभाव (Geo-strategic implications)
  2. अर्थव्यवस्था पर प्रभाव (Economic impact)
  3. नागरिकों की गोपनीयता की सुरक्षा (Privacy protection)

उन्होंने कहा कि भारत को अपने स्वयं के मूलभूत AI मॉडल (Foundational AI Models) विकसित करने या बाहरी LLM मॉडल का उपयोग करने को लेकर विचार करना होगा। हालाँकि, DeepSeek के विकास ने यह दिखाया है कि भारत के लिए अपने स्वदेशी AI मॉडल बनाना संभव हो सकता है।

AI और भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

उन्होंने MIT के प्रोफेसर ओलिवियर ब्लैंचर्ड के उस विचार का समर्थन किया जिसमें कहा गया था कि DeepSeek एक बड़ा उत्पादकता झटका (Total Factor Productivity Shock) ला सकता है। AI यदि एक सामान्य प्रयोजन तकनीक (General Purpose Technology – GPT) के रूप में विकसित होती है, तो यह पूरी अर्थव्यवस्था में उत्पादकता बढ़ा सकती है

भारतीय भाषाओं में AI का विकास क्यों जरूरी?

AI अभी तक भारतीय भाषाओं में पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। चूंकि वर्तमान AI मॉडल मुख्य रूप से अंग्रेजी पर आधारित हैं, इसलिए भारत को अपने AI मॉडल विकसित कर उन्हें भारतीय भाषाओं के डेटा पर प्रशिक्षित करना चाहिए। यह न केवल स्थानीय उपयोगकर्ताओं के लिए AI को अधिक प्रभावी बनाएगा, बल्कि भारत की बहुभाषी संस्कृति को भी संरक्षित करेगा

AI और भारतीय श्रम बाजार

भारत श्रम-प्रधान अर्थव्यवस्था है, जहां हर साल 8-10 मिलियन लोग कार्यबल में प्रवेश करते हैं। AI के कारण कुछ नौकरियाँ खत्म हो सकती हैं, लेकिन नई नौकरियाँ भी उत्पन्न होंगी। उन्होंने बताया कि AI कम कौशल वाले कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा सकता है, जिससे सभी कर्मचारियों के बीच कौशल अंतर (Skill Gap) कम होगा

भारत में नौकरी सृजन बनाम विस्थापन

AI के कारण भारत में नौकरी सृजन और नौकरियों के विस्थापन (Job Creation vs. Displacement) को लेकर सरकार को सक्रिय नीति बनानी होगी। अगर AI नौकरियों को प्रतिस्थापित करता है, तो सरकार को बेरोजगार हुए लोगों को नए कौशल सिखाने और आय सुरक्षा प्रणाली (Income Protection System) विकसित करने पर ध्यान देना होगा।

निष्कर्ष

निरंजन राजाध्यक्ष के अनुसार, भारत को AI नीति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। भारत को स्वदेशी AI मॉडल विकसित करने, भारतीय भाषाओं में AI को सशक्त बनाने और श्रमिकों के लिए नई संभावनाएँ तलाशने की दिशा में कदम उठाने होंगे।

झारखंड बजट 2025-26: प्रमुख घोषणाएँ और मुख्य आकर्षण

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हेमंत सोरेन सरकार ने झारखंड बजट 2025-26 पेश किया, जिसमें ₹1.45 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। इस बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी गई है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं।

शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा

  • 7 नए मेडिकल कॉलेज रांची, खूंटी, गिरिडीह, जमशेदपुर, धनबाद, देवघर और जामताड़ा में स्थापित किए जाएंगे।
  • 3 नए विश्वविद्यालय जमशेदपुर, गुमला और साहिबगंज में खोले जाएंगे।
  • 5 बिजनेस और मास कम्युनिकेशन स्कूल जमशेदपुर, पलामू, रांची, धनबाद और देवघर में स्थापित किए जाएंगे।
  • नवाचार केंद्र और एक स्टेट टेक्नोलॉजी पार्क का निर्माण किया जाएगा।

ग्रामीण विकास और कृषि

  • मंईया सम्मान योजना के लिए ₹13,363 करोड़ का आवंटन किया गया।
  • ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए ₹9841 करोड़ का बजट निर्धारित।
  • किसानों के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों हेतु ₹140 करोड़ की व्यवस्था।
  • तालाबों और डीप बोरिंग के लिए ₹203 करोड़ का प्रावधान।
  • फसल बीमा योजना के लिए ₹350 करोड़, जिससे किसानों को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।
  • कृषि उपज भंडारण के लिए ₹259 करोड़ का आवंटन।

बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास

  • 1200 किलोमीटर नई सड़कें और 10 उच्चस्तरीय पुल बनाए जाएंगे।
  • बोकारो, गिरिडीह, कांड्रा, सिंदरी, आदित्यपुर और देवघर में औद्योगिक बुनियादी ढांचे का विस्तार।
  • उद्यमियों और छोटे व्यापारियों के लिए MSME निदेशालय या MSME सेल की स्थापना।

स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाएँ

  • स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए नए मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों का उन्नयन।
  • जल संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं के लिए ₹2257 करोड़ का बजट।
  • चास, गिरिडीह, गुमला, लोहरदगा सहित कई जिलों में जलापूर्ति परियोजनाएँ।

संस्कृति और धार्मिक पर्यटन

  • रांची के तपोवन मंदिर को प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों को टूरिस्ट सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा।

सरकार की विकास के प्रति प्रतिबद्धता

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस बजट को “अबुआ बजट” नाम दिया गया है और यह राज्य की आर्थिक वृद्धि, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

झारखंड के विकास की नई दिशा

शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और कृषि में बड़े निवेश के साथ, झारखंड बजट 2025-26 का उद्देश्य राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना है।

रांची: मासूम के सपनों को कुचलने वाली एक रात—होटल में नाबालिग छात्रा से दरिंदगी, बेबस चीखें दीवारों में दफन

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रांची की एक स्याह रात ने एक मासूम बच्ची की जिंदगी पर ऐसा जख्म दिया, जिसे वक्त भी शायद कभी नहीं भर पाएगा। शुक्रवार की रात, लालपुर थाना क्षेत्र के एक बार में कुछ दोस्त जश्न मनाने गए थे। हंसी-ठिठोली, बातें और खिलखिलाहटों के बीच किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही घंटों में एक नाबालिग की दुनिया हमेशा के लिए बदल जाएगी।

लौटते वक्त, लालपुर चौक के पास अचानक एक हादसा हुआ—एक युवक सड़क पर गिर पड़ा, खून बहने लगा। दोस्त घबरा गए, उसे अस्पताल ले जाने की जल्दी में सबकुछ भूल गए। लेकिन इसी अफरा-तफरी में एक दरिंदा मौके की तलाश में था। नाबालिग लड़की जो सहमी हुई थी, उसे बहलाकर, घर छोड़ने का झांसा दिया। वह भरोसा कर बैठी, यह नहीं जानती थी कि उसके साथ अब तक की सबसे बड़ी बेवफाई होने जा रही थी।

लड़की को घर पहुंचाने के बजाय, वह दरिंदा उसे एक होटल में ले गया। होटल के कमरे में उसके मासूम सपनों को कुचल दिया गया। उसकी चीखें कमरे की दीवारों में घुटकर रह गईं, उसकी रुलाई सुनने वाला कोई नहीं था। उस रात उसके भरोसे का, उसकी मासूमियत का, उसके बचपन का खून हुआ।

शनिवार को जब वह टूटी हुई हालत में थाने पहुंची, तो उसकी कांपती आवाज़ ने पुलिस को भी झकझोर कर रख दिया। पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन क्या यह गिरफ्तारी उस नाबालिग की टूटी हुई आत्मा को वापस जोड़ पाएगी? क्या वह फिर से पहले की तरह जी पाएगी?

रांची की इस दरिंदगी ने फिर एक सवाल खड़ा कर दिया है—क्या हमारी बेटियां कभी सुरक्षित होंगी? या फिर हर रात कोई मासूम किसी दरिंदे की हवस का शिकार होती रहेगी?

ICC चैंपियंस ट्रॉफी: मैट हेनरी ने भारत के खिलाफ पांच विकेट लेकर शोएब अख्तर का रिकॉर्ड तोड़ा

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मैट हेनरी की घातक गेंदबाजी, भारत के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी में रचा इतिहास

दुबई: न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज मैट हेनरी ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के ग्रुप ए के अंतिम मुकाबले में भारत के खिलाफ घातक गेंदबाजी करते हुए एक अहम रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। हेनरी ने 5 विकेट झटककर भारत को 50 ओवरों में 249 रनों पर रोकने में अहम भूमिका निभाई।

मैट हेनरी चैंपियंस ट्रॉफी के 27 साल के इतिहास में भारत के खिलाफ पांच विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए हैं। इससे पहले पाकिस्तान के नावेद-उल-हसन और शोएब अख्तर ने 2004 में भारत के खिलाफ 4-4 विकेट लिए थे, जबकि जिम्बाब्वे के डगलस होंडो ने 2002 में श्रीलंका में खेले गए संस्करण में भारत के खिलाफ 4 विकेट झटके थे।

ICC ODI टूर्नामेंट में भारत के खिलाफ सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आंकड़े

हेनरी ने ICC के वनडे टूर्नामेंटों में भारत के खिलाफ तीसरा सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन किया। उनसे पहले ऑस्ट्रेलिया के कीन मैकले (6/39, 1983 विश्व कप) और डेमियन फ्लेमिंग (5/36, 1996 विश्व कप) भारत के खिलाफ सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आंकड़े दर्ज कर चुके हैं।

चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के खिलाफ सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन

  1. मैट हेनरी (NZ) – 5/42, दुबई 2025
  2. नावेद-उल-हसन (PAK) – 4/25, बर्मिंघम 2004
  3. शोएब अख्तर (PAK) – 4/36, बर्मिंघम 2004
  4. डगलस होंडो (ZIM) – 4/62, कोलंबो 2002

हेनरी ने ICC के सफेद गेंद (वनडे + T20) टूर्नामेंटों में भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में ब्रायन मैककेनी को भी पीछे छोड़ दिया। उनके अब भारत के खिलाफ तीन मुकाबलों में 9 विकेट हो गए हैं।

हेनरी की विनाशकारी गेंदबाजी ने भारत को बड़े स्कोर से रोका

न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, और मैट हेनरी ने टीम के आक्रमण की अगुवाई की। धीमी पिच पर उन्होंने शुरुआत में ही शुभमन गिल (2 रन) को आउट कर दिया, जिससे भारत तेज शुरुआत नहीं कर सका। इसके बाद उन्होंने विराट कोहली को भी पवेलियन भेजा, जब ग्लेन फिलिप्स ने पॉइंट पर शानदार कैच लपका।

हेनरी ने डेथ ओवर्स में भी अपना कहर बरपाया और हार्दिक पांड्या, रवींद्र जडेजा और मोहम्मद शमी को आउट किया। उनकी घातक गेंदबाजी के कारण भारत बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम रहा और 249/9 का स्कोर ही खड़ा कर पाया।

हेनरी की ऐतिहासिक गेंदबाजी के चलते न्यूजीलैंड ने इस महत्वपूर्ण मुकाबले में भारत को रोकने में सफलता पाई।

बर्फीली ऊंचाइयों में त्रासदी: उत्तराखंड हिमस्खलन ने ली 8 जानें, खोज अभियान गमगीन अंत तक पहुंचा

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देहरादून, 2 मार्च 2025:
उत्तराखंड के माणा गांव की ठहरी हुई शांति शुक्रवार को अचानक टूटी जब एक विनाशकारी हिमस्खलन ने 54 मजदूरों को पल भर में निगल लिया। देखते ही देखते बर्फ और बर्फीले मलबे की मोटी परतों के नीचे ज़िंदगियां दफन हो गईं। इसके बाद 53 घंटे तक राहत दलों ने जिंदगी और मौत की इस जंग में अपना सब कुछ झोंक दिया—कड़ाके की ठंड, खतरनाक इलाका, और किसी भी पल फिर से गिरने वाली बर्फ़ की मार झेलते हुए। लेकिन अंत में, 8 जिंदगियां हमेशा के लिए खो गईं।

रविवार को बचाव दलों ने आखिरी चार लापता मजदूरों के शव मलबे से निकाले। स्निफर डॉग्स, थर्मल इमेजिंग कैमरे और हेलीकॉप्टरों की मदद से बचाव कार्य तेज़ किया गया, लेकिन प्रकृति के क्रूर निर्णय को कोई नहीं बदल सका।

जिंदगी बचाने की जद्दोजहद, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी

यह विनाशकारी हिमस्खलन शुक्रवार को बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के कैंप पर आया, जिसने आठ कंटेनरों और एक शेड को पूरी तरह दफन कर दिया। पहले यह माना गया था कि कुल 55 मजदूर फंसे हैं, लेकिन एक मजदूर अनधिकृत अवकाश पर था और सौभाग्य से बच गया।

46 मजदूरों को किसी तरह जिंदा बचा लिया गया। इनमें से 45 को ज्योतिर्मठ के आर्मी अस्पताल में भर्ती किया गया है, जबकि एक को रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट के चलते एम्स ऋषिकेश ले जाया गया। लेकिन 8 लोगों की किस्मत में मौत लिखी थी।

हिमस्खलन में जान गंवाने वालों की सूची

शनिवार को जिन चार मजदूरों के शव मिले:

  • जीतेन्द्र सिंह (26) – बिलासपुर, उत्तर प्रदेश
  • अलोक यादव – कानपुर, उत्तर प्रदेश
  • मंजीत यादव – सरवन, उत्तर प्रदेश
  • मोहिंदर पाल (42) – कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

रविवार को जिन चार मजदूरों के शव बरामद हुए:

  • हरमेश चंद (31) – ऊना, हिमाचल प्रदेश
  • अनिल (21) – रुद्रपुर, उत्तराखंड
  • अशोक (28) – फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
  • अरविंद – देहरादून, उत्तराखंड

हर नाम के पीछे एक अधूरी कहानी है—सपने, परिवार, और उजड़ती जिंदगियां।

मुख्यमंत्री ने की बचाव अभियान की समीक्षा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार बचाव अभियान की निगरानी कर रहे थे। उन्होंने ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार (GPR), थर्मल इमेजिंग कैमरा, और विक्टिम लोकेटिंग कैमरा की मदद से लापता मजदूरों को खोजने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था,
“समय हाथ से निकल रहा है। सोमवार को मौसम फिर से बिगड़ सकता है, इसलिए हमें हर हाल में रविवार को लापता मजदूरों को ढूंढ निकालना होगा।”

लेकिन आठ परिवारों के लिए यह समय पहले ही खत्म हो चुका था।

धामी ने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और भारतीय सेना, ITBP, NDRF, SDRF समेत सभी राहत टीमों की कड़ी मेहनत की सराहना की। लेकिन इन प्रयासों के बावजूद, आठ घरों में मातम पसर चुका था।

हिमालय की गोद में अनंत शांति, लेकिन अपनों के लिए अंतहीन दर्द

बचाव दलों ने जब राहत अभियान को समेटा, तो बर्फ से ढके बीआरओ कैंप में एक गहरी खामोशी छा गई। पहाड़ों ने अपनी कीमत वसूल ली थी, उन्हें इंसानी दर्द से कोई सरोकार नहीं था।

दूर किसी गांव में माएं बिलख रही हैं, पत्नियां बेसुध पड़ी हैं, बच्चे अनाथ हो गए हैं।
अब उनके घरों में न अपनों की आवाज़ गूंजेगी, न ही रोज़ी-रोटी कमाने गए उन मेहनतकश मजदूरों की वापसी होगी।

हिमालय सुंदर है, दिव्य है—लेकिन आज, यह एक कब्रगाह बन चुका है।

इज़राइल ने गाजा में सहायता रोककर हमास पर दबाव डाला, संघर्ष विराम प्रस्ताव स्वीकारने की चेतावनी

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तेल अवीव: इज़राइल ने रविवार को गाजा पट्टी में सभी वस्तुओं और आपूर्ति की प्रविष्टि रोक दी और चेतावनी दी कि यदि हमास अमेरिका समर्थित नए संघर्ष विराम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो उसे “अतिरिक्त परिणामों” का सामना करना पड़ेगा।

हमास ने इज़राइल पर संघर्ष विराम समझौते को पटरी से उतारने की कोशिश करने का आरोप लगाया और सहायता कटौती को “युद्ध अपराध” और “स्पष्ट आक्रमण” बताया। हालांकि, दोनों पक्षों ने आधिकारिक रूप से संघर्ष विराम समाप्त होने की घोषणा नहीं की है।

संघर्ष विराम का पहला चरण शनिवार को समाप्त हो गया, जिसमें मानवीय सहायता में वृद्धि शामिल थी। द्वितीय चरण पर अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है, जिसमें हमास को शेष बंधकों को रिहा करने और इज़राइल को पूरी तरह से वापस हटने के लिए कहा गया था।

इज़राइल ने अमेरिका समर्थित प्रस्ताव को आगे बढ़ाया

इज़राइल के अनुसार, अमेरिका के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ द्वारा प्रस्तावित नए समझौते के तहत संघर्ष विराम रमजान और यहूदी त्योहार पासओवर (20 अप्रैल तक) तक बढ़ाया जाएगा।

इस प्रस्ताव के तहत, हमास को पहले दिन आधे बंधकों को रिहा करना होगा और बाकी बंधकों को तभी छोड़ा जाएगा जब एक स्थायी संघर्ष विराम पर सहमति बनेगी। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इसकी पुष्टि की।

इज़राइल के विदेश मंत्री गिडोन सार ने कहा कि इज़राइल अगली वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन इसे बंधकों की और रिहाई के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

हमास ने चेतावनी दी, मिस्र ने नए प्रस्ताव को नकारा

हमास ने कहा कि संघर्ष विराम समझौते को रोकने या टालने की कोई भी कोशिश “बंधकों के लिए मानवीय परिणाम” ला सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी बंधकों को एक साथ मुक्त करने के लिए स्थायी संघर्ष विराम और इज़राइली सेना की वापसी आवश्यक है।

मिस्र के एक अधिकारी ने बताया कि हमास और मिस्र इज़राइल के इस नए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि यह युद्ध समाप्त किए बिना बंधकों की वापसी पर केंद्रित है।

संघर्ष विराम के दौरान भी हिंसा जारी

पहले छह सप्ताह के संघर्ष विराम के तहत, हमास ने 25 इज़राइली बंधकों को मुक्त किया और आठ शव लौटाए, जबकि इज़राइल ने लगभग 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ा। लेकिन इस दौरान कई विवाद भी सामने आए, जिसमें संघर्ष विराम उल्लंघन के आरोप शामिल थे।

इज़राइली हवाई हमलों में रविवार को उत्तरी गाजा में दो फिलिस्तीनी मारे गए। इज़राइल ने दावा किया कि वे बारूदी सुरंग लगा रहे थे।

गाजा में मानवीय संकट गहराया

संयुक्त राष्ट्र और कई मानवाधिकार संगठनों ने गाजा में गंभीर खाद्य संकट की चेतावनी दी है। इज़राइल पर पहले भी सहायता रोकने के आरोप लगे थे, और बाइडेन प्रशासन लगातार अधिक मानवीय सहायता की अनुमति देने का दबाव बना रहा था।

युद्ध में अब तक 48,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिसमें आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं। गाजा की 90% आबादी विस्थापित हो चुकी है और अधिकांश लोग भोजन और आवश्यक आपूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर हैं।

न्यूजीलैंड के खिलाफ 300वें वनडे के साथ विराट कोहली एलीट क्लब में शामिल हो गए

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विराट कोहली: 300वें वनडे में इतिहास रचते हुए बने क्रिकेट के महायोद्धा

भारतीय क्रिकेट के बेताज बादशाह विराट कोहली ने 2 मार्च 2025 को न्यूजीलैंड के खिलाफ दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेलते हुए अपने करियर का 300वां एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ODI) मुकाबला पूरा कर लिया। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाने वाला क्षण बन गया। कोहली अब 300 या उससे अधिक ODI खेलने वाले भारत के सातवें महान खिलाड़ी बन गए हैं, एक ऐसी उपलब्धि जिसे हासिल करना हर क्रिकेटर का सपना होता है।

इससे पहले, यह गौरवमयी उपलब्धि सचिन तेंदुलकर (463 मैच), महेंद्र सिंह धोनी (347 मैच), राहुल द्रविड़ (340 मैच), मोहम्मद अजहरुद्दीन (334 मैच), सौरव गांगुली (308 मैच) और युवराज सिंह (301 मैच) जैसे दिग्गजों के नाम थी। लेकिन कोहली की इस उपलब्धि ने उनकी महानता को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया है।

शानदार करियर, बेमिसाल रिकॉर्ड

कोहली ने अगस्त 2008 में श्रीलंका के खिलाफ दांबुला में अपने वनडे करियर की शुरुआत की थी। पिछले 17 वर्षों में, उन्होंने अपनी मेहनत, जुनून और शानदार प्रदर्शन से क्रिकेट की दुनिया में एक अमिट छाप छोड़ी है। अपने 300वें मैच से पहले ही उन्होंने 299 मुकाबलों में 58.20 की अविश्वसनीय औसत से 14,085 रन बना लिए थे, जिसमें 51 शतक और 73 अर्धशतक शामिल हैं।

हाल ही में, कोहली ने पाकिस्तान के खिलाफ एक नाबाद 100 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर भारत को 243 रनों का लक्ष्य 45 गेंद शेष रहते हासिल करने में मदद की थी। इस दौरान उन्होंने सचिन तेंदुलकर का सबसे तेज़ 14,000 ODI रन बनाने का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया, जिससे यह साबित हो गया कि वह केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि क्रिकेट के आधुनिक युग के शिल्पकार हैं।

तीनों फॉर्मेट में 100 मैच खेलने वाले पहले खिलाड़ी

विराट कोहली ने एक और कीर्तिमान स्थापित करते हुए क्रिकेट इतिहास में वह पहले खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने 300 वनडे, 100 टेस्ट और 100 टी20 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। यह उपलब्धि क्रिकेट के हर फॉर्मेट में उनकी श्रेष्ठता और निरंतरता को दर्शाती है।

कोहली की यह सफलता न केवल भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरी क्रिकेट बिरादरी के लिए प्रेरणादायक कहानी है। उनके जुनून, प्रतिबद्धता और अदम्य जज़्बे ने उन्हें एक जीवंत किंवदंती बना दिया है। आने वाले समय में वह और कितने कीर्तिमान स्थापित करेंगे, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन एक बात तय है—क्रिकेट का यह शेर मैदान पर जब तक रहेगा, तब तक सुनहरे पन्नों में इतिहास लिखता रहेगा

5,000 कब्रें और गिनती: मैसूर की नीलमम्मा ने 70 साल की उम्र में खोदी, सम्मान की लड़ाई

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मैसूरु (कर्नाटक): 30 वर्षों से, 70 वर्षीय नीलम्मा मृतकों के बीच जीवन बिता रही हैं, मैसूरु के एक कब्रिस्तान में कब्रें खोद रही हैं और दाह संस्कार के गड्ढे तैयार कर रही हैं। अब तक उन्होंने 5,000 से अधिक शवों को दफनाया है और इस जीवन से उन्हें कोई शिकायत नहीं है। यह कहानी है संघर्ष, बलिदान और गरिमा की, जहां नीलम्मा ईटीवी भारत से अपनी यात्रा के बारे में बताती हैं कि कैसे यह कब्रिस्तान, जहां लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने आते हैं, उनका घर और जीवनयापन का साधन बन गया।

नीलम्मा की यह यात्रा एक त्रासदी से शुरू हुई। मूल रूप से संतहे सरागुर की रहने वाली, वह 1975 में मैसूरु आईं, जब उन्होंने एक कब्रिस्तान में काम करने वाले व्यक्ति से शादी की। 2005 में उनके पति का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया, जिससे वह दो छोटे बच्चों के साथ अकेली रह गईं। इस गहरे दुख के बीच उन्होंने खुद को संभालते हुए बच्चों को पालने की जिम्मेदारी उठाई।

अपने पति का अंतिम संस्कार करने के बाद, उन्होंने खुद कमाने और सम्मानपूर्वक जीवनयापन करने के लिए उनकी राह पकड़ने का फैसला किया। “एक कब्र खोदने में लगभग तीन घंटे लगते हैं, और इसकी लंबाई-चौड़ाई लगभग तीन फीट होती है,” वह बताती हैं। “पहले मैं ₹150 चार्ज करती थी, लेकिन अब ₹1,500 लेती हूं, हालांकि मैं पैसे की मांग नहीं करती, जो लोग प्यार से देते हैं वही स्वीकार करती हूं।”

नीलम्मा आज भी कब्रिस्तान में ही रहती हैं, क्योंकि उनके पास कहीं और जाने की जगह नहीं है। “लोग कहते हैं कि कब्रिस्तान भूतिया होते हैं, लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता। मेरे लिए यह एक पवित्र स्थान है। मैं यहां अपने परिवार के साथ रहती हूं, जिसमें मेरा बेटा, बहू और पोते-पोतियां भी शामिल हैं,” वह मुस्कराते हुए कहती हैं।

नीलम्मा का हौसला उम्र के साथ कम नहीं हुआ है। “मैं जब तक जिंदा हूं, यही काम करूंगी। लोग मुझसे पूछते हैं कि अब काम करने की क्या जरूरत है, लेकिन यह मेरी जीविका का एकमात्र साधन है और मुझे काम करना ही होगा,” वह कहती हैं।

उनके दो बेटे हैं – एक बेंगलुरु में काम करता है, जबकि दूसरा उनके साथ कब्रें खोदने में मदद करता है। “हमने फैसला किया है कि हम अपनी देह मैसूरु मेडिकल कॉलेज को दान करेंगे और जल्द ही औपचारिकताएं पूरी करेंगे,” वह गर्व से कहती हैं।

हर दिन वह अपने पति की कब्र पर कुछ समय बिताती हैं। “मेरी इच्छा है कि मैं इस दुनिया से ऐसे जाऊं कि किसी पर बोझ न बनूं। सब कुछ ईश्वर की इच्छा से होता है और मैं उसी में समर्पित हूं,” वह कहती हैं और सरकार से अनुरोध करती हैं कि उनके पोते-पोतियों को अच्छे स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिले और उनके परिवार के लिए एक घर की व्यवस्था हो

ट्रंप ने अंग्रेजी को अमेरिका की आधिकारिक भाषा घोषित करने के लिए आदेश पर हस्ताक्षर किए

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1 मार्च, 2025 को, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अंग्रेजी को संयुक्त राज्य की आधिकारिक भाषा के रूप में नामित करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए।

यह ऐतिहासिक कदम लगभग 250 वर्षों में पहली बार है कि राष्ट्र ने एक आधिकारिक भाषा स्थापित की है।

कार्यकारी आदेश सरकारी एजेंसियों और संघीय वित्त पोषण प्राप्त करने वाले संगठनों को यह निर्णय लेने की अनुमति देता है कि क्या अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में दस्तावेज़ और सेवाओं की पेशकश जारी रखी जाए। यह प्रभावी रूप से पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के प्रशासन के उस जनादेश को खारिज कर देता है जिसके तहत गैर-अंग्रेजी बोलने वालों के लिए भाषा सहायता की आवश्यकता थी।

प्रशासन का तर्क है कि अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित करने से संचार सुव्यवस्थित होगा, साझा राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ किया जाएगा और एक अधिक एकजुट और कुशल समाज का निर्माण होगा। आदेश इस बात पर जोर देता है कि नए अमेरिकियों को अंग्रेजी सीखने और अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने से वे अमेरिकी सपने को हासिल करने, अपने समुदायों में शामिल होने और राष्ट्रीय परंपराओं में भाग लेने के लिए सशक्त होंगे।

इस संघीय पदनाम से पहले, 30 से अधिक राज्यों ने पहले ही अंग्रेजी को अपनी आधिकारिक भाषा बनाने के लिए कानून पारित कर दिया था।
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ऐतिहासिक रूप से, जबकि अंग्रेजी प्रमुख भाषा रही है, संयुक्त राज्य अमेरिका ने संघीय स्तर पर कभी भी आधिकारिक भाषा नामित नहीं की थी।

इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है. समर्थकों का मानना ​​है कि यह एकता को बढ़ावा देगा और नागरिक जुड़ाव को सुविधाजनक बनाएगा, जबकि आलोचकों का तर्क है कि यह गैर-अंग्रेजी भाषी समुदायों को हाशिए पर धकेल सकता है और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को कम कर सकता है। ट्रम्प के उद्घाटन के तुरंत बाद व्हाइट हाउस वेबसाइट के स्पेनिश-भाषा संस्करण को हटाने से हिस्पैनिक वकालत समूहों और अन्य लोगों के बीच चिंताएं बढ़ गई हैं।

नासा के बंगाली वैज्ञानिक ने सुनीता विलियम्स, एलियन जीवन और अंतरिक्ष के रहस्यों पर किए बड़े खुलासे

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कोन्नागर से कैलिफोर्निया तक का सफर:
गौतम चटर्जी, जो कभी पश्चिम बंगाल के कोन्नागर के एक साधारण परिवार से आते थे, आज नासा के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। बचपन में बंगाली माध्यम स्कूल में पढ़ाई करने वाले चटर्जी ने आगे चलकर अमेरिका में पीएचडी पूरी की और नासा से जुड़ गए। उन्होंने बताया कि उनका यह सफर आसान नहीं था, लेकिन विज्ञान के प्रति उनका जुनून और कड़ी मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

नासा की असली खोज:
गौतम चटर्जी के अनुसार, नासा का असली कार्य केवल अंतरिक्ष में नई तकनीकों का विकास करना नहीं है, बल्कि जीवन और जल की उत्पत्ति जैसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रश्नों के उत्तर खोजना भी है। उन्होंने कहा, “क्या जीवन किसी उल्का पिंड के साथ पृथ्वी पर आया? क्या मंगल या अन्य ग्रहों पर कभी पानी या जीवन था?” इन सवालों के जवाब खोजने के लिए नासा लगातार अनुसंधान कर रहा है।

मंगल ग्रह पर जीवन की खोज:
जब उनसे पूछा गया कि क्या मंगल ग्रह पर जीवन संभव है, तो उन्होंने बताया कि नासा ने कई छोटे और बड़े रोवर्स मंगल पर भेजे हैं, जो लगातार शोध कर रहे हैं। 2020 में भेजे गए एक रोवर को ऐसे स्थान पर उतारा गया था, जहां कभी झील थी। हालांकि, अभी तक वहां जीवन का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसके अलावा, मंगल पर हेलिकॉप्टर और ड्रोन भेजे गए हैं, ताकि वे उन जगहों पर जाकर जानकारी एकत्र कर सकें, जहां रोवर नहीं पहुंच सकता।

एलियन के अस्तित्व पर वैज्ञानिक की राय:
गौतम चटर्जी ने स्पष्ट किया कि अब तक पृथ्वी के बाहर जीवन का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि, कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि ब्रह्मांड में अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना हो सकती है। उन्होंने कहा, “हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या कभी मंगल ग्रह पर जीवन था।” इसके लिए नासा लगातार नए उपकरण और मिशन विकसित कर रहा है।

सुनीता विलियम्स और अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी:
सुनीता विलियम्स सहित अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी को लेकर चिंता बनी हुई थी। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यान के तकनीकी कारणों से समस्या उत्पन्न हुई थी, लेकिन अब निर्णय लिया गया है कि वे 19 मार्च को एक नए कैप्सूल के माध्यम से पृथ्वी पर लौटेंगे। इस घटना से भविष्य में मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए आवश्यक तैयारियों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।

ISRO की सफलता पर गर्व:
गौतम चटर्जी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि ISRO लगातार नए प्रयोग कर रहा है और नासा के साथ भी मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन का जिक्र किया, जो प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी और कृषि में सुधार के लिए उपयोगी साबित होगा। उन्होंने कहा, “यह मिशन भारत के लिए गर्व की बात है, क्योंकि यह वैज्ञानिक उपलब्धियों के क्षेत्र में हमारी प्रगति को दर्शाता है।”

अंतरिक्ष प्रदूषण की चिंता:
गौतम चटर्जी ने अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि दुनिया की कई अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार नए स्पेसक्राफ्ट भेज रही हैं, लेकिन कोई भी देश अभी तक अंतरिक्ष को साफ रखने की दिशा में विशेष प्रयास नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्पेस डेब्रिस (अंतरिक्ष कबाड़) को साफ करने के लिए संयुक्त रूप से काम करने की जरूरत है, लेकिन यह एक महंगा और जटिल कार्य है।

बचपन की यादें और विनम्रता:
अपने बचपन को याद करते हुए, चटर्जी ने बताया कि उनकी मां हमेशा उन्हें सिखाती थीं कि सफलता के बावजूद जमीन से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब मैंने अपनी मां को नासा में नौकरी मिलने की खबर दी, तो उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि तुम आकाश में उड़ रहे हो, लेकिन हमेशा धरती से जुड़े रहो।” आज भी वे अपनी मां की इस सीख को अपने जीवन का मूलमंत्र मानते हैं।

रांची: रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया दारोगा, ACB ने किया गिरफ्तार

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रांची के कोतवाली थाना के दारोगा ऋषिकांत को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने ₹5,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। दारोगा पर आरोप है कि वह जब्त मोबाइल मुक्त करने के एवज में एनओसी देने के लिए रिश्वत मांग रहा था।

कैसे पकड़ा गया दारोगा?

  • शिकायतकर्ता ओम शंकर गुप्ता, जो झारखंड विधानसभा चुनाव (2024) में हटिया से निर्दलीय प्रत्याशी थे, ने ACB में लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी।
  • उनके खिलाफ नवंबर 2024 में कोतवाली थाने में मामला दर्ज हुआ था, और इसी दौरान उनका मोबाइल जब्त कर लिया गया था।
  • जमानत मिलने के बाद जब उन्होंने मोबाइल छुड़ाने की प्रक्रिया शुरू की, तो दारोगा ने ₹5,000 की रिश्वत मांगी।
  • शिकायत की जांच के बाद 27 फरवरी 2025 को ACB ने दारोगा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
  • 28 फरवरी 2025 को ACB की टीम ने महिला थाना परिसर में जाल बिछाया, और जैसे ही दारोगा ने रिश्वत ली, उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।

ACB की आगे की कार्रवाई

अब ACB की टीम दारोगा ऋषिकांत के ठिकानों की तलाशी लेकर भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य सबूत इकट्ठा कर रही है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि दारोगा ने केस मैनेज करने के लिए ₹2 लाख की मांग की थी और कहा था कि ₹20,000 नहीं देने पर केस लंबा चलेगा और सजा दिलवा देंगे

अमिताभ बच्चन से पूछा गया उनकी जाति का सवाल, बिग बी ने दिया करारा जवाब

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सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने हाल ही में ‘कौन बनेगा करोड़पति 16’ के लेटेस्ट एपिसोड में उस वाकये को साझा किया जब उनसे उनकी जाति पूछी गई थी। अमिताभ के मुताबिक, यह सवाल जनगणना टीम ने किया था, और उन्होंने इस पर बेहद करारा जवाब दिया था।

जातिवाद पर अमिताभ बच्चन की प्रतिक्रिया

कोलकाता की प्रतियोगी युबासना कापस जब हॉटसीट पर बैठीं, तो उन्होंने जातिवाद और सामाजिक भेदभाव को लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि वह ऐसी फिल्मों पर काम करना चाहती हैं जो जातिगत भेदभाव और समाज में फैली रूढ़ियों को तोड़ सकें।

अमिताभ बच्चन ने उनकी इस सोच की सराहना की और खुद के साथ हुआ एक अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, “जातिवाद एक पुरानी समस्या है और यह देखकर दुख होता है कि यह आज भी मौजूद है। खासतौर पर जब जनगणना टीम आती है, तो वे अन्य सभी जानकारियों के साथ आपकी जाति के बारे में भी पूछते हैं।”

अमिताभ बच्चन का करारा जवाब

जब उनसे उनकी जाति पूछी गई, तो उन्होंने बड़े ही सटीक अंदाज में जवाब दिया, “मेरा कोई धर्म नहीं, मेरी जाति भारतीय है!” यह बयान सुनकर सेट पर मौजूद दर्शकों ने जोरदार तालियों से उनका समर्थन किया।

सातवीं के छात्र को पढ़ाती थी फिजिक्स, लेने लगी बायोलॉजी क्लास! रटवाया ‘आई लव यू’ का फॉर्मूला

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भारत में शिक्षक को भगवान का दर्जा दिया जाता है। गुरु का कर्तव्य होता है कि वह अपने शिष्य को सही-गलत का ज्ञान कराए और एक नैतिक मार्गदर्शन दे। लेकिन कुछ मामलों में, शिक्षक अपनी सीमाओं को भूल जाते हैं और विवादों में फंस जाते हैं।

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक महिला शिक्षक ने ऐसा दावा किया जिसने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। इस टीचर का कहना है कि उसे अपने सातवीं कक्षा के छात्र से प्यार हो गया है। उसने स्वीकार किया कि पढ़ाते समय ही उसे महसूस हुआ कि छात्र उसे अलग नजर से देखता है, और धीरे-धीरे उसे भी यही एहसास होने लगा कि यह सिर्फ छात्र-शिक्षक का रिश्ता नहीं बल्कि कुछ और है।

क्लासरूम में शुरू हुआ प्यार

महिला शिक्षक ने अपने कथित ‘प्रेम’ के बारे में बताते हुए कहा कि जब वह पढ़ा रही थी, तो उसने नोटिस किया कि छात्र उसकी बातों को बहुत ध्यान से सुनता था। पहले उसे लगा कि यह उसकी पढ़ाई में रुचि की वजह से है, लेकिन बाद में उसे एहसास हुआ कि यह एक अलग कनेक्शन है। धीरे-धीरे उसके भी मन में प्रेम के भाव जागने लगे और दोनों के बीच एक अलग तरह की बॉन्डिंग बनने लगी।

सोशल मीडिया पर आक्रोश

टीचर द्वारा यह खुलासा करने के बाद सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई लोगों ने इसे शिक्षक-छात्र के रिश्ते पर कलंक बताया और टीचर की आलोचना की। एक यूजर ने लिखा कि यदि यह मामला भारत का है, तो महिला पर POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज होना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने मजाक में कहा कि अब इस छात्र को परीक्षा में पूरे अंक मिल जाएंगे।

नजमूल हवलदार की रिहाई पर आदिवासियों का आक्रोश, बोले- संताल से बांग्लादेशी घुसपैठियों को करेंगे बाहर

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Santhal Tribe Protest in Dumka: संताल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आदिवासी समुदाय एकजुट हो रहा है। दुमका केंद्रीय कारा से नजमूल हवलदार की रिहाई के बाद संताल समाज में भारी आक्रोश देखा गया। इस विरोध में आदिवासी सांवता सुसार आखड़ा संताल परगना की अगुवाई में हजारों की संख्या में संताल युवाओं ने मोटरसाइकिल रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया।

आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार और प्रशासन की सह पर बांग्लादेशी घुसपैठिये आदिवासी समाज की जमीन और संस्कृति पर कब्जा करने की साजिश कर रहे हैं। आदिवासी सांवता सुसार आखड़ा के संताल परगना संयोजक चंद्रमोहन हांसदा ने स्पष्ट किया कि संताल समाज अब चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा, “हमने अपने ईष्ट देवता मारांग बुरू के दिए तीर-धनुष को फिर से उठा लिया है और अब एक-एक घुसपैठिए को संताल परगना से खदेड़ा जाएगा।”

गैर-आदिवासियों से विवाह पर भी होगा बड़ा फैसला

संयोजक चंद्रमोहन हांसदा ने बताया कि जल्द ही झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा के संताल आदिवासियों का राष्ट्रीय महासम्मेलन बुलाया जाएगा। इसमें गैर-आदिवासियों से विवाह करने वाले आदिवासियों के भविष्य पर निर्णय लिया जाएगा। साथ ही, आदिवासी आरक्षित सीटों से पंचायत समिति, जिला परिषद, एमएलए और एमपी चुनाव लड़ने वालों पर भी अहम फैसला लिया जाएगा।

रैली से पहले संताल रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना

प्रदर्शन से पहले दुमका के आउटडोर स्टेडियम में संताल समुदाय के लोगों ने परंपरागत रूप से जाहेर डार एवं महुआ डार गाड़कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद संताल समाज के युवाओं ने बाइक जुलूस निकाला, जो डीसी चौक, तिलका मांझी चौक, टीन बाजार चौक होते हुए सिदो-कान्हू पोखरा चौक पर समाप्त हुआ।

बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ संकल्प

सिदो कान्हू पोखरा चौक पर आदिवासी नेताओं ने सिदो-कान्हू मुर्मू की प्रतिमा की पूजा की और संकल्प लिया कि वे अपने क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों को पैर नहीं जमाने देंगे। इस विरोध प्रदर्शन में संताल समुदाय के कई प्रमुख नेता और विभिन्न जिलों—जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा, देवघर और दुमका से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

झारखंड में शुरू होगी राज्य स्वास्थ्य बीमा योजना, 5 लाख तक फ्री इलाज; जानें किसे मिलेगा फायदा

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झारखंड सरकार ने शुक्रवार को राज्य स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत की, जिससे सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और विश्वविद्यालय के शिक्षकों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। इस योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा झारखंड विधानसभा के सभागार में किया गया।

योजना के मुख्य बिंदु

  • योजना के तहत राज्य सरकार के कर्मियों, पेंशनरों, झारखंड विधानसभा के सदस्यों, पूर्व सदस्यों, विश्वविद्यालय शिक्षकों और कर्मचारियों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा।
  • गंभीर बीमारियों की स्थिति में बीमा राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक कर दी जाएगी।
  • विशेष परिस्थिति में मरीज को एयर एंबुलेंस और वायुयान यात्रा की सुविधा भी मिलेगी।
  • सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए टाटा एआईजी (Tata AIG) बीमा कंपनी का चयन किया है।
  • झारखंड के प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों को योजना में शामिल किया जाएगा।

किन्हें मिलेगा योजना का लाभ?

राज्य सरकार द्वारा संचालित इस योजना के लाभार्थी निम्नलिखित होंगे:

राज्य सरकार के स्थायी कर्मचारी
राज्य पेंशनभोगी और सेवानिवृत्त कर्मी
झारखंड विधानसभा के वर्तमान और पूर्व सदस्य
झारखंड विश्वविद्यालयों के शिक्षक और कर्मचारी
राज्य के सरकारी उपक्रमों के कर्मी

गंभीर बीमारियों के लिए अतिरिक्त सहायता

अगर किसी लाभार्थी को गंभीर बीमारी हो जाती है, तो सरकार बीमा राशि 10 लाख रुपये तक बढ़ा सकती है। इसके अलावा, यदि किसी कर्मचारी को तुरंत बेहतर इलाज की जरूरत होती है, तो उसे एयर एंबुलेंस और वायुयान यात्रा की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।


शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम – सरकारी स्कूलों को मिलेगा टैब

राज्य सरकार ने शिक्षा सुधार के लिए टैब वितरण योजना की भी शुरुआत की। इस योजना के तहत राज्य के 28,945 प्राथमिक विद्यालयों को टैबलेट वितरित किए जाएंगे।

इस योजना के तहत:

📌 प्राथमिक विद्यालयों में 30 या अधिक छात्रों की उपस्थिति होने पर उन्हें टैब मिलेगा।
📌 शिक्षकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति, रिपोर्टिंग, ऑनलाइन प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षण के लिए टैब का उपयोग किया जाएगा।
📌 शिक्षकों के लिए हर साल 50 घंटे का अनिवार्य प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह कदम झारखंड के शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाने में मदद करेगा और छात्रों को आधुनिक तकनीक से पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा।


पिछले 5 वर्षों में झारखंड की राजस्व वृद्धि

राज्य सरकार की नई योजनाओं को लागू करने के लिए वित्तीय स्थिति को मजबूत किया गया है। पिछले 5 वर्षों में झारखंड का राजस्व कर संग्रह 58,417 करोड़ से बढ़कर 87,928 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

2019-20 में कुल राजस्व – 58,417 करोड़ रुपये
2023-24 में कुल राजस्व – 87,928 करोड़ रुपये

इस वृद्धि से साफ है कि झारखंड सरकार ने अपने स्रोतों से अधिक राशि वसूलने में सफलता पाई है और सरकार की योजनाओं को वित्तीय मजबूती मिल रही है।