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रविशंकर प्रसाद ने दिया पीएम केयर फंड का हिसाब, कांग्रेस पर बरसे

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मोदी सरकार पर अब तक तथ्यों के साथ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने की नहीं हुई किसी की हिम्मत 

नई दिल्ली (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ने पहले दिन से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश की एकता को तोड़ने की कोशिश की है। प्रसाद ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ़ अभी तक तथ्यों के साथ एक भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाने की किसी की भी हिम्मत नहीं हुई। 

रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राहुल गांधी ने पहले दिन से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश की एकता को तोड़ने की कोशिश की है।जब लॉकडाउन लगाया गया तब राहुल गांधी ल ने कहा कि लॉकडाउन से क्या होगा? जबकि हकीकत ये है कि राहुल गांधी की बात उनकी राजस्थान और पंजाब सरकार भी नहीं सुनती थी वहां लॉकडाउन पहले की कर दिया गया था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें पीएम केयर फंड को राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी। आज कोर्ट ने लंबी बहस के बाद इस मांग को ठुकराकर याचिका खारिज कर दी।

रविशंकर ने कहा कि पीएम केयर्स फंड से अब तक 3,100 करोड़ रुपये कोरोना के खिलाफ लड़ाई में दिए गए हैं, जिसमें से 2000 करोड़ रुपये वेंटिलेटर्स के लिए दिए गए हैं। जबकि 50 हजार वेंटिलेटर्स पीएम केयर्स फंड के माध्यम से उपलब्ध कराए गए हैं, जो आजादी के बाद से आज तक सर्वाधिक हैं। वरिष्ठ नेता ने कहा कि पीएम केयर्स फंड से 1000 करोड़ रुपये राज्यों को प्रवासी मजदूरों की व्यवस्था के लिए दिए गए। 100 करोड़ रुपये कोरोना की वैक्सीन के अनुसंधान के लिए दिए गए है। रविशंकर ने कहा कि पीएम केयर्स फंड रजिस्टर्ड पब्लिक ट्रस्ट है, जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं और ये कोविड-19 जैसी आपातकाल स्थितियों के लिए बनाया गया है।  

भाजपा नेता ने कांग्रेस के शीर्ष परिवार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राजीव गांधी फाउंडेशन एक फैमिली फाउंडेशन है और सभी को मालूम है कि उसे चीन से भी मदद मिली थी। उस फाउंडेशन की रिपोर्ट में भारत के बाजार को चीनी उत्पाद के लिए खोलने की बात भी कही गई थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह बहुत गर्व के साथ कहना चाहते हैं कि मोदी सरकार पर तथ्यों के साथ अभी तक एक भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाने की किसी की भी हिम्मत नहीं हुई। वही ईमानदारी पीएम केयर्स फंड में भी दिखाई पड़ती है। उन्होंने कहा कि भारत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में कोरोना से जंग लड़ी है। आज भारत का रिकवरी रेट 70 प्रतिशत से ज्यादा है। मृत्यु दर भी वैश्विक मृत्यु दर की तुलना में काफी कम है। 

जम्मू

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नाहन (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के बारामुला में सोमवार को आतंकवादियों से मुठभेड़ में सिरमौर के धारटीधार इलाके का 24 वर्षीय जवान शहीद हो गया है। क्षेत्र की भनेत हल्दवाड़ी पंचायत के ठाकर गुआना गांव के प्रशांत ठाकुर सेना की ग्रैडिनस कंपनी में तैनात थे। आतंकवादियों से लोहा लेते हुए मुठभेड़ के दौरान वह गोली लगने से शहीद हो गए। 

डीसी सिरमौर डॉ. आरके परूथी ने बताया है कि शहीद का पार्थिव शरीर मंगलवार शाम तक पैतृक गांव पहुंचेगा। प्रशांत ठाकुर ने जब आतंकवादियों से खुद को घिरा पाया तो उन्होंने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इसी मुठभेड़ के दौरान आतंकियों की गोली लगने से प्रशांत की मौत हो गई। उधर, रेणुका के विधायक विनय कुमार ने शहीद के परिवार के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हुए दिवंगत आत्मा को शांति के लिए भगवान से प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि देश के लिए प्रशांत का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। नाहन के विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने भी सैनिक की शहादत पर गहरा दुख जताया है।

ईडी ने सुशांत सिंह राजपूत के पिता का दर्ज किया बयान, केके का दावा

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नई दिल्ली (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ में बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने दावा किया है कि उनके बेटे के अकाउंट से 15 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। सुशांत के खाते से रुपये उन खातों में ट्रांसफर किए गए हैं, जिनका उनके बेटे से कोई संबंध नहीं था। ईडी ने केके सिंह का बयान दर्ज कर अब उनसे इन आरोपों को साबित करने के लिए सबूत देने को कहा है। इसके साथ ही ईडी ने सुशांत के पूर्व बिजनेस पार्टनर वरुण माथुर को तलब किया है।

ईडी अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मामले में जांच कर रही है। इस मामले में वह अब तक कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है। सोमवार को इसी कड़ी में ईडी ने सुशांत के पिता केके सिंह का बयान दर्ज किया। सू्त्रों के मुताबिक ईडी को दिए बयान में केके सिंह ने बताया कि उनके बेटे के अकाउंट से 15 करोड़ रुपये उन बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए हैं, जिनका उनके बेटे से कोई संबंध नहीं था। केके सिंह के मुताबिक ये बैंक खाते अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के सदस्यों के हो सकते हैं।

ईडी ने सोमवार को केके सिंह से पहले अभिनेत्री रिया के सीए रितेश शाह को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन वह जांच में शामिल नहीं हुए। इससे पहले सुशांत की बहन मीतू सिंह को ईडी के अधिकारियों ने पूछताछ के लिए बुलाया था। उसका बयान साढ़े छह घंटे से अधिक समय तक दर्ज किया गया। अब उनके पिता ईडी द्वारा पूछताछ किए जाने वाले परिवारिक सदस्यों में से दूसरे हैं। केके सिंह से ईडी ने दिल्ली में करीब पांच घंटे तक पूछताछ की और उनके बयान को रिकॉर्ड किया गया।

ईडी अब इस मामले में रिया चक्रवर्ती के सीए रितेश शाह का बयान दर्ज करेगी। वह शायद मुंबई ईडी कार्यालय में पेश हो सकते हैं। उसके बाद रिया चक्रवर्ती और उनके फैमिली मेंबर्स को पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा। वैसे रिया एंड फैमिली से ईडी दो बार पहले भी पूछताछ कर चुकी है लेकिन सूत्रों का दावा है कि ईडी उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं है। रिया के खर्चे और इनकम टैक्स रिटर्न्स की डिटेल्स बैंक स्टेटमेंट से मैच नहीं करती। इसके अलावा ईडी को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की फॉरेंसिक रिपोर्ट की भी प्रतीक्षा है, ताकि जो भी मैसेज डिलीट हुए हैं उनकी डिटेल मिल सके। साथ ही व्हाट्सएप कॉल डिटेल भी प्राप्त हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि 14 जून को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मुंबई स्थित अपने अपार्टमेंट में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। इस संबंध में सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना में रिया चक्रवर्ती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उसके बाद केके सिंह ने बताया कि सुशांत के खाते से 15 करोड़ रुपये दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए हैं, इसके बाद ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग कोण से जांच कर रही है।

पीएम केयर फंड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राहुल के मंसूबों पर फिरा पानी: नड्डा

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नई दिल्ली (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पीएम केयर्स फंड के खिलाफ दायर याचिका खारिज करने के फैसले के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि इस फैसले से कांग्रेस नेता के मंसूबों पर पानी फिर गया।

नड्डा ने मंगलवार को एक के बाद एक कई ट्वीट कर कहा, ‘पीएम केयर्स पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राहुल गांधी के नापाक मंसूबों पर पानी फिर गया है। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों के बुरे इरादे और दुर्भावनापूर्ण प्रयासों के बावजूद सच्चाई दिखती है।’ उन्होंने कहा कि पीएम केयर में भारी योगदान देने वाले आम आदमी ने राहुल गांधी की बात को बार-बार खारिज किया है। अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी अपना फैसला सुना दिया है। नड्डा ने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी और एक्टिविस्टों की उनकी आर्मी अब भी अपने तौर तरीकों में सुधार करेगी।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘गांधी परिवार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) को दशकों से व्यक्तिगत संपत्ति के रूप में संचालित किया। पीएमएनआरएफ में देशवासियों के मेहनत से एकत्रित धन को अपने परिवार के ट्रस्टों को ट्रांसफर कर दिया है। देश बहुत अच्छी तरह से जानता है कि पीएम केयर्स फंड के खिलाफ अभियान कांग्रेस द्वारा अपने पापों को धोने का एक प्रयास है।’
इससे पूर्व भाजपा के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस व उसके शीर्ष परिवार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पीएम केयर फंड के इस्तेमाल का ब्यौरा देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने पहले दिन से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश की एकता को तोड़ने की कोशिश की है। रविशंकर ने कहा कि वह बहुत गर्व के साथ कहना चाहते हैं कि मोदी सरकार पर तथ्यों के साथ अभी तक एक भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाने की किसी की भी हिम्मत नहीं हुई। क्योंकि, नरेन्द्र मोदी की सरकार ईमानदारी के साथ काम करती है, इसलिए जनता का आशीर्वाद मिलता है और वही ईमानदारी पीएम केयर्स फंड में भी दिखाई पड़ती है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पीएम केयर्स फंड में जमा पैसों को राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) में हस्तांतरित करने की मांग ठुकरा दी। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये दोनों फंड अलग हैं। नवम्बर 2019 में बनी योजना ही पर्याप्त है और अलग से योजना बनाने की जरूरत नहीं है। 

​​डोकलाम से सबक नहीं, एलएसी पर 100 दिन पूरे

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ऑपरेशनल गतिविधियों के लिए डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ का पद नहीं हुआ सृजित
 तीन साल पहले दिए सेना के सुझावों पर अमल नहीं, अब राजनाथ के सामने रखा मुद्दा
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नई दिल्ली (हि.स.)। डो​​कलाम विवाद ​​के बाद यह दूसरा मौका है जब चीन के साथ पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चल रहे सैन्य टकराव के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। डोकलाम में चीन के साथ 73 दिनों तक गतिरोध चला था। इस दौरान ऑपरेशनल गतिविधियों में सेना के सामने कई तरह की दिक्कतें भी आईं थीं। इन्हीं अनुभवों पर सेना ने रक्षा मंत्रालय को एक प्रस्ताव में कई सुझाव भेजे थे, ताकि आगे कभी चीन के साथ विवाद होने पर डोकलाम जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। सेना के इन सुझावों पर अमल होने की बजाय यह फाइल तीन साल से मंत्रालय में धूल फांक रही रही है। डोकलाम विवाद से सबक न लेने का ही नतीजा है कि चीन से एलएसी पर टकराव लगातार बढ़ रहा है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने अब फिर मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने यह मुद्दा रखा है।

भारत और चीन के बीच गतिरोध की शुरुआत डोकलाम विवाद से शुरू हुई थी। भारत और चीन के बीच यह विवाद रणनीतिक रूप से उस पठारी इलाके को लेकर हुआ, जिसे दुनिया डोकलाम के नाम से जानती है। यह एक विवादित पहाड़ी इलाका है, जिस पर चीन और भूटान दोनों ही अपना दावा जताते हैं। ​डोकलाम में जब चीन ने सड़क बनानी शुरू की तो 16 जून, 2017 को भारतीय सैनिकों ने विरोध किया। सितम्बर, 2017 में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने से पहले चीन ने अचानक अपनी सेना को पीछे करने का फैसला किया और 28 अगस्त, 2017 को दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट गईं। इस तरह दोनों देशों की सेनाएं 73 दिन तक डोकलाम में आमने-सामने डटी रहीं। इस दौरान भारतीय सेना को कुछ इस तरह के अनुभव हुए, जिससे ऑपरेशनल गतिविधियों को चलाने के लिए डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ (स्ट्रेटजी) यानी उप सेना प्रमुख (रणनीति) जैसे पद की जरूरत महसूस हुई।   

दरअसल डोकलाम से दोनों सेनाओं के हटने पर गतिरोध खत्म मानकर भारत की ओर से आगे के लिए कोई रणनीतिक फैसला नहीं लिया गया लेकिन चीनी सैनिक वहां कड़ाके की ठंड में भी डटे रहे। भारतीय सेना बाद में वहां निगरानी नहीं कर पाई, क्योंकि भारतीय सेना को इस बेस तक पहुंचने में खच्चरों के लिए बने रास्ते का इस्तेमाल करने पर सात घंटे तक का वक्त लग जाता था। इसका नतीजा यह रहा कि चीन ने विवादित स्थल को छोड़ दूसरे रास्ते से दक्षिण डोकलाम तक पहुंचने के लिए 1.3 किलोमीटर लंबी नई सड़क बना ली। इस रोड के जरिए चीनी सैनिक दक्षिण डोकलाम में स्थित जम्फेरी रिज तक पहुंच सकते हैं। यह सड़क भारतीय चौकियों से 5 किलोमीटर की दूरी पर है। हालांकि अब बीआरओ ने पिछले साल तारकोल से बनी हर मौसम में काम करने वाली सड़क तैयार कर ली है, जिससे अब भारतीय सेना को रणनीतिक रूप से बेहद अहम डोकलाम बेस तक पहुंचने में 40 मिनट से ज़्यादा वक्त नहीं लगेगा। इसके बाद चीन ने दो पुरानी सड़कों की मरम्मत करने के साथ ही भारतीय गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इन इलाकों के आसपास दो निगरानी प्रणाली और हाई फ्रीक्वेंसी के कैमरे भी लगाये हैं। 

डोकलाम विवाद के बाद रणनीतिक फैसले न होने से मात खाई सेना ने डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ का पद सृजित करने के लिये रक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था। सेना का कहना है कि ऑपरेशनल कामकाज के लिए इस पद की सख्त जरूरत है। इस पद के सृजित करने से बजट पर कोई असर नहीं होगा, क्योंकि यह पद असम रायफल्स के लेफ्टिनेंट जनरल पोस्ट के बदले में बनाने का सुझाव दिया गया है। सेना का मानना है कि इस पद के सृजित होने से सेना के कामकाज में तालमेल का अभाव नहीं रहेगा। बड़े पैमाने पर होने वाले किसी भी ऑपरेशनल कामों में परेशानी नहीं होगी। डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ की मौजदूगी में आर्मी हेडक्वॉर्टर पर भी भार काफी कम होगा। रक्षा मंत्रालय को भेजे गये प्रस्ताव के अनुसार सृजित किये जाने वाले पद डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ को सैन्य संचालन के महानिदेशक, सैन्य खुफिया, ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स, परिप्रेक्ष्य योजना और सूचना युद्ध के संचालन की जिम्मेदारी दी जानी थी। इस सब के बावजूद इस पद को सृजित करने की मंजूरी 3 साल बाद भी रक्षा मंत्रालय के वित्त विभाग से नहीं मिल सकी है।

पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन से टकराव बढ़ने और गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद फिर डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ की जरूरत महसूस हुई है ताकि तत्काल रणनीतिक फैसले लेकर ऑपरेशनल गतिविधियों का संचालन किया जा सके। इस पर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने अब फिर से मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने यह मुद्दा रखा है। कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं में सहमति जताने के बावजूद चीन ने पैंगोंग त्सो और गोगरा के भारतीय क्षेत्रों से अपनी सेना हटाने से इनकार कर दिया है। इसलिए भारतीय फौज ने भी ठंड के दिनों में भी टिकने की तैयारी कर ली है। पूर्वी लद्दाख में चीनी फौज की घुसपैठ को देखते हुए भारतीय सेना ने कई नई चौकियों का भी निर्माण किया है।

गिरिडीह के रतन कुमार को राष्ट्रपति पुलिस पदक

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झारखंड के शान को इस प्रदेश में ही नहीं बल्कि इसे सम्पूर्ण भारत में बढ़ाने का काम किया है राजधनवार के निवासी श्री मान रतन कुमार ने। गिरीडीह जिले के राजधनवार प्रखंड में रहने वाले श्री बजरंगी साव के प्रथम सुपुत्र श्री मान रतन कुमार को अपनी उत्कृष्ट & सराहनीय कार्य के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से समानित किया गया है । यह जानकारी आज़ादी दिवस के पूर्व संध्या दिनांक – 14.08.2020 को भारत सरकार द्वारा जारी किया गया हैं । श्री रतन कुमार CISF में वरिष्ट कामंडैंट के पद पर GP Head Quarters, New Delhi office में कार्यरत हैं। श्री रतन कुमार पिछले 24 वर्षों से CISF में कार्यरत है तथा इनके कार्य निपुणता एवं कौशलता को देखते हुए भारत सरकार ने इन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक़ – सराहनीय श्रेणी में प्रदान करने की घोषणा की हैं। यह गिरीडीह जिले एवं समस्त झारखण्ड प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि प्रदेश के एक लाल ने राज्य का नाम रौशन किया हैं ।

झारखंड आंदोलन को बेचने और खरीदने वालों ने अटल जी का नहीं लोकतंत्र का किया अपमान : रघुवर दास

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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने सत्ताधारी झारखण्ड और कांग्रेस पार्टी पर घटिया राजनीति का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दो-दो करोड़ रुपए में झारखंड आंदोलन को खरीदने और बेचने वाली ये पार्टियां (1993 सांसद रिश्वत कांड) वाजपेयी जी के व्यक्तित्व को क्या जान पायेंगी। देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपयी जी की दूसरी पुण्यतिथि पर नवनिर्मित विधानसभा में सरकार की ओर से उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई और ना ही भाजपा सांसद और नेताओं को श्रद्धा सुमन अर्पित करने की अनुमति दी गई। इस पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए श्री रघुवर दास ने कहा कि जेएमएम और कांग्रेसी ने लोकतंत्र की हत्या का काम किया है। उन्होंने कहा विधानसभा परिसर तो सभी दलों के लिए समान रूप से उपलब्ध रहता है। वहां किसी भी राजनीतिक दल के लोगों को आने जाने पर कोई रोक-टोक नहीं है। लेकिन जिस प्रकार श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से न तो कोई कार्यक्रम आयोजित किया गया था और ना ही भाजपा के नेताओं को श्रद्धा सुमन अर्पित करने की अनुमति दी गई, यह अत्यंत ही निंदनीय है। उन्होंने सवाल उठाया कि विधानसभा परिसर में जाने से सांसद व भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को किस नियम के तहत रोका गया?
वाजपेयी जी की दूरदृष्टि चलते वर्ष 2000 में झारखंड का गठन हुआ। कांग्रेस-जेएमएम-राजद तो कभी भी ऐसा होने देना नहीं चाहती थी। उन्होंने झारखंड की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया। हमारी सरकार ने नए विधानसभा निर्माण के दौरान भगवान बिरसा मुंडा और झारखंड के जन्मदाता अटल बिहारी वाजपेयी जी की आदमकद प्रतिमा लगवाई। लेकिन आज उनकी पुण्यतिथि पर सरकार का रवैया निंदनीय है। सरकार ने महापुरुषों का अपमान किया गया है।

सारे नेताओ की नामि बेनामी सम्पत्ति और कारोबार उजागर करे झारखण्ड सरकार :भाजपा

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भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सरोज सिंह ने सोशल मीडिया में सत्ता के कथित पैरोकार अरुण वर्मा के ट्वीट पर प्रतिक्रिया ब्यक्त करते हुए कहा की अरूण वर्मा जी ,आप कौन हैं? यह आपके प्रोफ़ाइल से पता नहीं चलता। क़ायदे से इतना गंभीर और सत्ताशीर्ष के अंदर की बात आपको पता है और शासकों के बेहद करीबी हैं, इतने ज़िम्मेवार जनप्रतिनिधियों के बारे में दनादन ट्वीट कर रहे हैं तो आपका प्रोफ़ाइल भी पता चलना चाहिये।हम झारखंड के मुख्य सचिव प्रभारी डीजीपी और साइबर सेल से भी माँग कर रहे हैं कि आपके पहचान के बारे में बतायें। अगर बाबू लाल जी के नाम की आड़ में कोई भी कालाबाज़ारी कर रहा है या करवा रहा है उसे पकड़ के जेल भेजवाइए। बाबूलाल मरांडी की दुमका के गांधी मैदान के नज़दीक वाली बेनामी सम्पत्ति जो आप बता रहे हैं, झारखंड सरकार को वहाँ तुरत छापा मरवाकर उसे जप्त कराना चाहिए। एक महीने भी नहीं हुए योगेन्द्र तिवारी को जामताड़ा पुलिस ने पकड़ा और फिर छोड़ दिया तो बाबुलाल जी ने उस मामले की जाँच एसआईटी से कराने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। ताकि पता चले कि वह कैसे पकडा़ गया? और पकड़ा गया तो बिना जेल गये कैसे छूट गया? लेकिन जाँच इसलिये नहीं होगी क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत जी का दुमका का जो हवेली है उसका यह तस्वीर वाला आधा ज़मीन योगेन्द्र तिवारी का है।

बाबूलाल जी से हमारी बात हुई है। उन्होंने आप जैसे सरकार के शुभचिंतकों के माध्यम हेमंत सोरेन सराकर से अपील की है कि उनका( बाबूलाल मरांडी जी का) जो भी दुमका, देवघर धनबाद समेत जहां कहीं भी नामी-बेमानी सम्पत्ति ही नहीं और जो भी ज़मीन मकान, खान, खदान बालू-पत्थर, कोयला, स्कूल,कालेज या जिस किसी भी चीज़ का बेनामी कारोबार है, उसे मरांडी जी झारखंड सराकर को दान में देते हैं। जाँच बाद में करे। इससे पहले सराकर उस सारे सम्पत्ति को क़ब्ज़े में ले ले। फिर मरांडी जी पर ऐसे नामी-बेनामी भ्रष्टाचार के लिये मुक़दमा कर तुरंत जाँच कराये। इस काम में मरांडी जी से जो भी सहयोग अपेक्षित होगा वे खुद वहाँ खड़ा रहकर करेंगे।और सरकार अगर यह पुण्य काम करती है तो सबसे पहले वे सरकार के इस साहसिक काम का स्वागत भी करेंगे।

झारखंड की जनता को यह जानने का हक़ है कि कौन-कौन नेता और उसके परिवार के लोग नामी-बेनामी ज़मीन-जायदाद, मकान, बालू , कोयला, पत्थर के खान-खदान का जायज़-नाजायज गोरखधंधा करते आ रहे हैं। राज्य सराकर के पास तो पुलिस की विशेष शाखा जैसी खुद की जाँच एजेंसी है ही। अगर हेमंत सरकार उसकी जाँच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक कर दे तो मुझे स्वीकार्य होगा। जाँच में जहां भी मरांडी जी के सहयोग की भी ज़रूरत होगी तो वे विशेष शाखा के अधिकारियों के लिये सदैव उपलब्ध रहेंगे।
कौन है सुरेश नागरे? झारखंड और सोशल मीडिया में पिछले कुछ दिनों से यह नाम चर्चा का विषय बना हुआ है। ये सख्श झारखंड में कब आया और किसका-किसका, किन-किन चीजों मे पार्टनर है? और क्या धंधा करता रहा है? हम मुख्यमंत्री जी से माँग करते हैं कि बिना विलम्ब किये इस बारे में आधिकारिक तौर पर राज्य की जनता को बतायें।

राज्य सरकार के इशारे पर श्रद्धेय अटल जी का हुआ अपमान….दीपक प्रकाश

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद दीपक प्रकाश ने आज राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोला।
श्री प्रकाश ने कहा कि हेमंत सरकार सत्ता मद इतनी डूब चुकी है कि इन्हें अब सामान्य मर्यादा का भी आभास नही। उन्होंने कहा कि आज यह साबित हो चुका की परिवारवादी पार्टियों को परिवार के अलावा कुछ याद नही रहता। इन्हें देश,राज्य और समाज केलिये सर्वस्व न्योछावर करने वाले महापुरुष कभी याद नही आ सकते।
श्री प्रकाश ने कहा कि आज भारत रत्न स्व अटल जी की पुण्यतिथि पर विधानसभा परिसर में स्थित उनकी प्रतिमा पर राज्य सरकार या विधानसभा सचिवालय के द्वारा श्रधांजलि अर्पित नही किया जाना यह प्रमाणित करता है कि सरकार की नीति और नीयत कैसी है।

उन्होंने कहा कि अटल जी को हेमंत सरकार जितना अपमानित कर ले पर वे तो झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता के दिलों में बसते हैं।राज्य की जनता उन्हें अपना मसीहा मानती है।
श्री प्रकाश ने कहा कि सरकार की ऐसी बदनीयती राज्य को गलत दिशा में धकेलने की कोशिश कर रही है।यह झारखंड की परंपरा और रीति रिवाज संस्कृति के खिलाफ है। राज्य सरकार ऐसे व्यवहार से बाज आये नही तो जनता इसका मुहतोड़ जवाब देगी।

विधानसभा सचिव को सामान्य प्रोटोकॉल भी मालूम नही…..समीर उरांव


भाजपा प्रदेश महामंत्री एवम सांसद समीर उरांव ने प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि आज प्रदेश की जनता अपमानित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि संसद या विधानसभा परिसर में जो प्रतिमाएं या तस्वीर लगी होती है उसका सम्मान सरकार और सदन का नैतिक दायित्व है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि आज श्रद्धेय अटल जी की दूसरी पुण्यतिथि है।झारखंड विधानसभा परिसर में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित है। परंतु उनके प्रतिमा पर सभा सचिवालय या सरकार के द्वारा कोई श्रद्धान्जलि अर्पित नही की गई।
श्री उरांव ने कहा कि हद तो तब हो गई जब भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों ने विधानसभा परिसर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करना चाहा तो पहले घुसने से रोका गया जबकि मैं स्वयं पूर्व सदस्य हूँ वर्तमान में राज्य सभा सदस्य हूँ, मेरे साथ फूल माला लिये हुए प्रदेश महामंत्री श्री आदित्य साहू,प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ,प्रदेश कार्यालय मंत्री हेमंत दास एवम अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। कहा कि मैंने विधानसभा अध्यक्ष से बात करने की कोशिश की जिनका मोबाइल ऑफ था। विधानसभा सचिव से हुई बात ने मुझे काफी आहत किया। उनकी बातचीत की शैली ने एक जिम्मेवार पदाधिकारी की सोच और क्षमता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उनके ध्यान में यह भी नही था कि आज अटल जी की पुण्यतिथि भी है।अपनी जिम्मेवारियों से मुंह मोड़ते हुए उल्टा उन्होंने हम सब को ही याद न दिलाने का आरोप मढ़ दिया।
श्री उरांव ने कहा कि सरकार महापुरूषो को याद करने में भी भेदभाव कर रही है। हेमंत सरकार महापुरूषों को भी दलीय सीमा में बांध रही है।
श्री उरांव ने विधानसभा सचिव पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि हेमंत सरकार राज्य की जनता से माफी मांगें।

श्रद्धेय अटल जी जन जन के नेता रहे…..आदित्य साहू

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश महामंत्री आदित्य साहू ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी हेमंत सरकार के सम्मान के मोहताज नही परंतु राज्य सरकार अटल जी का अपमान करके जन भावनाओं का अपमान किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य की जनता जानती है कि कैसे अटल जी ने अलग राज्य के सपनो को साकार किया है। परंतु राज्य सरकार की नीयत इस सच से मुंह मोड़ने जैसा है। उन्होंने कहा कि बादल से सूर्य के तेज को नही ढाका जा सकता। राज्य की जनता इस सच्चाई को दिल से महसूस करती है।
श्री साहू ने राज्य सरकार अपने इस कृत्य केलिये माफी मांगे नही जनता इसका हिसाब करेगी।

प्रेसवार्ता में मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक भी उपस्थित रहे।

हजारीबाग मेडिकल कॉलेज के नामकरण पर सदर विधायक ने सीएम को लिखा पत्र, जताई आपत्ति

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कहा हजारीबाग में जन्में किसी स्वतंत्रता सेनानी या महान विभूतियों के नाम पर हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नामकरण करने पर सरकार यथाशीघ्र करे पुनर्विचार

हजारीबाग मेडिकल कॉलेज के नामकरण पर सदर विधायक मनीष जायसवाल ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को रविवार को पत्र लिखकर हजारीबाग वासियों की जनभावना से अवगत कराते हुये हजारीबाग में जन्में किसी स्वतंत्रता सेनानी या महान विभूतियों के नाम पर हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नामकरण करने पर यथाशीघ्र पुनर्विचार करने की मांग की है। पत्र में उन्होंने लिखा है की बीते स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर आपकी सरकार द्वारा झारखंड के विभिन्न संस्थानों का नाम बदलकर झारखंड के स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर किया गया है। मैं सरकार की इस सोच का सहृदय स्वागत करता हूं, परंतु हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानी शहीद शेख भिखारी के नाम से किया जा रहा है। अमर शहीद शेख भिखारी का जन्म रांची जिला स्थित एक बुनकर अंसारी परिवार में हुआ था। वे 1857 के जंग-ए-आजादी में लड़े थे, मैं उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूं। आगे उन्होंने सीएम को लिखा है शहीद शेख भिखारी का सम्मान करते हुए आपको हजारीबाग की जन भावनाओं से अवगत कराते हुए कहना चाहता हूं कि हजारीबाग की जनता- जनार्दन, जनप्रतिनिधि और प्रबुद्धगण इस फैसले से सहमत नहीं है। बेहतर होता हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नामकरण हजारीबाग के मिट्टी से जुड़े किसी स्वतंत्रता सेनानी यथा- जय मंगल पांडेय, राम नारायण सिंह, कृष्ण बल्लभ सहाय, सरस्वती देवी, लक्ष्मी नारायण दुबे के अतिरिक्त हजारीबाग में जन्मे एक शख्स जिनका संपूर्ण जीवन मेडिकल साइंस और मानवता को समर्पित रहा ऐसे विभूति- सह- भारतवर्ष के प्रथम “टेस्ट ट्यूब बेबी” के जनक डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय सहित अन्य विभूतियों के नाम पर किया जाता ।

विधायक श्री जायसवाल ने पत्र में यह भी लिखा है कि रांची जिला में जन्मे अमर शहीद शेख भिखारी के नाम पर हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नाम किए जाने के बजाय राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल का नाम उनके नाम किया जाना अधिक उचित और सम्मानजनक होता। झारखंड सरकार द्वारा हजारीबाग की जन- भावनाओं का अनादर करते हुए आनन- फानन में यह घोषणा किया जाना कतई उचित प्रतीत नहीं होता है। विधायक श्री जायसवाल ने मुख्यमंत्री श्री सोरेन से आग्रह करते हुए हजारीबाग की जन- भावनाओं का कद्र करते हुए स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों व विभूतियों को सम्मान देते हुए हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नामकरण हजारीबाग के ही पावन मिट्टी में जन्मे किसी स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी या महान विभूतियों के नाम पर करने पर यथाशीघ्र पुनर्विचार करे ।

भारत की आजादी के लिए क्यों चुनी गई 15 अगस्त की तारीख?

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खास बातें

  • इंडियन इंडिपेंडेंस बिल 4 जुलाई 1947 को पेश किया गया.
  • यह बिल 18 जुलाई 1947 को स्वीकारा गया.
  • भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था.

नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है. 15 अगस्त (15 August) 1947 को भारत को अंग्रेजों के शासन से आजादी मिली थी और यही कारण है कि 15 अगस्त का दिन हर किसी के लिए बेहद खास है. भारत की आजादी (Independence Day) के दिन जवाहर लाल नेहरू ने ऐतिहासिक भाषण दिया था. जिसे हम ‘ट्रिस्ट विद डेस्टनी’ से जानते हैं. यह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के द्वारा संसद में दिया गया पहला भाषण है. हर स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) पर भारतीय प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते हैं. लेकिन 15 अगस्त, 1947 को ऐसा नहीं हुआ था. लोकसभा सचिवालय के एक शोध पत्र के मुताबिक नेहरू ने 16 अगस्त, 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था. भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा का निर्धारण भी 15 अगस्त को नहीं हुआ था. इसका फैसला 17 अगस्त को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा से हुआ. 

ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस में इंडियन इंडिपेंडेंस बिल 4 जुलाई 1947 को पेश किया गया. इस बिल में भारत के बंटवारे और पाकिस्तान के बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया था. यह बिल 18 जुलाई 1947 को स्वीकारा गया और 14 अगस्त को बंटवारे के बाद 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि को भारत की आजादी की घोषणा की गई थी. भारत की आजादी के जश्न में महात्मा गांधी शामिल नहीं हुए थे. जब भारत को आजादी मिली थी तब महात्मा गांधी बंगाल के नोआखली में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच हो रही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन कर रहे थे.

लेकिन क्या आपने सोचा है कि देश की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख को ही क्यों चुना गया?  इस बारे में अलग-अलग इतिहासकारों की मान्यताएं भिन्न हैं. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सी राजगोपालाचारी के सुझाव पर माउंटबेटन ने भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख चुनी. सी राजगोपालाचारी ने लॉर्ड माउंटबेटन को कहा था कि अगर 30 जून 1948 तक इंतजार किया गया तो हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता नहीं बचेगी. ऐसे में माउंटबेटन ने 15 अगस्त को भारत की स्वतंत्रता के लिए चुना. 

महंत नृत्य गोपाल दास कोरोना पाॅजिटिव

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उज्ज्वल दुनिया/मथुरा, 14 अगस्त (हि.स.)। अयोध्या से सरयूजी नदी का जल लेकर पहुंचे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबियत श्रीकृष्ण जन्मभूमि में आयोजित जन्मोत्सव के बाद गुरुवार तड़के अचानक बिगड़ गई। नोडल अधिकारी डॉक्टर भूदेव सिंह ने उनका एंटीजन टेस्टिंग कराया जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सीएम योगी ने मेदांता हॉस्पिटल के डॉक्टर नरेश त्रेहान से बात की है और महंत नृत्य गोपाल दास को गुरुग्राम स्थित मेदांता हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की तैयारी है।

नृत्य गोपाल दास महाराज हर वर्ष की तरह जन्माष्टमी के मौके पर मंगलवार रात मथुरा सरयूजी नदी का जल लेकर पहुंचे थे। बुधवार की रात्रि श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। गुरुवार तड़के उन्हें बुखार और सांस लेने में तकलीफ हुई। आनन-फानन में डॉक्टरों को बुलाया गया। तबीयत बिगड़ने के बाद डीएम सर्वज्ञराम मिश्र समेत आगरा के सीएमओ  तथा मथुरा सीएमओ संजीव यादव सहित अन्य डॉक्टर इलाज के लिए स्थित बैंक चौराहा स्थित सीताराम आश्रम पहुंचे। साथ ही कोविड-19 की टीम भी आश्रम पहुंची। महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत बिगड़ने की सूचना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी डीएम से फोन पर उनका हाल जाना।

पीटीआई

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रांची । पीटीआई-भाषा के पत्रकार पीवी रामानुजम ने बुधवार की रात लालपुर थाना क्षेत्र के मोराबादी स्थित अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। पत्रकार का शव उनके आवास पर बने कार्यालय में फंदे से लटकी मिली। 

घटना की सूचना के बाद लालपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज मामले की जांच पड़ताल में जुट गई। वहीं पत्रकार के सुसाइड की खबर के बाद मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर दुख जताया है।मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लिखा कि पीवी रामानुजम का यूं चले जाना पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी पत्रकारिता से कई पत्रकारों को मार्गदर्शन एवं प्रेरणा मिली है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। मेरी संवेदना उनके परिजनों के साथ हैं। भगवान उन्हें दुःख की इस घड़ी को सहन करने की शक्ति दें।

पत्नी ने देखा तो पुलिस को दी जानकारी

समाचार एजेंसी के ब्यूरो चीफ पीवी रामानुजम की पत्नी ने गुरुवार की सुबह शव को फंदे से लटकता देखा तो शोर मचाते हुए पड़ोसियों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद मामले की जानकारी लालपुर पुलिस को दी गई। जिस घर में ब्यूरो चीफ ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है उसी घर में समाचार एजेंसी का दफ्तर भी है।

उधर, ब्यूरो चीफ के आत्महत्या किए जाने की सूचना के बाद लालपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी ली। पुलिस जांच में इस बात की जानकारी मिली है कि पीवी रामानुजम पिछले कुछ दिनों से आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। हालांकि मृतक की पत्नी ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि वे किसी बात को लेकर तनाव में थे या नहीं, इसकी जानकारी उन्होंने कभी भी मुझे नहीं होने दी।

पत्रकार की पत्नी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उन्होंने बातचीत भी करना बंद कर दिया था। बताया जा रहा है कि पीवी रामानुज के परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा है जो ओडिशा में रहता है। पुलिस पूरे मामले को आर्थिक तंगी और वर्क प्रेशर से जोड़कर जांच कर रही है। अब तक आधिकारिक तौर पर किसी ने यह पुष्टि नहीं की है कि ब्यूरो चीफ के आत्महत्या की क्या वजह है।

सेटेलाइट ने किया चीन

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नई दिल्ली । चीनी नौसेना ने अपने युद्धपोत कराची में तैनात किये हैं। उनकी सुरक्षा में पाकिस्तानी नौसेना ने अपनी एक पनडुब्बी को लगाई है। पहले दुनिया को झुठलाने के लिए कहा गया था कि चीनी युद्धपोतों के साथ उनकी पनडुब्बी भी आई है लेकिन अब सेटेलाइट की तस्वीरों ने एक बार फिर पाकिस्तान को बेनकाब किया है कि चीनी युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने अपनी अटैक पनडुब्बी को तैनात किया था। इससे यह भी साफ है कि चीन या पाकिस्तान अकेले अपने दम पर भारत से लड़ने में सक्षम नहीं है, शायद इसीलिए भारत के खिलाफ गठजोड़ करने में जुटे हैं लेकिन भारत पहले ही साफ कर चुका है कि वह टू-फ्रंट वॉर यानि दोनों मोर्चों पर लड़ने के लिए तैयार है। सुरक्षा एजेंसियों ने भी सेना और सरकार को चीन और पाकिस्तान के इस सैन्य-गठजोड़ के बारे में आगाह किया है। 

पाकिस्तानी नौसेना ने हाल में ही अपनी एक पनडुब्बी को चीनी नौसेना के युद्धपोतों के बीच कराची में तैनात किया था। हाल में ही ली गई सेटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीनी युद्धपोतों की रक्षा के लिए पाकिस्तान ने अपनी अगोस्टा-19 बी टाइप की डीजल इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बी को तैनात किया था। फ्रांसीसी मूल की इस पनडुब्बी से परमाणु मिसाइल बाबर-3 को लॉन्च किया जा सकता है। पाकिस्तान और चीनी नौसेनाओं के इस गठजोड़ से भारत की चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि पहले दावा किया गया था कि चीन के युद्धपोतों के साथ उसकी पनडुब्बी भी पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पहुंची हैं लेकिन अब सेटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीनी युद्धपोतों की रक्षा के लिए पाकिस्तान ने अपनी अटैक पनडुब्बी को तैनात किया था। दरअसल अगोस्टा-19 बी टाइप की डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बी का संचालन एशिया में केवल पाकिस्तान और मलेशिया ही करते हैं।

बीजिंग के सेना हेडक्वार्टर में पाकिस्तान का सैन्य अधिकारी तैनात 

खुफिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल ही में पाकिस्तानी सेना के एक प्रतिनिधिमंडल ‌ने बीजिंग का दौरा किया था। इस दौरान चीन ने पाकिस्तान को कॉम्बेट ड्रोन (अटैक ड्रोन) और लॉन्ग रेंज मिसाइल डिफेंस‌ सिस्टम देने का वादा किया है। यह इस‌ टीम की दूसरी चीन यात्रा थी। इससे पहले दिसम्बर, 2019 में भी पाकिस्तान की टीम यूसीएवी ड्रोन्स की पहले खेप के लिए चीन गई थी। इतना ही नहीं खुफिया रिपोर्ट में इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि हाल ही में पाकिस्तान ने अपनी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी को बीजिंग स्थित पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) सेना के हेडक्वार्टर में तैनात किया है, ताकि दोनों देशों की सेनाओं के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाया जा सके। ऐसा बहुत कम होता है कि किसी एक देश के सैन्य अधिकारी की तैनाती दूसरे देश के सेना मुख्यालय में की जाए, लेकिन ऐसा किये जाने का साफ सन्देश है कि पाकिस्तान सेना का चीनी सेना और वायु सेना के बीच सहयोग अब एकीकरण में बदल गया है ताकि पाक-चीन के सैन्य गठजोड़ को और मजबूती दी जा सके।

चीन से युआन क्लास की 8 पनडुब्बी खरीद रहा पाकिस्तान

पाकिस्तानी नौसेना अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए चीनी डिजाइन पर आधारित टाइप 039 बी युआन क्लास की पनडुब्बी खरीद रही है। डीजल इलेक्ट्रिक चीन की यह पनडुब्बी पाकिस्तान की नौसैनिक ताकत में इजाफा करने में सक्षम है। इसमें एंटी शिप क्रूज मिसाइल लगी होती हैं। यह पनडुब्बी एयर इंडिपैंडेंट प्रपल्शन सिस्टम के कारण कम आवाज पैदा करती है, जिससे इसे पानी के नीचे पता लगाना बहुत मुश्किल होता है। पाकिस्तान फ्रांस में बने हुए अगोस्टा-19 बी टाइप की पांच पनडुब्बियों को संचालित करता है। इनमें से तीन तीन एयर इंडिपेंडेंट पॉवर के साथ अपग्रेड की गई हैं। ये पनडुब्बियां पाकिस्तानी नौसेना के के शस्त्रागार में सबसे शक्तिशाली और आधुनिक है। इन पनडुब्बियों को आधुनिक लड़ाकू सिस्टम और AS-39 एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल से लैस किया गया है। इसके अलावा इस क्लास की पनडुब्बियां परमाणु मिसाइल बाबर-3 को लॉन्च करने में सक्षम हैं।

चीन पाकिस्तान को दे रहा है आर्म्ड-यूएवी यानि कॉम्बेट ड्रोन

भारत की खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन पाकिस्तान को सीएच-4 यूसीएवी यानि अनमैंड कॉम्बेट एरियल व्हीकल देने जा रहा है। इन ‘चांग-होंग’ आर्मड-ड्रोन को चीन इसी साल पाकिस्तान को सौंपना शुरू कर सकता है। चीन के ये आर्म्ड-ड्रोन, बम और मिसाइलों से लैस हैं और गोलाबारी के जरिए हमला कर सकते हैं। यह ड्रोन ठीक वैसे हैं जैसे अमेरिका ने अफगानिस्तान में आतंकी संगठन अल-कायदा के खिलाफ इस्तेमाल किए थे। यह भी खुलासा हुआ है कि चीन से पाकिस्तान जैमिंग टारगेट ड्रोन भी खरीदने जा रहा है। यह ड्रोन किसी भी देश के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से लेकर फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर्स को जाम कर सकते हैं। साथ ही पाकिस्तान चीन से एंटी जैमिंग फिक्स्ड टारगेट भी ले रहा है।

सुशांत के पैसों से रिया ने खरीदी दो साल में 3 करोड़ की प्रापर्टी

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मुंबई । सुशांत के पैसे के लेन-देन मामले की जांच गुरुवार को भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है। आज ईडी की टीम सुशांत के रसोईया, चौकीदार, केयरटेकर से पूछताछ कर रही है। साथ ही आज ही सुशांत सिंह राजपूत के गार्ड को ईडी दफ्तर में बुलाया गया है। अब तक हुई जांच में ईडी को पता चला है कि रिया चक्रवर्ती ने सिर्फ दो साल में तीन करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदी थि। साथ ही रिया ने एक करोड़ की संपत्ति बेची थी। ईडी इस पूरे प्रकरण में रिया के आय के स्त्रोत तथा सुशांत के खाते से ली गई रकम की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहा है। 

ईडी ने अब तक रिया चक्रवर्ती, उनके पिता इंद्रजीत, भाई सौविक, मैनेजर श्रुति मोदी, रुमपार्टनर सिद्धार्थ पिठानी, संदीप सिंह तथा सुशांत की बहन मीतू सिंह से पूछताछ की है। ईडी इस मामले में मनी लाड्रिंग के शक के आधार पर रिया चक्रवर्ती से रो राउंड में लगभग 19 घंटे, सौविक से तीन राउंड में करीब 33 घंटे और इंद्रजीत से दो बार पूछताछ कर चुकी है। अब तक हुई जांच में सामने आया है कि सुशांत के खाते से उसकी एक ग$र्लफ्रेंड के घर की किस्त भरी जा रही है। जांच में पता चला है कि वह गर्लफ्रेंड अभी भी उसी घर में रह रही है। हालांकि अभी तक उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। 

ईडी की जांच में पता चला है कि सुशांत सिंह राजपूत ने अपनी दो बहनों के नाम साढ़े चार करोड़ रुपये की एफडी की थी लेकिन सिर्फ दो ही दिनों बाद यह एफडी एक-एक करोड़ रुपये की कर दी गई और उसमें से ढाई करोड़ रुपये निकाल लिए गए। ईडी इस मामले की भी जांच कर रहा है। साथ सुशांत के पैसे से चार कंपनियों का गठन और उन कंपनियों पर रिया व उसके भाई का ही कब्जा मामले की भी गहन जांच ईडी कर रहा है। इन्हीं  मामलों को लेकर ईडी आज सुशांत के रसोईया, केयरटेकर व चौकीदार से पूछताछ कर रहा है। साथ ही सुशांत के सुरक्षा रक्षक को भी आज ईडी ने बुलाया है। सुरक्षा रक्षक से भी ईडी आज पूछताछ करने वाली है। कुल मिलाकर ईडी की जांच रिया व उसके भाई सौविक के इर्दगिर्द ही अभी तक घुमती नजर आ रही है ,लेकिन ईडी इस मामले में अभी तक किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है।