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कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद को लेकर पक्ष और विपक्ष में घमासान

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कांग्रेस विधायक अम्बा प्रसाद की घटिया व ओछी राजनीति जनता बर्दाश्त नहीं करेगी- भाजपा

उज्ज्वल दुनिया \रांची । भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार ने कांग्रेस विधायक अम्बा प्रसाद पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस विधायक ओछी और घटिया राजनीति कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पतरातु प्रखंड के ग्राम पंचायत पालू के टोकिसुद रेलवे स्टेशन के निकट झारखण्ड सरकार के पेयजल व स्वछत्ता  विभाग की ओर से 25000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 30 करोड़ 50 लाख 07 हजार 500 की लागत से 4.95 मिलियन लाख लीटर क्षमता वाली विशाल वॉटर फिल्टरेशन प्लांट का निर्माण किया जाना है। इसका ऑनलाइन उद्घाटन 17 फरवरी 2019 को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था।  तत्कालीन सीएम रघुवर दास व पेयजल मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी, स्थानीय सांसद जयंत सिन्हा, स्थानीय विधायक निर्मला देवी इस उद्घाटन समरोह के साक्षी बने थे शिल्लपट्ट पर इनलोगों का नाम था। भूमिपूजन के नाम पर वर्तमान कांग्रेस विधायक सुश्री अम्बा प्रसाद व उनके समर्थकों ने घटिया व ओछी राजनीति का परिचय देते हुए। शिलापट्ट से रघुवर दास, चंद्रप्रकाश चौधरी व जयंत सिन्हा का नाम पत्थर से रगड़ कर मिटा दिया। कांग्रेस पार्टी के विधायक सुश्री अंबा प्रसाद व उनके समर्थकों के इस घटिया हरकतों की जितनी निंदा की जाए कम है। अविनाश कुुमार ने कहा कि हेमंत सरकार को इस घटना को लेकर अविलंब कानूनी कारवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधायक ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया है जिसे जनता कभी बर्दाश्त नही करेगी।

केंद्र और दिल्ली सरकार सरकारी वकीलों को फीस का भुगतान करे: हाईकोर्ट

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नई दिल्ली, (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार समेत सभी सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वो दिल्ली की अदालतों में सरकार की ओर से पैरवी करनेवाले वकीलों को उनकी फीस का भुगतान करें। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने पिछले 1 फरवरी तक की वकीलों की फीस का भुगतान चार हफ्ते  करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वे आज से ही सरकारी वकीलों की फीस का भुगतान शुरु करें। अंतिम सप्ताह का इंतजार मत करें। याचिका में कहा गया है कि फीस का भुगतान नहीं होने से वकील आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं । याचिका वकील पीयुष गुप्ता ने दायर किया है। याचिकाकर्ता की ओऱ से वकील कपिल गोयल ने कहा है कि दिल्ली सरकार से इस बात पर स्टेटस रिपोर्ट मांगा जाए कि सरकारी वकीलों की फीस का लंबे समय से भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा है।

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 सितंबर 2015 को आदेश दिया था कि वे वकीलों की फीस का भुगतान करें। लेकिन दिल्ली सरकार इस आदेश का उल्लंघन कर रही है। याचिका में दिल्ली सरकार पर इसके लिए भारी जुर्माना लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि सरकारी वकील न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रशासन को उन वकीलों के जीवन यापन की कोई चिंता नहीं है औऱ वो उनकी फीस का भुगतान लंबे समय से नहीं कर रही है। वकीलों की आमदनी का मुख्य जरिया उनको मिलनेवाली फीस ही होती है।

याचिका में कहा गया है कि 17 मार्च से कोर्ट लगातार बंद है जिसकी वजह से सरकारी वकीलों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी वकील अपना रोजगार खत्म होने की आशंका से अपनी फीस के भुगतान के लिए सरकार के पास नहीं जा रहे हैं। सरकारी वकीलों ने याचिकाकर्ता से संपर्क किया जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ता ने खुद संबंधित विभाग से सरकारी वकीलों की फीस का भुगतान करने की मांग की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सुशांत सिंह राजपूत के सीए संदीप श्रीधर से सीबीआई की पूछताछ

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सीबीआई रिया चक्रवर्ती के सीए रजत मेवाती से अलग से पूछताछ करेगी

सुशांत के तीनों स्टाफ के बयानों में असमानता दिखी, फिर होगी पूछताछ

मुंबई (हि.स.)। ​सुशांत सिंह राजपूत केस में सीबीआई की जांच का आज पांचवां दिन है। सीबीआई की तहकीकात रोजाना नया मोड़ ले रही है और कई तरह के खुलासे सामने आ रहे हैं। सीबीआई ने मंगलवार को सुबह जांच की शुरुआत सुशांत के सीए संदीप श्रीधर से डीआरडीओ गेस्ट हाउस पर पूछताछ से की है।सीबीआई रिया चक्रवर्ती के सीए रजत मेवाती से अलग से पूछताछ करेगी। गेस्ट हाउस पर सीबीआई ने सुशांत के रुममेट सिद्धार्थ पिठानी, कुक नीरज, दीपेश सावंत, रजत मेवाती को भी पूछताछ के लिए बुला रखा है। 

सीबीआई हर एंगल से सुशांत केस की जांच कर रही है। ​सुशांत की साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी और विसेरा रिपोर्ट्स का अध्ययन करने के लिए चार डॉक्टरों की टीम का गठन किया गया है। ये डॉक्टर बहुत गंभीरता से दोबारा सुशांत की साइकलॉजिकल अटॉप्सी ​की जांच करेंगे।​​ ​शुक्रवार को एम्स के डॉक्टर्स ​सुशांत की ऑटोप्सी और विसरा रिपोर्ट की जांच​ रिपोर्ट ​सब्मिट करेंगे। अभी तक की जांच में सीबीआई को सिद्धार्थ पिठानी और सुशांत के तीनों स्टाफ के बयानों में असमानता दिखी है, इसलिए सीबीआई पहली बार उन्हें आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। पहले राउंड में किन्हीं दो लो​​गों को आपस में बैठाया जाएगा, उसके बाद सभी चारों गवाहों से एकसाथ पूछताछ होगी। सीबीआई आज सुशांत के मित्र सैमुअल मिरांडा को भी पूछताछ के बुला सकती है। सैमुअल मिरांडा रिया चक्रवर्ती का करीबी बताया जा रहा है। इसलिए सीबीआई सैमुअल से रिया व सुशांत के बीच संबंध व इसके बाद हुए विवाद के बारे में पूछताछ कर सकती है। 

सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में सुशांत के मौत के वक्त का जिक्र नहीं है। इसलिए कूपर अस्पताल के डॉक्टरों से आज फिर सीबीआई पूछताछ करेगी। सोमवार को भी सीबीआई की टीम के अधिकारियों ने इन डॉक्टरों से बात की थी। कूपर हॉस्पिटल में ही सुशांत की पिछली ऑटोप्सी और बाकी मेडिकल रिपोट्र्स बनाई गई थीं। सुशांत की साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी यानि ब्रेन का पोस्टमार्टम किए जाने से उनके बारे में कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आएंग। इस जांच से यह पता लगाया जाता है कि मरने वाले व्यक्ति की उस वक्त मानसिक हालत क्या थी? इसमें ये देखा जाता है कि मौत से हफ्ता दस दिन पहले तक उसके बर्ताव में क्या बदलाव आए। जैसे वो किस तरह बात करता है। खोया- खोया रहता है या नहीं रहता है। सामान्य तौर पर दोस्तों से जितनी बात करता है उतनी नहीं करता है। वक्त पर खाता है या नहीं खाता है।

पुलवामा हमला : एनआईए ने दाखिल की 13,500 पन्नों की चार्जशीट, पाकिस्तान फिर बेनकाब

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इस हमले में सीआरपीएफ के शहीद हुए थे 40 जवान– चार्जशीट में जैश सरगना मसूद अजहर और रऊफ असगर मसूद सहित कुल 20 आतंकियों के नाम हैं शामिल

नई दिल्ली, (हि.स.)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने फरवरी 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले मामले में आज जम्मू की स्पेशल एनआईए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। कुल 13,500 पन्नों की चार्जशीट में जैश सरगना मसूद अजहर और रऊफ असगर मसूद सहित कुल 20 आतंकियों के नाम शामिल हैं। इससे एक बार फिर पाकिस्तान बेनकाब हो चुका है।

मंगलवार को एनआईए द्वारा एनआईए कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में जैश-ए मोहम्मद (जेएम) आतंकी मसूद अजहर के दो भतीजे उमर फारूख और आदिल डार का नाम भी शामिल है। करीब 18 महीने तक चली इस जांच में एनआईए ने वैज्ञानिक और डिजिटल सबूतों के आधार पर इस मामले की छानबीन की और आरोपियों के कॉल रिक़ॉर्ड, व्हाट्सएप चैट, फोटो और वीडियो बरामद किए हैं। उसके आधार पर सबूत तैयार किया गया है।

उल्लेखनीय है कि 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान शहीद हो गए थे। एनआईए इस मामले में अब तक कुल सात आतंकी आरोपियों- बिलाल अहमद कुचे, शाकिर बशिर मार्जरे, तारिक अहम शाह, इंशा जां, वैज उल इस्लाम, मोहम्मद अब्बास राठर और मोह्मद इकबाल राठर को गिरफ्तार कर चुकी है। बिलाल अहमद कुचे और उसके साथियों ने ही सीआरपीएफ पर हमला किया था। एनआईए ने बिलाल को कश्मीर के पुलवामा से गिरफ्तार कर उसे जम्मू की स्पेशल एनआईए कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 10 दिन की रिमांड पर लिया गया। फिर उसने जो बयान दिया और अन्य छह आतंकियों की तस्दीक की, उनको भी एनआईए अब गिरफ्तार कर चुकी है।

जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार पुलवामा हमले में शामिल आतंकियों के बीच हुई बातचीत और व्हाट्सएप चैट्स की डिटेल्स भी चार्जशीट में पेश की गई है। इसके अलावा पाकिस्तान से इंटरनेशनल बॉर्डर के जरिए जिस तरह आरडीएक्स लाने की पूरी साजिश का सिलसिलेवार पूरा ब्योरा दिया गया है। साथ ही पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के सरगना मसूद अजहर और हमले में शामिल अन्य आतंकियों के सबूत भी हैं। आंतकी घुसपैठ करते समय अपने बैग में बंदूक समेत बारूद छिपाकर लाये थे और इस हमले में 20 किलोग्राम आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था।एनआईए जांच अधिकारियों के अनुसार हमले का मुख्य साजिशकर्ता उमर फारूख था। वह 29 मार्च 2020 को आईडी एक्सपर्ट कामरान समेत मुठभेड़ में मारा जा चुका है। फारूख ने अप्रैल 2018 में भारत में घुसपैठ किया था और उसी ने पुलवामा हमले के लिए कार में आरडीएक्स एसेंबल किया था। उसके व्हाट्सएप मैसेज से इसका खुलासा हुआ कि वह अपनी हर गतिविधि की जानकारी पाकिस्तान भेज रहा था। साथ ही आतंकी बिलाल अहमद के बारे में पता चला।बिलाल कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला है और घर में ही आरा मशीन चलाता था। इसने हमले से पहले आतंकी अदील अहमद डार और अन्य आतंकियों को अपने घर में पनाह दी थी। इसके अलावा एनआईए ने पुलवामा हमले के आरोपी आतंकियों को पनाह देने के आरोप में बाप-बेटी तारिक अहमद शाह और इंशा जहां को भी गिरफ्तार किया था। बिलाल अहमद पर यह भी इल्जाम है कि उसने आतंकियों को महंगे मोबाइल फोन लेकर दिए, जिनके जरिए आतंकी पाकिस्तान में जैश-ए मोहम्मद के सरगनाओं से बातचीत करते थे।

स्वास्थ्य विभाग के निदेशक का दावा, सितंबर के अंत तक कोरोना होगा नियंत्रित

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हैदराबाद (तेलंगाना), (हि.स.)। ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमपी) क्षेत्र में अब कोरोना के मामलों में कमी आ रही है और सितम्बर माह के अंत तक राज्य में कोरानो पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया जायेगा। यह दावा राज्य स्वास्थ्य विभाग के निदेशक जी श्रीनिवास राव ने किया है। वे यहां मंगलवार को पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि काेराेना से बचाव को लेकर लोगों में जागरुकता बढ़ रही है। लोग इसी तरह की सावधानियां आगे भी बरते।  उन्होंने लोगों को बाहर जाते समय अनिवार्य रूप में शारीरिक दूरी का पालन और मास्क पहनने की सलाह दी जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना पीड़ितों को बेहतर उपचार प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब राज्य में कोरोना परीक्षण कार्य में तेजी लाई गई है।  राज्य में अब तक 10.21 लाख कोरोना परीक्षण किए जा चुके हैं। श्रीनिवास राव ने कहा कि निजी अस्पतालों को नियमों के अनुसार बिलों का भुगतान करना होता है। कुछ अन्य निजी अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें आयी हैं, इस पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

इसी बीच स्वास्थ्य विभाग ने अपने बुलेटिन में बताया कि पिछले 24 घंटे में प्रदेश में 2,579 नये मामले दर्ज किये गये हैं। इसके साथ ही तेलंगाना में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,08,670 हो गई है। 24 घंटे में तेलंगाना में नौ लोगों की मौत हो गई है। अब मरने वालों की संख्या बढ़कर 770 हो गई है। कल एक दिन में 1,752 लोगों को अस्पताल में छुट्टी दी गई हैं। इसके साथ ही अब तक राज्य में 84,163 लोग ठीक हो चुके हैं। बुलेटिन के अनुसार अब तेलंगाना में 23,737 मामले सक्रिय हैं। अब तक राज्यभर में 10,21,054 लोगों का कोरोना परीक्षण किया जा चुका है।

जालसाजी के आरोप में सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड के कुलपति प्रो. नंद कुमार यादव इंदु ने छोड़ा पद

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फर्जी नोटिफिकेशन के लिए रजिस्ट्रार पर जांच जारी

■ 21 जुलाई को कुलपति प्रो. इंदु के सेवा विस्तार के लिए रजिस्ट्रार प्रो एसएल हरि कुमार ने किया था फर्जी नोटिफिकेशन

■ जानकारी होने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लिया, बनाई जांच कमेटी

■ सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के कुलपति प्रो हरिशचंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में सीयूजे झारखंड के रजिस्ट्रार के खिलाफ जांच जारी

■ मूल रूप से बिहार के भागलपुर के रहने वाले हैं प्रो. नंद कुमार यादव इंदु

राजीव मिश्र के फेसबुक वाल से साभार

पटना, 24 अगस्त। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (सीयूजे, रांची) के विवादित कुलपति (वाइस चांसलर) प्रो नंद कुमार यादव इंदु को आखिरकार अपना पद छोड़ना पड़ा। सच तो ये है कि जालसाजी के आरोप में उनसे जबरन पद छोड़वा दिया गया क्योंकि उन्हें बर्खास्त करने की चेतावनी दी जा चुकी थी। मजबूर और लाचार प्रो. इंदु ने दोपहर में  रसायन (केमिस्ट्री) विभाग के प्रो रतन कुमार डे को चार्ज दे दिया। ये प्रो. रतन कुमार वहीं व्यक्ति हैं जिनके समय में जुलाई 2015 में केंद्रीय विश्वविद्यालय में  साइनडाई हुआ था। उस समय रतन कुमार डे ही विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार (कुलसचिव) के चार्ज में थे और साइन डाई लगने के बाद उन्हें हटा दिया गया था। उल्लेखनीय है कि प्रो. नंद कुमार यादव इंदु मूल रूप से बिहार के भागलपुर के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी डॉ. रोमा यादव भागलपुर की प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं।

विवादों में रहें हैं प्रो. नंद कुमार इंदु

वस्तुतः प्रो. नंद कुमार इंदु और विवादों का गहरा रिश्ता-नाता रहा है। जिस जालसाजी के आरोप में उन्हें पद छोड़ना पड़ा वह भी पिछले महीने जुलाई का है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कई कुलपतियों को अगले कुलपति की नियुक्ति तक एक्सटेंशन (सेवा विस्तार) दिया था। प्रो इंदु का कार्यकाल 31जुलाई 2020 को समाप्त होना था। लेकिन, सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड के कुलपति नंद कुमार यादव इंदू को सेवा विस्तार नहीं मिला था। इसके बावजूद प्रो. इंदू ने रजिस्ट्रार प्रो. एसएल हरि कुमार को अपने प्रभाव में लेकर एक जालसाजी की योजना तैयार की। योजनाबद्ध तरीके से दूसरे केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की सेवा विस्तार वाली चिट्ठी के आधार पर कुछ शब्दों के हेर-फेर के साथ अवैध रूप से प्रो. इंदू ने अपने सेवा विस्तार का पत्र तैयार करवाया। इसके बाद कुलसचिव प्रो. हरि कुमार ने बगैर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निर्देश के गलत तरीके से अपनी मर्जी से प्रो. इंदू के कुलपति पद पर एक्सटेंशन का पिछले महीने 21 जुलाई को नोटिफिकेशन कर दिया।  मामले की जानकारी होने के बाद  केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस मामले को बहुत ही गंभीरता से लिया और जालसाजी के इस मामले की जांच के लिए कुलसचिव प्रो. एसएल हरि कुमार के खिलाफ सेंट्रल यूनिवर्सिटी साउथ बिहार के कुलपति प्रो. हरिशचंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में एक सदस्यीय कमेटी बना दी। अंततः इस दबाव में प्रो. इंदु को पद छोड़ना पड़ा। लेकिन, रजिस्ट्रार प्रो. हरि कुमार के खिलाफ अभी भी जांच जारी है। 

कुछ दिनों पहले ही  पद छोड़ने की मिली थी चेतावनी

विश्वस्त सूत्रों की मानें तो केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने जालसाजी से सेवा विस्तार लेने, केंद्रीय विश्वविद्यालय रांची में विभिन्न पदों पर बहाली सहित कई मामलों को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले वाइस चांसलर प्रो. इंदु को कुछ दिनों पहले ही  पद छोड़ देने का निर्देश दिया गया था। उन्हें स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि अगर आप अपना पद नहीं छोड़ेंगे तो बर्खास्त कर दिया जाएगा।

नहीं बचा पाये मठाधीश पैरवीकार

प्रो. नंद कुमार यादव इंदु को बचाने के लिए पूरी एक लॉबी लगी हुई थी, लेकिन वो भी नहीं बचा पाये। इस लॉबी में वैसे मठाधीश शामिल थे जिनके भाई-भतीजों सहित अन्य संबंधियों की केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (रांची) के विभिन्न पदों पर नियुक्ति की गई है। लेकिन, यह मामला खुल चुका था और काफी ऊपर तक बात पहुंच चुकी थी, इस कारण उनकी सेवा विस्तार की पैरवी पर किसी ने तवज्जो नहीं दी और आखिरकार प्रो. इंदु को जालसाजी के आरोप में पद मुक्त होना पड़ा।

सोनिया बनी रहेंगी कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष, 6 महीने के अंदर होगा नये अध्यक्ष का चुनाव

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उज्ज्वल दुनिया \नई दिल्ली कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक सात घंटे तक चली। इस दौरान मीटिंग में कई बार गहमा गहमी भी हुई। इस मीटिंग में चिट्ठी को लेकर जमकर हंगामा हुआ। राहुल गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ के नेताओं ने खुली नाराजगी जाहिर की। राहुल गांधी ने यहां तक आरोप लगा दिया पार्टी के कुछ नेता भाजपा के इशारे में ऐसा काम कर रहे हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के विशेष आमंत्रित सदस्य मुनियप्पा ने बताया कि सोनिया गांधी ही कांग्रेस की अंतरिम सदस्य बनी रहेंगी। कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी के नाम पर कोई आपत्ति नहीं है।
 

सोनिया के नेतृत्व पर मतभेद नहीं 


कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य मुनियप्पा ने एएनआई को बताया कि नेतृत्व पर कोई मतभेद नहीं है। मुनियप्पा ने कहा कि नेतृत्व पर कोई अलग राय नहीं है और यहां तक कि गुलाम नबी आजाद, मुकुल वासनिक और आनंद शर्मा ने भी लिखित में दिया है कि नेतृत्व पर कोई विवाद नहीं है।

एक साल के अंदर होंगे चुनाव


सूत्रों ने कहा कि सीडब्ल्यूसी के सदस्यों ने एक साल के अंदर नए अध्यक्ष के चुनाव की बात की है। पार्टी नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यह प्रक्रिया छह महीने में शुरू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एआईसीसी सत्र का सत्र छह महीने में आयोजित होने की संभावना है।

पार्टी प्रमुख का पद राहुल गांधी को मिलना चाहिए


कई नेताओं ने मांग की कि राहुल गांधी को फिर से पार्टी प्रमुख का पद लेना चाहिए। सात घंटे तक चली सीडब्ल्यूसी की बैठक सोनिया गांधी के 20 से अधिक वरिष्ठ नेताओं द्वारा एक पत्र पर विवाद के बाद आयोजित की गई थी। सोनिया गांधी के अलावा, इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे और एके एंटनी भी शामिल थे।

विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के समुचित पदों के सृजन के लिए स्क्रीनिंग समिति के गठन को मंजूरी

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उज्ज्वल दुनिया \रांची ।  राज्य के सभी विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्धारित मानकों के आलोक में शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के समुचित पदों के सृजन प्रस्ताव को तैयार करने के मकसद से उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक स्क्रीनिंग समिति का गठन किया जाएगा । सीएम हेमन्त सोरेन ने स्क्रीनिंग समिति के गठन से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।

स्क्रीनिंग समिति में ये रहेंगे शामिल

उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में गठित होनेवाली स्क्रीनिंग समिति में निदेशक, उच्च शिक्षा सदस्य सचिव होंगे. इसके अलावा राज्य के विश्वविद्यालय के दो पूर्व कुलपति, संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव, कार्मिक, प्रशासनिक एवं राजभाषा विभाग के उप सचिव पद से उच्चतर पदाधिकारी, संबंधित विश्वविद्यालयों के उप निदेशक, उच्च शिक्षा निदेशालय  के अवर सचिव (बजट), उच्च शिक्षा निदेशालय के अवर सचिव (विधि), उच्च शिक्षा निदेशालय के अवर सचिव (स्थापना) और रूसा के  नोडल पदाधिकारी सदस्य् होंगे. 
 

सात सालों में दोगुना बढ़ी है विद्यार्थियों की संख्या


राज्य के विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में पिछले सात सालों के दौरान विद्यार्थियों की संख्या लगभग दोगुना बढ़ी है. लेकिन, कतिपय कारणों से शिक्षकों  एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के पदों का  सृजन विद्यार्थियों की संख्या के मानक अनुपात  के अनुसार नहीं हो पाया है. इन कमियों को दूर करने एवं गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के प्रसार को सुनिश्चित करने के मकसद से पदों के सृजन प्रस्ताव को लेकर स्क्रीनिंग समिति का गठन किया गया है.
 

उच्च शिक्षा की बेहतरी के लिए उठाए जा रहे ये कदम


उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के द्वारा उच्च शिक्षा की बेहतरी के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. इसके तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में डिग्री महाविद्यालय की स्थापना, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के अंतर्गत विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की आधारभूत संरचना मजबूत करना, झारखंड खुला विश्वविद्यालय एवं जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना, डिजिटल माध्यम से अध्ययन-अध्यापन कार्य हेतु झारखंड सेंटर फॉर डिजिटल लर्निंग की स्थापना की जा रही है. ऐसे में विभाग द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों को मूर्त रुप प्रदान करने की दिशा में यह जरूरी है कि विश्वविद्यालयों एवं इनके अधीनस्थ महाविद्यालयों में शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के समुचित पदों का सृजन किया जाए ।

राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रुप में कोई और मंजूर नहीं

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उज्ज्वल दुनिया \रांची ।  झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉक्टर रामेश्वर नेताओं ने सभी कांग्रेस जनों से चर्चा कर अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा सोनिया गांधी को पत्र लिखकर निवेदन किया कि आपके व राहुल गांधी जी के द्वारा विकट परिस्थितियों में कांग्रेस को नेतृत्व प्रदान किया है, जिसका लाभ सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी को ही नहीं पूरे देश को मिला है ऐसे में आप पूर्णकालिक अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी सँभालने का काम करें।

हमारी आस्था राहुल और सोनिया गांधी के प्रति

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, डॉक्टर इरफ़ान अंसारी, राजेश ठाकुर, मानस सिन्हा एवं संजय लाल पासवान ने एक स्वर में गांधी परिवार के प्रति आस्था जताते हुए कहा सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी ही कांग्रेस को नेतृत्व दे सकते हैं और उन पर समस्त कांग्रेस जनों का विश्वास है।झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर रमा खलखो, अशोक चौधरी, सुल्तान अहमद,भीम कुमार एवं प्रकोष्ठ एवं विभाग के प्रभारी रविन्द्र सिंह ने एक स्वर में सोनिया गांधी अथवा राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की बात कही है।

राहुल गांधी को मिले कांग्रेस की कमान

प्रवक्ताओं ने कहा कि सोनिया जी द्वारा अध्यक्ष पद सँभालने से इंकार करने पर राहुल गांधी को अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी संभालनी चाहिए । राहुल गांधी जी के नेतृत्व में पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक जैसे राज्यों में सरकारें बनी।राहुल जी भी अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालते हैं तो कांग्रेस के लिए श्रेष्ठ कर होगा।

अज्ञात अपराधियों ने कोयला व्यापारी के घर पर की गोलीबारी, व्यवसायी का भाई घायल

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क्षेत्र में दहशत फैलाने के मकशद से अपराधियों ने जाते वक्त बम भी फेंके जिससे क्षेत्र के लोगों में मचा हड़कंप

बालूमाथ : थाना क्षेत्र में रविवार की देर शाम बेखौफ अपराधियों ने कोयला ट्रांसपोर्टर मोहम्मद मुजम्मिल हुसैन के बालूमाथ के सेरेगाड़ा रोड पर स्थित आवास पर गोलीबारी की और जाते समय बम भी फेंके। 

रविवार को लगभग आठ बजे अचानक हुए इस हमले में मुजम्मिल हुसैन के छोटे भाई मोहम्मद मुनव्वर उर्फ़ मानो आंशिक रूप से घायल हो गए। गोली उनकी जांघ को छूते हुए बगल से निकल गई। 

इस घटना के संबंध में मोहम्मद मानो ने बताया कि मैं अपने घर के दरवाजा के सामने बुलेट में बैठा हुआ था।इसी बीच अचानक एक आपाची बिना नंबर का मेरे पास रुका और एकाएक गोलियां चलाना शुरू कर दिया। मैं भागते हुए घर के अंदर घुसा वहां भी उन लोगों ने दो गोलीयां चलाई जिसमें एक गोली मेरे घर के दीवार में लगा, दूसरा गोली मेरा स्कॉर्पियो का टायर में लगा जिससे टायर पंचर हो गया। अपराधियों ने जाते समय क्षेत्र में दहशत फैलाने को उदेश्य से बम भी फेंका।

घटना की सूचना मिलते ही बालूमाथ के थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की छानबीन शुरू कर दी है।हमला कर के जिस ओर अपराधी भागे उस ओर पीछा भी किया।खबर लिखे जाने तक बालूमाथ पुलिस अपराधियों के पीछे गई हुई है । पुलिस ने घटना स्थल के पास से दो गोली का खोखा भी बरामद किया है।

इस घटना के बाद बालूमाथ के शहरी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। घटना की सूचना मिलते ही बालूमाथ के सैकड़ों लोग मोहम्मद मुजम्मिल के घर पहुंचकर ढाढ़स बंधाया। वही दर्जनों मोटरसाइकिल पर सवार लोग भी अपराधियों के पीछा करते हुए सेरेगड़ा की ओर गए हुए हैं। 

हमला के कारणों का पता अबतक नहीं चल पाया है।
बता दे कि मोहम्मद मुजम्मिल बालूमाथ के कोयला के व्यवसायी हैं साथ ही उनका भाई मोहम्मद मुनव्वर भी कोयला का कारोबार से जुड़ा हुआ है।

दुमका से लुईस नहीं बाबूलाल होंगे भाजपा के उम्मीदवार!

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आंग्ल भाषा में एक शब्द है – हाइपोथेटिकल ।  हिन्दी में इसका अर्थ होता है -कल्पित,परिकल्पित आदि. सामान्यतः इस शब्द का प्रयोग  विशेषण और संज्ञा के रूप में होता है.हम पत्रकारों का सामना इस शब्द से  होता ही रहता है.सियासी महारथी हमारे सवालों को टालने अथवा अपनी सियासी रणनीति को आवरण में रखने के लिये हमारे आकलन जनित प्रश्न को हाइपोथेटिकल करार देते हैं.खैर, बेबाक में उपरोक्त शब्द की विवेचना नहीं करने जा रहा हूँ . बल्कि आप से एक अहम सियासी वार्तालाप साझा करने जा रहा हूँ ।

विगत् शुक्रवार को मुझे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ पदधारी रहे पूर्णकालिक स्वयंसेवक और झारखंड भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ पदधारी के साथ घंटों सियासी चर्चा का अवसर मिला.
मुझे एक पक्षीय पत्रकारिता का उलाहना देते हुये संघ के उक्त समर्पित वरिष्ठ ने कहा- सूबे में पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास की हठधर्मिता और संघ व भाजपा कार्यकर्ताओं की अनदेखी के कारण झारखंड मुक्ति मोर्चा को सरकार बनाने का मौका मिला,अन्यथा किसी भी सूरत में भाजपा की सरकार नहीं जाती. उन्होंने आगे कहा -एक बात और बता दूँ, सूबे की हेमंत सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं करने जा रही. बस अगामी उपचुनाव के नतीजे आने दीजिये और आपको सूबे का सियासी परिदृश्य परिवर्तित दिखाई देगा.

 मैंने प्रतिप्रश्न किया – बगैर बहुमत आंकड़े के आप ये दावा कैसे कर रहे हैं? 
श्रीमान जी ने कहा – हम संगठन शक्ति की राजनीति करते हैं . रघुबर दास सरकार में संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के कारण वर्तमान सरकार अस्तित्व में आई है और उसी संगठन सूत्र को पिरो कर भाजपा सरकार की शीघ्र पुनर्वापसी भी होगी.संघ के शीर्षस्थ और भाजपा आलाकमान की मंत्रणा अंतिम चरण में है.दुमका व बेरमो उपचुनाव में आपको मेरी बातों का धरातलीय फलाफल दिखने लगेगा. मैंने उनके दावे पर वर्तमान हालात का उदाहरण देते हुये व्यंग्यात्मक लहजे में पुछा- झाविमो का विलय कराकर बाबूलाल मरांडी को तो आप लोगों ने सुश्री उमा भारती सरीखा नेपथ्य दे ही दिया है. अपने झाविमो को पूरे झारखंड में सांगठनिक तौर पर खड़ा कर बाबूलाल जी कम से कम 08-10 विधायक तो जुटा ही लेते थे. कंघी का विलय कमल में करके भाजपा ने तो अपने बिखरे वोट बैंक को संवारने का जुगाड़ दुरुस्त कर लिया किन्तु बाबूलाल जी को क्या हासिल हुआ?आप लोग उनको अबतक नेता प्रतिपक्ष बनवा ही नहीं पाये और पुनः सरकार बनाने की बात कर रहे हैं? उन्होंने कुपित भाव से कहा- भाईसाहब, राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को एतद् संबंधी सम्मन भेज दिया है, बावजूद इसके सत्ताधारी टालमटोल करते रहेंगे तो उसकी काट भी तैयार है. मैंने कहा- विधानसभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार है इस विषय पर निर्णय लेने का. पिछली दफा आप लोग भी तो झाविमो विधायकों के विलय और दलबदल मामले को लंबे समय तक टालते रहे थे? मेरे इस सवाल के जवाब में संघ के पूर्णकालिक ने जो जवाब दिया, उसे सुनकर मेरा सर चकरा गया.जस के तस उनके शब्द बेबाकी से परोस रहा हूँ – भाई साहब, चुनाव आयोग की मंजूरी और राज्यपाल के समन के बावजूद वर्तमान  सत्ताधारी बाबूलाल जी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा देना टाल सकते हैं किन्तु यदि बाबूलाल मरांडी दुमका विधानसभा उपचुनाव भाजपा के टिकट पर जीत के आ गये तो?  मेरी जिज्ञासा बढ़ी और मैंने पुछा- पूर्व मंत्री लुईस मरांडी के स्थान पर बाबूलाल मरांडी का दांव क्यों?   संघ वाले भाई साहब ने कहा – बाबूलाल जी भले ही कुछ वर्षों के लिये भाजपा से दूर रहे किन्तु संथाल इलाके में उनकी सांगठनिक पकड़ और जन स्वीकार्य छवि नागपुर और दिल्ली दोनों के शीर्ष नेतृत्व को पता है. बाबूलाल जी की घर वापसी और झाविमो का विलय गहन शीर्ष चिंतन और भावी सियासी रणनीति के तहत हुई है भाई साहब. मैं कुछ और पुछता इससे पहले अपना उलाहना दोहराते हुये उन्होंने कहा- हेमंत सोरेन में झारखंड का भविष्य साबित करने की जल्दबाज़ी से परहेज कीजिये,एकांगी क्यों होते हैं?   अपने व्यंगबाण से मुझे झकझोर कर वो सज्जन तो विदा हो गये किन्तु मेरा पत्रकार मन व्यग्र हो उठा.   एकबारगी लगा कि मेरे माध्यम से संघ के वे वरिष्ठ खबर प्लांट कराने की मंशा से Hypothetical  कहानी सुना गये होंगे. फिर लगा ,मैं तो मामूली पत्रकार उन्हें उपरोक्त खबर प्लांट ही करानी होगी तो बड़े-बड़े मीडिया शिरोमणि उनकी कथा छापने-दिखाने को बैठे हैं .  मानसिक उथल-पुथल जब नाकाबिले बर्दाश्त हो गया तो मैं झारखंड भाजपा के एक पूर्व वरिष्ठ पदधारी के पास पहुंच गया. इधर उधर की बातें करने के बाद मैंने कहा- नेता जी, ये तो स्पष्ट जान पड़ता है कि  झारखंड में भी कोरोना के बीच ही उपचुनाव होगा। इलेक्शन कमीशन ने इसके लिए नई गाइडलाइन भी जारी कर दी है.

गाइडलाइन में उपचुनाव के दौरान बरते जाने वाले  एहतियात ,मसलन नामांकन से लेकर चुनाव प्रचार और मतदान तक की रूप रेखा तय हो ही गई है . दुमका और बेरमो के लिए झारखंड भाजपा की क्या तैयारी है ? नेता जी तनिक बिदके अंदाज में बोले- अरे भाई अध्यक्ष जी से पूछिये.हम लोग तो सिपाही हैं ,जैसे निर्देश मिलेंगे वैसे मैदान में डट जायेंगे.मैंने उन्हें कुरेदा- नेता जी, अंदरखाने तैयारी तो चल ही रही होगी? क्या भाजपा दुमका से पुनः डाॅ.लुईस मरांडी और बेरमो से योगेश्वर महतो बाटुल को ही उतारेगी.  उन्होंने शंका भाव से मुझे घूरा और कहा- अभी उम्मीदवार के नाम पर निर्णय नहीं हुआ है. प्रतीक्षा कीजिये, नाम की घोषणा हो ही जायेगी. फिलवक्त इतना ही जान लीजिये की भाजपा दोनों सीटों पर विजय की रुप-रेखा तय कर चुकी है. हमें सिर्फ दुमका और बेरमो नहीं जितना है बल्कि संथाल और कोयलांचल में विगत् चुनाव में हुई सांगठनिक चूक भी सुधारनी है. संभव है दोनों सीटों पर कद्दावर चेहरे भी उतारे जा सकते हैं. उन्होंने आगे कहा- कौशलेन्द्र जी, आप तो भाजपा में गुटबाजी और सांगठनिक खींचातानी आदि के साथ-साथ हेमंत सोरेन में झारखंड का भविष्य आदि लिखे चले जा रहे हैं. उपचुनाव की तारीखों का एलान तो होने दीजिये भाई साहब. पिछली दफा कुछेक सांगठनिक व शासनिक चूकों से हम बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर पाये किन्तु उपचुनाव के नतीजे आपकी बेबाकी का रूख बदल देंगे, नोट कर लीजिए.   मैंने एक साथ कई प्रश्न दाग दिये- क्या बाबूलाल मरांडी के सियासी आभामंडल तले भाजपा सत्ता में पुनर्वापसी करेगी; यदि हां तो क्या रघुबर दास और अर्जुन मुंडा का सूबे की सियासत में पारी समाप्त मान लिया जाये? 

यदि ऐसी ही योजना है तो प्रदेश भाजपा संगठन में रघुबर दास समर्थकों को काबिज कराने के लिये बाबूलाल मरांडी के साथ भाजपा में आये नेताओं को हासिये पर क्यों रखा गया? नेता जी ने लगभग झल्लाते हुये कहा- भाजपा सत्ताधारी झामुमो और उसकी सहयोगी कांग्रेस व राजद की भांति परिवार केन्द्रित दल नहीं है. हमारे यहां संगठन सर्वोच्च होता है. कोई कार्यकर्ता किसी नेता विशेष का नहीं होता.संगठन तय करता है कि किसे क्या भूमिका निभानी है. अर्जुन मुंडा जी केन्द्रीय मंत्री के तौर पर सफलता पूर्वक अपनी भूमिका निभा रहे हैं. संभव है शीघ्र ही रघुबर दास भी भाजपा केन्द्रीय संगठन में अपनी भूमिका निभाते नजर आयें.  आप पत्रकार लोग न ,बस अपने आलेखों में गुट गढ़ लेते हैं. भाजपा संगठन समर्पित कार्यकर्ताओं के अनुशासन से चलता है भाई साहब.
सुबह संघ के स्वयंसेवक और शाम में भाजपा के वरिष्ठ नेताजी के उलाहना समाविष्ट दावे से इतना तो तय जान पड़ता है कि सूबे की सियासी हांडी में चौंकाने वाला उबाल आने वाला है.  सच कहूँ तो मुझे अब एतबार सा होने लगा है कि सियासत में Hypothetical बयान भी गूढ़ ही होते हैं.  आप क्या सोचते हैं ; जरूर अवगत कराइयेगा क्योंकि आपके मंतव्य पर मंथन के उपरांत ही तो जीवंत होते हैं मेरे बेबाक बोल.

(वरिष्ठ पत्रकार कौशलेन्द्र जी के फेसबुक वाल से साभार)

सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ा, राहुल

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इस बार गांधी परिवार से बाहर का होगा कांग्रेस अध्यक्ष? 

उज्ज्वल दुनिया/ कांग्रेस में कार्यकारिणी की बैठक से ठीक पहले एकबार फिर अध्यक्ष पद को लेकर उहापोह की स्थिति उत्पन्न हो गई है । पार्टी में जोर पकड़ रही आमूलचूल परिवर्तन की मांग के बीच अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि अध्यक्ष पद पर एक साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी हूं ।  अब कांग्रेस के नेता अपना नया अध्यक्ष चुन लें ।

सोनिया के इस बयान के बाद हालात फिर से कमोबेश वैसे ही बन गए हैं, जैसे आज से एक साल पहले बने थे ।  तब राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था । पार्टी तब भी दो धड़ों में बंटी नजर आ रही थी, आज भी नजर आ रही है । लेकिन तब और अब के हालात अलग हैं । तब राहुल गांधी ने 2019 की चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद छोड़ा था ।  सोनिया गांधी ने बड़े परिवर्तन को लेकर उठ रही मांग के कारण पद छोड़ने की बात कही है ।

नेतृत्व विवाद के बीच अध्यक्ष पद छोड़ेंगी सोनिया गांधी, कांग्रेस को चुनना होगा नया मुखिया
गौरतलब है कि कांग्रेस के 23 बड़े नेताओं ने सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी में ऊपर से लेकर नीचे तक बड़े परिवर्तन की मांग की थी. सोनिया को लिखी चिट्ठी में नेताओं ने यह सवाल भी उठाए थे कि इस दौरान अध्यक्ष के संबोधन के अलावा कुछ नहीं होता. इस चिट्ठी पर जिन नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं, उनमें पांच पूर्व  मुख्यमंत्री और कार्यकारिणी के कई सदस्य भी शामिल हैं.

राहुल नहीं तो फिर कौन होंगे कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष?

जितिन प्रसाद, मुकुल वासनिक ने भी चिट्ठी पर हस्ताक्षर किए थे, जबकि ये नेता कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं । 24 अगस्त को कार्यकारिणी की बैठक होनी है ।  ऐसे में यदि सोनिया गांधी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देती हैं, तो कार्यकारिणी के सामने नया अध्यक्ष चुनने की चुनौती भी होगी ।

अमेरिका ने शुरु किया दशक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास, 10 देशों की नौसैनिक और मारक युद्धपोत शामिल

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उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली । कोरोना वायरस महामारी और चीन से तनाव के बीच चलते अमेरिका ने हवाई द्वीप समूह के पास दुनिया का सबसे बड़ा नौसैनिक अभ्यास रिमपैक शुरू कर दिया है। 17 अगस्त से 31 तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास में 10 देशों के 20 महाविनाशक युद्धपोत और सबमरीन हिस्सा ले रहे हैं। इस युद्धाभ्यास में चीन को न्योता नहीं दिया गया है। युद्धाभ्यास ऐसे समय पर होने जा रहा है जब अमेरिका ऑस्ट्रेलिया और भारत समेत कई देशों के साथ चीन का तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दादागिरी को रोकने के लिए अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को तैनात किया है।

यहीं नहीं अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर लगातार इस इलाके में न केवल गश्त लगा रहा है, बल्कि युद्धाभ्यास भी कर रहा है। इस तनाव को देखते हुए माना जा रहा था कि अमेरिका ताइवान की नौसेना को भी रिमपैक में शामिल होने का न्योता दे सकती है लेकिन ऐसा हुआ नहीं। माना जा रहा है कि अमेरिका ने चीन के साथ तनाव को चरम पर पहुंचने से रोकने के लिए ताइवान को इस अभ्यास में न्योता नहीं दिया। आमतौर पर रिमपैक में 30 देशों के 50 युद्धपोत सबमरीन, 200 फाइटर जेट और 25 हजार जवान हिस्सा लेते रहे हैं। हालांकि कोरोना संकट की वजह से इस बार केवल 5300 जवान ही हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिका के तीसरे फ्लीट के कमांडर वाइस एडमिरल स्कॉट कॉन ने कहा कि इस युद्धाभ्यास का मकसद प्रशांत महासागर में अपने दोस्तों के बीच एक-दूसरे पर निर्भरता और विश्वास को बढ़ाना है।

इस नौसैनिक अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, ब्रूनई, कनाडा, फ्रांस, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, सिंगापुर और अमेरिका हिस्सा ले रहे हैं। इस बार अभ्यास के दौरान 10 देशों की नौसेनाएं जमीनी हमले और सबमरीन युद्धकौशल का अभ्यास करेंगे। इस दौरान लाइव फायर के भी अभ्यास होंगे। कोरोना वायरस खतरे को देखते हुए सुरक्षा के खास उपाय किये गये हैं। करीब 14 दिन तक क्वारंटाइन रहने के बाद ही इस अभ्यास में सैनिकों को हिस्सा लेने दिया जा रहा है। 
चीन को भी एक बार फिर से इस युद्धाभ्यास से बाहर रखा गया है। साउथ चाइना पर कब्जे के लिए चीन ने एक तरफ अपने कृत्रिम द्वीपों पर फाइटर जेट तैनात किए हैं, वहीं उसकी सबमरीन और युद्धपोत भी इलाके में तनाव की वजह बने हुए हैं।  चीन का अपने पड़ोसी देशों भारत, जापान, मलेशिया, वियतनाम और फिलीपींस से तनाव चल रहा है। हांगकांग पर जबरन नियंत्रण के बाद चीन ने ताइवान पर कब्जे की तैयारी तेज कर दी है।

चीन ने ताइवान स्ट्रेट के पास अपने पानी और जमीन पर चलने में सक्षम युद्धपोतों और फाइटर जेट की तैनाती की है। यही नहीं चीन लगातार ताइवान स्ट्रेट के पास युद्ध अभ्यास कर रहा है। सैन्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि चीन ताइवान पर कब्जे की तैयारी कर रहा है। चीन ने ताइवान पर दबाव बनाने के लिए ताइवान स्ट्रेट के पास करीब 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं। इसके लिए उसने दो मरीन ब्रिगेड बनाए हैं। चीन ने धमकी दी है कि अगर राजनीतिक तरीके से ताइवान चीन का हिस्सा नहीं बनेगा तो वह ताकत के बल पर ताइवान पर कब्जा कर लेंगे।Attachments area

अस्पताल में इलाजरत विक्षिप्त व्यक्ति ने वार्ड में मचाया उत्पात, वृद्ध को पीटकर उतारा मौत के घाट

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मूकदर्शक बने रहे अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य व सुरक्षाकर्मी, घटना के बाद अस्पताल छोड़ भागे सीएस व डीएस

उज्ज्वल दुनिया संवाददाताचतरा। चतरा : सदर अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही उजागर। अस्पताल में ईलाजरत विक्षिप्त व्यक्ति ने वार्ड में मचाया उत्पात। अस्पताल के मेल वार्ड में एडमिट अज्ञात वृद्ध को पीटकर उतारा मौत के घाट। मूकदर्शक बने रहे अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य व सुरक्षाकर्मी। घटना के बाद अस्पताल छोड़ भागे सीएस व डीएस। पुलिस को दी गई घटना की सूचना, वार्ड में ही पड़ा है वृद्ध का शव। मच्छरदानी के रड से पीटकर की गई है हत्या।

पुलिस को दी गई घटना की सूचना, वार्ड में ही पड़ा है वृद्ध का शव, मच्छरदानी के रड से पीटकर की गई है हत्या

चतरा सदर अस्पताल में इलाज रत डाडी निवासी  70 वर्षीय वृद्ध  डढन भुईया की हत्या रविवार की शाम गिधौर निवासी विक्षिप्त विजय महतो ने मच्छरदानी की रड से पीट कर कर दी। डढन को सिमरिया रेफरल अस्पताल  से 20 अगस्त की रात बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल चतरा भेज दी थी। वही गिधौर निवासी विक्षिप्त विजय महतो 29 जुलाई को अस्पताल में भर्ती हुआ था। दोनों एक ही वार्ड में थे। इसी दौरान हत्या की घटना घटी।

चीन ने नेपाल की जमीन पर किया कब्जा, विपक्ष ने कम्युनिस्ट पार्टी पर लगाया देश बेचने का आरोप

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– नेपाल और चीन ​के बीच टकराव का मुद्दा रहे सीमा के कई स्तम्भ गायब 

उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली, 24 अगस्त (हि.स.)। नेपाल को चीन से ‘दोस्ती’ की बड़ी कीमत चुकी पड़ रही है लेकिन नेपाली प्रधान मंत्री केपी शर्मा ओली के मौन समर्थन से नेपाली भूमि पर चीन का अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। अब तक चीन ने नेपाल के सात ​​सीमावर्ती जिलों में कई स्थानों पर जमीन हथिया ली है। सरकार की चुप्पी का नतीजा है कि नेपाल में चीन का ‘विस्तारवाद’ बढ़ता जा रहा है और देश की ओली सरकार इस मुद्दे पर आंखें मूंदे है। 

– ​सीमावर्ती जिलों में कई स्थानों की 64 हेक्टेयर भूमि पर किया अतिक्रमण  

नेपाल के कृषि मंत्रालय के सर्वेक्षण विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल के जिन जिलों की जमीन चीन हड़प रहा है, उनमें दोलखा, गोरखा, दार्चुला, हुमला, सिंधुपालचौक, संखुवासभा और रसुवा शामिल हैं। नेपाल के सर्वेक्षण और मानचित्रण विभाग के अनुसार चीन ने अंतरराष्ट्रीय सीमा 1,500 मीटर को दोलखा में नेपाल की ओर धकेल दिया है। चीन ने दोलखा में कोरलंग क्षेत्र में सीमा स्तंभ संख्या 57 को पीछे खिसका दिया है, जो पहले कोलांग के शीर्ष पर स्थित था। यह स्तंभ दोनों देशों ​​के बीच टकराव का मुद्दा रहा है। चीन ने नेपाली सरकार पर दबाव डाला कि दोनों देशों के बीच सीमा विवादों को हल करने के लिए चौथे प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर न करें, क्योंकि चीन यथास्थिति बनाए रखना चाहता था और सीमा व्यवस्था को और आगे बढ़ाता था।

– चार जिलों में नदियों के किनारे की जमीन चीन ने अपनी सीमा में मिलाई

सर्वेक्षण और मानचित्रण विभाग के मुताबिक चीन ने गोरखा और दार्चुला जिलों में नेपाली गांवों पर कब्जा कर लिया है। दोलखा की ही तरह चीन ने गोरखा जिले में सीमा स्तंभ संख्या 35, 37 और 38 और सोलुखुम्बु में नम्पा भंज्यांग में सीमा स्तंभ संख्या 62 को स्थानांतरित कर दिया है। पहले गोरखा के रुई गांव और टॉम नदी के क्षेत्रों में तीन स्तंभ स्थित थे। हालांकि नेपाल का आधिकारिक मानचित्र अभी भी इस गांव को नेपाली क्षेत्र के हिस्से के रूप में दिखाता है जबकि चीन ने 2017 में इस क्षेत्र पर कब्जा करके इसे तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के साथ मिला दिया था।