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झारखंड के शहरों में तीन गुनी हो गई बेरोजगारी

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उज्ज्वल दुनिया/रांची । झारखंड के शहरों में बेरोजगारी एक महीने में तिगुनी से भीअधिक हो गई है। जुलाई में प्रदेश के शहरों में 5.6 फीसदी बेरोजगारी थी। अगस्त में यह बढ़कर 19.1 फीसदी हो गई है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी(सीएमआईई) के ताजा आंकड़ों से इसका खुलासा हआ है।

एक महीने के अंदर बेरोजगारी में 13 फीसदी का इजाफा 

प्रदेश के शहरों में एक महीने के भीतर 13.5 फीसदी बेरोजगारी का इजाफा हुआ है। इससे साफ है कि झारखंड में बंद हो रहे उद्योगों की मार रोजी-रोटी पर पड़ने लगी है। अनलॉक की प्रक्रिया के कई चरण बीत जाने के बाद भी विभिन्न कारणों से आर्थिक चक्र के पूरे नहीं होने के कारण एकबार फिर से काम-धंधों पर असर पड़ने लगा है।  

जुलाई में प्रदेश की बेरोजगारी 7.6 फीसदी आंकी गई थी। यह कोरोना से पहले वाले महीने मार्च के 8.2 फीसदी से थोड़ा कम थी। जाहिर है कि अनलॉक के बाद खुले उद्योग-धंधों तथा दूसरे कारोबारों में पहले से काम कर रहे लोगों को फिर से काम मिलने लगा। पहले वाले स्वरोजगार भी बड़ी तादाद में बहाल हो रहे थे। 

वापस बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं लोग 

आवागमन की सुविधा मिलने के बाद बड़ी तादाद में लोग दूसरे प्रदेशों की ओर कूच कर गए। इसी बीच शहरों में मांग और आपूर्ति की शृंखला पूरी नहीं होते देख कई उद्योगों के शटर गिरे। बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू हुई है। अगस्त की रिपोर्ट में कुल बेरोजगारी के आंकड़े में भी इसका इजाफा दिख रहा है। जो जुलाई के 7.6 फीसदी से बढ़क 9.8 हो गया है।

झारखंड के गांवों में घटी बेरोजगारी 

झारखंड के शहरों के विपरीत यहां के गांवों में बेरोजगारी घटी है। सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के गांवों में अगस्त के बाद 6.3 फीसदी बेरोजगारी का अनुमान है। जो जुलाई के बाद 8.4 फीसदी था। जानकारों के मुताबिक इसका कारण बड़ी तादाद में लोगों का कृषि क्षेत्र में या कृषि आधारित स्वरोजगार में काम मिल जाना है। इसके अलावा झारखंड के गांवों से बडी संख्या में लोगों का पलायन भी हो रहा है। गांवों से बस में भरकर अकुशल मजदूर महानगरों की ओर ले जाए जा रहे हैं।

चीन ने फिर अरुणाचल प्रदेश को बताया अपना हिस्‍सा

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– चीनी व‍िदेश मंत्रालय बोला-अरुणाचल प्रदेश को कभी भी नहीं दी मान्यता
– भारत के पूर्वी प्रदेश को बताया चीन के दक्षिण तिब्बत क्षेत्र का हिस्सा
– पांच भारतीय बंधकों पर चीनी सेना ने नहीं दिया कोई भी जवाब

उज्ज्वल दुनिया  नई दिल्ली, 08 सितम्बर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले से पांच भारतीय नागरिकों के अपहरण मामले में भारतीय सेना की पूछताछ पर चीन ने अभी भी चुप्‍पी साध रखी है बल्कि इसके उलट एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। चीन के व‍िदेश मंत्रालय ने यहां तक कह द‍िया क‍ि चीन ने कभी भी अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी है और यह चीन के दक्षिण तिब्बत क्षेत्र का हिस्सा है।

अरुणाचल प्रदेश के 5 अगवा भारतीयों के बारे में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता झाओ ल‍िज‍िन से जब पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में जानकारी देने की बजाय अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्‍सा बता द‍िया। उन्‍होंने कहा कि भारतीय सेना के अनुरोध के बारे में उन्‍हें कोई जानकारी नहीं है। ल‍िज‍िन ने कहा कि चीन ने कभी अरुणाचल प्रदेश को मान्‍यता नहीं दी है जो चीन का दक्षिणी तिब्‍बत इलाका है। भारतीय सेना के पीएलए को भारतीयों को छोड़ने के लिए संदेश भेजने के सवाल पर चीनी प्रवक्‍ता ने कहा कि हमारे पास अभी इस बात की कोई जानकारी नहीं है। 

कंगना रनौत की सुरक्षा में दो कमांडो समेत 11 जवान तैनात रहेंगे

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उज्ज्वल दुनिया नई दिल्ली, 08 सितम्बर (हि.स.)। महाराष्ट्र में शिवसेना नेताओं से चल रही जुबानी जंग के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को गृह मंत्रालय ने वाई श्रेणी की सुरक्षा दे दी है। अब उनकी सुरक्षा में 11 जवान तैनात रहेंगे। इसमें एक या दो कमांडो और बाकी पुलिसकर्मी होंगे। यानी कंगना रनौत जब 9 सितम्बर को मुंबई पहुंचेंगी तो उनके साथ वाई श्रेणी की सुरक्षा रहेगी। 

हाल में कंगना रनौत ने शिवसेना नेता संजय राउत पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उन्हें मुंबई वापस नहीं आने की धमकी दी है। इस पर कंगना ने एक वीडियो शेयर करके कहा था कि संजय राउत का मतलब महाराष्ट्र नहीं है। उन्होंने 9 सितम्बर को मुंबई आने का चैंलेंज किया था। कंगना रनौत सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड मामले से लेकर बॉलीवुड में नेपोटिज्म, मूवी माफिया और ड्रग जैसे मुद्दे पर सोशल मीडिया पर अपनी बात बेबाकी से रख रही हैं।  लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से वह अपने परिवार के साथ मनाली में हैं। 

नई शिक्षा नीति से शिक्षा के निजीकरण एवं व्यापारीकरण को बढ़ावा

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सीएम हेमंत सोरेन ने कहा 
समवर्ती सूची का विषय होने के बाद भी राज्यों से इस सम्बन्ध में बात नहीं करना सहकारी संघवाद की भावना को चोट 
 इस नीति को लागू करने के लिए बजट का प्रावधान कहाँ से किया जाएगा वह स्पष्ट नहीं है
 *नई शिक्षा नीति में आदिवासी/दलित/ पिछड़े/ गरीब/ किसान-मजदूर के बच्चों के हितों की रक्षा करने सम्बन्धी प्रावधानों में स्पष्टता का अभाव 
 *रोजगार नीति पर कोई चर्चा नहीं की गयी है 
 *क्षेत्रीय भाषाओँ पर चर्चा करने वक़्त सिर्फ आठवीं अनुसूची में सम्मिलित भाषाओँ का जिक्र एक बहुत बड़े वर्ग के साथ नाइंसाफी
 *झारखण्ड जैसे भौगोलिक रूप से पिछड़े/ दुर्गम क्षेत्र को नयी नीति से हानि उठानी पड़ेगी ।

उज्ज्वल दुनिया/रांची । शिक्षा नीति पर अपनी बात रखते हुए श्री सोरेन ने कहा कि आजादी के बाद यह सिर्फ तीसरा मौक़ा है जब शिक्षा नीति पर चर्चा हो रही है । उन्होंने कहा कि भारत एक विविधता से भरा देश है, यहाँ विभिन्न राज्यों की जरूरतें अलग-अलग हैं और जैसा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसे बनाने में सभी राज्यों के साथ खुले मन से चर्चा होनी चाहिए थी, जिससे  कोई राज्य इसे अपने ऊपर थोपा हुआ नहीं माने । आगे उन्होंने इस नीति को बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और परामर्श के अभाव की बात कही । आज जब नीति बनकर तैयार हो गयी है तब केंद्र सरकार राज्यों के साथ इस पर चर्चा कर रही है l अच्छा होता कि इस पर पहले बात होती और सभी राज्य सक्रिय रूप से इसे बनाने में अपनी भागीदारी निभाते । 

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि आप निजी और विदेशी संस्थानों को आमंत्रित कर रहे हैं परन्तु, आदिवासी, दलित, पिछड़े, किसान-मजदूर वर्ग के बच्चों के हितों की रक्षा के बारे में इस दस्तावेज में कुछ ठोस नहीं कहा गया है । क्या 70-80 फीसदी के बीच की जनसंख्या वाले इस बड़े वर्ग के बच्चे लाखों-करोड़ों की फीस दे पाएंगे ?

लाखों-करोड़ों की फीस वसूलने वाले निजी विश्व विद्यालय जब हमारे आज के प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोफेसरों के सामने बड़े-बड़े सैलरी पैकेज का ऑफर रखेंगे तो हम अपने पुराने सरकारी संस्थानों के अच्छे प्रोफेसरों को कैसे रोक पाएंगे ? और इससे हानि किस वर्ग के बच्चे-बच्चियों को होगी ?

 *हेमंत सोरेन ने कहा कि आप और आपकी पार्टी ने  ने 2010-11 में निजी सस्थानों को बढ़ावा देने सम्बन्धी निर्णय का कड़ा विरोध किया था जिसे झारखंड मुक्ति मोर्चा जैसे अन्य दलों का समर्थन भी मिला था । तो किन परिस्थितियों में आज नई शिक्षा नीति में विदेशी निजी शिक्षण केन्द्रों को बढ़ावा देने का मन बना लिया गया ?  

उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति के साथ-साथ रोजगार सम्बंधित नीति पर भी इसमें चर्चा होनी चाहिए थी । दोनों लगभग साथ-साथ चलती हैं । परन्तु, वह यहाँ दिख नहीं रहा है । श्री सोरेन ने कहा कि स्कूल में ज्यादा वर्ष गुजारने से अगर बच्चे को रोजगार सम्बंधित फायदा नहीं दिखेगा तो हम चाहें कितनी भी अच्छी शिक्षा नीति बना लें वह सफल नहीं होगी ।

उन्होंने कहा कि नई नीति को लागू करने में खर्च होने वाली धन राशि कहाँ से आएगी ? झारखण्ड की बात रखते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ हमने शिक्षा में उन्नति को लेकर 2020-21 में राज्य के कुल बजट का 15.6 फीसद शिक्षा को समर्पित किया है जो कि पिछले वर्ष से 2 फीसदी ज्यादा है ।  नई नीति में कहा गया है कि GDP का 6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च होगा । परन्तु इसके क्रियान्वयन के चलते राज्यों के कंधों पर अतिरिक्त कितना बोझ आएगा उस पर कुछ बात नहीं की गयी है ।

 *नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओँ को शिक्षा के माध्यम के रूप में बढ़ावा देने की बात कही गयी है। परन्तु, खेद है कि ऐसा करते वक़्त सिर्फ आठवीं अनुसूची में सम्मिलित भाषाओँ का ही जिक्र किया जा रहा है । यहाँ मैं कहना चाहूंगा कि सिर्फ आठवीं अनुसूची को आधार बनाने से अन्य बहुत भाषाएँ, जो* *आठवीं अनुसूची का हिस्सा नहीं बन पाई है उसके साथ अन्याय होगा । मुख्यमंत्री  ने कहा कि नई शिक्षा नीति बनाते हुए हमें अवसर की समानता का जो मौलिक अधिकार है उसे ध्यान में रखना होगा । निजीकरण एवं व्यापारीकरण को बढ़ावा देने से एक बड़े वर्ग के साथ अन्याय होगा ।आदिवासी/दलित/ पिछड़े/ गरीब/ किसान-मजदूर वर्ग से बड़ी हिम्मत करके कुछ लोग सफलता की सीढ़ी चढ़ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं । यह उनसे सीढ़ी छीनने जैसा काम होगा।

नई शिक्षा नीति सरकार की नहीं बल्कि देश की है: प्रधानमंत्री

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उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली, 08 सितम्बर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश की आकांक्षाओं को पूरा करने की कुंजी है। इसमें सरकार का दखल कम से कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये सरकार की नहीं बल्कि देश की शिक्षा नीति है।

प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यपालों और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे विदेश नीति देश की नीति होती है, रक्षा नीति देश की नीति होती है, वैसे ही शिक्षा नीति भी देश की ही नीति है। उन्होंने कहा कि तीन दशक में पहली बार देश की आकांक्षाओं से जुड़ी नीति तैयार की गई है जिसका हर ओर स्वागत हो रहा है।

उन्होंने कहा कि केंद्र, राज्य सरकार और स्थानीय निकाय शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी से जुड़े होते हैं। लेकिन ये भी सही है कि शिक्षा नीति में सरकार, उसका दखल और उसका प्रभाव कम से कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति से शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों के जुड़ने से उसकी प्रासंगिकता और व्यापकता बढ़ती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति अध्ययन के बजाय सीखने पर फोकस करती है और पाठ्यक्रम से और आगे बढ़कर महत्वपूर्ण सोच पर जोर देती है। उन्होंने कहा कि भारत शिक्षा का प्राचीन केंद्र रहा है और हम इसे 21वीं सदी में भी एक ज्ञान अर्थव्यवस्था बनाने के लिए काम कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति भारत में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के परिसर खोलने का मार्ग प्रशस्त करती है, ताकि आम परिवार के युवा भी उनके साथ जुड़ सकें।

पीएम मोदी ने कहा कि भाषा हमारी संस्कृति का अहम अंग है लेकिन यह किसी भी प्रदेश पर थोपी नहीं जाएगी। विद्यार्थियों के बस्तों के बोझ के संबंध में प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय से ये बातें उठती रही हैं कि हमारे बच्चे बैग और बोर्ड एग्ज़ाम के बोझ तले, परिवार और समाज के दबाव तले दबे जा रहे हैं। इस पॉलिसी में इस समस्या को प्रभावी तरीके से समाधान किया गया है।

निशिकांत दूबे के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका

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उज्ज्वल दुनिया /रांची । सीएम हेमंत सोरेन ने एक बार फिर अदालत की शरण लेते हुए गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ रांची सिविल कोर्ट में मिसलेनियस सिविल एप्लीकेशन दायर की है । हेमंत सोरेन द्वारा दर्ज करवायी गयी इस विविध दीवानी याचिका की सुनवाई रांची सिविल कोर्ट में सब जज-1 की अदालत में होनी है । इस मामले में सुनवाई के लिए 11 सितंबर की तिथि निर्धारित की गयी है ।

सिविल सूट की हुई सुनवाई


वहीं हेमंत सोरेन के द्वारा निशिकांत दुबे के खिलाफ किये गये सिविल सूट पर सुनवाई प्रारंभ हो चुकी है । सोमवार को सिविल सूट पर आंशिक सुनवाई हुई, इसके बाद अदालत ने इस मामले में विस्तृत सुनवाई के लिए 11 सितंबर की तारीख तय की है ।

इस विविध दीवानी याचिका को 2 सितंबर को पंजीकृत करवाया गया है और सीआरपीसी की धारा 39, 1, 2 और 3 के तहत यह याचिका सीएम हेमंत सोरेन के द्वारा अपने अधिवक्ता के माध्यम से दायर की गयी है ।
 

ज्ञात हो कि पूर्व में हेमंत सोरेन के द्वारा दर्ज ओरिजनल सूट में गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के अलावा, ट्विटर कम्युनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और फेसबुक इंडिया ऑनलाइन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी पार्टी बनाया गया है । हेमंत सोरेन द्वारा दर्ज कराये गये केस का फाइलिंग नंबर 392/2020 है एवं पंजीकृत नम्बर 151/2020 है । यह मुकदमा 4 अगस्त को दायर किया गया था ।

भाजपा को हमें माटी की पार्टी बनाना है, जमीन पर काम करना होगा

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उज्ज्वल दुनिया /रांची । हमारा दायित्व बनता है कि केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जो कार्यक्रम सुपुर्द किए गए हैं, हम सभी को साथ मिलकर उन कार्यक्रमों को पूरा करना है। भारतीय जनता पार्टी को हमें माटी की पार्टी बनानी है। इसके लिए जनता के सवालों को लेकर मंडल स्तर पर आंदोलन को धारदार बनाने की जरूरत है। ये बातें भाजपा कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कही ।

पुलिस और गुंडो के गठजोड़ से डराना चाहती है सरकार 


बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का काम किया जा रहा है। अब तक 116 पार्टी के कार्यकर्ताओं और सरकार की लूट- खसोट की नीति का मुखर विरोध करने वाले जनप्रतिनिधियों को फंसाने का प्रयास किया गया है। सिर्फ फंसाने का प्रयास नहीं बल्कि पुलिस और गुंडों के गठजोड़ से इन्हें धमकी भी दिलवाई जा रही है। पूरे प्रदेश में सरकार की गलत नीतियों का विरोध करने पर झूठे मुकदमे में फंसने वाले लोगों की संख्या कार्यकर्ताओं सहित लगभग 160 है। हमें सरकार और पुलिस की इस बदले की भावना की कार्यवाई को लेकर पुरजोर विरोध करने की जरूरत है। पुलिस – प्रशासन को भी किसी के इशारे पर नहीं बल्कि निष्पक्ष होकर कार्य करने की जरूरत है। 

ट्रांसफर-पोस्टिंग उद्योग की बदौलत चर रही है सरकार 

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में भ्रष्टाचार चरम पर है। इसके विरुद्ध हमें आंदोलन करनी होगी। नई सरकार में भ्रष्टाचार के जैसे-जैसे कारनामे सामने आ रहे हैं, वह आश्चर्य पैदा करती हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग एक उद्योग बन चुका है। पैसे लेकर अधिकारियों के तबादले होंगे तो भ्रष्टाचार कैसे रुकेगा ? बालू-कोयले की लूट और चौतरफ़ा वसूली हो रही है। ये सारे लूट सरकारी संरक्षण में  किए जा रहे हैं। लूट के पैसे अधिकारी से लेकर ऊपर तक बांटे जा रहे हैं। खान-खनिज को झारखंड सरकार अपने चहेते को देकर राज्य को लूटने की मंशा पाले हुए है, भाजपा इसे पूरा नहीं होने देगी। जो भी होगा, नियम-सम्मत होगा। 

अपराधियों से सत्ता के शीर्ष तक पैसे पहुंचते हैं

उन्होंने कहा कि झारखंड में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बद-से-बदतर है। अपराधी और उग्रवादियों का गठजोड़ खतरनाक संकेत है। राज्य किस ओर जा रहा है, समझने की जरूरत है। आम लोगों के अलावा जनप्रतिनिधियों को, यहां तक कि  मुख्यमंत्री जी को भी धमकी मिलना और अब तक इसका खुलासा नहीं होना, साबित करता है कि राज्य में अपराधी मजबूत हैं। या जानबूझकर अपराध को बढ़ावा दिया जा रहा है, समझ से परे है। अपराधियों से सत्ता के शीर्ष तक पैसे पहुंचते हैं। 

राज्यों से बातचीत कर बनानी चाहिए थी नई शिक्षा नीति

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उज्ज्वल दुनिया /रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर राज्य सरकार की चिंता से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज केंद्र सरकार को अवगत करा दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का यह मानना रहा है कि  संघीय ढांचे के अनुरूप में कोई भी राष्ट्रव्यापी नीति को लागू करने के पहले राज्यों से विचार किया जाना चाहिए।

राज्यों पर अपना निर्णय थोपना मोदी सरकार की परंपरा 


पार्टी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव और डा राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की परंपरा हर निर्णय को राज्यों पर थोपने की रही है और उसी के तहत एक और कदम बढ़ाया गया है और राजनीति की भेंट चढ़ा दिया। नई शिक्षा नीति से जहां शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं इस नीति से झारखंड जैसे पिछड़े राज्यों को नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा नीति सिर्फ भाजपा का राजनीतिक हथकंडा ही बनकर रह गया है ।

भाजपा शासित राज्यों की कानून व्यवस्था देख लें नड्डा 


बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा राज्य की विधि व्यवस्था पर सवाल उठाये जाने पर प्रदेश प्रवक्ताओं ने कहा कि पहले उन्हें भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की कानून व्यवस्था को देखना चाहिए।  उन्होंने कहा कि राज्य की पूर्ववर्ती रघुवर दास के पांच वर्षां के कार्यकाल में भी झारखंड की जनता ने विधि-व्यवस्था को देखा है,और नजदीक से महसूस किया है, यही कारण है कि भाजपा को सत्ता से हटाने का काम जनता ने किया,परंतु यदि उन्हें अब भी वे भम्र पालना चाहते है, तो पाल कर रखे।

भाजपा के सत्ता से जाते ही थम गया झारखंड के विकास का पहिया

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हम कुर्सी से भले उतर गए हों , लेकिन लोगों के दिलों से नहीं उतरे हैं 

उज्ज्वल दुनिया /रांची ।  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा है कि झारखंड की हेमंत सरकार भ्रष्टाचार युक्त है और विकास मुक्त सरकार है। प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर के चरमराने से विकास की गति रुक गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता राजनीति में सत्ता या कुर्सी पर काबिज होने नहीं आए हैं, बल्कि हम भारत की तकदीर और तस्वीर बदलने आए हैं। उन्होंने झारखंड के नेताओं से कहा कि गोलबंदी करके सत्ता पर काबिज होना मैथमैटिक्स की बात है लेकिन हम अभी भी प्रदेश की जनता के दिलों से नहीं उतरे हैं। जेपी नड्डा सोमवार को झारखंड भाजपा की नवनिर्वाचित कार्यसमिति की बैठक को दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे।

भ्रष्टाचार युक्त और विकास मुक्त है हेमंत सरकार- नड्डा 

भाजपा के केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड में हमारी सरकार नहीं है लेकिन पूर्व की सरकार ने जनता की सेवा की अच्छे काम किए। हम जनता के दिलों से नहीं उतरे हैं। उन्होंने कहा कि जब जिस प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर गड़बड़ा जाता है तब विकास तब रुक जाता है। पूर्व की भाजपा सरकार में नक्सलवाद समाप्त हो गया था। आज फिर से नक्सलवाद सिर उठा रहा है। ये तुष्टीकरण की निशानी है। हमने आदिवासियों को मुख्यधारा में शामिल किया था। आज सारे विकास के रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं।उन्होंने कहा कि झारखंड की हेमंत सरकार भ्रष्टाचार युक्त है और विकास मुक्त सरकार है। उन्होंने यहां के नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि राजनेता दिशा और दृष्टि लेकर काम करता है। कोई आपसे पूछे कि आत्मनिर्भर भारत क्या है, गरीब कल्याण योजना क्या है, आयुष्मान भारत क्या है, उज्जवला योजना क्या है, सौभाग्य योजना है, स्वच्छता अभियान क्या है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्या है, इन सभी का जवाब आपको बताना चाहिए।

हम चुनाव हारे हैं, मैदान नहीं – दीपक प्रकाश 

इससे पहले वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए झारखंड भाजपा के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि हम पिछले कई वर्षों से वैचारिक संघर्ष कर रहे थे। नई शिक्षा नीति के माध्यम से पीएम ने देश में अलख जगाने का काम किया है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को 50 लाख वोट मिले। दूसरी तरफ आरजेडी, झामुमो और कांग्रेस को 52 लाख वोट मिले। दो लाख का अंतर था। भाजपा में बाबूलाल के आने से उनके छह लाख लोगों का समर्थन भाजपा में जुट गया है। अब भाजपा के पास 56 लाख का जनसमर्थन है। हम चुनाव हारे हैं, मैदान नहीं हारे हैं। आने वाला समय हमारा है।

शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सिगरेट पीते या तंबाकू खाते दिखे तो खैर नहीं

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उज्ज्वल दुनिया /रांची । रांची के  उपायुक्त छवि रंजन की अध्यक्षता में जिला तंबाकू नियंत्रण समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गयी। रांची समाहरणालय स्थित उपायुक्त सभागार में आयोजित बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी सदर, रांची समीरा एस, अपर जिला दंडाधिकारी विधि व्यवस्था, रांची अखलेश कुमार सिन्हा सहित समिति के सभी सदस्य उपस्थित हुए। बैठक में उपायुक्त द्वारा राांची  जिला को तंबाकू मुक्त करने को लेकर आवश्यक तैयारी की समीक्षा की गयी एवं संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये।

रांची में चलेगा विशेष छापामारी अभियान

बैठक में उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला तंबाकू नियंत्रण समन्वय समिति, श्री छवि रंजन ने बताया कि कोटपा-2003 के अन्तर्गत प्रावधनित धाराओं का उल्लंघन करनेवालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि पूरे जिला में 09-24 सितंबर 2020 तक विशेष अभियान चलायें। इसे लेकर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पूरी तैयारी करने का निदेश दिया। अपर जिला दंडाधिकारी विधि व्यवस्था रांची को उपायुक्त ने छापेमारी से संबंधित दस्ता बनाने का निदेश दिया।  

शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज दायरे में तंबाकू पदार्थों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध

बैठक में छवि रंजन ने जिला के सभी शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में किसी भी परिस्थिति में तंबाकू सेवन या खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने का निदेश दिया। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी को उपायुक्त ने कहा कि जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में इसका अनुपालन हो रहा है या नहीं इसकी साप्ताहिक रिपोर्ट दें।

प्रतिबंधित तंबाकू पदार्थों की बिक्री पर होगी कार्रवाई

रांची जिला में  प्रतिबंधित तंबाकू पदार्थों की बिक्री करनेवालों के खिलाफ कोटपा-2003 के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। बैठक में उपायुक्त ने एसडीओ, बीडीओ/सीओ एवं अन्य संबंधित पदाधिकारियों को प्रतिबंधित तंबाकू पदार्थों की बिक्री करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि पान दुकानों इत्यादि में प्रतिबंधित तंबाकू पदार्थो की बिक्री पर कोटपा-2003 के तहत कार्रवाई करें। साथ ही उन्होंने तंबाकू पदार्थों के सेवन से होनेवाले रोगों के प्रति लोगों को विभिन्न माध्यमों से जागरुक करने का भी निदेश दिया।

एसडीओ को रेस्टोरेंट के साथ बैठक करने का निदेश

बैठक के दौरान उपायुक्त छवि रंजन ने एसडीओ रांची को विभिन्न रेस्टोरेंट के साथ बैठक करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिन रेस्टोरेंट में लोगों के बैठने की क्षमता 20 से ज्यादा है उनके साथ बैठक कर स्मोकिंग और नन स्मोकिंग जोन स्पष्ट करें । 

हां, रिया के दोषी या निर्दोष का फैसला अदालत करेगी, पर मीडिया नहीं होता तो सुशांत केस कोर्ट तक पहुंचता ही नहीं

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उज्जवल दुनिया

आज रियाचक्रवर्ती के प्रति खास वर्ग का प्यार सोशल मीडिया पर कुछ ज्यादा ही छलक उठा है। कुछ लोगों को शर्म आ रही है तो कुछ नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं। वे रिया के पक्ष में जमकर अपनी कुंठित भड़ास निकाल रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव से भी जोड़ा जा रहा है। उन्हें रिया और उसके परिवार के साथ ही मुंबई पुलिस, शिवसेना के बदजुबान सांसद संजय राउत, महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख सभी अच्छे लगने लगे हैं। बहादुर कंगना रनौत को मिल रही धमकियां भी उन्हें पसंद आ रही हैं, लेकिन उन्हें सुशांत सिंह राजपूत और उनके परिवार का पक्ष नहीं दिखता।

हां, यह सच है कि रिया दोषी है या निर्दोष यह अदालत ही तय करेगी। लेकिन, उससे भी बड़ा सच यह है कि मीडिया ने अपनी भूमिका नहीं निभाई होती तो आज कोर्ट भी अपना कर्तव्य निभाने की स्थिति में नहीं होता, क्योंकि यह केस अदालत तक पहुंचता ही नहीं। मुंबई पुलिस अभी पूछताछ ही कर रही होती। कोई केस दर्ज ही नहीं होता। मुंबई के बिके हुए डॉक्टरों की अधूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट की तरह मुंबई पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह भी अपनी रिपोर्ट सौंप चुके होते। साथ ही शिवसेना-कांग्रेस की उद्धव ठाकरे सरकार के दबाव में मुंबई पुलिस आत्महत्या के मामले का केस दर्ज कर फाइल बंद करने की तैयारी में होती। परिस्थितियां तो कुछ ऐसी ही कहानी सुना रही हैं।

कुछेक हाउसेस को छोड़कर मीडिया का एक बड़ा वर्ग सुशांत और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत है। अर्णब गोस्वामी और कंगना रनौत सहित उस पूरे तबके को साधुवाद। क्योंकि उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले को यहां तक पहुंचाया। नहीं तो शिवसेना कांग्रेस सरकार के दबाव में सुशांत केस को भी दिव्या भारती सहित फिल्म इंडस्ट्री की अन्य हस्तियों की मौतों की तरह आत्महत्या बताकर मुंबई पुलिस दफन कर चुकी होती। जांच चल रही है। सुशांत और दिशा सालियान की मौत का सच देश के सामने आएगा, लेकिन आखिर ऐसा क्या है जिसे मुंबई पुलिस छुपाने का प्रयास कर रही है? शिवसेना सांसद संजयराउत आखिर क्यों इतना बौखलाए हुए हैं? महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख कंगना को धमकी क्यों दे रहे हैं? सुशांत की संदिग्ध स्थिति में मौत के 40 दिनों बाद पटना (बिहार) में केस क्यों दर्ज कराना पड़ा। जांच के लिए मुंबई गई बिहार पुलिस के साथ काॅपरेट क्यों नहीं किया गया? आईपीएस अधिकारी विनय तिवारी क्यों क्वॉरेंटाइन किया गया? और अब सच जानने की कोशिश कर रहे मीडिया पर निशाना साधा जा रहा है। यह सब इसलिए क्योंकि भय राज खुलने का है।

हालांकि आजतक के राजदीप सरदेसाई ने अपने चाॅकलेटी सवालों से रिया चक्रवर्ती के लिए काफी सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया , लेकिन उन्हें और उनके चैनल को उल्टा पड़ गया। टीआरपी गिर गई। कारण है, परिस्थिति जन्य साक्ष्य का रिया के पक्ष में नहीं दिखना। मुट्ठीभर को छोड़कर देश के करोड़ों लोग सुशांत सिंह राजपूत की मौत को आत्महत्या मानने को तैयार नहीं हैं। और उनका कहना है कि डरते वो हैं जिसे पकड़े जाने का खौफ होता है।

“जस्टिस फार यास्मीन” के कैंडल मार्च को रोके जाने पर भड़का जनाक्रोश

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पगमिल चौक पर भगदड़, पथराव, पुलिस को भांजनी पड़ी लाठियां, कई चोटिल

उज्ज्वल दुनिया संवाददाता/हजारीबाग। हजारीबाग के कटकमसांडी स्थित रोमी निवासी केबी वीमेंस कालेज की छात्रा सलीना यास्मीन का शव डालटनगंज में बरामद होने के बाद रविवार को यहां जनाक्रोश भड़क उठा। छात्रा के परिजनों और अन्य लोगों ने “जस्टिस फार यास्मीन” का नारा लगाते हुए शाम में कैंडल मार्च निकालना शुरू किया। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कोरोना महामारी से बचाव के लिए कैंडल मार्च निकालने से मना किया।

इसपर जनाक्रोश भड़क उठा और  सभी पगमिल चौक पर बीच सड़क पर बैठ गए। भीड़ और सड़क जाम हटाने का प्रयास किया जाने लगा। पुलिस व प्रशासन पर छिटपुट पथराव हो गया। इससे भगदड़ मच गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी। इस दौरान कई लोग चोटिल हुए हैं। सदर एसडीओ मेघा भारद्वाज, डीएसपी विवेकानंद ठाकुर सदलबल वहां पहुंचे हुए थे। स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया।

छात्रा के परिजनों का कहना है कि यास्मीन  को साजिश के तहत डालटनगंज बुलाकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। हमलोग न्याय चाहते हैं। इस मामले में डालटनगंज पुलिस का रवैया सहयोगात्मक नहीं रहा है। आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए। केस ट्रांसफर कर हजारीबाग लाना चाहिए। इन मांगों के लिए ही कैंडल मार्च निकाला गया था। घटना के बाद से पुलिस पगमिल से रोमी तक नजर रखी हुई थी।

अक्‍टूबर में आएगी कोरोना वैक्‍सीन, राज्‍यों से वितरण करने की तैयारी के दिए गए निर्देश

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उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्‍ली: भारत में आज कोरोना के रिकॉर्ड केस सामने आए हैं। हालांकि अभी दुनिया के कई देश कोरोना वैक्‍सीन बनाने में लगे हैं, लेकिन लगता है कि इसमें बाजी अमेरिका मार लेगा। यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा है कि अक्टूबर के अंत तक उच्च-जोखिम वाले लोगों को संभावित कोरोना वायरस वैक्सीन वितरित करने के लिए तैयार करें।

वैक्सीन का इस समय पर आने का राजनीतिक महत्व भी है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नवंबर में फिर से चुनाव मैदान में होंगे। उन्‍होंने कोविड-19 को रोकने के लिए एक वैक्सीन विकसित करने का वादा करते हुए अरबों डॉलर खर्च किए थे, जिसके बाद भी अमेरिका में कोरोना ने 180,000 से अधिक लोगों को मार दिया है।

सीडीसी के प्रवक्ता ने बताया, “प्रारंभिक नियोजन के उद्देश्य से सीडीसी ने कुछ नियोजन मान्यताओं के साथ राज्यों को वैक्सीन वितरण के लिए राज्य की विशिष्ट योजनाओं पर काम किया, जिनमें संभवतः अक्टूबर और नवंबर में टीके सीमित मात्रा में शामिल थे।” न्यूयॉर्क टाइम्स ने पहले बताया था कि सीडीसी ने सभी 50 राज्यों और पांच बड़े शहरों में योजना की जानकारी के साथ अधिकारियों से संपर्क किया था।

देश के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ एंथोनी फौसी ने कहा कि कोविड-19 वैक्सीन को लेकर जो परीक्षण चल रहे हैं, उनके आधार पर नवंबर या दिसंबर तक पता लग जाएगा कि अभी जिन टीकों पर परीक्षण चल रहा है, उनमें से कौन सबसे ज्‍यादा सुरक्षित और प्रभावी है ।

न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा ऑनलाइन डाले गए दस्तावेजों से पता चलता है कि सीडीसी कोविड-19 के लिए एक या दो टीकों की तैयारी कर रहा है जो अक्टूबर के अंत तक सीमित मात्रा में उपलब्ध होंगे। दस्तावेजों में कहा गया है कि टीके स्वास्थ्य सेवाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा कर्मियों और नर्सिंग होम के निवासियों और कर्मचारियों सहित उच्च जोखिम वाले लोगों को पहले मुफ्त में उपलब्ध कराए जाएंगे।

19 देशों में पिछले तीन महीनों में किए गए एक सर्वेक्षण के प्रारंभिक परिणामों से पता चला है कि केवल 70% ब्रिटिश और अमेरिकी कोविड-19 वैक्सीन लेंगे। ड्रग डेवलपर्स सहित मॉडर्न इंक, एस्ट्राजेनेका पीएलसी और फाइजर इंक कोरोना बीमारी के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी टीका विकसित करने की दौड़ में हैं।

सीडीसी दस्तावेजों में दो टीकों के बारे में लिखा गया है, जिन्हें माइनस 70 और माइनस 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा जाना चाहिए। 

सुशांत मामले में एनसीबी ने शुरू की रिया से पूछताछ

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उज्ज्वल दुनिया मुंबई, 07 सितम्बर (हि.स.)। फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने रविवार को रिया चक्रवर्ती से पूछताछ शुरू कर दिया है। एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर के .पी.एस.मलहोत्रा व जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने ड्रग मामले में रिया से सवाल दागना शुरु कर दी है। पूछताछ के दौरान एक महिला अधिकारी सहित कुल 4 वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हैं।  प्रबल संभावना है कि आज ही शाम तक एनसीबी रिया को गिरफ्तार कर सकती है। 

सूत्रों के अनुसार एनसीबी ने शनिवार को शाम को ही रिया चक्रवर्ती को समन जारी कर रविवार को सुबह 10 बजे एनसीबी दफ्तर पहुंचने के लिए कहा था। लेकिन सुबह रिया घर से नहीं निकली तो एनसीबी ने पुलिस की टीम को रिया के घर भेजा। इसके बाद मुंबई पुलिस की सुरक्षा में रिया तय समय से दो घंटे बाद एनसीबी दफ्तर पहुंची। हालांकि अब एनसीबी ने रिया से पूछताछ शुरू कर दी है। एनसीबी ने रिया से उनके ड्रग संबंधित चैट के बारे में पूछताछ कर रही है। साथ ही यह जानने की कोशिश हो रही है कि वो किसके लिए खरीदवा रही थीं। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी छानबीन एनसीबी रिया से करने वाली है। एनसीबी रिया को उनके भाई शोविक, सहायक सैमुअल व दीपेश के सामने बिठाकर भी ड्रग के लेन-देन के संबंध में पूछताछ करने वाली है। 

सरकारी नौकरियों में भर्ती पर कोई प्रतिबंध नहीं: वित्‍त मंत्रालय

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सरकारी नौकरियों में भर्ती को लेकर जारी अटकलों पर लगा विराम 

उज्ज्वल दुनिया /नई दिल्‍ली, 07 सितम्बर (हि.स.)। वित्‍त मंत्रालय ने यूपीएससी, आरआरबी, एसएससी और अन्‍य सरकारी नौकरियों में भर्ती को लेकर जारी अटकलों पर स्थिति साफ कर दी है। मंत्रालय ने शनिवार को ट्वीट करके कहा कि “भारत सरकार में खाली पदों को भरने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। 

वित्‍त मंत्रालय ने जारी बयान में कहा है कि कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) इत्यादि जैसे सरकारी एजेंसियों के माध्यम से सामान्य भर्तियां बिना किसी प्रतिबंध के सामान्य रूप से जारी रहेंगी। ज्ञात हो कि वित्त मंत्रालय ने 4 सितंबर को जारी अधिसूचना में गैर-विकासात्मक और गैर-प्राथमिकता वाले व्यय को शामिल करने के लिए नए सरकारी पदों के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया था। 

गौरतलब है कि वित्‍त मंत्रालय ने एक दिन पहले चालू वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान राजकोषीय घाटे में भारी वृद्धि की आशंका के बीच सभी मंत्रालयों और विभागों से गैर-जरूरी खर्चों को रोकने का सुझाव दिया था। मंत्रालय ने मंत्रालयों और विभागों से परामर्शकों की नियुक्ति की समीक्षा करने, आयोजनों में कटौती करने और छपाई के लिए आयातित कागज का इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी थी। 

उल्‍लेखनीय है कि विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि मौजूदा राजकोषीय स्थिति तथा संसाधनों पर दबाव को देखते हुए गैर-प्राथमिकता वाले खर्चों को कम करने और तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। ताकि, प्राथमिकता वाले खर्च के लिए संसाधन सुनिश्चित किए जा सकें। मंत्रालय ने साफ किया है कि एक जुलाई, 2020 के बाद यदि कोई नया पद बनाया गया है, जिसके लिए व्यय विभाग की मंजूरी नहीं ली गई है, और इस पर यदि नियुक्ति नहीं हुई है, तो इसे खाली ही रखा जाए।