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सांसदों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती, बिल लोकसभा में पास

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 वेतन कटौती से संबंधित बिल लोकसभा से पास, सांसदों को 30 फीसदी कटकर मिलेगी सैलरी

सांसद निधि पर दो साल के लिए रोक, कोविड-19 के कारण सरकार ने लिया फैसला

उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली ।  सांसदों की वेतन कटौती से संबंधित बिल मंगलवार को लोकसभा से पास हो गया. संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2020 का ज्यादातर सांसदों ने समर्थन किया. सभी सांसदों के वेतन में एक साल के लिए 30 फीसदी की कटौती की जाएगी. इसके अलावा सांसद निधि भी 2 साल के लिए स्थगित कर दी गई है. सरकार ने ये फैसला कोविड- 19 महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति से मुकाबले के लिए लिया है.लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान ज्यादातर सांसदों ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया, लेकिन साथ ही उनकी मांग रही कि सरकार सांसद निधि को स्थगित नहीं करे. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि सरकार हमारी पूरी सैलरी ले ले, कोई भी सांसद इसका विरोध नहीं करेगा. लेकिन सांसद निधि पूरी मिलनी चाहिए. जिससे कि हम लोगों के फायदे के लिए काम कर सकें ।

दो साल सांसद निधि पर रोक

 आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने कहा कि सरकार 60 फीसदी भी हमारी सैलरी काट ले, हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सांसद निधि रोकने का कोई कारण नहीं बनता. हमारे क्षेत्र के लोगों ने टैक्स को जो पैसा दिया है, वो पैसा उन्हें वापस तो मिलना चाहिए.संसद के दोनों सदनों में 790 सांसदों (लोकसभा के 545 और राज्यसभा के 245 सांसद) की व्यवस्था है. वर्तमान समय में लोकसभा में 542 और राज्यसभा में 238 सदस्य हैं. इस तरह से संसद में 780 सांसद हैं और प्रत्येक सांसदों की सैलरी से अब 30 हजार रुपये कटेंगे और इस तरह से हर महीने 2 करोड़ 34 लाख रुपये की बचत होगी. इसके अलावा प्रत्येक सांसदों को हर साल 5 करोड़ रुपये उनके सांसद निधि के तहत मिलता है जो अब 2 साल के लिए स्थगित कर दी गई है.

विदेशों से आने वाले लोगों की वजह से दिल्ली में फैला कोरोन: केजरीवाल

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दिल्ली : दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में इतनी तेजी से कोरोना फैलने का मुख्य कारण विदेशों से आने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा कि जिन देशों में सबसे अधिक कोरोना का संक्रमण था, उसमें इटली और लंदन भी शामिल थे । इन देशों से विदेशी हवाई जहाज से लगभग 32000 लोगों को भारत लाया गया। इनमें लगभग 80% विमान दिल्ली पहुंचे। काफी हद तक उन्हीं लोगों के कारण दिल्ली में तेजी से कोरोन फैला आगे उन्होंने कहा कि दिल्ली मॉडल की चर्चा पूरे विश्व में हुई है। देश में सबसे ज्यादा जांच दिल्ली में हो रही है प्रतिदिन 10 लाख लोगों में 3000 लोगों की जांच हो रही है। सीएम केजरीवाल ने दावा किया कि इतनी जांच अमेरिका और इंग्लैंड में भी नहीं हो रही है। उन्होंने कहा की पहली बार होम आइसोलेशन का आइडिया दिल्ली में आया साथ ही साथ प्लाज्मा थेरेपी दिल्ली की देन है।

लोकसभा में गूंजा झारखंड में धर्मांतरण का मुद्दा

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खूँटी, सिमडेगा और गुमला बना जबरन धर्म परिवर्तन का गढ़ – संजय सेठ

उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली । लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सोमवार को भाजपा सांसद संजय सेठ ने झारखंड में हो रहे धर्मांतरण की बात कह कर आरोप लगाया कि यहां के चर्च जनजातियों को उनकी परंपराओं और धर्म से काट रहा है। यह समाज के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो रहा है। किसी स्वतंत्र इकाई से इस पूरे प्रकरण की जांच करवाई जाए ताकि आदिवासी हितों, उनकी परंपराओं और उनकी संस्कृतियों की रक्षा की जा सके।

सरकार बदलने के साथ ही ईसाई मिशनरियों को मिली खूली छूट 

सेठ ने कहा कि झारखंड में जब नई सरकार बनी तो ईसाई मिशनरी के अधिकारियों ने बयान दिया था कि यह सरकार यीशु का आशीर्वाद है। क्रिसमस का तोहफा है। यह कोई छोटा बयान नहीं था। आज भी झारखंड में आदिवासी हितों पर जब भी बात आती है तो चर्च के लोग उन्हें भड़काते हैं। जब यह अपने आप को आदिवासी मानते नहीं, तो फिर किस हक से यह आदिवासियों को भड़काते हैं? ईसाई मिशनरियों की ही संस्था निर्मल हृदय के द्वारा बच्चों की खरीद-बिक्री का मामला सामने आता रहा है।

2018 में ईसाई मिशनरियों द्वारा बच्चा बेचने का मामला ठंडे बस्ते में 

2018 में यहां से सैकड़ों नवजात शिशुओं की खरीद-बिक्री की बात सामने आई। गोद देने के नाम पर नवजात बच्चों की खरीद बिक्री होती थी। अविवाहित लड़कियां मां बनती थीं और दुर्भाग्यपूर्ण यह कि इनमें ज्यादातर आदिवासी समुदाय की होती थीं। मामले में मुकदमा भी हुआ, कई गिरफ्तारियां हुईं। तत्कालीन भाजपा सरकार ने इसकी जांच के निर्देश दिए। परंतु, नई सरकार के गठन के साथ ही यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

सेना के साथ खड़ी है देश की संसद: प्रधानमंत्री

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उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली, 15 सितम्बर (हि.स.) । संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। उन्होंने कई मुद्दों पर अपने विचार रखते हुए भारतीय सेना को याद किया और गर्व के साथ कहा कि देश की संसद एक सुर में उनके पीछे खड़ी है। 

संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विशिष्ट वातावरण में यह सत्र होने जा रहा है। कोरोना भी है और कर्तव्य भी है और सभी सासंदों ने कर्तव्य को चुना है। अपने संबोधन में मोदी ने भारतीय सेना को याद किया और कहा, ‘हमारे जवान सीमाओं पर डटे हुए हैं। हिम्मत, जज्बे और बुलंद हौसलों के साथ, दुर्गम पहाड़ियों में डटे हुए हैं। कुछ समय के बाद बर्फ वर्षा भी शुरू होगी।

उन्होंने कहा कि जिस विश्वास के साथ वो मातृभूमि की रक्षा के लिए डटे हुए हैं। संसद भी और संसद के सभी सदस्य एक स्वर से, एक भाव से, एक भावना से, एक संकल्प से संदेश देंगे कि सेना के जवानों के पीछे देश खड़ा है। पूरा सदन देश के वीर जवानों के पीछे खड़ा है, यह बहुत ही मजबूत संदेश सदन देगा।

1962 की लड़ाई में गंवाया, अब कैलाश पर्वत श्रृंखला दोबारा भारत के कब्जे में

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भारतीय सेना ने हर चोटी पर कब्जा करते ही लगाया हर-हर महादेव का जयकारा

उज्ज्वल दुनिया  नई दिल्ली, 14 सितम्बर (हि.स.)। पैन्गोंग झील के दक्षिणी छोर की गुरंग हिल, मगर हिल, मुखपरी और रेचिन-ला दर्रा जैसी आधा दर्जन रणनीतिक चोटियों पर भारत का कब्जा होने के बाद से चीनी सेना इसलिए बौखलाई हुई है, क्योंकि यह सभी पहाड़ियां कैलाश पर्वत श्रृंखला में आती हैं। यानी एक तरह से देखा जाए तो भारत ने 60-70 किलोमीटर तक का वह पूरा क्षेत्र अपने अधिकार में ले लिया है, जिसके दम पर चीन हर बार कैलाश मानसरोवर की यात्रा रोकने की धमकी देने के साथ ही आंखें दिखाता था। कैलाश पर्वत श्रृंखला की इन चोटियों को अपने कब्जे में लेते समय भारतीय सैनिकों ने ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे भी लगाये। अब चीनी सेना किसी भी कीमत पर इन कैलाश रेंज की पहाड़ियों को हड़पना चाहती है, इसीलिए चीन ने भारत की फॉरवर्ड पोजिशन के फायरिंग रेंज में टैंक तक तैनात कर दिए हैं।  

कैलाश रेंज की पहाड़ियों को हड़पने की फिराक में चीनी सेना, फायरिंग रेंज में लगाए टैंक

चीन से 1962 के युद्ध से पहले तीर्थयात्री लद्दाख के डेमचोक से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जाया करते थे। युद्ध के बाद चीन ने इस मार्ग पर अवैध रूप से कब्जा करके कैलाश मानसरोवर यात्रा के इस मार्ग को बंद कर दिया। दोनों देशों की सहमति से इसे 1981 में फिर खोल दिया गया। वैसे तो कैलाश मानसरोवर जाने के कई मार्ग हैं, जिनमें उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट, धारचूला, खेत, गर्ब्यांग, कालापानी, लिपुलेख, खिंड, तकलाकोट होकर जानेवाला मार्ग अपेक्षाकृत सुगम है लेकिन यह रास्ता बेहद लंबा है। इसके अलावा दूसरा रास्ता सिक्किम से होकर और तीसरा नेपाल के रास्ते से होकर कैलाश मानसरोवर जाता है। मानसरोवर यात्रा को लेकर आने वाली समस्याओं का समाधान करने के मकसद से भारत ने चौथा रास्ता तैयार किया, जिसका उद्घाटन इसी साल 8 मई को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया।

भारत ने भी चीनियों को खदेड़ने के लिए रेचिन-ला दर्रे के करीब तैनात की एक टैंक ब्रिगेड 

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर मार्ग को 17,060 फीट की ऊंचाई पर लिपुलेख पास से जोड़ा है। धारचूला-लिपुलेख मार्ग पिथौरागढ़-तवाघाट-घाटीबगढ़ सड़क का विस्तार है। यह घाटीबगढ़ से निकलती है और कैलाश मानसरोवर के प्रवेश द्वार लिपुलेख पास पर समाप्त होती है। 80 किलोमीटर की इस सड़क में ऊंचाई 6000 फीट से बढ़कर 17,060 फीट हो जाती है। चीन सीमा के निकट शेष तीन किमी. की कटिंग का काम सुरक्षा की दृष्टि से अभी छोड़ दिया गया है। भारत ने इस लिंक मार्ग का निर्माण इसलिए कराया ताकि लिपुलेख तक सड़क बनने से कैलाश यात्रा सुगम हो और स्थानीय लोगों को भी सड़क सुविधा मिले। साथ ही सेना और अर्द्ध सैनिक बल की गाड़ियां चीन सीमा के करीब तक पहुंच सकें।   

अब भी भारतीय फौज के कब्जे से 60 किलोमीटर दूर है मानसरोवर झील

लद्दाख से होकर गुजरने वाले डेमचोक के रास्ते से कैलाश मानसरोवर यात्रा लगभग एक दशक पहले तक तो सकुशल निपटती रही है लेकिन चीन के साथ अनबन शुरू होने के बाद से हर साल कुछ न कुछ विवाद खड़ा होने लगा। भारतीय क्षेत्र चुशुल से डेमचोक की दूरी करीब 150 किमी. और डेमचोक से कैलाश मानसरोवर की दूरी करीब 350 किमी. है। कैलाश मानसरोवर तक की लगभग 450 किलोमीटर यात्रा के बीच 60-70 किमी. का इलाका पैंगोंग झील के दक्षिण से गुजरता हैं जहां गुरंग हिल, मगर हिल, मुखपरी और रेचिन-ला दर्रा जैसी कैलाश पर्वत श्रृंखलाएं फैली हुई हैं। सीमा पार पड़ने वाली इन्हीं कैलाश पर्वत श्रृंखलाओं से चीन कैलाश मानसरोवर यात्रियों को नहीं गुजरने देता था। भारत को कैलाश पर्वत श्रृंखलाओं के इस हिस्से को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने की कामयाबी 29/30 अगस्त की रात मिली। 

हर चोटी को कब्जे में लेते समय भारतीय सैनिकों ने लगाये हर-हर महादेव के जयकारे

चीन से 1962 के युद्ध से पहले यह पूरा इलाका भारत के ही अधिकार-क्षेत्र में था लेकिन युद्ध के दौरान रेचिन-ला और चुशुल की लड़ाई के बाद दोनों देश की सेनाएं इसके पीछे चली गई थीं और इस इलाके को पूरी तरह खाली कर दिया गया था। 1962 के बाद यह पहला मौका है जब भारत ने चीनियों को मात देकर पैंगोंग के दक्षिणी छोर की इन पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया, जहां दोनों देश अब तक सैन्य तैनाती नहीं करते रहे हैं। दरअसल, चीन ने ही 29/30 अगस्त की रात भारत के साथ नया मोर्चा पैन्गोंग झील के दक्षिणी छोर की थाकुंग चोटी पर घुसपैठ करने की कोशिश करके खोला। भारतीय सैनिकों ने चीनियों को खदेड़ने के बाद इस क्षेत्र की सभी महत्वपूर्ण चोटियों को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने का अभियान छेड़ दिया। इसी क्रम में 3 दिन के भीतर भारतीय सेना ने पैंगोंग-त्सो झील के दक्षिण में करीब 60-70 किलोमीटर तक का पूरा क्षेत्र अपने अधिकार में लेकर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को चौंका दिया है।

जिले में शिक्षा विभाग के मिलीभगत से ड्रेस व स्टेशनरी किट सप्लाई में हो रहा पैसों का बंदरबांट

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खबर छपने पर भी सुनवाई नहीं 

600 रुपये प्रति बच्चा ड्रेस में सरकार की तरफ से दिया जा रहा है, सप्लायर व शिक्षा विभाग की मिलीभगत से बच्चों को मिल रहा घटिया ड्रेस व किट 

प्रति कॉपी दर 20 रुपये निर्धारित के बाद भी बच्चों को कम कीमत वाली कॉपी सप्लाई की जा रही है, राशन व पैसों के गबन की खबर दो माह पूर्व उज्ज्वल दुनिया अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी

नितेश जायसवाल /  उज्जवल दुनिया संवाददाता
लातेहार ।  जिले के कई प्रखण्डों में शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के मिली भगत से स्कूल किट सप्लाई में हो रही है पैसों की बंदरबांट। बताते चलें कि इन दिनों करोना के मद्देनजर सभी विद्यालय मार्च माह से ही बंद है। आरोप है कि इन छुट्टियों के दिनो में भी लातेहार जिले के हेरहंज प्रखण्ड में ठीकेदारों व बी आर सी निरंजन सिंह की मिलीभगत से ड्रेस व स्टेशनरी किट का सप्लाई विद्यालयों में किया जा रहा है। इसमे विद्यालय प्रबंधन समिति, प्रधानाध्यापक व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सप्लायर के द्वारा बंधी बंधाई रकम मिलती है। 

उपर तक पहुंचता है पैसा, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा

सरकार सभी विद्यालयों में प्रति बच्चा छः सौ रुपये ड्रेस किट के लिये देती है लेकिन बिचौलियों के द्वारा सभी विद्यालयों में प्रति बच्चा लगभग 400 या उससे भी सबसे कम लागत की घटिया ड्रेस देती है और बाकी बच्चे 200 रुपये को सभी लोगों में बांटा जाता है। जब हमने सप्लायर से कहा कि इसकी शिकायत ऊपर के अधिकारियों से करेंगे तो उसका जवाब था कि ऊपर तक कमीशन देते हैं । हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा । 

ये सच है कि इस बात की जानकारी उच्च पदाधिकारियों को भी है लेकिन अब तक इनलोगों के विरुद्ध किसी ने कोई ठोस कदम नही उठाया। इससे इस बात का संकेत देती है कि इसका सेटलमेंट उच्च अधिकारियों तक भी है। वहीं स्टेशनरी सप्लाई में कक्षा वार पैसे निर्धारित किये गए हैं । सामान खरीदने के लिये जिसमे करोना कॉपी की प्रति कॉपी की कीमत 20 रुपये निर्धारित है। वही स्टॉमन बॉक्स के लिये लगभग 30 रुपये निर्धारित है लेकिन बिचौलियों के द्वारा मात्र 10 से 12 रुपये की कॉपी व लगभग 20 रुपये के स्टॉमन बॉक्स  सप्लाई की जा रही है। 

उज्ज्वल दुनिया में पहले भी छपी थी खबर

बताते चलें कि आज करीब दो माह पूर्व उज्ज्वल दुनिया अखबार ने आज से सात माह पूर्व सुखाड़ काल मे सरकार के निर्देश पर सभी विद्यालयों में बच्चों को 20 दिनों का चावल व लगभग 100 रुपये नगद पैसे व छात्रवृत्ति देने थे।जिसमे शिक्षको व पदाधिकारियों की मिलीभगत से पैसों का गमन के मामला भी प्रमुखता से छापी गयी थी। लेकिन दो माह बितने के बावजूद भी आज तक कोई ठोस कदम नही उठाना व जांच करना इस बात का सीधा संकेत देती है कि सभी के मिलीभगत से यह खेल खेला जाता है।

हमें इस बारे में जानकारी नहीं- बीईओ

हेरहंज प्रखण्ड के बीईओ हाकिम प्रमाणिक से जब हमने इस खुले भ्रष्टाचार के बारे में पूछा तो उनका कहना था – मेरे पास किट का स्टिमिट नही है।मुझे इसकी जानकारी भी नही है कि विद्यालय बन्द के द्वरान कौन स्कूली किट का सप्लाई दे रहा है।जाँच करने के बाद ही कुछ कह पाएँगे।बताते चलें कि पूर्व में भी इनके द्वारा यही कहा जाता रहा हैं लेकिन अबतक कुछ नहीं हुआ है।

कांग्रेस युवा मोर्चा अध्यक्ष संदीप कुमार(डब्लू)ने बताया कि हेरहंज प्रखण्ड के सीआरसी निरंजन कुमार से हमने पूछा तो उन्होंने कहा कि इस बारे में मुझे कुछ नहीं मालूम हैं अगर इसके बारे में जानकारी चाहिए तो बीरेंद्र दुबे से मुलाकात कर लीजिये।

सरकार के  द्वारा सभी विद्यालयों के प्राचार्य को सख्त निर्देश जारी किया गया था कि सभी बच्चों का खाता बैंक में खोलवाया जाय।जिससे उनको मिलने वाला लाभ उसके खाते में जा सके।लेकिन खाता खुलवाने के बाद भी पैसा खाता में न डालकर प्रबन्धन समिति के खाते में डाला जाता है।जिसे सभी के मिलीभगत से सामान खरीदने के नाम पर लूटा जाता है।

बालू तस्करी की खबर छपने पर डीजीपी ने डीसी

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अजय निराला /  उज्ज्वल दुनिया संवाददाता/हजारीबाग। हजारीबाग जिले में कोयला के साथ बालू तस्करी का गोरखधंंधा नहीं थम रहा है। इस मामले में डीजीपी ने जिले के डीसी-एसपी को ट्वीट कर कार्रवाई का निर्देश दिया है। इस पर इन दिनों एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।  इसमें सफेदपोश, पुलिस और माइनिंग विभाग की गठजोड़ की बात कही जा रही है। नियम, कानून और जनहित की बात करनेवाले एक सफेदपोश का बड़कागांव में बालू तस्करी पर  चुप रहना लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

बताया जाता है कि उनके एक करीबी रिश्तेदार बालू सिंडिकेट चला रहे हैं। जिले में बालू तस्करी का मुख्य क्षेत्र बड़कागांव है। वहां से प्रतिदिन करीब सौ से ऊपर ट्रैक्टर-हाइवा द्वारा विभिन्न नदियों से बालू उठाव कर आसपास और शहर के कई हिस्सों के अलावा रांची ले जाकर महंगे दामों में बेचा जा रहा है। 

डंपिंग यार्ड की आड़ में फल-फूल रहा है धंधा

सोमवार को बड़कागांव के सांढ़ नदी से बालू उठाव करते फोटो लगाकर सुंदर कुमार के ट्वीट पर डीजीपी ने हजारीबाग डीसी-एसपी को कार्रवाई का आदेश दिया है। डंपिंग यार्ड की आड़ में जारी बालू तस्करीऔल खनन पर रोक के बावजूद तस्करों द्वारा डंपिंग यार्ड के नाम पर बालू तस्करी बेरोकटोक किया जा रहा है। खनन विभाग से डंपिंग यार्ड का आदेश लेकर उसी चालान पर सीधे नदियों से बालू उठाया जाता है। नदियों से ट्रैक्टर और हाइवा में बालू लोड किया जाता है और वहां से रातोंरात गंतव्य तक पहुंचाया जाता है। इसी बीच अचानक हुई किसी प्रशासनिक कार्रवाई में गाड़ी पकड़े जाने पर डंपिंग यार्ड का चालान दिखा दिया जाता है।

महंगी कीमत पर सैकड़ों गाड़ी से होती है तस्करी

बड़कागांव व आसपास के विभिन्न नदियों से चरही, कटकमदाग, उरीमारी थाना क्षेत्रों से गुजरकर प्रतिदिन सैकड़ोंः ट्रैक्टर-हाइवा वाहनों से बालू हजारीबाग, रामगढ़ और रांची आदि इलाकों में बिक्री होती है।  जिस थाना क्षेत्र से गाड़ी गुजरता है। उनका प्रति वाहन फिक्स दर तय रहता है। खुलेआम दिन में नदियों में बालू लोड किया जाता है और रात के  अंधेरे में गंतव्य तक बालू पहुंचा दिया जाता है। पूरी प्रक्रिया के दौरान थाना से लेकर बालू तस्करी के सिंडिकेट के लोग अलर्ट रहते हैं।  बड़कागांव से उठाया बालू ट्रैक्टर-हाइवा से शहरों में प्रति टैक्टर चार हजार और प्रति हाइवा 25 हजार रुपए की कीमत पर बेचा जा रहा है।

डीजीपी ने दिए कार्रवाई के आदेश 

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के नाक के नीचे बड़कागांव में हो रहे बालू तस्करी की खबर मीडिया में आने पर  ट्विटर पर डीजीपी ने दिया एसपी हज़ारीबाग़ को कार्रवाई का आदेश दिए हैं । आरोप है कि जनप्रतिनिधि के शह पर नजदीकी रिश्तेदार चला रहे अवैध बालू का सिंडिकेट । 

निजी क्लिनिक की लापरवाही से एक महिला की मौत, परिजनों ने किया हंगामा

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क्लीनिक संचालक और मरीज के परिजन के बीच 6 लाख के मुआवजा को लेकर घंटो चला सौदा

उज्ज्वल दुनिया/कोडरमा। जिले के तिलैया थाना क्षेत्र के बाईपास रोड स्थित सुभाष चौक के समीप राजेन्द्र क्लिनिक में एक महिला की मौत हो जाने के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। दरअसल चंदवारा थाना अंतर्गत बेंदी निवासी नीतू देवी पति रविन्द्र सिंह प्रसूति आपरेशन करवाने 5 सितंबर को राजेन्द्र क्लिनिक में आई थीं। ऑपरेशन के बाद महिला ने बच्चे को जन्म दिया था। रविवार को महिला की स्थिति बिगड़ने पर क्लीनिक में खून चढ़ाया गया।इसी बीच चिकित्सक के असिस्टेंट किशोर कुमार ने उन्हें कुछ दवा दी और इंजेक्शन लगाया था। धीरे धीरे महिला की स्थिति बिगड़ते चली गयी। सोमवार को करीब 12 बजे के करीब महिला ने दम तोड़ दिया। महिला के मौत के बाद परिजनों ने क्लीनिक पर ईलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाकर घंटो हंगामा किया। सूत्रों के अनुसार महिला की मौत होते ही चिकित्सक व अस्पताल प्रबंधन अस्पताल छोड़कर भाग खड़े हुए। जिसके बाद मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही व मुआवजे की मांग को लेकर बवाल काटना शुरू कर दिया।

मामले की सूचना मिलते ही तिलैया थाना के पुलिसबल क्लीनिक पहुँचकर, परिजनों को शांत कराया। इधर परिजनों व पुलिस जवान के अथक प्रयास के बावजूद भी अस्पताल प्रबंधन का कोई भी व्यक्ति वहां नहीं पहुंचा। काफी इंतजार के बाद अस्पताल प्रबंधक सुनील मोदी के बड़े भाई संतोष मोदी मौके पर पहुंचे और परिजनों द्वारा मुआवजे की मांग को कबुल करते हुए उन्हें शांत कराया।  मुआवजा मिलने के बाद परिजन करीब 7:45 बजे शव लेकर अपने घर चले गए। इधर बताया जाता है कि क्लीनिक के पास रजिस्ट्रेशन भी समाप्त हो चुकी है। वहीं अन्य खुलासे भी हुए कि महिला को जो खून चढ़ाया गया था। वह किसी ब्लड बैंक से नहीं, बल्कि किसी निजी जगह से मंगाया गया था। वहीं मामले के बाद सूत्रों ने बताया कि क्लीनिक में डॉक्टर की जगह कंपाउडर ही ईलाज करते है।

लैंड म्यूटेशन बिल पर सरकार की सफाई, कहा

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प्रस्तावित विधेयक में ऑनलाइन दाखिल खारिज एवं लगान भुगतान की होगी व्यवस्था

उज्ज्वल दुनिया/राँची।  राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव श्री के के सोन ने कहा कि “झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल,2020” से संबंधित कुछ भ्रांतियां समाचार पत्रों में देखी गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी रूप में गलत नीयत से कार्य करने वाले किसी भी राजस्व प्राधिकारियों को संरक्षण देने का कार्य नहीं कर रही। इस बिल में गलत नीयत से कार्य करने वाले राजस्व प्राधिकारियों के विरुद्ध राज्य सरकार अथवा भारत सरकार के सक्षम प्राधिकार  द्वारा यदि पूर्व में अन्वेषण की स्वीकृति प्रदान की जाती है तो वैसी परिस्थिति में राजस्व अधिकारी के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही, सिविल कार्यवाही, विभागीय कार्रवाई अथवा  अन्य माध्यम से किसी भी प्रकार की कार्यवाही कभी भी करने के लिए राज्य सरकार स्वतंत्र है । 

गलत अधिकारियों को बचाने की मंशा नहीं 

केके सोन ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक की धारा- 22 में राजस्व प्राधिकारियों को संरक्षण/सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। इस धारा की उप धारा -(i) में शासकीय कार्यों के लिए संरक्षण/सुरक्षा प्रदान किया गया है । इस धारा की उप धारा -(ii)  में उपधारा-(i)  में दिए गए संरक्षण/सुरक्षा के रहते हुए भी राज्य सरकार अथवा भारत सरकार के सक्षम प्राधिकार द्वारा यदि पूर्व में अन्वेषण की स्वीकृति प्रदान की जाती है तो वैसी परिस्थिति में राजस्व प्राधिकारी के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही, सीविल कार्रवाही, विभागीय कार्रवाही अथवा अन्य माध्यम से किसी भी प्रकार की कार्रवाही कभी भी करने के लिए राज्य सरकार स्वतंत्र है। इससे यह भी स्पष्ट है कि सरकार प्रस्तावित विधेयक द्वारा गलत कार्य करने वाले राजस्व प्राधिकारियों को बचाने का कोई प्रयास नहीं कर रही है बल्कि राजस्व प्राधिकारियों को उनके दायित्वों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करते हुए अधिक जवाबदेह बनाए जाने का प्रयास कर रही  है।

नये बिल से पारदर्शी होगी दाखिल खारिज की प्रक्रिया 

केके सोन ने कहा कि झारखंड राज्य में लैंड म्यूटेशन का कार्य 1973 के कानून के अनुरूप होता आ रहा है। जिसमें ऑनलाइन दाखिल खारिज इत्यादि का कोई वर्णन नहीं है। इन सभी चीजों में सुधार लाने हेतु राज्य सरकार ने झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल 2020 को प्रस्तावित किया है। इस विधेयक में ऑनलाइन दाखिल खारिज एवं लगान भुगतान की व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है । प्रस्तावित विधेयक में जमाबंदी, निरस्तीकरण व्यवस्था को स्पष्ट किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुराने विधेयक में कई प्रावधान बहुत ही संक्षिप्त एवं अस्पष्ट है जिसे ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित विधेयक में इसे विस्तृत रूप से स्पष्ट किया गया है । इसके साथ-साथ प्रस्तावित विधेयक में राजस्व उप निरीक्षक, अंचल निरीक्षक, अंचल अधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, अपर समाहर्ता/उपायुक्त एवं प्रमंडलीय आयुक्त के लिए समय-सीमा का निर्धारण किया गया है। निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय के बाद वादों के निष्पादन वाले मामलों में विलंब के लिए कारणों को स्पष्ट रूप से पारित किये जाने वाले आदेश में उल्लेखित करने एवं बिना कारण के विलंब होने पर संबंधित पदाधिकारियों को उत्तरदायी बनाने का प्रावधान प्रस्तावित विधेयक में किया गया है।

हरिवंश एक बार फिर चुने गए राज्यसभा के उपसभापति

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उज्ज्वल दुनिया /नई दिल्ली। जदयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर राज्यसभा के उपसभापति चुने गए। इस बात की घोषणा राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को जीत की बधाई दी। संसद में हरिवंश जी की निष्पक्ष भूमिका हमारे लोकतंत्र को मजबूत करती है
पीएम मोदी ने कहा, हरिवंश जी का जितना सम्मान मैं करता हूं, सदन का हर सदस्य उनका उतना ही सम्मान करता है। उन्होंने यह सम्मान कमाया है। संसद में उनकी निष्पक्ष भूमिका हमारे लोकतंत्र को मजबूत करती है।

हरिवंश जी के ऊपर जेपी का प्रभाव

उन्होंने आगे कहा, हरिवंश जी जयप्रकाश नारायण (जेपी) के गांव से आते हैं। उनके ऊपर जेपी का प्रभाव है। शालीनता से पेश आना उनकी कला है। हरिवंश जी जमीन से जुड़े हैं। उनकी घुट्टी में संतोष ही सुख है। हरिवंश जी ने चार दशक तक पत्रकारिता की।सदन की कार्यवाही विषम परिस्थितियों में हो रहीइसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सदन की कार्यवाही विषम परिस्थितियों में हो रही है। ऐसे में यह कार्यवाही सही तरीके से चलती रहे, इसके लिए हमें सभापति और उपसभापति का सहयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि सदन में प्रोडक्टिविटी के साथ-साथ पॉजिटिविटी भी बढ़ी है।

कोरोना महामारी के बीच हुई संसद के मानसून सत्र की शुरुआत

कोरोना महामारी के बीच सोमवार से संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हो गई। पहले सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक लोकसभा की कार्यवाही हुई और अब राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो गई। राज्यसभा में उपसभापति के पद के लिए चुनाव में एनडीए प्रत्याशी जदयू सांसद हरिवंश जीते। उनके खिलाफ विपक्ष ने मनोज झा को मैदान में उतारा था। 

हरिवंश के चयन का गुलाम नबी आजाद ने किया स्वागतएनडीए प्रत्याशी हरिवंश को राज्यसभा का उपसभापति चुने जाने पर कांग्रेस सासंद गुलाम नबी आजाद ने उन्हें शुभकामना दी है। आजाद ने कहा, यह दूसरी बार है जब वह (हरिवंश) सदन के उपसभापति चुने गए हैं। मैं उन्हें शुभकामना देता हूं। वह सभी दलों के सदस्यों के लिए निष्पक्ष रहे हैं।

रघुवर सरकार के दौरान पारा टीचर और पत्रकारों पर लाठीचार्ज मामले में दर्ज हुई गवाही

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उज्ज्वल दुनिया 
रांची ।  केंद्रीय मानवाधिकार के निर्देश पर  झारखंड सरकार ने पत्रकारों पर पुलिस की ओर से की गई 15 नवंबर दो हजार अट्ठारह को लाठीचार्ज को लेकर कार्यवाही प्रारंभ की गई है रांची के प्रमंडलीय आयुक्त को इसकी जांच का जिम्मा मिला है  । मुखर संवाद के राजनीतिक संवाददाता अशोक कुमार गोप ने अपनी गवाही दी है 


15 नवंबर 2018 को राज्य स्थापना दिवस के मौके पर पारा शिक्षकों को लाठीचार्ज के समय समाचार को कवरेज कर रहे पत्रकारों को बेरहमी से पीटा गया था जिसमें कई पत्रकारों को गंभीर रूप से चोटें आई थी और कई पत्रकार घायल हुए थे । अशोक कुमार को अपने केंद्रीय मानवाधिकार के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्रकारों के साथ इस बर्बर घटना  की शिकायत की गई थी ।  देर से ही सही लेकिन केंद्रीय मानवाधिकार के निर्देश पर प्रमंडलीय आयुक्त कमल जॉन लकरा ने सुनवाई प्रारंभ की जिसमें अशोक कुमार गोप ने अपनी गवाही देते हुए कहा है कि राज्य स्थापना दिवस के मौके पर दो हजार अट्ठारह में पारा शिक्षकों को लाठियों से पीटा जा रहा था । 

 उस खबर को कवर करने गए पत्रकारों के ऊपर भी पुलिस ने लाठियों और हथियारों के बट से गंभीर रूप से पिटाई की जिसमें कई पत्रकार घायल हो गए और कईयों को हॉस्पिटल भी भर्ती करना पड़ा । न्यायालय के समक्ष अशोक कुमार गोप ने अपनी गवाही देते हुए कहा है कि पुलिस की मंशा पारा शिक्षकों को पीटने के साथ ही इस खबर को मीडिया में प्रकाशित और प्रसारित होने से रोकने की थी ।  इस कारण से पत्रकारों को खींच खींच कर पीटा गया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया । अशोक कुमार गोप ने इस घटना की वीडियो और फोटो भी न्यायालय को उपलब्ध कराई है जिससे यह स्पष्ट होता है कि घटना में पुलिस कर्मियों ने पत्रकारों को निशाना बनाने की मंशा से गंभीर रूप से लाठियों से पीटा । दरअसल पुलिस की ओर से या प्रयास किया गया कि पत्रकार अपने सामाजिक और कर्तव्य का निर्वाह न कर सके और यह खबर झारखंड सहित पूरे देश की जनता के बीच प्रचारित और प्रसारित न हो सके ।


 मानवाधिकार आयोग की ओर से कई ऐसे मसले आए हैं जिसमें पुलिस के अधिकारियों को दंडित किया गया है और पीड़ितों को मुआवजे की राशि देने की भी प्रावधान किया गया है जो भी पीड़ित व्यक्ति हैं वह कल यानी 15 सितंबर को अपनी गवाही प्रमंडलीय आयुक्त के न्यायालय के समक्ष  प्रस्तुत कर सकते हैं अशोक कुमार गोप ने इस घटना के कई अहम सबूत और दस्तावेज भी न्यायालय को उपलब्ध कराएं हैं जिससे यह साबित हो जाएगा की घटना के दिन पुलिस की मंशा सही नहीं थी और पत्रकारों को काफी नुकसान पहुंचाया गया ।

किसानों के लिए ‘काला कानून’ है मोदी सरकार द्वारा लाए जा रहे अध्यादेश: कांग्रेस

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उज्ज्वल दुनिया /रांची: मोदी सरकार द्वारा संसद के मॉनसून सत्र में प्रख्यापित किये गए 11 अध्यादेशों में चार अध्यादेश किसान विरोधी हैं। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ राकेश किरण महतो ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा लाये जा रहे ये अध्यादेश किसानों के हित में नहीं हैं। इसीलिए कांग्रेस पार्टी इनका पुरजोर विरोध करेगी। 

कॉर्पोरेट फारर्मिंग से निजी कंपनियों को फायदा 

ज्ञात हो की इन अध्यादेशों का किसान संगठन भी विरोध कर रहे हैं। देश में जितने भी कृषि आधारित राज्य हैं जैसे – पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड आदि उनके राजस्व पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। इन अध्यादेशों के माध्यम से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और कॉरपोरेट फार्मिंग का जो प्रावधान किया जा रहा है उनसे सिर्फ निजी कंपनियों को फायदा हो सकता है। पिछले 50 सालों में हमारे देश में जो एमएसपी और न्यूनतम समर्थन मूल्य की जो प्रणाली थी उसको खत्म किया जा रहा है। पब्लिक प्रोक्योरमेंट और एफसीआई जो  सार्वजनिक वितरण के लिए अनाज खरीदती है उसको भी खत्म किया जा रहा है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात तो यह है कि केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाने से पूर्व राज्य सरकारों से विचार- विमर्श करना भी मुनासिब नहीं समझा, जबकि संविधान के अनुसार कृषि  राज्यों की सूची में आती है।

अपने ही खेतों में ठेके पर काम करेंगे किसान

अब यह सरकार खेती हड़पने के लिए तीन काले कानून लेकर आई है। खेत-खलिहान को पूंजीपतियों के हाथ गिरवी रखने का घिनौना षड्यंत्र कर रही है भाजपा। मोदी सरकार कृषि को गुलामी की जंजीरों में जकड़ने का षड्यंत्र रच रही है। यह खेत-खलिहान और अनाज-मंडियों पर अध्यादेशों के माध्यम से क्रूर प्रहार किया गया है। यह काले कानून देश में करोड़ों खेती और करोड़ों आढ़तियों को खत्म करने की साजिश के दस्तावेज हैं। खेती और किसानी को मुट्ठी भर पूंजीपतियों के हाथ गिरवी रखने का सोचा-समझा षड्यंत्र है। अब यह साफ है कि मोदी सरकार अपने पूंजीपति मित्रों के जरिए ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ बना रही है जो अन्नदाता किसान व मजदूर की मेहनत को मुट्ठी भर पूंजीपतियों की जंजीरों में जकड़ना चाहती है।

 50 फीसदी मुनाफे का सपना दिखाकर किसानों को  कंपनियों का गुलाम बनाना चाहती है मोदी सरकार 

किसान को लागत के अतिरिक्त 50 फीसदी मुनाफा का सपना दिखाकर सत्ता में आए मोदी जी ने तीनों अध्यादेश के माध्यम से देश में खेती के खात्मे का पूरा उपन्यास ही लिख दिया है। अन्नदाता किसान के वोट से जन्मी मोदी सरकार आज किसानों के लिए भस्मासुर साबित हो रही है। इसीलिए हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश आदि सभी राज्यों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस पार्टी इसका कड़ा विरोध करेगी और ‘हरित क्रांति’ को हराने की भाजपा की साजिश को कभी कामयाब नहीं होने देगी।

अब सभी सहकारी बैंक भी आरबीआई के अधीन

भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा इसी सत्र में एक और अध्यादेश लाया गया है बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में संशोधन करने का,वह भी त्रुटिपूर्ण है। इस बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत सारे सहकारी बैंक (कोऑपरेटिव बैंक) जिस पर आज राज्य सरकारों का रेगुलेशन चलता है, वे सारे बैंकों का रेगुलेशन अब आरबीआई करेगा। और जो कोऑपरेटिव बैंक की सदस्यता है, उसमें भी बदलाव लाया जा रहा है ताकि जो किसान नहीं हैं, जो कोऑपरेटिव के मेंबर नहीं है, उनको भी इन बैंकों में शेयर मिले। यह संविधान के खिलाफ है और राज्यों के खिलाफ है।

चंदा कोचर के पति दीपक कोचर कोरोना पॉजिटिव

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नई दिल्‍ली: आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को कोरोना से संक्रमित पाए जाने के बाद एम्‍स दिल्‍ली में भर्ती कराया गया है। ICICI बैंक-वीडियोकॉन से जुड़े धन शोधन के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बीते सोमवार को ईडी ने दीपक कोचर को गिरफ्तार किया था। बाद में मुंबई की एक अदालत ने दीपक को 19 सितंबर तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया था।

केंद्रीय एजेंसी इस मामले में हाल ही में जुटाए गए कुछ नए साक्ष्यों के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए दीपक कोचर को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है। रिमांड दिए जाने का अनुरोध करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत को बताया था कि दीपक कोचर जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और उनसे पूछताछ किए जाने की जरूरत है। ईडी ने अदालत को बताया कि जांच में पाया गया है कि सात सितंबर 2009 को आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकोन इंटरनेशल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटिड (वीआईईएल) को 300 करोड़ रुपये के कर्ज की मंजूरी दी थी।

रांची में पत्रकार के साथ मारपीट करने वाले ASI को SSP ने किया सस्पेंड

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रांची: पत्रकार आनंद दत्ता के साथ रांची में मारपीट करने के मामले में एसआई मोहन महतो को एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा ने रविवार को सस्पेंड कर दिया है। मारपीट को लेकर एसएसपी ने सिटी डीएसपी अमित कुमार सिंह को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। जांच में एएसआई दोषी पाए गए।

इसके बाद एसएसपी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। उल्लेखनीय है कि शनिवार को पत्नी के साथ मोरहाबादी मैदान के समीप लगे बाजार में पत्रकार आनंद दत्ता की पुलिसकर्मी ने पिटाई की थी। इस संबंध में आनंद दत्ता ने लालपुर थाने में यह साई के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी थी।
आवेदन में बताया गया था कि शनिवार की शाम में पत्नी के साथ सब्जी खरीदने मोराबादी गए थे। उन्होंने देखा कि एएसआई दो महिलाओं से पूछताछ कर रहे हैं। सामने आनंद को देख एएसआई ने पूछा कि यहां क्या कर रहे हो।

उसने कहा कि सब्जी लेने आया हूं। इस पर एएसआई ने ने कहा कि थैला कहां है। उसने कहा कि थैला पत्नी के पास है। वह आगे बढ़ गई है।

इस पर एएसआई ने तबातोड़ चार थप्पड़ आनंद को मार दिया। फिर कॉलर पकड़कर पीसीआर में बैठा दिया और मोरहाबादी टीओपी ले गए ।वहां भी मारपीट की। पुलिस कर्मी ने आनंद को पॉकेट मार कहकर प्रताड़ित किया। जब पत्रकारों को सूचना मिली पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया।

आनंद को छोड़ा गया। प्रेस क्लब रांची के प्रतिनिधियों ने एसएसपी से एसआई के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस कर्मी के द्वारा पत्रकार आनंद की पिटाई पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर रांची पुलिस को आदेश देते हुए कहा कि मामले की जांच कर दोषियों पर शीघ्र कार्यवाही करें।

डीजीपी एमवी राव ने भी मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने का आदेश एसएसपी को दिया है।

लालू प्रसाद से मुलाकात के बाद राजनीतिक बयान देकर मुख्यमंत्री ने जेल मैनुअल का उल्लंघन किया

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उज्ज्वल दुनिया /रांची । भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लालू प्रसाद के साथ 1 घंटे 40 मिनट तक मुलाकात किया। प्रतुल ने कहा कि जेल आईजी ने अपने 31 अगस्त के लिखे पत्र में स्पष्ट किया था कि मुलाकातियों के द्वारा कोई भी राजनीतिक बयानबाजी करना जेल मैनुअल का उल्लंघन है। बंगला से बाहर निकल कर मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में राजद और झामुमो साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। यह पूर्णतः जेल आईजी के लिखे पत्र और जेल मैनुअल का उल्लंघन है। प्रतुल ने कहा की मुख्यमंत्री की यह दलील गले से नीचे नही उतर रही की वो 1 घंटे 40 मिनट तक सिर्फ लालू प्रसाद का हाल चाल लेते रहे और कोई राजनीतिक बातचीत नहीं हुई।


प्रतुल शाहदेव ने कहा कि भाजपा शुरू से कह रही है की सभी कायदे कानूनों की धज्जियां उड़ा कर लालू प्रसाद को बंगला आवंटित किया गया है। यहां से चुनावी कार्य का संचालन हो रहा है।अफसोस की बात है कि भाजपा के द्वारा अनेक बार मांग करने के बावजूद भी बंगला में सीसीटीवी लगाकर उसकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग नहीं की जा  रही है।दिन में आने जाने वाले लोग पर मीडिया नजर रख सकती है।लेकिन मध्य रात्रि को कोई भी बेरोक टोक आ जा सकता है। इस पर अविलम्ब नकेल कसने की आवश्यकता है।