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एचईसी चार संस्थानों को 10

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उज्ज्वल दुनिया/रांची ।  गंभीर आर्थिक संकट से उबरने के लिए एचईसी ने अपनी जमीन लीज पर देने का निर्णय लिया है। जमीन को लीज पर देने से उसे 300 करोड़ से अधिक की राशि मिलेगी। इस राशि का उपयोग कार्यशील पूंजी के रूप में किया जाएगा, ताकि उत्पादन की रफ्तार बढ़ाई जा सके और समय पर कार्यादेशों की आपूर्ति की जा सके। निदेशक मंडल से इसकी मंजूरी मिल गई है और इसे भारी उद्योग मंत्रालय के पास भेज दिया गया है। 

एनटीपीसी, ओएनजीसी, एसबीआई और टीवीएनएल को लीज पल मिलेगी जमीन 

एचईसी ने चार सरकारी संस्थानों को जमीन लीज पर देने का निर्णय लेकर उसे आगे की प्रक्रिया के लिए निदेशक मंडल के पास भेजा था। अभी एनटीपीसी, टीवीएनएल, भारतीय स्टेट बैंक और ओएनजीसी को जमीन देने का निर्णय लिया गया है। सभी को 29 साल के लिए लीज पर जमीन दी जाएगी। प्रति एकड़ 11 करोड़ की दर निर्धारित की गई है। तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड को दो एकड़, ओएनजीसी, भारतीय स्टेट बैंक और एनटीपीसी को 10-10 एकड़ जमीन लीज पर देने का निर्णय लिया गया है।

प्रति एकड़ 11 करोड़ रुपये की दर से जमीन 

जानकारी के अनुसार एचईसी से लीज पर जमीन देने के लिए 11 सरकारी कंपनियों ने आवेदन दिया था। शुरू में एचईसी ने जमीन की दर प्रति एकड़ 5.50 करोड़ निर्धारित की थी। लेकिन भारी उद्योग मंत्रालय ने लीज की दर को कम बताया था और उसे बढ़ाने का निर्देश दिया था। बाद में एचईसी ने लीज की दर बढ़ाकर प्रति एकड़ 11 करोड़ रुपये कर मंजूरी के लिए प्रस्ताव भारी उद्योग मंत्रालय को भेजा। मंत्रालय ने इसे मंजूरी दे दी। नई दर से सिर्फ चार कंपनियों ने ही जमीन लेने पर सहमति दी है। शेष 11 कंपनियों ने दर अधिक होने के बात कह जमीन लेने से इनकार कर दिया। 

1038 एकड़ जमीन है खाली 

एचईसी के पास 1038 एकड़ खाली जमीन है। खाली जमीन को लीज पर देकर एचईसी ने कार्यशील पूंजी के साथ-साथ आधुनिकीकरण के लिए पैसा जुटाने की योजना बनायी है। एचईसी के रिवाइवल प्लान में खाली जमीन को नीति आयोग ने पहले ही जोड़ दिया है। जमीन लीज पर देकर मिलने वाली राशि का इस्तेमाल एचईसी सिर्फ अपने पुनरुद्धार के लिए ही कर सकता है। इसी आधार पर एचईसी ने इन चारों संस्थानों को जमीन देने का निर्णय लिया है। 

करंट से गई हथिनी की जान, ऐसी घटनाओं पर बिजली विभाग अब लेगी संज्ञान

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उज्ज्वल दुनिया संवाददाता/चतरा।  टंडवा-पिपरवार के सीमावर्ती क्षेत्र भेलवाटांड जंगल में करंट से एक हथिनी की मौत हो गई। इसमें बिजली विभाग की लापरवाही बतायी जा रही है। काफी दिनों से पोल में करंट प्रवाहित हो रहा था। लोगों के कहे जाने के बाद भी विभाग गंभीरता से मामले पर संज्ञान नहीं ले रहा था। टंडवा क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से टंडवा, सिमरिया, केरेडारी और पिपरवार थाना के सीमाओं में विचरण कर रहें, जंगली हाथियों के झुंड मे से एक गर्भवती हथिनी की मौत हो गयी। यह घटना टंडवा के सीमाओं से निकलने के दौरान खलारी थाना के भेलवाटांड जंगल मे तब घट गयी। जब वह बिजली करंट के चपेट मे आ गयी।

 टंडवा रेजर छोटेलाल ने बताया कि बिजली करंट के चपेट मे आने से हथिनी की मौत हुई। चश्मदीदो के अनुसार हाथियों का दो झुड टंडवा – पिपरवार मे प्रवेश किया था। एक में 18 और दूसरे में 22 की संख्या है। 22 हाथियों के समूह में एक हथिनी की मौत  18-19 की रात में हो गयी। बताया गया कि शुक्रवार की रात राहम में एक हाथी ने इदरीश अंसारी का बाउंड्री क्षतिग्रस्त कर दिया और फसलों को  भी रौदा। रेंजर ने यह भी बताया कि 12 हाथियों का एक और झुंड चार दिनों के अंदर केरेडारी होते आम्रपाली कारिडोर मे प्रवेश कर सकता है। बताया गया कि हाथियों का काफिला फिलहाल सीमा पार वन विभाग करवाने मे सफल रहा।

कोरोनाकाल में बच्चों को मिड डे मील की जगह मिल रहा खाद्य सुरक्षा भत्ता

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झारखण्ड के 31 लाख 29 हजार  548 बच्चों को मिल रहा भत्ता  
राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न पर सरकार ने दी जानकारी 

उज्ज्वल दुनिया /रांची : कोरोना संकट के दौरान मोदी सरकार ने न सिर्फ किसानों, मजदूरों, गरीबों, असहायों, वृद्धों, विधवाओं आदि को उनके दरवाजे तक आर्थिक सहायता पहुंचाई बल्कि स्कूली बच्चों को भी उनके हक़ “दोपहर के भोजन” से वंचित नहीं होने दिया| मौजूदा परिस्थितियों (कोविड-19) में पका हुआ गर्म भोजन उपलब्ध कराना संभव नहीं है, अतः झारखंड राज्य सरकार सहित राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्रों को सलाह दी गई है कि जब तक महामारी के कारण स्कूल बंद हैं, तब तक वे सभी पात्र बच्चों को खाद्य सुरक्षा भत्ता (एफएसए) प्रदान करें, जिसमें खाद्यान्न, दालें, तेल आदि (खाना पकाने की लागत के बराबर) शामिल हैं। राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के एक अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने यह जानकारी दी|
मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि फिलहाल, देश के विबिन्न राज्यों में कुल 9,52,24,169 बच्चों को खाद्य सुरक्षा भत्ता दिया जा रहा है| झारखण्ड सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गयी सूचना के मुताबिक़ राज्य के 31,29,548 बच्चों को मिड डे मील के एवज में खाद्य सुरक्षा भत्ता उपलब्ध कराया जा रहा है|

हजारीबाग: अवैध चालान के सहारे जारी है बालू और कोयले की तस्करी

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पकड़े जाने पर ट्रक ड्राइवर ने कहा,  थाना से बात कर लें,  सब मैनेज है

अजय निराला / उज्ज्वल दुनिया/ हजारीबाग। पुलिस मुख्यालय द्वारा बालू-कोयला तस्करी पर लगाम लगाने आदेश के बाद भी हजारीबाग जिले में आदेश पर अमल नहीं हो पा रहा है।  जिले में डंपिंग यार्ड और कॉल फैक्ट्रियों के नाम जारी बालू-कोयले के चालान पर ओवर लोड वाहनों का परिचालन जोर शोर से चल रहा है। राजनेता, पुलिस, माइनिंग विभाग के मिलीभगत से चल रहे खनिजों के तस्करी सिंडिकेट का खुलासा होने के बाद भी कोई लगाम लगाने में हजारीबाग प्रशासन असफल साबित हो रही है। 

आखिर वो कौन है जिसे डीजीपी के आदेश का भी डर नहीं ?

डंपिंग यार्ड के नाम सीधे नदी से बालू तस्करी किए जाने के खुलासे के बाद मुख्यमंत्री, डीजीपी को टैग कर करते हुए प्रमोद गुप्ता के एक ट्वीट ने बालू तस्करी में फर्जी चालान का उपयोग कर सरकार को करोड़ों रूपए के राजस्व का नुकसान होने की बात जानकारी दिया है। इसमें कहा गया है कि राज केसरी प्रोजेक्ट के द्वारा एनएच -2 सड़क निर्माण में अवैध चालान से करोड़ो की हेराफेरी कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ट्वीट में कहा है कि पांडेयबारा कैंप का चालान कोसमा बरकट्ठा कैंप में किया जा रहा है। डीजीपी ने इस मामले को हज़ारीबाग़ डीसी-एसपी को कार्रवाई का आदेश ट्विटर पर दिया है। 

बड़कागांव बना बालू और कोयला तस्करी का केन्द्र 

फर्जी चालान पर बालू तस्करी का खेल महीने से जिले में चलाया जा रहा है। जिसका मुख्य केंद्र बड़कागांव बना हुआ है। जहां एक जनप्रतिनिधि के करीबी रिश्तेदार पूरे सिंडिकेट को चला रहे हैं। बड़कागांव में कोडरमा के डंपिंग यार्ड के चालान का उपयोग कर नदियों से बालू उठाव कर महंगे दाम में शहरों में बेचा जा रहा है। कटकमदाग थाना क्षेत्र बालू और कोयले तस्करी का ट्रैफिक जोन माना जाता है। वहीं से गुजर कर जिले व आसपास के इलाकों में बालू-कोयला जाता है। इसके साथ चालान के सहारे ओवरलोड कोयला तस्करी भी जिले में चलाया जा रहा है।  स्थानीय फैक्ट्रियों को सस्ते दाम में मिलने वाले कोयले को कागजी हेरफेर कर खुले बाजार में बेच दिया जाता है । 

थाना से बात कर लिजिए 

शुक्रवार को दिन के उजाले में कुजु रेलवे साइडिंग से ओवरलोड हाइवा में डस्ट कोयला कटकमदाग थाना क्षेत्र के नर्सिंग प्लांट में जा रहा था। हाइवा का नम्बर भी स्पष्ट प्लेट भी स्पष्ट नही था। सिर्फ एक हाइवा में आगे का नंबर दिख रहा था।  ऐसे में सवाल यह है कि दिन के उजाले में शहर से गुजर कर ओवर लोड कोयला कैसे जा रहा है ? दूसरा सवाल यह कि फ़ोटो में वाहनों में कोयला के नाम डस्ट दिख रहा है। तो फैक्ट्री के नाम जारी कोयला कहां जा रहा है ?
चालक प्रकाश कुमार से पूछने पर कहा कि मालिक और थाना से बात कर लीजिए या करवा देते हैं।  ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पुलिस मुख्यालय के आदेश के बाद जिले में बालू और कोयला तस्करी पर लगाम क्यों नहीं लग पा रहा। कहीं जिला प्रशासन मजबूत राजनीतिक सिंडिकेट  से चल रहे खनिज तस्करी पर हाथ डालना नही चाहता ?

आतंकी की गिरफ्तारी के बाद राज्यपाल ने फिर ममता सरकार की कार्य शैली पर उठाये सवाल

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बंगाल बन गया है बम बनाने वालों का पनाहगाह, राजनीति से निर्देशित है राज्य पुलिस : राज्यपाल

कोलकाता । पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने एक बार फिर राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था और एक के बाद एक आतंकियों की गिरफ्तारी को लेकर राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया है। इस संबंध में शनिवार को राज्यपाल धनखड़ के तीन ट्वीट किए।


अपने ट्वीट में राज्यपाल ने लिखा कि एनआईए ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में अलकायदा के मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने मुझसे कहा है कि पश्चिम बंगाल पुलिस मजबूती से कानून का पालन करती है। कानून का अतिरिक्त इस्तेमाल कर न तो किसी का साथ दिया जा सकता है और न किसी के खिलाफ कोई भेदभाव किया जा सकता है। आखिर जब पुलिस इतनी मजबूती से कानून का पालन कर रही थी तो यहां लगातार आतंकी मॉड्यूल स्थापित कैसे हो रहे हैं? डीजीपी का यह कहना कि कानून का इस्तेमाल किसी के साथ भेदभाव के लिए नहीं कर सकते, का क्या मतलब है? 


राज्यपाल ने अपने ट्वीट में लिखा है कि बंगाल अवैध बम बनाने वालों का सुरक्षित पनाहगाह बन गया है। इससे लोकतंत्र अस्थिर हो सकता है जबकि ममता बनर्जी की पुलिस राजनीतिक कामों को पूरा करने और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई में व्यस्त है। अपने ट्वीट के जरिए राज्यपाल ने पुलिसकर्मियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे पुलिसकर्मी, जो ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं,  बुरे नहीं हैं। शीर्ष पदों पर बैठे लोगों का बर्ताव राजनीतिक रूप से निर्देशित है। बंगाल पुलिस के डीजीपी का इस तरह का बर्ताव बहुत परेशान करने वाला है। वास्तविकता यह है कि बंगाल पुलिस के आला अधिकारी राजनीतिक रूप से निर्देशित हैं।

जासूसी कांड: पत्रकार मामले में चीन की युवती और नेपाल का युवक गिरफ्तार

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नई दिल्ली । चीन के लिए जासूसी करने के शक के मामले में गिरफ्तार दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार राजीव शर्मा के बयान और निशानदेही पर दो और लोगों को आज गिरफ्तार किया गया है।इसमें चीन की एक महिला और नेपाल का एक युवक शामिल है। इन दोनों को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया है।
पुलिस को शक है कि पत्रकार राजीव शर्मा रक्षा से संबंधित दस्तावेज चीन को पहुंचा रहा था। बदले में उसे मोटी रकम मिल रही थी। इसी सिलसिले में शनिवार को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने एक चीनी और दूसरे नेपाली नागरिक को गिरफ्तार किया है। तीनों से पूछताछ की जा रही है।

ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत मामला दर्ज : 

स्पेशल सेल सूत्रों के मुताबिक सूचना मिली थी कि एक पत्रकार के पास देश के कुछ दस्तावेज हैं, जो वह चीन को पहुंचा रहा है। स्पेशल सेल की टीम ने छानबीन शुरू की तो कुछ अहम जानकारियां मिलीं। उसी आधार पर राजीव शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी में पत्रकार के पास से रक्षा संबंधित कुछ दस्तावेज मिले। पुलिस ने ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गहन पूछताछ शुरू की। साथ ही इस संबंध में रक्षा मंत्रालय से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

 खुफिया जानकारी के बदले में देते थे रुपये:

 पुलिस के अनुसार राजीव शर्मा को 6 दिन की हिरासत में लिया गया है। इस बीच पूछताछ में उसने चीन की एक महिला और नेपाल के एक युवक के बारे में बताया। स्पेशल सेल ने इन दोनों को राजीव की निशानदेही पर शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों की मानें तो ये दोनों एक फर्जी कंपनी के जरिए पत्रकार को रुपये मुहैया करवा रहे थे। बदले में उससे भारत की खुफिया जानकारी हासिल करते थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप भी जब्त किया है। खबर लिखने तक स्पेशल सेल की टीम जनकपुरी स्थित दफ्तर में राजीव शर्मा सहित तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही थी।

एम्स में युवती के शरीर से 41 किलोग्राम के ओवरियन ट्यूमर का सफल ऑपरेशन

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ऋषिकेश । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के चिकित्सकों ने बिजनौर निवासी 24 वर्षीय युवती के शरीर से 41 किलोग्राम के ओवरियन कैंसर ट्यूमर का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर उसे जीवनदान प्रदान किया है।चिकित्सकों ने बताया कि ओवरियन कैंसर ट्यूमर का यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है।एम्स निदेशक प्रो.  रविकांत ने युवती की जान बचाने के लिए इस जटिल सर्जरी की सफलता पर टीम की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि संस्थान में कैंसर के निदान एवं चिकित्सा के लिए वर्ल्ड क्लास सुविधाएं उपलब्ध हैं। जल्द ही महिलाओं के कैंसर रोग का एक अलग से गाइनी ओंकोलॉजी डिवीजन स्थापित किया जा रहा है।  एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि हम खासतौर पर कैंसर से ग्रस्त गरीब और जरुरतमंद महिला रोगियों के लिए विशेष सेवा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश में जल्द ही आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबी) की सुविधा शुरू हो जाएगी। स्त्री एवं प्रसूति विभाग में रोबोटिक और लेप्रोस्कोपी विधि के माध्यम से भी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। साथ ही विभागीय चिकित्सकों की अलग-अलग टीमों द्वारा समय-समय उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के स्कूलों और सुदूरवर्ती गांवों में नियमिततौर पर चिकित्सा एवं परामर्श शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।एम्स के गाइनी विभाग के चिकित्सकों के अनुसार यह युवती बिजनौर से पेट में गांठ व दर्द की शिकायत लेकर एम्स ऋषिकेश आई थी। उसे 6 साल से शिकायत थी।  उसके पेट में ट्यूमर छह साल से धीरे-धीरे बढ़ रहा था। पिछले एक साल से उसे चलने-फिरने और खड़े रहने में कठिनाई होने लगी थी।  एम्स ऋषिकेश आने से पूर्व युवती उत्तर प्रदेश के कई सरकारी व निजी अस्पतालों के चक्कर लगा चुकी थी। मगर हर जगह से निराशा ही हाथ लगी व उसे इलाज संभव नहीं होने की बात कहकर रेफर कर दिया गया। यहां जांच के बाद उसके पेट में 50×40 सेंटीमीटर का ओवरियन ट्यूमर पाया गया। एम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. कविता खोईवाल और उनकी टीम मेंबर डॉ. ओम कुमारी, डॉ. राहुल मोदी व डॉ. अंशु गुप्ता ने युवती का ऑपरेशन किया जिसमें 41 किलोग्राम का ओवरियन कैंसर ट्यूमर निकला। इसके अलावा इस ऑपरेशन में एनेस्थिसिया विभाग की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसमें डा. प्रियंका गुप्ता और उनकी टीम के अन्य सदस्य शामिल रहे। संस्थान की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता खोईवाल ने बताया कि यह एक जटिल चुनौती थी, क्योंकि हमें एक महिला रोगी के शरीर से बड़े साइज के ट्यूमर को हटाना था, जो कि मरीज के शरीर के कुल वजन का लगभग 60 प्रतिशत था। उन्होंने बताया कि ओवरियन कैंसर ट्यूमर का यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जया चतुर्वेदी ने बताया कि युवती की बीमारी से जुड़ा यह मामला विशेषकर दूरदराज के गांवों की महिलाओं की दुर्दशा को उजागर करता है, जिन्हें चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में समय पर आवश्यक उपचार नहीं मिल पाता है और वह इस तरह की अवस्था तक पहुंच जाती हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के ओवरियन ट्यूमर के मामले काफी कम सामने आते हैं, साथ ही ट्यूमर के इतने बड़े आकार व इस स्थिति में आने से मरीज को बचा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

देश ​की ‘तीसरी आंख’ बने सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो

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अनिल धस्माना को बनाया गया एनटीआरओ का नया मुखिया 

– पीएमओ और एनएसए के अधीन काम करती है खुफिया एजेंसी 

कारगिल वार के बाद किया गया था नए खुफिया तंत्र का गठन 

नई दिल्ली ।  अनुसंधान और विश्लेषण विंग (रॉ) के प्रमुख रह चुके अनिल धस्माना को नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एनटीआरओ) का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वह लंबे समय तक रॉ में कार्यरत थे और उन्हें पाकिस्तान मामलों का भी विशेषज्ञ माना जाता है। वह दो साल के लिए राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन के प्रमुख होंगे। देश की ‘तीसरी आंख’ कही जाने वाली एनटीआरओ खुफिया एजेंसी सीधे पीएमओ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अधीन काम करती है।

कारगिल वार से पहले तक देश में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) खुफिया एजेंसी के तौर पर काम करती रही हैं। इसमें आईबी सबसे पुरानी खुफिया एजेंसी है, जिसका गठन अंग्रेजों के समय में ही हुआ था। 1968 तक देश में यही एक खुफिया एजेंसी थी। 1962 में चीन से और 1965 में पाकिस्तान से युद्ध में आईबी को नाकाम माना गया था। इसलिए बाद में रॉ का गठन हुआ। इंटेलिजेंस ब्यूरो और रॉ दोनों ही गृह मंत्रालय के तहत एजेंसियां हैं। रॉ का काम पड़ोसी देशों पर निगरानी रखना है और सेना और सरकार को जानकारी देना है। बांग्लादेश के बंटवारे में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी गई। जब 1999 में पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सीमा के अंदर कारगिल की पहाड़ियों में अपने बंकर बना लिए तो इसे दोनों ही खुफिया एजेंसियों की नाकामी के तौर पर देखा गया। कारगिल की पहाड़ियां फिर से अपने नियंत्रण में करने के लिए 60 दिनों तक पाकिस्तान से लड़ाई लड़नी पड़ी। 

इसके बाद सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई गई जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) केके हजारी, बीजी वर्गीज और सतीश चंद्रा जैसे लोग शामिल थे। कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में इस युद्ध के लिए खुफिया एजेंसियों को ही जिम्मेदार ठहराया। साथ ही कमेटी ने एक नए खुफिया तंत्र के गठन की सिफारिश की। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उसी समय बतौर रक्षा सलाहकार आंतरिक सुरक्षा को लेकर नेशनल टेक्निकल फैसिलिटीज ऑर्गनाइजेशन (एनटीएफओ) का गठन किया था जिसके अध्यक्ष उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी थे। इसी संगठन को 2004 में नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एनटीआरओ) में तब्दील कर दिया गया। इस एजेंसी को देश की सुरक्षा से संबंधित खुफिया जानकारियां सरकार और भारतीय सेना को देने की जिम्मेदारी दी गई। 

एनटीआरओ ने अंतरिक्ष में एक सेटलाइट भेजा है जिसके जरिए देश पर निगरानी रखकर खुफिया जानकारी जुटाता है। इसके अलावा मोबाइल फोन की मॉनिटरिंग भी इसी के जिम्मे है। देश के संगठनों, उनकी इमारतों और समुद्री इलाकों में भी संगठन की नजर रहती है। इसके अलावा संगठन के पास दो रडार सेटलाइट और ड्रोन भी हैं जिनके जरिए यह तस्वीरें जुटाता है। युद्ध से संबंधित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की सुरक्षा भी इसी के जिम्मे है। एनटीआरओ प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अधीन काम करता है। बालाकोट स्ट्राइक में बेहद अहम भूमिका निभाने वाले अनिल धस्माना को नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एनटीआरओ) का नया मुखिया नियुक्त किया गया है। उन्होंने ही सेटलाइट से ली गई तस्वीरों के जरिए बालाकोट स्ट्राइक में 300 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने का दावा किया था।  

सरकार के जनविरोधी लैंड म्यूटेशन बिल के खिलाफ सड़क से सदन तक होगा विरोध: भाजपा

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भाजपा विधायक दल की बैठक में लैंड म्यूटेशन बिल, सहायक पुलिस कर्मी और नेता प्रतिपक्ष जैसे मुद्दों पर चर्चा 

उज्ज्वल दुनिया /रांची ।  सरकार के जनविरोधी निर्णयों के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी सड़क से सदन तक विरोध करेगी। यह निर्णय भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की बैठक में हुई। इसकी जानकारी राजमहल के विधायक अनंत कुमार ओझा ने दी। उन्होंने कहा कि सरकार जनविरोधी लैंड म्यूटेशन बिल लाने को आतुर है। जल जंगल और जमीन लूटने वाले अधिकारियों को खुली छूट देने का निर्णय सरकार ने लिया है। यूपीए की हेमंत सोरेन कि सरकार के निर्णय के खिलाफ सदन के अंदर और सदन के बाहर भी भारतीय जनता पार्टी विरोध करेगी, यह निर्णय विधायक दल की बैठक में हुई।

सहायक पुलिस कर्मियों पर सदन के अंदर और बाहर सरकार को घेरने की रणनीति 

साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में अपराधी बेलगाम हो रहे है , उग्रवादी घटनाएं घट रही है,  अपराध में बेतहाशा वृद्धि हुई है, लॉ एंड ऑर्डर चरमरा गई है। सरकार के गिरते शासन व्यवस्था के खिलाफ पार्टी सोमवार को सदन में सरकार को घेरने का कार्य करेगी। राज्य के ज्वलंत मुद्दे पर सरकार ने मौन साध रखा है। कोरोना जैसी वैश्विक बीमारी में त्राहिमाम जनता को लेकर, नौजवानों को झूठा आश्वासन के खिलाफ, सहायक पुलिस कर्मियों को हटाए जाने को लेकर और बेरोजगारों की बड़ी फौज खडे करने को लेकर पार्टी के विधायक सरकार को घेरने का काम करेगी ।

 नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर जनता की अदालत में जाएंगे

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष की मान्यता के सवाल पर विधायक अनंत कुमार ओझा ने कहा की सरकार का रवैया यह साबित करता है कि गैर लोकतांत्रिक व्यवहार इस सरकार में चल रहा है। हमारे नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि सदन के अंदर नेता प्रतिपक्ष की मान्यता को लेकर राज्य की जनता की अदालत में जाएंगे। मालूम हो कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की बैठक पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के आवास में हुई।

सहायक पुलिस कर्मियों पर लाठीचार्ज सरकारी दमन की पराकाष्ठा

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उज्ज्वल दुनिया /रांची । भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद दीपक प्रकाश ने अनुबंध पर कार्यरत सहायक पुलिसकर्मियों पर हुए लाठीचार्ज, एवम दमनकारी कार्रवाई की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है । दीपक प्रकाश ने कहा यह सरकार संकट में भी गरीबों का निवाला छीन रही है ।

झारखंड ने ऐसी निरंकुश सरकार अब तक नहीं देखी

दीपक प्रकाश ने कहा कि प्रदेश की जनता ने ऐसी निरंकुश सरकार पहले कभी नही  देखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आन्दोलन का सबको अधिकार है।सरकार इतनी निर्मम हो गई कि कड़ी धूप और बरसात में दुधमुहें बच्चे के साथ बैठे सहायक पुलिसकर्मियों पर लाठी चलवा रही है,आंसू गैस छोड़ रही है।

बातचीत से सभी समस्याओं का समाधान संभव 

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि बातचीत से किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है,  लेकिन सरकार का इरादा नेक नही है। सत्ता के अहंकार में चूर होकर वे लोग गरीब जनता पर लाठियां बरसा रहे हैं । दुधमुहें बच्चों पर आंसू गैस छोड़े जा रहे हैं । उन्होंने मांग की है कि हेेमंत सोरेन तुरंत इन आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों से वार्ता कर समस्याओं के संवैधानिक  समाधान का आग्रह किया।

भाजपा नेताओं के भड़काने से उग्र हुए प्रदर्शनकारी, पुलिस पर की पत्थरबाजी

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उज्ज्वल दुनिया /रांची । सहायक पुलिस कर्मियों पर हुए लाठीचार्ज पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कहा कि सुबह की झामुमो के एक नेता के साथ सहायक पुलिस कर्मियों की बातचीत हुई थी । बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई बातचीत के बाद हमने उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन भी दिया था । लेकिन इसके बाद भाजपा के कुछ नेता आंदोलनकारियों से मिलने पहुंचे । उन्होंने ही सहायक पुलिस कर्मियों को सीएम आवास घेरने के लिए उकसाया । उनकी ओर से पत्थरबाजी की गई । मजबूर होकर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा ।

सहायक पुलिस कर्मियों को भाजपा की राजनीति समझना चाहिए 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि रघुवर दास की सरकार के दौरान ही सहायक पुलिस कर्मियों की नियुक्ति तीन साल के लिए की गई थी । उसमें साफ-साफ लिखा है कि किसी भी सूरत में उनको स्थाई नहीं किया जा सकता है । इतना ही नहीं,  रघुवर दास की सरकार के दौरान ही सहायक पुलिस कर्मियों की नियुक्ति नियमावली में लिखा है कि इनको एक्सटेंशन नहीं दिया जि सकता । अब वे ही बताएं कि हम कहां दोषी हैं ?

बाबूलाल मरांडी और रघुवर दास के लोग भड़काकर इन्हें आंदोलन के लिए लेकर आए हैं 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि अगस्त में सहायक पुलिस कर्मियों का अनुबंध समाप्त हुआ । इसके बाद सितम्बर में ही तो इनपर विचार होता ? लेकिन सरकार कुछ करती इससे पहले ही बाबूलाल मरांडी और रघुवर दास के लोग इन सहायक पुलिस कर्मियों को लेकर रांची आ गए । इन लोगों ने एक गिरोह तैयार कर लिया है । जब आंदोलन करने वाले लोग उदंडता करेंगे तो पुलिस को भी अपना काम करना ही पड़ेगा । जिन लोगों ने सहायक पुलिस कर्मियों का मजाक बनाया है उस रघुवर दास से जाकर ये लोग क्यों नहीं पूछते ? उनके आवास का घेराव क्यों नहीं करते ?

सीएम आवास का घेराव करने जा रहे सहायक पुलिस कर्मियों पर बरसी लाठियां, आंसू गैस के गोले छोड़े गए

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उज्ज्वल दुनिया /रांची । शुक्रवार को राजधानी रांची का मोराबादी मैदान और उसके आस-पास का इलाका जंग का मैदान बन गया । एक ओर राज्य के दूर-दराज इलाकों से आए सहायक पुलिस कर्मी थे तो दूसरी ओर रांची पुलिस । ऐसा लग रहा था मानों दोनों ओर से दुश्मनी निकाली जा रही है। राजधानी की पुलिस ने मोराबादी मैदान में लगे सहायक पुलिस कर्मियों के टेंट उखाड़ दिए, उनपर लाठियां बरसाई,  भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े । 

हमारे दस लोग घायल हुए- सीटी एसपी  रांची के एसपी सौरभ ने बताया कि प्रदर्शन कर रहे सहायक पुलिसकर्मी हिंसक हो गए। उन्होंने बैरिकेडिंग तोड़ दी और पथराव करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस प्रशासन कार्रवाई करने के लिए मजबूर हो गया। इस दौरान हमारे पुलिस विभाग के 10 लोग और 5-6 प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं।

हम शांतिपूर्ण थे, हम वर्दी की गरिमा समझते हैं- सहायक पुलिस कर्मी 


सहायक पुलिस कर्मियों ने बताया कि हम पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं । हमारा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था । लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार के बड़े अधिकारियों के इशारे पर पुलिस हर कीमत पर हमारा आंदोलन खत्म करने पर उतारु थी । वे जबरदस्ती महिलाओं को खींचने लगे । हमारे कुछ साथियों ने रोकने की कोशिश की तो वे मारपीट करने लगे । लेकिन हम खुद पुलिस वाले हैं । हम वर्दी की गरिमा समझते हैं । हमने रोकने की बहुत कोशिश की । लेकिन भीड़ और भगदड के कारण लगता है कि सरकार अपनी साजिश में कामयाब हो गई । वे हमें पीटने आए थे और वही किया । 

जमीन लूटने वालों को छूट और हक मांगने वालों को लाठी – बाबूलाल मरांडी 

सहायक पुलिस कर्मियों पर हुए लाठीचार्ज की आलोचना करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार ने नौ महीने में ही जनता को निराश किया है । नक्सलवाद एक बार फिर सर उठाने लगा है, अपराधी बेलगाम हैं,  खुद सीएम को भी धमकी मिल चुकी है, मंत्री से लेकर संतरी तक कमीशनखोरी में व्यस्त हैं,  पुलिस सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वालों पर ही बहादुरी दिखा रही है जबकि दुर्दांत अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं । बाबूलाल मरांडी ने कहा कि ये तो पुलिसिया जुल्म की इंतेहा है कि महिलाओं और उनकी गोद में पड़े बच्चों पर लाठी बरसाई गई और उनपर आंसू गैस के गोले छोड़े गए । भगवान न करें अगर छोटे बच्चे के साथ कुछ बुरा होति तो क्या डीजीपी और सीएम उसकी जिम्मेदारी लेते ?

नक्सलियों और अपराधियों के सामने पस्त सरकार निहत्थे महिलाओं और बच्चों पर बरसा रही लाठियां- रघुवर दास 

पूर्व सीएम रघुवर दास ने कहा कि नक्सलियों और अपराधियों के सामने पस्त झारखंड सरकार अपने डंडे का जोर निहत्थे सहायक पुलिसकर्मियों आजमा रही है। यह राज्य सरकार की दमनकारी नीति है। अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हमारे आदिवासी-मूलवासी सहायक पुलिसकर्मियों पर लाठीचार्ज व आंसू गैस का प्रयोग करना घोर निंदनीय है।

सहायक पुलिसकर्मी भी तो मूलवासी और आदिवासी हैं,  फिर उनके साथ जुल्म क्यों? – आजसू 
आजसू ने भी सहायक पुलिस कर्मियों पर हुए लाठीचार्ज की आलोचना करते हुए कहा कि हेमंत सोरेन कहते हैं कि उनकी सरकार आदिवासी-मूलवासी की सरकार है । फिर सहायक पुलिस कर्मी भी तो यहां के आदिवासी-मूलवासी समाज से ही हैं । वे झोले में 1932 का खतियान लेकर घूम रहे हैं । इनकी मांगों पर विचार करने की बजाय हेमंत सोरेन की पुलिस लाठियां बरसा रही है । हमारी मांग है कि लाठीचार्ज का आदेश देने वाले पुलिस अधिकारी को तुरंत बर्खास्त किया जाए । 

घर

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राज्यसभा में सरकार ने बतायी इन्टरनेट कनेक्टिविटी व डिजिटल साक्षरता की उपलब्धियां  

उज्ज्वल दुनिया /रांची : मोदी सरकार विकास प्रक्रिया का अनिवार्य अंग बन चुके आधुनिक सूचना तकनीक को देश के जन-जन तक पहुंचाने को प्रतिबद्ध है| देश के दुर्गमतम ग्रामीण इलाकों तक इन्टरनेट की पहुंच सुनिश्चित करने और लोगों को इसके इस्तेमाल के लिए डिजिटल साक्षरता पर सरकार का पूरा जोर है| “राष्‍ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन (एनडीएलएम)” तथा “डिजिटल साक्षरता अभियान (डीआईएसएचए)” नामक दो स्‍कीमों के तहत कुल 53.67 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया जिनमें से 42% अभ्‍यर्थी ग्रामीण इलाकों से थे। इसके अलावा 2017 में शुरू “प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीडीआईएसएचए)” नामक स्‍कीम के तहत 11 सितम्बर 2020 तक कुल 2,39,903 ग्राम पंचायतों को पंजीकृत किया जा चुका है। राज्यसभा में सांसद श्री महेश पोद्दार के एक अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए संचार, शिक्षा तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्‍य मंत्री श्री संजय धोत्रे ने यह जानकारी दी|
मंत्री श्री धोत्रे ने बताया कि इसके “स्‍वयं-प्रभा” के तहत शिक्षा मंत्रालय इंटरनेट से वंचित नागरिकों के लिए विद्यालयों तथा उच्‍च शैक्षणिक संस्‍थाओं हेतु शिक्षा संबंधी विषय-वस्‍तु वाले 34 शैक्षणिक चैनल प्रदान कर रहा है।
ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्‍टिविटी की एक्‍सेस को बेहतर बनाने के लिए सार्वभौमिक सेवा दायित्‍व निधि (यूएसओएफ) के तहत भारतनेट परियोजना में देश की ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड/इंटरनेट कनेक्‍टिविटी प्रदान करने की संकल्‍पना की गई है। इसके अलावा राष्‍ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन को सभी के लिए ब्रॉडबैंड की वहनीय तथा सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करने के उद्देश्‍य के साथ दिनांक 17 दिसंबर 2019 को शुरू किया गया था।

रघुवर दास बताएं कि उन्होंने सहायक पुलिस कर्मियों को परमानेन्ट क्यों नहीं किया

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उज्ज्वल दुनिया /रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव, डा राजेश गुप्ता छोटू एवं अमूल्य नीरज खलखो ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा सहायक पुलिसकर्मियों की सीधी नियुक्ति के संबंध में उठाये गये सवाल पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सारी व्यवस्था को चौपट और तहस-नहस करने के बाद अब वे बिना सिर-पैर का सलाह देते फिर रहे है।

प्रदेश प्रवक्ताओं ने कहा कि यह सभी को पता है कि पुलिस की ट्रेनिंग में किन कठिन अभ्यास और मापदंडों का पालन करना पड़ता है । रघुवर दास को बताना चाहिए कि सहायक पुलिसकर्मियों को किस तरह की ट्रेनिंग दी गयी और अपनेकार्यकाल में ही इन्हें स्थायी क्यों नहीं कर दिया गया।
 उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओंको रोजगार देने और सभी सरकारी कार्यालयों एवं विभागों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया  जेपीएससी और जेएसएसी के माध्यम से शुरू करने जा रही है, लेकिन पिछली सरकार की तरह रोजगार के नाम पर सिर्फ युवाओं छलने का काम कतई नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि मोमेंटम झारखंड और स्वामी विवेकानंद की जयंती पर एक लाख युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर किस तरह का खेल हुआ, यह किसी से छिपा हुआ नहीं है । इसलिए कांग्रेस-जेएमएम व आरजेडी गठबंधन सरकार ऐसा कोई भी काम नहीं करेगी, जिससे युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो जाए। 

बर्बर सरकार का बर्बर चेहरा उजागर

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सहायक पुलिस कर्मियों पर हुआ लाठीचार्ज हेमंत सरकार के जुल्मी चेहरे को उजागर करता है

उज्ज्वल दुनिया /रांची । भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा की भारतीय जनता पार्टी सहायक पुलिस कर्मियों पर सरकार के इशारे पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करती है। भाजपा मानती है यही इस बर्बर सरकार का असली बर्बर चेहरा है। इस सरकार ने 1 वर्ष में 5 लाख युवाओं को नौकरी देने का झूठा वादा किया था। और अब अपने स्थाई नौकरी की मांग कर रहे हैं सहायक पुलिस कर्मियों को बेदर्दी से पीटा गया।दर्जनों लोग के हाथ पैर टूट गए।महिला सहायक पुलिस कर्मियों को पुरुष पुलिसकर्मियों के द्वारा पीटा गया। 

 आदिवासी-मूलवासियों पर बरसाई लाठियां 

आदिवासी मूलवासी हितों की बात करने वाली सरकार ने आज मोराबादी मैदान में आदिवासी मूलवासियों को बेरहमी से पीट कर अपनी ज़ालिम सोच दिखा दी है। इस लाठीचार्ज में  उन महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया जो अपने छोटे-छोटे बच्चों को सीने से लगाकर पिछले 6 दिनों से आंदोलनरत थी। क्रूरता की सारी सीमाएं पार कर दी सरकार ने।

सरकार का एक भी विधायक या मंत्री मिलने नहीं गया 

प्रतुल ने कहा कि 6 दिनों से ये सहायक पुलिस कर्मी आंदोलन कर रहे थे लेकिन सरकार के एक विधायक या मंत्री ने भी इनसे धरना स्थल पर जाकर मुलाकात करने की कोशिश नहीं की।उल्टे शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे इन लोगों के ऊपर मुकदमा दर्ज कर दिया गया।भारतीय जनता पार्टी इस बर्बर सरकार की कड़ी निंदा करती है और सड़क से सदन तक इस बर्बरता का विरोध करेगी।