Monday 29th of June 2026 09:28:11 AM
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रघुवर दास ने एक राज्य को दो हिस्सों में बांटने की साजिश की थी

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उज्ज्वल दुनिया/ रांची: झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र में मंगलवार को हेमंत सोरेन ने सदन की बैठक दोबारा शुरू होने पर हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा-जैसी करनी वैसी भरनी। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में एक राज्य को दो हिस्सों में बांटने की कोशिश की गयी थी, सरकार अदालत के आदेश की समीक्षा करेगी और समीक्षोपरांत कोई निर्णय लेगी। फिलहाल नियोजन नीति मामले में हाईकोर्ट का निर्णय लागू है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बनायी गयी नियमावली को लेकर आदेश दिया गया है, इससे हजारों लोगों की नियुक्ति प्रक्रिया स्थगित हो गयी है।

असंवैधानिक था रघुवर सरकार का फैसला 

हेमंत सोरेन ने कहा कि पिछली सरकार ने वह काम भी किया गया, संविधान जिसकी अनुमति नहीं देता था। हेमंत सोरेन ने कहा कि पिछली जेपीएससी में सी-सैट परीक्षा के एक मसले को लेकर उनसे भी गलती हुई थी, उन्होंने उस भूल को स्वीकार किया था और सुधार का आग्रह किया था। 

गैर आरक्षित जिलों के नाम पर यूपी, बिहार और बंगाल के युवाओं के लिए रास्ता खोला गया 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार में नियोजन नीति के नाम पर गैर आरक्षित जिलों में नियुक्ति के लिए उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार के युवाओं के लिए रास्ता खोल दिया गया, इससे राज्य में रहने वाले सामान्य वर्ग को काफी नुकसान उठाना पड़ा, इस बात की तकलीफ उन्हें भी है, अब सरकार मामले का आकलन करेगी और समीक्षोपरांत फैसला लेगी।

सांसदों के निलंबन पर भड़कीं ममता, कहा

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किसानों के हितों की रक्षा के लिए लड़ने वालों पर यह कार्रवाई ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है। ममता ने केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार के काम करने के तरीके पर भी निशाना साधा और काम करने के ‘अलोकतांत्रिक मानदंडों और सिद्धांतों’ का विरोध किया।

उन्होंने ट्वीट किया, “किसानों के हितों की रक्षा के लिए लड़ने वाले आठ सांसदों का निलंबन दुर्भाग्यपूर्ण है और यह इस निरंकुश सरकार की मानसिकता को दर्शाता है जो लोकतांत्रिक मानदंडों और सिद्धांतों का सम्मान नहीं करती है।”

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन सहित आठ विपक्षी सदस्यों को रविवार को विवादास्पद कृषि विधेयकों के पारित होने के दौरान उच्च सदन में हंगामा करने को लेकर सोमवार सुबह सत्र के बाकी बचे दिनों के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया।

सदन ने तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ’ ब्रायन और डोला सेन, कांग्रेस के राजीव सातव, रिपुन बोरा, नासिर हुसैन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और के.के. रागेश और माकपा के ई. करीम को निलंबित कर दिया गया।

तृणमूल सुप्रीमो ने भाजपा पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाते हुए अपने ट्वीट में कहा, “हम नहीं झुकेंगे और हम संसद में और सड़कों पर इस फासिस्ट सरकार से लड़ेंगे।”

सपा काल में उप्र के प्राधिकरणों पर गुंडों का रहता था कब्जा : स्वतंत्रदेव

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कानपुर । भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्राधिकरणों में गुंडे, बदमाशों का कब्जा रहता था। उन्होंने सपा को वंशवाद की पार्टी बताया। स्वतंत्र देव सोमवार को कानपुर में कैबिनेट मंत्री सतीश महाना की बहू कमलरानी वरुण के निधन पर सांत्वना व्यक्त करने आए थे। उन्होंने कहा कि सपा जब तक सत्ता में रही, लूटमारी, अवैध कब्जे, भ्रष्टाचार होता रहा। सपा के शासन में प्राधिकरणों में गुंडे, बदमाशों का कब्जा रहता था। सपा के शासन में सपा समर्थक किसी को पीट देते थे तो रिपार्ट दर्ज नहीं होती थी। कन्नौज तक में रिपोर्ट नहीं लिखी जाती थी। योगी सरकार ने भ्रष्टाचारियों और गुंडों पर लगाम लगा रखी है, यही वजह है कि विपक्षी परेशान होकर बकवास कर रहे हैं।

किसानों के लिए सदन में पारित हुए बिल को लेकर उठे बवाल पर उन्होंने कहा कि इस बिल के माध्यम से किसान अपने उत्पाद को मनचाहे तरीके से बिना बिचौलियों के बेच सकेंगे। इसमें लोगों की दलाली खत्म हो जाएगी, इसीलिए विरोध हो रहा है।

उन्होंने कहा कि घाटमपुर समेत प्रदेश की सभी आठ विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा व केशव प्रसाद मौर्य दौरा करेंगे।

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि उपचुनाव के लिए संगठनात्मक रचना बना दी गई है। सभी आठों विधानसभा सीटों के लिए प्रदेश के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री भी इन विधानसभा क्षेत्रों में प्रवास करेंगे। घाटमपुर समेत सभी जगह पर टीम बना दी गई है जो अब से लेकर चुनाव तक सबकुछ देखेगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय कमेटी का भी जल्द गठन किया जाएगा।

कानपुर में सुनील यादव व संजीत यादव हत्याकांड के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, क्षेत्रीय अध्यक्ष से जानकारी लेंगे।

ले लोटा…..आप तो कमाल हैं दास जी!

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मेरे एक पुराने मित्र हैं. खांटी संघी. देश के विभिन्न प्रांतों में वर्षों संघ प्रचारक रहे.छात्र जीवन से अव्वल श्रेणी के संगठनकर्ता.
फिलहाल बतौर स्वतंत्र पत्रकार देश विदेश के विभिन्न मीडिया संस्थानों में लिख रहे हैं और झारखंड-बिहार में राष्ट्रवादी संगठनों के सृजन और सृजित संगठनों के दिशा निर्देशन में लगे हैं.

खांटी संघी होने के बावजूद सभी विचारधारा के दलों व जमातों के बीच उनकी स्वीकार्यता के मद्देनजर मैं उन्हें ‘छद्म कामरेड’ संबोधित करता हूँ. मेरे प्रति असीम अनुराग के कारण मेरे व्यंग्यात्मक संबोधन पर वो कभी प्रतिकार नही करते .

किसी भी मुद्दे पर साहित्यिक व वैदिक उद्धरणों में माहिर मेरे उपरोक्त विलक्षण मित्र के साथ पिछले दिनों रांची शहर से बाहर जा रहा था. मोरहाबादी मैदान के पास आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों के बीच सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास पहुंचे हुये थे.

गहमागहमी देख मैंने अपनी गाड़ी रोक दी और दास जी का आंदोलनकारी सहायक पुलिसकर्मियों से संवाद देखने- सुनने लगा. रघुबर दास को संवेदना के साथ सहायक पुलिसकर्मियों से संवाद करता देख मुझे आश्चर्य हुआ!

सत्ता में रहने के दौरान रघुबर दास को बतौर मुख्यमंत्री रांची, गढ़वा, हजारीबाग, मुंबई और दिल्ली समेत कई शहरों में नजदीक से देख रखा था. अधिकारियों, उधोगपतियों, स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों व आम लोगों से बातचीत के दौरान दास जी भाषायी मर्यादा तो छोड़िये, मानवीय सहज संवेदनशीलता को भी तार- तार कर दिया करते थे.

मैंने अपने मित्र को संबोधित करते हुये कहा – ले लोटा, रघुबर दास में तो कमाल का बदलाव आ गया भाई जी.कुर्सी से उतरते ही मिज़ाज बदल जाता है क्या❓

मित्रवर ने अपने निराले काव्यउद्धरण अंदाज में कहा – मुन्ना बाबू (मेरा घरेलू नाम), राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने अपनी कालजयी रचना ‘ रश्मिरथी’ में बरसों पहले लिख डाला था …

“प्रण करना है सहज, कठिन है लेकिन उसे निभाना,
सबसे बड़ी जांच है व्रत का अंतिम मोल चुकाना।”
“अंतिम मूल्य न दिया अगर, तो और मूल्य देना क्या?
करने लगे मोह प्राणों का – तो फिर प्रण लेना क्या?”

मैंने कहा -भाई जी, सीधा बोलिये ना. आपका ये काव्य-वेद समझ में नहीं आता. वे बोले – इन आंदोलनरत युवक-युवतियों को दस हजारी नौकरी देकर सुनहरे भविष्य के ख्वाब किसने दिखाये थे?
मैंने कहा – रघुबर दास की सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों के युवक-युवतियों को बतौर सहायक पुलिसकर्मी बड़े ताम-झाम के साथ बहाल किया था भाई जी.

भाईजी बोले- सियासत का यही चेहरा होता है -छल-छद्म और वोट बैंक संयोजन. अब घड़ियाली आंसू बहाकर भी रघुबर दास और भाजपा को कुछ हासिल नहीं होने जा रहा. देख लीजियेगा आप, वर्तमान हेमंत सरकार इन सहायक पुलिसकर्मियों के आंदोलन से निबटने के साथ-साथ रघुबर दास की सियासी लाभोत्सुक संवेदना का भी तिया- पांच कर देगी.

मैंने कहा- ये मामला सुलगा और झारखंड मुक्ति मोर्चा में उपचुनाव व अन्य कारणों से असंतोष पनपा तो पुनः भाजपा सरकार की वापसी हो जायेगी.

वे बोले – जड़ विहीन ठूंठ में कोंपल की बात करते हैं आप.
मुन्ना बाबू, वर्तमान हालात को समझिये. पूरे झारखंड समेत संथाल परगना के दूर-देहात में भाजपा की जड़ें स्थापित कर उन्हें सींचने वाले संघ – संगठन के कार्यकर्ताओं को अपने राजकाल में तिरस्कृत करते रहे रघुबर दास जी की सक्रियता घावों को कुरेदने के अलावा कुछ नहीं करेगी.
एक तो बाबूलाल मरांडी की भाजपा में वापसी देर से हुई और वापसी के उपरांत भी संगठन में हासिये पर. रुटीन राजनीति से सत्ता संधान नहीं हो सकता. अब तक तो दुमका से बाबूलाल मरांडी की उम्मीदवारी घोषित हो जानी चाहिये थी. बेरमो से गठबंधन सहयोगी आजसू के अन्योन्याश्रित रणनीति का क्रियान्वयन भी जमीन पर दिखाई देना चाहिये था. किन्तु हो क्या रहा है भाजपा प्रदेश संगठन में? गुटबन्दी से सियासी ज़मीन उर्वर नहीं होती.

वे आगे बोलते रहे- हेमंत सोरेन के दुमका दौरे और अन्य गतिविधियों का क्रियान्वयन देखकर मुझे तो तय जान पड़ता है कि उपचुनाव में भी झामुमो गठबंधन बाजी मारेगा.

बात आई-गई और हमलोग अन्य विषयों पर वार्तालाप करते आगे बढ़ते रहे. शाम के वक़्त मैंने उन्हें व्हाट्सएप समाचार में जारी विडियो दिखाते हुये कहा- देखिये महाराज, पुलिस बनाम पुलिस हो गया. भारी पड़ेगा हेमंत सोरेन सरकार को सहायक पुलिसकर्मियों पर लाठीचार्ज.

निर्विकार भाव से उन्होंने कहा- प्रशासन ने कोविड प्रोटोकॉल उल्लंघन कर आंदोलन कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों को शासन के इकबाल का अहसास मात्र कराया है. आप निश्चिंत रहिये और देखियेगा सरकार संवाद से इस समस्या का समाधान सुनिश्चित कर लेगी.

उन्होंने कहा – मुन्ना बाबू रोजगार को लेकर लोग बीजेपी से नाराज़ हैं, झारखंड मुक्ति मोर्चा से नहीं. ज़मीनी मुद्दों को आप दरकिनार नहीं कर सकते. केन्द्रीय जनादेश इस मुद्दे पर भी लिया गया था कि सालाना 2 करोड़ युवाओं को नौकरी मिलेगी. उस वक्त केन्द्र में मोदी और झारखंड में रघुबर दास की सरकार थी.
प्रदेश भाजपा सोशल मीडिया व अन्य संचार माध्यमों पर हेमंत सोरेन सरकार को रोजगार के मुद्दे पर घेरकर अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मार रही है.

झामुमो गठबंधन के झारखंड में सत्ता में आये 8 महीने भर हुये हैं और बेरोजगारी कोरोनाकाल की देन भी नहीं है, ये पहले से है, जो आंकड़ों के मुताबिक पिछले छह साल में बढ़ी है.
नई नौकरियों का सृजन नहीं हो रहा और पुरानी नौकरियों का संरक्षण सरकार नहीं कर पा रही है.ये स्थिति सीधे तौर पर केन्द्र और झारखंड में सत्तारूढ़ रही रघुबर सरकार की नाकामी है.

बगैर किसी योजना के युवक-युवतियों को सहायक पुलिसकर्मी की नौकरी का झुनझुना रघुबर दास सरकार ने थमाया था. सहायक पुलिसकर्मियों के आंदोलन से यही उजागर हो गया कि रोजगार को लेकर भाजपा की रघुबर दास सरकार के पास कारगर विज़न नहीं था. युवाओं का विरोध इसी नाकामी के खिलाफ है न कि वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ.

हां, ये बात हेमंत सरकार को भी समझनी होगी कि युवाओं के लिये रोजगार सुनिश्चित किये बगैर लंबी पारी मुश्किल है.

राजनीति अपनी जगह है, लेकिन अनंत काल तक दोषारोपण के सहारे युवाओं को बिना नौकरी, बिना रोजगार उलझा नहीं सकते.

समस्याएं सामने हों तो आंखें बंद करने से न तो भाग सकती हैं, न उनका हल निकल सकता है, उनसे जूझना हेमंत सोरेन सरकार को ही होगा.

वर्तमान सरकार में लंबित नौकरियों को लेकर सुगबुगाहट हुई भी है, देखिए आगे क्या होता है.

इतना तय मान लीजिये की पुरानी सूप पीटकर सिर्फ दरिद्रता भगाई जाती है उसके बाद नये सूप से समृद्धि और विकास की नई कहानी लिखी जाती है…

कफील खान और योगी की लड़ाई पहुंची संयुक्त राष्ट्र

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लखनऊ । गोरखपुर के डॉ. कफील खान ने योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया है। खान को हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत लगे आरोपों के बाद जेल से रिहा किया गया है और अब वो जयपुर में रह रहे हैं। खान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यूएनएसआरसी) को एक पत्र लिखकर “भारत में अंतर्राष्ट्रीय मानव सुरक्षा मानकों के व्यापक उल्लंघन और असहमति की आवाज को दबाने के लिए एनएसए और यूएपीए जैसे सख्त कानूनों के दुरुपयोग किए जाने की बात कही है”।

अपने पत्र में खान ने संयुक्त राष्ट्र के इस निकाय को “शांतिपूर्ण तरीके से सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने” वाले कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किए जाने के बाद उनके मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए भारत सरकार से आग्रह करने के मसले पर धन्यवाद दिया और यह भी कहा कि सरकार ने “उनकी अपील नहीं सुनी”।

खान ने लिखा, “मानव अधिकार के रक्षकों के खिलाफ पुलिस शक्तियों का उपयोग करते हुए आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं। इससे भारत का गरीब और हाशिए पर रहने वाला समुदाय प्रभावित होगा।”

बता दें कि 26 जून को संयुक्त राष्ट्र के निकाय ने कफील खान और शर्जील इमाम समेत अन्य लोगों पर लगाए गए 11 मामलों का उल्लेख करते हुए भारत सरकार को लिखा था, “मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर आरोप, जिनमें से कई गिरफ्तारी के दौरान यातना और दुर्व्यवहार करने के हैं”।

जेल में बिताए दिनों के बारे में खान ने लिखा, “मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और कई दिनों तक भोजन-पानी से भी वंचित रखा गया और क्षमता से अधिक कैदियों वाली मथुरा जेल में 7 महीने की कैद के दौरान मुझसे अमानवीय व्यवहार किया गया। सौभाग्य से, हाई कोर्ट ने मुझ पर लगाए गए एनएसए और 3 एक्सटेंशन को खारिज कर दिया।”

झारखंड विधानसभा में लैंड म्यूटेशन बिल और सहायक पुलिस कर्मियों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर हंगामा

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उज्ज्वल दुनिया/रांची । झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को भाजपा के विधायकों ने सदन के बाहर और अंदर हंगामा किया। भाजपा विधायक सदन की कार्यवाही शुरू होते ही लैंड म्यूटेशन बिल, सहायक पुलिस कर्मियों पर लाठी चार्ज, भूखल घासी और उसके परिवार के दो अन्य सदस्यों की भूख से मौत आदि मुद्दा उठाकर वेल में पहुंच गए और सरकार से जवाब की मांग को लेकर हंगामा करने लगे।

सीएम हेमंत सोरेन के बयान के बाद भी संतुष्ट नहीं हुआ विपक्ष 

 मुख्यमंत्री और संसदीय कार्यमंत्री के जवाब से भी विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। विपक्ष के विधायक लैंड म्यूटेशन बिल निरस्त करने और संसदीय कार्यमंत्री के इस्तीफे की भी मांग कर रहे थे। प्रश्नकाल शुरू होने से पहले विपक्ष के हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने भाजपा विधायक के उपरोक्त मांगों से जुड़े तीन कार्य स्थगन प्रस्तावों को पढ़ा, लेकिन इसे अमान्य  करते हुए प्रश्नकाल को अधिक जरूरी बताया और बंधु तिर्की को अपना प्रश्न रखने को कहा। लेकन भाजपा विधायक वेल में आ गए और हंगामा करने लगे। स्पीकर ने उन्हें चेताया कि कोरोना काल में आयोजित इस सत्र में सामाजिक दूरी का अनुपालन जरूरी है। एक जगह एकत्रित होने से समस्या उत्पन्न होगी। 

दूसरी ओर विपक्ष की तरफ से सरकार पर जुबानी हमला जारी रहा। भाजपा विधायक अनंत ओझा, अमर बाउरी, भानु प्रताप शाही, विरंची नारायण, रणधीर सिंह एवं अन्य सरकार पर सहायक पुलिस कर्मियों पर लाठी चलाने के कारण लाठी-डंडों की सरकार, दलित विरोधी सरकार कह कर हंगामा करने लगे। उनसे स्पीकर ने दूसरी पाली में अपने वक्तव्य के दौरान बातें रखने के लिए कहा, लेकिन विपक्ष हमलावार बना रहा। इसके बाद स्पीकर के कहने पर विपक्ष वेल से लौटा। भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि लैंड म्यूटेशन बिल, सहायक पुलिस कर्मियों की मांगों और भूखल घासी के मामले में सरकार अपना रुख स्पष्ट करे। 

गलतियों के कारण लैंड म्यूटेशन बिल नहीं हुआ पेश : संसदीय कार्यमंत्री

संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि कैबिनेट से स्वीकृत होने के बाद मालूम हुआ कि लैंड म्यूटेशन बिल में गलतियां हैं। इस कारण खुद मुख्यमंत्री के साथ अन्य सभी मंत्री एकमत हुए और बिल विधानसभा में पेश नहीं किया गया। जो बिल पेश ही नहीं हुआ है उस पर सरकार को सफाई देने की जरूरत क्या है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में भी सीएनटी-एसपीटी, भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन की बात हुई थी। 

सरकार चाहे तो नियमावली बदल दे, रोका किसने है ?

उन्होंने सहायक पुलिस कर्मियों के मुद्दे पर कहा कि इनकी बहाली पिछली सरकार ने नियमावली तय करके की थी। हमारी सरकार इनकी जायज मांगों को पूरा करने के लिए तैयार है। बीते शुक्रवार को होने जा रही वार्ता से पहले पुलिस बल को लाठी चार्ज करना पड़ा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात कहने का हक सभी को है, लेकिन मोरहाबादी में पत्थरबाजी हुई। इसके बाद पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा। सरकार आने वाले दिनों में सहायक पुलिस कर्मियों के विषय में अपनी बातें पूरी करके दिखाएगी। 

विपक्ष का अंदेशा, सरकार अध्यादेश ला सकती है

उनकी बातें पूरी होते ही विपक्ष ने एक बार फिर हंगामा तेज कर दिया और वेल में पहुंच गए। भाजपा ने कैबिनेट में पास हुए बिल को गलत बताये जाने को मुद्दा बनाया और कैबिनेट से स्वीकृत बिल को निरस्त करने की मांग करने लगे। आशंका जताते हुए कहा कि सरकार बिल को अध्यादेश के रूप में लागू कर सकती है। इसके बाद विपक्ष संसदीय कार्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करने लगा।  इस बीच 11:34 बजे मुख्यमंत्री विधानसभा पहुंचे और उन्होंने सहायक पुलिस कर्मियों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्पीकर से अपनी बात कहने की इजाजत मांगी।

केंद्र सरकार ने रबी फसलों की नई एमएसपी को दी मंजूरी, एमएसपी में 50 रू. से 300 रू. प्रति क्विंटल तक की वृद्धि

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उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली, 22 सितम्बर (हि.स.)। केंद्र सरकार ने वर्ष 2020-21 के लिए रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने का निर्णय लिया है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने रबी फसलों की एमएसपी बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने लोकसभा में इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सीसीईए की बैठक में लिए गए निर्णय  के फलस्वरूप आगामी रबी-सीजन हेतु गेहूं की एमएसपी में 50 रू. प्रति क्विंटल की वृद्धि के बाद एमएसपी अब 1975 रू. प्रति क्विंटल हो गई है। चने की एमएसपी में 225 रू. प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिसके बाद इसकी एमएसपी 5100 रू. प्रति क्विंटल हो गई है।

मसूर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 300 रू. प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है, इस वृद्धि के उपरांत एमएसपी 5100 रू. प्रति क्विंटल हो गई है। इसी तरह, सरसों की एमएसपी में 225 रू. प्रति क्विंटल की वृद्धि उपरांत 4650 रू. प्रति क्विंटल एमएसपी हो गई है। जौ की एमएसपी में 75 रू. की वृद्धि के बाद 1600 रू. प्रति क्विंटल की एमएसपी रहेगी। इसी प्रकार, कुसुम का न्यूनतम समर्थन मूल्य 112 रू. प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है और इस वृद्धि के बाद नई एमएसपी 5327 रू. प्रति क्विंटल की हो गई है।

एनजीओ के लिए विदेशी धन लेना नहीं होगा आसान, खाते को आधार कार्ड से जोड़ना हुआ अनिवार्य

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उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली, 22 सितम्बर (हि.स.)। लोकसभा ने सोमवार को विदेशी अंशदान अधिनियम से जुड़े संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। इसके अंतर्गत गैरसरकारी संगठन (एनजीओ) के पदाधिकारियों को अब अपना आधार नम्बर देना अनिवार्य होगा। 

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2020 पर चर्चा के उत्तर देते हुए केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि धार्मिक संगठनों पहले की ही तरह विदेशी अंशदान प्राप्त कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इसे नई आधार की व्यवस्था को जोड़ा गया है। 
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि विदेश से प्राप्त होने वाले धन का इस्तेमाल उसी मद में होना चाहिए जिसके लिए उसे लिया गया। सरकार बस इतना चाहती है कि विदेशी धन का किसी भी रूप में प्राप्त धन का दुरुपयोग न हो। 

विधेयक के प्रावधानों के तहत किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर केंद्र सरकार को किसी एनजीओ या संस्था को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) सर्टिफिकेट सरेंडर करने की अनुमति देने का अधिकार होगा। विधेयक में प्रस्ताव दिया गया है कि कुल विदेशी फंड का केवल 20 फीसदी ही प्रशासनिक खर्चों में इस्तेमाल हो सकता है। अब तक यह सीमा 50 फीसदी थी।

झारखंड विधानसभा में किसान बिल की गूंज, विपक्ष ने बताया किसानों के लिए वरदान

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उज्ज्वल दुनिया/रांची । संसद में किसान बिल का पास होना और इस दौरान विपक्ष के हो हंगामे पर झारखंड में अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आई है । विधायक सरयू राय ने कहा कि लोकसभा में कृषि बिल विधेयक पेश होने के दौरान उपसभापति के साथ दुर्व्यवहार किर विधयेक की प्रति को फाड़ना और माईक तोड़ना कही से भी सही नही है। यह देश के लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। यह विरोध का तरीका नही है। विपक्ष के पास और भी तरीके है। उन्हें जनता के बीच जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह परंपरा सही नही इसको ठीक करने की जरूरत है। 

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने लोक सभा की घटना पर सत्ता पक्ष को जिम्मेदार बताया हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष की भूमिका लोकतंत्र में अहम होती है और लोक सभा की घटना में सत्तापक्ष ही जिम्मेदार है। सत्ता पक्ष ने लोकतंत्र का चीर हरण करने का काम किया है।

पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव में किसान बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह बिल किसानों के अधिकार के हनन के लिए लाया गया है। इस बिल के आने के बाद कॉरपोरेट घराने किसानों को मजदूर बना कर रखेंगे। खेती पर ऐसे घराने के ही राज होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही रेल का निजीकरण कर दिया है अब खेती को भी निजीकरण कर रही है। इस बिल के विरोध विरोध में आंदोलन भी किया जाएगा। बिल पूरे तरह से देश विरोधी किसान विरोधी और झारखंड विरोधी है।

सिल्ली विधायक सुदेश महतो ने किसान बिल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बिल किसानों के हित मे तैयार किया गया है। किसान अब किसी भी राज्य में जा कर अपना फसल बेच सकते है। वही अब किसान ही मूल्य और लागत के हिसाब से अपने फसल का मूल्य तय कर सकेंगे। वहीं उन्होंने कहा कि किसानों के फसल को सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। तभी यह बिल किसानों के लिए हितकारी होगा। उन्होंने कहा कि किसान देश और एक बड़ी आबादी का आर्थिक आधार हैं। 

भाजपा विधायक दल के नेता बाबुलाल मरांडी ने किसान बिल पर कहा कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पहले भी होती रही है। लेकिन अब इसे बिल में शामिल किया गया है। बिल पास होने के बाद कंपनी सीधे तौर पर किसानों से संपर्क कर अपने हिसाब से फसल तैयार करवा सकेंगे और उसका मूल्य भी पहले से किसानों द्वारा तय किया जाएगा।  विपक्ष के रवैये पर उन्होंने कहा कि चुकी विपक्ष ने यह बिल नही लाया था इस कारण वे इस बिल को लेकर देश मे भ्रम फैला रहे है, अफवाह उड़ा रहे है बिल का विरोध भी कर रहे है।  उन्होंने कहा कि यह बिल किसानों के लिए ऐतिहासिक बिल है और विपक्ष को भी इसका स्वागत करना चाहिए।

राज्यसभा के आठ सांसद 7 दिनों के लिए निलंबित

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उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली । राज्यसभा में रविवार 20 सितंबर को कृषि बिलों के खिलाफ विपक्ष में जमकर हंगामा किया था। इस बात से खफा राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने हंगामा करने वाले 8 सांसदों को सोमवार 21 सितंबर को 1 सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया है। इनमें कांग्रेस के 3 सांसद हैं, तृणमूल कांग्रेस के 2, सीपीआई (एम) के 2 और आम आदमी पार्टी के एक सांसद शामिल हैं। इधर सभापति के फैसले के खिलाफ फिर आज राज्यसभा में जमकर बवाल हुआ। विपक्षी सांसदों के निलंबन के खिलाफ लगातार विरोध के कारण राज्यसभा सुबह लगभग 10:36 तक के लिए स्थगित कर दी गई।

निलंबित होने वाले सांसदों में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन, कांग्रेस के राजू साटव, सैयद नासिर हुसैन और रिपुण बोरा, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, सीपीआई-एम के के के रागेश और एलमाराम करीम शामिल हैं।

दूसरी ओर राज्‍यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने स्पष्ट कर दिया है कि डिप्‍टी चेयरमैन के खिलाफ विपक्षी सांसदों की तरफ से लाया गया अविश्‍वास प्रस्‍ताव नियम के मुताबिक गलत है।राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा है, मैं डेरेक ओ’ब्रायन का नाम लेता हूं कि सदन से बाहर जाएं। अगर कल मार्शल्स को सही समय पर नहीं बुलाया जाता तो उपाध्यक्ष के साथ क्या होता ये सोचकर मैं परेशान हूं।

उप सभापति हरिवंश ने कहा, मेरा आग्रह है कि माननीय सदस्य जो 256 के तहत नामित किए गए हैं वो सदन की कार्यवाही में न रहें। वहीं राज्यसभा सांसद वी. मुरलीधरन ने कहा है कि निलंबित सदस्यों को सदन में रहने का कोई अधिकार नहीं है। सदन गैर-सदस्यों की उपस्थिति के साथ काम नहीं कर सकता।

बता दें कि राज्यसभा में रविवार 20 सितंबर को विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया था। जब सरकार ने कृषि विधेयकों को पारित कराना चाहा, तो कई विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी की। इसके बाद चेयर के पास पहुंचकर दस्‍तावेज फाड़े। हंगामा इतना बढ़ गया कि उपसभापति हरिवंश को मार्शल को बुलाना पड़ा।

2016 की नियोजन नीति को हाईकोर्ट ने बताया असंवैधानिक, 18 हजार शिक्षकों का भविष्य अधर में

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उज्ज्वल दुनिया/ रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के नियोजन नीति जिसमें 13 जिले को आरक्षित और 11 जिले को गैर आरक्षित रखा गया था उसे चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुनाया है।
न्यायाधीश हरीश चंद्र मिश्रा, न्यायाधीश एस चंद्रशेखर, न्यायाधीश दीपक रोशन की पीठ ने यह फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार के 18000 शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के लिए निकाले गए विज्ञापन को खारिज कर दिया है। पूर्ण पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया को संविधान के अनुरूप नहीं मानते हुए खारिज कर दिया है।
बता दें कि सोनी कुमारी ने सरकार की नियोजन नीति में 13 जिले को आरक्षित किए जाने को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। पूर्व में एकल पीठ ने मामले को डबल बेंच में भेजा था और डबल बेंच ने मामले को पूर्ण पीठ में स्थानांतरित किया था। पीठ ने सुनवाई कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। वर्ष 2016 में 18584 शिक्षक की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था। उसी को चुनौती दी गई थी।

आज तय होगी बहुचर्चित गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव हत्याकांड के दोषियों की सजा

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11 सितम्बर को एडीजे-6 ने  पांच को दिया था दोषी करार, साक्ष्य के अभाव में एक हुआ था बरी

गैंगस्टर विकास तिवारी समेत पांच को सुनाई जाएगी सजा

अजय निराला / उज्ज्वल दुनिया संवाददाता/हजारीबाग। बहुचर्चित गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव सहित तीन लोगों के हत्याकांड के दोषियों की सजा 22 सितंबर को कोर्ट से तय की जाएगी। 2 जून 2015 को हज़ारीबाग़ कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े पेशी के लिए आए सुशील श्रीवास्तव, सहयोगी कमाल खान और ग्यास खान की हत्या भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एके 47 से कर दी गई थी। घटना को अंजाम प्रतिद्वंदी गैंगस्टर पांडेय गिरोह द्वारा दिया गया था। घटना के मुख्य अभियुक्त विकास तिवारी, संतोष पांडेय, शम्भु नाथ तिवारी, राहुल देव पांडेय, दिलीप साव, विकास साव, विशाल सिंह, प्रदीप पासवान व यूपी के मुख्य शूटर राज सिंह सहित अन्य को बनाया गया था। 
स्पीड ट्रायल में मामले की सुनवाई एडीजे अमित शेखर की अदालत में चली । 42 गवाहों के बयान दर्ज होने और लंबी बहस  के बाद 11 सितम्बर को एडीजे-6 की अदालत ने विकास तिवारी, संतोष पांडेय, राहुल देव पांडेय, दिलीप साव और विशाल सिंह को दोषी करार देते हुए शम्भूनाथ तिवारी को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया था । 22 सितंबर को सजा की तारीख तय की गई थी। मंगलवार को दोषी पाए गए सभी आरोपियों को सजा सुनाई जाएगी।

विकास तिवारी ने बदला लेने की खाई थी कसम, ली थी घटना की जिम्मेवारी

कोयलांचल में पांडेय गिरोह और श्रीवास्तव गिरोह में वर्चस्व को लेकर वर्षों से खूनी टकराव होता रहा है। इस टकराव में दोनों तरफ से दर्जनों हत्या की जा चुकी है, जो अब भी जारी है। 13 दिसम्बर 2014 को पांडेय गिरोह के सरगना किशोर पांडेय की जमशेदपुर में कर दी गई थी । किशोर पांडेय के अंतिम संस्कार में एके 47 से हवाई फायरिंग कर विकास तिवारी ने छह महीने में बदला लेने की कसम खाई थी। छह महीने के ठीक पहले 2 जून को हज़ारीबाग़ कोर्ट परिसर में सुशील श्रीवास्तव सहित तीन लोगों की हत्या के बाद कोर्ट परिसर में ही पर्चा छोड़कर प्रिंटेड पोस्टर में किशोर पांडेय की हत्या का बदला लिखित पोस्टर छोड़कर विकास तिवारी द्वारा घटना की जिम्मेवारी ली गई थी। दो महीने बाद अगस्त में विकास तिवारी को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। तब से वह जेल में ही है। वर्तमान में वह मेदिनीनगर कारा में बंद है।  कांड के अन्य आरोपी संतोष पांडेय और राहुल पांडेय हजारीबाग कारा में बंद हैं। विशाल सिंह और दिलीप साव जमानत पर थे जिन्हें हिरासत में लेकर हज़ारीबाग़ जेल में रखा गया है। 

गैंगस्टरों की हत्या से लेकर फैसले तक साक्षी रहे एसपी कार्तिक एस

पांडेय गिरोह के सरगना किशोर पांडेय और श्रीवास्तव गिरोह के सरगना सुशील श्रीवास्तव की हत्या से लेकर फैसले तक हज़ारीबाग़ एसपी कार्तिक एस साक्षी रहे हैं। यह संयोग ही है कि 14 दिसम्बर को जमशेदपुर में जब पांडेय गिरोह के सरगना किशोर पांडेय की हत्या हुई थी तब कार्तिक एस जमशेदपुर के सिटी एसपी थे। 2 जून 2015 हज़ारीबाग़ कोर्ट परिसर में जब श्रीवास्तव गिरोह के सरगना सुशील श्रीवास्तव की हत्या हुई थी तब एसपी कार्तिक एस बोकारो के एसपी थे और बड़कागांव के एक मामले में हज़ारीबाग़ कोर्ट में गवाही देने आए थे । हालांकि घटना के कारण उनकी गवाही नही हो सकी थी। अब जब सुशील श्रीवास्तव हत्याकांड का फैसला आ रहा है तब स्वयं कोर्ट परिसर की सुरक्षा की जिम्मेवारी उनमें हाथ मे है। हत्याकांड के दोषियों को 11 सितम्बर को दोषी सिद्ध किए जाने के दिन एसपी कार्तिक एस स्वयं कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा बलों के साथ सुरक्षा का जायजा ले रहे थे।

रक्षा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर होगा भारत, एमएसएमई होंगे बड़े प्लेयर : पोद्दार

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राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न पर सरकार ने दी जानकारी 

उज्ज्वल दुनिया /रांची : हिन्दुस्तान जल्दी ही रक्षा उपकरणों के निर्माण में न सिर्फ आत्मनिर्भर होगा बल्कि जल्दी ही दुनिया का बड़ा निर्यातक देश बनेगा| ख़ास बात यह है कि रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण में छोटे व मध्यम उद्यम को भी पर्याप्त मौके मिल रहे हैं| इससे देश की सामरिक ताकत बढ़ेगी, अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी, रोजगार के मौके बढ़ेंगे और एमएसएमई सेक्टर का विकास होगा| राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के एक अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए रक्षा राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक ने यह जानकारी दी|

मंत्री श्री नाईक ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में ‘मेक-इन इंडिया’ को प्रोत्साहित करने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अन्तर्गत रक्षा मंत्रालय ने 101 मदों की सूची तैयार की है, जिनके आयात पर एक तय समयसीमा में प्रतिबन्ध लगा दिया जायेगा| इस सूची में तोपखाना, बंदूकें, असाल्ट राइफल,लड़ाकू जलपोत, सोनार प्रणाली,परिवहन विमान,हल्के युद्धक हेलीकाप्टर (एलसीएच), रडार आदि शामिल हैं| 

रक्षा उद्योग क्षेत्र, जो अब तक केवल सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित था, को 26 प्रतिशत तक के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के साथ भारतीय निजी क्षेत्र की शतप्रतिशत भागीदारी हेतु खोल दिया गया है| इसके अलावा, सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में विभिन्न रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए 44 एफडीआई/संयुक्त उपक्रम स्वीकृत किये गये हैं।

प्रतिवर्ष विकास लागत 3 करोड़ रुपये और खरीद लागत 50 करोड़ रुपये से कम के मेक-॥ परियोजनाओं को एमएसएमई के लिए आरक्षित किया गया है। एमएसएमई को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में लाने और उसके जरिये रक्षा उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही रक्षा निर्यात बाजार में योगदान के लिए एमएसएमई को बढ़ावा देने की योजना के तहत उद्योग संघों को देश के विभिन्न हिस्सों में सेमिनार आयोजित करने के लिए धन दिया जाता है। 

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के साथ विपक्ष का व्यवहार लोकतंत्र का अपमान

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उज्ज्वल दुनिया /रांची । भाजपा विधायक दल के नेता बाबू लाल मरांडी ने राज्य सभा मे उपसभापति हरिवंश सिंह के साथ घटी घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह घटना इस बात को दर्शाता है कि हमारा लोकतंत्र कहाँ जा रहा है। ऐसी घटना इसलिए होती है क्यों कि विपक्ष के पास पर्याप्त आंकड़े नही है। लोकसभा की घटना लोकतंत्र को कलंकित करने वाली घटना है। 

पुलिस गेस्टहाउस में नाबालिग के साथ दुष्कर्म की हो न्यायायिक जांच 

वहीं पुलिस गेस्ट हाउस में नाबालिग के साथ हुए गैंग रेप मामले में उन्होंने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले पर न्यायिक जांच करवानी चाहिए और आरोपियों को अविलंब निलंबित कर उन्हें कठोर से कठोर दंड देने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब रक्षक ही ऐसे कुकृत्य करने लगेंगे तो जनता कहाँ जाएगी। इसलिए सरकर को कठोर होने की जरूरत है। 

लालू यादव के मामले में हो जेल मैनुअल का पालन

लालू यादव को लेकर उन्होंने कहा कि यह सरकार और लालू यादव दोनों के लिए जरूरी है कि वे जेल मैनुअल का सख्ती से पालन करें। उन्होंने कहा कि यह सरकार नियमो को ताक पर रख दी है। मीडिया के माध्यम से उन्होंने लालू यादव से भी आग्रह किया कि एक जन नेता होने के नाते वो भी जेल मैन्युअल का पालन करें। यह सभी के हित मे होगा।

अपराधियों का स्लोगन बना हेमंत है तो हिम्मत है: सुबोध सिंह गुड्डू

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पुलिसकर्मी पर दुष्कर्म का आरोप व कांग्रेस, झामुमो की गाड़ी से ढोई जा रही है शराब

उज्ज्वल दुनिया /रांची । झारखंड में बढ़ते अपराध और गिरते प्रशासन व्यावस्था के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री सुबोध सिंह गुड्डू ने कहा कि राज्य में जिन हांथो को शासन, प्रशासन चलना था वे खुद अपराध में संलिप्त हो रहे हैं। अपराध पर नकेल कशने हेतु व कार्रवाई किये जाने को लेकर राज्यपाल महोदया को डीजीपी को तलब करना पड़ रहा है। राजधानी रांची पुलिस के एक कर्मी पर दुष्कर्म का आरोप लगने के बाद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं किया जाना पूरे पुलिसिया सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। शराब ढोए जाने में कांग्रेस, झामुमो बैनर युक्त गाड़ियों का प्रयोग किया जाना दुर्भाग्यजनक है।             

लाइन टैंक रोड स्थित पुलिस के गेस्ट हाउस में लॉकडाउन के दौरान पुलिस परिवार से जुड़ी एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया। दुष्कर्म करनेवाला एक जमादार स्तर का पदाधिकारी है, तो दूसरा आरक्षी का बेटा। किन्तु एफआईआर में पुलिसकर्मी को आरोपी नहीं बनाया जाना सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। वहीं राजधानी में शराब की तस्करी में कांग्रेस के बैनर युक्त एक फॉर्च्यूनर गाड़ी पकड़ी जाती है जिसमें शराब, तीन राइफल और नकद पैसे पकड़ा जाना सवालिया निशान खड़ा करता है। वहीं एक अन्य झामुमो के बैनरयुक्त स्कॉर्पियो का पकड़ा जाना जिसमें 11 पेटी शराब पकड़ा गया।