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सात महीने में 1000 से ज़्यादा रेप के मामले, राज्य सरकार न्यायिक जाँच करवाए

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उज्ज्वल दुनिया /रांची ।  अपने अन्य चुनावी वादों के जैसे राज्य की महागंठबंधन सरकार महिला सुरक्षा पर भी विफल होती दिख रही है। झारखंड पुलिस के आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के मुताबित जनवरी से लेकर जुलाई तक 1033 रेप के मामले दर्ज हुए है जिसमें सिर्फ राजधानी राँची में 128 मामले दर्ज हुए हैं और रांची राज्य का रेप कैपिटल बनता हुआ देख रहा है।  ये बाातें भाजपा प्रवक्ता कुणाल षडंगी ने कही ।  उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण लगे हुए लॉकडाउन के समय पूरे राज्य में सार्वजनिक आवागमन व्यवस्था पर रोक थी और लोगों को ज़्यादा सा ज़्यादा घर पर ही रहने का निर्देश था लेकिन उसके वाबजूद बलात्कार की संख्या में बेतहाशा बृद्धि राज्य की ध्वस्त होती बिधि ब्यवस्था की और इंगित करती है।

चुनावी घोषणा पत्र में महिलाओं के अधिकार और सशक्तिकरण के नाम पर कई वादे किए गए थे 

3 लाख के आवादी पर एक महिला थाना बनने की वादा किया गया था।पुलिस वालों में महिलाओं को 33% प्रतिनिधित्व करने की बात की गई थी। घोषणा की गई थी कि महिलाओं के खिलाफ के अपराधों के मामले को तेजी से निपटारे के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जायंगे। मुख्य सहयोगी दल कांग्रेस ने घोषणा की थी कि यौन हिंसा या दुर्व्यवहार के शिकार महिलाओं को पुनर्वास किया जाएगा। संकट में फंसी महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन स्थापित की जाएगी। राज्य सरकार यह सार्वजनिक करें कि इन वादों में से कितने वादे धरातल पर उतरे है ??  

भारतीय जनता पार्टी माननीय मुख्यमंत्री से अबिलम्ब इस विषय की न्यायिक जाँच करवाकर उचित करवाई  करने की मांग करती है।

विस्थापितो की मांगें नहीं मानी गई तो हिला देंगे सरकार

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कई कंपनियां बंद हुईं,  एक और एनटीपीसी बंद हो जाएगा तो क्या फर्क पड़ता है

एनटीपीसी के खिलाफ बड़कागांव में आधा दर्जन कांग्रेसी विधायकों का हुआ जुटान

करीब दो माह से बड़कागांव में चल रहा विस्थापितों का आंदोलन, सियासी पारा गर्म

अजय निराला / उज्जवल दुनिया संवाददाता /हजारीबाग। बड़कागांव में एनटीपीसी के खिलाफ रैयत विस्थापितों का आंदोलन आब परवान चढ़ गया है। साथ ही सियासी पारा भी गर्म हो गया है। राज्य सरकार को समर्थन दे रहे एक बड़े राजनीतिक दल कांग्रेस ने सीधे राज्य सरकार को ही निशाने पर ले लिया है। बड़कागांव में एनटीपीसी के खिलाफ  विस्थापित रैयतों के चल रहे आंदोलन को हवा देने के लिए बुधवार को बड़कागांव में कांग्रेस के छह विधायकों का जुटान हुआ। 
इसमें जामताड़ा के विधायक डॉक्टर इरफान अंसारी, बरही विधायक अकेला यादव, रामगढ़ विधायक ममता कुमारी, विधायक अंबा प्रसाद, सिमडेगा विधायक भूषण वाड़ा और कोलेबिरा विधायक नीलसन पोगाड़ी शामिल हुए। 

इसमें डॉक्टर इरफान अंसारी ने हेमंत सरकार को  स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि अगर विस्थापित रैयतों की मांगी नहीं सुनेगी, तो कांग्रेस सरकार से हाथ खींच लेगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री की होगी। 

इस मामले में जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें साफ कहा जा की बीजेपी की सरकार जब थी उस वक्त रैयतों के साथ इंसाफ नहीं किया गया। अगर हमारी सरकार में ऐसा हुआ तो हम सरकार हिला देंगे। 

हालांकि इस संबंध में पूछे जाने पर जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी ने कहा कि यह आरोप विपक्ष और एनटीपीसी अधिकारियों की चाल है। हमने ऐसा कुछ नहीं कहा है। राज्य में हमारी सरकार है। बरही विधायक उमाशंकर अकेला ने भी इस वीडियो के बारे में कहा कि सरकार गिराने के बारे में ऐसा कुछ नहीं कहा गया है।

झारखंड आरजेडी में घमासान

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प्रदेश महासचिव ने प्रदेश अध्यक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदेश अध्यक्ष अभय सिंह को तुरंत बर्खास्त करें

उज्ज्वल दुनिया/सरायकेला: झारखंड आरजेडी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पार्टी में गुटबाजी चरम पर है. वहीं प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह के विरुद्ध आरजेडी के प्रदेश महासचिव अर्जुन यादव ने मोर्चा खोल दिया है.

राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव सह कोल्हान प्रमंडल के प्रभारी अर्जुन यादव ने प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद से पदमुक्त किए जाने की मांग उठाई है. उन्होंने अभय सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश अध्यक्ष ने निजी लाभ के चलते पार्टी में मनचाहे लोगों को पद दिया है. ऐसे में कई कर्मठ, जूझारू कार्यकर्ता जो वर्षों से लालू प्रसाद यादव से प्रभावित होकर आरजेडी में सक्रिय राजनीति कर रहे हैं, वह अब उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने संजय सिंह को सरायकेला-खरसावां का जिला अध्यक्ष मनोनीत किया है, जबकि संजय सिंह पर कई गंभीर मामले दर्ज हैं.

कोल्हान के प्रभारी और प्रदेश महासचिव अर्जुन यादव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में झारखंड राज्य में मचे अंदरूनी खींचतान का असर देखने को मिल सकता है. लिहाजा आलाकमान को अविलंब अभय कुमार सिंह को प्रदेश अध्यक्ष से बर्खास्त किया जाना चाहिए और वरीय कर्मठ, जागरूक पार्टी पदाधिकारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहिए. प्रदेश महासचिव अर्जुन यादव ने इस संबंध में पार्टी सुप्रीमो को एक पत्र लिखा है इसके साथ ही नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर झारखंड के चार वरीय पार्टी पदाधिकारियों के नाम भी प्रस्तावित किए गए हैं.

ममता ने कहा

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कोलकाता । उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म व हत्या की घटना की बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कड़ी निंदा करते हुए भाजपा व योगी सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘दलित लड़की से बर्बरता और शर्मनाक घटना की निंदा करने के लिए उनके पास कोई शब्द नहीं हैं।

पीड़ित परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। इससे भी अधिक शर्मनाक बात यह है कि परिवार की अनुपस्थिति में और उनकी सहमति के बगैर बलपूर्वक लड़की के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। यह उन लोगों के चेहरे को उजागर करता है जो वोट के लिए सिर्फ बड़े-बड़े नारे लगाते हैं और बुलंद वादे का उपयोग करते हैं।’

नहीं संभल रहा यूपी, मठ में वापस जाएं

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लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती प्रदेश की योगी सरकार (पर बड़ा हमला बोला. हाथरस और बलरामपुर की घटना को दुखद बताते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यूपी नहीं संभल रहा है. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सीएम योगी आदित्यनाथ को हटाकर किसी अन्य को मुख्यमंत्री बनाया जाए. मायावती यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस के दबाव में बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री तो बना दिया, लेकिन अब उनसे प्रदेश नहीं संभल रहा है. प्रदेश में गुंडों और बलात्कारियों का राज है. आज बहन बेतोयां सुरक्षित नहीं हैं. केंद्र सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे और योगी आदित्यनाथ को वापस मठ में भेजे.

लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए मायावती ने कहा कि हाथरस की घटना के बाद बलरामपुर में भी ऐसी ही घटना दोहराई गई. बलरामपुर में भी एक दलित छात्रा के साथ गैंगरेप हुआ और फिर उसकी मौत भी हो गई. मायावती ने कहा कि हाथरस की घटना के बाद मुझे ऐसा लग रहा था कि शायद यूपी सरकार कुछ हरकत में आएगी. यूपी के मनचले लोग जो बहन-बेटियों का उत्पीड़न कर रहे हैं, उन पर अंकुश लगाएगी, पर ऐसा नहीं हुआ. गुरुवार सुबह मैंने बलरामपुर की एक घटना न्यूज़ में देखी, जिसने मुझे झकझोर कर रख दिया. उत्तर प्रदेश में वर्तमान भाजपा सरकार में कानून का नहीं, बल्कि गुंडों, बदमाशों, माफियाओं, बलात्कारियों एवं अन्य अराजक तत्वों का राज चल रहा है. यहां की कानून व्यवस्था पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है. खासकर इस सरकार में यहां की बहन-बेटियां बिलकुल सुरक्षित नहीं हैं.

बंगाल के कानून व्यवस्था की आलोचना करने वाले गुजरात व यूपी को देखें : ममता

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सिलीगुड़ी : पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगातार सवाल उठाए जाने के मामले में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पलटवार किया है। उन्होंने बुधवार को सिलीगुड़ी के निकट कामरांगागुड़ी स्थित राज्य की शाखा सचिवालय उत्तर कन्या में दार्जिलिंग, कूचबिहार तथा कालिंपोंग जिले की प्रशासनिक बैठक के दौरान बिना किसी का नाम लिए हुए कहा कि कुछ लोग पश्चिम बंगाल को बदनाम करने पर लगे हुए हैं।

राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हैं। मैं उन लोगों से कहना चाहती हूं कि बंगाल की कानून व्यवस्था की आलोचना करने की जगह उत्तर प्रदेश व गुजरात को देखें। वहां क्या हो रहा है।

राहुल और प्रियंका गांधी के दौरे से पहले हाथरस किया गया सील

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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में हाथरस गैंगरेप की पीड़िता के परिवार से मिलने हाथरस जा रहे हैं. वैसे फिलहाल हाथरस में धारा 144 लागू है. प्रशासन ने बताया है कि कोरोनावायरस के चलते यहां पर 1 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच जिले में धारा 144 लागू है. गैंगरेप और बर्बरता का शिकार हुई 20 साल की पीड़िता की इलाज के दौरान मौत और उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से रात के अंधेरे में परिवार की मौजूदगी के बिना उसका अंतिम संस्कार किए जाने पर पूरे देश में आक्रोश फैला हुआ है.

देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त है एमनेस्टी इंटरनेशनल, FRCA उल्लंघन का भी लग चुका है आरोप

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पिछले वर्ष इन्हीं दिनों की बात है। तारीख थी 17 सितम्बर। केन्द्र सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन अधिनियम को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधन की घोषणा की थी। नियमों में किए गए परिवर्तनों में, अन्य बातों के अलावा यह भी शामिल था कि किसी गैर-सरकारी संगठन के प्रत्येक प्रमुख सदस्य के लिए यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि वह-‘पदाधिकारी और प्रमुख कर्ताधर्ता और सदस्य’-किसी एक ‘आस्था’ वाले व्यक्ति की ‘आस्था’ या उसका रिलीजन परिवर्तित कराने के लिए न तो कभी ‘अभियोजित हुए हैं’ न ‘दोषी’ पाए गए हैं। अधिसूचना में यह भी कहा गया था कि किसी गैर-सरकारी संगठन के प्रत्येक सदस्य को शपथपत्र देना  होगा कि वे ‘विदेशी धन’ को किसी अघोषित उद्देश्य में प्रयोग करने या ‘हिंसक साधनों के प्रयोग की पक्षधरता’ करने में शामिल नहीं रहे हैं। ध्यान दीजिए, एनजीओ के केवल प्रमुख सदस्यों को नहीं, बल्कि ‘प्रत्येक सदस्य’ को। नियमों में यह संशोधन इस कारण करना पड़ा था, क्योंकि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने इन गैर-सरकारी संगठनों की गतिविधियों की जो रिपोर्ट तैयार की थी, उसमें-एफसीआरए का उल्लंघन, वामपंथी उग्रवादियों के साथ संबंध, जनजातीय समाज का ‘कन्वर्जन’, और स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया और जमात-ए-इस्लामी हिंद जैसे संगठनों के साथ संबंधों की बात कही गई थी। इतना ही नहीं, 2014 से एफसीआरए के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले लगभग 18,000 गैर सरकारी संगठनों से विदेशी योगदान प्राप्त करने की अनुमति वापस ले ली गई थी।

बात इतनी सरल नहीं थी। भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, 2016-17 के दौरान कुल 23,176 एनजीओ को 15,329.16 करोड़ रुपए विदेशों से प्राप्त हुए थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 वर्ष में भारत में सक्रिय विभिन्न गैर सरकारी संगठनों को 2 लाख 8 हजार 96 करोड़ रुपए का विदेशी फंड मिला है। आज की स्थिति में भारत में 22,447 ऐसे सक्रिय गैर सरकारी संगठन हैं, जो एफसीआरए के तहत पंजीकृत हैं। यह स्थिति तब है, जब बड़ी संख्या में गैर सरकारी संगठनों का एफसीआरए पंजीकरण समय-समय पर रद्द किया गया है।

पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कभी संसद में कहा था कि ‘एनजीओ द्वारा लगभग 20,000 करोड़ रुपए का फंड प्राप्त किया गया था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि इसमें से 10,000 करोड़ रुपये कहां खर्च किए गए।

अब इतना चोखा धंधा खुद को इतनी आसानी से तो बंद नहीं होने देगा। इस विदेशी पैसे से क्या होता है? प्रत्यक्ष उदाहरण से इसे समझिए। कोई एनजीओ, जिसके पास पैसे की कमी नहीं है, अपनी मनमर्जी काम करता रहेगा, चाहे वह कानून विरुद्ध ही क्यों न हो। लेकिन ऐसा करने के पहले, वह बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त अधिकारियों, जजों, प्रभावशाली नेताओं आदि को अपने ‘बोर्ड या ट्रस्ट’ में शामिल कर लेगा। उनका काम कुछ खास नहीं होगा, लेकिन उन्हें मोटा वेतन देगा, जिसे ‘प्रशासनिक खर्च’ कहा जाएगा। अब अगर कानून उस पर कार्यवाही करने का प्रयास करेगा, तो वह इन सेवानिवृत्त नामचीन लोगों की फौज सामने कर देगा। ‘आंखों की शर्म’ और ‘वरिष्ठों के सम्मान’ की दुहाई प्रत्यक्ष-परोक्ष शब्दों में दी जाएगी, और कानून मुंह ताकता रह जाएगा। फिर भी अगर बात न बनी, तो कोई छोटा-मोटा कर्मचारी सारा दोष अपने सिर पर ले लेगा और वास्तविक कर्ताधर्ता साफ बच जाएंगे। अगर किसी भी बिन्दु पर आपको महसूस होता है कि देश की कार्यपालिका में, विधायिका में, न्यायपालिका में, मीडिया में, राजनीतिक प्रक्रियाओं में विदेशी पैसों से चल रहे एनजीओ का हस्तक्षेप बहुत भारी है, तो आपको सबसे पहले उस एनजीओ को मिले विदेशी पैसे की ओर देखना चाहिए।

यही कारण है कि तमाम धरपकड़ और कानूनी सख्ती के बावजूद बहुत सारे गैर-सरकारी संगठन और मिशनरी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे। इन मिशनरियों का व्यवहार कन्वर्जन के कारखानों जैसा है, और दीर्घकालिक उद्देश्य भारतीय समाज में विभाजनकारी रेखाओं को गहरा और चौड़ा करते जाने का है।

मर्म पर प्रहार

लिहाजा सरकार ने इनके मर्म पर प्रहार किया है। संसद के दोनों सदनों से पारित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2020 में गैर-सरकारी संगठनों के पंजीकरण के लिए आधार संख्या प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। माने जिसे भी एनजीओ बनाकर देश का कोई हित करना है, वह कम से कम अपनी पहचान छिपाने की कोशिश न करे, जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था। हालांकि इससे उन गैर सरकारी संगठनों को बुरा लग सकता है, जो अपनी पहचान छिपाने को महत्वपूर्ण मानते हैं।

इसी का दूसरा पहलू। कई एनजीओ अपने आयकर के कागजात जमा नहीं करते। लेकिन अब आधार से जुड़ने के बाद उनके पास यह सुविधा नहीं रह जाएगी। इस विधेयक में विदेशी धन प्राप्त करने वाले किसी भी गैर-सरकारी संगठन के ‘प्रशासनिक खर्चोें’ पर अंकुश लगाया गया है। अब कोई भी गैर-सरकारी संगठन साल भर में अपने पैसे का अधिकतम 20 प्रतिशत तक हिस्सा ही ‘प्रशासनिक खर्चोें’ में खपा सकेगा। पहले यह सीमा 50 प्रतिशत थी। जाहिर है, एनजीओ के लिए उसका मुख्य उद्देश्य गौण था।

एक और महत्वपूर्ण बात-विधेयक में लोकसेवकों को विदेशों से धन प्राप्त करने पर रोक लगाने का भी प्रावधान है।

किसी भी ढंग के ‘सेवानिवृत्त साहेबगण’ अभी भी किसी एनजीओ के ट्रस्ट आदि के सदस्य हो सकते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाली रकम उसी 20 प्रतिशत के अंदर होगी। इसके अलावा विदेशी धन प्राप्त करने के लिए सभी गैर-सरकारी संगठनों को अब भारतीय स्टेट बैंक, दिल्ली में एक खाता खोलना होगा। अब जब सारा विदेशी चंदा केवल भारतीय स्टेट बैंक की नई दिल्ली की एक नियत शाखा में ही पहुंचेगा, तो जाहिर तौर पर सरकार के लिए उस पर नजर रखना सरल हो जाएगा।

नए संशोधनों के खिलाफ सबसे पहली आवाज उठाई अमिताभ बेहार ने। अमिताभ बेहार आक्सफैम इंडिया के सीईओ हैं। लेकिन साथ ही वह एक अन्य एनजीओ सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज के कोषाध्यक्ष भी हैं। सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज के कर्ताधर्ता हैं हर्ष मन्दर। इस एनजीओ को फ्रांसीसी और डेनमार्क की कैथोलिक चर्चों से करोड़ों रुपए मिले हैं। इसके पहले ही आक्सफैम इंडिया पर दिल्ली के दंगों में धन का दुरुपयोग करने का आरोप लग चुका है।

इसलिए हुआ संशोधन

इस संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी, जबकि एफसीआर अधिनियम में 2010 में ही संशोधन किया गया था? वास्तव में यह विधेयक 2010 के कानून में महत्वपूर्ण परिवर्तन करता है। कई लोगों का मानना है कि पिछला अधिनियम भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप करने को एक कानूनी आधार प्रदान करता था। एनजीओ भारतीय मामलों पर, भारत भूमि पर मनमर्जी गतिविधियां कर रहे थे, जो हानिकारक भी थीं, लेकिन उन्हें कानूनी ढंग से रोकना संभव नहीं था। 1 जून 2018 को भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, 2010-11 से 2016-17 तक एफसीआरए के तहत 1 लाख, 1 हजार 394 करोड़ रुपए का विदेशी पैसा विभिन्न गैर सरकारी संगठनों को प्राप्त हुआ था। तो क्या कोई आप पर उपकार कर रहा था?

आप स्वयं विचार करें, क्या कोई लाखों करोड़ रुपए आपको दान दे रहा था? मुफ्त कुछ होता ही नहीं है। यह विदेशी दान नहीं, निवेश था, जिसका उद्देश्य हमारे समाज को कई तरीकों से अपने अधीन करना, देश की जनसांख्यिकी में विभेदकारी परिवर्तन करना, देश के विभाजनों के लिए परिस्थितियों का निर्माण करना, सामाजिक अशांति को बढ़ावा देना, हमारी सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी प्रगति में बाधाएं उत्पन्न करना था। इन में से प्रत्येक बिन्दु के दर्जनों उदाहरण दिए जा सकते हैं।

और यह दान देने वाले कौन थे?

ठीक-ठीक ढंग से जानना कठिन है, ठीक उसी तरह, जैसे काले पैसे को ठिकाने लगाने के लिए कई बार सैकड़ों फर्जी कंपनियों की कतार खड़ी कर दी जाती है। इन एनजीओ को चंदा देने वालों में बड़ी संख्या में ऐसे विदेशी संगठन हैं जिनका या तो दूसरे देशों की सरकारों से सीधा संबंध था या ‘कथित नॉन स्टेट एक्टर्स’ से।

जाकिर नाइक ने लाखों का चंदा किसे दिया था, जो मामला खुल जाने पर वापस करना पड़ा था? है कोई जवाब? कौन है जाकिर नाइक और वह भारत से भागता क्यों फिर रहा है? है कोई जवाब? गैर सरकारी संगठनों का तंत्र इतना ढीठ है कि किसी दंगे में संलिप्तता पकड़े जाने पर भी किसी गैर सरकारी संगठन को लज्जा महसूस नहीं होती। वह सिर्फ चुप्पी साध कर बैठ जाता है और इतने को ही पर्याप्त मान लेता है। 
लेकिन नए कानून में यह गोरखधंधा बंद कर दिया गया है। आश्चर्य की बात नहीं कि जिन्हें चोट लगी है, वह बहुत जोर से बिलबिला रहे हैं।

भारत में भारतीय हितों के लिए न्यायिक क्षेत्र में सक्रिय एक संस्था-लीगल राइट्स आॅब्जर्वेटरी—के अनुसार नए संशोधनों के खिलाफ सबसे पहली आवाज उठाई अमिताभ बेहार ने। अमिताभ बेहार आॅक्सफैम इंडिया के सीईओ हैं। लेकिन साथ ही वह एक अन्य एनजीओ सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज के कोषाध्यक्ष भी हैं। सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज के कर्ताधर्ता हैं हर्ष मन्दर। इस एनजीओ को फ्रांसीसी और डेनमार्क की कैथोलिक चर्चों से करोड़ों रुपए मिले हैं। इसके पहले ही आॅक्सफैम इंडिया पर दिल्ली के दंगों में धन का दुरुपयोग करने का आरोप लग चुका है। दिल्ली दंगों में हर्ष मन्दर की भूमिका के तो वीडियो भी बहुत प्रचारित रहे हैं। इससे एनजीओ के लक्ष्यों, इरादों को समझने में बहुत मदद मिलती है। 

उदाहरण असंख्य हैं। हिमाचल प्रदेश के ‘कन्वर्जन विरोधी कानून’ के खिलाफ अदालतों में जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। ये याचिकाएं दायर करने वाले खुद को गैर सरकारी संगठन कहते हैं। यह गैर सरकारी संगठनों की हिमाकत नहीं है, यह उन्हें विदेशों से मिले पैसों की, उनके राजनीतिक और अन्य तरह के संपर्कों की गर्मी है। सरकार को, जांच को, कानून को नकारना उनके स्वभाव में है। जैसे नवंबर 2019 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एफसीआरए के कथित उल्लंघन के मामले में एमनेस्टी इंटरनेशनल के कार्यालयों पर छापा मारा। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने क्या जवाब दिया? कुछ नहीं, बस आरोपों से इनकार कर दिया। तीन गैर सरकारी संगठनों द्वारा एफसीआरए 2010 के कथित उल्लंघन की जांच के लिए सरकार को अंतरमंत्रालयीन समिति बनानी पड़ी। ये तीन गैर सरकारी संगठन हैं-राजीव गांधी फाउंडेशन, इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट। इन तीनों ने क्या जवाब दिया? कुछ नहीं, बस आरोपों से इनकार कर दिया।

जाकिर नाइक ने लाखों का चंदा किसे दिया था, जो मामला खुल जाने पर वापस करना पड़ा था? है कोई जवाब? कौन है जाकिर नाइक और वह भारत से भागता क्यों फिर रहा है? है कोई जवाब?

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

शाहरुख खान के घर ड्रग्‍स लेकर जाते थे अर्जुन रामपाल

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• A, D, R और S के कोड नेम में A का मतलब अर्जुन रामपाल, D से डीनो मोरिया, R से रणबीर कपूर और S से शाहरुख खान है

• एनसीबी अधिकारी ने कहा कि- हमारे पास भरोसेमंद इनपुट है और टेक्निकल सबूत के आधार पर कदम उठाएंगे

बॉलीवुड ड्रग्स मामले में बड़ा खुलासा। एनसीबी की पूछताछ में ड्रग्स पेडलर्स ने बॉलीवुड के चार हीरो के नाम भी लिए हैं। ये हैं शाहरुख खान, रणबीर कपूर, अर्जुन रामपाल और डीनो मोरिया। बड़ी खबर ये है कि अर्जुन रामपाल शाहरूख को ड्रग्स सप्लाई करते रहे हैं। अब तक सिर्फ हीरोइनों के नाम ही आ रहे थे। पहली बार बड़े हीरो भी जद में आते दिख रहे हैं।

एनसीबी के एक अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बॉलीवुड के बड़े नामों का खुलासा किया है। उनसे बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग भास्कर के पास मौजूद है। दो दिन से मीडिया में नाम तो नहीं आ रहे थे, उनके बदले में सिर्फ ‘A’, ‘D’ ‘R’ और ‘S’ के कोड नाम से जो बातें कही जा रही थीं।

अब ये साफ हो गया है कि A का मतलब अर्जुन रामपाल, D से डीनो मोरिया, R से रणबीर कपूर और S से शाहरुख खान का नाम है। एनसीबी अधिकारी ने बताया कि ड्रग पेडलर के सोर्स ने कहा है कि अर्जुन रामपाल शाहरुख खान को ड्रग सप्लाई करते रहे हैं। लेकिन डीनो मोरिया किसे सप्लाई करते थे? इस पर अधिकारी ने कहा कि इसका पता लगाना बाकी है। पूछताछ जारी है।

एनसीबी अधिकारी से बातचीत, जस की तस…

सवाल: किसने इन नामों के बारे एनसीबी को बताया?

अधिकारी: ड्रग पेडलर का एक सोर्स है। उसने बताया है कि अर्जुन रामपाल शाहरुख के घर ड्रग लेकर जाता है। इन्‍फॉरमेशन तो क्रेडिबल है, पर अभी उस बंदे से सीजर (जब्‍ती) होने का वेट करेंगे। जैसी यह अनफोल्ड होगा, टेक्निकल इविडेंस हम इन संदिग्ध एक्‍टर्स के खिलाफ कदम उठाएंगे।

सवाल: पेडलर का सोर्स कौन है, क्‍या नाम है उसका?

अधिकारी: वो रहने देते हैं न अभी, वो पेडलर का सोर्स तो बाहर का बंदा है। दो इंटिलीजेंस के इनपुट है, सोर्स कोई सेकेंड क्‍लास आदमी नहीं है, कि ऐसे ही आ गया और एनसीबी को बता रहा है। ये एक इंटरनेशनल एजेंसी के इनपुट हैं।

सवाल: और ये पेडलर कौन है, जिसे उसके सोर्स ने बोला है? डेविड या अनुज केसवानी वगैरह…

अधिकारी: अभी ये सब तकनीकी तौर पर अनरिलेटेड है न। पेडलर डेविड अनरिलेटेड है। यह पूरी तरह से इंटेलिजेंस इनपुट वाला क्रेडिबल शख्स है, जो पेडलर के कॉन्‍टेक्ट का बंदा है। साथ ही अर्जुन रामपाल के साथ रहा है। हमारे पास कुछ क्रेडिबल प्रूफ है कि अर्जुन का शाहरुख से कनेक्शन है और डीनो मोरिया का किसी और के साथ है।

सवाल: डीनो मोरिया किसे सप्‍लाई करता था?

अधिकारी: ये तो उन्‍हीं से पूछा जाएगा। वो ही बताएंगे कि वो किसे सप्‍लाई किया करते थे।

सवाल: इन सभी को एनसीबी कब तक समन भेजेगी?

अधिकारी: इस मामले में समन नहीं होगा। सीधे बंदे उठेंगे, उसके बाद ही काम होगा।

सवाल: बंदा उठने का मतलब?
अधिकारी: देखते हैं, अभी हम लोग काम कर रहे हैं…

सवाल: बाकी दीपिका, सारा, श्रद्धा वाले में क्‍या अपडेट है? इनको दोबारा समन जाएगा क्या?
अधिकारी: अभी तो नहीं। कुछ और होने पर जा सकता है, लेकिन अभी नहीं।

सवाल: आज फिर रिया-शौविक मामले में हाईकोर्ट का ऑर्डर आया…
अधिकारी: शाम साढ़े छह तक तो नहीं आया था।

सवाल: अभी दो नाम तो हैं, पर शाहरुख के साथ क्‍या करेंगे, उनका तो बहुत बड़ा नाम है…

अधिकारी: इंटरनेशनल इंटेलिजेंस से इनपुट तो मिल गया है उनको लेकर, अब आगे कैसे क्या होगा, उस पर एनसीबी तैयारी कर रही है।

कोर्ट ने 22 मिनट की सुनवाई में ख़ारिज की श्रीकृष्ण जन्मस्थान की याचिका

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उज्ज्वल दुनिया  /मथुरा, 01 अक्तूबर (हि.स.)। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मालिकाना हक को लेकर मथुरा न्यायालय के सीनियर डिवीजन सिविल जज की कोर्ट में डाली गई याचिका बुधवार को ख़ारिज हो गई है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह के बीच विवादित मामले को लेकर सुनवाई दोपहर 22 मिनट तक चली। वादी पक्ष ने अपने सारे पक्ष रखे इसके बाद कोर्ट ने बुधवार देर सायं दायर वाद को खारिज कर दिया। दावा खारिज होने के बाद वादी पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु जैन और रंजना अग्निहोत्री ने कहा कि अब हम हाईकोर्ट में अपील करेंगे। 
श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मालिकाना हक को लेकर श्रीकृष्ण विराजमान, अस्थान श्रीकृष्ण जन्मस्थान, रंजना अग्निहोत्री समेत आठ लोगों ने 25 सितम्बर को मथुरा न्यायालय के सीनियर डिवीजन सिविल जज छाया शर्मा की कोर्ट में याचिका डाली थी। 58 पन्नों की याचिका में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के बीच 1968 में हुए समझौते को गलत बताते हुए अपील की गई कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान को मस्जिद से मुक्त किया जाए और भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि का मालिकाना हक दिलाया जाए। 

मांझी और कुशवाहा के बाद महागठबंधन से अलग हुआ भाकपा माले

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भाकपा माले ने जारी की प्रत्याशियों की पहली सूची

उज्ज्वल दुनिया/पटना।  भाकपा-माले अकेले ही चुनाव मैदान में जा रही है । बुधवार को उसने अपनी पहली प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर यह साफ कर दिया । भाकपा माले ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए राज्य के कुल 30 विधानसभा क्षेत्रों के नाम समेत अपने सीटों की पहली सूची जारी कर दी है ।

भाजपा को हराने के लिए हम 20 सीटों पर भी थे तैयार 

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में सीटों के तालमेल को लेकर भाकपा-माले व राष्ट्रीय जनता दल के बीच राज्य स्तर पर कई राउंड की बातचीत चली । हमने अपनी सीटों की संख्या घटाकर 30 कर ली थी । संपूर्ण तालमेल की स्थिति में इन प्रमुख 30 सीटों में से भी 10 सीटें और भी कम करते हुए हमने  20 प्रमुख सीटों पर हमारी दावेदारी स्वीकार कर लेने का प्रस्ताव रखा था । लेकिन राजद की ओर से हमारे लिए जो सीटें प्रस्तावित की गईं हैं उनमें हमारे सघन कामकाज, आंदोलन व पहचान के पटना, औरंगाबाद, जहानाबाद, गया, बक्सर, नालंदा आदि जिलों की एक भी सीट शामिल नहीं है । ऐसे में जब पहले चरण के नामांकन का दौर शुरू ही होनेवाला है तो हम अपने सीटों की यह पहली सूची जारी कर रहे हैं । 

30 सीटों की पहली सूची

1. तरारी    2. अगिआंव  3. जगदीशपुर   4. संदेश   5. आरा   6. दरौली  7. जिरादेई  8. रघुनाथपुर 9. बलरामपुर    10. पालीगंज.   11. मसौढ़ी 12. फुलवारीशरीफ    13. काराकाट      14. ओबरा 15. अरवल.     16. घोषी.   17. सिकटा  18. भोरे 19. कुर्था    20. जहानाबाद     21. हिलसा  22. इसलामुपर    23. हायाघाट     24. वारिसनगर  25. औराई   26. गायघाट    27. बेनीपट्टी.    28. शेरघाटी 29. डुमरांव 30. चैनपुर

राजद नहीं, बिहार में ओवैसी और पप्पू यादव से बात कर रही कांग्रेस !

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कांग्रेस के एक बड़े नेता ने चिराग पासवान को दिया गठबंधन में शामिल होने का ऑफर

बिहार में आरजेडी और कांग्रेस के बीच गठबंधन टूटने की चर्चा 

बिहार की सियासत में बड़े उलट फेर की संभावना 

उज्ज्वल दुनिया/पटना । बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट लेती दिख रही है । सूत्रों की मानें तो बिहार में कांग्रेस आरजेडी के साथ नहीं बल्कि ओवैसी, पप्पू यादव और लोजपा के साथ गठबंधन की संभावना तलाश रही है । इतना ही नहीं ओवैसी की पार्टी के साथ बातचीत जारी है । भविष्य में कांग्रेस-ओवैसी-लोजपा-कुशवाहा और पप्पू यादव को मिलाकर एक बड़ा महागठबंधन आकार ले सकता है । 

कांग्रेस-ओवैसी-पप्पू यादव-लोजपा और कुशवाहा को मिलाकर बन सकता है महागठबंधन 
कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो पार्टी हाइकमान ने सदानंद सिंह को इसका इशारा दे दिया है कि एक नये महागठबंधन के लिए तैयार रहें जिसका कांग्रेस नेतृत्व करेगी और बाकी दल सहायक रहेंगे । उधर इस खबर के बाद आरजेडी खेमें में खलबली है । राजद कांग्रेस को उसकी मुंहमांगी 73 सीट देने को भी तैयार है । आरजेडी नेता मनोज झा ने बयान भी दिया है कि कांग्रेस अपनी जिद छोड़े तो बातचीत हो सकती है । लेकिन कांग्रेस की ओर से मनोज झा के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है । 

ओवैसी और पप्पू यादव से कांग्रेस की बात बनने पर ही चिराग खोलेंगे अपने पत्ते

ओवैसी के साथ कांग्रेस के एक बड़े नेता बात कर रहे हैं । अगर कांग्रेस-ओवैसी और पप्पू यादव के साथ बातचीत को लेकर किसी नतीजे पर पहुंचती है तभी चिराग पासवान अपने पत्ते खोलेंगे । अगर किसी कारण से कांग्रेस अपने मिशन में कामयाब नहीं होती तब चिराग एनडीए के साथ बने रह सकते हैं । इसके लिए चिराग पासवान ने आज शाम तक का समय दिया है । 

आज शाम तक आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन को लेकर हो सकता है बड़ा ऐलान 
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है । या तो सीटों के बंटवारे का एलान होगा या फिर गठबंधन के टूटने की घोषणा कर दी जाएगी । 

कांग्रेस की किसान ऋण माफी योजना आंखों में धूल झोंकने जैसा: आदित्य साहू

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25 हजार रुपये तक किसानों को रघुवर सरकार ने देने का लिया था फैसला

उज्ज्वल दुनिया/रांची । काँग्रेस द्वारा किसानों के ऋण माफ किए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस किसानों को ऋण माफी के नाम पर ठगने का कार्य कर रही है। किसानों का गला घोंटने वाली कांग्रेस, कभी भी किसानों की हितैषी नहीं हो सकती है। पूर्व  मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ‘मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना’ के तहत पांच एकड़ तक की भूमि वाले किसानों को 25 हजार रुपये देने का कार्यक्रम चलाया था।  कांग्रेस इस योजना को बंद करते हुए अब ऋण माफी की बात कर रही है, जो घुमा कर नाक पकड़ने की कहावत को चरितार्थ करता है। 

*2 लाख के बजाए 25 हजार माफी क्यों?*

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पूर्व घोषणा किया था कि सरकार गठन के तत्काल बाद 2 लाख तक के सभी कृषि ऋण माफ कर दिए जाएंगे। किन्तु पलटुमार कांगेस अब मात्र 25 हजार माफी की बात कर रही है। यह पार्टी घोषणा पत्र में किये गए वादों को पूरा करने के बजाय नए वादे करना है।यह किसानों के साथ छलावा है। कांग्रेस के कथनी और करनी में आसमान जमीन का अंतर है। 

*उपचुनाव से घबराई कांग्रेस झामुमो*

उन्होंने कहा कि उपचुनाव को देखते हुए कांग्रेस इस तरह की बयानबाजी कर रही है। जनता के आक्रोश को देखते हुए कांग्रेस झामुमो जनता को बरगलाने की फिर से  कोशिश कर रहे है। जनता इस उपचुनाव में इनके ढकोसले वादे में नहीं आने वाली है। राज्य के किसान इस सरकार से पूरी तरह नाराज हैं । धनखेती के दौरान पूरे राज्य में यूरिया की कालाबाजारी हुई, सरकार इस पर बड़ी कार्रवाई के बजाए रोना रो रही है।  जबकि रघुवर काल मे इस तरह की कोई परेशानी किसानों को नही झेलनी पड़ी। भाजपा  सरकार किसानों के विकास और उन्नति केलिये कटिबद्ध है और रहेगी।

मोमेंटम झारखण्ड के बाद सबसे पहले स्थापित होने वाला टेक्सटाइल इंडस्ट्री के जाने माने ओरिएंट क्राफ्ट बंद

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प्रोत्साहन राशि को बंद करने की वजह से मुसीबत आई। 
सरकारी सुविधा के आभाव में ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी के 5000 कामगार हुए बेरोजगार

रेहान संवाददाता / उज्ज्वल दुनिया /रांची । देश की जानी मानी टेक्सटाइल कंपनी ओरिएंट क्राफ्ट 24 जुलाई 2017 में रांची के ईरबा में स्थापित की गयी थी। राज्य में इस पहली टेक्सटाइल कंपनी के खुलते ही यहां के युवक, युवतियों और बेरोजगारों को काम मिला। कंपनी के प्रति कामगारों की वफादारी और लगन रंग लाया और कंपनी सफलता की बुलंदियों पर पहुंच गया। प्रबंधन को लगा कि यहां के लोग काफी मेहनती हैं। कंपनी ने इरबा की  यूनिट से हासिल सफलता के बाद निर्णय लिया कि यहां और यूनिट की आवश्यकता है। इस के बाद प्रबंधन ने रांची स्थित खेलगांव में दूसरे यूनिट की स्थापना की। इस प्रकार झारखंड में दो यूनिट की स्थापना हुई।इरबा की यूनिट को जे-1 और खेलगांव की यूनिट को जे-2 का नाम पड़ा। कंपनी का उदघाटन कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने की थी। इसके बाद कंपनी के दोनों यूनिट में दो शिफ्टों में काम होने लगी। कंपनी के खुल जाने से  राज्य के विभिन्न जिलों के युवक,युवतियों और बेरोजगारों को रोजगार मिला। कंपनी में  निर्मित वस्त्रों की निर्यात विदेशों में होने लगी। इसके बाद ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी की देखा-देखी देश के अन्य टेक्सटाइल कंपनी भी राज्य में अपनी कंपनी स्थापित कर बहुत से लोगों को रोजगार मुहैया कराने लगी।इस से स्थानीय लोगों के अलावा राज्य के विभिन्न जिले के बेरोजगारों को रोजगार मिलना शुरू हो गया। 

लॉकडाउन के दौरान पूरी तरह बर्बाद हो गई कंपनी 

देश में लॉक डाउन लगते ही देश की इतनी बड़ी टेक्सटाइल कंपनी ने दम तोड़ दिया। इस का असर हुआ कि कंपनी बंद हो गया। लगभग 5000 कामगार  फिर से बेरोजगार हो गए। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी से निर्मित वस्त्रों का विदेश में निर्यात होना बंद हो गया। कंपनी ने लॉक डाउन के दौरान कामगारों की सुध तक नहीं ली। सभों को दर-दर भटकने को छोड़ दिया। कामगारों ने बताया कि कंपनी ने उनका बहुत शोषण किया और जब बुरा समय आया तो कंपनी ने अपना हाथ उठा लिया। इधर दूसरी कंपनी ने अपने कामगारों को लॉक डाउन के दौरान काम भी मुहैय्या कराया और आधा वेतन भी दिया। इससे उन कंपनियों के कामगारों को काफी राहत मिला। ओरिएंट क्राफ्ट के कामगारों ने कंपनी से अन्य कंपनियों की तरह ही काम मुहैय्या कराने और आधा वेतन देने की गुहार लगाई। इस पर प्रबंधन ने साफ इंकार कर दिया।

क्या कहते हैं कंपनी के एचआर ?

इस संबंध में कंपनी के एचआर से बात करने पर बताया कि फिलहाल कंपनी को सरकार से  मिलने वाली सारी सुविधा बंद है। कंपनी अभी कामगारों को काम और वेतन देने की स्थिति में नही है। ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी में जून तक उत्पादन हुआ और जुलाई से कंपनी बंद कर दी गई।  कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को फैक्ट्री आने से मना कर दिया गया। जून के महीने में लॉकडाउन के वक़्त भी कंपनी ने कई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था।  इसको लेकर कंपनी के बाहर कामगारों ने काफी हंगामा भी किया था।  अब मैनेजमेंट के लोग भी दिल्ली शिफ्ट हो गए हैं।

कई यूरोपीय देशों में होता था एक्सपोर्ट 

अमेरिका, फ्रांस, स्पेन,  ब्रिटेन, कनाडा सहित एक दर्जन यूरोपीय देशों में यहां के बने कपड़ों का एक्सपोर्ट होता था। कंपनी के बने शर्ट, जींस, सूट को काफी पसंद किया जाता था लेकिन कोरोना महामारी के बीच इस कंपनी की हालत अचानक खराब  हो गई।  लॉकडाउन में कई कर्मचारियों को ऑफिस आने के लिए मना कर दिया गया है। कंपनी के कई अधिकारी इस मामले में बोलने से कतरा रहे हैं। 

महागठबंन की सरकार में सभी कंपनियां झारखंड से बाहर जाएंगी, बढ़ेगी बेरोजगारी- संजय सेठ

बीजेपी सांसद संजय सेठ ने कहा झारखण्ड सरकार पूरी तरह से विफल  हो गई है।झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में बड़ी कंपनी ओरियंट क्राफ्ट की स्थापना हुई थी। मोमेंटम झारखंड के बाद झारखंड में जो फैक्ट्री लगी थी उसमें से एक कंपनी ओरियंट क्राफ्ट भी थी। रांची में इस कंपनी की दो यूनिटें लगी थी।  एक यूनिट ओरमांझी के इरबा में और दूसरा खेल गांव में लगा था।  यहां के बने कपड़े सात समंदर पार जाते थे। 

कंपनी बंद होने के कारणों की समीक्षा करेगा विभाग- श्रम मंत्री 

ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी के सीईओ गौरभ सहगल ने बताया कि कंपनी को सरकार की तरफ से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को बंद कर दिया गया है।  यह राशि लगभग 33 करोड़ है। दरअसल, टेक्सटाइल नीति के तहत झारखंड के एक व्यक्ति को कंपनी में रोजगार देने पर सरकार उस कंपनी को 5 हजार से लेकर 6 हज़ार तक की प्रोत्साहन राशि देती है. सरकार के श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए कहा कि कंपनी आखिर क्यों बंद हुई इसकी विभाग समीक्षा कर रही है।

झारखंड की बेटियां अब विदेशों में भी करेंगी मानवता की सेवा

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उज्ज्वल दुनिया/रांचीः– प्रेझा फाउंडेशन द्वारा संचालित चान्हो नर्सिंग कौशल कॉलेज की छात्राओं के बीच नियुक्ति पत्र का वितरण किया गया. कार्यक्रम का आयोजन प्रोजेक्ट भवन स्थित सभागर में किया गया. जहां सीएम हेमंत सोरेन ने कई छात्राओं के बीच नियुक्ति पत्र का वितरण किया गया. मौके पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति मंत्री चम्पई सोरेन और  श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता मौजूद रहे. इस अवसर पर सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि  हमारी बच्चियों के लिए आज खास दिन है.  जो नई जीवन की शुरुआत कर रही हैं एक नर्स के तौर पर. हमारी बच्चियां पढ़ लिखकर स्वास्थ्य सेवा में कड़ी जोड़ने की भूमिका निभाएंगी. उन्होंने कहा  प्रेझा फाउंडेशन विगत कई वर्षों से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रो में आदिवासी छात्र छात्राओं को शिक्षा दे रहे है. प्रेझा फाउंडेशन ने स्वास्थ्य सेवा में बड़ी कड़ी जोड़ने का काम किया है. सीएम ने कहा कि  ये सभी बच्चियां 3 तारीख को जाने की सुनिश्चित है. इस प्रयास से हमारी बच्चियां स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाएंगी. वहीं सीएम ने कहा कि प्रेझा फाउंडेशन ने जो प्रशिक्षण दिया है वह मिल का पत्थर साबित होगा.