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वायुसेना को स्वदेशी युद्ध प्रणाली पर भरोसा: भदौरिया

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लड़ाकू स्क्वाड्रन की कमी होने के बावजूद वायुसेना ‘टू फ्रंट वार’ के लिए तैयार

 नई दिल्ली । आने वाले दशक में स्वदेशी रूप से विकसित पांचवी पीढ़ी के विमान भारतीय वायुसेना की मुख्य ताकत होंगे। इसलिए भारतीय वायुसेना 6 जी तकनीकों के साथ ​​स्वदेशी युद्ध प्रणाली विकसित कर रही है।​​ आगामी दशक के उत्तरार्ध ​तक स्वदेशी लड़ाकू विमानों को ​वायुसेना में ​शामिल करने ​से ​’​आत्मनिर्भरता​’​ भी ​बढ़ेगी। वायुसेना ने 2030 तक लड़ाकू विमानों की 38 स्क्वाड्रन तैयार करने की योजना बनाई है। 

भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से खास बातचीत में ​भविष्य ​में युद्ध की तैयारियों के बारे में पूछने ​पर कहा कि भारतीय वायुसेना ​’​डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स, स्मार्ट विंगमैन कॉन्सेप्ट, वैकल्पिक रूप से मानवयुक्त प्लेटफार्मों, ड्रोन, हाइपरसोनिक हथियारों सहित 6 जी तकनीकों के साथ ​​स्वदेशी युद्ध प्रणाली विकसित कर रही है।​​ उन्होंने कहा​ कि आगामी दशक के उत्तरार्ध ​तक स्वदेशी लड़ाकू विमानों को ​वायुसेना में ​शामिल करने ​से ​’​आत्मनिर्भरता​’​ भी ​बढ़ेगी। हम पांचवीं पीढ़ी के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) के स्वदेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं​ ​जो भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े का मुख्य आधार होगा।  
​​भदौरिया ने खुलासा किया कि​ ​पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों (एएमसीए​)​ के ​बेड़े में शामिल होने तक लड़ाकू विमानों की कमी को पूरा करने के लिए ​​जल्द ही 114 ​मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट के सौदे के लिए सरकार से मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद औपचारिक खरीद प्रक्रिया शुरू होगी। ​इससे भी ​आने वाले दशक में ​लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन को ​नया ​स्वरूप मिलेगा​।​ ​यह पूछे जाने पर कि क्या राफेल​ की दो और स्क्वाड्रन​ बनाने का विचार है तो उन्होंने इसे ​’​बहुत जल्दी कहना​’​ कहा​। ​उन्होंने कहा कि ​भारतीय वायुसेना ​ने भविष्य ​में ‘आत्मनिर्भर भारत​’ ​​के तहत लड़ाकू विमान तेजस एलसीए ​पर अपना भरोसा रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि ड्रोन प्रारंभिक संघर्ष के लिए तो अच्छे होते हैं लेकिन पूर्ण युद्ध के समय अतिसंवेदनशील हो जाते हैं।

चीन और पाकिस्तान से एक साथ ‘टू फ्रंट वार’ के लिए वायुसेना को कम से कम 42 लड़ाकू स्क्वाड्रन की जरूरत है लेकिन मौजूदा समय में वायु सेना के पास सिर्फ 30 स्क्वाड्रन ही ऑपरेशनल हैं। इस बारे में सवाल करने पर कहा कि वायुसेना अगले एक दशक में लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन बढ़ाकर 38 करने की योजना पर काम कर रही है। हाल ही में जारी रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 में शामिल ‘मेक इन इंडिया’ के तहत 114 लड़ाकू विमानों के सौदे फाइनल करके स्क्वाड्रन की यह कमी पूरी की जाएगी। एयरचीफ मार्शल भदौरिया ने संकेत दिए हैं कि वायु सेना को जल्द ही 114 लड़ाकू विमानों के सौदे के लिए सरकार से मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद औपचारिक खरीद प्रक्रिया शुरू होगी। 
वायुसेना प्रमुख ने 2030 तक बनने वाली लड़ाकू विमानों की 38 स्क्वाड्रन के बारे में बताया कि इसमें मिराज 2000-आई की 3, मिग-29 यूपीजी की 4, सुखोई-30 एमकेआई की 12, तेजस एमके1 और 1ए की 6, तेजस एमके2 की 2, मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) की 6, फ्रांसीसी राफेल की 2 और जगुआर DARIN III की 3 स्क्वाड्रन होंगी। वायुसेना प्रमुख भदौरिया ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि हम चाहे जिस तेज गति से आगे बढ़ें लेकिन भारतीय वायुसेना आने वाले दशक में अपनी अधिकृत 42 स्क्वाड्रन तक नहीं पहुंच पाएगी बल्कि 36-38 स्क्वाड्रन बनना ही एक उपलब्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि लड़ाकू स्क्वाड्रन की कमी होने के बावजूद वायुसेना ‘टू फ्रंट वार’ के लिए तैयार है।    

भदौरिया ने कहा कि अगले तीन साल में​ फ्रांस से बाकी​ राफेल और हल्के लड़ाकू विमान एलसीए मार्क-1​ मिलने पर ​​स्क्वाड्रन को पूरी ताकत के साथ देख रहे हैं। इसके साथ ही ​​वर्तमान बेड़े के अलावा​ रूस से मिलने वाले सुखोई-30 एमएमआई और मिग-29 विमान भी ​​स्क्वाड्रन​ की कमी को पूरा करेंगे।​ ​मिराज-2000, ​पुराने ​मिग-29 और जगुआर बेड़े ​काे भी इसी अवधि में ऑपरेशनल अपग्रेड किया जाना है। इससे भी वायुसेना की क्षमता में इजाफा ​होगा। ​​अगले पांच वर्षों में हम एलसीए मार्क​-​1ए ​के 83 ​विमानों को अपने बेड़े में शामिल करेंगे। हम स्वदेशी उत्पादन में ​डीआरडीओ ​और ​एचएएल के प्रयासों के समर्थक हैं और आप जल्द ही ​बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट​ (एचटीटी-40​)​ ​और ​लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर​ (एलसीएच​​)​ का अनुबंध ​होते ​देखेंगे।

कोरोना मरीजों के लिए 80 फीसदी आईसीयू बेड मामले पर सुनवाई टली

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नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्राइवेट अस्पतालों को अपने आईसीयू में 80 फीसदी बेड कोरोना के मरीजों के लिए आरक्षित रखने के आदेश पर रोक के सिंगल बेंच के फैसले पर रोक लगाने की मांग पर सुनवाई टाल दी है। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इस मामले पर अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।

कोर्ट ने पिछले 28 सितंबर को केंद्र सरकार और एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। दिल्ली सरकार की ओर से एएसजी संजय जैन ने कहा था कि दिल्ली के अस्पतालों के मात्र दो फीसदी अस्पतालों को अपने आईसीयू बेड कोरोना के मरीजों के लिए आरक्षित रखने को कहा गया है। कोरोना के मामले शतरंज के खेल की तरह हो गए हैं, हर घंटे हमें तुरंत फैसले करने होते हैं। उन्होंने कहा था कि कोरोना के मामले असाधारण तरीके से बढ़ रहे हैं । एक मॉडरेट रोगी को गंभीर रोगी में बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता है।

संजय जैन ने कहा था कि इस समय बेड बढ़ाने की जरूरत है। अगर अस्पताल अपनी क्षमता का फीसदी बढ़ा सकते हैं तो कोरोना के लिए आरक्षित बेड भी बढ़ाना होगा क्योंकि मरीज भी बढ़ रहे हैं। तब कोर्ट ने कहा था कि सिंगल बेंच की चिंता कोरोना के रोगियों के लिए आईसीयू बेड आरक्षित करने को लेकर है, दूसरी बीमारियों के रोगों के लिए नहीं। कोर्ट ने पूछा था कि क्या दिल्ली सरकार के आदेश में नर्सिंग होम भी शामिल हैं जिनके पास आईसीयू भी नहीं है। तब जैन ने कहा था कि दिल्ली के 31 अस्पतालों ने याचिका दायर की है। उन्होंने अपनी समस्या को जनहित का कहकर याचिका दायर की है। दिल्ली के सभी अस्पतालों में ये आरक्षण नहीं है, कुछ खास अस्पतालों के लिए ही है। उन्होंने कोर्ट से सिंगल बेंच के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया।

याचिका में दिल्ली सरकार ने कहा है कि कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। सिंगल बेंच ने 22 सितंबर के अपने आदेश में दिल्ली सरकार के कोरोना से निपटने के लिए किए गए उपायों पर कोई गौर नहीं किया। सिंगल बेंच के फैसले से निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। याचिका में कहा गया है कि सिंगल बेंच का फैसला मनमाना और गैरकानूनी है।
जस्टिस नवीन चावला की सिंगल बेंच ने पिछले 22 सितंबर को प्राइवेट अस्पतालों को अपने आईसीयू में 80 फीसदी बेड कोरोना के मरीजों के लिए आरक्षित रखने के दिल्ली सरकार के आदेश पर रोक लगाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने दिल्ली सरकार के आदेश को संविधान की धारा 21 के खिलाफ बताया था। सिंगल बेंच ने कहा था कि बीमारी खुद कभी आरक्षण का आधार नहीं बन सकती है। सिंगल बेंच के समक्ष याचिका एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर ने दायर किया था। याचिका में दिल्ली सरकार के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी। सिंगल बेंच ने केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार के इस आदेश से कोरोना के अलावा दूसरे रोगों से पीड़ित मरीजों को इलाज में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

सिंगल बेंच के समक्ष दायर याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार का ये फैसला बिना पूर्व विचार-विमर्श के लिया गया है। फैसला लेने के पहले वर्तमान में रोगियों की जरुरतों का ध्यान नहीं रखा गया है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार का फैसला मनमाना और गैरकानूनी है। याचिका में कहा गया है कि निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए 40 फीसदी आईसीयू बेड आरक्षित करने की मांग की है। 

लोकल सेवा शुरू करने का विचार करे सरकार : हाईकोर्ट

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मुंबई । मुंबई में कार्यालयीन कामकाज में बदलाव कर आम नागरिकों के लिए लोकल सेवा शुरू करने का निर्देश शुक्रवार को बाॅम्बे हाईकोर्ट ने दिया है। न्यायमूर्ति दीपाकंर दत्ता और गिरीश कुलकर्णी ने इस मामले की सुनवाई 19 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया है। 

जानकारी के अनुसार बार कौंसिल आफ महाराष्ट्र एंड गोवा की ओर से वकील मिलिंद साठे व वकील उदय वारुंजीकर ने लॉकडाउन में लोकल ट्रेन में यात्रा के लिए वकीलों को छूट दिए जाने संबंधी याचिका दायर किया है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को हाईकोर्ट में हो रही थी। राज्य सरकार की ओर महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने कहा कि कोरोना की वजह से राज्य में लॉकडाउन जारी है। इस दौरान सिर्फ अत्यावश्यक सेवा के लिए लोकल ट्रेन शुरू की गई है। लेकिन लोकल में सफर करने वाले अधिकांश यात्री मास्क का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। अगर सभी नागरिकों के लिए लोकल शुरु की गई तो ट्रेन में भीड़ बढ़ेगी और कोरोना पर नियंत्रण नहीं लगाया जा सकेगा। कुंभकोणी ने कहा कि मुंबई में लोकल ट्रेन की भीड़ कम करने के लिए कार्यालयीन कामकाज का समय बदला जाना आवश्यक है। इस संबंध में केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक है। हाईकोर्ट ने कहा कि दिसंबर -जनवरी में कोरोना संक्रमण बढऩे की संभावना जताई जा रही है। इसलिए लोकल ट्रेन में भीड़ नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार को कार्यालयीन कामकाज के समय का बदलाव करना भी जरूरी है। राज्य सरकार को इस दिशा में प्रयत्न करना चाहिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 19 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया है ।

इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन पर रखा गया मेट्रो स्टेशन का नाम

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कोलकाता : एशिया के सबसे बड़े फुटबॉल स्टेडियमों में शुमार कोलकाता के साल्टलेक स्टेडियम के पास निर्मित ईस्ट- वेस्ट मेट्रो परियोजना के एक स्टेडियम का नाम इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन (आइएफए) के नाम पर रखा गया है। इस स्टेशन का पूरा नाम इंडियन फुटबॉल एसोसिएशन (वेस्ट बंगाल) साल्टलेक मेट्रो स्टेशन होगा।

स्टेशन की ब्रांडिंग के भी अधिकार दिए

गौरतलब है कि आइएफए पश्चिम बंगाल में फुटबॉल की गवर्निंग बॉडी है। उसे कोलकाता मेट्रो रेलवे कॉर्पोरेशन की तरफ से स्टेशन की ब्रांडिंग के भी अधिकार दिए गए हैं।

पासवान के निधन पर यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व सीएम योगी आदित्यनाथ ने जताया शोक

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लखनऊ, । केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान के निधन पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित समेत प्रमुख नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। सीएम योगी ने कहा कि वह कमजोर व निर्धन वर्ग के हित व कल्याण के लिए सक्रिय रहते थे।

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि रामविलास पासवान जमीन से जुड़े राजनेता थे, जिन्होंने सदैव गरीब व वंचितों के लिए संघर्ष किया। पासवान का निधन राजनीति की अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामविलास पासवान एक अनुभवी राजनेता थे। भारत सरकार के मंत्री के रूप में भी उन्होंने अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। वह कमजोर व निर्धन वर्ग के हित व कल्याण के लिए सक्रिय रहते थे। विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने रामविलास पासवान के निधन को राजनीति की अपूर्णीय क्षति बताते हुए दिवंगत की आत्मा को शांति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

इलाहाबाद हाई कोर्ट

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प्रयागराज, । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फीस लेकर किसी भी अवैध निर्माण को नियमित करने की कंपाउंडिंग स्कीम-2020 को लागू करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और विकास प्राधिकरणों को इस नई योजना पर अमल न करने का निर्देश दिया है। कोर्ट कहा कि यह योजना प्रथमदृष्टया अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अवैध निर्माणों को नियमित करने के उद्देश्य से बनाई गई है। ऐसी योजनाएं उन ईमानदार लोगों को हताश करने वाली हैं जो नियमों का पालन करके निर्माण की अनुमति लेकर कानून के तहत भवन बनवाते हैं।

यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने शाहजहांपुर के मेहर खान अंसारी की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव शहरी विकास से इस मामले में 20 अक्टूबर तक हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने कहा कि राज्य के अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे अवैध निर्माणों को रोकेंगे न कि उन्हें बढ़ावा देंगे। यह भी कहा कि ऐसी योजनाएं उन ईमानदार लोगों को हताश करने वाली हैं जो नियमों का पालन करके निर्माण की अनुमति लेकर कानून के तहत भवन बनवाते हैं। ऐसे लोगों को नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए बाध्य भी किया जाता है, जबकि भवन निर्माण कानून का उल्लंघन कर बिल्डिंग बनाने वालों को और अधिक अवैध निर्माण की छूट दी जा रही है। यह आदेश नियम के विपरीत निर्माण करके बाद में कंपाउंडिंग फीस देकर उसे वैध कराने वाले बिल्डरों और भवन स्वामियों के लिए बड़ा झटका है।

भाजपा नेता अर्जुन साव को अज्ञात लोगों ने पीटा

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उज्ज्वल दुनिया संवाददाता/हजारीबाग। भाजपा नेता अर्जुन साव को गुरुवार को अन्नदा चौक के पास कुछ अज्ञात लोगों ने कार रुकवा कर पिटाई कर दी। इस संबंध में भुक्तभोगी ने बताया कि सदर अस्पताल से अपनी मां का इलाज करवा कर घर जा रहे थे। इसी क्रम में अन्नदा चौक पर जाने के बाद कुछ अज्ञात लोगों ने दिन के करीब 3:00 बजे हाथ देकर गाड़ी रुकवाई और आगे बढ़ने को कहा। जैसे ही अन्नदा चौक के पास गाड़ी रुकवाई, उसके बाद मोबाइल निकालकर सदर थाना फोन करने की कोशिश की। तभी कुछ लोगों ने मोबाइल छीन ली और लात-घूंसों से मारने लगा। कुछ स्थानीय लोगों के सहयोग से उन लोगों को चंगुल से छुड़वा कर हमें गाड़ी में बैठा कर भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अज्ञात लोग थे। उनका चेहरा पहली बार देखे थे। अगर पुलिस चाहे तो अन्नदा चौक के निकट लगे सीसी कैमरे को खंगाल कर मामले की जांच करा सकती है। लेकिन शहर का माहौल नहीं बिगड़े, इस वजह से अब तक थाना में आवेदन नहीं दिए हैं।

डॉ. विजय कृष्ण श्रीवास्तव को झारखंड सरकार की लापरवाह सिस्टम ने मारा : भाजपा

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झारखंड में इंसान तो इंसान ‘भगवान’ भी सुरक्षित नहीं : कुणाल

डॉ. विजय मामले में भाजपा ने की उच्चस्तरीय जाँच की माँग

उज्ज्वल दुनिया /रांची ।  गोड्डा के पोड़ैयाहाट अंतर्गत देवदांड़ स्वास्थ्य केंद्र में सेवारत डॉक्टर विजय कृष्ण श्रीवास्तव की असामयिक मृत्यु पर शोक प्रकट करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने इस आशय में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला झारखंड सरकार के स्तर से बरती गई व्यापक लापरवाही और संवेदनहीनता का प्रतीत होता है। सक्षम विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद वेतन अभाव में कष्टकारी मृत्यु होना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। 
कुणाल षडंगी ने कहा कि लोकमान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार चिकित्सकों को मानवीय रूप में ‘ईश्वर’ की अवधारणा मानी जाती है।। असीम श्रद्धा और विश्वास से लोग इनके समक्ष अपना मर्म व्यक्त करतें है ताकि समुचित उपचार संभव हो। यह दुःखद है कि भगवान रूपी डॉक्टर झारखंड में लापरवाह सरकारी व्यवस्था का दंश झेलकर काल के गाल में समा गयें। 

गोद में बच्चे संग आत्मदाह करने वाली बैसाखी मुर्मू मामले में जवाब दे सरकार : भाजपा

जामताड़ा के नाला अंतर्गत सुनियापानी गांव निवासी दिवंगत बैसाखी मुर्मू मामले में भाजपा ने झारखंड सरकार से जवाब की माँग की है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि धन अभाव में बच्चे के इलाज करा पाने में असामर्थ्य बैसाखी मुर्मू का बच्चे सहित आत्मदाह करना हृदय को झकझोरने वाली घटना है। 

उन्होंने  कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति के उपचार के लिए ही पीएम मोदी ने महत्वपूर्ण आयुष्मान भारत योजना का लोकार्पण किया। यह दुःखद है कि राजनीतिक ईर्ष्या के कारण वर्तमान गठबंधन सरकार जनता को आयुष्मान भारत योजना से लाभान्वित नहीं करा ही है। भाजपा प्रवक्ता ने झारखंड सरकार की शासन व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग को चौपट करार देते हुए कहा कि धन अभाव में लोगों का उपचार नही हो रहा और सरकार बेसुध है। 

लंबी बीमारी के बाद रामविलास पासवान का 74 साल की उम्र में निधन

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उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया है। 74 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। इस बात की जानकारी उनके बेटे व लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने दी। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘पापा….अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं।

रामविलास पासवान लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने राजनीति में एक लंबा समय बिताया है। रामविलास पासवान वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी इन सभी प्रधानमंत्रियों के ‘कैबिनेट’ में अपनी जगह बनाने वाले शायद एकमात्र व्यक्ति थे।  

राजनीति की नब्ज पकड़ने वाले रामविलास पासवान पहली बार1969 में एक आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में बिहार विधानसभा पहुंचे थे। 1974 में राज नारायण और जेपी के प्रबल अनुयायी के रूप में लोकदल के महासचिव बने थे। वे व्यक्तिगत रूप से राज नारायण, कर्पूरी ठाकुर और सत्येंद्र नारायण सिन्हा जैसे आपातकाल के प्रमुख नेताओं के करीबी रहे हैं। 

बिहार में दलित राजनीति के सबसे बड़े सूर्य का यूं अस्त हो जाना….

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उज्ज्वल दुनिया/पंकज प्रसून 

संपादक की कलम से….

कोई उन्हें मौसम वैज्ञानिक की संज्ञा देता है तो कोई उन्हें साधने पैदल ही 12 जनपथ के आवास पर पहुंच जाता है। वो युवा नेता जो जब चुनावी समर में उतरता है तो अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज करवा लेता है। पिछले तीन दशक में दिल्ली की तख्त पर चाहे कोई भी पार्टी किसी भी गठबंधन की सरकार रही हो हरेक सरकार में उसकी भागीदारी अहम रही है। हम बात कर रहे हैं भारतीय राजनीति के ऐसे राजनेता की जिनके हर दांव में निशाने पर रही है सत्ता। 

धरती गूंजे आसमान-रामविलास पासवान 

हाजीपुर व वैशाली के किसी क्षेत्र में रामविलास पासवान कदम रखते हैं तो यह नारा जरूर सुनाई दे सकता है। 1989 में हाजीपुर के किसी कार्यकर्ता के मुंह से निकला नारा, पासवान के साथ ही पूरे बिहार में काफी पॉपुलर हो चुका है। 

वर्ष 2004, साल का पहला दिन यानी 1 जनवरी, सोनिया गांधी अपने 10 जनपथ निवास से निकलती हैं। एसपीजी सुरक्षा के साथ गोलचक्कर को पैदल पार करती हैं और 12 जनपथ के गेट पर पहुंचती हैं। 12 जनपथ यानी रामविलास पासवान का आवास। सोनिया की यह छोटी सी पदयात्रा समसामयिक राजनीतिक इतिहास में एक बड़ी घटना बनकर उभरी। सोनिया गांधी को इससे पहले दिल्ली की सड़कों पर टहलते शायद ही किसी ने देखा होगा। सोनिया ने रामविलास पासवान से कोई अपॉइंटमेंट नहीं लिया था। केवल उनके दफ्तर ने यह चेक किया था कि पासवान घर पर हैं या नहीं। वह बिना ऐलान किए, बिना किसी अपॉइंटमेंट और बिना किसी सूचना के वहां पहुंचीं। पासवान के लिए भी यह बेहद आश्चर्यजनक घटना थी, लेकिन वह सोनिया की गर्मजोशी, पहल और राजनीतिक सूझबूझ के कायल हो गए थे। पासवान की पार्टी उस वक्त अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता में थी और ऐसे में सोनिया का गठजोड़ बनाने के लिए उनके पास आना पासवान के लिए बड़ी बात थी। इसके बाद जो हुआ वह इतिहास है।

साल 2014, आम चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर दिल्ली का 12 जनपथ सुर्खियों में था। इस बार भाजपा के वरिष्ठ नेता रामविलास पासवान से मुलाकात करने आए थे। इस बैठक के बाद देर रात लोकसभा चुनाव में लोजपा और बीजेपी के गठबंधन की घोषणा हुई। इतिहास की ये दो घटनाएं बताने के लिए काफी हैं कि भारतीय राजनीति में रामविलास पासवान की यही अहमियत है। वे एक ही वक्त में दो विपरीत छोरों पर खड़े लोगों के बीच सहज स्वीकार्य हो सकते हैं। करीब पचास साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने ऐसा बखूबी कर दिखाया है।

सिविल सेवा से राजनीति

रिकार्ड वोटों से जीतने वाले, रिकार्ड नंबर आफ सरकार में रहने वाले मोदी सरकार के दलित चेहरा। खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान के राजनीतिक जीवन पर नजर डाले तो एक बेहद ही साधारण परिवार, राजनीति की कोई विरासत नहीं है, न कोई गॉडफादर और न ही ऊंची जाति के होने की ताकत। उस दौर में पासवान का राजनीति में टिक जाना ही भारतीय लोकतंत्र का चमत्कार है।  इतनी मामूली पृष्ठभूमि का एक नेता इतने दिनों तक शिखर के आसपास लगातार मौजूद है। राम विलास पासवान का जन्‍म 5 जुलाई 1946 के दिन बिहार के खगरिया जिले में एक दलित परिवार में हुआ था। पासवान ने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी से एमए तथा पटना यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया है। पासवान के प्रारंभ‍िक जीवन की बात करें तो छात्रजीवन के बाद वे पटना विश्वविद्यालय पहुंचे और परास्नातक तक की पढ़ाई की। बिहार पुलिस की नौकरी छोड़कर राजनीति के मैदान में उतरे रामविलास पासवान शुरू से ही राज नारायण और जयप्रकाश नारायण के फॉलोवर रहे हैं। उनसे काफी कुछ सीख कर आगे बढ़े। पासवान लोकदल के महासचिव नियुक्त हुए। इमरजेंसी के दौरान वे राजनारायण, कर्पूरी ठाकुर और सत्येंद्र नारायण सिन्हा के बेहद करीब थे। पासवान ने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1969 में लड़ा और वो चुनाव था संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई तो वे आंदोलनकारियों में शामिल होने के कारण गिरफ्तार कर लिए गए और लगभग दो साल जेल में बिताए। जेल से छूटने के बाद पासवान जनता पार्टी के सदस्य बने और संसदीय चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचे। 

हाजीपुर ने बनाया हीरो और दो बार चखाया हार का भी स्वाद

बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का मन-मिजाज अपने अगल-बगल के संसदीय क्षेत्र से जुदा है। हाजीपुर के संसदीय चुनाव के इतिहास पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि यहां के लोग अपने नेता को दिल में इस कदर बसा लेते हैं कि दूसरे के लिए दिल में कोई जगह ही नहीं बचती। साल 1977 में रामविलास पासवान ने 4.24 लाख वोट से चुनाव जीतकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया था। लेकिन उसके ठीक आठ बरस बाद चुनावी जीत का रिकॉर्ड कायम करने वाले पासवान उसी हाजीपुर से 1984 में भी हारे थे। 1983 में इन्होंने दलित सेना की स्थापना की। पासवान के अनुसार यह संगठन पूरी तरह से दलितों के उत्थान के लिए समर्पित था।  कांशीराम और मायावती की लोकप्रियता के दौर में भी, बिहार के दलितों के मज़बूत नेता के तौर पर लंबे समय तक टिके रहे हैं।  साल 1989 में पासवान हाजीपुर से जनता दल के टिकट पर पांच लाख से ज्यादा वोटों से चुनाव जीतकर एक नया रिकॉर्ड बना देते हैं। इस जीत के बाद वह वीपी सिंह की कैबिनेट में पहली बार शामिल किए गए और उन्हें श्रम मंत्री बनाया गया। 

राजनीति के मौसम वैज्ञानिक

मौसम वैज्ञानिक यानी जो पहले ही भांप ले की कौन जीतने वाला है और फिर वो उस दल या गठबंधन के साथ हो लेते हैं। पासवान परिवार की निष्ठा मौसम के हिसाब से बदलती रहती है। इसलिए उन्हें सियासत का मौसम वैज्ञानिक कहा जाता है। अतीत के पन्ने पलटेंगे तो रामविलास पासवान देवगौड़ा सरकार में भी मंत्री थे। 1999 में वायपेयी सरकार में भी मंत्री बने। 2004 में यूपीए की सरकार बनी तो पासवान वहां भी मंत्री बने। 2013 तक यूपीए में रहे लेकिन 2014 के चुनाव में पाला बदल लिया। 

छह प्रधानमंत्रियों के साथ किया है काम

पिछले तीन दशक में केंद्र की सत्ता में आए हर राजनीतिक गंठबंधन में शामिल रहे और मंत्री बने। राजनीतिक गलियारे में पासवान को इसीलिए विरोधी सबसे सटीक सियासी मौसम विज्ञानी का तंज भी कसते हैं। सियासी हवा का रुख भांपकर गठबंधन की बाजी चलने की यह काबिलियत ही है कि अपने अस्तित्व के करीब   तीन दशकों में लोजपा अधिकांश समय केंद्र की सत्ता का हिस्सा रही है। रामविलास पासवान के नाम छह प्रधानमंत्रियों की कैबिनेट में मंत्री के तौर पर काम करने की अनूठी उपलब्धि जुड़ी है। इनमें नेशनल फ्रंट, यूनाइटेड फ्रंट, एनडीए, यूपीए सब शामिल हैं। यूनाइटेड फ्रंट सरकार के कार्यकाल में चूंकि दोनों प्रधानमंत्री- एचडी देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल राज्यसभा के सदस्य थे, इसलिए उस दौरान पासवान लोकसभा में सत्ता पक्ष के नेता रहे। 

बाबू जगजीवन राम के बाद सबसे बड़ा दलित चेहरा

बाबू जगजीवन राम के बाद बिहार में दलित नेता के तौर पर पहचान बनाने के लिए उन्होंने आगे चलकर अपनी लोक जनशक्ति पार्टी(लोजपाकी स्थापना की। इसका सियासी सफर भी सत्ता की रोशनी से ही शुरू हुआ। वाजपेयी की एनडीए सरकार में मंत्री रहे पासवान का राजनीतिक कौशल ही रहा कि जिस जदयू से अलग होकर लोजपा बनी, वह भी एनडीए का हिस्सा बनी। लेकिन 2004 के चुनाव में एनडीए ने इंडिया शाइनिंग का क्या अंजाम होने वाला है इसे पासवान पहले भांप गए थे। 2004 के चुनाव के ठीक पहले रामविलास पासवान गुजरात दंगा के नाम पर एनडीए का साथ छोड़ यूपीए में शामिल हो गए। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में पासवान का दांव गलत बैठा। वो कांग्रेस का साथ छोड़कर लालू के साथ हो लिए। लेकिन इसका परिणाम ये हुआ कि वो अपनी हाजीपुर तक की सीट नहीं बचा पाए। जिसके बाद उन्हें पूरे पांच साल तक सत्ता सुख से वंचित होना पड़ा। ये और बात है कि उस वक्त लालू प्रसाद यादव की मदद से राम विलास पासवान राज्य सभा में पहुंचने में कामयाब हो गए थे। 2014 में मोदी लहर को भांप पासवान एनडीए में शामिल हो गए और अभी भी सरकार में मंत्री भी हैं। 

मीरा कुमार और मायावती से चुनावी भिड़ंत

बिजनौर लोकसभा सीट के लिए 1985 का साल बेहद ही खास है। जिस चुनाव में दलित राजनीति के उफान को पूरे उत्तर प्रदेश और बिहार ने महसूस किया। इस लोकसभा उप चुनाव का परिणाम चाहे जो रहा हो लेकिन इसके उम्मीदवारों ने अपनी जीत के लिए जी-तोड़ कोशिश की थी। 1985 के उप चुनाव के लिए एक महिला उम्मीदवार प्रचार के लिए सायकिल के सहारे थीं। अपने सायकिल के जरिये वो बिजनौर की गलियां छानते हुए लोगों से मिलते हुए अपनी जीत के लिए सत्ता की लड़ाई लड़ रही थीं। ये कोई और नहीं बल्कि बसपा सुप्रीमों मायावती थीं। जो अपना पहला लोकसभा उपचुनाव लड़ रही थीं। मायावती के मुकाबले एक और दलित चेहरा मैदान में था जो ब्रिटेन, स्पेन और मारीशस के भारतीय दूतावासों में अपनी सेवा देने के बाद उस चुनावी मैदान में उतरी थीं और वो नाम था बाबू जगजीवन राम की पुत्री मीरा कुमार का। लेकिन 1985 के इस चुनाव में एक और दलित नेता की एंट्री होती है। रामविलास पासवान ने भी बिजनौर का उपचुनाव लड़ा। बिजनौर का ये चुनाव भारतीय राजनीति को बदल देने वाला था। बड़े-बड़े दिग्गज के बीच घमासान हुआ। कांग्रेस, लोकदल और मायावती के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में मीरा कुमार ने अपने पहले ही चुनाव में दिग्गज दलित नेता रामविलास पासवान और बीएसपी प्रमुख मायावती को हरा दिया।  इस चुनाव में रामविलास पासवान दूसरे और मायावती तीसरे नंबर पर रहीं। 

2005 के चुनाव में किंग मेकर बनने की चाह में पूरी सियासत बिखर गई

2005 से 2009 रामविलास के लिए बिहार की राजनीति के हिसाब से मुश्किल दौर था। 2005 में वे बिहार विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने या लालू-नीतीश की लड़ाई के बीच सत्ता की कुंजी लेकर उतरने का दावा करते रहे। फिर अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री बनाने के बदले समर्थन की बात करते रामविलास की जिद राज्यपाल बूटा सिंह ने दोबारा चुनाव की स्थिति बनाकर उनकी राजनीति को और बड़ा झटका दिया। नवंबर में हुए चुनाव में लालू प्रसाद का 15 साल का राज गया ही, रामविलास की पूरी सियासत बिखर गई।  बिहार में सरकार बनाने की चाबी अपने पास होने का उनका दावा धरा रह गया. वे चुपचाप केंद्र की राजनीति में लौट आए।राम विलास पासवान का करीब छह फीसदी का वोट एक तरह से कंप्लीट ट्रांसफ़रबल माना जाता रहा है, यही वजह है कि राष्ट्रीय राजनीति में पासवान का जादू हमेशा कायम रहा है। यही वजह है कि हर कोई राम विलास पासवान को अपने साथ जोड़े हुए रखना चाहता है। बहरहाल, राम विलास पासवान अपनी पार्टी के तमाम फैसलों को लेने के लिए चिराग को अधिकृत कर चुके हैं। उनके पिता अपनी राजनीतिक चतुराई के लिए जाने जाते रहे हैं, अब ये चुनौती चिराग के सामने है।

एनडीए में शामिल हुई कृष्णा मार्डी की पार्टी झामुमो (उलगुलान)

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उज्ज्वल दुनिया /रांची ।  झारखंड में हो रहे उपचुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (उलगुलान) के समर्थन पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद दीपक प्रकाश ने कहा कि प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के विकास कार्य और जेपी नड्डा के नेतृत्व से प्रभावित होकर  झामुमो उलगुलान पार्टी ने एनडीए में शामिल होने का निर्णय लिया। आगामी उपचुनाव में इन्होंने एनडीए उम्मीदवार को समर्थन दिया है। इनके समर्थन से पार्टी को दोनों सीटों पर लाभ मिलेगा। 

झामुमो के परिवारवाद से आदिवासी समाज परेशान- दीपक प्रकाश 

 उन्होंने कहा कि दुमका और बेरमो उपचुनाव में कांग्रेस, झामुमो के वंशवाद की राजनीति एक बार फिर जनता के सामने आ गयी है। जनता इस उपचुनाव में वंशवाद की राजनीति करने वालों को सबक सिखाने के लिए तैयार है। झामुमो कांग्रेस की हार तय है 

9 महीने से राज्य का विकास कार्य ठप – कृष्णा मार्डी

 झामुमो उलगुलान पार्टी के अध्यक्ष व पुर्व सांसद कृष्णा मार्डी ने कहा कि राज्य की वर्तमान सरकार से झारखंड की जनता त्रस्त है। यूपीए ने इस राज्य को लूटने का कार्य किया है। कांग्रेस झामुमो राज्य की सत्ता झूठे वादे कर हाशिल की है। इनका झूठ बेनकाब हो गया है। झारखंड आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले भारतीय जनता पार्टी ने ही इस राज्य का भला किया है। अटल जी की सरकार ने अलग राज्य का सपना साकार किया एनडीए के शासन काल मे ही राज्य को विकास का रफ्तार मिला।  अब हेमंत की सरकार में ठप पड़ गया है। 

मालूम हो कि सरायकेला से दो बार विधायक व सिंहभूम लोकसभा सीट से सांसद रहे व झामुमो उलगुलान, मार्डी गुट के अध्यक्ष कृष्णा मार्डी ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के समक्ष समर्थन देने का ऐलान किया। श्री मार्डी ने सांसद रिश्वत कांड के बाद शिबू सोरेन के नेतृत्व वाली झामुमो से अलग होकर झामुमो (मार्डी गुट)का गठन किया था। आज इनकी पार्टी झामुमो(उलगुलान)है जो आज एनडीए में शामिल हुई।

दहेज मुक्त झारखंड संस्था ने हजारीबाग वृद्धा आश्रम में आर्सेनिक अल्ब दवा का वितरण किया

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उज्ज्वल दुनिया / हजारीबाग ।  हजारीबाग के वृद्धा आश्रम में दहेज मुक्त झारखंड संस्था के द्वारा  आयुष मंत्रालय भारत सरकार सीसीआरएच द्वारा प्रमाणित इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए होम्योपैथिक दवा  वितरण किया गया ,साथ ही फल बिस्किट खाने का सामग्री भी वितरण किया गया ,आज इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी सह संस्था के राष्ट्रीय संस्थापक डॉ आनंद कुमार साही के द्वारा  सभी लोगों का जांच कर होम्योपैथिक दवा वितरण किया गया डॉ आनंद कुमार शाही ने कहा कि कोरोना काल में ज्यादा से ज्यादा यूमिनिटी पावर बढ़ाने का जो भी जरूरत की समान है वह यूज़ करें ,उन्होंने यह भी कहा इस सामाजिक दूरियां साफ सफाई जरूर रखें । संस्था के जिला अध्यक्ष बीना मिश्रा ने कार्यक्रम की शुरुआत किया ।

बीना मिश्रा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम हम लोग गांव सुदूर क्षेत्रों में लगातार करेंगे इसके लिए मैं अपने संस्था का आभारी हूं ।महासचिव सुनीता झा ने कहा कि संस्था दहेज प्रथा के साथ-साथ सामाजिक कार्य भी करते आ रही है , जिला उपाध्यक्ष ज्योत्स्ना जी ने कहा के संस्था में सभी बहन बेटी बहू जुड़कर कार्य करें यह संस्था पूरा विस्तार ले चुकी है। 

वही संस्था के युवा जिला अध्यक्ष कुंदन कुमार का जन्मदिन भी वृद्ध आश्रम हजारीबाग में केक काटकर मनाया गया ,कुंदन कुमार ने कहा कि पिछले 2 वर्षों से हम वृद्धाश्रम में ही बुजुर्ग लोगों के बीच केक काटते हैं  समाजसेवी संगठन सचिव दयानंद कुमार ने संस्था से जुड़कर सभी क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं दयानंद कुमार ने कहा संस्था आज जितनी भी घटनाएं हो रही हैं बहू बेटियों के साथ दहेज को लेकर सबको संस्था अपने स्तर से कार्रवाई करवा रही है , आगे भी हम सब की कार्रवाई होती रहेगी लगातार हम लोग का प्रयास है कि लोगों को बीच जाकर दहेज प्रथा पर जागरूकता फैलाएं ।
 

कार्यक्रम में नगीना देवी, तिलोत्तमा देवी ,पूनम कुमारी ,अंशु देवी ,कुसुम देवी,पिंकी देवी ,सुनीता झा जोशना देवी,मंजू जी, बिना मिश्रा आदि मौजूद थीं । 

मंदिर के पुजारियों एवं दुकानदारों की समस्याओं को सुलझाया जाएगा

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उज्ज्वल दुनिया /रामगढ़ । रजरप्पा विश्व प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर रजरप्पा कोरोना संक्रमण के दौरान पिछले साढे छह महीनों से बंद रहने के बाद 8 अक्टूबर को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। मंदिर में आम श्रद्धालुओं को खोलने के बाद स्थानीय विधायक ममता देवी ने मंदिर जाकर पूजा अर्चना किया। पूजा अर्चना के बाद मंदिर के पुजारियों के साथ मंदिर परिसर में स्थित पंचवटी में बैठक आयोजित की गई। 

बैठक में पुजारियों ने विधायक ममता देवी को कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए गाइडलाइंस ने कुछ ऐसी निर्देश हैं। जिससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी हो रही है। श्रद्धालुओं को सुबह में एक घंटे के लिए बलि देने का आदेश मिला है। यह कहीं से भी जायज नहीं है। सुबह से आए श्रद्धालु बलि देने के लिए 5 से 6 घंटे तक कैसे इंतजार करेंगे। उनके साथ महिलाएं बच्चे होते हैं। श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पूजा करने के लिए 200 खर्च करने पड़ेंगे। ऐसे में लोग मंदिर कैसे आएंगे। पुजारियों ने विधायक से कहा कि अगर गाइडलाइंस में थोड़ी सी बदला हो जाती है तो श्रद्धालुओं को काफी आराम होगा। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। पुजारियों ने विधायक ममता देवी से स्पष्ट कर दिया कि अगर दिशानिर्देश में बदलाव नहीं किया गया तो हम लोग मंदिर बंद कर देंगे। पिछले 6 महीने से हम लोगों की स्थिति काफी खराब हो गई है। क्षेत्र के सभी दुकानदार बुरे स्थिति से गुजर रहे हैं। लोगों के सामने खाने पीने तक की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। ऐसे में यहां के प्रशासन को सोचना समझना पड़ेगा। 

मुख्यमंत्री से आज मिलेंगी विधायक ममता देवी 

स्थानीय पुजारियों एवं अन्य लोगों की बात सुनने के बाद विधायक ममता देवी ने कहा कि आप लोगों की बातें जायज है। जिला प्रशासन मनमानी कर रहा है। मंदिर के लिए आयोजित बैठक की जानकारी मुझे भी नहीं दी गई। प्रशासन का जो रुख है वह अच्छा नहीं है। पिछले 6 महीने से परेशान पुजारी और दुकानदार प्रशासन के बेरुखी से भूखे मरने के कगार पर पहुंच गए हैं। ममता देवी ने कहा कि मैं आज ही मुख्यमंत्री से मिलकर यहां के लोगों की समस्याओं का समाधान करूंगी। पूरे क्षेत्र में जगह-जगह बैरिकेडिंग कर दिया गया है। आम लोगों को मंदिर पहुंचने के लिए अपने वाहनों को लगभग 2 किलोमीटर पहले ही खड़ा करना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं को इससे काफी परेशानी हो रही है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार विधानसभा के लिए पांच उम्मीदवारों की घोषणा की

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उज्ज्वल दुनिया/रांची। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पांच सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। झामुमो ने राजद के नेतृत्व में बने महागठबंधन में सम्मानजनक राजनीतिक साझेदारी नहीं मिलने के कारण अकेले ताल ठोकने का ऐलान किया है। अब तक सात सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा झामुमो की ओर से की गई है। झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव में चरण दर चरण संगठन के साथ चर्चा करके सीटें तय की जाएंगी।

झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन के निर्देश पर बिहार विधानसभा की छह सीटों पर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि झामुमो ने संगठन की मजबूती के लिए बिहार में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही कह चुके हैं कि बिहार विधानसभा की जिन सीटों पर राजद के प्रत्याशी होंगे वहां दोस्ताना संघर्ष होगा। सुप्रियो ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में अन्य सीटों पर प्रत्याशी उतारने का निर्णय जल्द होगा। धीरे-धीरे पार्टी प्रत्याशियों की घोषणा करती रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी बिहार में दमदार तरीके से चुनाव लड़ेगी। झारखंड से भी मंत्री, नेता और पदाधिकारी बिहार चुनाव में प्रचार के लिए जाएंगे। 

बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो के अधिकृत प्रत्याशी

चकाई : एलीजाबेथ सोरेन
झाझा : अजीत कुमार
कटोरिया : अंजेला हांसदा
मनीहारी : फूलमणी हेम्ब्रम
धमदाहा : आशोक कुमार हांसदा

मथुरा

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भारतीय स्वभाव से हिन्दू है, इसका पूजा पद्धिति से कोई लेना देना नहीं

उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली, 09 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के बारे में कहा कि संघ अपनी ओर से कोई आंदोलन शुरू करना संघ के एजेंडे में नहीं रहता। उन्होंने कहा कि इन धर्मस्थानों के बारे में हिन्दू समाज क्या फैसला करता है, यह भविष्य की बात है। संघ प्रमुख ने एक साप्ताहिक पत्रिका विवेक को दिए साक्षात्कार में साफ तौर पर कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन भी  संघ ने शुरू नहीं किया था। 

हिंदू एक स्वभाव है,  इसका पूजा पद्धति से लेना-देना नहीं 

डॉ भागवत ने कहा कि भारत का एक स्वभाव है और इस स्वभाव को ही हम हिंदू कहते हैं और इसका पूजा पद्धति से कोई लेना देना नहीं है। साथ ही राष्ट्रीयता का भी पूजा पद्धति से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर भारतीय मुसलमान हिंदू है वह अरबी या तुर्की नहीं है। हम भारतीय हैं और इसका हमें विचार करना पड़ेगा।

समाज में कट्टरता के वातावरण का नुकसान हम सबको उठाना पड़ेगा 

सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने कहा है कि समय-समय पर कट्टरता का वातावरण पैदा होता है जिससे समाज को भटकना नहीं चाहिए भारत एक सनातन राष्ट्र है और हमारी पूजा पद्धति कोई भी हो हम इसका अंग हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान इतिहास के हर मोड़ पर एक साथ खड़े थे। भारत एवं भारत की संस्कृति के प्रति, व्यक्ति और पूर्वजों के प्रति गौरव के चलते सभी भेद मिट जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का निजी स्वार्थ होता है वह बार-बार अलगाव और कट्टरता फैलाने की कोशिश करते हैं। वास्तव में भारत ही एकमात्र देश है जहां सब लोग बहुत समय से एक साथ रहते हैं।

राम के जीवन का संस्कार अपनाना है, सिर्फ उनके नाम पर नारा नहीं लगाना है 

राम मंदिर निर्माण संबंधी प्रश्न के उत्तर में मोहन भागवत ने कहा कि राम का मंदिर केवल पूजा पाठ के लिए नहीं बन रहा है। हमारे राम का मंदिर तोड़कर हमें अपमानित किया गया। हमारे जीवन मूल्यों और आचरण को नकारा गया। अब हमें भव्य मंदिर बनाकर उन्हीं मूल्यों और आचरण को दोबारा जीवित करना है। राम मंदिर का निर्माण होने तक प्रत्येक व्यक्ति के अंदर अयोध्या का निर्माण होना चाहिए जहां उनके आदर्श राम विराजित हैं।

चीनी चुनौती का जवाब है आत्मनिर्भरता

चीन को वर्तमान की चुनौती बताते हुए भागवत ने कहा कि समाज जब भी आत्मनिर्भर होता है, तो वह अपनी आंतरिक शक्ति के कारण होता है। उसे लगता है कि चुनौतियां हमारे देश को झुका नहीं सकती। वर्तमान में देश में लोगों के अंदर ऐसी भावना है और इसके साथ दुनिया के अन्य देशों में जारी श्रेष्ठतम पद्धतियों अपनाकर हमें देश को आत्मनिरर्भता की ओर ले जाना चाहिए।