Wednesday 1st of July 2026 10:03:08 PM
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विधानसभा चुनाव से एक साल पहले करवट ले रही यूपी की राजनीति

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अजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधान सभा चुनाव होने हैं। बीजेपी सत्ता में रिटर्न होगी या फिर हमेशा की तरह यूपी के मतदाता इस बार भी ‘बदलाव’ की बयार बहाने की परम्परा को कायम रखेंगे ? अथवा 2017 की तरह मोदी का जादू फिर चलेगा। यह सवाल सबके जहन में कौंध रहा है। बस फर्क इतना है कि पिछली बार बीजेपी, मायावती-अखिलेश सरकार की खामियां गिना और वोटरों को सब्जबाग दिखाकर सत्ता में आई थी। वहीं अबकी से उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार को पांच साल का हिसाब- किताब देना होगा। ‘बीजेपी सरकार’ की बात इस लिए कही जा रही है क्योंकि 2017 का विधान सभा चुनाव बीजेपी बिना मुख्यमंत्री का चेहरा आगे किए मोदी के फेस पर लड़ी थी। योगी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला तो अप्रत्याशित रूप से चुनाव जीतने के बाद लिया गया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी की भले ही चैतरफा तारीफ हो रही हो, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि योगी जी अपने बल पर बीजेपी को 2022 विधान सभा चुनाव जीता ले जाने में पूरी तरह से सक्षम हैं।

2022 के विधान सभा चुनाव में परिस्थतियां एकदम बदली नजर आ रही हैं,जो भाजपा के सबसे अधिक अनुकूल नजर आ रही हैं। 2017 के विधान सभा चुनाव के समय की ‘यूपी को यह साथ पंसद है’ वाली राहुल-अखिलेश की जोड़ी टूट चुकी है। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में चर्चा का विषय रही बुआ-बबुआ के रिश्तों में ‘टूट’ पैदा हो गई है। मायावती ने तो अपने 65 वें जन्मदिन (15 जनवरी 2021) पर यहां तक ऐलान तक कर दिया कि 2022 में यूपी और उत्तराखंड के चुनाव उनकी पार्टी अकेले लड़ते हुए 2007 की तरह 2022 में भी अपने दम पर सरकार बनाएगी।? दरअसल, गठबंधन की सियासत में मायावती की समस्या कुछ अलक किस्म की ही है। बसपा जिस पार्टी के साथ गठबंधन करती है,उस पार्टी के पक्ष में बसपा के वोट तो आसानी से ट्रांसर्फर हो जाते हैं, लेकिन दूसरी गठबंधन पार्टी के वोटर बसपा के लिए वोटिंग करने की जगह दूसरी राह तलाश पकड़ लेते हैं ।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की बात की जाए तो वह इसी बात से संतुष्ट नजर आ रहे हैं कि उप-चुनावों में उनकी ही पार्टी भाजपा को चुनौती दे रही है। यानी सपा चुनाव जीत नहीं पाती है तो दूसरे नंबर पर तो रहती ही है। इसी को अखिलेश अपनी ताकत समझते हैं,जिस तरह से एक के बाद एक बसपा नेता हाथी से उतर कर साइकिल पर सवार हो रहे हैं उसे भी अखिलेश के हौसले बढ़े हुए हैं। सपा प्रमुख को सबसे अधिक मुस्लिम वोट बैंक पर भरोसा है, लेकिन जिस तरह से मात्र दलित वोट बैंक के सहारे बसपा सुप्रीमों मायावती सत्ता की सीढ़िया चढ़ने में नाकामयाब रहती हैं, उसी प्रकार से सपा सिर्फ मुसलमानों के सहारे अपनी चुनावी वैतरणी पार करने में नाकाम रहती है। बात वोट बैंक में सेंधमारी की कि जाए तो भीम सेना की नजर बसपा के दलित वोट बैंक में सेंधमारी की रहती है, वहीं ओवैसी,समाजवादी पार्टी के मुंस्लिम वोट बैंक में हिस्सेदारी करने को आतुर हैं। कुछ सीटों पर जहां बसपा मुस्लिम प्रत्याशी उतारती है,वहां उसके(बसपा)भी पक्ष में मुसलमान लामबंद होने से गुरेज नहीं करते हैं।

इस बार के विधान सभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी और ओवैसी के ताल ठोंकने से सियासत का रंग कुछ चटक जरूर हुआ है, लेकिन यह पार्टियां क्या गुल खिला पायेंगी,यह सब भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है। जहां तक ओवैसी की पार्टी की बात है तो उसके कूदने से समाजवादी पार्टी को ज्यादा नुकसान होता दिख रहा है। अपने पहले दौरे के दौरान ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलकर अपने इरादे भी स्पष्ट कर दिए हैं।

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वाराणसी पहुंचते ही मीडिया से बातचीत में तंज कसते हुए कहा प्रदेश में जब अखिलेश यादव की सरकार की थी तो हमें 12 बार प्रदेश में आने से रोका गया था। अब मैं आ गया हूं। सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के साथ गठबंधन किया है, मैं दोस्ती निभाने आया हूं। ज्ञातव्य हो, सुभासपा ने 2017 में भाजपा से यूपी विधान सभा चुनाव के लिए गठबंधन किया था।

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में कांगे्रस भी एक ‘कोण’ बनना चाहती है। याद कीजिए जब 2019 के लोकसभा चुनाव के समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी प्रियंका वाड्रा ने संभाली थी, तब राहुल गांधी ने मीडिया से कहा भी था कि हमारी नजर 2022 के विधान सभा चुनाव पर हैं। 2022 के विधान सभा चुनाव में अब साल भर से कुछ ही अधिक का समय बचा है,लेकिन पिछले डेढ़- दो वर्षो में कांग्रेस की दिशा-दशा में कोई खास बदलाव आया हो, ऐसा दिखाई नहीं देता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस मात्र रायबरेली संसदीय सीट जीत पाई थी, जहां से यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी स्वयं मैदान में थीं। राहुल तक अमेठी से चुनाव हार गए थे। इसके बाद तो राहुल गांधी ने यूपी की तरफ से मुंह ही फेर लिया। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव के पश्चात हुए तमाम उप-चुनावों में भी कांग्रेस की ‘लुटिया’ बार-बार डूबती रही। अपवाद को छोड़कर प्रत्येक उप-चुनाव में कांगे्रस प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा पाए।

बात बीजेपी आलाकमान की योगी पर भरोसे की कि जाए तो इसमें कई पेंच हैं। बीजेपी आलाकमान की सबसे बड़ी चिंता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली को लेकर है। योगी ‘वन मैन आर्मी’ की तरह काम करते हैं और अपनी ही पार्टी के नेताओं/जनप्रतिनिधियों की बजाए नौकरशाही/अफसरशाही पर ज्यादा भरोसा करते हैं। योगी पर यह भी आरोप लगता है कि वह नौकशाही/अफसरशाही में मौजूद ठाकुर लॉबी के प्रति साफ्ट कार्नर रखते हैं,जबकि ब्राहम्णों के प्रति योगी का नजरिया हमेशा तंग रहता है। सबसे पहले करीब डेढ़ वर्ष पूर्व हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या के बाद योगी सरकार के खिलाफ आक्रोश तेज हुआ था। इस घटना को लेकर यूपी के ब्राह्मण वर्ग में काफी नाराजगी देखने को मिली थी।


ब्राह्मणों के तमाम संगठन आरोप लगा रहे हैं कि योगी सरकार में ब्राहम्णों पर अत्याचार बढ़ा है और कहीं उनकी सुनवाई नहीं की जा रही है। कमलेश तिवारी मर्डर केस समेत ब्राहम्णों के दर्जनों ऐसे मर्डर केस हैं जिनमें सरकार की ओर से घोर लापरवाही की गई। इसका खामियाजा पीड़ित पक्ष को भुगतना पड़ा। इसी कारण ब्राह्मणों में योगी सरकार के खिलाफ रोष बढ़ रहा है। अखिल भारतीय ब्राहम्ण महासभा (रा.) के अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी का कहना है कि यूपी में उन्होंने तमाम सरकारें देखीं लेकिन ब्राह्मणों के साथ सबसे अधिक नाइंसाफी इस सरकार में हुई।


खैर, योगी पक्षपात करते हैं यह बातें भले हकीकत से दूर हो, लेकिन विपक्ष तो इसको मुद्दा बनाए हुए हैं ही। कांगे्रस नेता जितिन प्रसाद तो कई बार योगी पर ब्राहमणों के खिलाफ नाइंसाफी का आरोप लगा चुके हैं। कानपुर के गैंगस्टर और पुलिस के हत्यारे विकास दुबे को योगी पुलिस ने जिस तरह से एनकांउटर में मारा उससे भी ब्राहमणों में नाराजगी बढ़ी है। लब्बोलुआब यह है कि योगी ने भले अपने कामकाज से लोगों का दिल जीता हो,लेकिन सामाजिक समीकरण साधने में वह पूरी तरह से असफल रहे। योगी की यही कमी चुनाव में भाजपा के लिए मुसीबत बन सकती है।

नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगी ममता बनर्जी

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी और सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के बीच सियासी जंग तेज होती जा रही है. इस बीच, टीएमसी सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा ऐलान किया है. ममता ने मई में होने वाले विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम से लड़ने का सोमवार को ऐलान किया. यह घोषणा अहम है क्योंकि नंदीग्राम टीएमसी के बागी नेता सुवेंदु अधिकारी का गढ़ है, जो हाल में टीएमसी से अलग होकर बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस व वाममोर्चा में नहीं बनी सहमति

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कोलकाता :बंगाल में इस वर्ष विधानसभा चुनाव कांग्रेस और वाममोर्चा गठबंधन कर लड़ेंगे। सीटों के बंटवारे को लेकर रविवार को कोलकाता में दोनों दलों की संयुक्त बैठक हुई जिसमें फिर कोई नतीजा नहीं निकला। इसमें दोनों दलों के वरिष्ठ नेतागण उपस्थित थे। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने 120 से 130 सीटों की मांग की है जिस पर वाममोर्चा सहमत नहीं है वाममोर्चा के घटक दलों के साथ मोर्चा के चेयरमैन विमान बोस ने बैठक का नेतृत्व किया। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस 120-130 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। कांग्रेस पिछली बार 92 सीटों पर गठबंधन के तहत चुनाव लड़ी थी। इस बार वह अधिक सीट की मांग कर रही है। वाममोर्चा कांग्रेस को इतनी सीटें देने के लिए तैयार नहीं है।

बंगाल में भाजपा निकालेगी पांच रथ यात्रा

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कोलकाता, विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा बंगाल में पांच रथ यात्रा निकालने की रणनीति बना रही है। यह पांच रथ यात्राएं अलग-अलग क्षेत्रों से निकलेंगी। रथ यात्रा प्रदेश की सभी 294 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी। भाजपा ने एक रणनीति के तहत राज्य के लोगों तक पहुंचने के लिए रथयात्रा को अपना माध्यम बनाने का फैसला किया है। इस दौरान आम लोगों से अपील की जाएगी कि वे बंगाल में सत्ता परिवर्तन के लिए अपना वोट भाजपा को देकर सरकार बनाने का मौका दें, ताकि बंगाल को सोनार बांग्ला बनाया जा सके। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि फरवरी के पहले या दूसरे सप्ताह में रथयात्रा की शुरुआत हो सकती है।

जौहर यूनिवर्सिटी भूमि का किया जाएगा अधिग्रहण

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रामपुर (उत्तर प्रदेश) । रामपुर जिला प्रशासन द्वारा मौलाना मुहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ी 173 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए आदेश जारी किया गया है, जो समाजवादी पार्टी के सांसद मोहम्मद आजम खान के परिवार द्वारा संचालित और उनकी स्वामित्व में है। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) जे.पी. गुप्ता की अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाया कि ट्रस्ट ने जमीन खरीदते वक्त राज्य सरकार के मानदंडों का उल्लंघन किया है, जिसके चलते उप-विभागीय मजिस्ट्रेट को आदेश दिया गया कि वह जमीन का अधिग्रहण करें।

अतिरिक्त जिला सरकारी वकील (एडीजीसी-सिविल) अजय तिवारी ने कहा, “ट्रस्ट ने सरकारी आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें उन्हें सिर्फ इस शर्त के आधार पर 12 एकड़ से अधिक जमीन की खरीद की अनुमति दी थी गई कि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।”

इसमें कहा गया था कि ट्रस्ट अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी के लोगों से संबंधित जमीन को नहीं खरीद सकेगा और न ही इनके द्वारा नदी के किनारे या इसके आसपास के क्षेत्रों व ग्राम समाज भूमि या ‘चक’ सड़क से संबंधित भूमि को खरीदा जा सकेगा, लेकिन ट्रस्ट ने इन शर्तों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश राजस्व अधिनियम की धाराओं का भी उल्लंघन किया है।

एडीजीसी ने आगे कहा, “अदालत ने इससे पहले सीतापुर जेल में बंद ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान को नोटिस और समन जारी किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार करने से इंकार कर दिया।”

जनवरी 2020 में प्रयागराज में एक राजस्व बोर्ड की अदालत द्वारा सरकार को रामपुर में 12 दलित किसानों से जबरन खरीदी के लिए लगभग 100 बीघा जमीन के अधिग्रहण का आदेश दिया गया था। राजस्व बोर्ड ने पाया कि खान ने उप्र जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम की धज्जियां उड़ा दी थी।

खान 500 एकड़ की जमीन पर फैले मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के कुलपति हैं, जिसे 2006 में स्थापित किया गया था। वह इसे संचालित किए जाने वाले ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, जबकि उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और दोनों बेटे ट्रस्ट के सदस्य हैं। आजम की बड़ी बहन ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष हैं।

एटीएस ने यूपी में 3 और दिल्ली में 5 स्थानों पर मारे छापे

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने वित्तीय धोखाधड़ी का पता चलने के बाद राज्य में तीन स्थानों और दिल्ली में पांच स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें एटीएम कार्ड का उपयोग किए बिना दिल्ली में बैंकों से लाखों के लेनदेन किए गए।प्रशांत कुमार, ADG (कानून-व्यवस्था) ने बताया कि एटीएस को जानकारी मिली कि एक गिरोह फर्जी ID के आधार पर सिम कार्ड प्राप्त कर ऑनलाइन बैंक खाते खोलकर अपराधिक गतिविधियों से प्राप्त धनराशि का आदान-प्रदान कर रहे हैं। अभी तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच जारी है ।

पुलिस महानिरीक्षक, एटीएस, जी.के. गोस्वामी ने कहा कि मोबाइल फोन का उपयोग कर एक नए प्रकार की धोखाधड़ी की गई।

उन्होंने कहा, यह भी सामने आया कि ये नंबर फर्जी पहचान पत्र के साथ संचालित किए जा रहे थे।

अधिकारियों ने कहा कि पहले तलाशी राज्य के संभल, अमरोहा और मुरादाबाद में की गई, जहां से कुछ गुप्त दस्तावेज बरामद किए गए।

बाद में, दिल्ली में पांच स्थानों पर छापे मारे गए।

कृषि कानूनों का विरोध करते

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दिल्ली की सीमा से सटे सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि जब तक कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर दिया जाता, तब तक वे टीके नहीं लगवाएंगे। किसानों ने कहा कि वे तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने से पहले अपने गृह राज्यों में जानकर वैक्सीन लेने के लिए राजधानी नहीं छोड़ेंगे ।

मोगा जिले के ढुडिके गांव के रहने वाले और कीर्ति किसान संघ के सदस्य चामकोर सिंह ने कहा कि हमने कई डॉक्टरों को यह कहते सुना है कि कोरोना पहले से मौजूद था और कम प्रतिरक्षा वाले लोगों को प्रभावित करता था। यहां सड़कों पर हजारों गरीब लोग रहते हैं, जिनके पास हाथ धोने या मास्क पहनने का कोई साधन नहीं है। वे कैसे मैनेज कर रहे हैं? हम मानते हैं कि कृषि कानूनों को बिना किसी प्रतिरोध के पारित करने के लिए लॉकडाउन सरकार का सिर्फ एक हथकंडा था।

वहीं, दबिंदर सिंह ने कहा कि अगर हमें कोरोना होगा तो हम टीकाकरण करवाएंगे, अन्यथा नहीं लगवाएंगे। प्रदर्शनकारियों की भीड़ में कई अन्य लोगों ने कहा कि उन्हें कोविड-19 बीमारी की मृत्यु दर को लेकर सरकार के दावों पर भरोसा नहीं है। फिरोजपुर के मरुर गांव के किसान 28 वर्षीय बलप्रीत सिंह ने कहा कि हम पहले दिन से ही यहां हैं और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना असंभव है। फिर भी हमारे 100-200 लोगों के समूह में किसी को भी अब तक कोरोना नहीं हुआ। बीमारी से ज्यादा घातक बीमारी का डर होता है।

वुहान की गुफा मेें गये थे वैज्ञानिक, चमगादड ने काटा और दुनिया में फैल गया कोरोना

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पूरी दुनिया में कोहराम मचाने वाले कोरोना वायरस के जन्मदाता चीन के बारे में एक बड़ा खुलासा हुआ है। चीनी मीडिया का 2 साल पुराना वीडियो सामने आया है। जिसमें नजर आ रहा है कि गुफाओं में वायरस पर खोज कर रहे वैज्ञानिकों को चमगादड़ों ने काट लिया है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब कोरोना वायरस आखिर कहां से फैला इस बारे में पता करने के लिए WHO की टीम वुहान पहुंची है। इस बीच यह मामले सामने आया है। वुहान लैब वैज्ञानिकों ने माना है कि रहस्यमय गुफाओं से चमगादड़ के नमूने लेते समय कुछ चमगादड़ों ने काट लिया है।

वैज्ञानिकों की यह टीम दो साल पहले सार्स वायरस (SARS) का पता लगाने गुफाओं में पहुंची थी। खास बात यह है कि इस वीडियो में नजर आ रहा है कि एक्सपर्ट्स न तो गुफा में सुरक्षा का ध्यान रख रहे हैं और न ही लैब में सैंपल को लेकर कोई सावधानी बरत रहे हैं। ये चीनी गुफाएं कोरोना वायरस से संक्रमित चमगादड़ों का घर माना जाता है।

ताइवान न्यूज के मुताबिक, 29 दिसंबर 2017 को चीन के एक सरकारी टीवी चैनल ने वीडियो जारी किया था, जिसमें चीन की बैट वुमन कही जाने वाली शी झेंगली और उनकी टीम सार्स की उत्पत्ति का पता लगाने निकले थे। यह जानते हुए कि गुफा में मौजूद चमगादड़ खतरनाक और संक्रामक साबित हो सकते हैं।

वीडियो में वैज्ञानिकों को सुरक्षा मानको को ताक पर रखकर काम करते देखा जा सकता है। बॉयोसेफ्टी लेवल 4 की लैब कही जाने वाली वुहान लैब के वैज्ञानिकों ने इनमें से कुछ लोग तो टी-शर्ट पहने हुए हैं और कुछ वैज्ञानिक बेफिक्र होकर बगैर ग्लव्स और PPE किट के चमगादड़ों को पकड़े दिखाई दे रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि टीम में मौजूद एक सदस्य को चमगादड़ ने काट लिया। 

वुहान लैब में रिसर्च करने वाले एक वैज्ञनिक ने बताया कि चमगादड़ के जहरीले दांत मेरे रबर के दस्ताने में घुस गए और ऐसा लगा जैसे मेरे हाथ में सूई घुस रही हो। इसके बाद वीडियो में एक शख्स के हाथ दिखाए जाते हैं जो चमगादड़ के काटने से सूज गए हैं। इसके बाद वीडियो में यह भी बताया जा रहा है कि इन चमगादड़ों में कई वायरस होने का खतरा है। वीडियो में कई बार रिसर्चरों को चमगादड़ों को नंगे हाथों पकड़े देखा जा सकता है।

ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर ने 6 साल की मासूम से किया दुष्कर्म का प्रयास

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पुलिस गिरफ्त में आरोपी शिक्षक

ट्यूशन पढाने वाले शिक्षक ने नावालिग के साथ किया दुष्कर्म का प्रयास


गिरिडीह/डुमरी: डुमरी के निमियाघाट थाना क्षेत्र में शनिवार की शाम गुरु और शिष्य का रिस्ता हुआ कलंकित। थाना क्षेत्र की रहने वाली एक नाबालिग लड़की ने ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षक पर बाथरूम में ले जाकर यौन शोषण करने के प्रयास का आरोप लगाया है।  6 साल की नाबालिक बच्ची शिक्षक के घर ही ट्यूशन पढ़ने जाया करते थी। जहां शिक्षक ने बच्ची को अकेला देखकर अपने घर के बाथरूम में ले जाकर गलत हरकत करने का प्रयास किया। जिसके बाद बच्ची ने घर आकर पूरी घटना की जानकारी अपने परिजनों को दी। 

जानकारी मिलने के बाद परिजन इसकी लिखित शिकायत पुलिस से किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया है।  इस बावत पुलिस ने कांड संख्या 8/21 के तहत मामला दर्ज करते हुए धारा 376ए, 376बी, 376सी तथा पोक्सो एक्ट 21 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी दौलत साव पिता सोमर साव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और नाबालिक बच्ची को मेडिकल चेक अप के लिए गिरिडीह भेज दिया है।

राज्य के राजस्व बढ़ाने की चिंता छोड़ उगाही में लगी है सरकार: अमित मण्डल

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राज्य के राजस्व बढ़ाने की चिंता छोड़ अपने उगाही में लगी है हेमन्त सरकार: अमित मण्डल   


रांची । गोड्डा विधायक अमित मंडल ने कहा कि हेमन्त सरकार अपनी विफलता छिपाने के लिए कई तरह से प्रोपगेंडा चला रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के नाम पर राज्य सरकार अपनी विफलता छिपा रही है।,उपर से केंद्र सरकार पर सहयोग नहीं करने का रोना रोती रही है।जबकि यूपी, बिहार औऱ अन्य राज्यों में खूब काम हुए हैं।वास्तव में हालत यह है कि राज्य में आर्थिक गतिविधियां सरकार की नादानी से बंद है।टैक्स वसूली के लिये कैसे मैकेनिज्म ठीक करें, इस पर कोई काम नहीं हुआ है। वाणिज्य कर विभाग में ही मैनपावर की भारी कमी रही है। एक साल में प्लानिंग के तहत इसे मजबूत नहीं किया जा सका।राज्य सरकार खजाना खाली होने का रोना रोती रही है।


अमित मंडल ने कहा कि कोल ब्लॉक नीलामी मामले पर जानबूझकर केंद्र का विरोध किया। 9 ब्लॉकों की नीलामी यहां होती तो राज्य को बहुत राजस्व प्राप्त होता,पर अवैध माइनिंग में लगे सरकार में बैठे लोग, अधिकारियों एवं माफियाओं के लाभ को देखते हुए इसमें पहल नहीं की । राज्य सरकार ने 17000 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया था।प्रतिमाह आमद में 1400 करोड़ का टारगेट था। पर कमर्शियल टैक्स कलेक्शन बेहद खराब रहा है।अक्टूबर 2020 तक मात्र 31 फीसदी ही कलेक्शन हुआ है,यह चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि कमर्शियल टैक्स की वसूली पर ही राज्य के विकास का आधार तय होता है। कलेक्शन का मैकेनिज्म अगर कोलैप्स कर जाये तो विकास कार्यों के लिये गंभीर संकट खड़ा हो जाता है।इसके लिए राज्य सरकार को गंभीरता दिखाने की जरुरत है।रघुवर सरकार ने टैक्स कलेक्शन का मिसाल कायम  किया था।


अमित मंडल ने कहा कि सत्ता में आने से पहले इस सरकार ने कई वायदे किये थे लेकिन जब निभाने की बारी आयी तो मुकरने लगे। यह गठबंधन सरकार ठगबंधन साबित हो रहा। जब हेमन्त सोरेन सरकार सत्ता में आयी तो रघुवर सरकार के खिलाफ श्वेत पत्र लाकर नौटंकी किया। इसके बाद समस्याओं को ठीक करने पर क्या हुआ, बताने दिखाने की स्थिति में सरकार नहीं है।यह सरकार अपनी फजीहत ही कराई है ।


सरकारी खजाना भरने की जगह वसूली में जुटे हैं लोग- किशुन दास


सिमरिया विधायक किशुन कुमार दास ने कहा कि हेमन्त सोरेन की सरकार में राज्य का खजाना भरने की बजाय सरकार में बैठे लोग, अधिकारी एवं माफियाओं अपने अपने व्यक्तिगत राजस्व की वसूली में लगे हुए है।आगे श्री दास ने कहा कि चतरा में एशिया के सबसे बड़ा कोल माइंस है।वहां खुले आम बहुत बड़े पैमाने पर अवैध खेला चल रहा है।संथाल परगना जे तालझाडी में स्टोन माइंस के खदानों में दिन दहाड़े अवैध माइनिंग चल रहीं है।अधिकारियों एवं माफियाओं के साठ गांठ में प्रति ट्रक 1300 रुपया की अवैध कलेक्शन चल रहा है।झामुमो की विधायक सीता सोरेन लगातार सरकार पर अवैध माइनिंग को लेकर ट्वीट करते रही है,लेकिन अवैध पैसे की कमाई में अपनी विधायक की बात को भी यह सरकार अनसुना कर रही है।

भीड़ भरे बाजार में माओवादियों ने कोयला कारोबारी को मारी गोली

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कोयला कारोबारी परमेश्वर साव का मृत पड़ा शरीर

 उज्जवल दुनिया संवाददाता/ गीतांजलि


सिमरिया। सिमरिया थाना के पिरी बाजार में कथित तौर पर हथियार बंद माओवादियों के दस्ता ने रविवार को पिरी निवासी परमेश्वर साव पिता ठाकुर मणि साव की हत्या गोली मार कर कर दी। घटना के बाद उग्रवादियों ने नारा लगाते हुए जंगल की ओर चले गए।हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि परमेश्वर की हत्या उन्हीं लोगों ने की। जिसके साथ वह बाजार में बैठा था। जिस समय उसकी हत्या हुई, उस वक्त वह पीरी स्वास्थ्य उपकेंद्र के पीछे बैठा हुआ था। जिनके साथ परमेश्वर बैठा हुआ था, सभी उसके जान पहचान के थे। इस घटना के बाद बाजार में अफरा तफरी मच गया। परमेश्वर कोयला और ईट का धंधा करता था।

परमेश्वर के पिता की हत्या भी उग्रवादियों द्वारा किया गया था। घटना की सूचना मिलते ही शिला और सिमरिया पुलिस घटनास्थल पर पहुंच कर छापामारी शुरु कर दी है। समाचार लिखे जाने के समय तक पुलिस माओवादियों की टोह लेने के लिए जंगल में टोह ले रहे थे।

शाहनवाज हुसैन को MLC बनाकर क्या संदेश दे रहे हैं मोदी

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शाहनवाज हुसैन को पार्टी ने MLC उम्मीदवार बनाया है

सैय्यद शाहनवाज हुसैन 2014 में भागलपुर से लोकसभा चुनाव हार गए, 2019 में उन्हें टिकट तक नहीं दिया गया । इसके साथ ही राजनीतिक पंडितों ने कहना शुरू कर दिया कि शाहनवाज हुसैन मोदी-शाह युग के उपेक्षित नेताओं में से एक हैं ।

कश्मीर में मेहनत का मिला इनाम

शाहनवाज हुसैन ने धीरज नहीं खोया । जब भी मौका मिलता, वे टेलीविजन डिबेट में पार्टी का बचाव करते रहे । पार्टी ने उन्हें कश्मीर भेजा…कश्मीर में हाल ही में हुए चुनाव में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन के पीछे भी शाहनवाज हुसैन का जमीन पर की गई मेहनत का हाथ है । श्रीनगर से भाजपा के विजयी एजाज हुसैन बताते हैं- “शाहनवाज हुसैन (हम प्यार से उन्हें शाहनवाज भाई बुलाते हैं) वैसे इलाकों में बिना तामझाम चले जाते थे जहां हम कश्मीरी होते हुए भी जाने से डरते हैं । मना करने पर बोलते कि “वो लोग भी तो आप-हम जैसे इंसान ही हैं, बिना मतलब क्यों मार देंगे? ”

सुशील मोदी की जगह भरेंगे शाहनवाज हुसैन?

सुशील मोदी की बिहार की राजनीति से विदाई हो गई है । उन्हें राज्यसभा भेजा जा चुका है । सुशील मोदी द्वारा खाली की गई सीट से शाहनवाज हुसैन को MLC बनाकर पार्टी ने एक साथ कई संदेश दिए हैं । बिहार की मौजूदा राजनीति में कोई ऐसा नेता नहीं दिखता जो जनता को सर्वमान्य हो। पार्टी भविष्य में बिहार में अकेले अपने दम पर सरकार बनाना चाहती है । इसके लिए उसे ऐसे चेहरे की तलाश है, जिसे सीएम उम्मीदवार बनाया जा सके । मौजूदा बिहार भाजपा में अपनी-अपनी जाति-बिरादरी के नेता तो हैं, लेकिन सीएम के रुप में सर्वमान्य चेहरा कोई नहीं ।

शाहनवाज हुसैन बिहार की राजनीति में कहां?

गुजरात में मोदी ने विजय रुपाणी को सीएम बनाया है जबकि वहां जैन समुदाय की संख्या एक प्रतिशत से भी कम है । उसी तरह महाराष्ट्र में मराठा दलित और पाटिल के दबदबे वाली राजनीति में भाजपा ने देवेन्द्र फडनवीस जैसे ब्राह्मण चेहरे को सीएम बनाया । तो फिर बिहार भाजपा का मुख्यमंत्री का चेहरा एक “सैय्यद” मुसलमान क्यों नहीं हो सकता ?

क्या नया प्रयोग करना चाहती है भाजपा?

इसके पीछे सामाजिक कारण भी हैं । पसमंदा मुसलमानों को लेकर जो एक्सपेरिमेंट नीतीश कुमार ने किया था, वही प्रयोग भाजपा “शेख”, “सैय्य”द और “पठान” को लेकर करना चाहती है । बिहार के मुसलमानों में शेख, सैय्यद और पठान उच्च जाति और पढ़े लिखे माने जाते हैं । वहां ‘राड” और “अशराफ” की चर्चा समाज के बीच होती रहती है । गुजरात में बोहरा और अहमदिया, लखनऊ में शिया अगर भाजपा के वोटर हो सकते हैं तो फिर बिहार में शेख, सैय्यद और पठान भाजपा को क्यों नहीं वोट देंगे , खासकर तब जब पार्टी के पास “सैय्यद शाहनवाज हुसैन” जैसा सर्व स्पर्षी चेहरा हो ।

क्या भाजपा के पारंपरिक वोटर और बिहार भाजपा के घाघ नेता शाहनवाज हुसैन को कबूल करेंगे?

बिहार के समाज में उतना सांप्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं है जितना गुजरात, यूपी एमपी या महाराष्ट्र में है । बिहार भाजपा के पारंपरिक वोटर लालू और जंगलराज से त्रस्त होकर पार्टी के साथ जुड़े थे । गिरिराज सिंह तमाम उलूल-जुलून बयानबाज़ी के बावजूद बिहार भाजपा के कैडर वोटर्स का स्वीकार्य चेहरा नहीं बन सकें । तो क्या पार्टी ने शाहनवाज हुसैन के रुप में “उदारवादी चेहरे” को सामने लाने का विचार किया है?

अबतक दिल्ली की राजनीति करते आ रहे शाहनवाज हुसैन की बिहार की राजनीति में एंट्री तो तो गई, लेकिन उनकी राह आसान नहीं । बिहार भाजपा में दो-दो दशक से जमे कई ऐसे नेता हैं जिनकी इच्छा सीएम की कुर्सी पर बैठने की है । कुछ ऐसे भी हैं जो “सीनियरिटी कॉम्पलेक्स ” के शिकार हैं । ये लोग शाहनवाज हुसैन को इतनी आसानी से पैर जमाने देंगे, ऐसा लगता तो नहीं है ।

बाइक से आए, सरेआम गोलियों से छलनी किया और आराम से चले गए

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चंदवा: घटना के बाद दहशत में हैं लोग

लातेहार । चंदवा  के थाना क्षेत्र से करीब 20 किमी दूर डूमारो पंचायत स्थित कुर्मीटोला में शनिवार की शाम अज्ञात अपराधियों ने ढ़ोटी निवासी सरजू गंझू (36 वर्ष) की गोली मारकर हत्या कर दी। सरजू घटना के समय अपने ससुराल के आंगन में बैठा हुआ था । अचानक से दो बाइक में आये चार अपराधियों ने सरजू को नजदीक से गोली मार दी।

एक गोली सरजू के गले के पास लगी,घटनास्थल में ही सरजू की मौत हो गयी। अचानक हुई ताबड़तोड़ फायरिंग से पूरे इलाके में दहशत मच गया। परिजनों के चीख-चीत्कार बाद लोग जुटे।

घटना के बाद शोक संतप्त परिवार

मृतक सरजू इन दिनों मनरेगा से जुड़े हुए कार्यों को करता था। मृतक के चार बच्चे है जिनमें तीन लड़की और एक लड़का है। मृतक ने दो शादी की थी,दूसरी पत्नी के घर में उक्त घटना हुई है। इस घटना के संबंध में पूछने पर थाना प्रभारी मदन कुमार शर्मा ने बताया कि घटना हुई है,पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है।

ओरमांझी हत्याकांड सुलझाने में पुलिस की भूमिका सराहनीय

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सूफिया परवीन हत्याकांड के बहाने समाज में नफ़रत फैलाने वाले भाजपा नेता केस सॉल्व होते ही दुबक गए

सूफिया परवीन हत्याकांड में पुलिस ने जिस तरह मामले को उजागर किया इसके लिए झारखंड पुलिस का कार्य काबिले-तारीफ है। उक्त बातें झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अजय नाथ शाहदेव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है।

अजयनाथ शाहदेव ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने इस मामले में झूठी सुचनाएं फैला कर लोगों के बीच में जो भ्रम पैदा करने का जो काम किया वह निकृष्ट राजनीति का एक ज्वलंत उदाहरण है। लाश पर राजनीति करने के भाजपा का बेहद घटिया तरीके को झारखंड पुलिस ने जिस तरह से पर्दाफाश किया है कि शर्म के मारे भाजपाई दुबक गए हैं।

उन्होंने कहा कि इस मामले में अपराधियों को गिरफ्तारी हो चुकी है और अभी तक किसी भी भाजपा नेता ने न तो बयान जारी किया है और न ही मृतक के परिजनों से संवेदना व्यक्त किया है।


अजयनाथ शाहदेव ने कहा कि महागठबंधन की सरकार में अपराधियों की कोई खैर नहीं है और न ही अपराध करने के बाद कोई बच पाएगा। सरकार इमानदारी से काम कर रही है और सभी को हक अधिकार और न्याय दिलाने के लिए कटिबद्ध है।

उन्होने कहा कि झारखंड भाजपा के शीर्ष नेताओं में थोड़ी भी शर्म बची हो तो वे अपने ही पार्टी के नेताओं द्वारा अबला महिलाओं के यौन शोषण और जान से मारने की धमकी वाले प्रकरणों पर भी विचार व्यक्त करें।

केंद्र पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को NSUI ने काला झंडा दिखाया

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बीजेपी युवा मोर्चा और NSUI के बीच झड़प 

रांची । कांग्रेस छात्र संगठन NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष इंदरजीत सिंह के नेतृत्व में केंद्र मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री और इस्पात मंत्री के रांची आगमन पर पेट्रोल डीजल एवं गैस के बढ़ते दामो को लेकर हिनू एयरपोर्ट के समीप काला झंडा दिखाया गया।

मौके पर पुलिस प्रशाशन ने सख्ती दिखाते हुए झंडा छीन लिया। जैसे ही केंद्र मंत्री की गाड़ी पहुंची उसी समय बीजेपी युवा मोर्चा और NSUI कार्यकर्ता के बीच झड़प हो गई । इसमें कई कार्यकर्ताओं को चोट लगी। इंदरजीत सिंह ने कहा कि बीजेपी वाले चाहे लाठी चलाये या गोली विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।