Saturday 4th of July 2026 08:49:58 PM
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संजीव सिंह को धनबाद से दुमका कारा शिफ्ट करने पर जेल प्रशासन को शोकॉज

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किसके इशारे पर संजीव सिंह को दुमका जेल शिफ्ट किया गया ?

दुमका । पूर्व विधायक संजीव सिंह को धनबाद से दुमका कारा में शिफ्ट किये जाने को ले न्यायालय ने जेल प्रशासन को शो कॉज किया है। धनबाद एडीजे रवि रंजन की अदालत ने जेल अधीक्षक को शो कॉज करते हुए पूरे मामले पर जवाब मांगा है।

संजीव सिंह को रविवार के दिन जेल प्रशासन द्वारा आनन फानन में दुमका जेल भेजे जाने के मामले में पूर्व विधायक के वकील मो.जावेद की ओर से अदालत में दो आवेदन दाखिल किया गया था। जिसमें जेल अधीक्षक पर कार्रवाई और पूर्व विधायक को तत्काल दुमका जेल से वापस धनबाद जेल लाए जाने की अपील की गई थी।

ज्ञातव्य हो कि बीते रविवार को जेल आईजी के निर्देश पर नीरज सिंह सहित चार लोगों की हत्या मामले में पिछले तीन साल से धनबाद जेल में बंद झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह को आनन फानन में दुमका जेल शिफ्ट कर दिया गया था। जिसके बाद से ही इस कार्रवाई को लेकर धनबाद में अलग-अलग तरह की चर्चाए शुरू हो गई थी। मालूम हो कि इससे पूर्व विधायक संजीव सिंह पहले रांची के होटवार जेल में बंद थे। जिसके बाद हाई कोर्ट के आदेश पर उन्हें धनबाद जेल में शिफ्ट किया गया था।

दहेज की खातिर मीनाक्षी को मार डाला, पुलिस ने अभियुक्तों से पैसे लेकर मामले को दबाया

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चतरा पुलिस पर उठ रहे हैं सवालिया निशान

गिद्धौर पुलिस आखिर क्यों है अभियुक्तों पर इतना मेहरबान ?

चतरा :- मीनाक्षी देवी हत्याकांड को हुए दो सप्ताह बीत चुके हैं फिर भी इस मामले में नौ अभियुक्तों में से एक अभियुक्त को भी चतरा पुलिस गिरफ्तार करने में अबतक नाकाम रही है ।

पैसे खाकर एसपी के भी आदेश की अवहेलना ?

चतरा के युवा और जुझारू पुलिस कप्तान के रूप में शुमार ऋषभ कुमार झा के द्वारा इस मामले में एसआईटी का गठन भी किया गया है परंतु चतरा पुलिस की मेहरबानी तो देखिए । रिश्वत में इतना मोटा माल मिला कि आज भी इस मामले के नामजद अभियुक्त खुलेआम सीना ठोककर घूम रहे हैं तथा इस घटना का मास्टरमाइंड तथा मुख्य आरोपी मीनाक्षी के कातिल पति आकाश भारद्वाज को चतरा पुुलिस नहीं पकड़ सकी है ।

पुलिस के रवैये के खिलाफ बढ़ रहा है आक्रोश

पुलिस की शिथिल कार्रवाई के विरुद्ध अब आसपास के ग्रामीण गोलबंद होने लगे हैं तथा काफी आक्रोशित हैं । ग्रामीणों का साफ आरोप है कि अभियुक्तों से रिश्वत लेकर पुलिस विभाग के अधिकारी उन्हें बचाने में लगे हुए हैं । इस मामले में आसानी गांव निवासी रमाकांत पाठक का कहना है कि यदि पुलिस द्वारा जल्द ही अभियुक्तों को गिरफ्तार नहीं किया जाता है तो वे पुलिस विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल देंगे ।

अपनी बेटी होती तो क्या ऐसे ही पैसे खाकर चुप बैठते पुलिसवाले ?

वही इसी गांव की अरुणा पाठक इस मामले को लेकर काफी आक्रोशित है। इनका कहना है कि मीनाक्षी हत्याकांड समाज के लिए एक काफी शर्मनाक घटना है तथा इसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम होगा। यह हत्या तमाम नारी जाती के लिए एक प्रकार की चुनौती है।इस घटना के विरुद्ध आसानी गांव की महिलाये तथा लड़कियों के द्वारा मृतिका को इंसाफ दिलाने तथा अभियुक्तों को गिरफ्तारी की मांग को लेकर पिछले दिनों आसानी गाँव मे कैंडल मार्च भी निकाला गया था, बावजूद इसके पुलिस प्रशासन अबतक इस मामले में कोई भी कदम नहीं उठा रही है।

अभियुक्तों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कैंडल मार्च

हालात यदि ऐसा ही रहा तो बाध्य होकर यहां की महिलाएं चतरा पुलिस कप्तान का घेराव करेगी तथा इंसाफ की मांग करेगी। इनका स्पष्ट कहना है कि इस मामले में चतरा पुलिस की भूमिका काफी संदेहास्पद है तथा अभियुक्तों से एक मोटी राशि लेकर पुलिस विभाग उसे संरक्षण देने में जुटी हुई है।

दहेज के कारण हुई मीनाक्षी की हत्या- पिता

सिमरिया प्रखंड के कटिया गांव निवासी मृतिका मीनाक्षी के पिता विनय पाण्डेय अपनी पुत्री की निर्मम हत्या कि घटना से बिल्कुल टूट चुके हैं ।इनका कहना है कि तीन वर्ष पूर्व वे अपनी पुत्री का विवाह आसानी गांव निवासी जगदीश भारद्वाज के पुत्र आकाश भारद्वाज से किया था ।इस दौरान वे अपनी क्षमता से बढ़कर उन्हें दहेज भी दिया था ।बावजूद इसके लड़की के ससुराल वालों के द्वारा दहेज को लेकर हमेशा मेरी पुत्री को प्रताड़ित किया जाता था। इस मामले को लेकर उनकी पुत्री द्वारा चतरा सदर थाने में दहेज उत्पीड़न का मामला भी दर्ज कराया गया था परन्तु सदर थाना पुलिस इस मामले में अभियुक्त को गिरफ्तार करने के बजाए मामले को टालटी रही जिसके परिणाम स्वरूप आरोपियों का मनोबल इतना बढ़ गया और आखिरकार वे मेरी बच्ची की निर्मम हत्या कर दिया ।

मीनाक्षी हत्याकांड में संदिग्ध है पुलिस की भूमिका

इनका यह भी आरोप है कि पिछले 10 फरवरी को मेरी पुत्री को बेरहमी से हत्या गर्दन काटकर किया गया था। इसकी प्राथमिकी गिद्धौर थाने में दर्ज है ।इस मामले में एसआईटी का गठन भी हुआ है जो कि एक छलावा साबित हो रहा है और यह एक मजाक बनकर रह गया है ।क्योंकि पुलिस के नाक के नीचे जब अभियुक्त खुलेआम घूम रहे हैं तो आखिर नामजद अभियुक्तों को क्यों नहीं गिरफ्तार किया जा रहा है?

अभियुक्तों के साथ चाय-नाश्ता करती है गिद्धौर पुलिस- ग्रामीण

ग्रामीणों का आरोप है कि मीनाक्षी की रहस्यमय तरीके से निर्मम हत्या करके गिद्धौर थाना क्षेत्र के जंगल में उसे फेंक दिया गया था जबकि मामले की पड़ताल करने आसानी गाँव पहुंची गिद्धौर पुलिस आकाश भारद्वाज के परिजनों से मिलकर चाय और नाश्ता करके वापस लौट गई थी तथा अभियुक्तों को फरार होने का मौका दे देती है। सवाल तो यह भी है कि आखिर गिद्धौर पुलिस अभियुक्तों पर इतना मेहरबान क्यों है?

पुलिस के खिलाफ गोलबंद होने लगा है ब्राह्मण समाज

आसानी गाँव के ग्रामीणों का आक्रोश चतरा पुलिस पर फूटने ही वाला है। हालात यदि यही रहा तो आने वाला समय में मीनाक्षी जैसी अनगिनत बेटियों को यूं ही दहेज की बलिवेदी पर न्योछावर होना भी पड़ सकता है। इस बाबत पिछले दिनों ब्राह्मण समाज के चतरा में हुए बैठक में सर्वसम्मति से कातिल भारद्वाज परिवार को समाज से बहिष्कृत करने का निर्णय भी लिया गया था। चाहे जो भी हो परन्तु इतना तो स्पस्ट है कि इस पूरे मामले में गिद्धौर थाने की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े जो जाते है ।

पूछ रहे हैं लोग, कितने पैसे खाकर अभियुक्तों पर मेहरबानी?

क्या सचमुच पुलिस विभाग के अधिकारी पैसे लेकर अभियुक्तों को बचाने में लगी है या फिर ये दिलचस्पी ही नही ले रहे है ? दूसरा सवाल यह भी है कि आखिर उन अभियुक्तों को संरक्षण देने का काम कौन कर रहा है ,जिसके दबाबों में आकर पुलिस किसी को गिरफ्तार करने से गुरेज कर रही है । अब आगे देखना यह है कि चतरा पुलिस इस मामले में कितना गंभीर दिखती है तथा पुलिस कप्तान इस घटना का पर्दाफाश करते हुए अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में कहांतक सक्षम हो पाते हैं ?इस मामले में मीनाक्षी को इंसाफ मिल भी पाता है या नहीं देखना दिलचस्प होगा?

मीनाक्षी के लिए की मांग

मायावती ने मंहगाई को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा

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लखनऊ । बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर मंहगाई को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा और कहा है कि अनावश्यक महंगाई से जनता को सताना अनुचित है। बसपा मुखिया मायावती ने मंगलवार को ट्विटर के माध्यम से लिखा, “देश में पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में अनावश्यक ही अनवरत वृद्घि करके कोरोना प्रकोप, बेरोजगारी व महंगाई आदि से त्रस्त जनता को सताना सर्वथा गलत व अनुचित। इस जानलेवा कर वृद्घि के माध्यम से जनकल्याण के लिए धन जुटाए जाने का सरकार का तर्क कतई उचित नहीं।”

उन्होंने आगे लिखा, “केन्द्र व राज्य सरकारें अगर पेट्रोल, डीजल आदि पर कर की लगातार मनमानी वृद्घि कर जनता की जेब पर जो भारी बोझ हर दिन डाल रही हैं उसे तत्काल रोका जाना बहुत ही जरूरी। वास्तव में यही सरकार का देश की करोड़ों गरीब, मेहनतकश जनता व मध्यम वर्ग पर बड़ा एहसान व भारी जनकल्याण होगा।

रुजिरा बनर्जी से सीबीआई की टीम ने की पूछताछ

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कोलकाता । तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी से कोयले की अवैध तस्करी मामले में पूछताछ करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों की एक टीम उनके घर पहुंची। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के अपने भतीजे अभिषेक के घर से निकलने के कुछ देर बाद ही यहां सीबीआई की टीम पहुंच गई थी। ममता बनर्जी यहां करीब 10 मिनट रुकी थीं। सीबीआई ने पिछले साल नवंबर में दर्ज हुए मामले के संबंध में पूछताछ करने के लिए रविवार को रुजीरा को नोटिस दिया था। एजेंसी ने कोयला चोरी के मामले में रुजिरा की भूमिका को पाया है। हालांकि मामले में उसे आरोपी नहीं बनाया गया है। इससे पहले सोमवार को सीबीआई की 8 सदस्यीय टीम ने इसी सिलसिले में रूजीरा की बहन मेनका गंभीर से ढाई घंटे तक पूछताछ की थी।

बता दें कि सीबीआई ने कोयला माफिया अनूप माझी उर्फ लाला, उसके सहयोगी जे. मंडल और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ कोयला चोरी का मामला दर्ज किया था। इसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं। आरोप है कि माझी ने कुन्होरिया और कजोरिया इलाकों में ईसीएल की लीज वाली खदानों से कोयले की चोरी की थी। कोयला तस्करी के रैकेट को पकड़ने के लिए पिछले साल 28 नवंबर को पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के 45 स्थानों पर छापे मारे गए थे।

प्रियंका गांधी ने किया यह बड़ा ऐलान

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लखनऊ. प्रियंका गांधी ने अपने इस ट्वीट में लिखा है कि ‘नदी के असली दावेदार एवं रक्षक निषाद समुदाय के लोग हैं. बंसवार, प्रयागराज में यूपी पुलिस के उत्पीड़न के विरुद्ध और निषाद समाज के अधिकारों के लिए हम लड़ेंगे. कांग्रेस पार्टी जिन निषाद परिवारों की नाव तोड़ी गई है सबको संयुक्त रूप से 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद करेगी. कांग्रेस जन निषाद समुदाय के अधिकारों के लिए नदी अधिकार यात्रा निकालेंगे. नदी के संसाधनों पर प्राथमिक हक निषादों का हो इस विचार के साथ बालू खनन के लिए निषादराज कोपरेटिव सोसायटी के गठन की मांग करते हैं. सरकार बालू माफिया और बड़ी-बड़ी कंपनियों द्वारा किए जा रहे अवैध खनन की जांच करे एवं श्वेत पत्र जारी कर बताए कि कहां पर किन-किन नदियों में खनन किया जा रहा है

ओवरसीज कांग्रेस ने कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान का झंडा लहराया

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जर्मनी में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी झंडा फहराने का आरोप

क्या इंडियन ओवरसीज़ कांग्रेस के सदस्यों ने जर्मनी में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान का झंडा लहराया ? ये आरोप भाजपा नेताओं ने लगाया है। मुंबई भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नाखुआ की माने तो पाकिस्तान का झंडा फहराने वाले ओवरसीज कांग्रेस के सक्रिय सदस्य ने हाल ही में राहुल गांधी को एक करोड़ रुपये का चंदा दिया है। उन्होने उसकी तस्वीर भी साझा की है ।

पाकिस्तानी झंडा फहराने के आरोपी ने खुद को इंडियन ओवरसीज कांग्रेस का सदस्य बताया

आरोपी की राहुल गांधी के साथ तस्वीरें भी साझा की

मुंबई भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नाखुआ का ट्वीट

चिटफंड मामला: करोड़ों की धोखाधड़ी कर पांच साल से फरार दो अधिकारी गिरफ्तार, मास्‍टरमाइंड अब भी फरार

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झारखंड के जामताड़ा में निवेशकों से करोड़ों रुपयों की धोखाधड़ी कर पांच साल से फरार चल रहे चिटफंड कंपनी के दो अधिकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अधिकारियों में मोहम्‍मद कमाल कौसर और…

दिल्ली दंगों के दौरान अंकित शर्मा को न बचा पाने का अफसोस

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दिल्ली के कंस्टिट्यूशन क्लब में दंगों में मृत परिवारों के लिए मौन रखतं कपिल मिश्रा

अगर उन्होने दोबारा सड़कें बंद की तो मैं फिर वही करुंगा जो किया था। अगर उन्होने हिंदुओं को इस्लामी एकता के नाम पर डराने की कोशिश की तो कोई न कोई कपिल मिश्रा तो खड़ा होगा ही । मैंने दिल्ली दंगों के दौरान जो कुछ किया उसपर गर्व है, अगर दोबारा मौका मिला तो वही करुंगा । ये बातें भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने कही । वे दिल्ली दंगों के एक साल पूरा होने पर कंस्टिट्यूशन क्लब में बोल रहे थे।

अंकित शर्मा और रतन लाल को न बचा पाने का अफसोस जिंदगी भर रहेगा

कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस अफसर अंकित शर्मा की भीड़ ने हत्या कर दी। उनके जिम्स को चाकूओं से छलनी कर दिया. उन्हे जावरों की तरह पीटा गया। दरिंदे उनकी बोटियां नोंच रहे थे। ये मेरी जिंदगी का सबसे खौफनाक और दिल दहलाने वाला पल था। अंकित शर्मा और हेड कॉन्सटेबल रतन लाल को न बचा पाने का अफसोस जिंदगी भर रहेगा ।

ताहिर हुसैन की बिल्डिंग ध्वस्त करने की मांग

कपिल मिश्रा ने दिल्ली दंगों पर लिखी एक पुस्तक का विमोचन भी किया. उन्होने कहा कि दिल्ली में दंगे स्वतः स्फूर्त नहीं थे। बल्कि ये जिहादी ताकतों के महीनों की प्लानिंग का नतीजा थे। ताहिर हुसैन जैसे लोग इस पूरी साजिश में शामिल थे, इस बात के सबूत भी मिले हैं और कोर्ट में इसकी पु,्टि बी हुई है। ताहिर हुसैन के जिस छत को हथियार जमा करने के लिए और हिंदुओं पर हमले के लिए इस्तेमाल किया गया, वो आज भी खड़ा है। मैं सरकार से उस बिल्डिंग को गिराने की मांग करता हूं। जबतक वह बिल्डिंग खड़ी रहेगी, लोगों को दंगे से जुड़ी याद सताती रहेगी ।

पत्थलगड़ी आंदोलन दोबारा खड़ा करने की कोशिश, हाइकोर्ट के पास शिलापट्ट लेकर पहुंचे 200 आदिवासी

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झारखंड हाइकोर्ट के पास पत्थलगड़ी के लिए शिलापट्ट् ले जाते लोग

झारखंड में एक बार फिर पत्थलगड़ी आंदोलन को जिंदा करने की कोशिश की जा रही है। खुद को आदिवासी कार्यकर्ता बताने वाले कुछ लोग पत्थलगड़ी के जिन्न को दोबारा जिंदा करने की साजिश रच रहे हैं। एसा ही एक वाकया सोमवार को झारखंड हाइकोर्ट के पास हुआ जब अचानक 200 के करीब लोग शिलापट्ट् लेकर पहुंच गए ।

सिमडेगा, गुमला और खूंटी के आदिवासियों के बीच सक्रिय हैं पत्थलगड़ी समर्थक

करीब 200 पत्थलगड़ी समर्थक सोमवार को अचानक राजधानी रांची के हाईकोर्ट के निकट आ पहुंचे। उनके हाथों में बड़ा शिलापट्ट् था, उसपर आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की बात लिखी हुई थी थी। राज्य के सिमडेगा, खूंटी, गुमला और पश्चिमी सिंहभूम जिले से बड़ी संख्या में आए पत्थलगड़ी समर्थक पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में थे।

प्रशासन ने समझा कर वापस भेजा

हाइकोर्ट के हाइ सेक्यूरिटी एरिया में इतनी बड़ी संख्या में आदिवासियों को जमा होते देख प्रशासन सकते में आ गया। पुलिस के जवानों ने किसी तरह समझा-बुझाकर लोगों को वापस भेजा। आदिवासी खुद को कुडुख नेशनल काउंसिल के कार्यकर्ता बता रहे थे।

तृणमूल ने नहीं दिया भाव, अब कांग्रेस

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तृणमूल ने राजद को सीटें देने से किया इंकार

लालू यादव के निर्देश पर राष्ट्रीय जनता दल पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ने को तैयार हुई। तेजस्वी यादव और उनकी टीम ने तय किया कि तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। बजाप्ता मीडिया में इसकी घोषणा तक कर दी गई। लेकिन ये क्या ? तृणमूल कांग्रेस राजद को भाव देने के लिए तैयार ही नहीं है। ममता बनर्जी ने साफ-साफ कह दिया कि वे बंगाल में राजद के लिए सीटें नहीं छोड़ सकतीं ।

कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन से बात करेंगे तेजस्वी

अब राजद पश्चिम बंगाल में कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन के साथ सीट बंटवारे को लेकर बातचीत कर रही है। जानकारी के अनुसार तेजस्वी यादव के दूत बनकर श्याम रजक कोलकाता पहुंचे। उन्होने विमान बसु से सीट बंटवारे को लेकर चर्चा की। लेकिन कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन में राजद को कितनी सीटें मिलेंगी, इसपर कोई भी नेता बात करने को तैयार नहीं है।

राजद को पांच सीटें मिल सकती हैं- सूत्र

राजद नेताओं की माने तो श्याम रजक ने वाममोर्चा के अध्यक्ष विमान बसु को कोलकाता के जोड़ासांकू, इंटाली, पश्चिम बर्दवान के कुल्टी व रानीगंज अथवा जामुड़िया सीट से राजद प्रत्याशी उतारने का प्रस्ताव दिया है। मुजफ्फर अहमद भवन में हुई बैठक के बाद श्याम रजक ने बताया कि वे लोग राज्य में हर हाल में भाजपा को रोकना चाहते हैं । वे भाजपा विरोधी पार्टियों को एकजुट कर रहे हैं ।

भाजपा समर्थकों और किसानों के बीच हिंसक झड़प, कई घायल

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झड़प के बाद घायल लोग

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में उस वक्त अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो गई जब किसानों की पंचायत में समझाने गए संजीव बालियान के समर्थक और किसान आपस में भिड़ गए । दोनों ओर से लाठी-डंडों से हमला किया गया । कई भाजपा समर्थक और किसान दोनों इस हिंसक झड़प में घायल हो गए । पूरे इलाके में तनाव है। सीआरपीएफ की कंपनी की तैनाती कर दी गई है ।

संजीव बालियान के विरोध के बाद शुरु हुआ झगड़ा

दरअसल मुजफ्फरनगर के सोरम गांव में किसानों की चौपाल लगी थी । केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान चौपाल में लोगों को कृषि कानूनों के फायदे समझाने पहुंचे। इतने में कुछ किसानों ने संजीव बालियान का विरोध किया। भाजपा समर्थकों ने संजीव बालियान का विरोध कर रहे लोगों को चौधरी अजीत सिंह का गुंडा बोल दिया। इसके बाद दोनों ओर के लोग एक-दूसरे पर हमलावर हो गए ।

RLD समर्थकों ने किसानों से बात करने से रोका- संजीव बालियान

इस झड़प के बाद संजीव बालियान ने आरोप लगाया कि चौधरी अजीत सिंह के समर्थक किसानों को उकसा रहे हैं। उन्हें भाजपा वालों को गांव में न घुसने देने का फरमान सुना रहे हैं। हमें भी किसानों के बीच अपनी बात रखने का अधिकार है ? वहीं, भाजपा समर्थकों ने कहा कि किसान आंदोलन के बहाने जाट और मुसलमान एकता की बात करने वाले जाटों के आपसी भाईचारे को तोड़ना चाहते हैं।

चौधरी अजीत सिंह ने बागपत में बुलाई महापंचायत

किसानों पर हुए हमले के विरोध में राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह ने बागपत में किसान महापंचायत बुलाी है । उन्होने कहा कि अब पश्चिमी यूपी के भाजपा का सफाया तय है। किसान भाजपा के कार्यकर्ताओं को गांव में घुसने नहीं दे रहे। अपना सामाजिक बहिष्कार होते देख भाजपा कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं और वे अब किसानों के साथ गुंडागर्दी पर उतारू हो गए हैं।

क्या है आपसी झगड़े की राजनीतिक वजह ?

दरअसल मुजफ्फरनगर दंगों के बाद हिंदू और मुस्लिम समाज में दरार का सबसे ज्यादा नुकसान अजीत सिंह और उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल को हुआ। कभी पश्चिमी उत्त्र प्रदेश के जाटलैंड पर दबदबा रखने वाले अजीत सिंह खुद भी चुनाव हार गए। जाट वोटरों का एक बड़ा तबका हिंदुत्व के नाम पर भाजपा की ओर शिफ्ट हो गया। वहीं, मुसलमान समाजवादी पार्टी और बसपा की ओर मुड़ गए। किसान आंदोलन के बहाने चौधरी अजीत सिंह और जयंत चौधरी दोबारा अपनी खोई राजनीतिक जमीन पाने की कोशश में जुटे हैं।

बुसुडीह गांव में जंगली हाथियों ने मचाया उत्पात

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सिल्ली (रांची) :- सोनाहातू प्रखंड पूर्वी क्षेत्र में जंगली हाथियों का आंतक का दायरा बढ़ता जा रहा है। जहां रोजाना जंगली हाथी सोनाहातू प्रखंड क्षेत्र के किसी न किसी गांव में किसानों के फसलों को रौंद कर बर्बाद कर रहे हैं, वहीं लोगो के घरों को भी निशाना बनाकर तोड़ रहे हैं ।

जंगली हाथियों ने सोनाहातू पूर्वी क्षेत्र के बुसुडीह गांव में नूनीवाला देवी के घर को तोड़कर घर के अंदर रखे चावल को भी खाकर नष्ट कर दिया इस दौरान घर के दीवार गिरने पर अंदर खटिया पर सोई बुढ़िया नुनी देवी बाल-बाल बची । उसी रात जितनी देवी,नागेश्वर महतो व योगेश्वर महतो के खेत में लगे फसल को रौंद कर नष्ट कर दिया।

आपको बता दें कि जंगली हाथी दिन भर जंगल मे रहने के बाद देर शाम व रात को जंगल आसपास गांव के खेतों की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं और घरों को निशाना बनाकर सुबह वापस जंगल में लौट जाते हैं । पीड़ित किसानों ने वन विभाग से मुआवजे की माँग की है।

धर्म गुरु बंधन तिग्गा के बेहतर ईलाज के लिए बाबूलाल ने तमिलनाडु के सीएम को लिखी चिट्ठी

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वेल्लोर में इलाज करवा रहे हैं बंधन तिग्गा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल के नेता एवं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा के समुचित इलाज में सहायता के लिये तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है।

बाबूलाल मरांडी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि धर्मगुरु एवं सामाजिक कार्यकर्ता बंधन तिग्गा पेट की गंभीर बीमारी से ग्रसित है। वे समुचित इलाज के लिए सीएमसी वेल्लोर में एडमिट हैं।भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री से इलाज में सहायता के लिये अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया है।

बाबूलाल ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी

बिना पर्यावरण अनुमति के ही हाईवे किनारे चल रहे हैं ईट भट्टे

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बरहड़वा। एनएच के बरहड़वा फरक्का पथ पर दर्जनभर ईट भट्ठों की चिमनी वायु को दूषित करने मे अहम भूमिका निभा रही है। जानकारी रहे की बरहड़वा फरक्का मुख्य व ग्रामीण पथ के किनारे उपजाऊ खेतीहर जमीन पर संचालित ईट भट्ठें सरकारी नियमों के मुताबिक कोई भी उद्योग धंधा नहीं लगाया जा सकता और नहीं सरकार या प्रशासन ऐसे किसी उद्योग की स्थापना की अनुमति ही दे सकते है।

आधे दर्जन चिमनी ईट भट्ठा संचालकों का दावा है की पर्यावरण और से एनओसी प्नाप्त है। सूत्रों की माने तो अगर अनुमति प्राप्त है तो इसकी दो वजह हो सकती हैं एक उद्योग मालिक ने जमीन के कृषि उपयोगी होने की जानकारी छिपायी या फिर पर्यावरण विभाग ने इसकी अनदेखी की दोनों ही स्थिती में चिमनी ईट भट्ठा लगाना पूरी तरह अवैधानिक व गैरकानूनी है।

जबकि जमीन का फैसला राजस्व विभाग ही कर सकता हैं जिसकी सुप्रिम एथारटी जिले के उपायुक्त होते है। इस प्रकार की जमीन पर कोई इंड्रस्ट्रीज लगाये जाने से पहले राजस्व अनुमति भी होना जरुरी है। इसके लिये जमीन का डायवर्सन कराया जाना अनिवार्य है। इससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की प्राप्ती होती लेकिन जमीन का डायर्वसन कराये बीना ही उद्योग लगा लिया गया इस तरह लाखों रुपये राजस्व की चोरी की गयी और सरकार व प्रशासन से धोखाधड़ी कर उद्योग की स्थापना की गयी जो एक अपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता हैं ।

आश्चर्य की बात तो यह हैं की सारा गोरखधंधा उद्योग विभाग की शह पर हुआ जिसने नियम विरुध्द तरीके से फेक्ट्री को जमीन के ड्रायवर्सन न कराने का पत्र जारी कर दिया जबकी उद्योग विभाग को ऐसा कोई अधिकार हैं ही नहीं जमीन संबधित अधिकार सिर्फ राजस्व विभाग को ही हैं वही तय करता हैं कि किस जमीन का डायर्वसन किया जायेगा किसका नहीं उसकी एनओसी के बिना जिले में कोई भी फेक्ट्री व उधोग नही लग सकते। इसलिए जब भी किसी उद्योग के लिये भू अर्जन होता हैं तो उसकी सूचना राजस्व विभाग ही जारी करता है। और किसी भी विवाद का निपटारा राजस्व न्यायालय में ही किया जाता है। एनएच के किनारे प्रदूषण फैलाते ईट भट्ठों द्वारा राजस्व नियमों का कोई पालन नहीं किए जाने से पर्यावरण विभाग के अधिकारी बोर्ड के सदस्य व सचिव समेत एनजीटी में मामला ले जाने के लिए सामाजिक संगठन ने खाका तैयार कर लिया है।

बिना पर्यावरण अनुमति के ही हाईवे किनारे चल रहे हैं ईट भट्टे

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बरहड़वा। एनएच के बरहड़वा फरक्का पथ पर दर्जनभर ईट भट्ठों की चिमनी वायु को दूषित करने मे अहम भूमिका निभा रही है। जानकारी रहे की बरहड़वा फरक्का मुख्य व ग्रामीण पथ के किनारे उपजाऊ खेतीहर जमीन पर संचालित ईट भट्ठें सरकारी नियमों के मुताबिक कोई भी उद्योग धंधा नहीं लगाया जा सकता और नहीं सरकार या प्रशासन ऐसे किसी उद्योग की स्थापना की अनुमति ही दे सकते है।

आधे दर्जन चिमनी ईट भट्ठा संचालकों का दावा है की पर्यावरण और से एनओसी प्नाप्त है। सूत्रों की माने तो अगर अनुमति प्राप्त है तो इसकी दो वजह हो सकती हैं एक उद्योग मालिक ने जमीन के कृषि उपयोगी होने की जानकारी छिपायी या फिर पर्यावरण विभाग ने इसकी अनदेखी की दोनों ही स्थिती में चिमनी ईट भट्ठा लगाना पूरी तरह अवैधानिक व गैरकानूनी है।

जबकि जमीन का फैसला राजस्व विभाग ही कर सकता हैं जिसकी सुप्रिम एथारटी जिले के उपायुक्त होते है। इस प्रकार की जमीन पर कोई इंड्रस्ट्रीज लगाये जाने से पहले राजस्व अनुमति भी होना जरुरी है। इसके लिये जमीन का डायवर्सन कराया जाना अनिवार्य है। इससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की प्राप्ती होती लेकिन जमीन का डायर्वसन कराये बीना ही उद्योग लगा लिया गया इस तरह लाखों रुपये राजस्व की चोरी की गयी और सरकार व प्रशासन से धोखाधड़ी कर उद्योग की स्थापना की गयी जो एक अपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता हैं ।

आश्चर्य की बात तो यह हैं की सारा गोरखधंधा उद्योग विभाग की शह पर हुआ जिसने नियम विरुध्द तरीके से फेक्ट्री को जमीन के ड्रायवर्सन न कराने का पत्र जारी कर दिया जबकी उद्योग विभाग को ऐसा कोई अधिकार हैं ही नहीं जमीन संबधित अधिकार सिर्फ राजस्व विभाग को ही हैं वही तय करता हैं कि किस जमीन का डायर्वसन किया जायेगा किसका नहीं उसकी एनओसी के बिना जिले में कोई भी फेक्ट्री व उधोग नही लग सकते। इसलिए जब भी किसी उद्योग के लिये भू अर्जन होता हैं तो उसकी सूचना राजस्व विभाग ही जारी करता है। और किसी भी विवाद का निपटारा राजस्व न्यायालय में ही किया जाता है। एनएच के किनारे प्रदूषण फैलाते ईट भट्ठों द्वारा राजस्व नियमों का कोई पालन नहीं किए जाने से पर्यावरण विभाग के अधिकारी बोर्ड के सदस्य व सचिव समेत एनजीटी में मामला ले जाने के लिए सामाजिक संगठन ने खाका तैयार कर लिया है।