Tuesday 7th of July 2026 08:13:39 PM
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Ranchi: नेवरी Ring Road के राजू होटल के पास अज्ञात वाहन ने युवक को कुचला, मौत

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मेसरा ओपी थाना क्षेत्र के रिंग रोड नेवरी राजू होटल स्थित अनिल मुंडा (38), पिता डबलु मिंज को पैदल सड़क पार करने के दौरान अज्ञात वाहन ने रौंदते हुए भाग गया । इस जोरदार टक्कर मारने की वजह से घटनास्थल पर ही मौत हो गई । युवक के मौत से आक्रोशित लोगों ने  सड़क जाम कर दिया।

दुर्घटना के बाद सड़क जाम करते स्थानीय
दुर्घटना के बाद सड़क जाम करते स्थानीय

सांसद-विधायक को बुलाने की मांग 

ग्रामीण उचित मुआवजा की मॉंग कर रहे थे। साथ ही ग्रामीणों की मांग है कि उच्च अधिकारीयों और सांसद और विधायक जब तक नहीं आएँगे जाम नहीं हटेगी ।

बताया जाता है की मृतक अनिल मुण्डा के परिवार में 5 भाई और 3 बहनें हैं । सबों का भरण – पोषण का मृतक अनिल मुण्डा ही रिंग रोड सड़क के किनारे में एक छोटा – मोटा झोपड़ी नुमा आकार होटल चलाकर करता था। वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला था । इसके गुजर जाने से समुचित परिवार वालों कि स्थिति सड़क पर आ जाने जैसी हो गई है । सरकार से उचित माँग करने कि वजह से ही ग्रामीण सड़क जाम किए हुए हैं । प्रशासन कि लापरवाही भी बताई जाती है ।

सड़क हादसे में युवक की मौत
सड़क हादसे में युवक की मौत

एक अप्रैल से 45 साल से ऊपर वाले सभी लोगों को लगेगा COVID का vaccine

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01 अप्रैल से 45 साल से अधिक उम्र वालों को vaccine
01 अप्रैल से 45 से अधिक उम्र वालों को vaccine

मोदी कैबिनेट ने फैसला किया है कि एक अप्रैल से 45 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति COVID vaccine  लगवा सकता है। केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंगलवार को इस फैसले को मंजूरी दी गई।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश   Prakash Javadekar) ने मंगलवार को कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब एक अप्रैल 2021 से देश में 45 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को कोरोना वायरस का वैक्सीन लगेगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आज तक पूरे देश में 4,85,00,000 लोगों को कोरोना वैक्सीन के डोज लगे हैं। 80,00,000 लोगों को कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज भी लग चुकी है। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड 32,54,000 वैक्सीन के डोज दिए गए हैं।

वैक्सीन देने का काम देश में तेजी से चल रहा है। जावड़ेकर ने कहा कि कोरोना वैक्सीन सभी लोगों के लिए लगवाना जरूरी है और इसके लिए सभी पात्र लोग अपना रजिस्ट्रेशन करवाएं।

NIA के हाथ लगी सचिन वाझे की गुप्त डायरी, वसूली का पूरा रिकार्ड दर्ज

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सचिन वाझे की secret डायरी में किन लोगों का नाम
सचिन वाझे की secret डायरी में किन लोगों का नाम

 

Antilia मामले की जांच कर रही NIA की टीम को सचिन वाझे की गुप्त डायरी हाथ लगी है।  इस डायरी में उन सारे लोगों के नाम लिखे हैं जिनसे वसूली करनी है । इसके अलावा किससे कितना पैसा लेना है और ऊपर के लोगों को कितनी रकन पहुंचानी है, उसका पूरा डिटेल्स लिखा है । सचिन वाझे ने पूरा हिसाब-किताब कोडवर्ड में लिखा है।  जैसे हजार के लिए “K” शब्द का इस्तेमाल है और लाख के लिए “L” का ।

जनवरी से सारे लेन-देन का रिकार्ड 

वाझे मुंबई शहर के पब, हुक्का पार्लर, रेस्टोरेंट, डांसबार, मटके के धंदे से कितना पैसा लेता था। इसकी डिटेल डायरी में मौजूद है। यह जानकारी फिलहाल जनवरी महीने से लेकर अभी तक की है। बता दें कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने भी ऐसे ही आरोप राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख के ऊपर लगाए थे।

डायरी में दर्ज रेट कार्ड
NIA सूत्रों की माने तो इस डायरी में सभी लोगों से लिए जाने वाले पैसों का रेट कार्ड भी लिखा गया है। वाझे अपने खास गुर्गों के जरिए वसूली का यह धंधा चलाता था। फिलहाल NIA सचिन वाझे से विस्फोटक मामले की छानबीन में जुटी हुई है। फिलहाल सचिन वाझे पर अब NIA और ATS के अलावा प्रवर्तन निदेशालय की भी नज़र है।

UP

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लखनऊ. भारत सरकार के गृह मंत्रालय की स्क्रीनिंग में उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीस अमिताभ ठाकुर सहित 3 आईपीएस अफसरों को सरकारी सेवा के लिए अनुपयुक्त पाया गया है. तीनों आईपीएस पर गम्भीर अनियमित्ता के आरोप थे.

इन तीन अफसरों पर गिरी है गाज

 

1 – अमिताभ ठाकुर (आईजी रूल्स एवं मैनुअल) तमाम मामलों में जांचें  चल रहीं थी.

 

2- राजेश कृष्ण (सेनानायक, 10 बटालियन बाराबंकी) आज़मगढ़ में पुलिस भर्ती में घोटाले का आरोप

 

3- राकेश शंकर (डीआईजी स्थापना) देवरिया शेल्टर होम प्रकरण में संदिग्ध भूमिका के आरोप थे

उत्तर प्रदेश

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने होली और अन्य त्योहारों, पंचायत चुनाव और देश के अन्य राज्यों में कोरोना के बाढ़ते मामलों को देखते हुए गाइडलाइन जारी कर दी है. उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने सभी जिलाधिकारियों, मंडलायुक्तों और पुलिस के आला अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं.

 

नई गाइडलाइन

– गाइडलाइन के तहत प्रदेश में किसी भी प्रकार के जुलूस, सार्वजनिक कार्यक्रम में 60 वर्ष से

अधिक उम्र के लोग शामिल नहीं हो सकेंगे.

 

– 10 साल से कम उम्र के बच्चे भी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकेंगे.

 

– कोरोना के पॉजिटिव से जुड़े कान्टेक्ट वालों की 48 घंटे के अंदर ट्रेसिंग की जाएगी.

जिन प्रदेशों में कोविड के केस ज्यादा हैं, वहां से होली के त्योहार के लिए घर आ रहे लोगों की कोविड जांच अनिवार्य रूप से करवायी जायेगी.

 

– अन्य शिक्षण संस्थान, मेडिकल और नर्सिग को छोड़कर सभी संस्थानों में 25 मार्च से 31 मार्च तक के होली के अवकाश घोषित करेंगे. जहां परिक्षाएँ चल रही है, वो सम्पन्न करवाई जाएंगी.

सार्वर्जनिक स्थानों पर सभी व्यक्तियों का मास्क का प्रयोग और सोशल डिस्टेंसिग का पालन करना अनिवार्य है.

 

अपने भतीजे को मुख्यमंत्री बनाना चाहती हैं ममता

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कोलकाता. गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गोसाबा में रैली की. शाह ने तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोला और दावा किया की सीएम ममता बनर्जी अपने भतीजे को मुख्यमंत्री बनाना चाहती हैं. शाह ने कहा कि जो योजना 1,500 करोड़ रुपये की योजना जो मोदी ने भेजा है, वो भाजपा की सरकार बनने के बाद हम यहां लागू करेंगे.

शाह ने कहा कि  हम नॉबेल पुरस्कार के तौर पर टैगोर पुरस्कार और ऑस्कर के तौर पर सत्यजीत रे पुरस्कार बनाकर बंगाल के दो महान सपूतों को बड़ी श्रद्धांजलि देने वाले हैं. दीदी ने कहा था कि सुंदरवन को हम जिला बनाएंगे, लेकिन ये काम भी आज तक नहीं हुआ. भाजपा का मुख्यमंत्री बनते ही एक ही साल में हम सुंदरवन को जिला बनाने का काम कर देंगे.

शाह ने कहा कि भाजपा ने देश में जहां जो-जो वादा किया, वो वादा पूरा किया है. हर गरीब के घर में शौचालय, बिजली, गैस का सिलेंडर पहुंचाया है.  लेकिन दीदी ने अपने पिछले घोषणा पत्र में 282 वादे किए थे, उसमें से 82 वादे भी पूरे नहीं किए.

महिला चिकिस्तको की कमी का दंश झेल रहे गावां वासी

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स्वस्थ्य केंद्र गावां

गिरिडीह/ गावां : सरकार जहां लोगों के बेहतर स्वास्थ्य सुवाधिाओं के लिए लाख दावे करती हो मगर हकीकत कुछ और बयां कर रही है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सुवाधिाओं का घोर अभाव है जो सरकारी दावों के पोल खोल रही है। खास कर आधी आबादी का इलाज भगवान भरोसे है। क्षेत्र में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी महिला डॉक्टर नही है। महिला चिकित्सक के नहीं रहने के कारण गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए काफी परेशान होना पड़ता है। प्रसव पीड़िता के इलाज के लिए चिकित्सकों का जहां टोटा है। वहीं लोगों को एएनएम के भरोसे रहना पड़ता है। एक भी महिला चिकित्सक की तैनाती न होने से लोगों में काफी आक्रोश व्याप्त है।

महिला व शिशुरोग चिकित्सक की कमी :

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शिशु रोग चिकित्सक व महिला चिकित्सक की कमी प्रखंडवासियों को वर्षो से खल रही है। स्थिति यह है कि प्रसव कराने आई महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गावां प्रखंड क्षेत्र के किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक का पदस्थापन नहीं किया गया है। यहां 12 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी महिला डॉक्टर नहीं है। इससे यहां की महिलाओं को उपचार सहित जांच में भारी परेशानी होती है।

ऑपरेशन की व्यवस्था नदारद :

अगर ऑपरेशन की नौबत आ जाए तो तुरंत 100 किमी दूर सदर अस्पताल गिरिडीह ले जाना परिजनों की विवशता होती है। अगर कोई दुर्घटना ग्रस्त होकर जख्मी आ गया तो मरहम-पट्टी कर उसे तुरंत रेफर कर दिया जाता है। हालांकि सरकारी प्रयास से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का कायाकल्प हुआ है। हॉस्पिटल तो बने मगर डॉक्टर और सुविधाओं की घोर कमी आज भी है। रोस्टर के अनुसार बंध्याकरण आपरेशन भी हो रहा है। लेकिन डॉक्टरों की कमी, दवा की अनुपलब्धता, एएनएम की कमी से समुचित स्वास्थ्य सेवा विफल साबित हो रही है। खास कर गरीबों को कोई अहमियत यहां नहीं दी जाती है। अस्पताल में कई पद रिक्त है जो भरे नहीं गए है। गरीब असहाय मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य लाभ का फायदा पहुंचाना स्वास्थ्य तंत्र की जिम्मेदारी है। लेकिन यहां किसी को कोई परवाह नहीं।

इन पंचायतों में है स्वास्थ उपकेन्द्र :

प्रखंड के ग़दर पंचायत, पिहरा पंचायत, सांख पंचायत, बादीडीह पंचायत ,सेरुआ पंचायत, मंझने पंचायत, पसनोर पंचायत व जमडार पंचायत, बरमसिया , चरकी व कहुवाई में लाखो रुपये खर्च कर उपकेंद्र बने है लेकिन एएनएम व डॉक्टर की कमी होने से यह बिल्डिंग टूटने लगी है। लाखो रूपये की सम्पत्ति का नुकसान हो रहा है। वही ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नही हो रहा है। गांवा प्रखंड से गिरिडीह जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर है। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ की व्यवस्था नही होने के कारण इतनी लम्बी दुरी तय करने के दौरान कई लोग रास्ते मे ही दम तोड़ देते है।


गंभीर परेशानी होने पर जाना पड़ता गिरीडीह या तिलैया :

महिलाओं को छोटी मोटी परेशानी या फिर कोई गंभीर दिक्कत आने पर प्रखंड मुख्यालय से 70 किलोमीटर तिलैया या फिर 100 किलोमीटर दूर गिरीडीह जाना पड़ता है। खास कर मध्यम वर्गीय या फिर गरीब तबके के लोगों को इलाज हेतु आर्थिक परेशानी के दौर से गुजारना पड़ता है।

विधायक बाबूलाल मरांडी का है यह क्षेत्र :

झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री रहे राजधनवार विधायक बाबूलाल मरांडी से क्षेत्र की महिलाओं को काफी आस है। विधायक इस मामले में पहल कर सकते हैं। दर्जनों महिलाओं ने महिला चिकित्सकों के पदस्थापन की मांग करती है। मांग करने वाली महिलाओं में पूजा देवी, जसोदा देवी, सोनी कुमारी, उषा देवी सहित अन्य शामिल हैं।

गांवा प्रखण्ड के ग्रामीणों करते है कई सवाल

सांसद, विधायक, जिला परिषद व मुखिया तो चुनाव के समय प्रखंड के ग्रामीणों को यह आश्वासन देते है कि हमारी पहली प्राथमिकता होगी गांवा के स्वास्थ विभाग में डॉक्टर की व्यवस्था, रेफरल अस्पताल की व्यवस्था करना, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि गांवा प्रखण्ड के ग्रामीणों को ऐसे भूल जाते है जैसे चुनाव खत्म वायदे खत्म।

पसस की बैठक में कई बार उठा है मुद्दा :

निवर्तमान पंचायत समिति सदस्य नवीन कुमार

निवर्तमान उपप्रमुख नवीन कुमार ने बताया कि पंसस की बैठक में यह मुद्दा कई बार उठाया गया है। डीसी को भी आवेदन देकर महिला चिकित्सक की मांग की गई है लेकिन अब तक गावां को महिला चिकित्सक नही मिली है। एक महिला चिकित्सक की पोस्टिंग गावां में हुई थी लेकिन अबतक पदभार ग्रहण नही की है।

हेमन्त सरकार, डीसी व सिविल सर्जन से मांग

निवर्तमान जिप सदस्य राजेंद्र चौधरी ने राज्य सरकार व सिविल सर्जन व डीसी से मांग किया है कि गावां में महिला चिकित्सक का पदस्थापन हो। ताकि क्षेत्र की महिलाओं का इलाज सही तरीके से हो सके। महिला चिकित्सक नही होने से महिला मरीजों को गिरीडीह या तिलैया जाना पड़ता है। जिससे न केवल परेशानी होती है बल्कि कई बार बड़ी घटनायें भी घटित हो जाती है।

पुराने चावल से परहेज़ काहे हेमंत बाबू?

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Why oldguards in jmm uncomfortable with Hemant
क्या हेमंत सोरेन से पुराने झामुमो नेता नाराज़ हैं?
क्या हेमंत सोरेन से पुराने झामुमो नेता नाराज़ हैं?

बचपन से सुनता आ रहा हूँ कि पुराने चावल की बड़ी अहमियत होती है. औषधीय गुण व अनुभव की भट्ठी का पुराना ताप उतराधिकारी पीढ़ी का उर्जा संचरण करता है ऐसा गुणीजनों से बहुत बार सुना है.

किन्तु सूबे में झामुमो- कांग्रेस- राजद व अन्य सहयोगियों के बूते सत्तारूढ़ सरकार में ओल्ड गार्डस के विरोधी तेवर सियासी हांडी के अंदरखाने असंतोष की उबाल के संकेत देते दिख रहे हैं. क्या इसके दुष्परिणाम भी होंगे? यदि होंगे तो उसका सियासी जोर कितना होगा? संभव है कि दुष्परिणाम न भी हों किन्तु इतना तो तय है कि नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी से अबतक दूर बैठी झारखंड भाजपा इकाई को सियासी प्राणवायु मिल जाये.

विगत् कुछ दिनों से सूबे की सियासी गतिविधियों को ताड़ रहा था. नेतृत्व विहीन से दिख रहे प्रतिपक्ष के भोथर वार को धत्ता बताते हुये विगत् 13 माह में विनम्रता के सियासी रथ पर सवार हो सूबे के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुँचे दिसोम गुरु शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन निस्संदेह सूबे की दशा और दिशा अपने ढंग से तय करते दिखाई दिये.

किन्तु हालिया घटनाक्रम पर गौर करें तो सूबे की सियासी हांडी में असंतोष की खिचड़ी उबाल लेती दिख रही है और हेमंत जी
मात्र 13 महीने में ही पुराने चावल से परहेज करते दिख रहे हैं.
यदि मेरी टिप्पणी अतिशयोक्तिपूर्ण है तो झामुमो के वरिष्ठ विधायक और गुरु जी शिबू सोरेन के अन्यतम सियासी संगी जेएमएम विधायक लोबिन हेम्ब्रम अपनी ही सरकार में बेचारगी का रोना क्यों रो रहे हैं?

विधानसभा के अंदर मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि द्वारा अवैध उत्खनन की चिल्ल-पों और अधिकारियों की अनदेखी का विलाप धरना देकर करते लोबीन बाबू की पहुँच क्या हेमंत जी तक नहीं रही ? विरोध के मुद्दे तलाशते विपक्ष को सत्ता पक्ष के ओल्ड गार्ड से मिल रही खुराक क्या हेमंत सरकार के लिये चुनौती नहीं है?
सियासी गलियारे में एक खबर यह भी तैर रही है कि न सिर्फ लोबीन हेम्ब्रम बल्कि स्टीफन मरांडी और मथुरा महतो जैसे अन्य वरिष्ठ भी अपनी अनदेखी और सरकार के रवैये से रूष्ट हैं.

नाराज भाभी जी के विरोधी सुर का शोर थमा ही था कि ओल्ड गार्डस के प्रतिपक्षी तेवर! हेमंत जी, आपके सियासी कौशल का मैं व्यक्तिगत रूप से कायल हूँ. आपने नि:संदेह तमाम विपरीत परिस्थितियों को झेल-झाल कर झामुमो को सूबे के सत्ता रथ पर सवार कराया किन्तु मात्र 13 माह में ही आपके अपने जेएमएम विधायक लोबिन हेम्ब्रम के तीखे तेवर आखिर सार्वजनिक क्यों? रूठना- मनाना आदि सामान्य मसला उसी वक़्त तक रहता है जबतक वो सार्वजनिक न हो . पब्लिक डोमेन में आने बाद तो वो सियासी मसाला ही बन जाता है. हेमंत बाबू, अपनों के घाव लाईलाज होते हैं, इस सच्चाई से मुंह मत फेरिये.

विगत् दिनों आपकी सलाहकार मंडली के साथ उन कंपनियों को भी देखा जो रघुबर दास सरकार से हाथी उड़वा चुके हैं. बड़ा आश्चर्य हुआ और शंका भी हुई कि क्या आपको भी उसी मंडली ने घेरे में ले लिया है जिसने दास जी की सत्ता से विदाई की पटकथा लिखी थी?
सूबे में विकास की असीमित संभावनाओं से किसी को इन्कार नहीं लेकिन झारखंड की जनता अतीत के लूट प्रयोग से उब चुकी थी और उसी उब का सुपरिणाम बनी आपकी ताजपोशी. कोविड आपदा काल में आपकी संवेदनशील सक्रियता ने जनता की आपके प्रति विश्वास और अपेक्षा को और तीव्र कर दिया. कोई शक नहीं की झामुमो के हाथ सत्ता की बागडोर सौंपने वाले झारखंड के युवाओं, बुजुर्गों और हर वर्ग की आशा की डोर आपसे जुड़ी है और बदलाव की अपेक्षा भी रखती है. किन्तु आप भी पूर्ववर्ती ढर्रे पर चलते दिखेंगे तो पुराने क्या नये चावल में भी असंतोष की उबाल ही आयेगी.
खैर ओल्ड गार्डस के बागी सुर के बीच मधुपुर उपचुनाव की रणभेरी बज चुकी है. मेरे लिये देखना दिलचस्प होगा कि बुजुर्गों की नाराजगी के बीच हाजी साहब की विरासत हेमंत बाबू कैसे सहेजते हैं.
मुख्यमंत्री जी, आपका सियासी सलाहकार तो नहीं हूँ किन्तु आप में मुझे झारखंड का सियासी भविष्य दिखता रहा है. संभव है मेरी बेबाक टिप्पणी आपको रास न आये किन्तु याद रखियेगा अतीत के सियासी सूरमाओं की चूक को दोहरा कर आप अपने सियासी भविष्य पर प्रश्नचिन्ह ही लगाते दिख रहे हैं.

पुराने चावल से परहेज़ काहे हेमंत बाबू?

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Why oldguards in jmm uncomfortable with Hemant
क्या हेमंत सोरेन से पुराने झामुमो नेता नाराज़ हैं?
क्या हेमंत सोरेन से पुराने झामुमो नेता नाराज़ हैं?

बचपन से सुनता आ रहा हूँ कि पुराने चावल की बड़ी अहमियत होती है. औषधीय गुण व अनुभव की भट्ठी का पुराना ताप उतराधिकारी पीढ़ी का उर्जा संचरण करता है ऐसा गुणीजनों से बहुत बार सुना है.

किन्तु सूबे में झामुमो- कांग्रेस- राजद व अन्य सहयोगियों के बूते सत्तारूढ़ सरकार में ओल्ड गार्डस के विरोधी तेवर सियासी हांडी के अंदरखाने असंतोष की उबाल के संकेत देते दिख रहे हैं. क्या इसके दुष्परिणाम भी होंगे? यदि होंगे तो उसका सियासी जोर कितना होगा? संभव है कि दुष्परिणाम न भी हों किन्तु इतना तो तय है कि नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी से अबतक दूर बैठी झारखंड भाजपा इकाई को सियासी प्राणवायु मिल जाये.

विगत् कुछ दिनों से सूबे की सियासी गतिविधियों को ताड़ रहा था. नेतृत्व विहीन से दिख रहे प्रतिपक्ष के भोथर वार को धत्ता बताते हुये विगत् 13 माह में विनम्रता के सियासी रथ पर सवार हो सूबे के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुँचे दिसोम गुरु शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन निस्संदेह सूबे की दशा और दिशा अपने ढंग से तय करते दिखाई दिये.

किन्तु हालिया घटनाक्रम पर गौर करें तो सूबे की सियासी हांडी में असंतोष की खिचड़ी उबाल लेती दिख रही है और हेमंत जी
मात्र 13 महीने में ही पुराने चावल से परहेज करते दिख रहे हैं.
यदि मेरी टिप्पणी अतिशयोक्तिपूर्ण है तो झामुमो के वरिष्ठ विधायक और गुरु जी शिबू सोरेन के अन्यतम सियासी संगी जेएमएम विधायक लोबिन हेम्ब्रम अपनी ही सरकार में बेचारगी का रोना क्यों रो रहे हैं?

विधानसभा के अंदर मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि द्वारा अवैध उत्खनन की चिल्ल-पों और अधिकारियों की अनदेखी का विलाप धरना देकर करते लोबीन बाबू की पहुँच क्या हेमंत जी तक नहीं रही ? विरोध के मुद्दे तलाशते विपक्ष को सत्ता पक्ष के ओल्ड गार्ड से मिल रही खुराक क्या हेमंत सरकार के लिये चुनौती नहीं है?
सियासी गलियारे में एक खबर यह भी तैर रही है कि न सिर्फ लोबीन हेम्ब्रम बल्कि स्टीफन मरांडी और मथुरा महतो जैसे अन्य वरिष्ठ भी अपनी अनदेखी और सरकार के रवैये से रूष्ट हैं.

नाराज भाभी जी के विरोधी सुर का शोर थमा ही था कि ओल्ड गार्डस के प्रतिपक्षी तेवर! हेमंत जी, आपके सियासी कौशल का मैं व्यक्तिगत रूप से कायल हूँ. आपने नि:संदेह तमाम विपरीत परिस्थितियों को झेल-झाल कर झामुमो को सूबे के सत्ता रथ पर सवार कराया किन्तु मात्र 13 माह में ही आपके अपने जेएमएम विधायक लोबिन हेम्ब्रम के तीखे तेवर आखिर सार्वजनिक क्यों? रूठना- मनाना आदि सामान्य मसला उसी वक़्त तक रहता है जबतक वो सार्वजनिक न हो . पब्लिक डोमेन में आने बाद तो वो सियासी मसाला ही बन जाता है. हेमंत बाबू, अपनों के घाव लाईलाज होते हैं, इस सच्चाई से मुंह मत फेरिये.

विगत् दिनों आपकी सलाहकार मंडली के साथ उन कंपनियों को भी देखा जो रघुबर दास सरकार से हाथी उड़वा चुके हैं. बड़ा आश्चर्य हुआ और शंका भी हुई कि क्या आपको भी उसी मंडली ने घेरे में ले लिया है जिसने दास जी की सत्ता से विदाई की पटकथा लिखी थी?
सूबे में विकास की असीमित संभावनाओं से किसी को इन्कार नहीं लेकिन झारखंड की जनता अतीत के लूट प्रयोग से उब चुकी थी और उसी उब का सुपरिणाम बनी आपकी ताजपोशी. कोविड आपदा काल में आपकी संवेदनशील सक्रियता ने जनता की आपके प्रति विश्वास और अपेक्षा को और तीव्र कर दिया. कोई शक नहीं की झामुमो के हाथ सत्ता की बागडोर सौंपने वाले झारखंड के युवाओं, बुजुर्गों और हर वर्ग की आशा की डोर आपसे जुड़ी है और बदलाव की अपेक्षा भी रखती है. किन्तु आप भी पूर्ववर्ती ढर्रे पर चलते दिखेंगे तो पुराने क्या नये चावल में भी असंतोष की उबाल ही आयेगी.
खैर ओल्ड गार्डस के बागी सुर के बीच मधुपुर उपचुनाव की रणभेरी बज चुकी है. मेरे लिये देखना दिलचस्प होगा कि बुजुर्गों की नाराजगी के बीच हाजी साहब की विरासत हेमंत बाबू कैसे सहेजते हैं.
मुख्यमंत्री जी, आपका सियासी सलाहकार तो नहीं हूँ किन्तु आप में मुझे झारखंड का सियासी भविष्य दिखता रहा है. संभव है मेरी बेबाक टिप्पणी आपको रास न आये किन्तु याद रखियेगा अतीत के सियासी सूरमाओं की चूक को दोहरा कर आप अपने सियासी भविष्य पर प्रश्नचिन्ह ही लगाते दिख रहे हैं.

दहेज परंपरा को ठेंगा दिखा रहा है आदिवासी समाज की शादियां

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काल्पनिक फोटो

आदिवासी समाज में आज भी बिना तिलक दहेज के होते है विवाह, वर पक्ष ही कन्या पक्ष को देता है सगुन। सदियों से बिना तिलक दहेज के शादी विवाह करने का परंपरा आज भी आदिवासी समाज में कायम है। अन्य वर्गों के लिए यह समाज प्रेरणा दायक बना हुआ है।

वर पक्ष देता है कन्या पक्ष को सगुन :

आज भी आदिवासी समाज में बिना दहेज के शादी की रस्म पूरी की जाती है। वर पक्ष के द्वारा कन्या पक्ष को 12 रूपए बतौर सगून के रूप में देने की प्रथा कायम है। अन्य समाज को इस समाज की परंपरा से सबक लेने की जरूरत है। समाज में तिलक और दहेज आज भी सिर चढ़कर बोल रहा है और लोग इसे शान और शौकत समझ रहे हैं।

वर पक्ष ही करते है बारातियों के खान पान की व्यवस्था :

आदिवासी समाज की परंपरा के बारे में सिजुआई गांव निवासी संजय बेसरा और तिलैया के गणेश बेसरा खनियापहरि गांव निवासी तालो बेसरा ने बताया कि आदिवासी समाज में अमीर से अमीर घराने में बिना तिलक दहेज का शादी किया जाता है। वर पक्ष जब कन्या वरण के लिए उसके गांव बराती स्वरूप पहुंचते हैं तो वर पक्ष बारातियों को अपने खर्च पर ही खाने पीने की व्यवस्था करते हैं, ताकि कन्या पक्ष को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

वर पक्ष कन्या पक्ष को देते है 12 रुपये का सगुन :

वर पक्ष कन्या पक्ष वाले को आज भी मात्र 12 रूपए देकर सगुन करने की परंपरा है। जिससे यह रिस्ता पकका समझी जाए। कहा कि वर पक्ष ही सुयोग्य कन्या को तलाशने जाते हैं। रिश्ता पक्का होने के बाद वर पक्ष द्वारा सगुन दिया जाता है।
वर नौकरी करे या बडे़ घराने से हो लेकिन समाज की मर्यादा का ख्याल रखते हुए उसकी बिना दहेज की ही शादी होती है। सदियों से आदिवासी समाज में यह परंपरा कायम है। आज भी आदिवासी समाज इस परंपरा को कायम रखा है।

अद्भुत होती है शादी विवाह की रस्म :

वर पक्ष बाराती के साथ जब लडकी के गांव पहुंचते हैं तो पेड के नीचे या साधारण सामियाना के नीचे बारातियों का जनवासा होता है। रातभर बाराती जनवासा में रहते है। लडकी वाले के दरवाजे पर दस्तक तक नहीं दिया जाता है। सुबह को अगुवा के द्वारा लडकी वालों को बाराती आने की सूचना दी जाती है। सूचना पाकर शादी के लिए वह लोटा भर पानी लेकर बाराती के समीप आते है। तब समाज के विधि विधान के अनुकुल आगे की रस्म पूरी की जाती है। बताया जाता है कि बांस के बने डाली में कन्या को उठाकर लाने की परंपरा रही है। उसके बाद लडका और लडकी को विवाह के लिए विवाह मंडप पर बैठाया जाता है।

23 March 2021

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23 March 2021

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67th National Awards: छिछोरे Best Movie, कंगना को Best Actress और मनोज वाजपेयी

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67th National Awards की घोषणा कर दी गई है।  साल 2019 के लिए पुरस्कार मई में ही मिलने थे लेकिन कोरोना महामारी के चलते इन्हें टाल दिया गया था।  इस वर्ष दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म “छिछोरे” को Best Movie का अवार्ड दिया गया है।

मनोज वाजपेयी और धनुष को संयुक्त रुप से Best Actor का अवार्ड तो कंगना राणावत को Best actress का पुरस्कार मिला
मनोज वाजपेयी और धनुष को संयुक्त रुप से Best Actor का अवार्ड तो कंगना राणावत को Best actress का पुरस्कार मिला

नेशनल अवार्ड Directorate of Film Division द्वारा दिया जाता है जो सूचना प्रसारण मंत्रालय के अधीन है। ये पुरस्कार उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने दिया,  वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विजेताओं के सम्मान में High Tea का आयोजन किया।  गुजराती period Drama हेल्लारो ( Hellaro) को Best Regional film का अवार्ड दिया गया।

कंगना राणावत ने मणिकर्णिका और पंगा की टीम का शुक्रिया अदा किया 

नेशनल अवार्ड मिलने पर कंगना ने मणिकर्णिका और पंगा की पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये पूरी टीम के मेहनत का फल है । कंगना ने कहा कि मैं यह पुरस्कार देश की महिला शक्ति और अपनी टीम के साथियों को समर्पित करती हूँ।

Madhupur By

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गंगा नारायण सिंह के BJP में शामिल कराकर बाबूलाल ने एक तीर से दो शिकार किए हैं।  पहला,  मधुपुर में NDA वोटों को बंटने से रोका और दूसरा,  अगले विधानसभा चुनाव के लिए देवघर, सारठ और गिरिडीह के एक समाज को अपने साथ जोड़ लिया। 

गंगा नारायण सिंह का BJP में स्वागत करते बाबूलाल
गंगा नारायण सिंह का BJP में स्वागत करते बाबूलाल

मधुपुर में तमाड़ का इतिहास दोहराया जाएगा 

बाबूलाल ने कहा कि सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सरकार के जनविरोधी कार्यकलाप और जनता की नाराजगी को भांपते हुए व चुनाव की हार के डर से अपने प्रत्याशी को विधायक बनने के पूर्व ही मंत्री बना दिया। किन्तु झामुमो तमाड़ की हार भूल गयी है। शिबू सोरेन मुख्यमंत्री होते हुए भी चुनाव हार गए थें। मधुपुर में भी यही होने वाला है ।

BJP के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करूंग- गंगा नारायण सिंह 

गंगा नारायण सिंह ने कहा कि गांव, गरीब व किसान की निस्वार्थ सेवा के लिए भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन किया है। भाजपा की सिपाही होने के नाते निस्वार्थ कार्य करूँगा। अटल बिहारी बाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना आदर्श मानता हूँ। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास,संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह का आभार प्रकट करते हुए कहा भाजपा का सिपाही होने के नाते पूरी ईमानदारी, पूरे विश्वास और निष्ठा के साथ कार्य करूँगा।

कहीं हिंदू बनाम मुस्लिम न हो जाए मधुपुर By-election ?

गंगा नारायण सिंह के आने से BJP-AJSU के वोटर एकजुट होंगे ये तय है। लेकिन हफीजुल हसन को जीतने के लिए यादव-मुस्लिम-आदिवासी वोटर्स को एकजुट करना होगा । ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान अन्नपूर्णा देवी,  रामचंद्र चंद्रवंशी, बाबूलाल की तिकड़ी को खूब पसीना बहाना होगा । इसके अलावा ब्राह्मण वोट किसकी तरफ जाता है,  ये महत्वपूर्ण होगा।

भाजपा ने बंगाल के लिए किया घोषणापत्र जारी,पहली कैबिनेट में CAA लागू करने का वादा

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BJP released manifesto for Bengal

कोलकाता । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का घोषणापत्र जारी कर दिया। शाह ने कहा कि यह सिर्फ पार्टी का घोषणापत्र नहीं है बल्कि पश्चिम बंगाल के लिए एक संकल्प पत्र है।

 

घोषणापत्र जारी करते समय उन्होंने कहा, “हमने अपने घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ का नाम दिया है। यह सिर्फ घोषणा पत्र नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल के लिए संकल्प पत्र है। भाजपा के संकल्प पत्र के दिल में है सोनार बांग्ला।

 

क्या क्या है भाजपा के घोषणा पत्र में

 

महिलाओं को नौकरी में 33 प्रतिशत आरक्षण

 

किसानों को किसान सम्मान निधि का बकाया 18 हजार रुपये, उसके बाद केंद्र के 6000 रुपये सालाना में राज्य के 4000 रुपये जोड़कर 10 हजार रुपये

 

पहली कैबिनेट बैठक में बंगाल के हर गरीब को आयुष्मान भारत योजना का लाभ

 

मछुआरों को सालाना 6 हजार रुपये

 

घुसपैठ पर पूरी तरह लगेगी लगाम

 

हर त्योहार बेरोक-टोक मनाया जाएगा, कोर्ट की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी

 

पहली कैबिनेट में लागू किया जाएगा नागरिकता संशोधन एक्ट

 

ओबीसी आरक्षण में कई समुदायों को जोड़ा जाएगा

 

सभी महिलाओं के लिए केजी से पीजी तक की मुफ्त पढ़ाई

 

पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं के लिए निशुल्क यात्रा

भूमिहीन किसान को सालाना 4000 रुपये

 

तीन नए एम्स बनाए जाएंगे

 

हर परिवार में कम से कम एक सदस्य को रोजगार

 

सातवां वेतन आयोग लागू किया जाएगा

मुख्यमंत्री कार्यालय के अंतर्गत एंटी करप्शन हेल्पलाइन

 

हर परिवार को शौचालय और साफ पीने का पानी

 

नोबल प्राइज की तर्ज पर टैगोर प्राइज और ऑस्कर की तर्ज पर सत्यजीत रे प्राइज

 

11 हजार करोड़ का सोनार बांग्ला फंड

गरीब और अनुसूचित जाति की बालिकाओं के लिए विशेष छात्रवृत्ति

विधवा पेंशन एक हजार रुपये से बढ़ाकर तीन हजार रुपये

फसल के सही दाम के लिए पांच हजार करोड़ का इंटरवेंशन फंड बनाया जाएगा

 

कृषक सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाया जाएगा

 

किसान क्रेडिट कार्ड अपडेट कर रूपे कार्ड दिया जाएगा

 

नौकाओं का 100 प्रतिशत मशीनीकरण किया जाएगा

 

अमूल के साथ मिलकर बांग्ला श्वेत क्रांति की शुरुआत की जाएगी

राज्य के 5 जोन में पांच मेगा यूनिट बनाई जाएगी.

 

आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया जाएगा

 

मेडिकल सीटों को दोगुना बनाने का प्रयास किया जाएगा

वन नेशन वन हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा

 

शिक्षित रोजगारों के लिए प्रत्येक ब्लॉक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस बीपीओ की शुरुआत की जाएगी.

 

आईआईटी, आईआईएम की तर्ज पर 5 विश्वविद्यालयों की स्थापना

 

भर्तियों के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट की शुरुआत

 

*हर साल खेलो बांग्ला महाकुंभ

अम्फान, बुलबुल आदि साइक्लोन के राहत कार्यों में घोटाले की जांच होगी*

 

सामुदायिक हिंसा और राजनीतिक हिंसा समेत तमाम अपराधों पर नकेल कसने के लिए समुचित तंत्र

 

सभी राजनीतिक हिंसा के पीड़ितों के परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा.

 

दुर्गापूजा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने के प्रयास किए जाएंगे.