गया के चौकीदार पुत्र हत्याकांड का खुलासा करते एसएसपी आदित्य कुमार
गया। चंदौती थाना क्षेत्र के चौकीदार के पुत्र संजय पासवान हत्याकांड का खुलासा पुलिस ने कर दी है। इसमें शामिल चार अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उक्त बातें गया के एसएसपी आदित्य कुमार ने प्रेस वार्ता कर मीडिया कर्मियों को जानकारी दी।
एसएसपी आदित्य कुमार जानकारी देते हुए बताया कि बीते 10 जुलाई को चंदौती थाना अंतर्गत चौकीदार के पुत्र संजय पासवान को अज्ञात अपराधियों द्वारा गला रेतकर हत्या कर दिया गया था और उसके शव को प्रेतशिला पहाड़ के नीचे रोड किनारे बोरा में बंद कर फेंक दिया गया था। घटना के बाद चंदौती थाना में कार्ड संख्या 181/2021 दर्ज कर एक विशेष एसआईटी टीम गठित की गई थी। जिसमें अपर पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के साथ चंदौती थानाध्यक्ष मोहन कुमार सिंह, चाकंद थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार एवं तकनीकी शाखा के पुलिस कर्मियों को शामिल किया गया था।
तकनीकी विश्लेषण एवं अनुसंधान के क्रम में मृतक के मोबाइल पर बिंदु पासवान उर्फ जितेंद्र फोन करके बुलाया और अपने छ: युवकों के साथ मिलकर हत्या की घटना को अंजाम देकर शव को ठिकाना लगा दिया था। इस घटना के मुख्य आरोपी बिंदु पासवान उर्फ जितेंद्र है।
गिरफ्तार अभियुक्तों की निशानदेही पर घटना में सम्मिलित पिंटू पासवान, मनीष मांझी, शिव पासवान को गिरफ्तार किया गया और इन्होंने हत्या की घटना को अंजाम देने की बात भी स्वीकारा है। गिरफ्तार अपराधियों के पास से घटना में प्रयुक्त 4 मोबाइल, एक पसुली चाकू, तीन मोटरसाइकिल बरामद किया गया है। फरार दो अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है जल्द ही इन लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
गया। देश में पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के साथ ही सभी आवश्यक वस्तुओं की दाम में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ गया में कांग्रेस पार्टी के द्वारा साइकिल यात्रा निकालकर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी एवम् बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने महगांई के खिलाफ चल रहे चरणबद्ध आंदोलन के तहत स्थानीय कांग्रेस कार्यालय राजेंद्र आश्रम से साईकिल यात्रा निकाली गयी। साईकिल यात्रा में कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एन एस यू आई, महिला कांग्रेस, इंटक, कांग्रेस सेवादल, किसान कांग्रेस, कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल, कांग्रेस अनुसूचित जाति जनजाति प्रकोष्ठ, कांग्रेस व्यवसायिक प्रकोष्ठ, कांग्रेस पिछड़ा प्रकोष्ठ, कांग्रेस अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ, कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ, कांग्रेस शिक्षक प्रकोष्ठ एवम् महंगाई से त्रस्त आमजन भारी संख्या में शामिल हो कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
इस दौरान कांग्रेस नेताओ व कार्यकर्ताओं ने देखो यह भाजपा का खेल, दो सौ रुपए सरसो तेल देखो यह मोदी का खेल पेट्रोल, डीजल सौ रुपए भेल, घरेलू गैस हजारा भेल,हर जोर जुल्म के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है, जब तक महंगाई से राहत नहीं, तब तक संघर्ष जारी रखेंगे रोको महंगाई , बांधो दाम नहीं तो होगा चक्का जाम आदि नारो को बुलंद करते हुए जमकर नारेबाजी की।
साईकिल यात्रा में शामिल नेता कार्यकर्ताओं ने कहा कि एक तरफ डेढ़ वर्षों से कोरोनावायरस महामारी से बेहाल जनता के उपर जान, बुझ कर सरकार महंगाई थोप रही है, जिससे गरीब मध्यवर्गीय परिवार त्राहि, त्राहि कर रहे हैं। पेट्रोल, डीजल महंगे होने से रोजमर्रा के उपयोग होने वाले सभी खाद्य सामग्रियों का दाम आसमान छू रहा है, सरसो तेल की कीमत छह माह में पहले से दुगना हो गया है, सभी भाड़े के वाहन भाड़ा दुगना से भी ज्यादा कर दिए हैं, ट्रेन भाड़ा से लेकर प्लेटफॉर्म टिकट तक के दाम दुगना से ज्यादा हो गया है, जनता महंगाई कि मार से कराह रही है। घरेलू गैस का दाम भी हजार के करीब पहुंचने वाला है, तथा सरकार द्वारा मिलने वाली सब्सिडी पूरी तरह खत्म होने के कगार पर है, उज्वला गैस उपभोक्ता अपने सिलिंडर बेचने को मजबूत है, तो मध्यवर्गीय परिवार की गृहिणियों के आंखो में आंसू छलक रहे हैं। नेताओ ने गयावासियो से 17 जुलाई 2021 को राज्य मुख्यालय पटना में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन में ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल होने की अपील की। नेताओ ने कहा को कांग्रेस पार्टी महंगाई के खिलाफ लगातार आंदोलन जारी रखेगी , जब तक जनता को महंगाई से राहत नहीं मिल जाती। इस कार्यक्रम में प्रदेश प्रवक्ता विजय कुमार मिठू, गया के उपमहापौर मोहन श्रीवास्तव,प्रदेश प्रभारी वसी अख्तर,युगल किशोर सिंह,महिला नेत्री लाक्षो देवी सहित कई अन्य नेतागण और कार्यकर्ता शामिल थे।
दुमका : झारखंड की पूर्व मंत्री लुईस मरांडी ने हेमंत सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के भाई और स्थानीय विधायक बसंत सोरेन की कई गलत कामों में मिलीभगत है।
लुईस मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके छोटे भाई दुमका के विधायक बसंत सोरेन पत्थर, बालू और कोयले को अपने शासनकाल में ही संथाल परगना से समाप्त करके दम लेंगे। आने वाली पीढ़ियों के लिए इस इलाके में कुछ भी छोड़ना नहीं चाहते।
पूर्व मंत्री लुईस मरांडी ने कहा कि जल, जंगल, जमीन की बात करने वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार जब से सत्ता में आई है, तभी से लगातार जंगलों की कटाई के साथ-साथ जमीन की लूट बढ़ गई है।
दुमका जिले में चल रहे "अवैध कारोबारों" को लेकर शासन व प्रशासन को अल्टीमेटम है, अगर परिस्थिति अगले सात दिन के अंदर नहीं बदली गयी तो जनांदोलन के लिए तैयार रहे निक्कमी झारखण्ड सरकार !
2019 का चुनाव जेवीएम के टिकट पर लड़ तीसरे नंबर पर रहे थे सामड
कोल्हान में पिछले दो विधानसभा चुनाव से भाजपा की हालत पतली है। पार्टी इस क्षेत्र से लगातार पिछड़ रही है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ के निधन के बाद खासकर कोल्हान के ग्रामीण इलाकों से पार्टी किसी ऐसे चेहरे की तलाश में थी, जिसे वहां के स्थानीय ग्रामीण खुद के बीच का कह सकें। झारखंड बीजेपी की ये तलाश चक्रधरपुर के पूर्व विधायक शशिभूषण सामड पर आकर खत्म हुई । सामड जल्द ही भाजपा ज्वाइन करने वाले हैं।
जल्द होगी औपचारिक घोषणा
2014 में चक्रधरपुर विधानसभा से झारखंड मुक्ति मोर्चा की टिकट पर विधायक चुने जाने वाले शशि भूषण को भाजपा में लाने की लगभग पूरी तैयारी हो चुकी है । बस पार्टी की सदस्यता ग्रहण करना औपचारिकता मात्र शेष रह गया है । कहा जा रहा है कि सामड को भाजपा लक्ष्मण गिलुआ की जगह चक्रधरपुर से चुनाव भी लड़वा सकती है। हालांकि इस बार लक्ष्मण गिलुआ खुद JMM के सुखराम उरांव से चुनाव हार गए थे, इसलिए सामड को ये मौका अगले विधानसभा या लोकसभा चुनाव के दौरान ही मिल सकेगा।
2014 में झामुमो के टिकट पर जीते थे सामड
भाजपा के पास चेहरे तो कई हैं, लेकिन चुनाव जीतने का दमखम नहीं
हालांकि कई भाजपाई लक्ष्मण गिलुवा की जगह लेने को सक्रिय रहे हैं । इनमें रतनलाल बोदरा, ललित मोहन गिलुवा, विजय मेलगांडी, श्याम सुंदर नाग और पूर्व विधायक चुमनू उरांव आदि का नाम लिया जा सकता है। लेकिन इनमें से कोई भी भाजपा को चक्रधरपुर से जीत की गारंटी नहीं दिला सकता । लेकिन शशिभूषण सामड 2014 में झामुमो से विधायक थे, 2019 में झामुमो से टिकट कटने के बाद वो बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम से चुनाव लड़े और तीसरे नंबर पर रहे।
झारखंड के 3000 विचाराधीन आदिवासियों की लड़ाई लड़ने वाले स्टेन स्वामी की मौत भी विचाराधीन कैदी के रुप में हुई
हमने जुलाई की शुरुआत में हिरासत में फादर स्टेन स्वामी के निधन को देखा। लेकिन शायद आपको पता नहीं कि भारत में हर वर्ष लगभग 1600 लोग हिरासत में दम तोड़ देते हैं। ये विचाराधीन कैदी हैं, जिनका दोष सिर्ध होने से पहले ही व्यवस्था उन्हें मार डालती है । भीड़-भाड़ वाली जेलों में विचाराधीन कैदियों की कैद हमारे लोकतांत्रिक समाज के साथ-साथ कानून के शासन की विफलता का आईना है। इनमें कई लोगों का तो ट्रायल तक शुरु नहीं हुआ होता….
आठ महीने से अधिक समय तक जेल में रहने के बावजूद स्वामी का मुकदमा शुरू नहीं हुआ था । स्वामी किस्मतवाले थे कि उनकी मौत समाचारपत्रों कि सुर्खीयां बन सकी, लेकिन उन हजारों लोगों के बारे में सोचिए जो कोर्ट की तारीखों के इंतजार में सलाखों के पीछे दिन गिनते-गिनते दम तोड़ देते हैं, लेकिन उनकी तारीख नहीं आती । उनमें से कई लोग तो बकरी चोरी जैसे छोटे-मोटे मामलों में हिरासत में कैद रहते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई की तारीख न आने के कारण कैद में ही मौत हो है। क्या कोई व्यवस्था इतनी निष्ठुर, इतनी असंवैदनशील हो सकती है ? और जिस व्यवस्था में कमजोरों को न्याय नहीं मिल सके, उस देश, उस सिस्टम का नाश तो हो ही जाना चाहिए ।
भारत की जेलों में 70% के करीब कैदी विचाराधीन हैं । ये हमारी नहीं बल्कि केन्द्र सरकार की रिपोर्ट कहती है । इन विचाराधीन कैदियों के कारण जेलों में जगह नहीं बची । लेकिन अदालतों में मुकदमों की संख्या इतनी ज्यादा है कि इनमें से अधिकांश विचाराधीन कैदियों का नंबर तक नहीं आ पाता। ये कहने की जरुरत नहीं कि इनमें से अधिकांश विचाराधीन कैदी गरीब हैं, जो महंगे वकील नहीं रख पाते, जिनकी ऊपर तक पहुंच और पैरवी नहीं है। लेकिन क्या ऐसे लोगों को न्याय पाने का अधिकार नहीं है ? ऐसी व्यवस्था चलाने वालों को रात भर नींद कैसे ा जाती है ?
विश्व मानवाधिकार की रिपोर्ट कहती है कि भारत की पुलिस व्यवस्था क्रूर (Brutal) है और पुलिसिया अनुसंधान में वैज्ञानिक तरीकों का अभाव है। विश्व मानवाधिकार की रिपोर्ट कहती है कि भारत में मुकदमें लड़ने वाले 80% लोग सिर्फ आरोपी को कुछ दिनों के लिए जेल भिजवाने से ही संतुष्ट हो जाते हैं, भले ही वो लचर अनुसंधान के कारण बाद में जमानत लेकर बाहर आ जाए । सिर्फ 20% मामलों में ही सजा हो पाती है । इसका एक बड़ा कारण केसों का अंबार और पुलिस द्वारा सबूत जुटाने की प्रक्रिया में गड़बड़ी है ।
शरद पवार ने 2022 में अपनी राष्ट्रपति की उम्मीदवारी की खबरों को खारिज किया
एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा है कि वे 2022 में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार नहीं हैं। इस तरह की खबरें मीडिया में प्लांट करना एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उन्होने कहा कि दरअसल विपक्ष के ही कुछ लोग मेरी राजनीति को खत्म करने के उद्देश्य से इस तरह की अफवाहें उड़ा रहे हैं। शरद पवार मीडिया के एक हिस्से में छपी खबर का जवाब दे रहे थे जिसमे 2022 में उनको संयुक्त विपक्ष का राष्ट्रपति उम्मीदवार बताया गया है ।
प्रशांत किशोर से बात हुई पर वो राष्ट्रपति के लिए नहीं थी- पवार
शरद पवार ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मैं कई तरह के लोगों से मिलता हूं। इनमें किसान, व्यापारी, राजनैतिक और गैर-राजनीतिक व्यक्ति होते हैं। उसी तरह मैं प्रशांत किशोर से भी मिला। उनसे कई तरह की बातचीत हुई जिनमें से अधिकांश गैर-राजनीतिक बातें थी। अब मुझे 2022 में राष्ट्रपति का उम्मीदवार बताने वाली खबर कहां से मिली मुझे जानकारी नहीं है। लेकिन मैं इतना साफ कर देना चाहता हूं कि मैं 2022 में राष्ट्रपति की उम्मीदवारी नहीं कर रहा ।
मीडिया में तरह-तरह की चर्चाएं चलती रहती हैं
शरद पवार की पार्टी के नेता नवाब मलिक ने कहा कि पार्टी के अंदर पवार साहब की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर किसी भी स्तर पर कोई चर्चा नहीं हुई है। ये सब मीडिया का अपना अंदाजा है, इसका कोई आधार नहीं है। नवाब मलिक ने कहा कि मीडिया में आए दिन तरह-तरह की चर्चाएं चलती रहती हैं, इसका हम बुरा नहीं मानते ।
कांग्रेस में बड़े सांगठनिक बदलाव की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। इसे फाइनल टच देने के लिए सोनिया गांधी ने पार्टी के संसदीय रणनीतिक समूह की बैठक बुलाई है । इसके बाद इन बदलावों का आधिकारिक एलान कर दिया जाएगा ।
सोनिया बनेंगी स्थाई अध्यक्ष, कमलनाथ कार्यकारी अध्यक्ष
कमलनाथ संभालेंगे संगठन , राहुल गांधी होंगे चेहरा
सूत्रों की मानें तो मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता कमलनाथ को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है और उन्हें कांग्रेस पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है । बता दें कि कमलनाथ गांधी परिवार के करीबी नेताओं में शुमार किए जाते हैं और कई मौकों पर संकटमोचक साबित हुए हैं ।
सोनिया गांधी बन सकती हैं स्थाई अध्यक्ष कांग्रेस के संसदीय रणनीतिक समूह की बैठक में पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को स्थाई अध्यक्ष बनाया जा सकता है । बता दें कि साल 2019 में लोक सभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था । इसके बाद सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी थी, लेकिन अभी तक कांग्रेस को स्थाई अध्यक्ष का चुनाव नहीं कर पाई है ।
राहुल गांधी को मिलेगी संसद में पार्टी की कमान सूत्रों के अनुसार कांग्रेस 19 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र से पहले अधीर रंजन चौधरी की जगह राहुल गांधी को लोक सभा में पार्टी का नेता बना सकती है । हालांकि अभी इसका फैसला संसदीय रणनीतिक समूह की बैठक में किया जाएगा और यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि राहुल गांधी लोक सभा में पार्टी का नेतृत्व संभालने के लिए तैयार हैं या नहीं।
मोदी कैबिनेट के फैसले से डेढ़ करोड़ परिवारों को फायदा
केन्द्र सरकार के 52 लाख कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है । लगभग डेढ़ साल बाद मोदी सरकार ने महंगाई भत्ते में 11 फीसदी का इजाफा किया है । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट समिति ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों को दी जाने वाली महंगाई राहत को 01 जुलाई 2021 से बढ़ाकर 28% करने की मंजूरी दे दी । पहले यह मूल वेतन/पेंशन का 17% थी। मतलब सीधे मौजूदा दर में 11% की वृद्धि हुई है।
घर बनाने के लिए भी मिलेगा एडवांस
केन्द्र सरकार ने अब अपने कर्मचारियों को हाउस बिल्डिंग एडवांस भी देने का फैसला किया है। इसके तहत उन्हें सस्ती दरों पर घर बनाने के लिए एडवांस पैसे दिए जाएंगे । हाउस बिल्डिंग एडवांस के तहत सरकार अब महज 7.9 फीसदी ब्याज पर घर बनाने के लिए पैसे देगी। इस स्कीम का फायदा 31 मार्च 2022 तक उठाया जा सकता है । सितंबर 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी घोषणा की थी ।
डेढ़ साल से लगी हुई ती महंगाई भत्ते पर रोक
दरअसल कोरोना शुरू होने के बाद से महंगाई भत्ते की बढोत्तरी पर रोक लगी हुई थी । पिछले साल कोरोना महामारी शुरू होने के बाद अप्रैल के महीने में केंद्रीय कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते की दो किस्तों को जारी करने पर रोक लगा दी थी । चूंकि महंगाई भत्ते की क़िस्त हर छह महीने पर जारी की जाती है । एक बार 1 जनवरी से जबकि दूसरी बार 1 जुलाई से ।
रांचीः महावीर महली ओरमांझी के डहू गांव के निवासी हैं। उनका परिवार परंपरागत रूप से बांस के सामान बनाता है। वे बांस से बने गुलदस्ता, लैंप स्टैंड, दीवार पर सजानेवाले फूलदान, पेन स्टैंड सहित अन्य कलात्मक सामानों को बनाते हैं। महावीर पिछले दस सालों से झारक्राफ्ट से जुड़े हैं। झारक्राफ्ट से जुड़ने के बाद उनके कौशल में और निखार आया। झारक्राफ्ट के माध्यम से उन्हें इन वस्तुओं के निर्माण के अलावा इनकी मार्केटिंग में भी सहायता मिली है। महावीर आज इस कला की बदौलत अपने परिवार का भरण पोषण अच्छी तरह से कर रहे हैं।
झारक्राफ्ट के जरिये हस्तशिल्प को बढावा दे रही सरकार
झारक्राफ्ट के माध्यम से राज्य सरकार झारखंड के हस्तशिल्प उत्पादों को आगे बढ़ाने में लगी है। इन हस्तशिल्पों में कई तरह की चीजें हैं। लाह के सामान, बांस के सामान, डोकरा आर्ट, सोहराई, कोहबर, जादूपटिया पेंटिंग, टेराकोटा आर्ट, जूट के सामान, चमड़े के उत्पाद जिसमें पर्स से लेकर मांदर, नगाड़ा, ढोलक जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्र शामिल हैं। इनके साथ कागज से बनी कुछ अनोखी चीजें जैसे छऊ मुखौटा, मूर्ति जैसी कलात्मक वस्तुओं की कारीगरी को भी यहां प्रोत्साहन मिलता है।
30 हजार हस्तशिल्पी जुड़े हैं झारक्राफ्ट से
सिर्फ हस्तशिल्प की बात करें तो करीब 30 हजार परिवार हैं जो इस पेशे से जुड़े हैं। इन करीगरों को झारक्राफ्ट किसी न किसी माध्यम से मदद कर रहा है। इन कारीगरों को प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की पहल की गई है। झारक्राफ्ट ने झारखंड के विशिष्ट हस्तशिल्प को संरक्षण और प्रोत्साहन देने का काम किया है।
मिल रहा प्रशिक्षण और स्थानीय हस्तशिल्प को संरक्षण
झारक्राफ्ट ने क्षेत्र विशेष की कला के अनुसार उन्हीं क्षेत्रों में गांवों में जाकर कारीगरों को प्रशिक्षण दिया। इस दौरान उन्हें बाजार की मांग के अनुसार हस्तशिल्प उत्पादों को तैयार करने, बाजार में उत्पादों को उतारने आदि की जानकारी दी गई है। मिसाल के तौर पर रांची में आर्टिस्टिक टेक्सटाइल, जूट और बांस के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
हस्तशिल्प की अच्छी है मांग
झारक्राफ्ट से जुड़े कारीगरों के हस्तशिल्प की बिक्री के लिए राज्य के अलावा दूसरे राज्यों में भी इंपोरियम बनाये गये हैं। राज्य में रांची के अलावा धनबाद, हजारीबाग, खरसांवा, बेंगलुरू, कोलकाता, नई दिल्ली और मुंबई में इंपोरियम हैं जहां झारक्राफ्ट के उत्पादों की अच्छी डिमांड है।
“झारक्राफ्ट राज्य की पहचान है। इसके उत्पादों की काफी मांग है, लेकिन बाजार नहीं मिल रहा है। इसे प्रोफेशनल तरीके से चलाने की जरूरत है।“
राज भवन स्थित बिरसा मंडप में शपथ लेते राज्यपाल रमेश बैंस
रांची । राज्यपाल रमेश बैस ने झारखण्ड राज्य के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण किया। उन्हें राज भवन स्थित बिरसा मंडप में आयोजित समारोह में झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. रवि रंजन द्वारा झारखण्ड के राज्यपाल के पद की शपथ दिलाई गई। इससे पूर्व मुख्य सचिव सुखदेव सिंह द्वारा राष्ट्रपति भवन द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति से संबंधित वारंट को पढ़ा गया।
उक्त अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य आलमगीर आलम, रामेश्वर उरांव, सत्यानन्द भोक्ता, चम्पई सोरेन, जोबा माँझी, बन्ना गुप्ता, बादल पत्रलेख, सांसद संजय सेठ एवं दीपक प्रकाश, राँची नगर निगम की महापौर आशा लकड़ा, झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, विकास आयुक्त अरुण सिंह, पुलिस महानिदेशक नीरज सिन्हा, महानिदेशक, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन एम.वी.राव, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव शैलेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, प्रधान सचिव, मंत्रिमंडल एवं निगरानी विभाग वंदना दादेल, मुख्यमंत्री के सचिव विनय चौबे, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल को बधाई देते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा एवं रघुवर दास ने दी बधाई
पूर्व मुख्यमंत्री एवं केन्ज्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने रमेश बैंस को बधाई देते हुए कहा कि रमेश बैस जी को झारखंड के महामहिम राज्यपाल के रूप में शपथ लेने की बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाएं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके मार्गदर्शन और अनुभव से झारखंड का सर्वांगीण विकास होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री सह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने झारखंड के नवनियुक्त राज्यपाल रमेश बैस को शपथ ग्रहण करने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि “माननीय श्री रमेश बैस जी को वीरों की धरती झारखंड के 10वें राज्यपाल के रूप में शपथ लेने पर हार्दिक बधाई और जोहार। आपके नेतृत्व में झारखंड में संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। शासन-प्रशासन के निरंकुश होने पर रोक लगेगी और गड़बड़ी करने वालों की जवाबदेही तय होगी।”
राज्यपाल को बधाई देते झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. रवि रंजन
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना से कई लोगों ने अपने स्वजन को खोया है। सरकार हर असहाय एवं निराश्रित के साथ खड़ी है। निराश्रित हुए बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की घोषणा की गई है। इसके तहत चार हजार रुपये प्रतिमाह उनके भरण-पोषण के लिए दिए जाएंगे। जल्द ही इन बच्चों के विधिक अभिभावक के खाते में पैसा भेज दिया जाएगा। कई महिलाएं भी कोरोना के कारण निराश्रित हुई हैं, सरकार उनके लिए भी योजना बना रही है। उन्हें विधवा पेंशन उपलब्ध कराया जाएगा और उनकी योग्यता के अनुसार उन्हें रोजगार भी उपलब्ध कराएंगे, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
मुख्यमंत्री बुधवार को योगीराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित विभिन्न परियोजनाओं के शिलान्यास एवं लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवा, बांसगांव, पिपराइच आदि विधानसभा क्षेत्रों की करीब 80 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इनमें 39.53 करोड़ रुपये की 48 योजनाओं का शिलान्यास जबकि 40.71 करोड़ रुपये लागत की 75 परियोजनाओं का लोकार्पण शामिल है। उन्होंने कहा कि कोरोना से निराश्रित हुई महिलाओं के लिए वृहद योजना बनाई जा रही है। शिविर लगाकर उनके विधवा पेंशन के फार्म भरवाए जाएंगे और पेंशन दिलाई जाएगी। इन महिलाओं को आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता, रसोइया एवं सरकार की अन्य योजनाओं के तहत समायोजित कर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
सरायकेला: चांडिल अनुमंडल के लुपुंगडीह में अवस्थित आसु किस्कू एवं रवि किस्कू बीएड कॉलेज के प्रचार्य पर अधिक पैंसा लेने का आरोप लगा है। जब झाछामो जिलाध्यक्ष सुदामा हेम्ब्रम के पास यह मामला पंहुचा की छात्रों से अलग से पंजीकरण के नाम पर अपने ही विश्वविद्यालय का भी दो सौं रूपया करके अधिक लिया जा रहा है। तब इस मामले पर झाछामो जिलाध्यक्ष ने बीएड कालेज के प्रचार्य डॉ.अधिकारी से मिले, तो प्रचार्य भी पंजीकरण के नाम पर अधिक ही दो सौ रुपया लेने की बात कही। इसके बाद जिलाध्यक्ष सुदामा हेम्ब्रम ने कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गंगाधर पाडा से दूरभाष पर संपर्क किया गया और मामला की पुरी जानकारी दिया। वही तुरंत कुलपति ने वोकेशनल कोर्स के पदाधिकारी को मामले को संज्ञान लेने को कहा और जांच पड़ताल किए जाने पर पाया गया कि हरेक छात्र जो अपने ही विश्वविद्यालय के उनसे भी फिजुल पैंसा लिया गया था। जबकि, अपने विश्वविद्यालय का कोई चार्ज नहीं लिया जाता है।
मामले की त्वरित कार्रवाई करते हुए बीएड कालेज के सचिव बरूण डे से दूरभाष पर बात कर सभी छात्रो को लिए गए अधिक पैंसा को वापस करने को कहा और आगे ऐसे घटना की पुनरावृत्ति नही करने का चेतावनी दी और फटकार लगाई। वही झाछामो के जिलाध्यक्ष सुदामा हेम्ब्रम ने कहा की छात्रो के साथ अन्याय बर्दाश्त नही किया जाएगा। ऐसा दोबारा होने पर छात्र आर- पार की लडाई लडने को बाध्य होंगे। इस अवसर पर छात्र नेता दीनबंधु महतो, महावीर हांसदा, सोमाय टुडू आदि उपस्थित थे।
जब दो दलों के रणनीतिकारो ने आपस में हाथ मिला लिया?
केंद्र में अब आरसीपी सिंह, भूपेन्द्र यादव और नित्यानंद राय की गहरी दोस्ती के चर्चे हैं। इस तिकड़ी से प्रगाढ़ होते रिश्ते से नीतीश बेचैन हैं। उन्होंने उपेन्द्र कुशवाहा को पूरे बिहार का दौरा कर जेडीयू संगठन में आरसीपी के प्रभाव को न्यूट्रलाइज करने को कहा है । दिल्ली में नीतीश कुमार के एक बेहद खास दूत ने कांग्रेस आलाकमान से संपर्क की कोशिश की है। हालांकि इसकी डिटेल्स नहीं मिल सकी ।
कहते हैं नीतीश कुमार को बीजेपी नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से तो कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव या बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल जैसे नेताओं से डील करना उनको स्तरहीन लग रहा था. वैसे भी जिसकी सुशील मोदी को साल दर साल डिप्टी सीएम बना कर आगे पीछे घुमाते रहने की आदत रही हो, उसके लिए उनसे जूनियर नेताओं से बात करना भी अच्छा तो नहीं ही लगता होगा.
लिहाजा नीतीश कुमार ने मौके की नजाकत को देखते हुए अपने हिसाब से सबसे काबिल और भरोसेमंद आरसीपी सिंह को जेडीयू अध्यक्ष बनाने का फैसला किया – और फिर कमान सौंप दी. बोनस फायदा ये भी रहा कि जो बाद मोदी-शाह के लिए नीतीश कुमार के लिए कहना मुश्किल होता, आरसीपी सिंह एक प्रवक्ता की तरह बोल भी देते और नीतीश कुमार मन ही मन खुशी भी महसूस कर लेते ।
तो क्या आरसीपी ने नीतीश को गच्चा दे दिया?
मोदी कैबिनेट की फेरबदल या विस्तार जो भी कहें, से पहले नीतीश कुमार के पास बीजेपी के एक नेता का फोन आया था । अगर खुद मोदी या शाह ने किया होता तो वो बात भी करते, लेकिन नीतीश कुमार ने फोन पर बोल दिया कि जेडीयू अध्यक्ष आरसीपी सिंह बात कर लेंगे ।
नीतीश कुमार के ब्रीफ करने के बाद जब आरसीपी सिंह ने बीजेपी नेता से संपर्क किया तो अपना प्रस्ताव सामने रख दिया । आरसीपी सिंह ने जेडीयू कोटे के तहत तीन मंत्रियों की तो डिमांड रखी ही, पशुपति कुमार पारस को भी मंत्री बनाने की सलाह दी । समझा जाये तो जेडीयू के कोटे से कैबिनेट और राज्यमंत्री मिलाकर चार चार मंत्री ।
मंत्रीपद को लेकर मोलभाव के साथ ही जेडीयू में तैयारियां भी शुरू हो गयीं. जेडीयू के एक सांसद को फौरन दिल्ली बुला लिया गया – और मंत्री पद के लिए पार्टी की सूची में शामिल दो सांसदों ने जरूरत के हिसाब से आरटीपीसीआर टेस्ट करा कर जल्दी जल्दी रिपोर्ट भी हासिल कर ली – लेकिन इंतजार करते ही रह गये ।
नीतीश कुमार एक अति पिछड़ा वर्ग से और एक कुशवाहा सांसद के साथ साथ अपने करीबी नेता ललन सिंह को कैबिनेट मंत्री बनवाना चाहते थे. 2019 में बीजेपी की सत्ता में वापसी के बाद जब प्रधानमंत्री मोदी मंत्रिमंडल का गठन करने जा रहे थे तब भी नीतीश कुमार करीब करीब ऐसा ही चाहते थे, लेकिन गठबंधन साथियों को एक सीट से ज्यादा न देने के बीजेपी के निश्चय को डिगा नही सके थे ।
भूपेन्द्र यादव ने नीतीश वाला फॉर्मूला, उन्हीं पर अप्लाई कर दिया
नीतीश कुमार ने एक बार चिराग पासवान को समझाया था – ‘कहां दूसरों के चक्कर में पड़े हो, कोई अपना हो तो बोलो मंत्री बना देते हैं’ । ठीक वैसे ही बीजेपी के पास जेडीयू का प्रस्ताव लेकर पहुंचे आरसीपी सिंह से भी कहा गया कि ‘क्यों दूसरों के चक्कर में पड़े हैं?’ – ‘पशुपति कुमार पारस के साथ आप भी बन जाइये, छोड़िये दुनिया भर की चिंता’ ।
ये चाल पटना में मिशन को अंजाम देकर दिल्ली पहुंचे भूपेंद्र यादव की पॉलिटिकल लाइन से मैच भी करती है । भूपेंद्र यादव का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि कैसे बिहार में काम मिलने के बाद से वो लालू यादव के साथ ही नीतीश कुमार की भी राजनीतिक जमीन के नीचे गड्ढे खोदते आये हैं – और यही वजह है कि अमित शाह भी भूपेंद्र यादव को हद से ज्यादा पसंद करते हैं – और वो प्रधानमंत्री मोदी के भी प्रिय पात्र बन जाते हैं ।
अगर जेडीयू के भीतर उठापटक की जो आहट महसूस की जा रही है, वो तात्कालिक और महज आभासी है तो दलील कमजोर भी नहीं है । निश्चित रूप से केंद्र सरकार में नौकरशाह के रूप में काम कर चुके एक व्यक्ति के लिए मंत्री पद तो सपने के पूरा होने जैसा ही है । लेकिन क्या एक मंत्री पद के लिए वो एक पार्टी से हाथ धो बैठने का फैसला करेगा जिस पर वो खुद राज करता हो – और ये लंबा चलने वाला हो ?
जेडीयू में आरजेडी या एलजेपी की तरह बेटा ही वारिस होगा जैसा कोई पेंच भी तो नहीं है । एक बार नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को उपाध्यक्ष बनाने के बाद जेडीयू का भविष्य जरूर बताया था, लेकिन ये आरसीपी सिंह ही रहे जो ललन सिंह के साथ मिल कर तब तक चैन से नहीं बैठे जब तक कि प्रशांत किशोर बाहर नहीं हो गये ।
प्रशांत किशोर की ही तरफ आरसीपी सिंह के लिए उपेंद्र कुशवाहा लगने लगे थे, लिहाजा ललन सिंह के साथ मिलकर अब उनको ठिकाने लगाने की तैयारी शुरू हो गयी थी । अब बताया जा रहा है कि आरसीपी सिंह के खिलाफ ललन सिंह ने उपेंद्र कुशवाहा से ही हाथ मिला लिया है । हो सकता है ललन सिंह ने ऐसा मौके की नजाकत समझते हुए किया हो । उपेंद्र कुशवाहा कोने कोने में घर को दुरूस्त करने निकले हैं । वो जेडीयू नेताओं से जगह जगह मिल कर संगठन को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं । उपेंद्र कुशवाहा की कोशिश को आरसीपी सिंह के संभावित प्रभाव को न्यूट्रलाइज करना है, लेकिन नीतीश कुमार कुछ ज्यादा ही चौकन्ने हो गये हैं । उपेंद्र कुशवाहा के हर मूवमेंट की पल पल की रिपोर्ट पेश करने के लिए अपने आदमियों का जगह जगह पहले से ही जाल बिछा रखा है ।