Wednesday 8th of July 2026 04:50:49 AM
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नीलामी के जरिये ही खानों का आवंटन सही, रद्द पट्टों का भी नीलामी से ही आवंटन

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सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न पर राज्यसभा में सरकार ने दी जानकारी
सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न पर राज्यसभा में सरकार ने दी जानकारी

रांची : एमएमडीआर एक्ट में यह स्पष्ट प्रावधान है कि खनन पट्टों का आवंटन पारदर्शी नीलामी के जरिये ही की जानी है| इसके अलावा जो खनन पट्टे ऑपरेशन शुरू न होने के कारण रद्द या सरेंडर होते हैं, उन्हें भी नीलामी के जरिये ही दुबारा आवंटित किया जाना है| राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के एक प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए कोयला, खान एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार को यह जानकारी दी|

सांसद महेश पोद्दार ने कहा कि भारत सरकार के मंत्री द्वारा सदन में दिये गए उत्तर से यह स्पष्ट है कि नॉमिनेशन के आधार पर खनन पट्टों का हुआ आवंटन पूर्णतः गलत था और अब भी यदि ऐसी कोई कोशिश होती है तो वह अवैध ही होगी|

मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अपने उत्तर में कहा है कि खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 (एमएमडीआर अधिनियम) में प्रावधान है कि खनन पट्टे (माइनिंग लीज,एमएल) और संयुक्त लाईसेंस (कम्पोजित लाईसेंस,सीएल) नीलामी की पारदर्शी और गैर – विवेकाधीन पद्धति के माध्यम से प्रदान किये जायेंगे|

हालांकि, एमएमडीआर अधिनियम की धारा 17 क में प्रावधान है कि केंद्र सरकार या राज्य सरकार प्रोस्पेक्टिंग या माइनिंग ऑपरेशन के लिए किसी सरकारी कम्पनी या निगम के माध्यम से किसी क्षेत्र को आरक्षित कर सकती है| इसके अतिरिक्त, आणविक खनिजों के लिए, जहां ऐसे खनिज की श्रेणी सीमा मूल्य के बराबर या इससे अधिक है, वहां एमएल या सीएल को किसी सरकारी कम्पनी या निगम को ही प्रदान किया जायेगा| माइनर मिनरल्स के संबंध में, अधिनियम में राज्य सरकारों को रियायतें प्रदान करने के संबंध में नियम बनाने के अधिकार दिये गए हैं|

मंत्री ने यह भी बताया कि खनिज रियायत नियम, 2016 का नियम 12 क के मुताबिक पट्टों की समाप्ति, निलंबन या सरेंडर के बाद नीलामी के जरिये आवंटित हुए खदानों से न्यूनतम प्रोडक्शन या डिस्पैच नहीं होता है तो उपरोक्त नियमों में दंड लगाने का प्रावधान है, जिसमें पट्टे का निलंबन भी शामिल है| एमएमडीआर अधिनियम के तहत भी पट्टे के निष्पादन के दो वर्षों के भीतर प्रोडक्शन और डिस्पैच (एक वर्ष तक बढ़ायी जा सकती है) न होने पर खनन पट्टा लैप्स हो जायेगा|

घरेलू विवाद से तंग आकर 3 बच्चे की मां ने बंद पड़े खदान में लगाई छलांग, मां समेत बच्चों का शव बरामद

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कोडरमा/ मरकच्चो।
मरकच्चो थाना क्षेत्र के पंचायत नावाडीह के ग्राम गरगडिहा निवासी उमेश यादव की पत्नी गुड़िया देवी उम्र 30 वर्ष 3 बच्चे को लेकर घर से निकली और बंद पड़े खदान की ओर 18 जुलाई को 3:00 दिन तक लोगों द्वारा देखा गया। इसके बाद वह घर वापस नही गई ।वही 19 जुलाई की दोपहर लोगों ने बंद पड़े खदान में मां और छोटे बच्चे के शव को पानी में उतरते हुए देखा इसके बाद प्रशासन को खबर किया वही सूचना मिलते ही थाना प्रभारी संजय शर्मा अपने दल बल के साथ घटना स्थल पर पहुँचे। मृतक गुड़िया देवी और उसके छोटे बच्चे 3 वर्ष छोटू का शव खदान में तैर रहा था जहाँ पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से निकाला।वही पानी अधिक होने के कारण सूरज 8 वर्ष एवं शिबू 7 वर्ष का शव ट्रेक्टर में लगे पम्प सेट से खदान का पानी सुखाने के बाद शाम 7 बजे उन दोनों के शव को निकाला गया। मृतक के पिता जुगल किशोर यादव ग्राम लोदीपुर पंचायत अरखांगो जिला गिरिडीह निवासी ने बताया जब से शादी हुआ है लड़ाई झगड़ा बहुत होता था और मेरे समधि बिगन महतो बराबर पैसे की मांग करता था घरेलू विवाद हमेशा चलते रहता था कई बार ग्रामीणों के द्वारा पंचायती भी किया गया इसके बावजूद लड़ाई झगड़ा होते रह रहा था। वहीं मृतक गुड़िया देवी के ममेरा भाई का कहना है मेरी बहन का एक आंख फूटा हुआ है और मुंह में अंदर तक जख्म है इससे प्रतीत होता है की मार कर फेंका गया है। थाना प्रभारी संजय कुमार शर्मा से पूछे जाने पर उन्होंने बताया छानबीन किया जा रहा है अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक का इंतजार करना होगा । वहीं खदान में डूबने की खबर आग की तरह फैल गया और लोग देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में भीड़ लगा दिए मौके पर पंचायत के मुखिया शाकिर मियां जिला परिषद राजकुमार यादव समेत कई गणमान्य लोग मौके पर मौजूद थे।

बोलेरो व बाइक में टक्कर, बाइक सवार घायल

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हेरहंज (उज्ज्वल दुनिया): बालूमाथ-हेरहंज-पांकी एसएच 10 मुख्य पथ पर हेरहंज-इनातू के बीच सेमर मोड़ के समीप 19 जुलाई सोमवार की सुबह करीब 9 बजे अज्ञात बोलेरो वाहन ने बाइक सवार उमेश प्रजापति पिता-गांगो प्रजापति को सामने से मारी टक्कर जिससे बाइक सवार हुवा घायल। उमेश प्रजापति बारियातु प्रखण्ड क्षेत्र के हिसरी ग्राम का रहने वाला है। घायल उमेश के अनुसार वह अपने घर हिसरी से पांकी जा रहा था की रास्ते में हीं यह घटना हो गई। स्थानीय थाना पुलिस को सूचना मिलते ही थाना प्रभारी जमील अंसारी दल बल के साथ घटना स्थल पहुंचकर घायल युवक को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया।

चैनपुर में दिनदहाड़े मुर्गा व्यवसायी से डेढ़ लाख की छिनतई

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मेदिनीनगर (उज्ज्वल दुनिया): चैनपुर थाना क्षेत्र के वन विभाग के चेकनाका के पास सोमवार को दिनदहाड़े एक मुर्गा व्यवसायी से डेढ़ लाख की छिनतई हो गयी।

बाइक सवार दो अपराधियों ने टीवीएस को ओवरटेक कर घटना को अंजाम दिया। इस संबंध में भुक्तभोगी मुर्गा व्यवसायी ने चैनपुर थाना में मामला दर्ज कराया है ।

पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।जानकारी के अनुसार चैनपुर के डुमरी निवासी मुर्गा व्यवसायी मोइन अंसारी चैनपुर थाना के समीप मुर्गा की दुकान चलाते हैं। सोमवार की दोपहर में उन्होंने मेदिनीनगर में एसबीआई की मेन शाखा से 2 लाख रुपये निकाले थे। डेढ़ लाख रुपये झोला में रखा था, जबकि 50 हजार रुपये पैकेट में रख कर बैंक से निकले थे। बैंक से रुपये निकालने के बाद मोइन अंसारी अपने गांव के ही कृष्णा पाल के साथ टीवीएस से लौट रहे थे।

दोपहर करीब 12 बजे के आस पास मेदिनीनगर-चैनपुर मुख्य पथ पर चैनपुर वन विभाग के चेकनाका के समीप मोइन टीवीएस से पहुंचे ही थे कि पीछे से आए एक बाइक पर दो लुटेरों ने रूपये से भरा बैग छीनकर फरार हो गए। मोइन और उसके साथी कृष्णा कुछ समझ पाते, तबतब बाइक सवार लुटेरे वहां से से काफी आगे भाग निकले।

अनुमान लगाया जा रहा है कि बाइक सवार मोइन अंसारी का पीछा करते हुए आ रहे होंगे। संभवतः बैंक से ही उनकी रेकी कर रखी होगी। चैनपुर वन विभाग के चेकनाका के समीप सड़क की स्थिति काफी खराब है। साथ ही सड़क में चढ़ाई भी पड़ता है। ऐसे में लुटरों को यहां बढ़िया मौका मिला और उन्होंने घटना को अंजाम दिया।रूपये से भरा बैग झपटने के बाद लुटेरे चैनपुर की ओर भाग निकले।

चैनपुर के थाना प्रभारी इंस्पेक्टर उदय कुमार गुप्ता ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस छानबीन में जुटी है। डुमरी निवासी मोइन अंसारी मुर्गा की दुकान चलाते हैं। उनसे 1.5 लाख की छिनतई हुई है। बैंक से लेकर घटनास्थल तक की गतिविधि की जानकारी ली जा रही है, ताकि लुटेरों की पहचान हो सके।

प्रेमी

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गढ़वा जिला के डंडई थाना क्षेत्र के बौलिया गांव के नौ लाखा दुर्गा मंदिर के प्रांगण में रविवार शाम को एक प्रेमी युगल को ग्रामीणों ने रजामंदी से शादी करा दी। शादी में दोनों तरफ के अभिभावक और उनके रिश्तेदार भी मौजूद थे। ग्रामीणों ने बताया कि सोनेहरा पंचायत के बौलिया गांव के जयप्रकाश नगर टोला निवासी सूर्यदेव भूईयाँ के 23 वर्षीय लड़का कमलेश भूईयाँ व उसी टोला निवासी जनू भूईयाँ के 19 वर्षीय लड़की फुलझड़ी कुमारी पिछले 2 वर्षों से एक दूसरे से प्रेम करते थे। वही 1 साल पहले दोनों बिना बताए ही घर से फरार हो गए थे और बाहरी में अपना घर बसाने के लिए कार्य कर जीविकोपार्जन चला रहे थे।करीब एक साल बाद घर आते ही दोनों के परिजनों ने शादी कराने का सहमति जताई। तत्पश्चात लड़का लड़की के राजा मंदिर से रविवार शाम को ग्रामीणों ने गांव के ही नौलक्खा दुर्गा मंदिर के प्रांगण में शादी करा दी। दोनों की शादी हिंदू रीति रिवाज से किया गया। शादी समारोह को लेकर दोनों पक्ष के लोगों सहित रिश्तेदार और गांव घर की महिला, पुरुष नौजवान और बच्चे बड़े ही उत्सुकता के साथ मंदिर प्रांगण में पहुंचे थे। ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखा गया। अन्य ग्रामीणों ने बताया कि दहेज प्रथा का उन्मूलन के लिए प्रेम विवाह को अपनाना अच्छा कदम है। मौके पर लड़का के पिता सूर्य देव भुइयां ने बताया कि दोनों पक्ष के लोग बैठक कर राय मशवरा और सहमति जताकर शादी का निर्णय लिए हैं। शादी को लेकर लड़का लड़की का भी रजामंदी है। वहीं लड़की के परिजनों ने भी आपसी सहमति से ही शादी होने की बात बताई है। इधर सोनेहरा पंचायत के समाजसेवी सह मुखिया प्रत्याशी सकलदीप पासवान ने बताया कि मंदिर बनने से पहली बार हिंदू रीति रिवाज से प्रेम विवाह का कार्यक्रम संपन्न हुआ है।

मांगों को लेकर जाप कार्यकर्ताओं ने शुरू किया 48 घंटे का भूख हड़ताल

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कहा- मांगे पूरी नही हुई तो चरणबद्ध होगा आंदोलन
कहा- मांगे पूरी नही हुई तो चरणबद्ध होगा आंदोलन

गया: जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी 5 सूत्री मांगों को लेकर 48 घंटे का भूख हड़ताल किया। इस दौरान कार्यकर्ता शहर के गेवाल बिगहा मोहल्ला स्थित पार्टी कार्यालय के समीप भूख हड़ताल पर बैठ गए। कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की।

भूख हड़ताल में शामिल जन अधिकार छात्र युवा परिषद के जिलाध्यक्ष ओम यादव ने कहा कि पूरे बिहार में 5 सूत्री मांगों को लेकर कार्यकर्ताओ द्वारा 48 घंटे का भूख हड़ताल किया जा रहा है। इसी क्रम में भी गया में भी कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी कुल 5 मांगे हैं। जिनमें लगातार बढ़ रही महंगाई को कम करने, बाढ़ राहत का पैसा जरूरतमंदो तक पहुंचाने, सरकारी संस्थाओं का निजीकरण रोकने, ओबीसी आरक्षण को खत्म करने की साजिश पर रोक लगाने, जाप के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव को जल्द रिहा करने आदि शामिल है।

उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई रोक पाने में विफल है। डीजल, पेट्रोल, घरेलू गैस सहित अन्य चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही है। यही नरेंद्र मोदी जब विपक्ष में थे, तो 60 पैसे पेट्रोल के दाम बढ़ने पर व्यापक आंदोलन की बात करते थे लेकिन उनके कार्यकाल में लगातार पेट्रोल, डीजल की कीमतें बढ़ रही है और ये रोक पाने में विफल है।

वही बिहार में बाढ़ से स्थिति बद से बदतर हो गई है। बाढ़ के नाम पर नेताओं द्वारा करोड़ों रुपए के पैकेज का बंदरबांट किया जाता है। प्रति वर्ष यही स्थिति होती है, हजारों करोड़ रुपया आने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं होती है। पप्पू यादव ने बाढ़ पीड़ितों की हमेशा मदद की। उन्होंने स्वास्थ सुविधाओं का मुद्दा उठाया तो सरकार ने एक साजिश के तहत मुकदमा कर उन्हें जेल भेज दिया। हम मांग करते हैं कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव को सरकार अविलंब रिहा करें, अन्यथा चरणबद्ध तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।

गया: राजद विधायक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव ने पीएम मोदी व सीएम नीतीश को बेईमान बताया

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महंगाई के विरोध में राजद कार्यकर्ताओं ने सड़क पर जमकर किया प्रदर्शन
महंगाई के विरोध में राजद कार्यकर्ताओं ने सड़क पर जमकर किया प्रदर्शन

गया: देश में लगातार बढ़ रही कमरतोड़ महंगाई के विरोध में राजद कार्यकर्ताओं ने शहर के ऐतिहासिक गांधी मैदान से विरोध प्रदर्शन जुलूस निकाला। इस दौरान कार्यकर्ता शहर की प्रमुख सड़कों से होते हुए टावर चौक तक पहुंचे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

जुलूस में शामिल बेलागंज विधानसभा से राजद विधायक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि आज पूरे देश में सामानों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। महंगाई चरम पर है और सरकार महंगाई को रोक पाने में विफल है। खाद्य सामग्री से लेकर दवा, कपड़े, पेट्रोल, डीजल, घरेलू गैस की कीमतें आसमान छू रही है। लेकिन सरकार इस महंगाई को रोक पाने में विफल है।

उन्होंने कहा कि आज देश से 2 हजार का नोट गायब हो गया। आखिर यह नोट कहां गया ? यह इशारा करता है कि एक बार फिर से अडानी और अंबानी की सरकार बनने वाली है। आज देश पूंजीपतियों के हाथ में चला गया है।

सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी

उन्होंने कहा कि हम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग करते हैं एक बार फिर से चुनाव करवा दें। तब सभी की औकात समझ में आ जाएगी। जनता ने इन्हें मौका नहीं दिया। फिर भी जबरन सत्ता में बने हुए हैं।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर चुनाव में बेईमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में बेईमानों की सरकार है। चुनाव में भी ये लोग बेईमानी करते हैं। इसलिए हम मांग करते हैं कि देश में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। उन्होंने कहा कि महंगाई रोक पाने में विफल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अविलंब इस्तिफा दें।

डीहा में मुखिया की पहल पर लगाया गया फ्री मेडिकल कैंप

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सैकड़ों ग्रामीणों ने करवाया इलाज
सैकड़ों ग्रामीणों ने करवाया इलाज

गुरारू(गया)। जिले के गुरारू प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत डीहा के महिला मुखिया सुनिता देवी के पहल पर डीहा गांव के मध्य विद्यालय के प्रांगण में फ्री मेडिकल कैंप लगाया गया। एमएस हॉस्पिटल गया द्वारा आयोजित इस शिविर में पंचायत के लोगों को मेडिकल चेकअप एवं इलाज कराया गया। साथ मे चिकित्सकों की सलाह पर दवाईयां भी दी गयी।

मेडिकल कैंप में सैंकड़ों महिला-पुरुष मरीजों ने अपना ईलाज करवाया। इस कैंप में गया शहर से आये महिला पुरूष डॉक्टरों ने सैंकड़ों ग्रामीण मरीजो के विभिन्न रोगों का इलाज किया। इस कैंप में E.C.G. तक की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई थी।

ग्रामीण तेज बारिश में भी इलाज के लिए उपस्थित रहे। गौरतलब है कि डीहा मुखिया सुनिता देवी, जाप जिलाध्यक्ष विनोद कुमार महतो उर्फ मरांडी की पत्नी हैं। इस मौके पर एमएस हॉस्पिटल के शशि कुमार सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे।

जेडीयूः नालंदा के दो कुर्मियों ने मिलकर ललन सिंह को ‘बुड़बक’ बना दिया ?

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बिहार को वैसे ही राजनीति की नर्सरी नहीं कहा जाता । चाणक्य से लेकर नीतीश तक, राजनीति के ऐसे-ऐसे दांव-पेंच हैं कि बाहर का इंसान सचमुच चकरघिन्नी खा जाय । फिलहाल हम बात कर रहे हैं जनता दल यूनाइटेड के अंदर चल रहे पॉलिटिक्स की। नीतीश कुमार ने पहले ललन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा को ये यकीन दिलाया कि आरसीपी सिंह ने उन्हें अंधेरे में रख कन्द्रीय मंत्री का पद हथिया लिया। आप दोनों को भी उनका ईलाज करना है। ललन बाबू अपनी धोती का खूंटा बांध ही रहे थे कि पता चला कि ये तो नालंदा को दो कुर्मियों की आपसी समझ थी और उनको बुड़बक बनाया गया।

नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह का खेल नहीं समझ सके ललन सिंह ?
नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह का खेल नहीं समझ सके ललन सिंह ?

ललन सिंह जेडीयू की बैठकों में शामिल नहीं हुए

रविवार को जेडीयू की महत्वपूर्ण बैठक से ललन सिंह दूर-दूर ही रहे । बिहार सरकार के मंत्री विजेन्द्र यादव भी इन बैठकों से दूर रहे । बेचारे उपेन्द्र कुशवाहा सुबह से ही बकरी के बच्चे की तरह उत्साह से चौकड़ी भर रहे थे कि शायद उन्हे जेडीयू संगठन की कमान दे दी जाय, लेकिन शाम होते-होते नीतीश की ओर से कहा गया कि आरसीपी सिंह केन्द्रीय मंत्री और संगठन दोनों की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हैं। कुशवाहा के दिल के अरमां तो वहीं खड़े-खड़े बह गये….

जेडीयू में सिर्फ कुर्मी, बाकी सब अतिथि

ललन सिंह उस खेल को समझ गये हैं जो पार्टी के अंदर खेला जा रहा है, लिहाजा बैठक में शामिल नहीं होकर उन्होंने अपनी नाराजगी जतायी है । दरअसल रविवार को नीतीश कुमार ने जेडीयू के नये नियुक्ति हुए प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक बुलायी थी । खुद नीतीश कुमार इस बैठक में वर्चुअल तरीके से जुड़े थे । दिल्ली से आऱसीपी सिंह भी जुड़े थे । बैठक में जेडीयू संसदीय दल के नेता ललन सिंह को भी रहना था लेकिन वे नहीं गये ।

पूरे खेल को सिलसिलेवार ढंग से समझिए

इसी महीने 7 जुलाई को जब दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो आरसीपी सिंह मंत्री बन गये । ललन सिंह खुद मंत्री बनने के दावेदार थे । ललन सिंह उस समय भी नाराज हुए थे लेकिन नीतीश कुमार ने उन्हें कई दफे समझाया था । नीतीश कुमार ने ललन सिंह को बताया कि आरसीपी सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से बीजेपी से बात की और खुद अपना नाम तय कर लिया । ललन सिंह को बताया गया कि आऱसीपी सिंह ने मंत्रिमंडल में शामिल होने के संबंध में एक दफे भी नीतीश कुमार से बात नहीं की ।

नीतीश-आरसीपी की चाल समझ गये ललन सिंह
जानकारों के मुताबिक कई दशकों से नीतीश कुमार के साथ रहे ललन सिंह उनकी हर चाल को समझते हैं । जो बातें अब सामने आ रही हैं उससे ये लग रहा है कि आरसीपी सिंह को मंत्री बनाने में नीतीश कुमार की सहमति थी  लेकिन अपनी जाति औऱ अपने जिले के आऱसीपी सिंह को केंद्र में मंत्री बनाने से नीतीश की सियासी जमीन प्रभावित होती । लिहाजा ऐसा माहौल तैयार किया गया जिससे ये लगे कि आरसीपी सिंह नीतीश की मर्जी के बगैर मंत्री बन गये । कहीं न कहीं ललन सिंह को ये माजरा समझ में आने लगा है । दरअसल ललन सिंह चाह रहे थे कि अगर आरसीपी सिंह बिना नीतीश कुमार की मर्जी से मंत्री बन गये हैं तो नीतीश कुमार कार्रवाई करें । अगर कार्रवाई करने में कोई परेशानी हो तो कम से कम सार्वजनिक तौर पर ऐसा बयान दें जिससे लगे कि आरसीपी सिंह को मंत्री बनाने में उनका रोल नहीं था । लेकिन नीतीश कुमार ने ना तो ऐसा बयान दिया औऱ ना ही आऱसीपी सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई की । उधर आरसीपी सिंह दिल्ली में रहकर भी बिहार में जेडीयू के संगठन से जुड़े हर मामले को डील कर रहे हैं । वे लगातार पार्टी की बैठक भी करवा रहे हैं । आऱसीपी सिंह द्वारा पार्टी के फैसले भी लिये जा रहे हैं. इससे भी दूसरा ही मैसेज जा रहा है ।

पेगासस स्पाईवेयरः मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जज, अपने मंत्री सहित 40 लोगों के फोन टेप करवाये ?

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सुप्रीम कोर्ट के जज और मोदी सरकार के एक बड़े मंत्री का भी फोन हैक हुआ- दावा
सुप्रीम कोर्ट के जज और मोदी सरकार के एक बड़े मंत्री का भी फोन हैक हुआ- दावा

इसराइल की एक फर्म पेगासस को मोदी कैबिनेट के कुछ मंत्रियों, आरएसएस के नेता, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और पत्रकारों के फ़ोन टैप करने के लिए हायर किया गया था । ये सनसनीखेज दावा पेरिस की एक मीडिया संस्था फॉरबिडेन स्टोरीज़ ने किया है। वेबसाइट की रिपोर्ट के बाद बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्वीट किया था कि

इस तरह की अफ़वाह है कि वॉशिंगटन पोस्ट और लंदन गार्डियन एक रिपोर्ट छापने जा रहे हैं । जिसमें इसराइल की फर्म पेगासस को मोदी कैबिनेट के मंत्री, आरएसएस के नेता, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और पत्रकारों के फ़ोन टैप करने के लिए हायर किए जाने का भंडाफोड़ हो सकता है ।

द वायर और वाशिंगटन पोस्ट के दावे को कंपनी ने किया खारिज

देर शाम ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ और भारत की समाचार वेबसाइट ‘द वायर’ ने एक ख़बर प्रकाशित कर दावा किया कि दुनियाभर के कई पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन हैक किए गए हैं। लेकिन, पेगासस नाम के जिस स्पाई वेयर से फ़ोन हैक करने की बात सामने आ रही है उसे तैयार करने वाली कंपनी एनएसओ ने तमाम आरोपों से इनकार किया है ।पेगासस कंपनी ने अपने बयान में कहा कि हम अपनी जासूसी सॉफ्टवेयर और इसकी तकनीक को केवल मान्यता प्राप्त सरकारी एजेंसियों को बेचती है और इसका उद्देश्य “आतंकवाद और अपराध के खिलाफ लड़ना” है।

भारत सरकार ने किया खंडन

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ , पेरिस की मीडिया संस्था फॉरबिडेन स्टोरीज़, और द वायर के दावे का खंडन करते हुए पूरी रिपोर्ट को झूठ का पुलिंदा बताया है । भारत सरकार ने इसे विदेशों में बसे एंटी इंडिया माइंडसेट की डर्टी ट्रिक्स बताया, जिसका मकसद पूरी दुनिया में भारत को बदनाम करना तथा भारतीय हितों को हानि पहुंचाना है ।

नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त, 4 कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए गए

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जैसी की उम्मीद थी कैप्टन अमरिन्दर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच मचे घमासान में कांग्रेस आलाकमान का पलड़ा सिद्धू की ओर झुंका । AICC (ऑल इंडिया कांग्रेस समिति) की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तत्काल प्रभाव से नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेस समिति का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। नवजोत सिंह सिद्धू निवर्तमान अध्यक्ष सुनील जाखड़ की जगह लेंगे।

क्या पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिन्दर सिंह युग का अंत हो गया ?
क्या पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिन्दर सिंह युग का अंत हो गया ?

चार कार्यकारी अध्यक्ष में एक भी कैप्टन का करीबी नहीं

सोनिया गांधी ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस समिति के चार कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं। यह जिम्मेदारी संगत सिंह गिलजियां, सुखविंदर सिंह डैनी, पवन गोयल और कुलजीत सिंह नागरा को दी गई है। नागरा को अब सिक्किम, नगालैंड और त्रिपुरा के एआईसीसी अध्यक्ष की जिम्मेदारी से मुक्ति दे दी गई है। गौर करने वाली बात ये है कि इन चार कार्यकारी अध्यक्षों में किसी को भी कैप्टन अमरिन्दर सिंह का करीबी नहीं माना जाता ।

अब क्या करेंगे कैप्टन अमरीन्दर सिंह ?

पंजाब कांग्रेस पर कैप्टन अमरिन्दर सिंह की जबरदस्त पकड़ है। सिद्धू अगर आलाकमान की पसंद हैं तो कैप्टन कार्यकर्ताओं की पहली पसंद। कैप्टन को नजरअंदाज कर कांग्रेस पंजाब में चुनाव जीतने की सोंच भी नहीं सकती । पिछले दो दिनों में एक बड़ा बदलाव ये भी आया है कि प्रताप सिंह बाजवा और कैप्टर अमरिन्दर सिंह ने एक-दूसरे से हाथ मिला लिया है। इन दोनों की संयुक्त शक्ति को मिला दिया जाय तो पंजाब कांग्रेस के लगभग 80 फीसदी विधायक इनके साथ हैं। वहीं पंजाब कांग्रेस के लगभग सभी जिलाध्यक्ष इन दोनों के ही बनाए हुए हैं। ऐसे में बिना संगठन और विधायकों के समर्थन के, सिर्फ आलाकमान के बूते सिद्धू कितना सफल हो सकेंगे, देखने वाली बात होगी ।

कैप्टन बागी हुए तो पंजाब में कांग्रेस गई

सुखपाल खैहरा सहित 10 विधायकों ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के हक में बयान जारी किया है ।  विधायकों ने कहा कि 1984 में दरबार साहिब पर हमले और देश में अन्य जगहों पर सिखों के नरसंहार के बाद भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के कारण ही पार्टी पंजाब में सत्ता पर काबिज हुई है। उन्‍होंने कहा, ‘नवजोत सिंह सिद्धू एक ‘सेलिब्रिटी’ हैं और निस्संदेह पार्टी के लिए वह एक संपत्ति हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से अपनी ही पार्टी और सरकार की निंदा और आलोचना कर उन्होंने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ाया है और पार्टी को कमजोर किया है।’

भाजपा की प्रतिक्रिया

कांग्रेस आलाकमान के फैसले के बाद बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट किया, ”राहुल गांधी को उनका देश में सर्वाधिक लोकप्रिय नाम देने वाले सिद्धू को पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने पर बधाई. यह वही सिद्धू हैं, जिन्होंने कहा था कि कांग्रेस मुन्नी से भी ज्यादा बदनाम है. हम क्या कहें ये किस्सा उनका है, ये वे जानें या वो जानें

 

 

 

 

 

हजारीबाग के बरकट्ठा में पुलिस के साथ हाथापाई, थाने में घुस फाड़ा एफआईआर फाइल

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उज्ज्वल दुनिया, हजारीबाग(अजय निराला)। हजारीबाग जिले के बरकट्ठा थाना क्षेत्र स्थित कोनहारा गांव में विवादित भूखंड पर तबरेज आलम और समा परवीन की ओर से निर्माण कराया जा रहा था।

इस विवाद को सुलझाने के लिए रविवार को बरकट्ठा थाने की पुलिस दल-बल के साथ गांव पहुंची, तो निर्माण करा रहे लोगों ने विरोध शुरू कर दिया।

इस दौरान उन्होंने पुलिस के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की भी की।

उसके बाद पुलिस ने दो-तीन लोगों को हिरासत में ले लिया।

उन्हें लेकर जब पुलिस थाने पहुंची और प्राथमिकी दर्ज की तो तबरेज आलम, समा परवीन और उनके समर्थकों ने थाने पहुंचकर एफआईआर की पूरी फाइल फाड़ दी।

बताया जाता है कि समा परवीन और तबरेज आलम पड़ोसी निजाम अंसारी की जमीन पर कब्जा कर निर्माण करा रहे थे।

इसकी शिकायत निजाम अंसारी ने अंचल कार्यालय में की थी।

उसके बावजूद समा परवीन की ओर से निर्माण कार्य कराया जा रहा था।

बरकट्ठा थाने के एएसआई नसीम अख्तर ने कहा कि दो पक्षों के बीच भूमि विवाद चल रहा था।

इसी विवाद को सुलझने के लिए पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, जहां स्थानीय महिलाएं और पुरुष पुलिस के साथ उलझ गए।

उन्होंने महिला कांस्टेबल के साथ भी अभद्र व्यवहार किया।

उन्होंने बताया कि अभद्र व्यवहार के आरोप में दो-तीन लोगों को हिरासत में लेकर थाने लाया गया, तो समा परवीन और तबरेज थाने पहुंचे और पुलिस के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करने लगे।

इसके साथ ही एफआईआर की फाइल फाड़ दी।

इस घटना के बाद वरीय पुलिस पदाधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

बरही डीएसपी थाना पहुंचकर घटना की जानकारी ले रहे थे, लेकिन कुछ भी बताने से परहेज करते रहे।

बस इतना कहा कि घटना के बारे में पता चला है, जांच की जा रही है।

19 JULY 2021

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झारखंड सरकार ने BRO पर झारखंडी मजदूरों को प्रताड़ित करने का लगाया आरोप

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लद्दाख में चीन से सटी सीमा पर सड़क बनाने में झारखंड के 1600 मजदूर कर रहे हैं काम
लद्दाख में चीन से सटी सीमा पर सड़क बनाने में झारखंड के 1600 मजदूर कर रहे हैं काम

रांची । झारखंड सरकार ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। देश के सीमावर्ती इलाकों में सड़कों का जाल बिछाने के लिए बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने झारखंड के संथाल परगना के मजदूरों को अपने यहां नौकरी दी है। झारखंड सरकार का आरोप है कि इन मजदूरों को रहने की उचित व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं झारखंड सरकार का आरोप है कि हमारे मजदूरों से दयनीय स्थिति में काम करना पड़ रहा है। झारखंड सरकार ने केन्द्र सरकार के अधीन आने वाली बीआरओ पर राज्य के श्रमिकों को रोजगार के लिए रखने संबंधी पारस्परिक सहमति शर्तों का पालन करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

झारखंड सरकार ने 16 जुलाई को बीआरओ को लिखा पत्र

बीआरओ प्रमुख को 16 जुलाई को भेजे गए पत्र में राज्य सरकार ने कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए काम पर रखे गए राज्य के श्रमिकों, उनका निश्चित मासिक वेतन और काम करने के दौरान जान गंवाने वाले श्रमिकों की जानकारी मांगी है।

श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो ने बीआरओ को लिखे पत्र में कहा,

‘‘ झारखंड सरकार को जानकारी मिली है कि मार्च, 2021 से बीआरओ के साथ हजारों श्रमिक अस्थायी भुगतान श्रमिक (सीपीएल) की तरह काम कर रहे हैं। हमें लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से ऐसी खबरें मिली हैं कि हमारे श्रमिकों को अप्रैल-मई,2021 में महामारी की दूसरी लहर के दौरान दयनीय स्थिति में रहना और काम करना पड़ा।’’

 

झारखंड सरकार ने लगाया नियम और शर्तों के उल्लंघन का आरोप

जरुरत पड़ी तो रक्षा मंत्रालय से मजदूरों की स्थिति पर करेंगे बात- झारखंड सरकार
जरुरत पड़ी तो रक्षा मंत्रालय से मजदूरों की स्थिति पर करेंगे बात- झारखंड सरकार

अस्थायी भुगतान श्रमिक वे होते हैं, जिन्हें कभी-कभार ही काम मिलता है और उनके नियोक्ता उन्हें नियमित श्रमिक के रूप में नहीं रखते हैं। राज्य सरकार ने इन श्रमिकों की रहन-सहन की दयनीय स्थिति और ‘अपर्याप्त’ भुगतान और इन्हें नौकरी पर रखने में बिचौलिये की भूमिका पर चिंता जाहिर की है। टोप्पो ने बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी को लिखे पत्र में कहा, ‘‘ पिछले साल दोनों पक्षों के बीच सीएलपी श्रमिकों को लेकर तय की गई शर्तों पर आपसी सहमति के बाद इन खबरों का आना हमारे लिए चौंकाने वाला है।’’

झारखंड सरकार ने बीआरओ पर राज्य के प्रवासी श्रमिकों को काम पर रखने संबंधी आपसी सहमति की शर्तों को पूरा करने में ‘विफल’ रहने का आरोप लगाया। इस विषय पर टिप्पणी के लिए बीआरओ अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाया।

केन्द्र सरकार के रक्षा मंत्रालय के सामने भी उठाएंगे सवाल

बीआरओ और झारखंड सरकार के बीच 13 जून, 2020 को हस्ताक्षरित इस समझौते की शर्तों के अनुसार 2021-22 से राज्य के वेतनभोगी श्रमिकों को काम पर रखने के लिए यह आपसी सहमति बनी कि बीआरओ एक प्रतिष्ठान की तरह राज्य के मौजूदा नियमों का पालन करते हुए पंजीकरण के लिए आवेदन करेगा। उन्होंने यह भी फ़ैसला किया कि श्रमिकों के अंतर-राज्यीय प्रवास के लिए रक्षा मंत्रालय की मंज़ूरी के बाद दोनों पक्ष एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर करेंगे। बीआरओ रक्षा मंत्रालय के तहत आता है।

टोप्पो ने कहा, ‘‘ हालांकि, यह चौंकाना वाला है कि दुमका के प्रवासी श्रमिकों को बीआरओ की परियोजनाओं में काम करने के लिए बिचौलियों के जरिए ले जाया जा रहा है, जो कि आपसी सहमति की शर्तों का उल्लंघन है और इसकी जानकारी तक राज्य सरकार को नहीं दी गई।’’

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बीआरओ द्वारा काम पर रखे गए श्रमिकों के ‘उत्पीड़न’ का दावा करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दोहराया कि वह इस मामले को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष उठाएंगे क्योंकि लगातार इस संबंध में पत्राचार के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

पिछले महीने भी पीटीआई-भाषा के साथ एक साक्षात्कार के दौरान सोरेन ने कहा था कि जैसे ही राज्य कोविड-19 महामारी के संकट से बाहर निकलेगा, वह विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और प्रशासकों के साथ श्रमिकों के ‘उत्पीड़न’ को रोकने के लिए एक मज़बूत तंत्र विकसित करने को लेकर बैठक करेंगे।

तीन दिन से लापता युवक का शव इस डैम से बरामद, फेसबुक पर किया था यह जिक्र

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उज्ज्वल दुनिया, कटकमसांडी(हजारीबाग)। हजारीबाग स्थित कटकमसांडी प्रखंड के पेलावल ओपी थाना क्षेत्र अंतर्गत छड़वा डैम से रविवार को एक युवक का शव बरामद हुआ।

स्थानीय लोगों ने मॉर्निंग वाक के दौरान छड़वा डैम में पानी खोलने के लिए बने पुल चैनल के पास शव को देखा।

घटना की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। युवक 15 जुलाई से अपने घर से लापता था।

मृतक की पहचान हजारीबाग बड़ा बाजार थाना क्षेत्र के ग्वालटोली मोहल्ला निवासी मोनू शर्मा (24) के रूप में की गई और वह सेनेटरी सामान की दुकान में काम करता था।

परिजन उसकी काफी खोजबीन कर रहे थे पर कहीं पता नहीं चल पाया था।

मोनू के मामा राजेश शर्मा ने बड़ा बाजार हजारीबाग थाने में गुमशुदगी का सनहा 17 जुलाई को दर्ज कराया था।

पेलावल ओपी थाना प्रभारी विकर्ण कुमार ने बताया कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और उसने 15 जुलाई को अपने फेसबुक एवं व्हाट्सएप स्टेट्स पर लिखा कि यह उसका लास्ट पिक्चर है।

यह बात लिखकर लगाने से इस ओर आशंका है कि उसने डैम में आत्महत्या की है। पुलिस हर बिन्दुओं पर मामले की जांच कर रही है।