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सरायकेला: सैकड़ो वंचित लोगों को ट्विटर से मदद पहुंचा रहे है वार्ड सदस्य गौरांगो दत्ता

सरायकेला: सोशल मीडिया ने संसार के हर हिस्से में अपनी छाप छोड़ दी है। अगर आपसे कोई पूछे कि सोशल मीडिया पर आप क्या करते हैं, तो ज्यादातर लोगों का यही जवाब होगा कि वहां वे एक-दूसरे से संपर्क रखने अथवा ताजातरीन गतिविधियों के बारे में जानते होंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सोशल मीडिया की एक पोस्ट किसी की परेशानियों का हल निकाल सकती है?
जी हां, बिल्कुल सही पढ़ा आपने, आजकल सरायकेला जिला के कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत दुलमी गांव के वार्ड सदस्य गौरांगो दत्ता ट्विटर का इस्तेमाल कर लोगों की परेशानियां सुलझाने का काम कर रहे हैं, और इससे हर दिन कोई न कोई लोगों को फायदा भी मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर, एक मामला दुमका जिला के अंतर्गत आमरापाड़ा के निवासी रंजीत पाल के पुत्र का है। जो थैलेसीमिया बामारी से ग्रस्त था, तो इन्होंने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, मंत्री चम्पई सोरेन,बसंत सोरेन और दुमका डीसी को टैग करते हुए ट्वीट किया। उसपर त्वरित संज्ञान में लेते हुए दुमका के डीसी ने बच्चे को फूलों झानो मेडिकल अस्पताल के डे केयर में भर्ती कराया। ठीक उसी तर्ज पर अफजल खान नामक व्यक्ति ने ट्वीट किया कि धनबाद जिला के दरी मोहल्ला पुराना बाजार निवासी कैंसर पीड़ित लड़के को केमो चढ़ाने को लेकर मदद मांगी। जिसे गौरांग दत्ता ने ट्वीट को कमेंट करते हुए निधि केडिया,पूर्व विधायक कुणाल सारंगी एवं जमशेदपुर के वरिष्ठ पत्रकार अन्नी अमृता से मदद मांगी, जिसका भी त्वरित समाधान हुआ और कैंसर पीड़ित को वेल्लोर में इलाज कराने के लिए फंड रिलीज किया गया।

इसी क्रम में बहरागोड़ा के कुलियांग गांव के निवासी मदन मोहन जाना को वृद्धा पेंशन नही मिल रही थी,जिस मामले को इन्होंने मंत्री चम्पई सोरेन को टैग करते हुए ट्वीट किया। जिसका भी त्वरित समाधान हुआ और मंत्री चम्पई सोरेन ने पूरी सिंहभूम के डीसी को पेंशन स्वीकृति करने का निर्देश दिया। वही सरायकेला जिला के कुकड़ू प्रखंड के ओड़िया पंचायत अंतर्गत दुलमी गांव के पार्वती महतो नामक एक महिला जो गंभीर बीमारी से ग्रसित थी, जिनका भी पेंशन का स्वीकृति इनके ही ट्वीट से हुआ। एक अन्य मामला पूर्वी सिंहभूम जिला के पोटका प्रखंड के निवासी का राशन कार्ड में डीलर परिवर्तन करना था, जिसका भी समाधान इन्ही के ट्वीट से हुआ। कोरोना काल में भी वार्ड सदस्य गौरांगो दत्ता ट्विटर की सहायता से दर्जनों लोगों को अस्पताल में बेड मिले, तो कई को रेमडेसिविर जैसी दवाइयां भी सरकारी अधिकारियों द्वारा उपलब्ध करवाई। वही इन्होंने ट्विटर के माध्यम से कई परिवारों को अनाज, तो कई बुजर्गों को पेंशन स्वीकृत करवाने में बड़ी भूमिका निभायी।

वैसे गौरांगो दत्ता जैसे कई लोगो के एक ट्वीट पर मामलों का समाधान होने से जनता तो खुश है ही, साथ ही साथ, इससे सरकार की छवि भी बेहतर हो रही है। राज्य के हर कोने में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता अब किसी भी सहायता के लिए सीधे ट्विटर का सहारा ले रहे है।
इस बारे में जब हमने वार्ड सदस्य गौरांगो दत्ता से बात की तो उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल से कुछ भी काम असंभव नही है। बस लोगो के द्वारा इसका सही इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा करके मन को संतुष्टि मिलती है। उन्होंने बताया कि हर दिन दर्जनों लोग राज्य के कोने-कोने से मुझे अपनी छोटी-बड़ी शिकायतें करते है, जिसे मैं ट्विटर के माध्यम से समाधान करने का प्रयास करता हूँ। वैसे गौरांगो दत्ता के ट्विटर पर करीब सोलह सौ लोग फ्लॉवर्स है और वे करीब पचीस सौ लोगो को फ्लो करते है। जिसमें मंत्री,अधिकारी से लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता भी शामिल है।
अंतिम गांव तक पहुंचकर सुनेंगे ग्रामीणों की समस्या: भूषण बाड़ा

सिमडेगा : सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा बुधवार को विधायक आपके द्वार कार्यक्रम के तहत पाकरटांड़ प्रखंड का भ्रमण किया। साथ ही ग्रामीणों की हर छोटी बड़ी समस्याओं को सुनते हुए उनके हर सुख दुख में साथ रहने का भरोसा जताया।
कार्यक्रम के दौरान विधायक बसतपुर, पुरनापानी, गोरोंदाबेड़ा आदि गांव पहुंचे। जहां ग्रामीणों की समस्याओं को दूर कराने के लिए पहल करने की बात कही। विधायक ने कहा कि जनता की समस्या सुनने के लिए विधायक आपके द्वार कार्यक्रम शुरु किया गया। कार्यक्रम के तहत अपने विधानसभा क्षेत्र अंतगर्त पड़ने वाले अंतिम गांव तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। पाकरटांड़ प्रखंड के भी अंतिम गांव तक वे स्वयं चलकर पहुंचेंगे और ग्रामीणों की समस्या सुनते ही उसे दूर कराने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के प्रखंडों में से पाकरटांड़ प्रखंड काफी पीछड़ा हुआ है। लेकिन अब पाकरटांड़ प्रखंड का बहुत जल्द चहुमुंखी विकास होगा। वे खुद इस प्रखंड के अंतिम गांव तक जाकर लोगों की समस्याओं को सुनते हुए सूचिबद्ध कर रहे हैं। इसके बाद प्राथमिकता के आधार में सभी समस्याओं को दूर करेंगे।
मौके पर विधायक की पत्नी जोसिमा खाखा ने भी ग्रामीणों को संबोधित किया। साथ ही ग्रामीणों के साथ खड़ा रहने की बात कही। मौके पर कांग्रेस प्रखण्ड अध्यक्ष अजीत लकड़ा, माइकल खड़िया,गाब्रियेल लकड़ा, अनिल बखला, निलेश एक्का, प्रदीप लकड़ा, तारसिशिया खड़िया, शांति बाला केरकेट्टा, शीतल एक्का, रैमन बा:, भूषण राम, सतेन्द्र प्रसाद आदि उपस्थित थे।
अगले लोकसभा चुनाव तक सोनिया गांधी बनी रहेंगी कांग्रेस प्रेसीडेंट
कांग्रेस पंजाब और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सोनिया गांधी के नेतृत्व में ही लड़ेगी। इतना ही नहीं, अगले तीन साल तक कांग्रेस की प्रेसिडेंट सोनिया गांधी ही बनी रहेंगी । हां, उनकी टीम में कुछ युवा नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। कांग्रेस के एक बड़े नेता ने उज्ज्वल दुनिया को यह जानकारी दी ।

राहुल नहीं बनने वाले हैं कांग्रेस अध्यक्ष
कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी खुद कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहते । सोनिया गांधी भी अगले तीन साल तक उन्हें अध्यक्ष बनने को नहीं कहेगी । 2024 में लोकसभा चुनाव हैं। इसे देखते हुए कांग्रेस फिलहाल पार्टी प्रेसीडेंट को बदलने के मूड में नहीं है। यह अलग बात है कि वह शीर्ष स्तर पर फैसले लेते रहेंगे। कांग्रेस की नजर अगले लोकसभा चुनाव पर है। तब तक सोनिया गांधी ही कांग्रेस अध्यक्ष रहेंगी। बताया गया है कि 2024 के आम चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस में बड़ा फेरबदल हो सकता है। इसमें युवा कांग्रेस नेताओं के साथ गांधी परिवार के वफादारों को पार्टी संगठन के भीतर अहम भूमिका मिल सकती है।
चार कार्यकारी अध्यक्षों की होगी नियुक्ति
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी में चार कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति होने की संभावना है। ये चारों वर्किंग प्रेसीडेंट महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मदद करेंगे। गुलाम नबी आजाद, सचिन पायलट, कुमारी शैलजा, मुकुल वासनिक और रमेश चेन्नीथला कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष पद के लिए दौड़ में सबसे आगे हैं।
प्रदेश के मामले देखेंगी प्रियंका गांधी
हालांकि, इस फेरबदल में प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। अभी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कमान संभाल रखी है। अगले साल उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं। वाड्रा पर प्रदेश के मामलों की देखरेख की जिम्मेदारी है।
अफगान राजदूत की बेटी के अपहरण, पाकिस्तान ने भारत पर ही मढ़ दिए आरोप
इस्लामाबाद: इस्लामाबाद में अफगानिस्तान के राजदूत की बेटी के अपहरण मामले में पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख राशिद अहमद ने अजीबोगरीब बयान दिया है। कहा है कि इस अपहरण कांड के पीछे अफगानिस्तान और भारत हैं। दोनों देश जान-बूझकर वारदात से संबंधित तथ्यों को छिपा रहे हैं और उन्हें गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने घटना और पाकिस्तानी मंत्री के बयान पर नाखुशी जाहिर की है।
रावलपिंडी में मीडिया से बातचीत में शेख राशिद ने कहा, राजनयिक की बेटी का अपहरण कोई आपराधिक वारदात नहीं है। वास्तव में यह पाकिस्तान को बदनाम और उसे अस्थिर करने की साजिश है। पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी साजिशें सिलसिलेवार हो रही हैं। अफगान राजनयिक
नजीबुल्ला अलीखिल की बेटी सिलसिला अलीखिल शुक्रवार को कई घंटों के लिए अगवा हो गई थीं। घटना के समय वह अपने घर लौट रही थी। जबर्दस्ती रोके जाने के दौरान अज्ञात लोगों ने सिलसिला का कई घंटे उत्पीड़न किया। शेख राशिद ने कहा कि जांच में अफगान राजदूत की बेटी का अपहरण होने का कोई सुबूत नहीं मिला है।
जियो न्यूज के मुताबिक मंत्री ने कहा है कि अफगान राजदूत के बेटी की गुमशुदगी की मामला उसके अपहरण से जुड़ा नहीं है। राजदूत की बेटी का अपहरण नहीं हुआ। उल्लेखनीय है कि शेख राशिद भारत को लेकर अजीबोगरीब बयानों के लिए जाने जाते हैं। वह लंबे समय से सरकार में मंत्री हैं और उनका भारत विरोधी रुख भी पुराना है।
जबकि पीडि़त लड़की के अनुसार शुक्रवार को वह इस्लामाबाद की एक बेकरी शॉप में गई थी। दोपहर बाद जब वह टैक्सी से वापस अपने घर लौट रही थी, तभी ड्राइवर को हटाकर एक अन्य आदमी ने टैक्सी कब्जे में ले ली और उसे अनजानी जगह पर ले गया। वहां पर उसे गालियां दी गईं और उसकी पिटाई की गई। बाद में उसे बेहोशी की दशा में सड़क के किनारे फेंक दिया गया। शेख राशिद ने कहा है कि टैक्सी को किसी अन्य व्यक्ति ने कब्जे में नहीं लिया था। अपहरण जैसी कोई वारदात नहीं हुई। अफगान और भारतीय मिलकर तथ्यों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
पाकिस्तानी मंत्री का बयान गैर पेशेवर
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मुहम्मद हनीफ अतमार ने पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी से टेलीफोन पर वार्ता कर शेख राशिद के बयान पर विरोध और चिंता जताई। कहा कि राजदूत की बेटी के अपहरण मामले में पाकिस्तानी गृह मंत्री का बयान गैर पेशेवर और चिंताजनक है। इससे दोनों देशों के संबंधों और विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
सीएए
गुवाहाटी । राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत दो दिवसीय दौरे पर असम में हैं। आज उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का मुद्दा उठाया और कहा कि इसे राजनीतिक फायदे के लिए सांप्रदायिकता का जामा पहनाया जा रहा है। RSS प्रमुख ने कहा कि CAA से किसी मुसलमान को कोई दिक्कत नहीं होगी। सीएए- एनआरसी से देश के नागरिकों का कोई लेना- देना नहीं है। ।
गुवाहाटी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ‘1930 से योजनाबद्ध तरीके से मुस्लमानों की संख्या बढ़ाने के प्रयास हुए, ऐसा विचार था कि जनसंख्या बढ़ाकर अपना वर्चस्व स्थापित करेंगे और फिर इस देश को पाकिस्तान बनाएंगे। ये विचार पंजाब, सिंध, असम और बंगाल के बारे में था, कुछ मात्रा में ये सत्य हुआ, भारत का विखंडन हुआ औरपाकिस्तान हो गया। लेकिन जैसा पूरा चाहिए था वैसा नहीं हुआ।
RSS प्रमुख ने कहा, ‘CAA किसी भारत के नागरिक के विरुद्ध बनाया हुआ कानून नहीं है। भारत के नागरिक मुसलमान को CAA से कुछ नुकसान नहीं पहुंचेगा। विभाजन के बाद एक आश्वासन दिया गया कि हम अपने देश के अल्पसंख्यकों की चिंता करेंगे। हम आजतक उसका पालन कर रहे हैं। पाकिस्तान ने नहीं किया।’ एक पुस्तक का विमोचन करने के बाद भागवत ने कहा, ‘स्वतंत्रता के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री ने कहा था कि अल्पसंख्यकों का ध्यान रखना होगा और अब तक यही होता आया है। हम ऐसा आगे भी जारी रखेंगे। CAA के कारण किसी मुसलमान को परेशानी नहीं होगी।’ विमोचन किए गए पुस्तक का शीर्षक ‘Citizenship debate over NRC and CAA-Assam and the Politics of History’ है।
गुवाहाटी में आज मोहन भागवत ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए इसे सांप्रदायिकता का रंग रूप दिया जा रहा है। NRC के बारे में बताते हुए भागवत ने कहा कि सभी देशों को यह जानने का अधिकार है कि उनके नागरिक कौन हैं। RSS के प्रवक्ता ने बताया कि असम के विभिन्न क्षेत्रों और अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर एवं त्रिपुरा जैसे अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ मोहन भागवत ने बैठकें की। इसमें RSS से जुड़े विषयों एवं महामारी के दौर में समाज और लोगों के कल्याण के उपायों पर चर्चा हुई। असम में दूसरे कार्यकाल के लिए भाजपा के सत्ता में लौटने के बाद भागवत की राज्य की यह पहली यात्रा है। प्रवक्ता के अनुसार भागवत 22 जुलाई को चेन्नई रवाना हो जाएंगे।
2017 में भाजपा के रणनीतिकार दुबई के बुर्ज खलीफा के होटल में क्यों रुके थे
इस देश में भाजपा जैसी बेशर्म, झूठी और जाली पार्टी की सरकार कभी नहीं आई । ये लोग इस बेशर्मी से झूठ बोलते हैं कि झूठा से झूठा व्यक्ति भी शरमा जाय । केन्द्र सरकार ने भरी संसद में कहा कि इस देश में ऑक्सीजन की कमी से एक भी नागरिक की मौत नहीं हुई । केन्द्र सरकार का ये बयान उन सारे लोगों का अपमान है जो रात-रात भर ऑक्सीजन सिलेंडर की लाइन में खड़े रहे । ये उन पत्रकार साथियों का अपमान है जिन्होने अपनों को खोया है । आपमें से शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने अपने जान-पहचान वालों को नहीं खोया हो, यूपी और दिल्ली के अस्पतालों के डॉक्टर टेलीविजन चैनलों पर रो रहे थे कि उनके यहां ऑक्सीजन की कमी है। ये बातें झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने रांची में संवाददाता सम्मेलन में के दौरान कही।

मुफ्त देने का प्रचार तो ऐसे करते हैं मानो अपनी जेब से दे रहे हैं
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अपने पोस्टर हर जगह लगवाते हैं कि हमने अनाज मुफ्त दिया, पैसे मुफ्त दिए, दवाई मुफ्त दी, मकान मुफ्त दिया आदि । क्या ये सारे पैसे भारतीय जनता पार्टी के फंड से आया है क्या ? सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि इस देश का गरीब से गरीब आदमी, एक नमक का पैकेट भी खरीदता है तो भारत सरकार उससे टैक्स लेती है। सरकार जो भी देती है उसमें जनता का दिया हुआ पैसा है। इसको मोदी ने अपने प्रचार का माध्यम बना लिया है।
2017 में भाजपा के रणनीतिकार बुर्ज खलीफा के होटल में क्या कर रहे थे – झामुमो
सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया कि उनके पास कुछ कागजात हैं, जिन्हे वह समय आने पर सार्वजनिक करेंगे । उन्होने पूछा कि 2017 में भाजपा के कुछ रणनीतिकार दुबई के बुर्ज खलीफा में रुके थे। सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि उस समय भी भाजपा द्वारा अपने विरोधियों, केन्द्र सरकार के महत्वपूर्ण व्यक्तियों, सेना के बड़े अधिकारियों की जासूसी का विषय सामने आया था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता की ताकत के दम पर उन आवाजों को खामोश कर दिया । सुप्रियो भट्टाचार्य ने सवाल किया कि क्या पता ये लोग भारतीय सेना ते तीनो प्रमुखों की भी जासूसी करवा रहे हों ? क्या पता विपिन रावत और रक्षा मंत्री भी मोदी-शाह की जासूसी के शिकार हुए हों ?
जब भी फंसते हैं तो अंतर्राष्ट्रीय साजिश बता देते हैं
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने बड़ी आसानी से पेगासस जासूसी प्रकरण को अंतर्राष्ट्रीय साजिश बता दिया। अगर यह अंतर्राष्ट्रीय साजिश है तब तो ये और भी गंभीर बात है। तब तो केन्द्र सरकार को इस जासूसी प्रकरण की जरुर जांच करानी चाहिए । सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार ने देश की मीडिया की आवाज दबा दी, पत्रकारों के खिलाफ देशद्रोह की धाराएं तक लगा दी । इन्होने टेलीविजन मीडिया को तो कत्म कर ही दिया, अब प्रिंट और वेबसाइट के पत्रकार इनके निशाने पर हैं।
लातेहार के चंदनडीह में फांसी के फंदे से लटकता मिला युवक का शव

लातेहार : लातेहार जिला मुख्यालय के चंदनडीह मुहल्ले में एक चालीस वर्षीय युवक का शव घर में ही फांसी के फंदे से लटकता मिला। बुधवार की सुबह कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर परिजनों को घटना की जानकारी मिली।
मृतक की पहचान गणेश प्रसाद (40) पिता लखु साव के रूप में की गई है।
मृतक की माँ ने बताया कि मृतक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और उसका इलाज चल रहा था। मृतक की मां ने बताया रात में खाना खा कर बेटा अपने कमरे में सोने चला गया था। सुबह वह नहीं उठा और दरवाज़ा भी बंद था।
परिजनों के अनुसार कुछ वर्षों पहले पत्नी की मौत के बाद से मृतक काफी शांत रहता था।
घटना की जानकारी मिलते ही काफी संख्या में आसपास के लोग मृतक के घर के पास जुट गए। घटना की सुचना स्थानीय थाना पुलिस को दे दी गई है।
पलामू टाइगर रिजर्व में मृत मिला हाथी का बच्चा

मेदिनीनगर (उज्ज्वल दुनिया): पलामू टाइगर रिजर्व के कुटकू रेंज में एक हाथी का बच्चा मृत पाया गया है। शव को देखने से प्रतीत होता था कि उसकी मौत दो तीन दिन पहले हुई होगी। शव सड़ने लगा था और उससे दुर्गंध आ रही थी।
सूचना मिलने पर पीटीआर के पदाधिकारी और गढ़वा के भंडरिया वन विभाग के कर्मी मौके पर पहुंचे और पोस्टमार्टम कराकर हाथी के बच्चे के शव को घटनास्थल पर ही दफना दिया। मौत के पीछे गंभीर जख्म वजह बताई जा रही है। पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर, नोर्थ कुमार मनीष ने बताया कि मंगलवार को पेट्रोलिंग के दौरान ट्रेकर ने कुटकू रेंज में एक हाथी के बच्चे का शव देखा। उसकी उम्र 3 वर्ष के आस पास लगती थी।
सूचना मिलने पर बुधवार को पीटीआर की एक टीम मौके पर पहुंची। छानबीन करने पर पता चला कि हाथी के बच्चा के पेट में गंभीर जख्म था। उसमें कीड़े लग गए थे। संभवतः इसी कारण उसकी मौत हो गयी। कल तक हाथी की मां (हथिनी) शव के पास थी, लेकिन आज ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद बुधवार को उसी स्थान पर जेसीबी की मदद से दफना दिया गया। डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि हाथी के बच्चे की हत्या का मामला महज अफवाह है। उन्होंने कहा कि मैन एनिमल के संघर्ष में कभी भी संबंधित जानवर के बच्चे की हत्या का मामला अबतक सामने नहीं आया है।
इधर, शव मिलने के बाद से हाथी के बच्चे की हत्या गोली मारकर कर देने और उसके दांत उखाड़ ले जाने की चर्चा थी। इस पर गढ़वा के भंडरिया के रेंजर गोपाल चंद्रा ने कहा कि कुटकू रेंज भंडरिया का सीमावर्ती इलाका है। भजना के जंगल में हाथी का बच्चा मृत पड़ा था। हाथी के बच्चे के पेट में जख्म था। संभवतः इसी जख्म से उसकी मौत हो गयी है। उन्होंने कहा कि हाथी के बच्चे को कोई क्यों गोली मारेगा?
सुरक्षा व्यवस्था की एक बार फिर खुली पोल, रिमांड होम से तीन नाबालिग फरार
सुरक्षा व्यवस्था की एक बार फिर खुली पोल, रिमांड होम से तीन नाबालिग फरार
हत्या व दुष्कर्म मामलों के हैं आरोपी

मेदिनीनगर (उज्ज्वल दुनिया): पलामू जिला मुख्यालय के जेलहाता स्थित रिमांड होम से नाबालिगों के फरार होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। रिमांड होम की सुरक्षा को धत्ता बताते एक बार फिर रिमांड होम से तीन नाबालिग फरार हो गये हैं। उनके भागने का पता बुधवार की सुबह गिनती के दौरान चला। यह तीनों नाबालिग हत्या दुष्कर्म जैसे संगीन मामलों के आरोपी हैं।
तीनों नाबालिगों ने फिल्मी स्टाइल में रिमांड होम से भागने की प्लानिंग की और इसमें कामयाब हुए। नाबालिगों के फरार होने की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद है। तीनों ने पहले कमरे की खिड़की में लगे लोहे के ग्रिल को तोड़ा, इसके बाद उसके पीछे दीवार से सटे एक नाली से होते हुए रिमांड होम के बाहर निकल गए। घटना रात के 11 बजे के आसपास की बताई गई है।
फरार नाबालिग चैनपुर, रेहला और धनबाद के रहनेवाले हैं। चैनपुर व धनबाद के नाबालिग पर दुष्कर्म और रेहला के नाबालिग पर हत्या का आरोप है। इन्हें पकड़े जाने के बाद रिमांड होम में रखा गया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद सदर एसडीओ राजेश कुमार साह और जिला समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चैहान ने रिमांड होम पहुंचकर घटना की जानकारी ली और इसके सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने की समीक्षा की। मालूम हो कि अप्रैल से अब तक रिमांड होम से पांच नाबालिग फरार हो गए हैं। एसडीओ श्री साह ने बताया कि अप्रैल में हुई घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर दीवार को ऊंचा किया गया है। कंटीले तार लगाने के साथ ही साथ वाच टावर भी लगाया गया।
हालांकि जिस जगह से इस बार नाबालिग फरार हुए हैं, वह रिमांड होम के पीछे का भाग है। वहां भी एक वाच टावर खड़ा किया जाएगा। फिलहाल इस रिमांड होम में लगभग 60 नाबालिग रखे गये हैं। मालूम हो कि इस रिमांड होम का संचालन समाज कल्याण विभाग द्वारा किया जाता है। मालूम हो कि इससे पूर्व अप्रैल 2021 माह में भी कई नाबालिग फरार हुए थे। पिछले एक वर्ष में पलामू रिमांड होम से 10 के करीब नाबालिग फरार हुए हैं। नाबालिगांे के फरार होने का सबसे ज्यादा मामला चाहरदीवारी व छत के रास्ते भागने का आता है। रिमांड होम में बराबर छापामारी होती है। सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की भी बात कही जाती है, इसके बाद भी नाबालिग फरार होते रहे हैं।
मालूम हो कि रिमांड होम में गंभीर अपराध करनेवाले नाबालिकों को रखा जाता है। जब भी बच्चे फरार होते हैं, प्रशासनिक पदाधिकारी व पुलिस पदाधिकारी निरीक्षण करने पहुंचते हैं। कहा जाता है कुछ कमियां हैं, जिसे सुधारने की जरूरत है। लेकिन पदाधिकारियों के निरीक्षण के तुरंत बाद बच्चे के भाग निकलने से यह सवाल उठने लगता है कि आखिर यह निरीक्षण किस काम का जब बच्चे पहले की तरह ही रिमांड होम से भाग निकलते हैं। रिमांड होम में पहले छापामारी के दौरान नाबालिगों के कमरे से मोबाइल फोन, गांजा व अन्य नशीला पदार्थ मिल चुका है। इतना होने के बाद भी शातिर आरोपी नाबालिगों की निगरानी में चूक बड़ी लापरवाही है।
भारत में कोरोना से मौतें सरकारी आकड़ों से 10 गुना अधिक
कोरोना की दूसरी लहर को लेकर सरकारी आंकड़ा कहता है कि उसमें करीब सवा चार लाख लोगों की मौत हुई । लेकिन अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कोरोना से 10 गुणा ज्यादा मौतें हुई हैं । खास बात ये है कि इस रिपोर्ट को तैयार करने वालों में मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन भी शामिल हैं ।

अमेरिका के अध्ययन संस्थान सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत में सरकारी आंकड़े से इतर कोरोना से 34 से 49 लाख लोगों की मौत हुई है । यह आंकड़ा कोरोना से हुई मौतों के सरकारी आंकड़ों से 10 गुना से भी ज्यादा है । ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि, आजादी के बाद से भारत के लिए यह सबसे बड़ी त्रासदी है ।
आकड़े तैयार करने वाली टीम में अरविंद सुब्रमण्यम भी शामिल
सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट ने यह आंकड़ा कोरोना के दौर में हुई मौतों और उससे पहले के सालों में गई जानों के आंकड़े के विश्लेषण के आधार पर तैयार किया है । सबसे बड़ी बात की रिपोर्ट तैयार करने वालों में मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन भी शामिल हैं । सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जनवरी 2020 से इस साल जून 2021 के बीच कोरोना से करीब 50 लाख लोगों की मौत हुई है ।
कोरोना से मौतों के मामले में भारत नंबर वन
इस कड़ी में सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट ने जो रिपोर्ट तैयार किया है वो सरकारी आंकड़े से 10 गुना से भी ज्यादा है । बता दें, कोरोना के दौर में हुई मौतों का आंकड़ा तैयार करने के लिए सेंटर ने 2020 से 2021 के दौरान मौतों का आंकड़ा निकाला है ।
कोरोना से मौत के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है । वहीं, संक्रमण के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है । लेकिन जिस तरह से सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट की रिपोर्ट में दावा किया गया उससे साफ है कि अगर अगर इस आंकड़ो को सही मान लिया जाए तो भारत कोरोना से मौत के मामले में अमेरिका को पछाड़ कर पहले नंबर पर आ जाएगा ।





