[pdf-embedder url=”http://localhost:8090/ud/wp-content/uploads/2021/07/Ujjawal-Duniya-28.07.2021.pdf” title=”Ujjawal Duniya 28.07.2021″]
आठ साल बाद झारखंड में हर तरह के वाहन टैक्स में बढ़ोतरी
कैबिनेट ने परिवहन विभाग के मोटरगाड़ी संशोधन नियमावली 2021 की मंजूरी दे दी है । इसके तहत मोटरगाड़ी से जुड़े हर आवेदन शुल्क, लाइसेंस जांच शुल्क, परमिट शुल्क में दोगुनी तक बढ़ोतरी की गयी है । निजी वाहन संचालकों को राहत दी गयी है, लेकिन मोटर कैब, सवारी गाड़ियों के परमिट शुल्क में बढ़ोतरी की गयी है ।
अब सवारी बस के लिए पांच साल के स्थायी परमिट के लिए 9000 रुपये तक लिये जायेंगे । कैब के लिए विभिन्न श्रेणी में परमिट शुल्क में भी बढ़ोतरी की गयी है । परिवहन विभाग ने राजस्व बढ़ोतरी के लिए विभिन्न शुल्कों में आठ साल बाद बढ़ोतरी की है ।

कैबिनेट के फैसले का आपके ऊपर असर
- प्रशिक्षु लाइसेंस जांच शुल्क: 100 की जगह 200 रुपये
- चालक लाइसेंस की स्वीकृति के लिए प्रत्येक जांच के लिए शुल्क 300 रुपये की जगह 500 रुपये.
- छाया चित्र का प्रतिस्थापन शुल्क 60 रुपये की जगह 100 रुपये किया गया.
- द्वित्तीय प्रति चालक लाइसेंस शुल्क 150 रुपये से 300 रुपये किया गया.
- प्रत्येक दस्तावेज के प्रति के लिए शुल्क 150 रुपये से 300 रुपये किया गया.
- चालक अनुज्ञप्ति के विवरणी की प्रत्येक प्रति के लिए शुल्क 50 रुपये से 100 रुपये हुआ.
- चिकित्सा प्रमाण पत्र के लिए शुल्क 60 रुपये की जगह 150 रुपये हुआ.
- संवाहक लाइसेंस की स्वीकृति के लिए जांच शुल्क 100 रुपये की जगह 200 रुपये किया गया.
- बैज की स्वीकृति व प्रतिस्थापन के लिए शुल्क 50 रुपये की जगह 100 रुपये हुआ.
- संवाहक लाइसेंस की द्वित्तीय प्रति के लिए शुल्क 50 रुपये की जगह 100 रुपये हुआ.
- मोटर वाहन अधिनियम के तहत अपील के लिए 150 रुपये की जगह 250 रुपये.
- शुल्क एक्ट के अनुसार प्रदत सुविधा की प्रति के लिए शुल्क 60 रुपये की जगह 150 रुपये.
- नियम 58 ए के तहत प्रत्येक दस्तावेज के लिए शुल्क 60 की जगह 150 रुपये.
- योग्यता प्रमाण पत्र के विस्तार के लिए 120 रुपये की जगह 250 रुपये लिया जायेगा.
- अस्थायी निबंधन प्रमाण पत्र व विस्तार के लिए शुल्क – दो पहिया वाहन में 200, एलएमसी 200, एलएमसी 250, एचएमवी में 250 रुपये.
- निबंधन प्रमाण पत्र की द्वितीय प्रति के लिए 60 की जगह 150 रुपये.
- विशेष सवारी गाड़ी के पांच साल के स्थायी परमिट शुल्क 6000 रुपये के स्थान पर 9000 रुपये किया गया.
- सवारी यात्री बस में पांच साल का स्थायी परमिट शुल्क 6000 रुपये से बढ़ाकर 9000 रुपये किया गया.
- विशेष मोटर कैब के लिए स्थायी परमिट शुल्क 2000 के स्थान पर 3000 रुपये किया गया.
- आकस्मिक अथवा विशेष मोटरकैब से विभिन्न दो क्षेत्र का पांच साल का परमिट शुल्क 6000 रुपये से 9000 रुपये किया गया.
- मीटर के साथ कैब, कार का स्थायी परमिट शुल्क 2000 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये किया गया.
- दो क्षेत्रों के लिए कार का परमिट शुल्क 3600 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये किया गया.
- कैब में एक या अधिक क्षेत्रों का परमिट शुल्क 10 हजार के स्थान पर 15000 रुपये किया गया.
- मोटर कैब से विभिन्न बिना मीटर अथवा मीटर के साथ दो क्षेत्रों का पांच साल का परमिट शुल्क 3600 रुपये के स्थान पर 6000 रुपये.
- लोक वाहन मालवाहक दो से अधिक क्षेत्र के लिए पांच साल का परमिट 6 हजार से 9 हजार किया गया.
- निजी मोटरकार को छोड़कर नौ से अधिक यात्री को ढोने वाले वाहनों का पांच साल का परमिट एक हजार से दो हजार किया गया.
- विशेष सवारी बस के परमिट के पांच साल का शुल्क तीन सौ के जगह पांच सौ किया गया.
- सवारी गाड़ी बस का परमिट पांच साल का तीन सौ के जगह 500.
- मोटर कैब के लिए परमिट के लिए आवेदन शुल्क 150 रूपये की जगह 300 रुपये.
- मालवाहक वाहनों का परमिट के लिए आवेदन शुल्क 300 रुपये किया गया.
- निजी मोटर वाहन को छोड़कर परमिट के लिए आवेदन शुल्क 150 रुपये की जगह 300 रुपये.
- राज्य के भीतर एक से अधिक मार्ग, उपक्षेत्रों के लिए 2400 रुपये की जगह 5000 रुपये परमिट शुल्क.
- अस्थायी परमिट के प्रतिहस्ताक्षर के लिए आवेदन शुल्क एक हजार रूपये किया गया.
- समय सारिणी परिवर्तन शुल्क 5000 रुपये.
- दूरी की माप के लिए प्राधिकार 25 रुपये किमी की दर से शुल्क लेगा.
- अस्थायी मालवाहक परमिट के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये.
- अस्थायी सवारी गाड़ी परमिट के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये.
- मालवाहक के स्थायी परमिट के लिए आवेदन शुल्क 1000 रुपये.
- पर्यटक परमिट के लिए आवेदन शुल्क 1000 रुपये किया गया.
- पर्यटक वाहनों के लिए पर्यटक परमिट के लिए शुल्क 1500 रुपये किया गया.
- वैसे वाहन जिसका निरीक्षण ब्रिकेता या उपविक्रेता के यहां किया जायेगा वहां निजी मोटरवाहन में दो पहिया वाहन के निरीक्षण शुल्क 200 , मोटरकार, ओमनी में चार सौ व अन्य वाहन में चार सौ रुपये लिये जायेंगे. हल्के व्यवासायिक वाहन में 300, मध्यम मोटर वाहन से 400 व भारी मोटर वाहन से 500 रुपये लिये जायेंगे.
- परमिट की वैधता समाप्ति के 15 दिन पूर्व नवीकरण के लिए आवेदन देने के लिए 300 रुपये से 2000 रुपये तक आवेदन शुल्क लिया जायेगा. 90 दिन बाद 5000 रुपये, इसके बाद हर माह 500 रुपये लिये जायेंगे जो अधिकतम 15000 रुपये तक होगा
चास यूनियन बैंक के एटीएम से निकलने लगे नोट, देखने वालों की लगी भीड़

बोकारो। चास में मंगलवार सुबह अचानक कुछ ऐसा हुआ कि एक एटीएम के बाहर देखने वालों की भीड़ लग गई। दरअसल स्थानीय लोगों ने एटीएम में 500- 500 के नोट जमीन पर बिखरा देखा । कुछ नोट एटीएम में ही फंसे हुए थे । इसको देखकर लोग हैरान हो गए । लोगों को लगा कि किस ने एटीएम ले छेड़छाड़ करने की कोशिश की है । इसकी सूचना पूरे चास में आग की तरह फैल गई ।
एटीएम में बिखरे 500-500 के 14 नोटों को पुलिस ने जब्त किया
स्थानीय लोगों ने चास पुलिस को इसकी सूचना दी. चास पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और देखा कि एटीएम के भीतर 500- 500 के नोट पड़े हुए हैं. पुलिस ने इसकी सूचना बैंक को दी. साथ ही एटीएम में बिखड़े पड़े 500 के 14 नोट को जब्त किया. नोट जब्त करने के बाद पुलिस ने एटीएम को बंद करा दिया ।
आखिरी ट्रांजेक्शन किसने किया ?
पुलिस ने इस दौरान बैंक के अधिकारियों से भी जानकारी ली. पुलिस और बैंक अधिकारियों ने इस बात की तफ्तीश शुरू कर दी है कि आखिर किस ग्राहक ने उस एटीएम से आखरी बार ट्रांजेक्शन किया है. अनुमान लगाया जा रहा है कि कोई ग्राहक इस एटीएम से पैसा की निकासी करने का प्रयास किया होगा, लेकिन पैसा नहीं निकलता देख वह चला गया. बाद में एटीएम से पैसे निकल कर बाहर आ गये. मामले की जांच चल रही
राज्य में इथेनॉल उत्पादन में निवेशकों को कई सुविधाएः पूजा सिंघल

रांचीः झारखंड सरकार राज्य को इथेनॉल उत्पादन में अग्रणी बनाने की कवायद में जुट गई है। इसके लिए उद्योग विभाग ने स्टेक होल्डरों के साथ मंगलवार को होटल रेडिशन ब्लू में झारखंड इथेनॉल प्रोडक्शन एंड प्रोमोशन पॉलिसी 2021 के तहत गहन विचार-विमर्श किया। उद्योग सचिव श्रीमती पूजा सिंघल ने विभाग के पॉलिसी रोडमैप के बारे में जानकारी दी।उन्होंने कहा कि 7 पॉलिसी को अगले दो माह के भीतर स्वीकृति दिलायी जायेगी।

झारखंड में निवेश से लाभ
उन्होंने झारखंड में निवेश के लाभ को बताते हुए यहां के स्थानीय लाभ, इज ऑफ डूइंग बिजनेस, आवंटन के लिए लैंड बैंक में उपलब्ध भूमि, तैयार हो रहे इंडस्ट्रियल पार्क और सेज प्रोजेक्ट पर प्रकाश डाला। उन्होंने इथेनॉल उत्पादन में फीडस्टॉक के इस्तेमाल का सुझाव देते हुए कहा कि पूर्वी भारत के बाजार के लिए झारखंड आसानी से प्रतिदिन 600 किलोलीटर का उत्पादन कर सकता है।
आकर्षक अनुदान है पॉलिसी में
उद्योग सचिव ने कहा कि पॉलिसी में पारिश्रमिक प्रोत्साहन का भी व्यापक ख्याल रखा गया है। इसके तहत एसएसएमई द्वारा 10 करोड़ और गैर एसएसएमई द्वारा 50 करोड़ तक के पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है। वहीं प्रति कर्मी 13,000 रुपये एकमुश्त स्किल डेवलपमेंट सब्सिडी का भी प्रावधान है। यह राशि उन कर्मियों की ट्रेनिंग पर खर्च होगी, जो झारखंड के निवासी होंगे। इसके अतिरिक्त नये यूनिट में झारखंडवासी कर्मियों के ईएसआइ और ईपीएफ मद में भी पांच वर्षों के लिए 1000 रुपये का प्रावधान है। मौके पर उद्योग सचिव ने निवेशकों से उनके सुझाव भी आमंत्रित किये।
मनोज झा हत्याकांड को लेकर वकीलों में उबाल, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग
राजधानी रांची के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज झा की नृशंस हत्या से राजधानी में तरह-तरह की चर्चाएं होती रही । रांची बार एसोसिएशन ने तो बकायदा बैठक कर इस हत्याकांड की निंदा की , फिर सारे वकील सड़कों पर उतर गए । अधिवक्ता मनोज झा की हत्या के विरोध में रांची के वकील मंगलवार को न्यायिक कार्यों से दूर रहे ।

आखिर कब तक बेमौत मारे जाते रहेंगे अधिवक्ता ?
झारखंड बार काउंसिल के बैनर तले वकीलों ने बार एसोसिएशन से अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च निकाला। इससे पहले एसोसिएशन के कार्यालय में सभी की एक बैठक हुई। इसमें झारखंड बार काउंसिल के प्रवक्ता संजय कुमार विद्रोही ने कहा कि राज्य में अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हुआ तो ऐसे ही बेमौत अधिवक्ता मारे जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी के केस की पैरवी करना अधिवक्ताओं का पेशा है।
हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, हाईकोर्ट के जज से जांच कराने की मांग
अधिवक्ता मनोज झा की हत्या को लेकर झारखंड हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने अधिवक्ता के हत्या की निंदा करते हुए इस मामले की जांच की निगरानी हाईकोर्ट के जज से कराने की मांग है। पत्र में कहा है कि इस तरह की घटना से अधिवक्ता सदमे हैं। उनकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेवारी है।
SSP से भी मिले एसोसिएशन के लोग
मनोज झा हत्याकांड सहित अधिवक्ताओं की सुरक्षा के मुद्दे पर झारखण्ड बार एसोसिएशन के लोग रांची एसएसपी से भी मिले । उन्होंने पूछा कि आकिर अधिवक्ताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी । एसोसिएशन ने एसएसपी को बताया कि जिस तरह सरेशाम मनोज झा की हत्या की गई है, इससे वकीलों में डर का महौल है। इस तरह के माहौल में तो वकीलों के लिए राह चलना मुश्किल हो जाएगा ?
खाली सीटों पर नियुक्तियां और पारा शिक्षकों की मांगों पर मुखर हुईं अंबा प्रसाद

…हाई स्कूल शिक्षकों और पंचायत सेवकों की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करने का किया आग्रह
उज्ज्वल दुनिया संवाददाता
रांची/हजारीबाग। राज्यभर में विभिन्न विभागों में खाली पड़ी सीटों पर नियुक्तियां शीघ्र करने और पारा शिक्षकों की मांगों पर हजारीबाग स्थित बड़कागांव की विधायक अंबा प्रसाद (Amba Prasad) मुखर हो गई हैं। मंगलवार को उन्होंने इन मुद्दों पर रांची में मंत्रियों से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही विधायक अंबा प्रसाद ने उन मंत्रियों से इस मुद्दे पर अगली कैबिनेट में निर्णय लेने का आग्रह किया।
सभी चार कांग्रेसी मंत्रियों से मिलकर सौंपा ज्ञापन
कैबिनेट की बैठक से पूर्व हाई स्कूल शिक्षकों और पंचायत सेवकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और पारा शिक्षकों की मांगों को लेकर कैबिनेट मंत्रियों से बड़कागांव विधायक ने मुलाकात कर कैबिनेट से निर्णय कराने का अनुरोध किया है। बड़कागांव विधायक अंबा प्रसाद ने झारखंड सरकार के मंत्री रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम, बादल पत्रलेख और बन्ना गुप्ता से मुलाकात कीं। उन्होंने पंचायत सचिव और हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने समेत विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों पर जल्द बहाली के लिए बातचीत कीं। साथ ही पारा शिक्षकों के वेतनमान संबंधी मांगों पर ध्यान दिलाते हुए कैबिनेट से निर्णय कराने का अनुरोध किया।
अभ्यर्थियों से लगातार मिलकर उनकी समस्याएं सरकार तक पहुंचा रही हैं बड़कागांव विधायक
कुछ दिनों पहले से कैबिनेट की बैठक से पूर्व अंबा प्रसाद वर्षों से अटकी नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने के मुद्दे पर लगातार लोगों से मिल रही थीं।उन्होंने हाई स्कूल शिक्षक और पंचायत सचिव अभ्यर्थियों के अलावा पारा शिक्षक प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुना और फिर संबंधित मंत्रियों से मुलाकात कर उनकी बातों को रखा। वार्ता के दौरान बड़कागांव विधायक ने राज्य भर में खाली पड़े एवं किसी कारणवश नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई परीक्षाओं को जल्द से जल्द पूरा कर मेधा सूची प्रकाशित कराने की बात कही।
उन्होंने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति परीक्षा 21/2016 के अंतर्गत 25% सीटों पर सीधी नियुक्ति एवं हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति परीक्षा के तहत 11 गैर अनुसूचित जिलों पर नियुक्ति के अंतिम परीक्षाफल का प्रकाशन करने, इतिहास और नागरिक शास्त्र के अनुशंसित अभ्यर्थियों को सेवा देने एवं पारा शिक्षकों के मानदेय तथा वेतनमान पर संशोधन संबंधी विभिन्न मांगों पर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि विभिन्न नियुक्तियों में हो रही समस्याओं को लेकर वह लगातार स्वयं प्रयास कर रही हैं। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि महागठबंधन सरकार सभी बाधाओं को शीघ्र पूरा कर नियुक्ति, वेतनमान आदि पर सार्थक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार रोजगार के अपने सभी चुनावी वादों को पूरा करेगी।
झारखण्ड के 2.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को अब 17 की जगह 28 प्रतिशत महंगाई भत्ता

झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। झारखंड सरकार के कर्मियों को अब 17 प्रतिशत के बजाय 28 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा। यह निर्णय केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसले के ही अनुरूप है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
पेंशनधारियों के डीए में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी
वित्त विभाग ने कर्मचारियों के वेतन और पेंशनधारियों के डीए में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है। इस पर मुहर लगते हुए राज्य सरकार के लगभग ढाई लाख से अधिक कर्मचारी लाभान्वित होंगे। वहीं, सरकारी कोष पर लगभग 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ने का अनुमान है।
कोरोना के कारण महंगाई भत्ते पर लगाई गई थी रोक
कोरोना महामारी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने जनवरी-2020 से महंगाई भत्ते पर रोक लगा दी थी। केंद्र सरकार ने पिछले दिनों महंगाई भत्ते पर लगी रोक हटा कर इसे 17 प्रतिशत से 28 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 20 जुलाई को इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। इसके बाद झारखंड में भी सरकारी कर्मियों और पेंशन भोगियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि का रास्ता साफ हो गया था।
असम
दिसपुर (असम)। असम और मिजोरम के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सोमवार को हुए झड़प में असम पुलिस के 6 जवान शहीद हो गए हैं, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सीमा संघर्ष में घायल हुए पुलिसकर्मियों से सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मुलाकात की और उनके अच्छे इलाज का निर्देश दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी।
असम के मंत्री परिमल सुकलाबैद्य के अनुसार मिजोरम की ओर से की गई गोलीबारी में करीब 80 लोग घायल हो गए। सुकलाबैद्य ने कहा, ‘असम पुलिस के 6 जवान मारे गए हैं और लगभग 80 लोग इस गोलीबारी में घायल हुए हैं। हमारी तरफ से कोई गोलीबारी नहीं हुई। मिजोरम की तरफ से अंग्रेजों द्वारा जलियांवाला बाग में की गई फायरिंग की तरह ही फायरिंग की गई।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने असम और मिजोरम के बीच लैलापुर-वैरेंगटे विवादित स्थल पर सीआरपीएफ की दो कंपनियों (असम में 119 बटालियन और मिजोरम में 225 बटालियन) को तैनात किया है। सीआरपीएफ एडीजी संजीव रंजन ओझा ने बताया कि इन 2 अलग-अलग बटालियनों से सीआरपीएफ की दोनों कंपनियां असम और मिजोरम के पुलिस बलों के साथ पहले से मौजूद थीं लेकिन वे तटस्थ थीं। ओझा ने आगे बताया कि सीआरपीएफ को शाम 4 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच स्थिति पर नियंत्रण करने का निर्देश दिया गया था।
सुरक्षा परिषद में हुई कोविड
संयुक्त राष्ट्र, प्रेट्र। कोविड-19 टीकों की वैश्विक असमानता को दूर करने के लिए एक प्रभावी तंत्र की जरूरत पर जोर देते हुए भारत ने कहा कि वायरस के स्वरूप में और बदलाव को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान की आवश्यकता है और वैश्विक समुदाय के साथ अपना ‘कोविन’ मंच साझा करने की पेशकश की। फ्रांस की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बंद कमरे में कोविड-19 की स्थिति के प्रस्ताव 2565 पर चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने बताया कि सुरक्षा परिषद में कोविड-19 पर चर्चा की।
भारत का प्रौद्योगिकी मंच ‘कोविन ‘
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने ट्विटर पर बताया कि सुरक्षा परिषद में कोविड-19 पर चर्चा में उन्होंने कहा कि टीके की वैश्विक असमानता को दूर करने के लिए एक प्रभावी तंत्र और वायरस के स्वरूप में और बदलाव को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान की जरूरत है। टीके को लेकर लोगों की गलतफहमियों को दूर करने के लिए तथ्यों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, साथ में भारत ने कोविन मंच की पेशकश भी की। कोविड रोधी टीकाकरण के लिए कोविन भारत का प्रौद्योगिकी मंच है।
ये आंसू बड़े काम की चीज है….
येदियुरप्पा चार बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनें, लेकिन हर बार उन्हें इस्तीफा देना पड़ा । लेकिन इस बार इस्तीफा देते वक्त वो रो दिए…उनकी आखों से छलकते आंसू का असर कहिए या लिंगायत समुदाय का उनके प्रति भावनात्मक जुड़ाव, दुकानों के शटर धड़ाधड गिरने लगे । उनके विधानसभा क्षेत्र शिकारीपुरा में तो उनके इस्तीफे के विरोध में दुकानें और बाजार बंद रहे ।

अब सवाल यह है कि येदियुरप्पा ने इस्तीफा क्यों दिया? इस दौर में जब मोदी-शाह की आलोचना “ईशनिंदा” के समान हो गई हो, मैं जोखिम ले रहा हूँ। सबसे बड़ा कारण है कि येदियुरप्पा कभी मोदी-शाह की पसंद नहीं रहे । कारण, उन्होंने कभी दोनों को उतना भाव नहीं दिया, जितना सर्वानंद सोनोवाल या रघुवर दास जैसे लोग दे सकते हैं।
ये भाजपा का कांग्रेसीकरण ही है । गांधी परिवार को जो पसंद नहीं, वो कांग्रेस से आउट और जो मोदी-शाह को पसंद नहीं वो भाजपा से …वसुंधरा राजे, योगी आदित्यनाथ और येदियुरप्पा इस गर्मी को महसूस कर रहे हैं, शिवराज सिंह चौहान ससमय संभल गए, वो नतमस्तक होकर बच गए …VHP वाले प्रवीण तोगडिया, संजय जोशी आदि नहीं समझ सके, लिहाजा राजनीतिक बियाबान में भटक रहे हैं।
अपने इस्तीफे के वक्त येदियुरप्पा ने भावुक होते हुए कहा कि मैंने साइकिल पर घूम-घूमकर कर्नाटक में बीजेपी को मजबूत किया। So what! कुछ ऐसा ही हेमंत विस्वसरमा ने राहुल गांधी को कहा था, उनको भी यही जवाब मिला था:- So what ! खैर राजनीति जब व्यक्ति सेंट्रिक हो जाती है तो ऐसा ही होता है। सामूहिक निर्णय की परंपरा अब शायद खत्म सी होती जा रही है।

खैर अब चाहे जो हो, लेकिन भाजपा को कर्नाटक में किसी लिंगायत को ही मुख्यमंत्री बनाना होगा । वहां का माहौल ही कुछ ऐसा हो चला है। आखिर कर्नाटक की कुल आबादी के 19% लिंगायत हैं, ये हमेशा से बीजेपी को सपोर्ट करते आए हैं, इनकी नाराज़गी को बीजेपी अफोर्ड नहीं कर सकती ।
येदियुरप्पा सरकार में खनन मंत्री रहे लिंगायत समुदाय के मुर्गेश निराणी का नाम आ रहा है, पर समस्या है कि मुर्गेश निराणी भी येदियुरप्पा के ही आदमी हैं । यहां भी मोदी-शाह का ईगो आड़े आ रहा है। दूसरा विकल्प मोदी-शाह की पसंद ब्राह्मण नेता प्रह्लाद जोशी हैं, लेकिन प्रह्लाद जोशी दूसरे सर्वानंद सोनोवाल साबित होंगे। उनकी छवि शाह के चमचे की ज्यादा और जमीनी नेता की कम है ।
वैसे क्या फर्क पड़ता है? कौन सा आजकल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव संगठन के अंदर वोटिंग से हो रहा है? लगभग सभी राज्यों में तो मोदी-शाह-नड्डा का चयन ही तो है । संगठन चुनाव नाम के शब्द अब राजनीति की डिक्शनरी में हैं कहां?
मैं इस्लाम कबूलना चाहूँ तो मुझे कौन रोक सकता है

जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाह (Upendra kushwaha) का कहना है कि स्वेच्छा से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को कोई भी नहीं रोक सकता । उनका कहना है कि अगर उनका मन इस्लाम कबूल करने का हो तो उन्हें कौन ही रोक सकता है ? उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यह सभी का संवौधानिक अधिकार है ।
जेडीयू जातिगत जनगणना के पक्ष में
उपेंद्र कुशवाहा ने ये भी साफ किया कि अगर कोई अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है तो उसे कोई रोक भी नहीं सकता. ये बातें उन्होंने मीडिया से बक्सर में कहीं। वह दो दिनों के बक्सर दौरे पर पहुंचे थे। जातिगत जनगणना के सवाल पर उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना जेडीयू की पुरानी मांग रही है । सीएम नीतीश इसके पक्ष में हैं । पार्टी किसी भी कीमत पर इस मांग से पीछे नहीं हटेगी ।
जातिगण जनगणना के पक्ष में जेडीयू
राज्यों के हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार से कह चुके हैं कि अगर वह पिछड़ों के लिए कोई योजना बनाते हैं तो ये बताना होगा कि इसकी संख्या कितनी है । उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बिहार में अंतिम जातीय जनगणना 1931 में हुई थी । तब से अब तक जातीय जनगणना नहीं हुई । इसीलिए सरकार संख्या नहीं बता पाती है । कुशवाहा ने कहा कि जेडीयू और बीजेपी दो अलग पार्टियां हैं । दोनों के नीति और सिद्धांत भी अलग हैं । जेडीयू जातिगण जनगणना के पक्ष में है ।
कॉलेजियम सिस्टम संविधान पर कलंक
नीट एग्जाम में ओबीसी रिजर्वेशन के सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि केंद्रीय कोटे से भी रिजर्वेशन की व्यवस्था होनी चाहिए । इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि केंद्र के कोटे से नीट एग्जाम में ओबीसी को आरक्षण नहीं दिया जाता है । इसके साथ ही उन्होंने पीएम से नीट में रिजर्वेशन की मांग की है । इसके साथ ही उन्होंने कॉलेजियम व्यवस्था पर भी सवाल उठाया । कुशवाहा ने कॉलेजियम सिस्टम को संविधान पर कलंक बताया । उन्होंने इसे गैर संवैधानिक बताया । उन्होंने कहा कि जब तक देश में ये व्यवस्था रहेगी तब तक गरीबों को न्याय नहीं मिल सकता ।






