दिवंगत न्यायधीश की पत्नी को दें सरकारी नौकरी- रघुवर दास
पूर्व मुख्यमंत्री सह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने कहा कि न्यायधीश उत्तम आनंद की हत्या के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी को जितनी तत्परता दिखानी चाहिए थी, उन्होंने नहीं दिखाई। जज साहब की मृत्यु पर उन्होंने वह संवेदनशीलता नहीं दिखाई, जितनी की देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार स्टेन स्वामी की बीमारी से हुई मौत पर दिखाई थी। स्टेन स्वामी के मामले में अपराध की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष न्यायपालिका ने उनको जमानत नहीं दी थी। लेकिन उनकी मृत्यु पर हेमंत सोरेन ने जो विह्वलता दिखाई, वह जज साबह के निधन पर दिखाई नहीं दी। मुख्यमंत्री जी ने स्टेन स्वामी के घर जाकर कहा था कि उनके परिवार का एक सदस्य चला गया, जबकि जज साहब के घर जाना तक उन्होंने मुनासिब नहीं समझा। दिवंगत न्यायाधीश के परिजनों को मुख्यमंत्री अपने कार्यालय बुलाकर मिलते हैं, ये परिजन कौन थे, यह भी अस्पष्ट नहीं है। यह मुख्यमंत्री की संवेदनशील पर एक सवालिया निशान है।
उन्होंने कहा कि अच्छा होता की मुख्यमंत्री जी उनके घर जाते। उनके पिता व परिजनों को ढांढस बंधाते। वहीं पर परिजनों के लिए नौकरी व अन्य सुविधाओं की घोषणा करते। श्री दास ने कहा कि दिवंगत न्यायाधीश की पत्नी को उनकी योग्यता के अनुरूप सरकारी नौकरी अविलंब दी जानी चाहिए। इसमें विलंब की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। साथ ही उनके बच्चों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई का इंतजाम भी सरकार को अपने स्तर से करना चाहिए। जैसा कि शहीद लेफ्ट. कर्नल संकल्प शुक्ला की पत्नी को हमारी सरकार ने सरकारी नौकरी व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई थी।
सत्ता को साधने में इस पारी में मैच्योर दिख रहे हैं हेमंत सोरेन
के.कौशलेन्द्र
झारखंड के हालिया सियासी तूफान और महागठबंधन के तार-तार होते रिश्ते को शायर सागर ख़य्यामी ने निम्न पंक्तियों में बरसों पहले बयां कर दिया था –
कितने चेहरे लगे हैं चेहरों पर क्या हक़ीक़त है और सियासत क्या?
जी हाँ, विधायकों की खरीद फरोख्त कर सत्ता में उलटफेर का फेरा कई सियासी खिलाड़ियों को भारी पड़ने वाला है । औरों की तो छोड़ दीजिये कुर्बानी की बकरीद मना रहे झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष व जामताड़ा विधायक डा. इरफान अंसारी ने तो कतई नहीं सोचा होगा कि उनकी विश्वसनीयता ही कुर्बान हो जायेगी । भाजपाई से कांग्रेसी बने बरही विधायक उमाशंकर अकेला तो खैर अपनी अंतिम सियासी पारी ही खेल रहे हैं ।
पिछले दिनों सियासी उठापटक की चिंगारी तब भड़क उठी जब बरकट्ठा से निर्दलीय विधायक अमित यादव के साथ मिलकर दो कांग्रेसी विधायकों डा. इरफान अंसारी और उमाशंकर अकेला द्वारा हेमंत सोरेन सरकार को अस्थिर करने की रची जा रही साजिश के भंडाफोड़ की खबरें सुर्खियां बटोरने लगी । आनन- फानन में कांग्रेस ने अपने विधायकों को क्लीन चिट भी दे दिया और कांग्रेस विधायक व कांग्रेस की उत्तराखण्ड प्रभारी दीपिका पांडे सिंह ने भी झामुमो पर आंखें तरेर दी ।
तमाम घटनाक्रम के बावजूद मुख्यमंत्री सोरेन मौन बने रहे किन्तु सियासी व प्रशासनिक पेंच कसा जाने लगा । कांग्रेस के ही बेरमो विधायक अनूप सिंह ने कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज करा कर पुलिस को कार्रवाई का मौका दे कांग्रेस में अंदरखाने चल रहे घमासान को उजागर कर कांग्रेस की स्थिति सांप-छछूंदर वाली कर दी । न तो कांग्रेस इस साजिश को नकार पायी और न ही स्वीकार करने की स्थिति में रही । सूत्रों की मानें तो डा. इरफान ने मुख्यमंत्री आवास जाकर अपनी गलती मानने में ही भलाई देखी । कुल मिलाकर कांग्रेस की सियासी किरकिरी जमकर हुई ।
फौरी परिणाम यही निकलता दिखा कि हेमंत सोरेन किसी भी दबाव में नहीं और फिलहाल 12 वें मंत्री पद और बोर्ड निगमों का कद्दू न तो कटेगा और न बंटेगा । मुख्यमंत्री के सियासी संकेत स्पष्ट हैं कि उन्हें दबाव की राजनीति से निपटने का गुर पता है और आने वाले दिनों में हेमंत अपनी मर्जी के सियासी पत्ते बेधड़क खोलेंगे ।
खामोश हो जाएंगे या पलटवार करेंगे ?
रांची पुलिस का विशेष जांच दल (एसआइटी) इस मामले की तफ्तीश में जुटा है । तय मान लीजिये की इस जांच का अंतिम परिणाम आने में काफी समय लगेगा , किन्तु इतना तय है कि अब हेमंत सोरेन पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत कांग्रेसी विधायकों की बार-बार दिल्ली दौड़ और मीडिया बतोलाबाजी का सिलसिला या तो थम जायेगा अथवा सूबे में एक और सियासी उलटफेर होगा ।
समस्त घटनाक्रम में यह भी उजागर हो गया कि झारखंड प्रदेश कांग्रेस में अभी आल इज वेल नहीं है । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और वित्त मंत्री डा. रामेश्वर उरांव के खिलाफ कुछ विधायक लगातार मोर्चा खोले हुए हैं । उन पर अध्यक्ष पद छोड़ने का दबाव है और सुखदेव भगत व प्रदीप बालमुचु की वापसी का सियासी सिरदर्द भी । साथ ही मंत्री पद एवं बोर्ड निगम में अपनी कुर्सी चाहने वाले विधायकों के बागी तेवर ।
गौरतलब है कि 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है । हेमंत सोरेन की गठबंधन सरकार को 52 विधायकों का समर्थन हासिल है । इसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 30, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल का 1, एनसीपी का 1 और 2 निर्दलीय विधायकों विनोद सिंह व सरयू राय के साथ-साथ कांग्रेस में विलय का इंतजार कर रहे बंधु तिर्की व प्रदीप यादव शामिल हैं । हेमंत सरकार गिराने के लिए कम से कम 12 विधायकों की जरूरत होगी । यह तभी संभव है जब कांग्रेस के दो- तिहाई विधायक टूटकर नया धड़ा बना लें और भाजपा को समर्थन दे दें ।
भाजपा सरकार गिराने के मूड में नहीं…
किन्तु भाजपा के सूत्र दावे के साथ कहते हैं कि फिलहाल भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व ने संगठन को धार दे हेमंत सरकार को उसकी विफलता गठरी तले धाराशायी करने की रणनीति पर चलने का निर्देश दे रखा है, और इसी के मद्देनजर प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह व अध्यक्ष दीपक प्रकाश की जोड़ी प्रदेशव्यापी प्रवास कर हेमंत सरकार के चुनावी वायदों की पोल खोल अभियान के माध्यम से अपने काडर में जोश भरने में जुटी है । खैर , हालिया घटनाक्रम की बेबाक विवेचना से पहले गठबंधन की राजनीति के अतीत में झांक लेते हैं ।
भारत में सन् 1970 के उथल-पुथल के दौर के बाद गठबंधन की जिस राजनीति की शुरुआत हुई थी वह आज का बड़ा सच है । जातिगत-सांप्रदायिक व अन्य अनुकूल वोट समीकरण के मद्देनजर प्रत्येक चुनाव के साथ होने वाले गठजोड़ राजनीतिक मजबूरी को तो दिखाते ही हैं, साथ ही वास्तविक तथ्य भी यही है कि उनके बिना आज कोई राजनीतिक दल सत्तासीन होने की सोच भी नहीं सकता ।
सूबे झारखंड में भी राज्य गठन काल से ही हालात वही हैं. प्रयोगधर्मी बने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के अगुवा पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने आजसू से गठबंधन तोड़ सियासी चूक की और हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झामुमो- कांग्रेस-राजद महागठबंधन को झारखंड की सत्ता सौंप दी, ऐसा कहना अतिश्योक्ति तो नहीं ही होगा.
रघुबर दास की चूक से सबक ले फिलहाल झारखंड भाजपा के संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह और प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश की जोड़ी अपने संगठन और गठबंधन सहयोगी दलों के सुर साधने में लगे हैं. भाजपा सूत्रों की मानें तो केन्द्रीय भाजपा नेतृत्व ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास को भी स्पष्ट संदेश दे दिया है कि प्रदेश संगठन महामंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के सांगठनिक दुरुस्ती अभियान में पेंच लगाने से बाज आयें क्योंकि भाजपा झारखंड में हेमंत सोरेन के रूप में एक और नवीन पटनायक का उदय मोल नहीं लेना चाहती.
पड़ोसी राज्य उड़ीसा में विगत् 21 साल से तमाम सियासी तिकड़म को धत्ता बताते हुये जिस तर्ज पर नवीन पटनायक सियासी बागडोर संभाले बैठे हैं, लगभग उसी तर्ज पर सूबे झारखंड में हेमंत सोरेन एक परिपक्व राजनीतिज्ञ की भांति वर्तमान और भावी सियासी समीकरण भी दुरुस्त करने में और बगैर शोर शराबे के सियासी चुनौतियों को भी ठिकाने लगाने में जुटे हैं. माझी-महतो-मुस्लीम वोट बैंक को दुरूस्त रखते हुये भाजपा के शहरी वोट बैंक में सेंधमारी कर झामुमो को 17-18 विधायकों की संख्या से 30 के आंकड़े पर पहुंचा कर हेमंत सोरेन ने सियासी महारथियों को यह अहसास तो करा ही दिया है कि अपने पिता दिसोम गुरु शिबू सोरेन की भांति वे भी झारखंड की राजनीति के दमदार छत्रप बन चुके हैं और उनके नेतृत्व में झामुमो अब पिछलग्गू राजनीति नहीं करने जा रही.
हेमंत सोरेन की बतौर मुख्यमंत्री ताजपोशी से लेकर अबतक के तमाम सियासी घटनाक्रम पर गौर कीजिये. घरेलू सत्ता विवाद, झामुमो के पुराने चावलों का उबाल व अन्य आरोप-प्रत्यारोप. बावजूद इसके शांत और गूढ़ राजनीतिज्ञ की भांति हेमंत अपनी राह चलते दिखे. झामुमो संगठन की ओर से भी केन्द्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के अलावा किसी और की टिका-टिप्पणी सुर्खियां न बटोर सकी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मूक सियासी दांव के आगे फिलहाल गठबंधन सहयोगी कांग्रेस बैकफुट पर दिख रही है और प्रतिपक्ष भाजपा शीघ्र सांगठनिक असंतोष को पाट पुनः सत्ता प्राप्ति की जुगत में मंडल-मंडल अलख जगाने में जुटी है. सियासी चुनौतियों से निपटने का हेमंत सोरेन ने जो नवीन अंदाज अपना रखा है उसका फलाफल दिख भी रहा है और आगे भी दिखना तय है.
पिता बीजू पटनायक की राजनीतिक विरासत संभालने दिल्ली से भुवनेश्वर पहुंचे नवीन पटनायक और बड़े भाई दुर्गा सोरेन की मौत के बाद पिता शिबू सोरेन की सियासी थाती संजोने राजनीति में आये हेमंत सोरेन के व्यक्तित्व में आपको काफी साम्य दिखेगा. जब नवीन पटनायक उड़ीसा के मुख्यमंत्री बने थे तो शुरुआती दौर में एक प्यारी मोहन पांडा उनकी छाया हुआ करते थे. उस वक्त कहा जाता था कि प्यारी मोहन ही सरकार चलाते हैं नवीन तो बस चेहरा मात्र हैं. बाद के दिनों में प्यारी मोहन अतीत के पन्नों में समा गये. झारखंड में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पुराने सहयोगी व मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू को लेकर भी कमोबेश प्यारी मोहन पांडा वाली भागवत सियासी गलियारे में हावी है किन्तु हेमंत सोरेन की राजनीतिक परिपक्वता को भांपने वाले जानते हैं कि हेमंत अपनी सियासी छवि को लेकर पूर्णतः सचेत हैं.
पिछले दिनों थानेदार रूपा तिर्की की संदेहास्पद मौत के मामले में संजय मिश्रा- दाहू यादव और उस केस के अनुसंधानक व अभिषेक प्रसाद की लगातार लंबी बातचीत का सीडीआर उच्च न्यायालय में रूपा तिर्की मामले के अधिवक्ता राजीव कुमार द्वारा न्यायालय में समर्पित किये जाने के बाद जो गुबार उठेंगे उसके परिणामस्वरूप आरंभिक दिनों में मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे गोपाल जी तिवारी की भांति अभिषेक प्रसाद भी किनारे लगा दिये जायें तो कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि एक के बाद एक निर्णायक सियासी धमाके करते जा रहे हेमंत सोरेन की राजनीतिक परिपक्वता सियासी गुणा-भाग करने वालों के लिये भी चौंकाने वाली ही होती है. दुमका- बेरमो और मधुपुर उपचुनाव में विपक्ष की घेराबंदी और बिखराव को भांप हेमंत सोरेन ने अपने प्रत्याशियों को विजयी बनाकर इतना तो साबित कर ही दिया कि राजनीतिक दांवपेंच में वे सिद्धहस्त हो चुके हैं.
प्रतिपक्ष की कमजोर कड़ी की बात करें तो निर्णायक महतो मतदाताओं का मोहभंग और रघुबर राज में काडर की अक्खड़ अनदेखी और अपमान से रूष्ट काडर असंतोष पर काबू पाना अभी भी चुनौती बना हुआ है ।
भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व को रघुबर चूक का भान चुनाव में शिकस्त के बाद हुआ. रणनीति बदली और उसका परिणाम आजसू की एनडीए फोल्डर में वापसी और आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो के प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक सम्मान प्रदर्शन में परिलक्षित भी हुआ. वहीं गठबंधन की राजनीति के बावजूद हेमंत सोरेन ने दबाब को नकारने की अपनी नीति से शुरू से समझौता नहीं किया. याद कीजिये.. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का रांची जेल प्रवास. कांग्रेस के विधायक व वर्तमान कृषि मंत्री बादल पत्रलेख व अन्य की लालू प्रसाद को शासकीय पैरोल पर रिहाई की जबरदस्त पैरोकारी. महाधिवक्ता की नकारात्मक सलाह पर मुख्यमंत्री सोरेन ने सहयोगी दलों की पैरोकारी को बेहिचक नकार दिया.
12 वें मंत्रीपद और बोर्ड निगमों की चाहत में जारी तमाम बयानबाजी और उछल कूद के बावजूद हेमंत अपने मनोनुकूल चलते दिख रहे हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मूक सियासी दांव के आगे फिलहाल गठबंधन सहयोगी कांग्रेस बैकफुट पर दिख रही है. पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने विधि-व्यवस्था की दुरुस्तगी को लेकर आलाधिकारियों को भी समयबद्ध अल्टीमेटम दे अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है. अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का दिल्ली दरबार हालिया फजीहत से उबरने के लिये कौन सा फार्मूला परोसता है और हेमंत क्या रूख अपनाते हैं.हालिया सियासी घटनाक्रम के मद्देनजर मुख्यमंत्री की मौन सियासत को सियासी नादानी करार देना जल्दबाज़ी ही होगी.
दीपांकर राय के साथ पार्किंग विवाद में की गई मारपीट
रांची। गुरुवार की रात में महाधिवक्ता राजीव रंजन के जूनियर दीपांकर राय के साथ मारपीट की गई है। उक्त घटना नामकुम थाना क्षेत्र की बताई जा रही है।
जमीन दलाल राकेश सिंह और गुल्लू ने की मारपीट
घटना के बारे में बताया जा रहा है कि वह गुरुवार की रात दस बजे के करीब काम के बाद घर वापस जा रहे थे। अमेठिया नगर में गाड़ी खड़ी करने को लेकर हुए विवाद में जमीन कारोबारी राकेश सिंह और गुल्लू ने दीपांकर की जमकर पिटाई कर दी। इस घटना में उनको काफी चोटें आईं है। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
दोनों आरोपी जमीन दलाल गिरफ्तार
हालांकि पुलिस ने इस मामले के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दीपांकर राय का रिम्स में मेडिकल कराया गया है। गुरुवार को ही झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की कानून व्यवस्था को बदतर होने की बात कही थी। अदालत ने कहा था कि यह काफी दुखद है कि पहले पुलिस, वकील और अब जज पर हमला किया गया है।
जमीन दलाल बने कानून-व्यवस्था के लिए सिरदर्द
राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों की संख्या में जमीन दलाल उग आए हैं। राजधानी के आसपास का शायद ही कोई गांव या मोहल्ला होगा जहां कोई आपराधिक प्रवृत्ति का युवक जमीन दलाली नहीं करता हो । ये जमीन दलाल हत्या, अपहरण, ठगी आदि में तो शामिल हैं। चूंकि ये थाना, सीओ ऑफिस आदि को हर महीने बंधी-बंधाई रकम पहुंचाते हैं, लिहाजा इनके खिलाफ पीड़ित की शिकायत पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती ।
ग्रामीण एसपी नौशाद आलम पर भी लगा जमीन दलालों से सांठगांठ का आरोप
हाल ही में रांची के ग्रामीण एसपी नौशाद आलम पर जमीन दलालों के साथ मिलकर जमीन पर कब्ज़ा करने का आरोप लगा था । अब इनका मनोबल इतना बढ़ गया है कि ये न्यायपालिका पर भी हमले कर रहे हैं। पिछले एक साल में इन्होंने दो बड़े अधिवक्ताओं की हत्या कर दी और करीब आधा दर्जन अधिवक्ताओंको घायल कर दिया।
जिसकी जितनी जनसंख्या भारी, मिले उसे उतनी हिस्सेदारी-मांझी
गया। पूर्व सीएम और हिंदुस्तान अवामी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने जातीय जनगणना को लेकर कहा कि जिसकी जितनी जनसंख्या भारी,उसको उतनी मिले हिस्सेदारी। श्री मांझी आज गया में अपनी पार्टी के 6 वां स्थापना दिवस समारोह के मौके पर पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस मुद्दे पर कहा कि सिर्फ अनुसूचित जाति, जनजाति की संख्या की गिनती नही हो बल्कि सभी जातियों की जनगणना होनी चाहिए ताकि जनसंख्या के अनुसार लोगों को राजनैतिक समेत अन्य लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना की मांग वे वर्षों से करते आ रहे हैं।
हिंदू धर्म में जात-पात और छुआ-छूत
धर्मांतरण के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम हिन्दू हैं तो हमे भी समान दर्जा मिलनी चाहिए। पर यहां उच्च-नीच,जात-पात और छुआ छूत सब कुछ व्यप्त है। हम अम्बेडकरवादी हैं जिन्होंने बहुत प्रयास किया था भेदभाव मिटाने का लेकिन वे सफल नही हुये और अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया। बौद्ध धर्म मे जाति पाती नही है। जब तक जात पात का बंधन नही टूटेगा ऊंच नीच भी खत्म नही होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड में जो लोग ईसाई धर्म अपनाया है वे जीवन मे खूब तरक्की किया है। आईएएस और आईपीएस तक बने हैं लेकिन जो हिन्दू धर्म मे ही रह गए वे ज्यों के त्यों रह गए हैं।
मंदिर में घंटी बजाने से या मस्जिद में अल्लाह का शोर करने से कुछ नहीं होता
मांझी जी यहीं तक नही रुके बल्कि अपने भाषण में भी मंदिर और मस्जिद पर जमकर कटाछ किया। उन्होंने कहा कि कर्म ही पूजा है। लोगों को अपने कर्म पर विश्वास करना चाहिए। मंदिर में घंटी बजाने से कुछ नही होता है। लोग मस्जिद में जाकर अल्लाह को याद करते हैं जैसे कि अल्लाह बहरे हो गए हैं।
जनसैलाब बता रहा है कि जनता किसके साथ है- चिराग पासवान
गया: आशीर्वाद यात्रा के तहत गया पहुंचे चिराग पासवान का जिले के बेलागंज प्रखंड में कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान कार्यक्रम में अपार जनसमूह उमड़ पड़ा। बेलागंज प्रखंड में चिराग पासवान ने बाबा चौहरमल की प्रतिमा पर फूलमाला चढ़ाकर उन्हें नमन किया। साथ ही नेयामतपुर गांव स्थित समाजसेवी पंडित यदुनंदन शर्मा की मूर्ति पर भी श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
इस दौरान चिराग पासवान ने कहा कि आज गया जिले से आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत हुई है, जो नवादा होते हुए नालंदा जिला तक पहुंचेगी।
उन्होने कहा कि कार्यक्रम में अपार जनसैलाब उमड़ रहा है। यह दर्शाता है कि बिहार की जनता मौजूदा सरकार से ऊब चुकी है। अब जनता विकल्प की तलाश कर रही है। बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट होने का हमने जो नारा दिया था, उसे जो जन समर्थन मिल रहा है। यह दर्शाता है कि आने वाले समय में लोक जनशक्ति पार्टी को एक नई ऊर्जा मिलेगी।
स्वागत करने वालों में पार्टी के वरिष्ठ नेता अरविंद कुमार सिंह,गया जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह,कृष्णा यादव,पंकज सिंह,पुण्य शर्मा,बेचन चंद्रवंशी, ठाकुर सुमन सिंह,मीना देवी सहित अन्य नेतागण और भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।
मैट्रिक का रिजल्ट जारी होने के एक दिन बाद इंटरमीडिएट साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स का रिजल्ट भी झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से जारी कर दिया गया । शुक्रवार को दोपहर 4 बजे इंटरमीडिएट की रिजल्ट जारी हुई है ।
जिंदा रहा तो अगले साल फिर दूंगा परीक्षा- जगरनाथ महतो
11वीं की बोर्ड परीक्षा के आधार पर नतीजे शुक्रवार को जारी इंटरमीडिएट के रिजल्ट में तय मापदंड के अनुसार 11वीं की बोर्ड परीक्षा के आधार पर 80 फ़ीसदी अंक दिए गए हैं । वहीं 20 अंक स्कूल और कॉलेज द्वारा इंटरनल एसेसमेंट के आधार पर दिए गए हैं । जिन विषय में प्रायोगिक परीक्षा हुई है उनमें इंटरनल असेसमेंट की जगह प्रैक्टिकल परीक्षा के अंक दिए गए हैं । और इसी आधार पर इंटरमीडिएट का रिजल्ट तैयार किया गया है । इस वर्ष इंटरमीडिएट के तीनों संकाय मिलाकर कुल 3 लाख 31 हजार परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होने वाले थे । लेकिन परीक्षा रद्द होने के कारण इन्हें 11वीं को आधार बनाकर प्रमोट किया गया है ।
जिंदा रहा तो अगले साल फिर दूंगा परीक्षा- शिक्षामंत्री
शुक्रवार को जारी इंटरमीडिएट के रिजल्ट के अनुसार शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो का रिजल्ट नहीं आया है। शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि उन्होंने भी इंटरमीडिएट में नामांकन लिया था । लेकिन कोरोना महामारी के कारण वह ना तो परीक्षा की तैयारी कर सकें और ना ही उनका रिजल्ट का ही प्रकाशन इस बार हो सका । उन्होंने कहा कि पूरे विश्व के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था और वह खुद इस कोरोना के कारण काफी प्रभावित हुए हैं और इसी वजह से उनका यह साल बर्बाद हो गया । आने वाले समय में अगर जिंदा रहा तो वह इंटर पास जरूर करेंगे ।
बच्चे मेहनत करेंगे तो और बेहतर होगा रिजल्ट
परीक्षा परिणाम जारी करने जैक कार्यालय पहुंचे शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि जितनी मेहनत हमने रिजल्ट जारी करने के लिए किया इतनी मेहनत जैक बच्चों की पढ़ाई के लिए करेगा तो रिजल्ट और भी बेहतर होगा । स्कूल में बच्चों की पढ़ाई के लिए व्यवस्था सुदृढ़ हो इस पर फोकस करना होगा ।
बोकारो सेक्टर-4 के नेक्सा शोरूम हटाने गई टीम पर पथराव
बोकारो: शुक्रवार को बोकारो शहर के मध्य सेक्टर चार स्तिथ नेक्सा शोरूम को तोड़कर हटाने पहुँची बोकारों इस्पात कारखाने की नगरसेवा विभाग के सुरक्षाबलों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा । टीम जेसीबी लेकर शोरूम के रेलींग को तोड़ने का प्रयास किया तो नेक्सा शोरूम में कार्यरत कर्मी इसका विरोध करते हुए जेसीबी के सामने खड़ी हो गये । बोकारों इस्पात कारखाने की नगरसेवा विभाग के सुरक्षाबलों का विरोध करने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी थीं ।
सुरक्षाबलों के लाठीचार्ज में महिला सहित तीन नेक्सा कर्मचारी घायल
नेक्सा शोरूम हटाने का विरोध करने वालों में महिला कर्मी भी शामिल थी। विरोध को देखते हुए सुरक्षा विभाग में तैनात होमगार्ड जवानों ने भी उन्हें हटाने का प्रयास किया । इस बीच नेक्सा की महिला स्टाफ काजल कुमारी सहित नेक्सा के दो और कर्मी घायल हो गए । वहीं एक होमगार्ड का जवान भी घायल हुआ है।
महिला कर्मी के घायल होते ही भड़क गए लोग
सुरक्षाकर्मियों के हमले में घायल नेक्सा की महिला स्टाफ काजल कुमारी
महिलाकर्मी के घायल होते ही यहाँ की स्तिथि काबू से बाहर हो गई । वहाँ मौजूद लोगों ने जीसीबी पर पथराव करना शुरु कर दिया। स्तिथि को बिगड़ता देख जेसीबी चालक जेसीबी लेकर वापस निकल गया । इसके बाद अतिक्रमण हटाने आयी पूरी टीम भी बैरंग वापस लौट गई।
गौरतलब है कि बोकारो इस्पात विभाग शहर के ह्रदय स्थल पर बना भव्य शोरूम को ज़मीन अतिक्रमण कर बनाये जाने की बात कर मामला कोर्ट में भी गया । वहाँ से भी फैसला बोकारों इस्पात के पक्ष मे ही आया । आज की हुई घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नेक्सा के मैनेजर ने बताया कि वर्तमान में यह मामला हाई कोर्ट के डबल बेंच में पेंडिग है । ऐसे में बिना किसी नोटिस के बिलडिंग को तोड़ने पहुँच जाना तुगलगी फैसला नही तो और क्या है।
जम्मू-कश्मीर को उद्योग-व्यापार का बड़ा केंद्र बनाने को प्रयासरत मोदी सरकार
मोदी सरकार की नई योजना से देश भर के उद्यमियों के लिए खुले जम्मू-कश्मीर के द्वार
राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के सवाल के जवाब में केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विकास का मास्टरप्लान समझाया
रांची : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार अबतक देश के औद्योगिक-व्यापारिक नक्शे में हाशिये पर पड़े जम्मू-कश्मीर के विकास, उसे शेष भारत की औद्योगिक-व्यापारिक गतिविधियों से जोड़ने और राज्य में निवेश बढ़ाने का प्रयास कर रही है। जम्मू-कश्मीर में निवेश के लिए उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए भारत सरकार ने केंद्रीय क्षेत्र की नई योजना शुरू की है। राज्यसभा में सांसद श्री महेश पोद्दार के एक प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री सोम प्रकाश ने इस स्कीम का पूरा ब्यौरा दिया।
वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री सोम प्रकाश ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक विकास के लिए नई केंद्रीय क्षेत्र की स्कीम के तहत इकाईयों का पंजीकरण ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जायेगा। सरकार द्वारा विभागीय रूप से चलाये जा रहे उद्यमों को छोड़कर यह स्कीम ऐसे किसी भी इंडस्ट्रियल (मैन्युफैक्चरिंग) कंपनी या सर्विस सेक्टर के पात्र उद्यम के लिए लागू है, जो वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत पंजीकृत व्यावसायिक उद्यम है।
इस स्कीम के तहत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) प्रोजेक्ट्स के आवेदनों पर योग्यता के अनुसार विचार किया जायेगा। स्कीम का कुल फाइनेंसियल आउटले 28,400 करोड़ रुपये है और लगभग 78,000 व्यक्तियों के लिए रोजगार सृजन की संभावना है।
धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की मौत के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है और एक हफ्ते के अंदर मुख्य सचिव और डीजीपी के माध्यम से झारखंड सरकार से जांच की पूरी रिपोर्ट मांगी है । सीजेआई एनवी रमन्ना और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि अदालत परिसर के अंदर और बाहर न्यायिक अधिकारियों और वकीलों पर हमले के कई मामले सामने आए हैं, इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती ।
सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते के अंदर मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट मांगी है
वकीलों और न्यायिक अधिकारियों की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों और वकीलों की रक्षा करना राज्यों का कर्तव्य है । ताकि न्यायिक अधिकारी न्याय दिलाने का प्रयास करते हुए स्वतंत्र और निडर होकर काम करें । पीठ ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख पर वह सभी राज्यों को नोटिस जारी करने पर विचार करेगी । मामले पर सीजेआई ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना बुधवार को हुई जहां एडीजे को एक ऑटो रिक्शा ने टक्कर मार दी । इस वीभत्स घटना को समाचार पत्र और सोशल मीडिया में रिपोर्ट किया गया था । हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने गुरुवार को इस घटना पर संज्ञान लिया था ।
हाइकोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हम: चीफ जस्टिस
सीजेआई ने कहा कि जो निडर होकर काम करते हैं उनके लिए हमने स्वत: संज्ञान लेने का फैसला किया है । हालांकि हम जानते हैं कि झारखंड हाईकोर्ट पहले ही स्वत: संज्ञान ले चुका है । हम झारखंड के उच्च न्यायालय के समक्ष चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं ।
खाली रोड पर बेतरतीब कैसे चल रही थी ऑटो
इसी ऑटो से जस्टिस उत्तम आनंद को मारी थी टक्कर
बता दें कि उत्तम आनंद बुधवार सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे, तभी रणधीर वर्मा चौक के नज़दीक एक ऑटो ने उन्हें टक्कर मार दी थी । एक सीसीटीवी में पूरी घटना कैद हो गई है । पूरी रोड़ खाली थी, ऑटो पहले सीधे जा रहा था । जबकि उत्तम आनंद सड़क किनारे वॉक कर रहे थे । लेकिन अचानक सीधे सड़क पर जा रही ऑटो मुड़ी और वॉक कर रहे जज को टक्कर मार दी । इसके बाद ऑटो समेत चालक फरार हो गया । फुटेज मिलने के बाद पुलिस इस केस की जांच हत्या के एंगल से भी कर रही है ।
रंजय हत्याकांड की सुनवाई कर रहे थे उत्तम आनंद पूर्व विधायक संजीव सिंह के करीबी रंजय हत्याकांड केस में उत्तम आनंद सुनवाई कर रहे थे । पुलिस इस एंगल से भी मामले की जांच कर रही है । अभी तीन दिन पहले ही इस केस में उत्तम आनंद ने प्रदेश के इनामी शूटर अभिनव सिंह और होटवार जेल में बंद अमन सिंह से ताल्लुक रखने वाले शूटर रवि ठाकुर व आनंद वर्मा की जमानत का आवेदन खारिज कर दिया था । वहीं जज राजेश गुप्ता के घर पर हमला समेत ऐसे कई मामलों की सुनवाई कर रहे थे ।
आईआईएम रांची, भारत के सभी 20 आईआईएमों में पहला आईआईएम बन गया है जहां MBA-HRM, PGEXP, PHD के 2018-20 बैच के छात्रों को डिजिलॉकर की सुविधा दी जा रही है। यहां के छात्र इस सुविधा का लाभ उठाकर डिजिलॉकर पर डिजिटल रूप से अपने डॉक्यूमेंट्स रख सकते हैं। इसके लिए उन्हें डिजिलॉकर पर अपनी आईडी बनानी होगी और वो आईआईएम सर्च के इश्यू सेक्शन में क्लिक कर अपना सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं। यह जानकारी, झारखंड, एसईएमटी, सलाहकार पंकज प्रवीण ने दी।
आईआईएम रांची के बाद अब झारखंड के अन्य शैक्षणिक संस्थान भी डिजिलॉकर पर छात्रों के प्रमाण पत्र अपलोड करने की दिशा में कार्य कर रहें हैं। डिजिलॉकर का उद्देश्य नागरिकों के डिजिटल दस्तावेज़ों को प्रामाणिक डिजिटल दस्तावेज़ों तक पहुँच प्रदान करके देश को नागरिकों का ‘डिजिटल सशक्तिकरण’ करना है।
बता दें कि डिजिलॉकर सिस्टम में जारी किए गए दस्तावेजों को सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2016 के नियम 9ए के अनुसार मूल भौतिक दस्तावेजों के समान माना जाता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 27 अक्टूबर, 2016 को आयोजित अपनी बैठक में सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी के पैटर्न पर अकादमिक पुरस्कारों के डिजिटल डिपॉजिटरी को राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी (एनएडी) के रूप में स्थापित करने की मंजूरी दी है।
कक्षा 1 से 8 के पाठ्यक्रम में डायन कुप्रथा से जागरूक करने हेतु एक अध्याय जोड़ना काफी सहायक
रांची। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनीष रंजन ने कहा कि झारखण्ड को डायन हत्या एवं डायन कुप्रथा से मुक्त करने हेतु झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी द्वारा चलाई जा रही गरिमा परियोजना काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य के स्कूलों में कक्षा 1 से 8 के बच्चों के पाठ्यक्रम में इस कुप्रथा से जागरूक करने हेतु एक अध्याय जोड़ना काफी सहायक होगा। वे गरिमा परियोजना के प्रथम राज्य स्तरीय संयुक्त समीक्षा बैठक में उपस्थित एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के माध्यम से जुड़े विभिन्न विभाग के पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।
मनीष रंजन ने कहा कि गरिमा परियोजना सब के सम्मिलित सहयोग से ही जमीनी स्तर पर कार्य कर सकेगा। डायन हत्या से संबंधित मामलों में मुख्यता आपसी रंजिश, ओझा गुनी जैसी बातें सामने आती रही हैं। जमीन हथियाने के लिये भी इसका कई मामलों में इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने कहा कि मुंबई में भी इस तरह की परियोजना पर कार्य हुआ है और वहां से इस कुप्रथा का उन्मूलन हुआ। राज्य में भी कमोबेश वैसी ही परिस्थितियां हैं, लेकिन यहां भाषाई असमानताएं होने के कारण काफी दिक्कत आती रहीं है। उन्होंने कहा कि आम लोग समाचार पत्रों में ही इस तरह की खबरों से रूबरू होते हैं, लेकिन हमारे यहां जो फील्ड वर्कर हैं इस तरह की घटनाओं से खुद ही रूबरू होते हैं, जो बहुत ही मार्मिक होते हैं।
झारखण्ड राज्य आजीविकी संवर्धन सोसायटी की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी नैन्सी सहाय ने कहा कि गरिमा परियोजना अप्रैल 2020 से शुरू की गई थी। इसका लक्ष्य मार्च 2023 तक राज्य से पूर्णता डायन कुप्रथा का उन्मूलन करना है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य डायन प्रथा से प्रताड़ित महिलाओं को बचाना उनके लिये आय का स्त्रोत सृजित करना है। इसके लिये उन्हें लाइवलीहुड एक्टिविटी से जोड़ा जा रहा है एवं उनके क्षमता निर्माण का भी कार्य किया जा रहा है।
सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के निदेशक शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा जेएसएलपीएस के साथ मिलकर आईईसी एक्टिविटी करके आम लोगों तक इसके लिए जागरूकता फैलाने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही ग्रीवांस रजिस्ट्रेशन और उनके ससमय निरारकरण पर भी विभाग कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके साथ- साथ सोशल मीडिया, सक्सेस स्टोरी और डॉक्युमेंट्रीज के द्वारा भी लोगों को जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषाओं में नुक्कड़ नाटक का प्रयोजन कर, ब्रांड अंबेसडर को चुनकर जो इस तरह के मामलों के विरूद्द बोल सके, उन्हें शिक्षित करने का कार्य भी किया जा रहा है।
झारखंड में जब से महागठबंधन की सरकार बनी है तब से राज्य में अपराधियों का मनोबल काफी बढ़ गया है। क्या आम क्या खास सभी का जीना मुहाल हो गया है। राज्य निर्माण के बाद से ऐसी बदहाल विधि व्यवस्था कभी नहीं रही। ये बातें पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कही ।
झारखण्ड की कानून व्यवस्था पर न्यायपालिका की टिप्पणी के बाद राजनीति गर्म
नॉर्थ-ईस्ट के उग्रवाद प्रभावित जिलों से झारखंड की तुलना
उन्होने कहा कि पहली बार न्यायपालिका को अपराधी निशाना बना रहे हैं। धनबाद में जज उत्तम आनंद के साथ जो कुछ हुआ वो गहरे संदेह पैदा करता है। सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद तो यह मामला काफी गंभीर हो गया है। इस घटना से ठीक एक दिन पहले तमाड़ में अधिवक्ता मनोज झा की हत्या कर दी गयी थी। न्यायालय की यह टिप्पणी कि जब नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में उग्रवाद चरम पर था तब भी न्यायपालिका को टारगेट नहीं किया गया था। न्यायालय की यह टिप्पणी राज्य की विधि व्यवस्था को बताने के लिए काफी है। इसकी वजह है कि राज्य में एक अक्षम नेतृत्व है जो विधि व्यवस्था संभालने में पूरी तरह विफल है।
राजधानी में जमीन दलालों का तांडव
सुरक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण राजधानी रांची में अमूमन हर दिन हत्याएं हो रही है। जमीन माफियाओं का बोलबाला हो गया है। जब से महागठबंधन की सरकार बनी है अपराधियों व उग्रवादियों का तांडव पूरे प्रदेश में काफी बढ़ गया है। जज उत्तम आनंद, अधिवक्ता मनोज झा के साथ दारोगा रूपा तिर्की, सिदो कान्हू के वंशज रघुनाथ मुर्मू सहित कई मौतें राज्य की बदहाल विधि व्यवस्था की स्थिति बता रही है। इस सरकार के बनने के साथ ही चाईबासा में सात आदिवासियों की हत्या कर दी गयी थी। उग्रवाद रातों रात पूरे राज्य में फैल गया। राजभवन की दीवार तक पर पोस्टर चिपका दिया जाता है।
पिछले डेढ़ साल में कानून व्यवस्था का बंटाधार कर दिया
रघुवर दास ने कहा कि भाजपा सरकार में लोग रातों में सफर करते थे। उग्रवाद लगभग समाप्त होने की कगार पर था। हेमंत सोरेन सरकार के बनते ही नक्सलियों के भय से रात में आवागमन बंद हो गया। आज के समाचार पत्र हत्या, बलात्कार, डकैती जैसी घटनाओं से भरे रहते हैं। यह सरकार सिर्फ वसूली अभियान में लगी है जिसका खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ रहा है।
Delhi: कोरोना की तीसरी लहर का कहर दुनियाभर में जारी है। बीते दिन इसके 6.55 लाख नए मामलेे सामने आए हैं और 9 जून के बाद लगातार दूसरे दिन कोरोना से मरने वालों की संख्या 10 हजार के पार गई है। बीते 24 घंटे में 10,290 संक्रमितों की मौत हुई है। गुरुवार को 4.09 लाख लोगों ने इस बीमारी को मात भी दी है।
दुनिया में सबसे ज्यादा मामले अमेरिका में सामने आ रहे हैं। यहां पिछले 24 घंटे में 88,052 नए केस दर्ज हुए। यह तीसरी लहर में लगातार दूसरा दिन है जब अमेरिका में नए मामले 80 हजार के ज्यादा हुए हैं। इसके पहले अमेरिका में 13 फरवरी को 88,439 मामले सामने आए थे। गुरुवार को यहां 372 लोगों की कोरोना संक्रमण से जान गई है।
अमेरिकामेंवैक्सीनेशनकोलेकरसरकारसख्त बढ़ते मामलों के बीच अमेरिकी सरकार वैक्सीनेशन को लेकर सख्ती दिखाने लगी है। डेल्टा वैरिएंट के मामले में इजाफे के बीच सरकार ने ऐलान किया है कि मिलिट्री को छोड़कर बाकी सभी केंद्रीय कर्मचारियों को वैक्सीनेशन लेना होगा वरना उन्हें हफ्ते में दो बार टेस्ट करवाने, मास्क पहने रहने और अन्य पाबंदियों को मानना होगा। सरकार ने राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन को यह भी सुझाव दिया है कि वैक्सीन लेने वाले व्यक्ति को 100 डॉलर दिए जाएं जिससे और भी लोग टीका लगावाने के लिए प्रेरित हों।
इटलीमेंभीकोविडहेल्थपासअनिवार्य इटली ने भी तय किया है कि उन सभी लोगों पर पाबंदियां लगाई जाएंगी जिनके पास ‘ग्रीन पास’ नहीं होगा। यह ग्रीन पास उन लोगों को मिलेगा जिन्होंने वैक्सीन लगवाई है। इटली की नेशनल टूरिज्म एजेंसी के मुताबिक, 6 अगस्त से 12 साल से अधिक उम्र के लोगों को सार्वजनिक जगहों पर आने-जाने के लिए हेल्थ पास दिखाना जरूरी होगा।
ब्रिटेननेवैक्सीनकाएक्सपोर्टशुरूकिया ब्रिटेन ने गरीब देशों को कोरोनावायरस वैक्सीन के डोज भेजने शुरू कर दिए हैं। इस हफ्ते 90 लाख डोज भेजी जाएंगी। इस इनिशिएटिव के तहत ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की सप्लाई की जा रही है। यहां पर करीब 71% आबादी को दोनों टीके लग चुके हैं। सरकार ने तय किया है कि फुली वैक्सीनेटिड लोगों को 16 अगस्त से क्वारैंटाइन नहीं होना पड़ेगा। ब्रिटेन में पिछले 24 घंटों में 31,117 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, जबकि 85 लोगों की इससे मौत हुई है।
इजरायलमें 60 सालसेअधिकउम्रवालोंकोलगेगाबूस्टरडोज इजरायल में 60 साल से ऊपर के लोगों को कोरोना वैक्सीन का तीसरा डोज दिया जाएगा। अगले हफ्ते से यह प्रॉसेस शुरू होगी। इजरायली स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी है। इससे पहले प्रधानमंत्री नेफ्टाली बेनेट ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें उन्होंने बुजुर्गों को तीसरे डोज के प्रस्ताव का समर्थन किया। यहां गुरुवार को 1,823 मामले सामने आए, जबकि 4 लोगों की जान गई।
मिडिलईस्टमेंडेल्टावैरिएंटकीचौथीलहर WHO ने कहा है कि डेल्टा वैरिएंट के चलते मिडिल ईस्ट देशों में कोरोनवायरय की चौथी लहर शुरू हो गई है। इस क्षेत्र के 22 में से 15 देशों में डेल्टा वैरिएंट के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। इन देशों में वैक्सीनेशन की दर कम होना भी कोरोना संक्रमण के फैलने की एक बड़ी वजह है। दो महीने पहले के मुकाबले पिछले महीने कोरोना के मामले 55% और संक्रमण से मौतें 15% अधिक दर्ज की गई हैं। यहां हर हफ्ते 3.10 लाख मामले और 3,500 मौतें दर्ज हुई हैं।
फ्रांसमें 50% आबादीकोवैक्सीनकेदोनोंडोजलगे कोविड हेल्थ पास लागू करने वाले देशों में फ्रांस भी शामिल है। यहां पर 21 जुलाई से सिनेमा, म्यूजियम और ऐसी सांस्कृतिक धरोहरों को देखने के लिए कोविड पास दिखना अनिवार्य किया जा चुका है जहां 50 से ज्यादा लोग एकत्र हों। कैफे, रेस्टोरेंट, फ्लाइट्स और इंटर-सिटी ट्रेन में सफर करने के लिए 9 अगस्त से कोविड पास अनिवार्य होगा। फ्रांस कोरोना मामलों में दुनिया का पांचवां सबसे प्रभावित देश है। यहां गुरुवार को 25,190 मामले सामने आए, जबकि 29 लोगों की इससे जान गई।
दुनियामेंअबतक 19.7 करोड़मामले दुनियाभर में अब तक कोरोनावायरस के 19 करोड़ 73 लाख मामले दर्ज हुए हैं। इससे 42 लाख 13 हजार लोगों ने जान गंवाई है, जबकि 17 करोड़ 82 लाख लोगों ने इस बीमारी को मात भी दी है। दुनिया में अभी कोरोना के 1 करोड़ 46 लाख एक्टिव केस हैं। इसमें से 87,074 क्रिटिकल हैं।
Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह कोविड-19 टीकाकरण अभियान के सिलसिले में कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना वाले पोस्टर चिपकाने को लेकर दर्ज एफआईआर किसी तीसरे पक्ष के कहने पर रद्द नहीं कर सकता क्योंकि यह फौजदारी कानून में एक गलत उदाहरण स्थापित करेगा।
जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस एम.आर. शाह की बेंच ने याचिकाकर्ता वकील प्रदीप कुमार यादव को इसे वापस लेने की अनुमति दे दी, लेकिन स्पष्ट किया कि याचिका का खारिज किया जाना एफआईआर रद्द करने के लिए अदालत का रुख करने वाले वास्तविक पीड़ित व्यक्ति की राह में आड़े नहीं आएगा।
बेंच ने कहा कि हम तीसरे पक्ष के कहने पर एफआईआर रद्द नहीं कर सकते। यह सिर्फ अपवादस्वरूप मामलों में किया जा सकता है जैसे कि याचिकाकर्ता अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकता हो या उसके माता-पिता यहां हों, लेकिन किसी तीसरे पक्ष के कहने पर नहीं। यह फौजदारी कानून में एक गलत उदाहरण स्थापित करेगा।
यादव ने कहा कि उन्होंने मामले का ब्योरा दाखिल किया है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए कहा था। यादव ने अपनी जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी थी, जिसकी कोर्ट ने अनुमति दे दी है। शीर्ष अदालत ने 19 जुलाई को यादव को कथित तौर पर पोस्टर चिपकाने के लिए दर्ज मामलों और गिरफ्तार किए गए लोगों की सूची उसके संज्ञान में लाने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह केंद्र की टीकाकरण नीति की आलोचना करने वाले पोस्टर चिपकाने को लेकर एफआईआर नहीं दर्ज करने का पुलिस को आदेश नहीं दे सकता है।
यादव ने याचिका दायर कर कोविड-19 टीकाकरण अभियान के सिलसिले में कथित तौर पर पीएम मोदी की आलोचना करने वाले पोस्टर चिपकाने को लेकर दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को टीकाकरण अभियान से जुड़े पोस्टर/ विज्ञापन/विवरणिका आदि के सिलसिले में कोई और एफआईआर दर्ज नहीं करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि राजधानी में चिपकाए गए पोस्टरों के सिलसिले में कम से कम 25 एफआईआर दर्ज की गईं और 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया।