Tuesday 7th of July 2026 02:54:58 AM
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स्वतंत्रता दिवस पर विशेष : अपनी आजादी को हम हरगिज भुला सकते नहीं…

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उज्ज्वल दुनिया, दिवाकर पाठक(कंडाबेर), केरेडारी(हजारीबाग)। 15 अगस्त 1947 से हम अनवरत आजादी की वर्षगांठ मनाते आ रहे हैं।

जरा गौर करें, जिन मां के कर्म वीरों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

क्या उन लोगों ने कभी सोचा था कि हमारा देश कभी आतंकवाद, नक्सलवाद, स्वार्थ वाद और सत्तावाद की अग्नि में हवन होने को मजबूर होंगे।

विकास का हाल देखें, तो कई गांवों में न तो अच्छी सड़क है और न ही बिजली। आज भी कई गांवों के लोग कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं। उनका जान माल हमेशा खतरे में बना रहता है।

हालांकि प्रधानमंत्री आवास योजना ने लोगों की कमी को दूर किया है और सरकार का लक्ष्य 2022 तक सभी को पक्का मकान देने का है।

सरकार का यह लक्ष्य बिल्कुल सराहनीय है।

अब हम यहां विकास की योजना के गणित को प्रस्तुत करते हैं। आवास, शौचालय सहित कोई भी जनकल्याणार्थ योजना हो, यह बिचौलियों से संक्रमित हो जाता है।

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी कहा था कि केंद्र से विकास के नाम पर चला पैसा बिचौलियों से होते हुए कुछ अंश मात्र ही जनता तक पहुंच पाता है।

गांव की योजनाएं ग्राम प्रधान के अंतर्गत कार्य करती हैं। यहां भी बड़ा उलटफेर है।

जिसके पास वास्तव में रहने लायक मकान नहीं है, उसे आवास का लाभ नहीं मिल पाता। बल्कि जो सर्व संपन्न लोग होते हैं, उन्हें इसका लाभ प्राप्त होता है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का निर्माण कराया गया, पर आज भी लोग खुले में शौच जाते हैं।

इसमें कोई संशय नहीं कि मोदी की सरकार ने देश को समृद्ध और शक्तिशाली बनाया।

लोकप्रियता की लकीरों के बीच देश का नाम विश्व शिखर पर प्रस्तुत किया।

सारांश यह है कि हमें संगठित होकर असामाजिक तत्वों का बहिष्कार करना होगा और विकास के मार्ग पर अग्रसर होते हुए स्वदेश को विश्व गुरु के स्थान पर पुन: स्थापित करना ही जीवन की सार्थक युक्ति होगी।

हम सच्चे अर्थों में आजाद भारत के अविचल पथ की ओर अग्रसर रहेंगे, तभी आजादी का गायन सफल होगा।

इसलिए समय के साथ स्वच्छ सोच को विकसित करें, तभी जीवन ज्योति का अमरपुंज प्रवाहित होता रहेगा।

हमें यह अवश्य याद रखना चाहिए कि आजादी का अलख जगाने वाले हमारे राष्ट्रीय प्रणेता सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, खुदीराम बोस, चंद्रशेखर आजाद, बाल गंगाधर तिलक, वीर शिवाजी, महाराणा प्रताप और महारानी लक्ष्मीबाई जैसे वीर सपूतों और वीरांगनाओं ने हमारी आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

हमने हाना नहीं सीखा और इसलिए हम उनके सपनों के भारत को प्रदूषित होने से बचाएं।

हम सदैव उनके ऋणी हैं। उनके खून का कतरा- कतरा कह रहा है उठो! जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

झारखंड से छपने वाली अधिकांश लघु पत्रिकाएँ बंद होने के कगार पर, डॉ. अजय कुमार ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

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कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जमशेदपुर के पूर्व सांसद,आईपीएस डॉ अजय कुमार ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर लघु पत्रकारिता के लिए आर्थिक मजबूती की मांग की है।

कोरोना और लॉकडाउनके कारण 80% लघु पत्रिकाएँ बंद हुईं 

डाॅ.अजय कुमार ने मुख्यमंत्री को एक सुझाव पत्र में कहा कि कोरोनाकाल में राज्य के विभिन्न जिलों से प्रकाशित स्थानीय लघु पत्र-पत्रिकाओं की प्रकाशन प्रक्रिया लगभग बाधित हो चुकी है। झारखंड से प्रकाशित पत्रिकाओं में 80% प्रकाशक दूसरे प्रिंटिंग प्रेस पर निर्भर हैं जो कि कोरोनाकाल में संपूर्ण व आंशिक लाॅकडाऊन में बंद रहें ।  इस परिस्थिति में झारखंड की 100 से भी ज्यादा पत्रिकायें बंदी के कगार पर जा चुकी हैं ।इन पत्र-पत्रिकाओं से लघु पत्रकारिता के क्षेत्र में 1000 से ज्यादा पत्रकार रोजगार पाते हैं ।इसलिए उनके परिवारों की सुरक्षा और आर्थिक संपन्नता के लिए सरकार को सोचने की जरूरत है ।

डॉ. अजय कुमार द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा गया पत्र
डॉ. अजय कुमार द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा गया पत्र

उन्होंने लघु पत्रकारिता के 1000 पत्रकार साथियों के रोजगार का संकट बताते हुए छोटे और मझोले हाऊस के समर्थन में खुलकर पत्रकारों के दर्द को अपने पत्र में लिखा है.उन्होने इस सुझाव पत्र में लघु समाचार पत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस संबंध में सरकार और सूचना-जनसंपर्क विभाग को 5 सूत्री सुझाव दिएं हैं-

(1)झारखंड में 80% लघु पत्रिकायें कोरोनाकाल में बंदी के कगार पर हैं अतः उन सभी के प्रकाशकों पर विशेष कृपा कर प्रत्येक वर्ष 12 महिने में 12 विज्ञापन दिएं जाएं,

(2)लघु पत्रिकाओं को दी जाने वाली विज्ञापन की राशि को बढ़ाकर दोगुना किया जाए,

(3)वर्ष 2021 के कोरोनाकाल में मासिक पत्रिकाओं का निरंतर प्रकाशन होने की शर्त पर लाॅकडाऊन के दौरान प्रिंटिंग प्रेस की बंदी पर कुछ मासिक/पाक्षिक/साप्ताहिक अंकों में छूट दे दी जाए,

(4)मासिक और त्रैमासिक पत्रिकाओं के पत्रकार साथियों को भी एक्रिडेशन कार्ड की सुविधाएं जल्द दी जाएं,

(5)प्रत्येक प्रमंडल से एक्रिडेशन कमिटी में लघु पत्र-पत्रिकाओं के पत्रकार साथियों को भी स्थान देकर पत्रकारहित में ऐतिहासिक पहल की शुरूआत हो ।

स्वतंत्रता दिवस पर विशेष : आजादी के बाद कितना क्या बदला हमारा देश, जरा सोचिए…

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उज्ज्वल दुनिया, कुमार गौरव(हजारीबाग)। इंडिया 1947 में आजाद हुई यानी हम इंडियंस को अपनी व्यवस्था बनाने का अधिकार हम सभी को मिला, जबकि मानसिकता है कि गोरे चले गए आजादी हो गई।

1947 की इंडिया की अवाम अपनी राजनेताओं पर यह निश्चित हो गई कि यह राजनेता प्यारा भारत, सुंदर भारत बनाएंगे’ लेकिन वर्ष 2021 और 1947 के बीच तकरीबन 74 साल बीत गए, मगर हम भारतीय उसी मुहाने पर खड़े हैं, जो स्थिति 1947 में थी।

गुलाम इंडिया में मजदूर कल-कारखानों में शोषण का शिकार होते थे।

युवाओं के पास शिक्षा का अभाव था। किसान जो अपनी मेहनत और लगन से अनाज का भंडार खड़ा करते थे, यहां तक कि किसान अनाज उत्पादन में एक परिवार की तरह उसकी सेवा कर अनाज उपजाते थे।

लेकिन वे उनके निवाले नहीं बना करते थे। ऐसे अनेक उदाहरण हैं अंग्रेजों के शोषण के, जिसकी गिनती करना मूर्खता होगी।

मगर आज जरा सोचिए कि इंडिया उस हालात से बाहर निकल पाई है जो 1947 में थी।

आज भी मजदूर दो वक्त की रोटी से ऊपर नहीं सोच सकते, छात्र मंहगी और व्यावसायिक शिक्षा से दूर हैं और किसानों के हाथ आज भी इंडिया के अनाज के गोदाम को भर्ती हैं, मगर उसके नसीब में वही सरकार की सब्सिडी वाले अनाज हैं।

वह भी भ्रष्टाचार के मकड़जाल में फंसा बेचारा किन-किन का पेट भरे।

स्थिति वहीं की वहीं, तब आजादी क्या हुई या हम युवा समझें कि आजादी मतलब सवालाख गोरे यहां से चले गए।

1947 में भी इंडिया शोषण, भ्रष्टाचार और गरीबी से कमजोर थी। आज की इंडिया भी इस बीमारी से पीड़ित है।

कल भी सरकार एवं समाज के बीच गहरी खाई थी, आज भी सरकार इंडिया की समाज से कोसों दूर है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

औरंगाबाद से झारखंड सीमा के चोरदाहा तक बनेगी 6 लेन सड़क, टेंडर जारी

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नवंबर में शुरु होगा 6 लेन का निर्माण कार्य
नवंबर में शुरु होगा 6 लेन का निर्माण कार्य

बिहार के औरंगाबाद जिले से लेकर झारखण्ड सीमा के चोरदाहा तक 6 लेन सड़क के लिए शुक्रवार को टेंडर जारी कर दिया गया है। दीपावली के बाद सड़क निर्माण का कार्य शुरु हो जाएगा । कार्य को पूरा होने में दो साल का वक्त लगने की उम्मीद है। यह बिहार का पहला 6 लेन सड़क होगा ।

80 किलोमीटर सड़क बनाने में 1400 करोड़ रुपये होंगे खर्च

एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी चंदन वत्स ने बताया कि औरंगाबाद से चोरडाहा तक की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। दो पैकेज में इस सड़क के निर्माण का टेंडर जारी कर दिया गया है। यह सड़क अभी फोर लेन है। बिहार की यह पहली सड़क है जिसे छह लेन किया जाएगा। इसके निर्माण पर लगभग 1400 करोड़ खर्च होंगे। दो महीने में इस सड़क के टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर काम अवार्ड कर दिया जाएगा।

वाराणसी से औरंगाबाद 6 लेन का टेंडर जल्द

वहीं दूसरी ओर लंबे समय से अटकी वाराणसी-औरंगाबाद सड़क के निर्माण कार्य की सभी बाधाएं लगभग दूर हो गई हैं। यह सड़क भी अभी फोर लेन है, जिसे छह लेन किया जाना है। 192 किलोमीटर लंबी इस सड़क को फोर लेन से छह लेन करने का कार्य जल्द ही शुरू होगा। इसके निर्माण पर लगभग तीन हजार करोड़ खर्च होगा। इन दोनों सड़कों के निर्माण से बिहार का झारखंड और उत्तरप्रदेश से आवागमन आसान हो जाएगा।

भारत सहित 11 देशों से पाकिस्तान ने हटाया यात्रा प्रतिबंध

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इस्लामाबाद, एएनआइ। पाकिस्तान ने शुक्रवार को भारत सहित 11 देशों से यात्रा प्रतिबंध हटा लिया है। देश के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएए) ने अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा सूची में संशोधन कर श्रेणी सी से 11 देशों को हटा दिया है। एआरवाइ न्यूज ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी दी है।

एआरवाइ न्यूज ने आगे बताया कि प्राधिकरण ने भारत, अर्जेंटीना, भूटान, मालदीव और ब्राजील सहित 11 देशों से आने वाले यात्रियों पर यात्रा प्रतिबंध हटा दिया है। हालांकि, बांग्लादेश, ईरान, इराक, दक्षिण अफ्रीका, नेपाल उन 11 देशों में शामिल हैं जो अभी भी श्रेणी सी में सूचीबद्ध हैं।

इसके अलावा प्राधिकरण ने पाकिस्तानी नागरिकों को श्रेणी सी देशों से घर वापसी की भी अनुमति दे दी है, लेकिन उन्हें कोरोना टेस्ट अवश्य करवाना होगा। वहीं, कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए प्राधिकरण ने बिना टीकाकरण वाले लोगों के लिए घरेलू हवाई यात्रा पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। जून में पाकिस्तान के नेशनल कमांड एंड ऑपरेशन सेंटर ने भारत समेत 26 देशों से आने वाले यात्रियों पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया था।

पति पत्नी के बीच मोबाइल को लेकर विवाद, विवाहिता और उसके दो बच्चे का शव कुएं से बरामद

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कोडरमा। तिलैया थाना क्षेत्र के करमा नीचे टोला में विवाहिता 26 वर्षीय संजू देवी और उसके दो बच्चे का शव कुएं से बरामद किया गया है। महिला अपने 3 वर्षीय बच्ची अंकिता और 6 माह के बेटे आकाश के साथ शुक्रवार से लापता थी। इधर परिजन काफी खोजबीन कर रहे थे, लेकिन शनिवार शाम महिला का शव घर के पास कुएं में तैरता हुआ मिला। बहरहाल स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। फिलहाल मौके पर पहुंचकर पुलिस जांच में जुट गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक महिला का अपने पति के साथ मोबाइल को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसके बाद महिला घरवालों को बिना कुछ बताए अपने दोनों बच्चों के साथ घर से निकल गई और शनिवार शाम घर से सटे हुए से महिला और दोनों बच्चों का शव बरामद हुआ है। फिलहाल इस मामले की जांच को लेकर एसडीपीओ अशोक कुमार और थाना प्रभारी द्वारिका राम घटनास्थल पर पहुंचे हुए हैं और मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल इस मामले को लेकर मृतक महिला के पति पिंटू दास को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

अपनी बेटियों को भी आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें: राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द

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नई दिल्ली, एजेंसी। 75वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!। इस वर्ष के स्वाधीनता दिवस का विशेष महत्व है क्योंकि इसी वर्ष से हम सब अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं।

ओलंपिक खेलों में भारत ने 121वर्षों में सबसे अधिक पदक जीतने का इतिहास रचा

कई पीढ़ियों के ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से हमारी आज़ादी का सपना साकार हुआ था। उन सभी ने त्याग व बलिदान के अनूठे उदाहरण प्रस्तुत किए। मैं उन सभी अमर सेनानियों की पावन स्मृति को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। उन्होंने कहा कि टोक्योओलंपिक में हमारे खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया है। भारत ने ओलंपिक खेलों में अपनी भागीदारी की 121वर्षों में सबसे अधिक पदक जीतने का इतिहास रचा है। मैं हर माता-पिता से आग्रह करता हूं कि वे होनहार बेटियों के परिवारों से शिक्षा लें और अपनी बेटियों को भी आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें।

उन्होंने कहा कि हमारे डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य कर्मियों, प्रशासकों और अन्य कोरोना योद्धाओं के प्रयासों से कोरोना की दूसरी लहर पर काबू पाया जा रहा है। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि वे प्रोटोकॉल के अनुरूप जल्दी से जल्दी वैक्सीन लगवा लें और दूसरों को भी प्रेरित करें। इस समय वैक्सीन हम सबके लिए विज्ञान द्वारा सुलभ कराया गया सर्वोत्तम सुरक्षा कवच है। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि वे प्रोटोकॉल के अनुरूप जल्दी से जल्दी वैक्सीन लगवा लें।

ओलिंपिक विजेताओं से राष्ट्रपति ने कहा

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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में 'हाई टी' पर टोक्यो ओलंपिक 2020 के भारतीय दल की मेजबानी की
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने ‘हाई टी’ पर टोक्यो ओलंपिक 2020 के भारतीय दल की मेजबानी की

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में भारतीय ओलंपिक दल की चाय पर मेजबानी की. राष्ट्रपति ने सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं बल्कि उनके साथ टोक्यो गए उनके कोच, सपोर्ट स्टाफ को भी आमंत्रित किया था. इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा, ‘पूरे देश को हमारे ओलंपियनों पर गर्व है कि उन्होंने देश को गौरवान्वित किया है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, ‘मुझे बेहद खुशी है कि आपने जीत को विनम्रता से लिया और हार को गरिमा के साथ स्वीकार किया. मैं आपको बताना चाहता हूं कि 130 करोड़ भारतीय आपकी सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे थे और उत्साह के साथ आपका समर्थन कर रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘हमें अपनी बेटियों पर विशेष रूप से गर्व है, जिन्होंने कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद विश्वस्तरीय प्रदर्शन किया.

कोरोना महामारी के बीच आपने हमें जश्न मनाने का एक मौका दिया. जब आप किसी खेल में भाग लेते हैं तो कभी आप जीतते हैं और कभी हारते हैं लेकिन हर बार आप एक नई चीज सीखते हैं.

हाल ही में संपन्न टोक्यो ओलंपिक में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए भारत ने एक स्वर्ण पदक सहित सात पदक जीते हैं. इस बार भारत के लिए ओलंपिक काफी खास रहा. भारत ने इस बार ओलंपिक इतिहास में सबसे ज्यादा मेडल अपने नाम किए. इस बार ओलंपिक में नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास ही रच दिया. वहीं, भारत ने टोक्यो ओलंपिक में 7 पदक जीते, जिसमें एक गोल्ड, दो रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं.

वहीं, दिल्ली में राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ मुलाकात से पहले सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों ने टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता पहलवान बजरंग पुनिया के साथ सेल्फी ली.

धनबादः 27 लाख रुपये गबन मामले में शिक्षा मंत्री को नहीं मिली अदालत से राहत

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16 अगस्त को गिरफ्तारी वारंट जारी होने पर कोर्ट करेगा फैसला
16 अगस्त को गिरफ्तारी वारंट जारी होने पर कोर्ट करेगा फैसला

धनबाद की एक कोर्ट ने झारखण्ड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो को गबन के एक केस में कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया । मंत्री के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी होने को लेकर 16 अगस्त को अदालत अपना फैसदा सुनाएगी। वहीं गबन के मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी । मंत्री की ओर से धनबाद कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई गई थी। अदालत ने शुक्रवार को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

क्या है पूरा मामला ?

ये पूरा मामला 2017 का है । झारखंड कामर्स इंटर कालेज, डुमरी के प्रभारी प्राचार्य डेगलाल राम ने नौ फरवरी, 2017 को कालेज के अध्यक्ष जगरनाथ महतो, फूलचंद महतो, रामेश्वर प्रसाद यादव, रवींद्र कुमार सिंह, प्रताप कुमार यादव, मोती लाल महतो और राजेंद्र महतो के विरुद्ध 27 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाते हुए शिकायतवाद दर्ज कराया था।

2009 में भी जगरनाथ महतो ने करोड़ों की जमीन धोखाघड़ी कर लिखवा लिया – अधिवक्ता

धनबाद एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अखिलेश कुमार की अदालत में मंत्री की ओर से वरीय अधिवक्ता बबलू पांडेय ने दलील देते हुए कहा कि मामला दीवानी प्रकृति का है। इस पर शिकायतकर्ता के अधिवक्ता अमित सिन्हा और बादल पासवान ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि मामला गबन जैसे गंभीर अपराध का है।

तब अधिवक्ता ने कहा- इससे पहले भी मंत्री द्वारा वर्ष 2009 में करोड़ों रुपये की जमीन की रजिस्ट्री कर धोखाधड़ी की गई है। इसकी शिकायत राज्यपाल व मुख्यमंत्री के साथ-साथ झारखंड के मुख्य न्यायाधीश से भी की गई थी। शिकायत की कापी भी अदालत में दाखिल की गई।

डिग्री की नहीं, हमेशा ज्ञान की कद्र होती है

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आदिवासी दिवस के अवसर पर  राज भवन में एक उद्यान का नामकरण फूलो-झानो के नाम पर  किया गया।
आदिवासी दिवस पर राज भवन में एक उद्यान का नामकरण फूलो-झानो के नाम पर किया गया- राज्यपाल

हमारे शिक्षण संस्थान सिर्फ डिग्री अथवा उपाधि ही प्रदान न करें क्योंकि सिर्फ उपाधि अर्जित करने का कोई औचित्य नहीं है और ज्ञान की ही सिर्फ कद्र होती है। उच्च शिक्षा के विकास के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षण संस्थानों में आधारभूत संरचना उपलब्ध हो। साथ ही कक्षायें और शैक्षणिक सत्र नियमित हो, उन्नत पुस्तकालय हो। अनुसंधान के क्षेत्र में भी कार्य हो। ये बातें झारखण्ड के राज्यपाल रमेश बैंस ने दुमका के सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही ।

सफलता प्राप्त करने के लिए अच्छा इंसान होना जरुरी

राज्यपाल ने कहा कि छात्र अपने जीवन में अनुशासन लाएं क्योंकि अनुशासन के बिना जीवन में सफलता नहीं मिल सकती। उन्होने कहा कि कुछ बनें या न बनें, लेकिन अच्छा इंसान जरुर बनें। क्योंकि अच्छा इंसान ही अंत में सफल हो सकता है। बुरे लोगों की सफलता क्षणिक होती है। वह पानी के बुलबुले की तरह है जो बाहर से देखने में भले रंग-बिरंगी लगे लेकिन उसकी आयु बहुत कम है ।

शिक्षण संस्थान का काम संसाधन और पढ़ने का माहौल बनाकर देना

राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में कहा कि संस्थान अपने यहां अनुशासन बनाए रखे, छात्र-छात्राओं को संसाधन मुहैया कराए और सकारात्मक माहौल रखे। बाकि का काम विद्यार्थि खुद कर लेंगे। उन्होने कहा कि ये दौर रिसर्च का है। जितनी नई-नई चिजों की खोज करेंगे उतना ही सफल होंगे। रिसर्च एंड जेवलपमेंट के क्षेत्र में जो देश आगे होगा, पूरी दुनिया में उसी देश का डंका बजेगा।

झारखण्ड में बेरोजगारी , नियुक्ति वर्ष और नई नियुक्ति नियमावली

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आप रांची, जमशेदपुर बोकारो और धनबाद शहर के अलावा झारखण्ड में कहीं भी चले जाएं, वहां के नौजवानों से बात करें…वहां सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी है । आप सोशल मीडिया पर देख लें, महीने में एक-दो बार ‘झारखण्ड मांगे रोजगार’ ट्विटर पर ट्रेंड करता ही है। वैसे भी झारखण्ड में बोरेजगारी दर आज भी देश में तीसरे नंबर पर है। मतलब की हम जनसंख्या के अनुपात में बेरोजगारी के मामले में टॉप तीन में हैं। यह एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे किसी भी राज्य के लोग गर्व महसूस नहीं करेंगे ।

हर साल पांच लाख रोजगार की बात पुरानी हो गई, अब नियुक्ति वर्ष का ऑडिट हो
हर साल पांच लाख रोजगार की बात पुरानी हो गई, अब नियुक्ति वर्ष का ऑडिट हो

नियुक्ति वर्ष के 12 में से 8 महीने में क्या हुआ ?

इसका एक लाइन में जवाब है “जीरो….कुछ नहीं हुआ”…सिर्फ नियुक्ति वर्ष की घोषणा कर देने से झारखण्ड में बेरोजगारी कम हो जाती तो फिर रघुवर दास ही क्या बुरे थे । वे तो ताबड़तोड़ घोषणायें करते थे, और उनमें से कुछ पूरा भी । लेकिन हेमंत बाबू तो एक बार में ही इतना हैवी दे देते हैं कि बाद में उसे समेटने में बहुत दिक्कत होती है। हर साल पांच लाख नौकरियों की बात अभी पूरी तरह समेटा भी नहीं गया था कि नियुक्ति वर्ष वाला बाउंसर मार दिया । हालात ये है कि इस साल लाखों में क्या हजारों में भी नौकरियां नहीं मिली हैं…या सैंकड़ों में भी नहीं। मतलब सीएम की घोषणा को पहले आठ माह में जीरो अंक मिलते हैं।

क्या सचमुच रोजगार देने के प्रति गंभीर है हेमन्त सरकार
क्या सचमुच रोजगार देने के प्रति गंभीर है हेमन्त सरकार ?

न नियुक्ति हुई है, न होने की संभावना है

मैं नेता नहीं, इसलिए आपको झूठी उम्मीद नहीं दूंगा । इस साल न नियुक्ति हुुई है, न होने की कोई उम्मीद है। इसकी वजह बिल्कुल साफ है। अभी तो सरकार की डोमेसाइल नीति ही नहीं बनी, इसके बाद इस सरकार की नियुक्ति नियमावली पर ही विवाद है। जेपीएससी का मामला भी कोर्ट में चला गया है। कुल मिलाकर मह कर मट्ठा बना दिया है . एक भी नौकरी न देने का पूरा इंतजाम करीब-करीब पूरा है।

फिर सरकार कर क्या रही है ?

जवाब है……”विशुद्ध राजनीति”…

सरकार को पता है कि उसकी नियुक्ति नियमावली कानून के कटघरें में कहीं नहीं टिकेगी । जेपीएससी का मामला सुप्रीम कोर्ट तक चला गया है…1932 का खतियान यहां लागू हो ही नहीं सकता…अगर किसी से लागू करने की कोशिश भी की तो सामाजिक तनाव जितना पैदा हो, लेकिन कोर्ट में ये टिक नहीं पाएगा…

लेकिन झामुमो-कांग्रेस की सरकार ने अपने वोटरों को मैसेज दे दिया । देखो, हमने तो आदिवासी-मूलवासी के लिए क्या- क्या नहीं किया। अब दीकू पार्टियां विरोध कर रही हैं तो हम क्या करें ? इसलिए इन दलों के खिलाफ आदिवासी-ईसाई और मुसलमानों एक हो….यहां तर्क और फैक्ट्स से ज्यादा भावनात्मक दोहन का सवाल है । बाकी अगले तीन साल इंतजार कीजिए, शायद कुछ बेरोजगारी कम हो जाय….

 

Scrape Policy: दो साल बाद आप सड़कों पर नहीं चला सकेंगे 15 साल पुरानी गाड़ियां

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2023 के बाद सड़कों पर 15 साल पुरानी गाड़ियां नहीं चला सकेंगे
2023 के बाद सड़कों पर 15 साल पुरानी गाड़ियां नहीं चला सकेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार (13 अगस्त 2021) को नई Scrape Policy देश भर में लागू करने की घोषणा कर दी। गुजरात इनवेस्टर समिट, जिसके दौरान प्रधानमंत्री ने इसकी घोषणा की, केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे । केन्द्र सरकार ने नई स्क्रैप पॉलिसी लाने की घोषणा इस बार के बजट में ही कर दी थी, अब इसे देश भर में लागू कर दिया गया है। स्क्रैपिंग पॉलिसी लॉन्च करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अनफिट वाहनों को वैज्ञानिक तरीके से हटाने में ये नीति बड़ी भूमिका निभाएगी ।

नई स्क्रैप पॉलिसी लागू करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा

“सबसे पहला लाभ ये होगा कि पुरानी गाड़ी को स्क्रैप करने पर एक सर्टिफिकेट मिलेगा. ये सर्टिफिकेट जिसके पास होगा, उसे नई गाड़ी की खरीद पर रजिस्ट्रेशन के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा. इसके साथ ही उसे रोड टैक्स में भी कुछ छूट दी जाएगी. दूसरा लाभ ये होगा कि पुरानी गाड़ी की मेंटिनेंस कॉस्ट, रिपेयर कॉस्ट और ईंधन क्षमता (यानी Fuel Efficiency) में भी बचत होगी. तीसरा लाभ सीधा जीवन से जुड़ा है. पुरानी गाड़ियों, पुरानी टेक्नॉलॉजी के कारण रोड एक्सीडेंट का खतरा बहुत अधिक रहता है, जिससे मुक्ति मिलेगी. चौथा, इससे हमारे स्वास्थ्य पर प्रदूषण के कारण जो असर पड़ता है, उसमें कमी आएगी.”

 

ये स्क्रैप पॉलिसी है क्या ?

स्क्रैप पॉलिसी के तहत कमर्शियल गाड़ियों को 15 साल और प्राइवेट वाहनों को 20 साल बाद फिटनेस का सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा. अनफिट वाहनों को स्क्रैप किया जाएगा यानी कबाड़ी खाने में भेज दिया जाएगा. स्क्रैप पॉलिसी के तहत डीज़ल और पेट्रोल के निजी वाहनों को 20 साल तक चलने की इजाज़त दी है. जो निजी वाहन 20 साल से ज्यादा पुराने हैं उन्हें फिटनेस टेस्ट से गुज़रना पड़ेगा. अगर वो फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाते हैं तो उनका रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाएगा. अगर आपके वाहन को 20 साल हो गए हैं, और आपने फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं लिया है, तो 1 जून 2024 के बाद अपने आप रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाएगा. 15 साल से पुराने कमर्शियल वाहनों के लिए ये डेडलाइन 1 अप्रैल 2023 है

पुरानी गाड़ी स्क्रैप कराने वालों को छूट

इस पॉलिसी के दायरे में 20 साल से ज्यादा पुराने 51 लाख निजी वाहन आएंगे. गाड़ी स्क्रैप कराने पर इसके मालिक को सर्टिफिकेट दिया जाएगा. वो सर्टिफिकेट नई गाड़ी खरीदते वक्त शोरूम में दिखाएंगे तो कीमत में 5 फीसदी की छूट मिलेगी. इसके अलावा रजिस्ट्रेशन फीस माफ कर दी जाएगी.

 

सामान्य वर्ग को सचिवालय में नौकरी चाहिए तो झारखंड से ही मैट्रिक और इंटर,दोनो पास करना होगा

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सिर्फ सामान्य वर्ग के लिए लागू होंगे नये नियम
सिर्फ सामान्य वर्ग के लिए लागू होंगे नये नियम

झारखंड लोक सेवा आयोग, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के बाद अब झारखंड सचिवालय में नियुक्ति के लिए नई नियमावली बनाई जा रही है। नई सचिवालय नियुक्ति नियमावली के अनुसार अब सचिवालय में नौकरी पाने के लिए मैट्रिक और इंटर, दोनों झारखंड से करना अनिवार्य होगा। अगर कोई अभ्यर्थी झारखण्ड का रहने वाला है, लेकिन उसने मैट्रिक या इंटर दूसरे राज्य से पास किया है, तब भी उसे झारखंड में सचिवालय में नौकरी नहीं मिलेगी। कार्मिक विभाग द्वारा बनाए गए ड्राफ्ट को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद नई नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

सिर्फ सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों पर लागू होंगे नये नियम

संशोधन के अनुसार जिन्हें झारखंड में आरक्षण मिला हुआ है उन्हें इस नियम से छूट रहेगी । अनुकंपा पर नौकरी पाने के लिए झारखंड से मैट्रिक-इंटर पास करना जरूरी नहीं होगा। इतना ही नहीं, सामान्य वर्ग के लिए झारखंड राज्य में अवस्थित मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान से उत्तीर्ण होना जरुरी है। इसके साथ ही जनरल कैटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए यहां की रीति-रिवाज, भाषा, परिवेश का ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया गया है ।

राज्‍य सरकार सभी वर्गों के उत्थान के लिए चला रही है योजनाएं: विधायक भूषण बाड़ा

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विधायक भूषण बाड़ा ने किनबिरा गांव के भाजपा और झापा कार्यक्रताओं को कांग्रेस पार्टी में किया शामिल
विधायक भूषण बाड़ा ने किनबिरा गांव के भाजपा और झापा कार्यक्रताओं को कांग्रेस पार्टी में किया शामिल

सिमडेगा : विधायक भूषण बाड़ा शुक्रवार को विधायक आपके द्वार कार्यक्रम के तहत प्रखंड के किनबिरा स्थित भुंभु एवं कैरबेड़ा गांव पहुंचकर ग्रामीणों की समस्‍या सुनी। साथ ही ग्रामीणों की समस्‍या दूर करने के लिए पहल करने का आश्‍वासन दिया। विधायक ने कहा कि राज्य में बनी महागठबंधन की सभी वर्गों को ध्‍यान में रखकर काम कर रही है। सरकार गरीब तबके के उत्थान के लिए कृत संकल्प है। ग्रामीण एकजुट रहें। अपने हक और अधिकार के लिए जागरुक बनें। हम एकजुट रहेंगे तो हमे मिलने वाला हक को लड़ के ले पाएंगे। इससे हम सभी का, हमारे गांव और समाज का विकास होगा। हमारे बच्चे भी उन्नति के पथ पर आगे बढ़ेंगे।

किसी भी समाज को परेशान करने वाली राजनीति नहीं करते

विधायक भूषण बाड़ा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी कोई भी समाज के लोगों को परेशान करने वाला राजनीतिक नहीं करती। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सभी वर्गों के उत्थान के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। आप सभी एकजुट होकर योजनाओं का लाभ लें। कहा कि गांव के लोगों को और अधिक शिक्षित और जागरुक होने जरूरी है। समाज मे फैल रही बुराइयों को दूर करने के लिए आगे आएं।

कार्यक्रम को विधायक की धर्मपत्नी जोशिमा खाखा ने भी सम्बोधित किया। मौके पर कई लोगों ने कांग्रेस पार्टी  का सदस्‍यता भी ग्रहण किया। जिसे विधायक ने माला पहनाकर स्‍वागत किया।

सदस्‍यता ग्रहण करने वालों में भाजपा के रोमन बड़ाईक, कष्‍टु सिंह, राजेश बड़ाईक, कुशमती देवी , महाबीर सिंह, झापा के भिनसेंट बिलुंग शामिल है। मौके पर प्रमुख तारशीला खड़िया, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष अजीत लकड़ा, माइकल खड़िया, शांति बाला केरकेट्टा, अगथा तिर्की, शीतल एक्का, सोनल लकड़ा, बन्नू, सागर, अनिल बखला, वारिश राजा, निलेश, रोमन बड़ाइक, नीरज सोरेंग, बिनोद बघवार,मनीष डुंगडुंग,फूलचंद बड़ाइक,शंकर सिंह,रामदेव सिंह,राजेश बड़ाइक आदि मौजूद थे।

धनबाद के गया पुल चौड़ीकरण के लिये सांसद पीएन सिंह उपायुक्त से मिले

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आउटसोर्सिंग कंपनी और लोडिंग पॉइंट में मजदूरों के साथ अन्याय
आउटसोर्सिंग कंपनी और लोडिंग पॉइंट में मजदूरों के साथ अन्याय
धनबाद। जनता से जुड़े समस्याओं के समाधान हेतु आज धनबाद के सांसद  पशुपतिनाथ सिंह और धनबाद के उपायुक्त संदीप सिंह  की उपायुक्त कार्यालय में वार्ता हुई। सांसद  पशुपतिनाथ सिंह  ने गया पुल के शीघ्र चौड़ीकरण करवाने की मांग की ।सांसद पशुपतिनाथ सिंह  ने कहा कि आज गया पुल के चौड़ीकरण नहीं होने से प्रतिदिन जाम की स्थिति बनी रहती है। जिसके कारण हजारों व्यक्ति प्रतिदिन अपने कार्यों में देरी से पहुंचते हैं। काफी परेशानी का सामना प्रतिदिन हजारों व्यक्तियों को करना पड़ता है । अतः शीघ्र इस दिशा में सार्थक कदम उठाकर गया पुल का चौड़ीकरण करवाया जाए।
सांसद पशुपतिनाथ सिंह ने कहा की प्रत्येक व्यक्तियों के जीवन में बिजली और पानी का महत्वपूर्ण स्थान है और दुर्भाग्य है कि पिछले कई दिनों से बिजली और पानी की सुचारू रूप से आपूर्ति नहीं हो पा रही है ।जिसके कारण लाखों व्यक्ति प्रभावित हो रहे हैं। शीघ्र ही दोनों विभाग के पदाधिकारियों की बैठक बुलाकर विद्युत और जल समस्या का स्थाई समाधान कराया जाए।
सांसद पशुपतिनाथ सिंह  ने उपायुक्त संदीप सिंह  से वार्ता के क्रम में कहा कि जितने भी आउटसोर्सिंग कंपनी और लोडिंग पॉइंट है। वहां पर रोजगार में स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही आउटसोर्सिंग कंपनी और लोडिंग पॉइंट में मजदूरों के साथ अन्याय होता है। वहां मजदूर काम तो प्रतिदिन करते हैं लेकिन उनकी हाजिरी प्रतिदिन नहीं बनती ।जिसके कारण मजदूरों का वेतन कम मिलता है ।प्रशासन एक अभियान चलाकर इन सब विसंगतियों को दूर करने का कार्य करें। जिससे कि मजदूरों को हानि ना हो।
सांसद पशुपतिनाथ सिंह  ने कहा की सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों को मिले इसमें किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो और समय पर मिले इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उपायुक्त संदीप कुमार  ने सभी मांगों पर ठोस और शीघ्र पहल करने की बात कही।