Monday 6th of July 2026 07:50:17 PM
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बीजेपी नेता अरुण पांडेय के पुत्र राहुल पांडेय ने की आत्महत्या, बिरसा चौक पर थी मोबाईल की दुकान

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बिरसा चौक पर ओमेगा कम्यूनिकेशन नाम की मोबाईल की दुकान चलाता था राहुल
बिरसा चौक पर ओमेगा कम्यूनिकेशन नाम की मोबाईल की दुकान चलाता था राहुल

रांची । बीजेपी के नेता अरुण पांडेय के पुत्र राहुल पांडेय ने पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। राहुल कां रांची के बिरसा चौक पर मोबाईल दुकान थी। परिवार वालों ने बताया कि हर दिन की तरह वह घर में खाना खाकर रात में अपने रूम में सोने गया। सुबह पिता अरुण पांडेय मॉर्निंग वॉक करके लौटे तो देखा कि राहुल अभी तक सोकर नहीं उठा है। उन्‍होंने रूम का दरवाजा खटखटाया। रूम नहीं खुला तो परिजनों ने मिलकर दरवाजा तोड़ दिया। दरवाजा खोलने के बाद राहुल का शव पंखे में लटक हुआ मिला।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दी है। जगन्नाथपुर पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्ट्या यह आत्महत्या का मामला है। फिलहाल कारणों की तफ्तीश शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के स्पष्ट कारणों का पता चल पाएगा। राहुल के परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस की टीम ने राहुल के कमरे की तलाशी ली है।

सड़क दुर्घटना में महिला समेत चार जख्मी

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मेदिनीनगर (उज्ज्वल दुनिया)। उंटारी रोड थाना क्षेत्र के लुंबा सतबहिनी पंचायत सचिवालय के समीप आज सुबह एक बाइक असंतुलित होकर दुर्घनाग्रस्त हो गई। इस घटना में दम्पति और उसके ससुर गंभीर रूप से जख्मी हो गये है। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे एएसआई राजकुमार शर्मा, और चंडी प्रसाद ने घायलों को इलाज के लिए सरकारी एम्बुलेंस से हुसैनाबाद अस्पताल भेजवाया। वहीं, पुलिस दुर्घटनाग्रस्त बाहक को जब्त कर थाना ले गई है। जानकारी के अनुसार गढवा जिले के नगरउंटारी के सगमा गांव निवासी अरुण प्रजापति अपनी पत्नी और बच्चे के साथ अपना ससुराल गया था। सोमवार की सुबह वह अपने ससुर लक्ष्मण प्रजापति(50), पत्नी रिंकु देवी (25) और एक बच्चे के साथ घर लौट रहा था। इसी क्रम में असंतुलित होकर बाइक सड़क किनारे झाड़ी में जा गिरा, जिसमें उसकी गर्भवती पत्नी, दुधमुंहा बच्चा, ससुर और वह स्वयं घायल हो गया। इस घटना में महिला और बच्चा को गंभीर चोट लगी है।

 

नवविवाहित दंपती की फंदे पर लटकी मिली लाश

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छिपादोहर (उज्ज्वल दुनिया)। लातेहार जिले के छिपादोहर थाना क्षेत्र के लात पंचायत के लात गांव में नवविवाहित दंपती का अलग-अलग स्थानों में फंदे से झूलता हुआ शव बरामद किया गया है। जानकारी के अनुसार लात पंचायत के लात गांव की रविता कुमारी का इसी पंचायत के गासेदाग के रहने वाले अनुज उरांव से बीते 1 वर्ष पूर्व प्रेम संबंध के बाद विवाह हुआ था। रविवार को रक्षा बंधन के मौके पर अनुज अपनी पत्नी रविता के साथ लात गांव आया हुआ था। पति-पत्नी दोनों घर पर ही थे। दोपहर के आस पास के स्थानीय लोगों ने अनुज उरांव को घर का दरवाजा बाहर से लगाकर जाते हुए देखा। इसी दौरान रविवार की देर शाम उसके वापस नहीं लौटने पर जब घर का दरवाजा खोला गया तो फंदे से झूलता हुआ रविता का शव पाया गया। बाद में उसके पति को ढूंढने का प्रयास किया गया तो पास के ही जंगल में एक पेड़ से झूलता हुआ अनुज उरांव का शव भी पाया गया। आशंका व्यक्त की जा रही है कि पति ने पहले पत्नी की हत्या की और फिर दूर जंगल में जाकर स्वयं भी आत्महत्या कर ली। ग्रामीणों के द्वारा सोमवार को घटना की जानकारी छिपादोहर पुलिस को दी गयी। छिपादोहर थाना प्रभारी विश्वजीत तिवारी दल बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लिया. साथ ही पोस्टमार्टम के लिए शव को लातेहार सदर अस्पताल में भेज दिया। थाना प्रभारी ने बताया कि पूरे मामले में परिवार के लोगों के द्वारा आवेदन प्राप्त होने के बाद मामले की जांच कर नियम संगत कार्रवाई की जाएगी। मौत के ठोस कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद सामने आयेंगे।

 

हाईकोर्ट का आदेश का पालन न करने पर झारखंड के गृह सचिव को अवमानना का नोटिस

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पुलिस नियुक्ति नियमावली 2014 को दी गई है चुनौती
पुलिस नियुक्ति नियमावली 2014 को दी गई है चुनौती

झारखंड के गृह सचिव ने पुलिस और जैप के कॉन्सटेबलों की नियुक्ति में अदालत के आदेश का पालन नहीं किया । अब झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हे अवमानना का नोटिस भेजा है । अदालत ने नोटिस भेजकर गृह सचिव से पूछा है कि आपने कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं किया ?

क्या है पूरा मामला ?
पुलिस नियुक्ति नियमावली 2014 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह निर्देश दिया । अदालत ने 16 जनवरी 2017 को इस मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को आदेश दिया था कि इस नियमावली के तहत नियुक्त होने वाले कांस्टेबलों के नियुक्ति पत्र में नियुक्ति हाईकोर्ट के अंतिम आदेश से प्रभावित होने की बात अंकित करने को कहा था । लेकिन नियुक्ति पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया गया है ।

2014 की नियमावली से 6800 पुलिस और जैप कॉन्सटेबलों की नियुक्ति

इस मामले में जेएसएससी के अधिवक्ता संजय पिपरवाल का कहना है कि नई नियमावली के अनुसार ही वर्ष 2015 में सभी जिलों में सिपाही और जैप के जवानों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था । नियुक्ति की प्रक्रिया वर्ष 2018 में पूरी कर ली गई है । इस पर वादियों की ओर से कहा गया कि पूर्व में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इस मामले के अंतिम फैसले से नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होने का आदेश दिया था । लेकिन नियुक्ति पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया गया है । इस नियमावली से राज्य में 6800 से अधिक पुलिस और जैप के कांस्टेबलों की नियुक्ति हो चुकी है ।

पांकी के डंडार कॉलेज के छात्रों ने पिं्रसिपल को पीटा, गंभीर

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मेदिनीनगर (उज्ज्वल दुनिया)। पांकी के डंडार कॉलेज में पिं्रसिपल के रूप में कार्यरत डॉ प्रेमचंद महतो की कुछ छात्रों ने पिटाई कर दी। इसके बाद पिं्रसिपल को घायल अवस्था में पांकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें मेदनीनगर एमएमसीएच रेफर कर दिया। पिं्रसिपल प्रेमचंद महतो का आरोप है कि कुछ उपद्रवी छात्रों ने लाठी डंडे से घात लगाकर उन पर हमला किया। वहीं घटना के बाद कई छात्र संगठन पिं्रसिपल के बचाव में उतर आए हैं। छात्रों ने सुरक्षा को लेकर पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पुलिस के विरुद्ध नारेबाजी भी की । पिं्रसिपल ने दो दिन पहले ही मारपीट होने की आशंका जताकर सुरक्षा की मांग भी की थी। आरोप है कि इसके बावजूद सुरक्षा को लेकर पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी। पिं्रसिपल की पिटाई मामले में छात्र संगठन आईसा के प्रदेश सचिव त्रिलोकी नाथ एवं दस अन्य छात्रों के खिलाफ पांकी थाने में मामला दर्ज कराया गया है। हालांकि आरोपी छात्रों का कहना है कि उन्हें जानबूझकर पिं्रसिपल के द्वारा फंसाया जा रहा है क्योंकि कुछ छात्र फीस वृद्धि को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

सीबीआई और गढ़वा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, 3 करोड़ गबन का आरोपी पोस्टमास्टर गिरफ्तार

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सीबीआई और गढ़वा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
3 करोड़ गबन का आरोपी पोस्टमास्टर गिरफ्तार

मेदिनीनगर (उज्ज्वल दुनिया)। सीबीआई और गढ़वा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 3 करोड़ के गबन का आरोपी पोस्टमास्टर कामेश्वर राम पकड़ा गया है। उसे मेदिनीनगर के टीओपी-3 क्षेत्र स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया है। आरोपी कामेश्वर राम पर डाकघर के ग्राहकों के आवर्ती खाता से प्रथम भुगतान के बाद फर्जी तरीके से अलग-अलग तारीखों में फिर से भुगतान करने का आरोप है। जांच में यह भी पाया गया है कि कामेश्वर राम सैकड़ों ग्राहकों आरडी जमाकर्ताओं की राशि भी गायब कर रहा था। इस मामले में तत्कालीन सहायक डाक अधीक्षक शंकर कुजूर ने गढ़वा में कामेश्वर राम पर सरकारी राशि के गबन का आरोप लगाते हुए एक एफआईआर दर्ज करवाया था। एफआईआर में कामेश्वर राम पर डाकघर के आरडी लेजर को भी गायब करने का आरोप है। इस घोटाले की जानकारी मिलने के बाद सीबीआई ने पलामू और गढ़वा निबंधन विभाग से कामेश्वर राम की संपत्ति का ब्यौरा मांगा था। निबंधन विभाग के मुताबिक पोस्टमास्टर कामेश्वर राम के पास पलामू के विभिन्न इलाके में करीब दो करोड़ की जमीन रजिस्टर्ड है। उसके नाम से हैदरनगर के खरगड़ा, सजवन, सलेमपुर और चेचरिया में करीब आठ एकड़ की जमीन खरीदी गई है। बताया जाता है कि उसने गबन कर करोड़ों रूपये की संपत्ति अर्जित की है।

हेमंत सरकार में अल्पसंख्यक समाज अपने को ठगा और बेबस महसूस कर रहा है

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राज्यपाल से मुलाकात करता भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल
राज्यपाल से मुलाकात करता भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल
रांची। हेमंत सरकार के जनविरोधी नीतियों और अल्पसंख्यक समाज के मामलों को लेकर भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा का एक शिष्टमंडल अपने 19 सूत्री मांगों को लेकर राज्यपाल रमेश बैस से मिलकर ज्ञापन सौंपा । शिष्टमंडल में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनवर हयात, मोर्चा के प्रदेश प्रभारी सोना खान, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष मो कमाल खान, मौ काजि़म कुरेशी,भाजपा के पूर्व प्रदेश सह मीडिया प्रभारी तारिक इमरान, मोहम्मद शमीम रजा शामिल थे ।

इस मौके पर मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनवर हयात ने राज्य सरकार के क्रियाकलापों पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य की हेमंत सरकार हर मोर्चे पर नाकाम है । अल्पसंख्यकों के विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं। जिसकी वजह से आज अल्पसंख्यक समाज अपने आप को बेबस और ठगा महसूस कर रहा है।

TATA HBX का नाम होगा “टाटा पंच”, कीमत साढ़े पांच लाख से शुरू

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टाटा पंच के नाम से मार्केट में आएगी TATA HBX
“टाटा पंच” के नाम से मार्केट में आएगी TATA HBX

जिसका पिछले एक साल से इंतजार था वो घड़ी आ ही गई । टाटा HBX जिसे 2020 के ऑटो एक्स्पो में प्रदर्शित किया गया था, वो “टाटा पंच” के नाम से मार्केट में आएगी।  छोटी और compact SUV की शुरुआत कीमत (base price) साढ़े पांच लाख रखी गई है।

सितम्बर या अक्टूबर के शुरुआत में मार्केट में आएगी Tata Punch

कंपनी के सूत्रों ने बताया कि “टाटा पंच” त्योहारों के मौसम में बाजार में बिक्री के लिए तैयार रहेगी । इसलिए अंदाजा लगाया जा रहा है कि सितम्बर के मध्य या अक्टूबर के शुरुआत में रह छोटी SUV बिक्री के लिए तैयार रहेगी।

यह टाटा मोटर्स की सबसे सस्ती एसयूवी होगी

टीजर से यह पता चल रहा है कि टाटा एचबीएक्स

काफी मस्कुलर और स्टाइलिश है "टाटा पंच"
काफी मस्कुलर और स्टाइलिश है “टाटा पंच”

में उसी तरह से डेटाइम रनिंग लाइट्स डीआरएलएस होगें जैसा कि टाटा हैरिअर और टाटा सफारी में दिए गए हैं। इस डीआरएल के नीचे हेडलैंप कलस्टर होगा। कंपनी ने ये भी संकेत दिए हैं कि एक जगह सबकुछ होगा यानी इसकी डिजाइन में काफी विविधता होगी।

टाटा पंच के संभावित लुक और फीचर्स की बात करें तो देखने को मिलता है कि यह काफी मस्कुलर होगा और इसकी टायर और रियर लुक काफी आकर्षक हो सकता है। इस माइक्रो में खास रियर और फ्रंट बंपर के साथ ही स्पोर्टी ग्रिल एलईडी डीआरएल प्रोजेक्टर हेडलैंप रैपअराउंडर लैंप के साथ ही ट्रैंडी अलॉय व्हील्ज देखने को मिल सकते हैं।

सुनील तिवारी मामले की जल्द सुनवाई के लिए हाइकोर्ट से आग्रह, कोर्ट ने भी दिया आश्वासन

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उनके परिजन कहां है? इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई- चैता बेदिया
उनके परिजन कहां है? इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई- चैता बेदिया

सुनील तिवारी मामले को लेकर चैता बेदिया ने झारखण्ड हाइकोर्ट में हेबियस कॉपर्स याचिका दायर की है। अब चैता बेदिया की ओर से अदालत से मामले की शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया गया है। चैता बेदिया की दलील है कि उनके परिजन को अज्ञात स्थान पर रखा गया है, और मामले की जल्द सुनवाई न होने पर वो वापस अपने घर नहीं लौट सकतीं। इसके साथ ही चैता बेदिया ने सुनील तिवारी पर कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली लड़की की जान को खतरा बताया है। अदालत ने भी मामले की शीघ्र सुनवाई का आश्वासन दिया है।

गिरफ्तार किए गए परिजन को अदालत में पेश किया जाय

इस प्रकरण में रांची अनगड़ा निवासी चैता बेदिया द्वारा दायर हेबियस कॉपर्स याचिका की शीघ्र सुनवाई के लिए झारखंड हाई कोर्ट से आग्रह किया गया । याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत में मेंशन स्लिप दायर कर याचिका की शीघ्र सुनवाई के लिए तारीख मुकर्रर करने की प्रार्थना की । याचिका के माध्यम से अदालत से गुहार लगाई है कि उनके परिजन की रिहाई हो और मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए उनके परिजन को अदालत में पेश किया जाए ।

पुलिस जबरदस्ती मेरे परिजनों को सुनील तिवारी पर केस करने के लिए दबाव बना रही है- चैता बेदिया

समानचैता बेदिया ने याचिका के माध्यम से अदालत को जानकारी दी है कि पुलिस ने उनके पिता, बहन, पत्नी और बच्चे को गिरफ्तार कर लिया है । उसकी सूचना उन्हें नहीं दी जा रही है कि क्यों उन्हें गिरफ्तार किया गया है ? कहां पर रखा गया है ? कई दिन बीत गए हैं लेकिन पुलिस ने ना तो उन्हें रिहा किया है और ना ही किसी अदालत में पेश किया है । उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस उनके परिवार पर सुनील तिवारी के ऊपर केस करने का दबाव बना रहा है ।

15 अगस्त को चैता बेदिया को मिली मामले की जानकारी

बेदिया ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि कुछ पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और उनके पिता शिवाली बेदिया, बहन पुष्पमनी, पत्नी सुपोती देवी और उसके दो बच्चे को जबरन साथ ले गए हैं । उन्होंने याचिका के माध्यम से अदालत को यह जानकारी भी दी है कि उन्होंने ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज कराई है कि पुलिस उनके परिजनों को जबरन उठाकर ले गई है और प्राथमिकी दर्ज करने का दबाव बनाया जा रहा है । जिस समय पुलिस उनके घर पहुंची उस समय वह घर में नहीं थे । वह किसी काम से 14 अगस्त को गिरिडीह गए हुए थे । 15 अगस्त को उन्हें पुलिस के आने और परिजनों को ले जाने की सूचना मिली । उनके परिजन कहां है? इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई है ।

जातिगत जनगणना पर भाजपा भी हमारे स्टैंड के साथ

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जातिगत जनगणना की मांग में बीजेपी भी हमारे स्टैंड के साथ- नीतीश
जातिगत जनगणना की मांग में बीजेपी भी हमारे स्टैंड के साथ- नीतीश

जातिगत जनगणना के लिए बिहार से दस सदस्यों के एक दल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की । इस दल में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा राजव नेता तेजस्वी यादव, जीतनराम मांझी, भाजपा के विजय राम सहित अन्य पार्टियों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे । इन नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी से देश भर में जातियों के आधार पर जनगणना का अनुरोध किया है ।

पीएम मोदी ने भी जातिगत जनगणना से इनकार नहीं किया – नीतीश

मुलाकात के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि पीएम मोदी ने धैर्यपूर्वक उनकी बातें सुनीं । नीतीश कुमार से यह पूछे जाने पर कि जातिगत जनगणना पर पीएम मोदी का क्या स्टैंड रहा तो उन्होंने जवाब दिया कि पीएम मोदी ने इससे इनकार नहीं किया है और प्रधानमंत्री मोदी ने सभी की बातें सुनी हैं । हालांकि उन्होने कहा है कि संविधान विशेषज्ञों और एक्सपर्ट से बात करने के बाद ही वो कुछ बता पाएंगे।  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस मसले पर पूरे देश की एक राय है और अब पीएम मोदी को इस पर फैसला लेना है ।

पीएम मोदी ने हमारी बात गंभीरता से सुनी है – तेजस्वी

तेजस्वी यादव ने कहा कि जातीय जनगणना से देश को फायदा होगा । मंडल कमीशन से पहले पता ही नहीं था कि देश में कितनी जातियां हैं । मंडल कमीशन के बाद पता चला कि देश में हजारों जातियां हैं । जब जानवरों की गिनती होती है, पेड़ पौधों की गिनती होती है, तो इंसानों की भी होनी चाहिए । ये डेलिगेशन जो मिला है, ये सिर्फ बिहार के लिए नहीं है पूरे देश के लिए है। देशहित के मुद्दों पर हम विपक्ष के तौर पर हमेशा सरकार का समर्थन करते आए हैं ।

उम्मीद है कि जल्द ही फैसला होगा- जीतनराम मांझी

हमने प्रधानमंत्री से कहा कि हर हालत में जातिगत जनगणना कराएं, ये ऐतिहासिक निर्णय होगा. उन्होंने बहुत गंभीरता से हमारी बात सुनी है इसलिए हमें लगता है कि जल्दी ही कोई निर्णय होगा. जातीय जनगणना के मुद्दे पर हम सभी एकसाथ हैं. जब कोई भी देश हित का मुद्दा होता है तो हम सरकार के साथ होते हैं ।

मुस्लिम ब्रदरहुड का ही भारतीय वर्जन है जमात

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गौतम चौधरी

पश्चिमी ईसाई दुनिया का प्रभुत्व विस्तार ही आधुनिक दुनिया का उदय माना जाता है। इससे पहले ओटोमन साम्राज्य की तूति बोलती थी। क्रूसेड के आह्वान के बाद भी ओटोमन पराजित नहीं हुए और उनका इकबाल बुलंदियों पर था। दो भागों में बंट चुके क्रर ईसाइत के झंडावदारों ने मध्य-पूर्व एशिया से लेकर पूरे यूरोप तक तबाही मचा रखी थी। धर्मांध ईसाई पदरियों ने महिलाओं, अल्पसंख्यकों और युद्धबंदियों पर अत्याचार की हदे पार कर रखी थी। ऐसे में तुर्क कबीलों के एक संगठन ने उन्हें चुनौती दी और वही तुर्क बाद में ऑटोमन साम्राज्य के अधिपति होकर उभरे।

लोकतंत्र व बहू पांथिक संस्कृति के लिए है घातक
लोकतंत्र व बहू पांथिक संस्कृति के लिए है घातक

जबतक ओटोमन प्रगतिशील सोच के रहे तबतक दुनिया पर शासन करते रहे, ज्यों ही इस्लाम की धार्मिक जरता में उलझे उनका साम्राज्य बिखड़ गया और फिर से पश्चिमी ईसाई समूह जो कभी रोमन साम्राज्य का हिस्सा हुआ करते थे, ने उन्हें परास्त कर दिया। ओटोमन को पराभूत करने का सबसे पहला श्रेय फ्रांसीसी नेता नेपोलियन बोनापार्ट को जाता है। आधुनिक दुनिया में पहली बार नेपोलियन ने मुसलमानों को चुनौती दी और मिस्र पर आक्रमण कर दिया। इसके बाद जहां एक ओर ब्रिटेन व रूस ने मिलकर नेपोलियन को पराभूत किया वहीं दूसरी ओर एशिया में फिरंगियों ने अपनी ताकत बढ़ा ली। अंग्रेज धीरे-धीरे ओटोमन के साम्राज्य को सिकुरने के लिए मजबूर कर दिए।

आधुनिक दुनिया के आगमन के साथ, पश्चिमी शक्ति यानी पश्चिमी ब्लॉक की तुलना में इस्लाम की ताकत कमजोर होती गई। अंग्रेजों ने भारत में मुगलों को उखाड़ फेंक दिया तो ओटोमन तुर्की के छोटे से भाग में जाकर सिमट गए। वहां भी अंग्रेजों ने उन्हें स्थिर नहीं छोड़ा और अतातुर्क मुस्तफा कमाल पाशा ने आधुनिकता के नाम पर ओटोमन की सत्ता को जड़ से उखाड़ फेंका। इसके के साथ इस्लामी साम्राज्य का अंत हो गया और दुनिया पर इंग्लैंड के नेतृत्व में ईसाई शक्ति का साम्राज्य स्थापित हो गया। अपने आप को इस्लाम का झंडाबरदार कहने वाले ओटोमन तुर्क तो गायब हो गए लेकिन इस्लाम के मानने वालों के बीच शरिया कानून यानी इस्लामिक कानून की चमक कायम रही।

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश की सरकारें जमात के अलगाववादी रवैये से परेशान
भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश की सरकारें जमात के अलगाववादी रवैये से परेशान

बीसवीं शताब्दी की शुरुआत तक कुछ कट्टरपंथी मुसलमान जो इस्लामी दुनिया के घटते महत्व के बारे में चिंतित थे, ने इस सिद्धांत को प्रतिपादित किया कि इस्लामी दुनिया का पतन पारंपरिक शरिया कानून के अपर्याप्त प्रयोग के लिए ईश्वर की सजा थी। समाधान के रूप में समाज, परिवार, शैक्षिक प्रणाली, कार्यस्थल, और अंततः, कानूनी प्रणाली और राजनीति जैसे प्रमुख संस्थानों का इस्लामीकरण करने की योजना बनाई जाने लगी। इसी सोच ने हसन अल-बन्ना को मुस्लिम ब्रदरहुड बनाने की प्रेरणा दी। वर्ष 1928 में हसन ने दुनिया भर में इस्लामिक मूल्यों की स्ािापना के नाम पर मुस्लिम ब्रदरहुड नामक संगठन की स्ािापना कर डाली लेकिन इसके पीछे इस्लामिक साम्राज्यवाद की परिकल्पना पल रही थी। यह संगठन दुनिया भर में शरिया कानून को लागू करने का अभियान छेड़ा। इस संगठन के साथ जुड़ने वालों ने प्रचार किया कि इस्लामिक साम्राज्य का पतन शरिया कानून से विगल होने के कारण ही हुआ है। इसलिए शरिया कानून को लागू कर हम फिर से इस्लामिक राज्य की स्थापना कर सकते हैं।

समय के साथ, मुस्लिम ब्रदरहुड वैचारिक लड़ाई से दूर होता गया और तेजी से उग्रवाद, हत्याओं और आतंकवादी हमलों में बदल गया। आज, मुस्लिम ब्रदरहुड का नारा है, ‘‘अल्लाह हमारा उद्देश्य है, कुरान हमारा कानून है, पैगंबर हमारे नेता हैं, जिहाद हमारा रास्ता है और अल्लाह के लिए मौत हमारी सर्वोच्च आकांक्षा है।’’ यह नारा स्वयं लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्ष कानूनों की धारणा जो दुनिया भर के अधिकांश देशों में प्रचलित हैं, उसे खारिज करता है। ऐसी विचारधारा के साथ आधुनिक दुनिया कैसे चल सकती है। निःसंदेह एक धर्म विशेष के लिए पवित्र कुरान की मान्यता सर्वोच्च है लेकिन उसे कानून की मान्यता देना सर्वथा अनुचित होगा। यह मुस्लिम देशों के लिए बेहद खतरनाक है।

हर तरह के प्रोग्रेसिव और वैज्ञानिक बदलाव का विरोध करता रहा है जमात
हर तरह के प्रोग्रेसिव और वैज्ञानिक बदलाव का विरोध करता रहा है जमात

अबू अला मौदुदी ने हसन अल-बन्ना के विचारों से प्रेरित होकर वर्ष 1941 में लाहौर में जमात-ए-इस्लामी की स्थापना की, जिसमें मुस्लिम ब्रदरहुड के समान उद्देश्य और आदर्शों को शामिल किया गया। मोहम्मद मुर्सी सरकार को हटाने के मुद्दे पर अपना रुख व्यक्त करते हुए, जलालुद्दीन उमरी (तत्कालीन राष्ट्रपति, जेएलएच) और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि मिस्र में उथल-पुथल संयुक्त राज्य अमेरिका और साम्राज्यवादी ताकतों द्वारा समर्थित अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा था, ताकि इस्लामवादियों को सत्ता में आने से रोका जा सके।

जमात-ए-इस्लामी के मजलिस-ए-शूरा ने यहां तक दावा किया कि मिस्र का मुस्लिम ब्रदरहुड शांतिपूर्ण संघर्ष में लगा हुआ है। ब्रदरहुड के शांतिपूर्ण संघर्ष का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1948 में मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंधित 23 वर्षीय पशु चिकित्सा छात्र ने मिस्र के तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या कर दी थी। दो हफ्ते बाद, संगठन के एक अन्य सदस्य को एक कोर्ट हाउस पर बमबारी करने के प्रयास के लिए गिरफ्तार किया गया था। 1960 के दशक में, मिस्र में एक सशस्त्र विंग को फिर से स्थापित करने की साजिश रचने के आरोप में मुस्लिम ब्रदरहुड के एक छोटे समूह को गिरफ्तार किया गया था। राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी की सरकार ने ब्रदरहुड को एक आतंकवादी संगठन के रूप में स्वीकार किया है और नियमित रूप से उस पर आतंकवादी हमलों के पीछे होने का आरोप लगाता आया है। हस्म और लीवा अल-थवरा, मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाओं को संयुक्त राज्य सरकार द्वारा आतंकवादी संगठनों के रूप में मान्यता दी गयी है। संयुक्त राष्ट्र यह मानता है कि फिलिस्तीन में मुस्लिम ब्रदरहुड की ही शाखा हमास है जो नागरिक ठिकानों पर बम बसाने, अपहरण, आत्मघाती हमले, रॉकेट हमले के लिए उत्तरदायी है। हालांकि इजरायल में सरकार का भी रूख कोई अच्छा नहीं है लेकिन इसके लिए आतंक का सहारा लेना उचित नहीं है।

अमेरिका ने हमास को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। मिस्र का अयमान अल-जवाहिरी, जिसने ओसामा-बिन-लादेन के साथ मिल कर अलकायदा को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वह भी पहले मुस्लिम ब्रदरहुड का ही सदस्य था। ब्रदरहुड की इस्लामी विचारधारा, राष्ट्र-राज्य की विचारधारा के लिए खतरा है और इस प्रकार विश्व व्यवस्था की स्थिरता के लिए भी खतरा है। ब्रदरहुड और अल कायदा अनिवार्य रूप से एक ही आंदोलन का हिस्सा हैं क्योंकि दोनों ही इस्लामिक साम्राज्यवाद के चिंतन पर आधारित हैं। जमात-ए-इस्लामी अपने वैचारिक गुरु ब्रदरहुड की तरह एक खतरनाक संगठन के सभी गुण समेटे हुए हैं। अगर हमास, अल-कायदा आदि जैसे संगठन बनाने और चलाने में ब्रदरहुड के कारनामों से सबक सीखना है, तो जमात-ए-इस्लामी को तुरंत प्रतिबंधित करने की आवश्यकता है। भारत जैसा बहुपंथिक और बहुसांस्कृतिक देश के लिए तो यह बेहद खतरनाक है। यदि इसकी गतिविधियों पर अविलंब रोक नहीं लगायी गयी तो जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों के संरक्षण में कट्टरपंथी इस्लाम के विकास की पूरी संभावना है।

हमारे पड़ोस में पाकिस्तान जैसा खतरनाक देश, इस्लाम के नाम पर दुनिया भर में आतंकवाद का व्यापार कर रहा है। अभी हाल ही में अफोनिस्तान की धरती पर मध्ययुगीन असभ्यत और बरबर समूहों ने सभ्यता को सर्शसार करते हुए काबुल की धरती को रक्तरंजित कर दिया। जैसे ही तालिबानियों ने काबुल को अपने कब्जे में लिया वहां की महिलाओं पर अत्याचार प्रारंभ हो गए। हजारे शिआओं पर आफत आन पड़ी है। अल्पसंख्यक दहशत में हैं और जो मुसलमान तालिबानी फरमान मानने से इन्कार कर रहे हैं उन्हें चैक-चैराहों पर गोलियों से भून दिया जा रहा है। ऐसे में भारत जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध देशों को एक मंच पर आकर सभी प्रकार की कट्टरता के खिलाफ जंग का ऐलान करना चाहिए और जमात-ए-इस्लामी पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।

(लेखक झारखण्ड के वरीष्ठ पत्रकार हैं)

राहुल का ब्रेकफास्ट, सिब्बल का डिनर और सोनिया का वर्चुअल सियासी लंच, कहां तक पहुंची विपक्षी एकता?

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देश में विपक्षी एकता की कवायद चल रही है। इसमें अलग-अलग तरह से सोनिया गांधी, शरद पवार, लालू यादव, प्रशांत किशोर और ममता बनर्जी जैसे नेता लगे हुए हैं। सबसे पहले विपक्षी एकता के पहल की शुरु आत की प्रशांत किशोर ने। वे मई और जून में तीन बार शरद पवार से मिले। इसके बाद शरद पवार ने अपने स्तर से अखिलेश, मायावती, लेफ्ट पार्टियों से संपर्क किया। संसद के पिछले सत्र में जब सभी दलों के नेता दिल्ली में जुटे तो इसे कुछ आकार देने की भी कोशिश हुई।

कपिल सिब्बल की डिनर डिप्लोमैसी
कपिल सिब्बल की डिनर डिप्लोमैसी, लेकिन इन्हे कांग्रेस का बागी समझा गया

विपक्षी खेमे की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि कांग्रेस के साथ होने पर उसका कबाड़ा हो जाता है और कांग्रेस के न रहने पर खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है । जब तक ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में रहीं, कांग्रेस पंजाब का झगड़ा सुलझाने में लगी हुई थी । जैसे ही तृणमूल कांग्रेस नेता ने दिल्ली में कदम रखे, राहुल गांधी हद से ज्यादा एक्टिव नजर आने लगे – और फिर भीतर ही भीतर मिलजुल कर ऐसी खिचड़ी पकायी गयी कि जिस शरद पवार के भरोसे ममता बनर्जी ने दिल्ली दौरे का कार्यक्रम बनाया था, बगैर उनसे मिले ही जाने को मजबूर हो गयीं ।

संद सत्र के दौरान जी-23 नेताओं ने भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दलों के नेताओं को अपने घर डिनर पर बुलाया । इसे पुराने कांग्रेसियों द्वारा विपक्षी एकता के प्रयास के रुप में देखा जाना चाहिए था, लेकिन राहुल गांधी तो अपने आप में अनोखे हैं। उन्होने कपिल सिब्बल के डिनर के जवाब में अगले ही दिन सभी नेताओं को अपने यहां ब्रेकफास्ट पर बुला लिया। भला वो चिदंबरम और सिब्बल जैसे लोगो को लीड कैसे लेने देते ?

राहुल गांधी की ब्रेकफास्ट डिप्लोमैसी
राहुल गांधी की ब्रेकफास्ट डिप्लोमैसी, इसे कपिल सिब्बल का जवाब माना गया

इसके बाद सोनिया गांधी ने विपक्षी एकता की पहल करते हुए विपक्षी दलों की वर्चुअल बैठक बुलाई। इसमें 18 दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन अगले साल जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, उन राज्यों से विपक्षी एकता का इगो सहलाने कोई नहीं पहुंचा। यूपी से अखिलेश और मायावती गायब रहे, तो पंजाब से आम आदमी पार्टी । ले देकर ये बैठक उन्ही दलों की रही जो या तो पहले से यूपीए में हैं या फिर बिना ज्यादा ना नुकुर के पहले से ही यूपीए के साथ जाने को तैयार बैठे हैं।

सोनिया गांधी की वर्चुअल बैठक से अखिलेश और मायावती ने बनाई दूरी
सोनिया गांधी की वर्चुअल बैठक से अखिलेश और मायावती ने बनाई दूरी

लालू यादव ओबीसी जातियों के नाम पर राजनीति दलों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट कर रहे हैं – और शरद पवार भी अपनी रणनीतियों के साथ साथ उनके साथ भी जुड़े हुए हैं – और बीच की खाली जगहों को भरने में प्रशांत किशोर भी अपने स्तर से जुटे ही हुए हैं। लेकिन इस सवाल का जवाब अब तक नहीं मिला कि क्या भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दल राहुल को अपना नेता मानने को तैयार हैं ? इसी सवाल के जवाब में विपक्षी एकता की सूई अटकी हुई है और राहुल बाबा की सूई सोशल मीडिया पर अटकी पड़ी है। वो सड़क पर संघर्ष से ज्यादा इसपर फोकस कर रहे हैं कि कौन सी कंपनी ने उनकी पोस्ट कब और क्यों हटाई ।

2022 में अध्यक्ष पद की लड़ाई, अभी से सतह पर आई…

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तेज प्रताप ने मीसा और रोहिणी आचार्य के साथ रक्षा बंधन की तस्वीरें पोस्ट की
तेज प्रताप ने मीसा और रोहिणी आचार्य के साथ रक्षा बंधन की तस्वीरें पोस्ट की

2022 में आरजेडी के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होना है. चुनाव में अभी वक्त तो काफी है, लेकिन माहौल तो पहले से ही बनाना जरूरी होता है. ये तो पहले ही घोषित किया जा चुका है कि लालू यादव के राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव हैं. रही सही कसर बिहार चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर पूरी कर दी गयी, लेकिन आरजेडी अध्यक्ष के पद पर तो अभी तक लालू यादव ही बने हुए हैं.

नवंबर, 2022 में राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर लालू यादव का कार्यकाल पूरा हो रहा है. लालू यादव की सेहत सही नहीं चल रही है और पार्टी के रजत जयंती समारोह में ये महसूस भी किया गया था. हालांकि, विपक्षी नेताओं से मुलाकात की जो तस्वीरें आ रही हैं, उनमें लालू यादव बेहतर लग रहे हैं – ऐसे में मुमकिन है लालू यादव अध्यक्ष की कुर्सी भी मुमकिन है तेजस्वी यादव को सौंप दें.

अब जगदानंद सिंह जैसे नेता भले ये मान लें कि कुर्सी पुश्तैनी नहीं है, लेकिन तेज प्रताप यादव कैसे हजम कर लें – और तेज प्रताप ही क्यों ये सब तो मन में मीसा भारती के भी चल ही रहा होगा. लालू यादव की एक और बेटी रोहिणी आचार्य को भी चुनावों के दौरान सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव देखा गया. ऐसा कैसे हो सकता है कि उनकी जरा भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा न हो.

तेजस्वी के खिलाफ मीसा-तेज प्रताप और रोहिणी की जुगलबंदी!
तेजस्वी के खिलाफ मीसा-तेज प्रताप और रोहिणी की जुगलबंदी!

लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती फिलहाल राज्य सभा की सांसद हैं – और जाहिर है राजनीति में तेजस्वी से पहले से सक्रिय रही हैं. संगठन में भी उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है. कार्यकर्ताओं में उनके प्रति अलग से आदर भाव देखा जाता है, जो सिर्फ लालू यादव की बेटी होने की वजह से ही नहीं बल्कि उनके निजी बात व्यवहार के चलते देखने को मिलता है.

2015 में हुए बिहार चुनाव के दौरान एक चर्चा रही कि तेज प्रताप को मंत्री बनवाने में बड़ी भूमिका मीसा भारती की ही रही – और आगे चल कर मीसा भारती को राज्य सभा पहुंचाने में तेज प्रताप यादव ने जोर लगा रखी थी.

कहने को तो तेज प्रताप खुद को कृष्ण और तेजस्वी यादव को अर्जुन बताते हैं, लेकिन ये तो ऐसा लगता है जैसे भाई-बहन मिलकर ही तेजस्वी यादव की राह में रोड़े अटकाने की कोशिश कर रहे हों – और लालू यादव के सामने ये झगड़ा खत्म करना सबसे बड़ा चैलेंज साबित हो सकता है.

लालू के परिवार में “महाभारत” तो तय है, आज नहीं तो कल…

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क्या छोटे बेटे को स्थापित करने के लिए लालू ने बड़ी बेटी और बड़े बेटे को अपमानित किया?
क्या छोटे बेटे को स्थापित करने के लिए लालू ने बड़ी बेटी और बड़े बेटे को अपमानित किया ?

बात उस समय की है जब तेज प्रताप यादव की पत्नी एश्वर्या भरी बरसात में घर के बाहर रोते बिलखते मीडिया के सामने आई…भींगा बदन, बिखरे बाल, बिना मेकअप के….ये तस्वीरें लालू प्रसाद यादव के परिवार पर सबसे बड़ा धब्बा थीं…राजनीति में ऊपर-नीचे चलता है..लंठई, रंगबाजी ये सब जनता पचा लेती है, लेकिन एक कुलीन घर की बेटी को आप बहू बनाकर लाये हैं, और फिर उसके साथ ऐसा सलूक ? बिहार में संभ्रांत घर का कोई भी यादव परिवार इसे ठीक नहीं मानता…

मीसा भारती को मिली सजा

खैर ये घटना लालू यादव की लोकप्रियता तले दब गई । एश्वर्या के पिता चंद्रिका राय अपमान का घूंट पीकर रह गये, भला वो कर भी क्या सकते थे ? बिहार के यादव लालू प्रसाद के परिवार के साथ जो थे । चंद्रिका राय बाद में जेडीयू में चले गये, लेकिन लालू परिवार के अंदर एक बात उस वक्त भी उठी थी । मीसा भारती और मां राबड़ी देवी ने मिलकर बहू एश्वर्या को सताया था, किचन के गेट बंद कर देतीं ताकि बहू खाना न ले सके । एश्वर्या के घर छोड़ने के बाद मीसा भारती पर भी परिवार के अंदर से ही नकेल कसा जाने लगा, उनकी राजनीतिक अरमानों के पंख कटने लगे। जो मीसा बार-बार मीडिया में आकर बयान देती थीं, विधानसभा चुनावों के पहले से ही उन्हे कह दिया गया कि अपना ससुराल संभालो, पार्टी तेजस्वी देख लेंगे । मीसा अपमान का घूंट पीकर रह गईं ।

बड़ी चतुराई से राजद के रणनीतिकारों ने मीडिया में तेज प्रताप की छवि "पप्पू" जैसी बना दी
बड़ी चतुराई से राजद के रणनीतिकारों ने मीडिया में तेज प्रताप की छवि “पप्पू” जैसी बना दी

तेज प्रताप को मीडिया और राजद के रणनीतिकारों ने “बुड़बक” घोषित करवा दिया

तेज प्रताप बड़े हैं। डिग्री भी इनकी तेजस्वी से ज्यादा है। आमतौर पर बिहारी घरों में बड़ा बेटा ही पिता का वारिस होता है। लेकिन लालू प्रसाद यादव की आशक्ति शुरु से ही छोटे बेटे तेजस्वी की ओर रही। बचपन से ही तेज प्रताप मां के लाडले, लेकिन पिता का प्यारा तो तेजस्वी ही रहा। तभी तो तेजस्वी ने दिल्ली के एमिटी में पढ़ाई की, लेकिन तेज प्रताप के हिस्से पटना का बीएन कॉलेज ही आया ।

तेज प्रताप पिता की नकल करते रहे, उनके पदचिन्हों पर चलने की कोशिश करते रहे, खुद को कृष्ण और छोटे भाई को अर्जुन बताते रहे, लेकिन सच्चाई तो ये है कि पिता की पार्टी पर धीरे-धीरे छोटे भाई तेजस्वी का कब्जा होता चला गया । पिछले विधानसबा चुनाव में तो हालत ये थी कि तेज प्रताप के कहने पर तीन लोगों को भी टिकट नहीं दिया गया जबकि तेजस्वी की पूरी मर्जी चली। सबसे बड़ी बहन की तरह बड़े भाई भी अपमान का कड़वा घूंट पीते रहे।

क्या दोनों बेटों के बीच मां-बाप करते रहे भेदभाव ?

तेज प्रताप के अंदर इस बात की टीस बहुत गहरे तक बैठी है कि मां-बाप भी उन्हे बुड़बक समझते हैं। लालू परिवार से जुड़े लोग कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि ये राजनीति में आने के बाद शुरु हुआ, बचपन में भी खासकर पिता लालू तेजस्वी को समझदार और तेज प्रताप को कम बुद्धिमान समझते रहे। छोटे भाई के और पिता के हाथों तेज प्रताप बार-बार अपमानित होना अच्छा नहीं लगता, लिहाजा वे सिर्फ मां और बहनों से ज्यादा बात करते, पिता से थोड़े दूर-दूर रहने लगे । तेज प्रताप को अपना भावनात्मक संबल मां में दिखता. राबड़ी देवी मां थी, वो अपने बेटे के दिल का हाल शायद समझती थीं, लिहाजा उन्होने तेज प्रताप को ज्यादा प्यार दिया ।

पिता और तेजस्वी की नाराजगी के बाद बहन के साथ रिश्तों की दुहाई देते दिखे तेज प्रताप
पिता और तेजस्वी की नाराजगी के बाद बहन के साथ रिश्तों की दुहाई देते दिखे तेज प्रताप

 

परिवार के नकारे, बहनों के सहारे

राजद से जुड़े एक बड़े नेता बताते हैं कि लालू प्रसाद तेज प्रताप से बेहद नाराज हैं। तेज प्रताप ने रविवार तेजस्वी से मिलने की बहुत कोशिश की लेकिन तेजस्वी के राजनीतिक सलाहकार संजय यादव ने मिलने नहीं दिया। जिस बड़े भाई को बाप और छोटे भाई ने ठोकर मार दी हो, वो कहां जाएगा ? लिहाजा रक्षा बंधन के बहाने तेज प्रताप वे बहनों के साथ अपने प्यार की दुहाई दी, उन्हें बचपन के दिन याद दिलाए और एक के बाद एक बहनों के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट की। लेकिन पिता और छोटे भाई से दार को बहनें कितना पाट पाएंगी, ये अगले कुछ दिनों के बाद ही पता चलेगा।

क्या मीसा और तेज प्रताप हाथ मिला सकते हैं ?

जबतक लालू जिंदा हैं, इसकी संभावना न के बराबर है। क्योंकि राजद लालू यादव की लोकप्रियता के सहारे चल रहा है. बिहार के यादव सिर्फ एक नेता को मानते हैं, वो हैं लालू यादव । कुछ हद तक ये सेंटिमेंटल वोटर हैं। हां, लालू के निधन के बाद क्या होगा, कहा नहीं जा सकता क्योंकि बड़ी बहन और बड़े भाई का अपमान कुछ तो रंग दिखाएगा ही। रामविलास पासवान के निधन के बाद लोकजनशक्ति पार्टी में क्या हुआ, सबने देखा है।

लोयाबाद(धनबाद) : कनकनी में भूमि पूजन के साथ चली बम

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शुरुआत में पुलिस ने गोली चलने की घटना से किया था इनकार
शुरुआत में पुलिस ने गोली चलने की घटना से किया था इनकार

कतरास : बीसीसीएल की कनकनी कोलियरी में  भूमि पूजन के दौरान जमकर बवाल हुआ. गोलियों और बमों के धमाके से इलाका दहल उठा.गोली व बम किसने चलाया यह स्पष्ट नहीं हो पाया है. पुलिस मौके पर पहुंच मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है.हालांकि पुलिस गोली बम चलने की बात से इंकार कर रही है.

इधर ग्रामीणों ने महिला के साथ आउटसोर्सिंग कंपनी के लोगों पर छेड़खानी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग को लेकर थाने का घेराव किया. पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर  शांत कराया. तेतरी देवी और सुरज कुमार सिंह द्वारा दो अलग-अलग लिखित शिकायत पुलिस को दी है.

कंपनी के प्रबंधक रामअवतार बाल-बाल बचे

दरअसल नियोजन मांगने के नाम पर कुछ असामाजिक तत्वों ने फायरिंग की घटना को अंजाम दिया है. गोली-बमबाजी की इस घटना में आउटसोर्सिंग कम्पनी के प्रबंधक रामावतार बाल बाल बच गए. कम्पनी के अन्य लोग भी इस घटना में बचे. घटना से कंपनी के कर्मचारियों में दहशत है.