Monday 6th of July 2026 02:45:41 AM
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EXCLUSIVE: क्या विधानसभा में दलित विधायक को बोलने का अधिकार नहीं है?

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कांग्रेसी विधायक मुझे धमकी देते रहे,मुझे बोलने नहीं दिया, मगर स्पीकर खामोश रहे

बोकारो जिले के चंदनकियारी से भाजपा विधायक अमर बाउरी ने स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो और सत्तापक्ष में शामिल कांग्रेस के कुछ विधायकों पर धमकी देने और जातिसूचक अपशब्द कहने के आरोप लगाए हैं। अमर बाउरी ने कहा कि विधानसभा सत्र के अंतिम दिन जब वो अपने कार्यस्थगन प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए तो कांग्रेस के कुछ विधायक मुझपर तरह-तरह के ताने कस रहे थे, उनमें से एक ने मुझे बाहर निकलने की धमकी दी, मेरी जाति को लेकर, मेरे दलित होने को लेकर खिल्ली उड़ाते हुए ठहाके लगाए गये।अमर बाउरी ने उज्ज्वल दुनिया के प्रधान संपादक पंकज प्रसून से खास बातचीत की। पेश के उस बातचीत के प्रमुख अंश

विधानसभा से रोते हुए बाहर निकले भाजपा के दलित विधायक अमर बाउरी
विधानसभा से रोते हुए बाहर निकले भाजपा के दलित विधायक अमर बाउरी

प्रश्नः- आज सदन में ऐसा क्या हुआ जिसके कारण आप रोते हुए बाहर निकले ?

अमर बाउरीः– ये एक दिन का अपमान नहीं है । मैं पिछले तीन दिनों से विधानसभा के अंदर बोलने की कोशिश कर रहा था। जब भी मैं स्पीकर से इजाजत मांगता वो हंस कर दूसरी ओर देखने लगते। मैंने अंतिम दिन कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया। लेकिन मुझए नियम का हवाला देकर बोलने नहीं दिया गया। अरे! मेरे कार्यस्थगन को मानना या न मानना स्पीकर का अधिकार है। लेकिन मुझे अपनी बात रखने तो देते ? मैं हाथ जोड़कर उनसे गुजारिश करता रहा, मैंने अपना गला पकड़कर उनसे पूछा कि मैं विधायक हूं या नहीं ? मुझे इस सदन में बोलने का अधिकार भी है या नहीं ? क्या मेरा गुनाह बस इतना है कि मैंने दलित परिवार में पैदा लिया ?

प्रश्नः- इसमें दलित की बात कहां से आ गई ?

अमर बाउरीः- कैसे नहीं कहूं कि अनुसूचित जाति का होने की वजह से मुझे नहीं बोलने दिया गया ? जब मैं बोलने के लिए कड़ा होता तो कांग्रेस की ओर से खिल्ली उड़ाई जाती है। मुझे बाहर जाने की धमकी दी जाती है। आप ही बताइए कि आज कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बने बंधु तिर्की ने मेरे रंग को लेकर भद्दा कमेन्ट किया था। मुझे “साउथ का गुंडा” कहा गया. लेकिन क्या कांग्रेस पार्टी से जुड़े किसी भी सदस्य ने इसपर खेद जताया ? क्या कांग्रेस के किसी नेता ने कहा कि रंग को लेकर या जाति को लेकर इस तरह की टिप्पणी गलत है ?

प्रश्नः सिर्फ इसी घटना के कारण आपने उनको सामंतवादी सोच का बता दिया ?

अमर बाउरीः- एक नहीं, मैं कांग्रेस के सामंतवादी सोंच के सैंकड़ो उदाहरण दे सकता हूं । इनलोगों ने हमेशा दलितों को अपने पांव की धूल समझा है, दलितों को सिर्फ वोटबैंक के लिए इस्तेमाल किया। आजादी के बाद से कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी कि दलितों में भी नेतृत्व उभरे। वे इनसे सवाल कर सकें, आंखों में आंखें डालकर बात कर सके। ये लोग सिर्फ अच्छी-अच्छी बातें कर दलितों का वोट लेना चाहते थे। जबसे मोदी जी की सरकार बनी है, तब केन्द्र में सबसे ज्यादा दलित और आदिवासी मंत्री बनाए गये. इनलोगों के कष्ट का असली कारण यही है।

प्रश्नः- तो क्या आप कहना चाहते हैं कि स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो पक्षपात कर रहे हैं ?

अमर बाउरीः- ये मैं नहीं कह रहा। आपलोग खुद फैसला किजिए कि क्या सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रति उनका व्यवहार एक समान है ? क्या उन्होने सत्तापक्ष के इशारे पर बिना किसी से मशवरा किए नमाज के लिए अलग रूम का आवंटन नहीं किया ? इसके लिए नोटिस तक निकाल दिया। स्पीकर बताएं कि संविधान की किस धारा में लिखा है कि विधानसभा के अंदर किसी खास मजहब के पूजा करने के लिए जगह आरक्षित होगी ?

प्रश्नः लेकिन सत्तापक्ष ने तो परंपरा का हवाला दिया है। उनका दावा है कि मुख्यमंत्री रहते बाबूलाल मरांडी ने भी नमाज के लिए अलग कमरे की व्यवस्था की थी ?

अमर बाउरीः- परंपरा और आपसी सहमति एक बात है और उसके लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन निकालना दूसरी बात . क्या बाबूलाल मरांडी की सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया था ? अगर मैं इंसानियत के नाते किसी को पूजा करने की जगह देता हूं तो वो मेरा निजी फैसला हो सकता है, लेकिन जब मैं संवैधानिक पद पर बैठ कर उसका नोटिफिकेशन निकलवा कर इजाजत देता हूं तो फिर इसपर कानूनी और संवैधानिक सवाल होंगे ही। कल को इसी चिट्ठी का आधार बनाकर कोई कह सकता है कि ये उसका संवैधानिक हक है. आप भविष्य में इसके दुष्परिणाम की ओर नहीं देख पा रहे ।

अंतिम प्रश्नः- अब आगे क्या करेंगे आप ?

अमर बाउरीः- मैं इस सवाल को हर स्तर पर उठाउंगा। इस राज्य के दलित समाज के बीच जाउंगा । झारखण्ड के दलितों को फैसला करना है कि क्या उनको बराबरी का अधिकार नहीं है ? इस राज्य की दलित जनता को सोचना है कि 13-14 फीसदी आबादी होते हुए भी उनकी आवाज क्यों दबाई जाती है ? अनुसूचित जाति के लोगों के प्रति कांग्रेस के जहन में जो जहर भरा है, उसे सबके सामने लाना चाहता हूं ।

रोते हुए विधानसभा से निकले अमर बाउरी, कहा

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खुद को बोलने का मौका न मिलने से आहत दिखे अमर बाउरी
खुद को बोलने का मौका न मिलने से आहत दिखे अमर बाउरी

रांची। झारखंड विधानसभा मानसून सत्र के अंतिम दिन चंदनक्यारी से भाजपा विधायक अमर कुमार बाउरी रोते हुए सदन से बाहर निकले। उन्होंने कहा कि मुझे बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर के संविधान के पवित्र मंदिर विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और यह सरकार संविधान और झारखंड विधानसभा के नियमावली के अनुरूप विधायक के अधिकार के तहत पूछे गए प्रश्न और व्यवस्था को दबा रही है। यह कांग्रेस, जेएमएम और आरजेडी के उस मानसिकता को दर्शाती है । ये लोग दलितों को अपने पांव की धूल समझते हैं। मैं बार-बार मिन्नतें करता रहा पर वे लोग मेरी बात को अनसुना करते रहे। राज्य का दलित समुदाय देखे कि कैसे विधानसभा के अंदर एक दलित को बोलने नहीं दिया गया । अब देश का दलित अपनी आवाज को बुलंद करेगा, सड़क से सदन तक की लड़ाई लड़ेगा।

अमर बाउरी ने क्या कहा ?
आंसू मेरी कमजोरी नही बल्कि मेरा समर्पण का संकल्प है। एक विधायक होने के नाते यह मेरा संकल्प है कि दलितों की आवाज के लिए मैं सड़क से सदन तक की लड़ाई लड़ूंगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संरक्षण और बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान से मिले हक और अधिकार के साथ दलितों की आवाज को बुलंद करता रहूंगा।  मेरा गुनाह यह है कि मैंने जो दलितों और धर्मपरिवर्तन को लेकर जो आवाज उठायी है, उससे तिलमिलाई हुई हेमंत सोरेन की सरकार बौखला गयी है।

महिलाओं के बाल खींचे गये, प्रदेश अध्यक्ष का हाथ तोड़ दिया, मेरे नेता को जान से मारने की साजिश रची गई
अमर बाउरी ने कहा कि मैंने बुधवार को विधानसभा में नमाज के लिए कमरा आवंटन और नियोजन नीति को लेकर निकाले गए विधान सभा घेराव कार्यक्रम में जिस तरह से पुलिस ने सरकार के इशारे पर बर्बरता पूर्ण लाठी चार्ज किया, महिलाओं को टारगेट कर उनपर जानलेवा हमला किया गया, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और भाजपा विधायक दल के नेता बाबुलाल मरांडी पर जानलेवा हमला हुआ। इन सभी मुद्दों को लेकर आज मैंने कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया था। लेकिन विधान सभा अध्यक्ष ने मेरे कार्यस्थगन प्रस्ताव पढ़ा तक नही। सदन के अंदर मैं चीखता रहा, चिल्लाता रहा, आसान से मिन्नते करता रहा लेकिन आसान ने मेरी बातों को नजर अंदाज कर दिया।

दलगत आधार पर नहीं होंगे नगर निगम चुनाव, मेयर

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नगरपालिका में स्थानीय व सामान्य नागरिकों का होगा प्रतिनिधित्व
नगरपालिका में स्थानीय व सामान्य नागरिकों का होगा प्रतिनिधित्व

झारखंड नगरपालिका संशोधन विधेयक-2021 विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हो गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस संशोधित विधेयक को विधानसभा के सामने रखा, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से पारित किया। इस विधेयक को लाने के पीछे सरकार ने यह तर्क दिया कि नगर निकाय प्रशासनिक दृष्टिकोण से तृतीय स्तर की सरकार होती है, जिसमें स्थानीय प्रतिनिधित्व आवश्यक है।

राजनैतिक दलगत आधार पर निर्वाचन के प्रविधान से बड़ी राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दलों की आपसी प्रतिस्पर्धा से सामान्य नागरिकों की राजनैतिक आकांक्षाओं की पूर्ति नहीं हो पा रही है तथा इनका प्रतिनिधित्व नहीं हो पा रहा है। अब इस विधेयक के पारित होने से झारखंड नगरपालिका में दलगत नहीं, स्थानीय व सामान्य नागरिकों का प्रतिनिधित्व होगा। सदन ने इस तर्क को सही माना और सर्वसम्मति से यह विधेयक पारित हो गया। अब विधेयक पर राज्यपाल की स्वीकृति के बाद विधि विभाग गजट का नोटिफिकेशन करेगा।

महापौर को इस स्थिति में हटा सकेगी सरकार

यदि राज्य सरकार के मत में महापौर या अध्यक्ष परिषद् की लगातार तीन से अधिक बैठकों में बिना पर्याप्त कारण के अनुपस्थित रहेंगे, जान-बूझकर इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों एवं कर्तव्यों को करने या इंकार करेंगे, अपने कर्तव्यों के निर्वहन में कदाचार का दोषी पाए जाएंगे, अपने कर्तव्यों के निर्वहन में शारीरिक या मानसिक तौर पर अक्षम होंगे, किसी आपराधिक मामले का अभियुक्त होने चलते छह माह से अधिक अवधि तक फरार होंगे तो राज्य सरकार महापौर या अध्यक्ष को स्पष्टीकरण के लिए समुचित अवसर प्रदान करने के बाद उन्हें हटाने का आदेश दे सकेगी। इस प्रकार हटाया गया महापौर या अध्यक्ष शेष पदावधि के दौरान महापौर या अध्यक्ष के रूप में फिर से निर्वाचन का पात्र नहीं होगा।

निजी कंपनियों में स्थानीय के लिए 75% आरक्षण वाला विधेयक विधानसभा से पारित

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कंपनी 60 दिन के अंदर अपीलीय प्राधिकार में अपील कर सकेगी
कंपनी 60 दिन के अंदर अपीलीय प्राधिकार में अपील कर सकेगी

झारखंड में निजी कंपनियों में 75 प्रतिशत पद स्थानीयों के लिए आरक्षित होंगे। इससे जुड़ा विधेयक गुरुवार को विधानसभा में पास हो गया । अब सिर्फ इसका गजट नोटिफिकेश आना बाकी है। राज्य मंत्रिमंडल ने पहले ही इसे पास कर दिया है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद विधि विभाग गजट नोटिफिकेशन निकालेगा। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद विधि विभाग गजट नोटिफिकेशन निकालेगा।

40 हजार या उससे कम वेतन वाले पदों पर स्थानीय की नियुक्ति

राज्य के निजी कंपनियों में 40 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन वाले 75 फीसद पद पर अब स्थानीय युवक-युवतियों के लिए आरक्षित किए जाएंगे। विधानसभा में श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने बुधवार को प्रवर समिति की रिपोर्ट के आधार पर विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

10 या उससे ज्यादा कर्मचारी वाली कंपनियों पर ही लागू

इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद अब राज्य में निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान को स्थापित करने के लिए विस्थापित हुए परिवार के उम्मीदवार, संबंधित जिले के स्थानीय नौजवान और समाज के सभी वर्गों को नौकरी में अवसर देना होगा। यह दस या दस से अधिक व्यक्तियों का नियोजन करने वाली उन संस्थाओं पर भी लागू होगा, जिन्हें सरकार मान्यता देती है। इससे संबंधित नियमावली में दर्ज विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करने पर कम से कम 10 हजार से पांच लाख रुपये तक जुर्माना लग सकता है।

श्रम विभाग के पोर्टल पर निबंधित युवाओं को ही लाभ

श्रम विभाग के पोर्टल पर पंजीकृत कराने वाले युवाओं को ही इसका लाभ मिलेगा। इसमें केंद्र व राज्य सरकार के उपक्रम से जुड़ी आउटसोर्स कंपनियां भी इस कानून के दायरे में लाई गई हैं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सक्षम प्राधिकार कंपनी के दावे को स्वीकृत या खारिज कर सकेगा। इससे संबंधित आदेश को कंपनी 60 दिन के अंदर अपीलीय प्राधिकार में अपील कर सकेगी।

विधानसभा के अंदर “नमाज़ रूम” के फसले पर पुनर्विचार के लिए बनेगा विधायकों का पैनल

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विधानसभा समिति करेगी "नमाज रूम " के फैसले पर पुनर्विचार- स्पीकर
विधानसभा समिति करेगी “नमाज रूम ” के फैसले पर पुनर्विचार- स्पीकर

झारखण्ड विधानसभा के अंदर अलग से नमाज रूम का आवंटन हो या नहीं, अब इसका फैसला विधानसभा की कमेटी करेगी। इस समिति में सभी दलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे । विधानसभा समिति अपनी रिपोर्ट स्पीकर को बताएगी और उसी आधार पर स्पीकर फैसला करेंगे कि विधानसभा भवन में नमाज के लिए अलग से कमरा होना चाहिए या नहीं।

सरफराज अहमद ने रखा प्रस्ताव

विवादित जगहों पर नमाज पढ़ने से अल्लाह खुश नहीं होते- सरफराज अहमद
विवादित जगहों पर नमाज पढ़ने से अल्लाह खुश नहीं होते- सरफराज अहमद

विधायक सरफराज अहमद से कहा कि पिछले तीन-चार दिनों के अंदर झारखण्ड में जो कुछ हुआ वो हम सबने देखा है। ऐसा लगता है कि इस राज्य में धार्मिक उन्माद पैदा करने की कोशिश की जा रही है जो किसी भी प्रकार से राज्य अथवा यहां के लोगों के लिए ठीक नहीं है। स्पीकर ने परंपरा का हवाला देते हुए एक साफ जगह नमाज अदा करने के लिए दी थी । बाबूलाल मरांडी जब राज्य के पहले मुख्यमंत्री थे, तब उन्होने भी बिहार के जमान से चली आ रही ये परंपरा कायम रखी थी। लेकिन अब कुछ दलों को इससे आपत्ति है तो फिर इस विवाद के समाधान का एक ही उपाय है कि एक विधानसभा की कमेटी बनाई जाय, वो हफ्ते-दस दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट स्पीकर को सौंप दे और फिर स्पीकर इस बात का फैसला करें कि हमारे जो अल्पसंख्यक स्टाफ हैं, उनके नमाज पढ़ने के लिए कोई जगह होनी चाहिए या नहीं ।

बाबूलाल मरांडी ने जताई आपत्ति

मैने अपने कार्यकाल में नमाज के लिए कमरा अलॉट नहीं किया था- बाबूलाल
मैने अपने कार्यकाल में नमाज के लिए कमरा अलॉट नहीं किया था- बाबूलाल

सरफराज अहमद की बात पर आपत्ति जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि चूंकि सरफराज अहमद ने मेरा नाम लिया है, इससे मुझे भी बोलने का मौका मिलना चाहिए। पहली बात तो ये कि मैंने मुख्यमंत्री रहते नमाज पढ़ने के लिए विधानसभा के अंदर किसी को कोई कमरा अलॉट नहीं करवाया था। लगातार सत्तापक्ष से इस बारे में भ्रामक बातें मीडिया में कही जा रही है। अगर पुराने विधानसभा भवन के अंदर नमाज पढ़ने के लिए कोई जगह थी भी तो वो मेरे आदेश से नहीं दी गई थी। विधानसभा संवैधानिक जगह है, इसमें किसी भी धर्म विशेष के लिए जगह का रिजर्वेशन नहीं है।

प्रदीप और बंधु ने किया विधानसभा समिति बनाने का समर्थन

प्रदीप यादव ने कहा कि सरफराज अहमद, जो खुद मुसलमान हैं, जब वे कह रहे हैं कि विवादित जगह पर नमाज पढ़ना नहीं चाहिए तो फिर किसी को क्या आपत्ति हो सकती है ? यही तो इस देश के संस्कृति की खुबसूरती है कि मुसलमान खुद कह रहा है कि सरकार नमाज रूम देने के फैसले पर पुनर्विचार करे। बंधु तिर्की ने भी कहा कि इस मसले पर विवाद बढ़ना नहीं चाहिए और मैं सरफराज अहमद के इस बात का समर्थन करता हूं कि इसपर विधानसभा की एक कमेटी बने, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों तरफ के लोग शामिल हों।

पहले ही दिन ये कर देते तो सदन का समय बचता- भानु प्रताप शाही

भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि यही तो हम पहले दिन से बोल रहे थे कि हमें किसी धर्म या मजहब से कोई दुश्मनी नहीं है। हम तो सवाल कर रहे थे कि आखिर किसकी सलाह से विधानसभा के अंदर एक खास धर्म के लिए जगह आरक्षित की गई। भानु प्रताप शाही ने कहा कि ये भाजपा का दबाव ही है कि आज सत्ता पक्ष के लोग विधानसभा समिति बनाने को कह रहे हैं. अगर हम विरोध नहीं करते तो सत्ता पक्ष तो अपने तुष्टीकरण की राजनीति में फैसला ले चुका था।

स्टीफन मरांडी के इस बात पर एकजुट दिखा सत्ता पक्ष और विपक्ष

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स्टीफन मरांडी ने विधायक कोटा 4 से बढ़ाकर 8 करोड़ करने की मांग की, विपक्ष ने किया समर्थन
स्टीफन मरांडी ने विधायक कोटा 4 से बढ़ाकर 8 करोड़ करने की मांग की, विपक्ष ने किया समर्थन

झारखण्ड विधानसभा का मॉनसूत्र सत्र अपनी तमाम कड़वाहटों के लिए जाना जाएगा। सरकार को सिर्फ अनुपूरक बजट और अपने जरुरत के विधेयक पास करवाने थे, लिहाजा उसने बिना चर्चा के ध्वनिमत से पास करवा लिए। इसी तरह विप7 को भी अपनी ताकत दिखानी थी, अपने वोट बैंक को ऐड्रेस करना था, इस मामले में विपक्ष भी सफल रहा। लेकिन पूरे विधानसभा सत्र के दौरान झामुमो विधायक स्टीफन मरांडी की एक मांग पर सत्ता पक्ष और विपक्ष न सिर्फ सहमत था, बल्कि दोनों ओर से मेज थपथपाकर उस मांग का स्वागत भी किया गया।

क्या थी स्टीफन मरांडी की मांग ?

स्टीफन मरांडी ने सरकार से मांग की कि महंगाई बहुत है। उन्होने कहा कि सारे मैटेरियल का रेट बढ़ा हुआ है । ऊपर से जीएसटी के कारण भी बहुत नुकसान हो रहा है। इसलिए मेरी सरकार से मांग है कि विधायक फंड 4 करोड़ से बढ़ाकर आठ करोड़ किया जाय ।

स्टीफन दा के इतने कहते ही क्या सत्ता पक्ष और क्या विपक्ष, सभी ने मेज थपथपाकर स्वागत किया। स्पीकर ने भी हंसते हुए कहा कि ठीक है, मैं इस मामले को सरकार से दिखवा लेता हूं।

भानु प्रताप शाही ने किया समर्थन

पूरे सत्र के दौरान नारेबाजी करते दिखे भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही पहली बार झामुमो विधायक का समर्थन करते दिखे । उन्होने कहा कि छ-सात साल पहले विधायकों का फंड चार करोड़ तय किया गया था । तब से हर काम का एस्टीमेट बढ़ गया है। जिस पीसीसी सड़क को हमलोग 17 हजार में बनवाते थे, आज वो एक लाख तक पहुंच गया है। महंगाई भी बढ़ी है, जीएसटी से लेकर मिट्टी तक पर रॉयल्टी लग रही है।  भानु प्रताप शाही ने कहा कि स्टीफन दा सबसे वरीष्ठ सदस्य है। उनकी मांग है कि विधायक कोटा 8 करोड़ कर दिया जाय तो सदन के किसी सदस्य को इसपर आपत्ति नहीं होनी चाहिए । या तो सरकार विधायक कोटा समाप्त कर दे, या फिर इसे बढ़ाकर आठ करोड़ कर दे, तभी हम लोगों की इज्जत बढ़ सकेगी ।

सदन के “ठेंगा” दिखाने को लेकर सतापक्ष

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सदन के अंदर आजसू के लम्बोदर महतो विधवा और दिव्यांगो के पेंशन से जुड़े सवाल रख रहे थे। विधायक प्रदीप महतो कुछ बोलने के लिए खड़े ही हुए कि कांग्रेस के आलमगीर आलम ने स्पीकर का ध्यान अपनी ओर दिलाया। मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि विपक्षी भाजपा के लोग विरोध तो कर ही रहे थे, अब वे “ठेंगा” दिखा रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अगर ऐसा ही चलता रहा तो विधानसभा के अंदर स्थिति शर्मनाक हो जाएगी ।

मंत्री आलमगीर आलम ने क्या कहा ?

महोदय,

ये लोग आवाज तो लगा ही रहे हैं, लेकिन हाथ-पैर का…कभी ये लोग ठेंगा दिखा रहे हैं, बांह चढ़ा रहे हैं…क्या मतलब है इसका ? क्या मारपीट करना चाहते हैं ? ये असंसदीय है। इसपर कार्यवाही करना चाहिए….आपलोग ठेंगा दिखाइएगा ? माफी मांगना होगा इसपर….कल ही हम देख रहे थे कि ये लोग टेबल पर चढ़कर बांह चढ़ा रहा था । क्या मतलब है इसका ? ये असंसदीय परंपरा है।  इन लोगों को माफी मांगना चाहिए । अगर इसी तरह चलता रहा तो स्थिति शर्मनाक हो जाएगी । कहां का नियम है यह कि विपक्ष, सत्तपक्ष को ठेंगा दिखाए ?

आलमगीर आलम के इतना कहते ही सत्ता पक्ष के लोग खड़े होकर “माफी मांगना होगा, माफी मांगना होगा” के नारे लगाने लगे। दोनों ओर से हो रही शोरगुल को देखते हुए स्पीकर ने विधानसभा की कार्रवाई दोपहर 12.45 तक स्थगित कर दी ।

लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा

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सदन के अंदर काली पट्टी लगाकर प्रदर्शन कर रहे भाजपा विधायक
सदन के अंदर काली पट्टी लगाकर प्रदर्शन कर रहे भाजपा विधायक

बुधवार को आजसू और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज के खिलाफ तमाम विपक्षी दलों ने गुरुवार को काला दिवस मनाया। विरोध स्वरूप भाजपा के सभी विधायक काले गमछे लगाकर विधानसबा पहुंचे. कुछ ने अपने सिर पर पगड़ी की तरह काले गमछों को बांद रखा था तो कुछ गले में लटकाकर ही सदन की कार्यवाही में भाग ले रहे थे।

पुलिस के डंडों के जोर पर सरकार चलाना चाहते हैं हेमंत सोरेन- अमर बाउरी

काला दिवस मनाने के सवाल पर पूछे जाने पर चंदनकियारी से भाजपा विधायक अमर बाउरी ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता हिंसा तो कर नहीं रहे थे. वे चुपचाप विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में विधानसभाध्यक्ष को मांगपत्र सौंपा जाना था। लेकिन ये लोग सत्ता के अहंकार में इतने चूर हो चुके हैं कि इन्हे विपक्ष का विरोध-प्रदर्शन भी बर्दाश्त नहीं । अमर बाउरी ने बताया कि पहले तो बिना किसी से पूछे एक धर्म विशेष की पूजा-अर्चना के लिए विधानसभा में कमरा अलॉट कर दिया और अब अपने उसी गलत निर्णय के जिद में विपक्ष पर लाठियां बरसा रहे हैं।

लाठीचार्ज की कोई जरुरत ही नहीं थी, ये सत्ता की ताकत का प्रदर्शन करने के लिए किया गया- सुदेश महतो

सिल्ली से आजसू के विधायक सुदेश महतो ने कहा कि पिछले कई दिनों से ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर सीएम को स्मार पत्र सौंपने का सिलसिला चल रहा था। राज्य भर से कार्यकर्ता लोगों के हस्ताक्षर लेकर आए थे और उन्हें मुख्यमंत्रीजी को सौंपा जाना था। ये पिछले दो-तीन दिनों से चल रहा था। लेकिन बुधवार को सत्ता के नसे में और सिर्फ अपनी चाकत दिखाने के लिए आजसू कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया गया। खैर वक्त सबका एक समान नहीं रहता, कल हेमंत सोरेन भी विपक्ष में हो सकते हैं।

खुद को “ऑटो एजेंट” कहे जाने के खिलाफ ऑटो से विधानसभा पहुंचे बन्ना गुप्ता

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खुद ऑटो चलाकर विधानसभा पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता
खुद ऑटो चलाकर विधानसभा पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता

रांची। मंगलवार को रांची के भाजपा विधायक सीपी सिंह ने बन्ना गुप्ता को ऑटो एजेंट कहा था। सीपी सिंह ने कहा था कि ऑटो स्टैंड की एजेंटी की आदत गई नहीं तुम्हारी । सीपी सिंह के इस बयान के खिलाफ स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ऑटो से विधानसभा पहुंचे। बन्ना गुप्ता खुद ऑटो ड्राइव कर रहे थे और उनके आसपास सुरक्षाकर्मी दौड़ रहे थे। इसे देखते ही मीडिया के कैमरे बन्ना गुप्ता की ओर मुड़ गये।

 

खुद को ऑटो एजेंट बताए जाने को दलित-पिछड़ा और मुसलमानों का अपमान बताया

बन्ना गुप्ता ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा आदिवासी दलित पिछड़ा और मुस्लिम विरोधी है । जब सीपी सिंह ने उनके ऑटो एजेंट होने की बात सदन में कह दी तो इसके विरोध स्वरूप में वह ऑटो से आए हैं। मंत्री बन्ना ने कहा कि कोई भी धंधा और कोई भी काम या व्यवसाय छोटा नहीं होता है। यह भाजपा की सामंती सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है तो पिछले समुदाय से आने वाले टेंपो चलाने वाले मंत्री क्यों नहीं बन सकता है। बन्ना गुप्ता ने कहा कि भाजपा को दलित-पिछड़ों और मुसलमानों से नफरत है।

गिरिडीहः अवैध उत्खनन के कारण वर्षो पुराना अस्पताल ध्वस्त, आसपास के घरों में दरारें

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भू-धंसान की घटना के बाद क्षेत्र के लोग डरे हुए हैं, सीसीएल प्रबंधन के प्रति आक्रोश
भू-धंसान की घटना के बाद क्षेत्र के लोग डरे हुए हैं, सीसीएल प्रबंधन के प्रति आक्रोश

अमित सहाय/ उज्ज्वल दुनिया

गिरिडीह । सीसीएल बनियाडीह इलाके में भू-धंसान का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। सीसीएल के सुरक्षा विभाग और सिविल विभाग के शिथिलता के कारण लगातार भू-धंसान की घटनाएं सामने आ रही हैं। सीसीएल प्रबंधन द्वारा अवैध उत्खनन पर लगाम नहीं लगाने के कारण सीसीएल अस्पपताल में कार्यरत नर्स सुशीला कुमारी का क्वार्टर धंस गया। बुधवार को देर रात तेज धमाकों के साथ हुए भू-धंसान से अफरातफरी का माहौल हो गया। धमाके की आवाज सुनते ही समय पर सुशीला कुमारी अपने दो बेटी, एक बेटा और नाती समेत 8 लोग को लेकर फौरन क्वार्टर से बाहर निकल गयी। जिससे बड़ा हादसा टल गया।

भू-धंसान की इस घटना में अन्य कई घरों में भी दरारें पड़ गई हैं। अस्पताल परिसर के पास स्थित बबलू भट्टाचार्य, केशु तिवारी, सुरेश प्रसाद आदि के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए। पहले भी भू-धंसान की घटना में सीसीएल अस्पताल की चहारदीवारी भी गिर गई थी। लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाओं के बाद क्षेत्र के लोग डरे हुए हैं। साथ ही लोगों में सीसीएल प्रबंधन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

अवैध उत्खनन करने वालों के प्रति सीसीएल मेहरबान क्यों ?
अवैध उत्खनन करने वालों के प्रति सीसीएल मेहरबान क्यों ?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बड़े पैमाने पर हुए अवैध खनन से अस्पताल और इसके आसपास का हिस्सा पूरी तरह से खोखला हो चुका है। जिससे खतरा बढ़ा हुआ है। अभी कुछ समय पहले ही अस्पताल के पीछे स्थित पानी टंकी के पास भू-धंसान की घटना भी हुई थी। भू-धंसान के मूल कारणों पर ध्यान नहीं देने का आरोप प्रबंधन पर लोग लगा रहे हैं ।

लगातार खबर के प्रकाशन के बाद भी सीसीएल प्रबंधन का ध्यान इस ओर नहीं गया है, इसे लेकर कई बार शिकायत भी की गई है। इस संबंध में प्रबंधन को कई संगठन ने बराबर आगाह किया। अवैध कोयला उत्खनन रोकने के लिए भी प्रबंधन पर दबाव बनाते रहे हैं। लेकिन प्रबंधन द्वारा इस ओर कोई समुचित कार्रवाई नहीं किया। सुुुुुुत्रो ने बताया कि सीसीएल प्रबंधन की घोर लापरवाही है। अवैध उत्खनन को बढ़ावा देने में प्रबंंधन की खुुुब भुमिका रही है।

इधर घटना की सूचना मिलने पर सीसीएल परियोजना पदाधिकारी एस. के सिंह सुरक्षा विभाग और सिविल विभाग के कर्मियों को लेकर मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मौके पर उन्होंने कहा कि परिवार को दूसरे क्वार्टर में शिफ्ट कर दिया जाएगा। वहीं अस्पताल को दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा।

धू-धंसान के बाद जमींदोज मकान
धू-धंसान के बाद जमींदोज मकान

गिरिडीहः आयरन ओर से भरे तीन ट्रक जब्त छह गिरफ्तार

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मुफ्फसिल थाना गिरिडीह की फाइल तस्वीर
मुफ्फसिल थाना गिरिडीह की फाइल तस्वीर

गिरिडीह । मुफ्फसिल थाना पुलिस ने आयरन ओर के बिलेट बनाने के काम में आने वाले रॉ-मैटेरियल फाईनंस से भरे तीन ट्रक को जब्त किया है । तीनों ट्रकों को पुलिस ने औद्योगिक क्षेत्र के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से जब्त किया गया ।

पुलिस ने इन तीनों ट्रक के साथ एक वीआईपी गाड़ी को भी जब्त किया है, जो तीनों ट्रकों को लेकर गिरिडीह आ रहे थे । वीआईपी वाहन में भी कुछ लोगों के होने की बात कही जा रही है ।तीनों ट्रकों में जब्त फाईनंस की कीमत दो लाख के बतायी जा रही है ।

गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने तीनों ट्रक को धनबाद-गिरिडीह के बराकर नदी के समीप और मोहनपुर के पास से जब्त किया गया है ।
तीनों ट्रकों के चालक और उप-चालकों को भी गिरफ्तार कर पूछताछ किया जा रहा है। गिरफ्तार चालक और उप चालक बिहार के रहने वाले बताए जा रहे हैं । जबकि वीआईपी गाड़ी में मौजूद लोग उड़ीसा के रहने वाले हैं ।

09 SEPT 2021

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सदन में गूंजा लाठीचार्ज का मुद्दा, बीजेपी विधायक स्पीकर के टेबल पर चढ़े, कागज फाड़कर स्पीकर पर उड़ाए

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नमाज रूम का आदेश वापस नहीं लेती तो सड़कों पर खून बहेगा- भानु प्रताप शाही
हंगामे के बीच सरकार ने पास करवा लिए तीन विधेयक

नमाज के लिए अलग कमरे का विरोध कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज का मुद्दा विधानसभा में भी उठा। बीजेपी के विधायकों ने इस मामले पर जमकर हंगामा किया। विधायक स्पीकर टेबल पर चढ़ गए और कागज फाड़कर स्पीकर की तरफ उड़ाए। इस दौरान स्पीकर इन्हें समझाते रहे।

हंगामे के बीच ही सदन में झारखंड माल व सेवा कर संशोधन विधेयक 2021, झारखंड नगर पालिका संशोधन विधेयक 2021 और निजी क्षेत्र में स्थानीय उम्मीदवारों का नियोजन विधेयक तीन विधेयक को पारित कर दिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही को गुरुवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

सरकार स्वतंत्र आवाज को दबा रही है: नीलकंठ सिंह मुंडा

इससे पहले सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होते बीजेपी विधायक अनन्त ओझा ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया। नीलकंठ सिंह ने कहा कि हमलोग नमाज़ वाले मुद्दे पर शांति पूर्ण तरीके बसे विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं पर सरकार लाठी चार्ज करा दी। नीलकंठ सिंह ने कहा कि यह सरकार लोकतंत्र की आवाज को दबा रही है।

संविधान बचाने के लिए गोली खाने के लिए भी तैयार हैं

नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि संविधान को बचाने के लिए BJP का हर कार्यकर्ता गोली खाने को तैयार है। CM जवाब दें कि लोकतंत्र बचेगा कि नहीं। इस दौरान विधायक वेल में आकर हेमंत सोरेन सरकार होश में आओ का नारा लगा रहे थे।

बंधू तिर्की और भानू प्रताप शाही के बीच वेल में बहस

इसी विरोध के बीच कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी, बंधु तिर्की, उमाशंकर अकेला भी वेल तक पहुंचे। BJP नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बंधु तिर्की और भानु प्रसाद के बीच तीखी बहस भी हुई।

झारखण्ड की बच्चियों को बाहर बेचने वाले बड़े गिरोह का खुलासा, चार लड़कियां रेस्क्यू

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गिरिडीहः  जिले के तिसरी प्रखंड के गरीब नाबालिग बच्ची को बड़े प्रदेश मे काम और काम के बदले उचित दाम दिलाने का झांसा देकर शोषण करने वाले बड़े गिरोह का उद्भेदन किया गया है। तिसरी प्रखण्ड के लोकई, चोरनीतरी, मंसाडीह आदि क्षेत्रो में कई ऐसे गिरोह है जो इस गौरखधंधे में लगे है। तिसरी प्रखंड के खीजूरी पंचायत के डोमासार गांव की 4 नाबालिक बच्ची दलाल के चक्कर में फंस कर दिल्ली के चार अलग अलग मकान मे घरेलू काम मसलन झाड़ू, पोच्छा,भोजन बनाना,कपड़ा साफ करने लगी।

4 नाबालिक बच्ची दिल्ली के घर के भीतर ही कैद रहकर काम करना पड़ता था। उन्हें अभिभावको से भी बात करने भी नहीं दिया जाता था। इन बच्चियों को यह भी पता नहीं था कि वह दिल्ली के किस शहर में है। आठ माह बीत जाने के बाद भी जब बच्चियों से उनके परिजनों की कोई बात चीत नही हो पायी तो परिजन ने अपने बच्ची के लिए 1098 में सूचना देकर पुरी वस्तु स्थिति से अवगत कराया। दलाल पर दवाब बना बच्चियों को सकुशल वापस लाया गया।

अभिभावको ने बताया कि दलाल तिसरी प्रखंड के चोरनीतरी निवासी हीरो राय है। जिसके माध्यम से अपने बच्चों को प्रदेश भेजा जाता है। बाद में चाइल्डलाइन के प्रतिनिधियों ने दूरभाष पर दलाल पर कानूनी कार्रवाई करने का दबाव बनाया। जिसके बाद चारों नाबालिग बच्ची अनीता मरांडी पिता मुंशी मरांडी (16 वर्ष), मेरी बास्की पिता रति बास्की(16 वर्ष), तालको बास्की पिता सोनू बास्की (15वर्ष) एवं मोनिका मुर्मू पिता गुरु मुर्मू (17 वर्ष) को सकुशल दिल्ली से गिरिडीह वापस लाया गया ।

गैंगस्टर अमन साहू के दो गुर्गों को एनआईए ने रिमांड पर लिया, जानिए पूरा मामला

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उज्जवल दुनिया संवाददाता (अजय निराला), हजारीबाग। कोयलांचल में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर दहशत कायम करने वाले रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद गैंगस्टर अमन साहू गैंग के दो गुर्गों अजय तुरी और सैफ अली अंसारी को एनआईए ने जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा हजारीबाग से 10 दिनों की रिमांड पर लिया है।

दोनों को दिसम्बर 2020 को लातेहार के तेतरियाखाड़ में हुई गोलीबारी, आगजनी और विस्फोट के मामले में रिमांड पर लिया गया है।

घटना की जांच एनआईए कर रही है।

इससे पहले रांची जेल में बंद अमन साहू और धनबाद जेल में बंद सुजीत सिन्हा को 11 जून को पांच दिनों की रिमांड पर लेकर एनआईए पूछताछ कर चुकी है।

दोनों के अलावा अन्य पर एनआईए ने चार्जशीट भी दाखिल कर दिया है।

चार्जशीट में अमन साहू और सुजीत सिन्हा पर जबरन वसूली के लिए जेल से साजिश रच अपने गुर्गों के माध्यम से आगजनी, फायरिंग और विस्फोट करवाने का आरोप लगाया गया है।

इधर जय प्रकाश नारायण केंद्रीय कारा हजारीबाग से अजय तुरी और सैफ अली को एनआईए की टीम दस दिनों की रिमांड पर लेकर अपने साथ ले गई है। दोनों आरोपियों से एनआईए की टीम पूछताछ करेगी।