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चौका

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सुबह आठ बजे के करीब हुआ हादसा
सुबह आठ बजे के करीब हुआ हादसा

सरायकेला: सरायकेला जिला के चौका थाना क्षेत्र के चौका-कांड्रा सड़क मार्ग घाटदुलमी घाटी के पास शनिवार की सुबह करीब 8 बजे एक बेलगाम बस ने तीन लोगों की जान ले ली।

दरअसल ईचागढ़ प्रखंड के गौरांगकोचा(पुशाकुन) से एक स्विफ्ट कार (JH01C S9984) पर सवार होकर एक बच्चा समेत चार लोग चाईबासा के जगन्नाथपुर जा रहे थे। इस दौरान चौका-कांड्रा सड़क मार्ग के घाटदुलमी घाटी के समीप विपरीत दिशा से आ रही बस ने स्विफ्ट कार को जोरदार टक्कर मार दी। जहां मौके पर ही समीर अंसारी(21) ओर रेशमा खातून(26) की मौत हो गई, ओर अन्य दो लोग घायल हो गए।

हादसे की जगह पर रेशमा खातून का मृत शरीर
हादसे की जगह पर रेशमा खातून का मृत शरीर

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे और घटना की सूचना चौका थाना की पुलिस को दी। जहां पुलिस ने स्थानीय लोगो की सहयोग से घायलों को अस्पताल भेज दिया। जहां रास्ते मे एक की मौत हो गई। उनका नाम फिरोज अंसारी(32) है। बताया जा रहा है कि रेशमा खातून ओर फिरोज अंसारी पति पत्नी है। जबकि घटना में उनके बेटे नियाज अंसारी(4) को भी मामूली चोट लगी है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद बस को पुलिस ने जब्त कर लिया है। वही बस का ड्राइवर मौके से फरार हो गया।

जुम्मे की नमाज अदा कर मामा घर आया था समीर

कुकड़ू प्रखंड के तिरुलडीह का निवासी मृतक समीर अंसारी शक्रवार को जुम्मे की नमाज अदा करने के बाद दोपहर तीन बजे घर से अपने मामाघर ईचागढ़ के गौरांगकोचा(पुशाकुन) आया था। वही शनिवार की सुबह समीर अंसारी अपने स्विफ्ट कार से अपने रिश्तेदार गौरांगकोचा (पुशाकून) निवासी मामा का बेटा फिरोज अंसारी, उसकी पत्नी रेशमा खातून व चार वर्षीय बेटे नियाज अंसारी को लेकर जगन्नाथपुर जा रहा था। तभी घाटदुलमी घाटी के पास सड़क दुघर्टना में समीर अंसारी व रेशमा खातुन की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतक समीर अंसारी, कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के कुकड़ू प्रखंड अध्यक्ष शमीम अंसारी का बेटा है। इधर घटना के बाद उनके परिजनों को रो-रो कर बुरा हाल है।

फ्लैट खरीद रहे हैं तो सावधान, रेरा ने 30 प्रोजेक्ट रिजेक्ट कर दिए हैं

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रेरा ने धनबाद में अबतक 30 प्रोजेक्ट कर दिए हैं रिजेक्ट
रेरा ने धनबाद में अबतक 30 प्रोजेक्ट कर दिए हैं रिजेक्ट

धनबाद। झारखण्ड में बिना रजिस्ट्रेशन कराए अपार्टमेंट का निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्ती बरतनी शुरू हो गई है। जिन बिल्डर्स ने रेरा के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं कराए हैं, उनपर किसी तरह की रियायत नहीं बरती जाएगी । रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ही कोई बिल्डर प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है। इसलिए कहीं भी फ्लैट बुक कराने से पहले ये जरूर सुनिश्चित कर लें कि आपके बिल्डर ने रेरा के तहत रजिस्ट्रेशन करवा रखा है या नहीं ?

अकेले धनबाद में अबतक 30 प्रोजेक्ट हो चुके हैं रिजेक्ट

शुक्रवार को खबर आई कि रेरा ने धनबाद में चल रहे 15 प्रोजेक्ट को रेरा ने रिजेक्ट कर दिया है। इन प्रोजेक्ट्स में अब बिल्डर्स फ्लैट का काम पूरा नहीं कर सकेंगे। रेरा ने ऐसा दूसरी बार किया है। इससे पहले भी 15 प्रोजेक्ट को रेरा ने रिजेक्ट कर दिया था। इस तरह अकेले धनबाद में 30 प्रोजेक्ट रिजेक्ट हो चुके हैं।

किसी भी प्रोजेक्ट के शुरू करने से पहले रजिस्ट्रेशन करवाना आनिवार्य

रेरा के तहत किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। इसके लिए बिल्डर्स ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। अब तक रेरा में ऑफलाइन तरीके से 589 और ऑनलाइन तरीके से 115 प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हैं। जबकि 99 प्रोजेक्ट्स को रेरा ने पेपर अपडेट नहीं होने की वजह से रिजेक्ट कर दिया है।

नमाज़ Vs हनुमान चालीसा प्रकरण: क्या कहती है बोकारो की जनता?

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बोकारो में नमाज़ बनाम हनुमान चालीसा के मुद्दे पर जबरदस्त ध्रुवीकरण
बोकारो में नमाज़ बनाम हनुमान चालीसा के मुद्दे पर जबरदस्त ध्रुवीकरण
शंभूनाथ पाठक/ उज्ज्वल दुनिया संवाददाता  
बोकारो । राज्य विधानसभा के अध्यक्ष द्वारा अल्पसंख्यक विधायकों के लिए विधानसभा में नमाज पढ़ने को लेकर कमरा आवंटित करने के संदर्भ में जारी पत्र के बाद हो रहे जबरदस्त विरोध तथा इसके विरोध में भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए गए आंदोलन पर पुलिस द्वारा हुए लाठीचार्ज कि चारों ओर न सिर्फ निंदा हो रही है बल्कि सरकार पर तुष्टीकरण का आरोप लग रहा है ।
इस मुद्दे को लेकर जहां एक और भारतीय जनता पार्टी राज्य के सभी जिलों में प्रखंड मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाकर विरोध जता रही है,  वही बहुसंख्यक समाज  अब चौक चौराहों पर इस मुद्दे पर यह चर्चा करने लगे  है कि हेमंत सरकार की तुष्टीकरण नीति से इन लोगों का भला होने वाला नहीं है।  जिससे इन लोगों को अब आने वाले समय में एक नई सोच के तहत रणनीति बनानी होगी ।
आम लोगों का कहना है कि सरकार के लिए यह प्रकरण गले की फांस बन गई है और तेजी से बदल रहे राजनीतिक समीकरण के कारण सरकार बैकफुट पर आ गई है और इन्हें डैमेज कंट्रोल करना ही होगा अन्यथा बहुसंख्यक समाज के कोप भाजन का शिकार हेमंत सोरेन सरकार को आने वाले समय में बनना पड़ सकता है ।
चर्चा के मुताबिक लोगों का कहना यह है कि छह दशक से कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति की जिसका खामियाजा अब कांग्रेस को भुगतना पड़ रहा है । स्थिति उसकी यह है कि क्षेत्रीय दल से भी नाजुक हालात के दौर से कांग्रेस गुजर रही है ।
भाजपा भी इस मुद्दे को अपने हित में पुरजोर तरीके से भुनाने का प्रयास कर रही है । भाजपा समर्थित लोगों का कहना है कि हेमंत सोरेन सरकार ने बहुसंख्यक की भावनाओं को नजरअंदाज किया है । इन लोगों ने तथा आम जनता ने भी इस संदर्भ में जारी किए गए पत्र को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है ताकि समाज में बेहतर संदेश जा सके ।
बोकारो की जनता का यह भी कहना है कि ऐसे मुद्दे पर विधानसभा सत्र का समय नमाज और हनुमान चालीसा में बर्बाद हो गया । राज्य हित में जितने काम होने चाहिए थे नहीं हुए । जहां सत्ता पक्ष और सरकार हंगामे के कारण इस मुद्दे पर काम नहीं कर सकी, वहीं दूसरी ओर भाजपा के विधायक ढोलक झाल बजाने में पूरा का पूरा समय बर्बाद कर दिया ।
आम जनता का यह भी मानना है कि लोकतंत्र के मंदिर में धर्म के मुद्दे पर किसी तरह का हंगामा नहीं होना चाहिए इसका प्रभाव राज्य के विकास पर पड़ता है, समाज में वैमनस्यता बढ़ती है । इन मुद्दों को देखते हुए सरकार को इस मसले पर  शीघ्र कोई निर्णय लेना चाहिए ताकि समस्या का समाधान हो और राज्य का विकास निर्बाध गति से चलता रहे । अब देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला कहां जाकर ठहरता है ?

महाधिवक्ता का मंतव्य कानून नहीं, इसे मानने के लिए बाध्य नहीं  हूं:  आशा लकड़ा 

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मेयर और नगर आयुक्त के बीच विवाद मे नया माेड़  
मेयर और नगर आयुक्त के बीच विवाद मे नया माेड़

रांची। मेयर आशा लकड़ा और नगर आयुक्त मुकेश कुमार के बीच विवाद मे नया माेड़ आ गया है। नगर आयुक्त और मेयर के अधिकारों पर मांगे गए मार्गदर्शन पर महाधिवक्ता (एजी) ने अपनी राय दी है। इसपर शुक्रवार  को मेयर आशा लकड़ा ने प्रेस से कहा कि उनके लिए झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 ही सर्वोपरि है।  राज्य सरकार के महाधिवक्ता का मंतव्य उनका अपना विचार है।  यह कोई कानून नहीं है, जिसका अनुपालन करने के लिए मैं बाध्य हूं।

महाधिवक्ता ने जो मंतव्य दिए हैं, वह सीधे तौर पर संवैधानिक अधिकार की हत्या है। उन्होंने कहा है कि उनके लिए झारखंड पालिका अधिनियम 2011 ही सर्वोपरि है। इसी से रांची नगर निगम चलेगा।  मेयर ने कहा है कि राज्य में किस तरह के महाधिवक्ता बैठे हैं, जिन्होंने झारखंड नगरपालिका अधिनियम कानून को ही समाप्त कर दिया है।  यह किसी एक व्यक्ति की शह पर नहीं हो सकता।

आशा लकड़ा ने कहा है कि वह केवल शोकॉज के लिए मेयर नहीं बनी हैं, बल्कि वह रांची नगर निगम की जनता को कार्यों को पूरा करने के लिए चुनी गयी हैं।  आशा लकड़ा ने कहा है कि अगर रांची नगर निगम के कार्यों को लेकर नगर आयुक्त से पत्राचार करना विवाद का कारण है, तो वह आगे भी निगम के तहत जनता के कार्यों के लिए नगर आयुक्त से जवाब मांगती रहेगी।

क्या राय दी थी महाधिवक्ता ने ?

बता दें कि नगर विकास विभाग ने निकायों में जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों के कार्य क्षेत्रों तथा अधिकार पर महाधिवक्ता से मंतव्य मांगा था।
उन्होंने अपने मंतव्य में लिखा है कि नगरपालिका अधिनियम के मुताबिक नगर निकायों में आयोजित होने वाली पार्षदों की बैठक बुलाने का अधिकार केवल और केवल नगर आयुक्त/कार्यपालक पदाधिकारी/विशेष पदाधिकारी को है।  एजेंडा तैयार करने का अधिकार भी नगर आयुक्त/कार्यपालक पदाधिकारी को ही है।

आनेवाले समय में भी मांगूंगी जवाब

मेयर ने कहा कि समीक्षा करने और अधिकारियों को स्पष्टीकरण मांगना मेरा संवैधानिक अधिकार है।  नगर निकायों में मेयर को शोकेस की शोभा बढ़ाने के लिए आम जनता ने नहीं चुना है।
यदि नगर आयुक्त को पत्राचार कर जवाब मांगना मेयर व नगर आयुक्त के बीच विवाद का कारण है तो मैं आने वाले समय में भी उनसे संबंधित विषयों पर जवाब मांगती रहूंगी।

दलीय आधार पर नगरपालिका चुनाव से डर गये हैं  

उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार डर रही है।  वह जानती है कि अगर दलीय आधार पर चुनाव होगा तो सभी जगह भाजपा ही जीतेगी।
आशा लकड़ा ने कहा कि सोमवार को वह और अन्य नगर निकायों के जनप्रतिनिधि सरकार के इस फैसले और महाधिवक्ता के राय के खिलाफ हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल करेंगे।  उन्होंने कहा कि महाधिवक्ता ने नगर निकाय को लेकर जो राय दी है, वह कोई कानून नहीं है।

इस मौके पर हजारीबाग नगर निगम की मेयर रोशनी तिर्की, खूंटी नगर पंचायत के अध्यक्ष अर्जुन पाहन, चतरा नगर परिषद के अध्यक्ष गुंजा देवी, रामगढ़ नगर परिषद के अध्यक्ष योगेश विद्या एवं उपाध्यक्ष मनोज कुमार महतो मौजूद थे।

चार दिवसीय झारखंड दौरे पर बोकारो पहुंचे केंद्रीय इस्पात सचिव

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आज टाटा के दौरे पर रहेंगे केन्द्रीय इस्पात सचिव
आज टाटा के दौरे पर रहेंगे केन्द्रीय इस्पात सचिव
 बोकारो । केंद्रीय इस्पात सचिव 1987 बैच के आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार त्रिपाठी चार दिवसीय झारखंड दौरे पर शुक्रवार को बोकारो पहुंचे । बोकारो निवास में उनकी अगवानी बोकारो स्टील के निदेशक प्रभारी अमरेंद्र प्रकाश समेत अन्य अधिकारियों ने की । बोकारो प्रवास के क्रम में  प्रदीप कुमार  त्रिपाठी ने बोकारो स्टील प्लांट के विभिन्न विभागों का दौरा कर उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी ली तथा अधिकारियों के साथ बैठक कर बोकारो स्टील की प्रतिमा स्थिति विस्तारीकरण एवं आधुनिकीकरण की योजना तथा उत्पादन क्षमता का उपयोग समेत 10 बिंदुओं पर सेल के अधिकारियों के साथ जानकारी ली ।
प्रदीप कुमार त्रिपाठी टाटा के लिए रवाना होंगे तथा शनिवार को टाटा स्टील प्लांट का भ्रमण कर वहां की जानकारी लेने के साथ-साथ आधुनिकीकरण एवं विस्तारीकरण के संबंध में भी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे ।
रविवार को वे बोकारो स्टील प्लांट के माइंस किरीबुरू चिड़िया गोवा समेत अन्य खदानों का दौरा करेंगे तथा 13 सितंबर को झारखंड के मुख्य सचिव से बातचीत करने के बाद दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह के बोकारो दौरे के पूर्व इस्पात सचिव का झारखंड दौरा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है ।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बोकारो स्टील के आधुनिकीकरण तथा विस्तारीकरण तथा टाटा स्टील के आधुनिकीकरण एवं विस्तारीकरण मे क्या अंतर है इस विषय पर भी अध्ययन करेंगे । टाटा स्टील का आधुनिकीकरण सफल रहा है जबकि खेल में लगभग 70000 करोड़ रुपया खर्च होने के बावजूद जो लाभ मिलना चाहिए था वह लाभ नहीं मिला है । होने वाले आधुनिकीकरण एवं विस्तारीकरण से पूर्व पूर्व में जो गलतियां हुई है वह इस बार नहीं हो इस पर मंत्रालय विशेष रुप से ध्यान केंद्रित कर रहा है।
 बोकारो स्टील का उत्पादन क्षमता 10 मिलियन टर्न के लिए हुआ था लेकिन अभी तक लगभग 5 मिलियन टर्न पर पहुंच पाया है जबकि टाटा स्टील ने 10 मिलीयन टर्न से अधिक कर लिया है प्राप्त जानकारी के अनुसार सेल के खदान एवं झारखंड सरकार के बीच कुछ मुद्दे को लेकर विवाद चल रहा है इस्पात सचिव इस मामले का अध्ययन खदान में जाकर करेंगे तथा समस्या के समाधान के लिए झारखंड के मुख्य सचिव के साथ-साथ संबंधित अधिकारी से बातचीत करेंगे

हाईकोर्ट के आदेश के बाद झारखंड में गरीब सवर्णों को मिलेगा 10% आरक्षण का लाभ

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हाईकोर्ट के आदेश से असिस्टेंट इंजीनियर की नियुक्ति परीक्षा का रास्ता साफ
हाईकोर्ट के आदेश से असिस्टेंट इंजीनियर की नियुक्ति परीक्षा का रास्ता साफ

गरीब सवर्णों को मिलेगा 10 फीसदी आरक्षण

रांची। झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) के फैसले के बाद असिस्टेंट इंजीनियर की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। असिस्टेंट इंजीनियर की नियुक्ति में राज्य के गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही स्पष्ट आदेश दिया है कि राज्य के 10 प्रतिशत गरीब सवर्णों को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए।

अदालत ने राज्य सरकार और आयोग को शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने का आदेश दिया है। इससे पहले विगत 21 जनवरी 2021 को मुख्य परीक्षा की तिथि से 1 दिन पूर्व हाई कोर्ट की एकल पीठ ने विज्ञापन रद्द कर फिर से विज्ञापन निकालने का आदेश दिया था।

पूर्व में अदालत में सुनवाई के दौरान रंजीत कुमार शाह की ओर से अधिवक्ता सौरभ शेखर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि, असिस्टेंट इंजीनियर की नियुक्ति में गरीब सवर्णों को आरक्षण का लाभ देना उचित नहीं, क्योंकि असिस्टेंट इंजीनियर की जो नियुक्ति हो रही है, उसमें जो रिक्त पद है, वह वर्ष 2019 से पूर्व के हैं।

उन्होंने कहा था कि गरीब सवर्णों को आरक्षण देने का जो नियम बना है, वह 2019 में बना है। यह आरक्षण 2019 से लागू किया जा सकता, इससे पूर्व के रिक्त पद पर यह नियम लागू नहीं किया जा सकता। इसलिए इस याचिका को रद्द कर दिया जाए और फ्रेश विज्ञापन निकालने का आदेश दिया जाए।

दूसरी ओर राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि, सरकार को यह अधिकार है कि वह चाहे तो आरक्षण दे सकती है, जब विज्ञापन निकाला जाता है, उस समय में जो नियम रहता है, उसी के अनुरूप आरक्षण लागू किया जाता है।

गिरिडीहः अवैध ढिबरा लोड ट्रक को डीएफओ ने किया जब्त

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वाहन के मालिक तिसरी के मुमताज अंसारी
अवैध ढिबरा लदे वाहन का मालिक तिसरी का रहने वाला मुमताज अंसारी

गिरिडीह। वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रवेश अग्रवाल द्वारा तिसरी से गिरिडीह आ रहे अवैध ढिबरा लोड मालवाहक वाहन को जब्त किया गया। गुप्त सूचना के आधार पर डीएफओ गिरिडीह जिले के तिसरी के समीप इसे जब्त कर लिया । वहीं मालवाहक वाहन का चालक फरार होने में सफल रहा ।

वाहन में करीब पांच लाख का अवैध ढिबरा

वाहन में करीब पॉच छह लाख का अवैध ढिबरा होने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार वाहन में करीब पांच टन से अधिक ढिबरा पाया गया है. डीएफओ के निर्देश पर ढिबरा और वाहन मालिक के खिलाफ वन भूमि क्षेत्र से अवैध उत्खनन का केस दर्ज कराया गया है। मालवाहक वाहन के मालिक तिसरी के मुमताज अंसारी बताया जा रहा है।

डीएफओ को लगातार सूचना मिल रहा था कि तिसरी से गिरिडीह फैक्टरी में अवैध ढिबरा पहुँचाया जाता रहा है। सूचना के बाद डीएफओ कारवाई करते हुए गिरिडीह पहुंचने से पहले ही तिसरी के समीप एक ढिबरा लदा माल वाहक को जब्त कर लिया. माना जा रहा है कि इसे गिरिडीह स्थित किसी फैक्ट्री में पहुंचाया जाना था।

11 SEPT 2021

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10 SEPT. 2021

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आयकर विभाग के रडार पर दो न्यूज पोर्टल, जांच के लिए पहुंची टीम

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देश के दो बड़े न्यूज पोर्टल आयकर विभाग के रडार पर हैं। इन दोनों न्यूज़ पोर्टल के वित्तीय लेन-देन की जांच करने कि लिए आयकर विभाग की भारी भरकम टीम इनके दफ्तरों में पहुंची । सभी कर्मचारिय़ों के मोबाईल बंद करा दिए गये । हालांकि आयकर विभाग ने इसे छापेमारी नहीं, बल्कि सर्वे बताया है।

न्यूज क्लिक के दफ्तर पर क्यों हुई छापेमारी ?

श्रीलंकाई-क्यूबा मूल के एक व्यवसायी ms 38 करोड़ रुपये प्राप्त किए ?
श्रीलंकाई-क्यूबा मूल के एक व्यवसायी से 38 करोड़ रुपये विदेशी धन प्राप्त करने का आरोप ?

‘न्यूजक्लिक‘ की बात करें तो फरवरी 2021 में ‘प्रवर्तन निदेशालय‘ (ईडी) ने पांच दिन तक इसके ऑफिस और मालिकों के घर की तलाशी ली थी। दरअसल श्रीलंकाई-क्यूबा मूल के एक व्यवसायी नेविल रॉय सिंघम ईडी के रडार पर हैं। ईडी ‘न्यूजक्लिक‘ के साथ उनके 38 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। यह रकम पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड को साल 2018 और 2021 के बीच विदेश से प्राप्त हुई थी।

‘न्यूजक्लिक‘ के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ ने इस तरह के आरोप का खंडन किया था। आज मिल रही जानकारी के हिसाब से दोपहर 12 बजे से इन पोर्टल्स के दफ्तरों में दस्तावेजों की जांच जारी है। यहां मौजूद सभी कर्मचारियों के फोन बंद करवा दिए गए हैं। वहीं घर से काम रहे कर्मचारी उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।

न्यूज लाउंड्री पर क्यों हुई छापेमारी ?

चीन से फंडिंग के लगते रहे हैं आरोप
चीन से फंडिंग के लगते रहे हैं आरोप

‘न्यूजलांड्री‘ के को-फाउंडर अभिनंदन सेखरी से उज्ज्वल दुनिया के प्रधान संपादक पंकज प्रसून ने बात करने की कोशिश की लेकिन अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। आज सर्वोदय एन्क्लेव स्थित कार्यालय में 20 लोगों की टीम के साथ अधिकारी पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि उनके फोन बंद करवा दिए गये हैं।

आपको बता दें कि इसी साल जुलाई में ‘दैनिक भास्कर‘ और ‘भारत समाचार‘ के कार्यालयों पर भी आयकर विभाग के छापे पड़े थे।

बीजेपी

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कश्मीर की मिलीजुली संस्कृति को खत्म कर रही है भाजपा- राहुल गांधी
कश्मीर की मिलीजुली संस्कृति को खत्म कर रही है भाजपा- राहुल गांधी

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने कश्मीर दौरे के दौरान ऐसा बयान दे डाला जिससे देश भर में विवाद पैदा हो सकता है. राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस पर हमला बोलते हुए कहा कि इनके कारण देवी लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती की शक्ति कम हो गई है।

राहुल गांधी ने क्या कहा ?

राहुल गांधी ने कहा कि कल जब मैं वैष्णो माता जी के मंदिर में गया, तब वहां त्रिशक्तियाँ थीं- दुर्गा जी, लक्ष्मी जी, सरस्वती जी । ‘दुर्गा जी’ जिन्हें हम दुर्गा माँ कहते हैं; दुर्गा शब्द ‘दुर्ग’ से आता है; ‘दुर्गा माँ’ यानी वो शक्ति जो रक्षा करती हैं ।

उन्होंने आगे कहा, ”लक्ष्मी मां यानी वो शक्ति जो ‘लक्ष्य’ को पूरा करती हैं । अगर आपका लक्ष्य’ पैसा है, तो जो आपने कहा वो भी सही है । आपका लक्ष्य कुछ और है तो उस लक्ष्य को पूरा करने की जो शक्ति हमें मिलती है, वो हैं ‘लक्ष्मी मां’ ।

राहुल गांधी ने कहा, ”सरस्वती जी वो शक्ति हैं, जिन्हें हम विद्या, ज्ञान की देवी/शक्ति कहते हैं । ये त्रिशक्तियाँ हैं । ये त्रिशक्तियाँ जब घर में होती हैं या देश में होती हैं, तो देश की तरक्की होती है .  हिन्दुस्तान में नोटबंदी और GST से माँ लक्ष्मी जी शक्ति घटी है या बढ़ी है? किसानों के बनाए गए तीन काले कानूनों से दुर्गा माँ की शक्ति घटी है या बढ़ी है? जब हिन्दुस्तान के हर संस्थान में, कॉलेज और स्कूल में आरएसएस का व्यक्ति बैठाया जाता है तो सरस्वती माँ की शक्ति घटती है या बढ़ती है? जवाब है- घटती है ।

कश्मीर में हिंदुत्व नहीं, सिर्फ कश्मीरियत चलेगी- राहुल गांधी
कश्मीर में हिंदुत्व नहीं, सिर्फ कश्मीरियत चलेगी- राहुल गांधी

राहुल गांधी बार-बार सनातन धर्म का अपमान करते हैं- बीजेपी

राहुल गांधी के बयान पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कुछ दिन पहले आपने (राहुल गांधी) जीएसटी की तुलना गब्बर सिंह से की थी । जिस जीएसटी की तुलना आप गब्बर सिंह से कर रहे थे आज उसी की तुलना मां लक्ष्मी से कर रहे हैं । हमारी भावनाओं के साथ आप खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं ? क्या राहुल गांधी को लगता है कि हिंदू धर्म का मजाक उड़ाने से कश्मीर के मुसलमान कांग्रेस को वोट दे देंगे। अगर वो ऐसा सोचते हैं तो ये उनका बचपना है ।

कश्मीर में दोबारा अशांति फैलाना चाहती है कांग्रेस

संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस को दुख हो रहा है, क्योंकि जम्मू कश्मीर में तुष्टिकरण और भेदभाव की राजनीति खत्म हो रही है और विकासवाद आगे बढ़ रहा है. आज यह जान के दुख हुआ, आज कोई साधारण दिन नहीं, आज गणेश चतुर्थी है. ऐसे में भारती परंपराओं का हनन होता है. ऐसे में यदि हमारे देवी देवताओं का अपमान किया जाता है तो मुझे लगता है ये उचित नहीं है ।

नियुक्ति नियमावली में भाषाओं के चयन पर कांग्रेस में अंदर ही अंदर असंतोष

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नियुक्ति नियमावली में भाषा विवाद का पलामू और कोयलांचल में कांग्रेसको हो सकता है घाटा
नियुक्ति नियमावली में भाषा विवाद का कांग्रेस को हो सकता है नुकसान

झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में जिस तरह से भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को बाहर किया गया उससे कांग्रेस के कई विधायक इतितेफाक नहीं रखते, लेकिन पार्टी अनुशासन के नाम पर वो फिलहाल खामोश हैं। कांग्रेस नियुक्ति नियमावली के मसले सीएम हेमंत सोरेन से बात करना चाहती है लेकिन सीएम फिलहाल कांग्रेस को भाव देने के मूड में नहीं हैं . ऐसे में पार्टी असमंजस में है कि करें तो क्या करें। झारखण्ड कांग्रेस के प्रवक्ता भोजपुरी, मगही, मैथिलि, अंगिका के साथ-साथ हिंदी को भी हटाने का खुलकर बचाव नहीं कर पा रहे।

अगर कांग्रेस ने कुछ नहीं किया तो होगा बड़ा नुकसान

कांग्रेस का असली जनाधार उन ईलाकों में है जहां बड़े पैमाने पर मगही, मैतिली, भोजपुरी और अंगिका आदि भाषआएं बोली जाती हैं . नई नियुक्ति नियमावली बनाते वक्त सरकार ने झामुमो के वोटबैंक का तो ख्याल रखा लेकिन कांग्रेस के गौर-आदिवासी विधायकों के बारे में जरा भी नहीं सोचा । खासकर कोयलांचल और पलामू प्रमंडल में इसे लेकर युवाओं के बीच बड़े पैमाने पर असंतोष है।

कुछ विधायक दबी जुबान से कर रहे विरोध

कांग्रेस की महिला विधायक दीपिका पांडेय सिंह महागामा से जीत कर विधानसभा में पहुंची हैं. उनके विधानसभा में बड़े पैमाने पर अंगिका बोली जाती है। लेकिन झारखण्ड सरकार ने अंगिका को स्थानीय भाषआओं की लिस्ट में शामिल नहीं किया है । ऐसे में बड़े पैमाने पर अंगिका भाषी छात्र-छात्राओं को झारखण्ड चयन आयोग की परीक्षाओं को पास करने में परेशानी होगी।

इसी तरह कोयलांचल के बेरमो और झरिया से जीतकर आने वाले कांग्रेस विधायक जयमंगल सिंह और पूर्णिमा नीरज सिंह भी परेशान हैं। अगर वो झारखण्ड सरकार की नई नियुक्ति नियमावली का विरोध करें तो पार्टी के बागी कहलाएंगे और अगर विरोध नहीं करते हैं तो इनके वोटर इनसे नाराज हो जाएंगे ।

नमाज रूम विवाद का कांग्रेस को घाटा ही घाटा, फायदा झामुमो को
नमाज रूम विवाद का कांग्रेस को घाटा ही घाटा, फायदा झामुमो को

नमाज जैसे मुद्दे पर भी कांग्रेस को नुकसान

झारखण्ड में मुसलमान कांग्रेस का बड़ा वोटबैंक रहे हैं. लेकिन विधानसभा के अंदर नमाज रूम अलॉट करने पर सारी वाहवाही झामुमो के हिस्से में आ गई। झामुमो ने खुलकर विधानसभा के अंदर नमाज रूम का जिस तरह से समर्थन किया, उससे अल्पसंख्यक मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा झामुमो की तरफ शिफ्ट होने लगा है। ऐसे में कांग्रेस को बिना कुछ किए बड़े वोटबैंक से हाथ धोना पड़ा ।

मजबूर नहीं, महागठबंधन का मजबूत साथी बने कांग्रेस

पलामू प्रमंडल से कांग्रेस के दिग्गज नेता के एन त्रिपाठी ने खुलकर विधानसभा के अंदर नमाज रूम को असंवैधानिक बताया। अंदर ही अंदर कई नेता और विधायक उनकी बातों से सहमत हैं। राजधानी में कांग्रेस के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कांग्रेस को अपनी हिंदू विरोधी छवि से बाहर निकलना ही होगा। हमें इसपर कोई स्टैंड खुलकर लेना चाहिए था। हर बात पर सिर्फ हेमंत सोरेन की हां में हां मिलाने पर लॉन्ग टर्म में पार्टी को नुकसान हो सकता है। वे कहते हैं कि जबतक सरकार चल रही है तबतक तो ठीक है, लेकिन जिस दिन कांग्रेस को झामुमो से अलग होकर चुनाव लड़ना पड़ा, उसदिन कई सवालों के जवाब देने मुस्किल हो जाएंगे ।

कैग रिपोर्ट में पुल

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पुल-पुलियों के निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई- कैग
पुल-पुलियों के निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई- रिपोर्ट

कैग रिपोर्ट में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बनाए गये पुल-पुलियों के निर्माण में बड़े पैमान पर गड़बड़ी की बात कही गई है. इन पुल और पुलियों का चयन मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत सांसदों और विधायकों की सिफारिशों पर उनकी व्यवहार्यता की जांच किए बिना   किया गया था। ग्रामीण विकास विभाग ने बिना ऑपरेशनल गाइडलाइन्स या सर्वे के इन पुलों के निर्माण की स्वीकृति दी थी।

कैग की रिपोर्ट कहती है कि मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत बनाए गये पुलों की स्वीकृति सिर्फ स्थानीय विधायक या सांसद के कहने पर की गई। यह भी नहीं देखा कि जहां ये बनाये जा रहे हैं, वहां इनकी जरुरत है भी या नहीं । उदाहरण देते हुए कैर रिपोर्ट में कहा गया है कि कोडरमा जिले के केसो नदी पर 13.44 करोड़ की लागत से डेढ़ किलोमीटर के अंदर तीन-तीन पुलों का निर्माण कर दिया गया। ये सरकारी धन की निर्दयता से बर्बादी थी ।

कैग रिपोर्ट कहती है कि ऐसा प्रतीत होता है कि डिपार्टमेंट के पास डीपीआर बनाने के लिए किसी कन्सलटेन्ट को अप्वाइंट करने का कोई नियम-कायदा ही नहीं है। ऐसा लगता है कि इन पुलों को मंजूरी देने वाले मुख्य अभियंता के कार्यालय में भी कोई डिज़ाइन सेल नहीं है, जो इसे सलाहकारों द्वारा प्रस्तुत डीपीआर को स्वीकार करने की सलाह देता। पुलों के डिजायन में अगर कोई फॉल्ट है तो उसे ठीक करने का भी कोई प्रावधान है या नहीं ?अगर वो है भी तो कम से कम हमें कहीं नहीं दिखा ?

महालेखाकर इंदू अग्रवाल ने बताया कि सलाहकारों ने आवश्यक भू-तकनीकी जांच और जल विज्ञान और यातायात डेटा का विश्लेषण नहीं किया । इसका परिणाम ये हुआ कि हमने कुल 42 पुल जो 52. 12 करोड़ की लागत से बने थे, उनमे से 16 में अप्रोच रोड या तो नहीं थे या उनमें भारी खामियां थी। जैसे पुल पर चढ़ने के लिए 90 डिग्री को मोड़ होता है क्या ?  इतना ही नहीं ऑडिट टीम ने यह भी पाया कि 42 में से 28 पुल के अप्रोच रोड की चौड़ाई लगभग आधी कर दी गई थी।

खराब काम करने वाले ठेकेदारों को मिला सबसे ज्यादा काम

महालेखाकर इंदू अग्रवाल ने ऑडिट रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि 2014 से 2019 के दौरान 571 पुलों का निर्माण किया गया। इसमें सरकार ने कुल 13 ठेकेदारों को 251.41 करोड़ का काम दे दिया। एक-एक ठेकेदार को 2 से लेकर 13 प्रोजेक्ट तक दिए गये । जो पुल बन भी गये मेंटेनेन्स के अभाव के कारण किसी के फाउंडेशन के नीचे से बालू का अवैध खनन होता रहा तो किसी के RCC (reinforced cement concrete) में क्रैक पाया गया।  फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान कई तरह की खामियां पाई गईं।

कैग रिपोर्टः सड़क बनाने का ठेका लेने वाली कंपनी ने जिस बैंक के स्टांप पेपर पर बैंक गारंटी दी, वह बैंक अस्तित्व में ही नहीं

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पथ निर्माण विभाग को सिर्फ गोड्डा जिले में 14 करोड़ का नुकसान
पथ निर्माण विभाग को सिर्फ गोड्डा जिले में 13.24 करोड़ का नुकसान

प्रधान महालेखाकार ने सरकारी योजनाओं की ऑडिट रिपोर्ट में भारी अनियमितता उजागर किया है। उन्होंने पथ निर्माण विभाग में पथ प्रमंडल गोड्डा के अधीन पड़ने वाले 22.44 किलोमीटर पथ का निर्माण का ठेका लेने वाली कंपनी यूनिक कंस्ट्रक्शन सूरत का फर्जीवाड़ा उजागर किया है। उन्होंने बताया है कि इस कंपनी ने 51.62 करोड़ में निर्माण का कार्य लिया था। इस कंपनी ने इसके बदले 5.60 करोड़ रुपये का जो बैंक गारंटी दिया था, वह फर्जी था।

इतना ही नहीं, जिस बैंक के स्टांप पेपर पर बैंक गारंटी बना था, वह स्टांप पेपर फर्जी था, क्योंकि जिस सूरत स्थित देना बैंक की रस्ता शाखा से स्टांप पेपर निर्गत होने की जानकारी दी गई थी, वह बैंक ही अस्तित्व में नहीं था। कंस्ट्रक्शन कंपनी ने एक साल के भीतर ही निर्माण कार्य रोक दिया। फर्जी बैंक जमानत तथा फर्जी होने के संदेहास्पद एकरारनामा होने के आधार पर कार्य आवंटन होने के चलते 13.24 करोड़ के सरकारी धन का नुकसान हो चुका है।

यहां भी हुई अनियमितता

– हजारीबाग-कटकमसांडी-चतरा सड़क पर पथ निर्माण विभाग ने सड़क के एक हिस्से के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य तथा उसी सड़क के डीपीआर तैयार करने की अविवेकपूर्ण स्वीकृति दी। इसके चलते अलकतरा बिछाने के कार्य पर 5.03 करोड़ का खर्च हुआ।

– कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग में दो पौधशालाओं के संचालन के लिए उनके निर्माण के चार साल के बाद भी पानी-बिजली की आपूर्ति नहीं हुई, जिससे 2.78 करोड़ रुपये का खर्च बेकार हो गया।

– सूकर प्रजनन नाभिक इकाई के लिए 1.59 करोड़ की लागत से निर्मित सूकर सेड दिसंबर 2014 से निष्क्रिय हो गए।

– जल संसाधन, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किए बगैर गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड स्थित चरकी पहाड़ी मध्यम सिंचाई योजना पर काम शुरू करने के कारण 1.30 करोड़ का व्यय निष्क्रिय हुआ तथा 3.93 करोड़ का काम रूका।

– झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड को उपयोगकर्ताओं से शुल्क वसूलने में विफलता के कारण 12.18 करोड़ का नुकसान हुआ।

चतरा में छात्रवृत्ति घोटाला, जला दिए गए 70 करोड़ के दस्तावेज

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कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका
कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका, महालेखाकार ने की पुष्टि

उज्जवल दुनिया संवाददाता/ अजय निराला

हजारीबाग। उत्तरी छोटा नागपुर प्रमंडल के चतरा जिले में कल्याण विभाग के कार्यालय की ओर से छात्रवृति से जुड़े 70 करोड़ के दस्तावेज जला दिए गए। इस कारण ऑडिट के दौरान इस राशि के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के लिए कोई एक्शन प्लान नहीं है। पुलों की स्थिति को देखते हुए सरकार से सेफ्टी ऑडिट कराने की अनुशंसा की गई है, ताकि दुर्घटना से बचा जा सके। पर्यटन विकास के नाम पर बिना मूल्यांकन किए ही भवनों सहित अन्य संरचनाओं का निर्माण किया गया। कई स्थानों पर सरकारी भवनों से निजी लोग पैसा कमा रहे हैं, लेकिन सरकार को कुछ नहीं मिल रहा है।

प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) इंदू अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन में सीएजी रिपोर्ट की चर्चा करते हुए यह बात कही। प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) ने जालसाजी का उल्लेख करते हुए कहा कि जिला कल्याण पदाधिकारी ने अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत से छात्रवृत्ति के पैसे का गबन किया गया।

सरकार ने जिले को 95 करोड़ रुपए दिए थे। इसमें से 85 करोड़ रुपए की ही निकासी हुई। 85 करोड़ में से 70 करोड़ रुपए के हिसाब-किताब से जुड़े दस्तावेज जला दिए गए। इसलिए ऑडिट के दौरान इस राशि के खर्च होने या नहीं होने का पता नहीं लगाया जा सका। जांच में सिर्फ 15 करोड़ रुपए के गबन का मामला पकड़ में आया।

जिला कल्याण कार्यालय में 12 बैंक अकाउंट चल रहे थे। हालांकि सरकार को सिर्फ तीन बैंक अकाउंट होने की जानकारी दी गई थी। जांच के दौरान छात्रवृत्ति की राशि वहां के कर्मचारियों और उनके रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर किए जाने का मामला पकड़ में आया। इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार कार्रवाई कर चुकी है।