सभी जिले के RDDE, DEO और DSE को भेजी गई निर्देश की प्रति
शिक्षा विभाग से रिटायर होने वाले पदाधकारी, शिक्षक, शिक्षकेत्तरकर्मी व अन्य कर्मचारियों को अब रिटायरमेंट के बाद दफ्तर-दर-दफ्तर नहीं भटकना होगा। उनकी सारी समस्याओं का समाधान एक टेबल पर किया जाएगा। इसके लिए हर महीने की 15 तारिख को जिले में पेंशन अदलात लगाई जाएगी। इस संबंध शिक्षा सचिव की तरफ से आदेश जारी कर दिया गया है।
हर महीने के अंतिम दिन कार्यक्रम का करें आयोजन इसके अलावा सभी जिले के शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि रिटायरमेंट की आखिरी तारिख को जिला मुख्यालय में कार्यक्रम का आयोजन कर रिटायर होने वाले शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मियों को निशिचित रूप से सेवांत लाभों का भुगतान करना सुनिश्चित करें।
मॉनीटरिंग के लिए हेडक्वार्टर में स्पेशल ऑफिसर की हुई नियुक्ति इतना ही नहीं एजुकेशन सेक्रेटरी ने इसकी निगरानी के लिए ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल की एक अधिकारी की नियुक्ति इसकी मॉनिटरिंग के लिए की है। सभी जिले के शिक्षा पदाधिकारी को इन्हें कार्यक्रम की जानकारी देनी होगी। रिटायर हो रहे कर्मचारी के मामले में किसी प्रकार की परेशानी या त्रुटी होने पर इसे समय रहते डायरेक्टरेट दूर कराने की जिम्मेदारी भी जिला स्तर के पदाधिकारी की होगी।
प्रखर राष्ट्रवादी महिला जिसने तमिलनाडु में हिंदी और हिंदुत्व का परचम लहराया
रांची। भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, कमल हसन को चुनाव में शिकस्त देने वाली तमिलनाडु के कोयम्बटूर की विधायक वनाथी श्रिनिवासन आज रांची आ रहीं हैं। तमिलनाडु की राजनीति में कोयम्बटूर साउथ सीट से चुनाव जीतना इसलिए भी ज्यादा टफ है क्योंकि जयललिता की खास शशिकला यहां से चुनाव लड़ती रही हैं। लेकिन कमल हसन, द्रमुक और अन्नाद्रमुक के रहने अगर वनाथी श्रिनिवासन ने चुनाव में जीत हासिल की तो इनकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
चुनाव के दौरान “कॉफी विद वानथी” से देश-विदेश में चर्चा में आईं
अपने चुनाव के दौरान वनाथी श्रीनिवासन ने प्रचार का अनोखा तरीका निकाला। वे किसी के भी घर जाकर, उसके किचन में खुद से कॉफी बनाकर पूरे परिवार को पिलातीं और उनसे राजनीति छोड़ पारिवारिक दिक्कतों पर चर्चा करतीं। उनका ये अंदाज इतना लोकप्रिय हुआ कि विदेशों में छपने वाली पत्र-पत्रिकाओं ने भी कॉफी विद वानथी पर स्टडी की।
16 सिंतबर को होगी भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति बैठक
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष आरती कुजूर ने बताया कि बुधवार शाम 7 बजे सेवा विमान से रांची एयरपोर्ट पहुचेंगी भाजपा महिला मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष वानथी श्रीनिवासन। एयरपोर्ट पर सैकड़ो महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं के द्वारा उनका पारंपरिक गाजे-बाजे से भव्य स्वागत होगा । मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति बैठक16 सिंतबर को भाजपा प्रदेश कार्यालय में होना सुनिश्चित किया गया है। उक्त बैठक में प्रदेश पदाधिकारी,कार्यसमिति सदस्य,जिला अध्यक्ष एवं महामंत्री शामिल होंगे।
इस बैठक में मुख्य रूप से महिला मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष सह कोयम्बटूर से विधायक वानथी श्रीनिवासन,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास,क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र नाथ त्रिपाठी,प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश,नेता विधायक दल बाबूलाल मरांडी,संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह शामिल होंगे।
विजय कुमार शाह निदेशक दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल फुलबारी जलपाईगुड़ी
ब्यूरो राजेश कुमार जैन से विशेष भेंटवार्ता
नौकरीपेशा वालों को सिर्फ भविष्य निधि(PF) ही नहीं बल्कि सरकार के द्वारा एक और चलाई जाने वाली योजना का नाम है, ESIC यानी (कर्मचारी राज्य बीमा योजना)। भारत का कर्मचारी राज्य बीमा निगम एक बहु आयामी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था है, जो कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए अपनी योजना के अंतर्गत शामिल करता है। बीमा में रोजगार के पहले दिन से यह स्वीकार्य है कि बीमित व्यक्ति बीमारी के कारण शारीरिक कष्ट, अस्थायी या स्थायी अक्षमता आदि की स्थिति में स्वयं तथा अपने आश्रितो के लिए पूर्ण चिकित्सा देखभाल के अतिरिक्त नगद हितलाभ पाने के भी हकदार होंगे। बीमारी के कारण उपार्जन क्षमता में हानि के परिणाम स्वरूप, बीमित महिला के प्रसव के सम्बन्ध में,ऐसे बीमित व्यक्ति के आश्रित जन, जिसकी औद्योगिक दुर्घटना में अथवा रोज़गार जोख़िम या व्यवसायिक संकट के कारण मृत्यु हो गई हो, वह मासिक निवृति वेतन अर्थात आश्रितजन हितलाभ पाने के हकदार होंगे। ऐसी व्यापक सामाजिक सुरक्षा योजना जिसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र में कर्मचारियों को बीमारी, प्रसूति, अपंगता तथा रोजगार चोट के कारण हुई मृत्यु की स्थिति में सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और बीमाकृत कर्मचारियों तथा उनके परिवार के सदस्य को चिकित्सा देखभाल की सुविधा प्रदान करना है। जिन लोगों की आय कम है और जो सरकारी या निजी क्षेत्र में काम करते हैं उसके लिए केंद्र सरकार ने यह योजना 1948 में प्रारंभ की थी। यह संस्था केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत काम करती है सरकारी और निजी क्षेत्र के सीमित वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम भी चलाती है इसकी स्कीम के तहत पेंशन का लाभ भी लिया जा सकता है जिन संस्थाओं, फैक्ट्रियों, कंपनियों में 10 या अधिक कर्मचारी काम करते हैं वहां ही ईएसआईसी की योजना का फायदा मिलता है। ईएसआईसी हॉस्पिटल और डिस्पेंसरी का संचालन ही करता है जहां मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है इसी का फायदा उन कर्मचारियों को मिलता है जिनका मासिक वेतन 21000 से कम हो वहीं दिव्यांग लोगों के मामले में ₹25000 है। नियोक्ता और कर्मचारियों दोनों को अंशदान(premium) का भुगतान करना पड़ता है। मौजूदा समय में कर्मचारियों को अपने वेतन से 0.75% और नियोक्ता को 3.25% का भुगतान करना पड़ता है। जिन कर्मचारियों का औसत वेतन रोजाना ₹137 तक होता है उन्हें कोई योगदान नहीं करना होता है । ईएसआईसी में रजिस्ट्रेशन नियोक्ता की ओर से कराना अनिवार्य है इसके लिए कर्मचारियों को सिर्फ अपने परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी देनी होती है इस योजना में नॉमिनी भी कर्मचारी को तय करना होता है। इस योजना में जिस कर्मचारी का बीमा होता है उसकी मृत्यु हो जाने पर आश्रितों को पेंशन मिलती है। पेंशन आश्रितों को आजीवन मिलती है इसे तीन हिस्सों में बांटा जाता है पहला हिस्सा बीमित की पत्नी को दूसरा उसके बच्चों को और तीसरा माता-पिता को मिलता है। योजना का सबसे बड़ा फायदा है कर्मचारी और उसके परिवार को मेडिकल सुविधाएं दिया जाना जहां इलाज पूरी तरह मुप्त होता है। दवाइयों का पैसा भी नहीं लगता। अगर किसी की बीमारी गंभीर हो तो उसे प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाता है तो भी सारा खर्च ईएसआईसी का होता है। गंभीर बीमारी की वजह से कोई कर्मचारी जॉब नहीं कर सकता तो ऐसी स्थिति में ईएसआईसी द्वारा कर्मचारी के वेतन का 70% भुगतान किया जाता है अगर कर्मचारी किसी वजह से विकलांग हो जाता है तो उसे वेतन का 90% भुगतान किया जाता है अस्थाई तौर पर विकलांग हो जाने पर जीवन भर सैलरी का 90% भुगतान मिलता रहता है।ESIC ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी खोले हैं। ईएसआईसी सुविधाओं को लेने के लिए कर्मचारियों को कार्ड बनवाना पड़ता है ।कर्मचारी यह कार्ड या कंपनी के दूसरे दस्तावेज दिखाकर डिस्पेंसरी और अस्पताल में अपना और फैमिली मेंबर्स का इलाज करवा सकते हैं। अगर उनकी बीमारी गंभीर हुई तो ईएस आई स के अस्पताल उन्हें दूसरे बड़े अस्पतालों में इलाज के लिए रेफर करते हैं। सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए चलाई जा रही योजना वाकई लाभकारी है। लेकिन वस्तुस्थिति कुछ और बयां करती है।इस संदर्भ में जानकारी हासिल करने पर पता चला कि कर्मचारियों को सुविधा प्रदान करने के नाम पर लिए गए अंशदान (Premium) से सरकार के पास एकलाख करोड़ रुपए से अधिक का फंड तैयार हो गया है पर चिकित्सा सुविधाएं नदारद हैं। योजना की परिभाषा अनुसार सारे वायदे कोरे कागज की तरह हैं।छोटे और ग्रामीण शहरी क्षेत्रों में सरकारी वायदे के मुताबिक कोई चिकित्सा मुहैया नहीं कराई जाती है बल्कि बीमित कर्मचारी दर- दर की ठोकरें खाकर दम तोड़ देते है। इतना ही नहीं पेंशन लेने के लिए बाबूओं की चौखट पर दिन रात हाजिरी लगाने के महीने दिन बाद नंबर आता है।कुछ एक बड़े शहरों को छोड़ दें तो ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव स्पष्ट दिखाई देता है। उत्तरबंगाल के मालदा, बालूरघाट, दिनाजपुर,अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी क्षेत्रों में तो हाल बद से बदतर हैं।इन स्थानों में अस्थाई डिस्पेंसरी पर अस्थाई डाक्टर बैठाया गया है जहां मरीज के पहुंचने पर उसकी सही तरीके से जांच करने की बजाय काम चलाऊ अंग्रेजी दवाईयां देकर छोड़ दिया जाता है परिणाम स्वरूप एक समय आता है कि इलाज के अभाव में कर्मचारी परलोक सिधार जाता है। बड़े बड़े विज्ञापनों के बावजूद आयुष चिकित्सा की कोई व्यवस्था संपूर्ण उत्तर बंगाल में नहीं है।ईएसआईसी के अधिकारियों की संपूर्ण शक्ति और दायित्व मानो लोगों का नामांकन करने और फिर उनसे अंशदान वसूलने मात्र का है। पहले से ही सीमित वेतन पाने वाले गरीब लोगों का योजनाबद्ध तरीके से शोषण किया जा रहा है। प्रश्न यक्ष यह है? कि सरकार अपने वायदों को निभाने में नाकाम होती है या मुकरती है तो क्या सरकार पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए? कर्मचारी और उसके आश्रितों की मृत्यु के दोषी सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या सजा मुकर्रर नहीं की जानी चाहिए?अगर नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों का अंशदान समय से जमा नहीं किया गया है तो ऐसी स्थिति में ईएसआईसी नियम एवं शर्तों के अनुसार नियोक्ता के बैंक खाते को सील कर दिया जाता है। आखिर यह दोहरी नीति क्यों? अंगुली माल और महात्मा बुद्ध के बीच के संवाद को आपने पढ़ा होगा और सुना भी होगा।संवाद के वाक्यांश वर्तमान समय में चरितार्थ हो रहे हैं। “मैं तो ठहर गया,भला तू कब ठहरेगा”।आज ईएसआईसी के संबंध में सरकार की भूमिका ऐसी ही है।
प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर “सेवा एवं समर्पण सप्ताह” मनाएगा भाजयुमो
नई दिल्ली/ रांची । 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन है। इसके साथ ही सार्वजनिक जीवन में पीएम मोदी के 20 वर्ष पूरे हो जाएंगे। 17 सितम्बर 2001 को ही प्रधानमंत्री मोदी गुजरात की सीएम बने थे। उसके बाद से वे एक भी चुनाव नहीं हारे हैं। इसी खुशी में भारतीय जनता युवा मोर्चा 17 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक सेवा और समर्पण सप्ताह मना रहा है।
नव भारत मेले का होगा आयोजन
भाजपा के राष्ट्रीय आध्यक्ष जे पी नड्डा एवं भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या के नेतृत्व में चलने वाले इस कार्यक्रम में देश भर की हर जिला ईकाई लोगों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के पिछले सात साल की उपलब्धियों को रखेगी। इतना ही नहीं, हर जिले में एक नव-भारत मेले का भी आयोजन होगा ।
सत्ता में प्रधानमंत्री मोदी के 20 साल पूरे
प्रधानमंत्री मोदी लगातार 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, इसके बाद वो पिछले सात सालों से देश के प्रधानमंत्री हैं। इन 20 सालों में उन्होने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली है। तेजस्वी सूर्या ने बताया कि लगातार 20 सालों तक सत्ता में रहने पर भी प्रधानमंत्री मोदी के दामन पर कोई दाग नहीं लगा सकता। उन्होने गुजरात और देश की जो सेवा की है, उसे करना आम इंसान के लिए संभव नहीं है. ऐसा तो कोई महापुरुष ही कर सकता है।
क्षेत्रीय भाषाओं को अपमान करने वाले मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन मांगे माफी
मगही, भोजपुरी से नफरत और उर्दू से मोहब्बत, नही चलेगा
भाजपा सभी भाषाओं का करती है सम्मान
हेमन्त सोरेन द्वारा भोजपुरी-मगही भाषियों को बलात्कारी कहने पर बिफरी भाजपा
कांग्रेस और राजद बताए, क्या भोजपुरी-मगही को लेकर हेमंत के बयान से सहमत हैं?
भाजपा हर भाषा का सम्मान करती है- भानु प्रताप शाही
उज्ज्वल दुनिया
रांची । हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर हिंदी की उपभाषा मगही भोजपुरी बोलने वालों को बलात्कारी बताए जाने पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक भानु प्रताप शाही हेमन्त सोरेन के खिलाफ जमकर बरसे। प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि पंथ मजहब के आधार पर भाषा को बांटना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मगही भोजपुरी भाषा से नफरत और पाकिस्तानी भाषा उर्दू से प्यार कैसा है, यह मुख्यमंत्री जी स्पष्ट करें।
धर्म और भाषा के नाम पर समाज में तनाव पैदा करना मकसद
भानु प्रताप शाही ने कहा कि हेमन्त सोरेन नमाज़ नीति के तहत धर्म से धर्म और अब भाषा को भाषा से लड़ाना चाहते हैं। भाजपा इसकी घोर निंदा करती है। यह नियोजन नीति के अंदर तुष्टिकरण है। भाषा के आधार पर बलात्कारी, दुष्कर्मी बताना असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि नियोजन नीति में मैथली, अंगिका, भोजपुरी व मगही को तुष्टिकरण के तहत हटा दिया गया। मुख्यमंत्री ने हिंदी का अपमान करने का कार्य किया है।
आदिवासी हो या गैर-आदिवासी, ये लोग किसी को नौकरी नहीं देंगे
उन्होंने कहा कि जनजातीय भाषा की पढ़ाई की वस्तु स्थिति को लेकर विस् में सत्र के दौरान झामुमो के विधायक सीता सोरेन ने प्रश्न किया था, जिसपर सरकार ने जवाब दिया था कि जनजातीय भाषा की पढ़ाई की योजना तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में सिर्फ और सिर्फ उर्दू पढ़ने वाले युवाओं को रोजगार दिए जाने की नीति है। इससे अन्य क्षेत्रीय भाषा पढ़ने वाले लोगों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। यह सीधे सीधे तुष्टिकरण की नीति को परिभाषित कर रहा है। साथ ही तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में आदिवासी मूलवासी को बाहर रखने की तैयारी है।
किसी भी भाषा को बोलने वालों को बलात्कारी कहना गलत
सबको पता है कि नरसिम्हा राव से पैसे लेकर झारखण्ड आंदोलन किसने बेचा ?
भानु प्रताप शाही ने कहा कि एक भाषा बोलने वाले को बलात्कारी कहना मुख्यमंत्री के तुष्टिकरण की नीति को दर्शाता है। हेमन्त सोरेन ने झारखंड के जनजातीय, आदिवासी, मूलवासी, हिंदीवासी के भावनाओं को आहत किया है। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री जी बताएं आपके विधायक मिथलेश ठाकुर, सुदिव्य कुमार, कांग्रेस के उमाशंकर अकेला, अम्बा प्रसाद, कुमार जयमंगल, बन्ना गुप्ता, पूर्णिमा नीरज सिंह, बदल पत्रलेख, दीपिका पांडेय जी के बारे क्या ख्याल रखते हैं, जो मगही भोजपुरी जैसे क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषा बोलने वाले भी झारखंड की लड़ाई लड़े हैं।
नरसिम्हा राव से पैसे लेकर झारखण्ड आंदोलन को किसने बेचा था ?
उन्होंने कहा कि 1993 में नरसिम्हा सरकार में झारखंड आंदोलन बेचने वालों की सरकार है। हेमन्त सोरेन वैसे दलों के साथ सरकार चला रहे हैं जो झारखंड आंदोलन का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि हेमन्त सोरेन हिन्दू का विरोध करते करते हिंदी के विरोध में उतर आए हैं, हेमन्त सोरेन प्रदेश की जनता से माफी मांगे।
हिंदी भाषा भाषी से माफी मांगे व कांग्रेस राजद अपना स्टैंड स्पष्ट करें
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष व पुर्व विधायक गंगोत्री कुजूर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने हिंदी भाषा पर टिप्पणी किया है, आज हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी भाषा की तौहीन की गई है। हेमन्त सोरेन ने असंवैधानिक भाषा का प्रयोग किया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा झारखंड के मगही और भोजपुरी भाषियों के बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणी के बाद कई सामाजिक संगठनों एवं राजनीतिक दलों ने उनकी आलोचना की है।
काम नहीं करना है, इसलिए लोगों को लड़ाने की साजिश रच रहे हैं
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि हेमंत सोरेन को कुछ काम नहीं करना है, इसलिए सिर्फ भावनात्मक मुद्दे उठाकर समाज में तनाव पैदा करना चाहते हैं। रघुवर दास ने कहा कि पांच लाख रोजगार के मुद्दे पर सत्ता में आई हेमंत सरकार अब बस कभी नमाज़ रूम तो कभी भोजपुरी-मगही कर रही है।
झारखंड की महान जनता ने बचकाना नेतृत्व चुन लिया
रघुवर दास ने कहा कि मुख्यमंत्री की नयी नीति “बांटो और राज करो” की है । उन्होंने कहा कि महान झारखंड में आज बचकाना नेतृत्व कार्यरत है। भोजपुरी-मगही भाषी लोगों के प्रति मुख्यमंत्री जी का यह बयान दुखद है। उनके गंठबंधन को वोट देने वाले लोगों को आज दुख जरूर हो रहा होगा।
भोजपुरी-मगही बाहरी लगता है, लेकिन उर्दू अपनी
हेमंत जी को भोजपुरी और मगही बाहरी भाषा लगती है, लेकिन उर्दू अपनी लगती है। हेमंत सरकार ने पहले हिंदी-संस्कृत और अब भोजपुरी-मगही का अपमान किया है। मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं कि भोजपुरी-मगही से झारखंड का बिहारीकरण हो रहा। तो क्या उर्दू से झारखंड के इस्लामीकरण की तैयारी है ?
रोजगार से ध्यान भटकाने की कोशिश
पांच लाख नौकरी देने का वादा करके सत्ता में आयी हेमंत सरकार ध्यान भटकाने की कला में पारंगत है। इसलिए मुद्दों से ध्यान भटकाने का खेल खेल रहे हैं। संविधान की शपथ लेकर मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन जी को यह समझने की जरूरत है कि वे झारखंड के साढ़े तीन करोड़ लोगों के मुख्यमंत्री हैं। लेकिन वे उसी संविधान की तिलांजलि देने पर तुले हैं।
उज्ज्वल दुनिया संवाददाता, केरेडारी (हजारीबाग) इंद्रजीत कुमार गिरि। हजारीबाग के केरेडारी थाना क्षेत्र स्थित बिलारी गांव के जालसार टोला में गोवंशीय पशु की हत्या कर सौहाद्र्र बिगाड़न की असामाजिक तत्वों ने कोशिश की है।
गांव में माहौल तनावपूर्ण है और वक्त रहते पुलिस बल का पहरा लगा दिया गया है।
मामला केरेडारी थाना क्षेत्र की हेवई पंचायत अंतर्गत बिलारी गांव के जालसार टोला का है।
पुलिस ने इस मामले में गांव के ही सहुल मियां के पुत्र सरफुद्दीन उर्फ उद्दीन मियां को गिरफ्तार कर लिया है।
बताया जाता है कि गांव की एक गोशाला में गोवंशीय पशु का सिर काट उसे बोरे में लपेट कर वहीं मिट्टी में गाड़ दिया गया था।
इस बात की जानकारी जब ग्रामीणों को मिली, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इस घटना की सूचना केरेडारी थाना प्रभारी अमित कुमार द्विवेदी को दी गई।
मामले की गंभीरता को भांप वह तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए।
घटना की सूचना पर बजरंग दल के कार्यकर्ता और भारतीय जनता युवा मोर्चा के केरेडारी मंडल अध्यक्ष शेर सिंह को भी मिली।
केरेडारी पुलिस दल के साथ मिलकर सभी आरोपी के घर की तलाशी ली।
वहीं बनी गोशाला की किवाड़ में लगे खून के धब्बे देख पुलिस ने जब तलाशी अभियान सख्त कर दिया, तो वहीं से पशु का सिर बरामद हुआ।
इस पर पुलिस ने आरोपी सरफुद्दीन मियां और एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
अन्य सहयोगी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
मौके पर पुलिस बल के साथ थाना प्रभारी और सीओ राकेश तिवारी भी कैंप कर रहे हैं।
महागामा से कांग्रेस की विधायक दीपिका पांडे सिंह ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि रांची पुलिस के बड़े अफसर अपनी ड्यूटी करने की बजाय नेता और शीर्ष अधिकारियों की गणेश परिक्रमा में ज्यादा व्यस्त रहते हैं। दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि अगर पुलिस अधिकारी गणेश परिक्रमा की बजाय शहर की गलियों का परिक्रमा करते तो एक पत्रकार जीवन और मौत से जंग नहीं लड़ रहा होता है।
अपने ट्वीट में दीपिका पांडे सिंह ने क्या लिखा
उन्होंने लिखा है कि
अपराधियों के हमले में मरणासन्न एक नेक पत्रकार बैजनाथ महतो राँची में रिम्स में जीवन मौत से जूझ रहे हैं।मैं स्तब्ध हूँ।कोई राँची पुलिस को समझाए की गणेश परिक्रमा करने के बजाय शहर की परिक्रमा करें और कानून का पालन करनेवाली जनता की रक्षा करें।मैं अपने पत्रकार भाई बहनों के साथ खड़ी हूँ https://t.co/WcIUrQCZay
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने रांची में पत्रकार पर हुए प्राणघातक हमले की निंदा की
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने पत्रकार बैजनाथ महतो पर जानलेवा हमला करने वालों को अविलंब गिरफ्तार कर कठोर सजा दिलाने की मांग की। साथ ही सरकार से मांग की की श्री महतो को हर जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।
दीपक प्रकाश ने कहा कि इस सरकार में कोई सुरक्षित नही है। दलित,आदिवासी,महिला,बहन बेटी,जज,वकील,पत्रकार,व्यवसायी सब मे भय व्याप्त है। राज्य की पुलिस केवल सरकार के इशारे पर काम करना ही अपनी जिम्मेवारी समझती है। जबकि आम आदमी की सुरक्षा पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिये।
हमें बर्बाद करने के लिए चक्रव्यू रचे गए- हेमंत सोरेन
भोजपुरी और मगही रिजनल लैंग्वेज नहीं है. ये आयातीत भाषाएं हैं. जो लोग मगही बोलते हैं, भोजपुरी बोलते हैं, वे डॉमिनेटिंग होते हैं। यहां के लोग तो बेचारे कमजोर लोग हैं । जो मजबूत होता है, सब उसके पैर के नीचे होते हैं। उनका साथ देने के चलते यहां के भी कुछ लोगों ने मगही-भोजपुरी सीख ली। लेकिन यहां के गांवों में ये भाषाएं नहीं बोली जाती । ये बातें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू के दौरान कही ।
हेमन्त सोरेन(Hemant Soren) ने कहा कि मगही और भोजपुरी तो बिहार की भाषाएं हैं. झारखण्ड का बिहारीकरण क्यों ? झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने यहां तक कहा कि जब झारखण्ड आंदोलन होता था तो यहां की महिलाओं की छाती पर पैर रखते हुए, उनकी इज्जत लूटते वक्त न जाने कितनी भोजपुरी भाषा में गालियां दी जाती थीं।
खुला प्रश्न सभी गठबंधन दलों से, interview में मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी के भोजपुरी,मगही भाषाएँ बोलने वालों के लिए जो विचार हैं क्या वे सहमत हैं? जिनसे राजधर्म की उम्मीद की जाती है क्या किसी विशेष व्यक्ति या वारदात के आधार पर पूरे समाज को अपमानित करने का अधिकार उन्हें है? pic.twitter.com/TJXqmMcOUN
हेमन्त सोरेन ने कहा कि भोजपुरी लैंग्वेज की बदौलत अलग झारखण्ड की जंग नहीं लड़ी गई ? मगही लैंग्वेज की बदौलत ये जंग नहीं लड़ी गई । अलग झारखण्ड राज्य की जंग लड़ी गई थी यहां के ट्राइबल लैंग्वेज के बल पर । यहां के स्थानीय भाषाओं के बल पर ।
नियुक्ति नियमावली में स्थानीय भाषाओं के चयन को लेकर कांग्रेस की आपत्ति पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इसपर हम उनसे बातचीत करेंगे । हम उनको समझाने की कोशिश करेंगे । हम ये नहीं कहते कि हम आपको इग्नोर कर रहे हैं। हम लोगों ने भाषाओं को जिलों के आधार पर अपनाने का निर्णय लिया है ।
हमेशा कम पढ़े-लिखे लोगों ने संघर्ष किया है
हेमंत सोरेन से जब पूछा गया कि आप कॉलेज फेल हैं, आपके पिता भी कम पढ़े-लिखे हैं और उनका क्रिमिनल रिकॉर्ड भी है। इस पर हेमंत सोरेन ने कहा कि हमेशा संघर्ष कम पढ़े-लिखे लोगों ने ही किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू अनपढ़ थे। बुद्धिजीवी या पढ़े-लिखे लोगों ने समाज में कोई बदलाव लाया हो तो बताएं ।
जब चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो सब्जी वाला सरकार क्यों नहीं गिरा सकता?
हेमंत सोरेन से जब पूछा गया कि सरकार गिराने की साजिश रचने के आरोपी, जिनको आपकी पुलिस ने गिरफ्तार किया, उनमे से एक सब्जी बेचने वाला था ? इसपर हेमंत सोरेन ने कहा कि वो सब्जी वाला फाइव स्टार होटल में रहता था । उन्होंने कहा कि जब एक चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो सब्जी बेचने वाला सरकार क्यों नहीं गिरा सकता?
विधानसभा के अगले सत्र में लाएंगे मेडिकल प्रोटेक्शन बिल- बन्ना गुप्ता
धनबाद में डॉक्टरों की लापरवाही से नवजात की मौत, चार डॉक्टरों पर केस दर्ज
धनबाद । धनबाद जिले में कथित लापरवाही के कारण नवजात की मौत के मामले में एक नर्सिंग होम के चार डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है । पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि मृतक के पिता सुमित पाराशर ने धनबाद सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई कि अस्पताल के मालिक समेत चार चिकित्सकों की लापरवाही के कारण उसके बच्चे की मौत हो गई ।
नवजात की मौत की जांच के लिए मेडिकल टीम गठित
अधिकारी ने दर्ज मामले के आधार पर बताया कि पाराशर की पत्नी शालिनी को नौ सितंबर को नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने बच्चे को जन्म दिया । शनिवार को उस बच्चे की मौत हो गई । धनबाद सदर थाना प्रभारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि मजिस्ट्रेट की देखरेख में शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया । उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल के सिविल सर्जन को नर्सिंग होम में बच्चे की मौत के मामले में मेडिकल बोर्ड गठित करने को कहा गया है।
प्रशासन चिकित्सकों के खिलाफ- इंडियन मेडिकल एसोसिएशन
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की धनबाद इकाई के अध्यक्ष डॉक्टर मेजर चंदन ने कहा कि डॉक्टर गंभीर मरीजों को बचाने की पूरी कोशिश करते हैं. उन्होंने कहा, ‘यह हमारे लिए चिंता का विषय है कि प्रशासन और पुलिस चिकित्सकों की कथित लापरवाही के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जबकि डॉक्टरों पर हमलों को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं.’ हाल ही में, धनबाद के एक अन्य डॉक्टर के खिलाफ भी बोकारो के एक मरीज के इलाज में लापरवाही के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसकी अस्पताल में मौत हो गई थी ।
जल्द लागू होगा मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट- बन्ना गुप्ता
उधर स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का कहना है कि विधानसभा के अगले सत्र में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट पास कराया जाएगा। इसके बाद यह कानून राज्य भर में लागू हो जाएगी। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि मैंने शुरू से ही कहा था कि चिकित्सकों के चेहरे पर मुस्कान आएगी तभी मरीजों को बेहतर सेवा मिल सकेगी। इसके लिए सरकार काम कर रही हैं।
गिरिडीह। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होने गिरिडीह सदर अस्पताल में ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाने का काम खाना बनाने वाली एजेंसी के संचालक मोहम्मद नवाब को दिलवा दिया, वो भी बिना किसी टेंडर के। इतना ही नहीं झामुमो के गिरिडीह विधायक सुदिव्य सोनू पर ये भी आरोप है कि उन्होने अपने चहेते झामुमो नेता कुमार गौरव को सदर अस्पताल के दौ सौ बेड और गांडेय व बेंगाबाद में 10-10 बेड के अलावे बरमोरिया अस्थायी कोविड हॉस्पिटल में ऑक्सीजन सप्लाय पाइपलाइन का काम सौंप दिया गया । यहां भी टेंडर निकालने तक की जरुरत नहीं समझी गई।
सुदिव्य कुमार सोनू का वचन ही है यहां शासन ?
नियम तो कहता है कि ऑक्सीजन पाइपलाइन लगाने का काम किसी अनुभवी ठेकेदार को ही देना है। लेकिन यहां तो खाना बनाने का अनुभव ही काम आ गया और सबसे बड़ा अनुभव जो नवाब और कुमार गौरव दोनों को था, वो था विधायक जी की नजदीकी का। मामले की जब पड़ताल की गयी तो सदर अस्पताल के दूसरे तल्ले में जिला कुष्ठ विभाग के पदाधिकारी के चैंबर और कर्मियों के कार्यालय से सदर अस्पताल के मीटिंग हाल तक में पाइपलाइन बिछा हुआ मिला । अस्पताल के इसी तल्ले के एक वार्ड में पाइपलाइन दीवार से सटा हुआ दिखा ।
रसोईया और झामुमो नेता को काम देने में ताक पर रखे गये नियम
स्वास्थ विभाग के सूत्रों की मानें तो विधायक की अनुशंसा पर ऑक्सीजन सप्लाइ के पाइपलाईन का कार्य विकास एजेंसी एनआरईपी को दिया गया। एनआरईपी के जेई मुकेश कुमार को एनआरईपी ने कार्य आवंटित किया । तो जेई मुकेश कुमार ने सदर अस्पताल में दौ सौ बेड और बेंगाबाद के साथ गांडेय स्वास्थ केन्द्र में अस्पताल के रसोईया को पाईप लाईन बिछाने का कार्य सौंप दिया । वहीं बरमोरिया के अस्थायी कोविड सेंटर में झामुमो नेता को पाईप बिछाने का कार्य आवंटित कर दिया ।
सिविल सर्जन मीडिया से बात करने को तैयार नहीं
इस मामले में जब सिविल सर्जन डॉ शिव प्रसाद मिश्रा और एनआरईपी के पदाधिकारियों से कारण पूछा गया तो अधिकारी ने कैमरे के सामने कुछ कहने से इंकार कर दिया ।