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झारखंड बजट 2025: जनता और विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित, सर्वश्रेष्ठ सलाहकार होंगे सम्मानित

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झारखंड सरकार ने मांगे आपके सुझाव!

रांची: झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट निर्माण के लिए जनता और विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अबुआ बजट पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च करते हुए कहा कि यह पहल झारखंड के विकास में जनता की भागीदारी को सुनिश्चित करेगी। इस मौके पर वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

कैसे दें अपने सुझाव?

सरकार ने सुझाव देने की प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाया है:

  1. अबुआ बजट ऐप डाउनलोड करें:
    • मोबाइल के प्ले स्टोर पर जाएं और “अबुआ बजट” ऐप डाउनलोड करें।
    • ऐप में दिए गए निर्देशों का पालन करके रजिस्ट्रेशन करें और अपने सुझाव साझा करें।
  2. वेबसाइट पर सुझाव दें:
    • https://finance.jharkhand.gov.in/budgetvichar पर जाएं।
    • मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी से रजिस्ट्रेशन करें और अपने सुझाव दर्ज करें।
  3. अंतिम तारीख:
    • सुझाव भेजने की आखिरी तारीख 17 जनवरी 2025 है।

सम्मानित होंगे सर्वश्रेष्ठ सुझाव देने वाले

सरकार ने घोषणा की है कि इस पहल के तहत तीन सर्वश्रेष्ठ सुझाव देने वालों को सम्मानित किया जाएगा। यह झारखंड सरकार की जनता के साथ सक्रिय संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पिछले साल का बजट और इस बार के फोकस क्षेत्र

  • 2024-25 के बजट में: तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने 1,28,900 करोड़ रुपए का बजट पेश किया था। इसमें:
    • कृषि कर्ज माफी की सीमा को 50,000 रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए किया गया।
    • अबुआ आवास योजना पर विशेष ध्यान दिया गया।
  • 2025-26 का बजट: इस बार सरकार का फोकस मंईयां सम्मान योजना और अन्य जनहितकारी योजनाओं पर है।

आपकी भागीदारी से बनेगा मजबूत बजट

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह बजट झारखंड की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला होगा। आपका हर सुझाव झारखंड के विकास को नई दिशा देगा।”

आइए, अपनी राय दें और झारखंड के भविष्य को बेहतर बनाएं!

क्या आप झारखंड बजट के निर्माण में भाग लेना चाहते हैं? अपने सुझाव साझा करें और सर्वश्रेष्ठ बनने का मौका पाएं!

मंईयां सम्मान योजना: 56 लाख महिलाओं के खाते में आएंगे 5000 रुपए, सीएम हेमंत सोरेन का भव्य कार्यक्रम

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झारखंड की महिलाओं के लिए खुशखबरी!

रांची: मंईयां सम्मान योजना का इंतजार अब खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार, 6 जनवरी को इस योजना के तहत 56 लाख से अधिक महिलाओं के खाते में 5000 रुपए ट्रांसफर करेंगे। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए रांची के नामकुम में भव्य समारोह आयोजित किया गया है।

महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की ओर बड़ा कदम

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने स्पष्ट किया है कि हेमंत सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इंडिया गठबंधन सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है।

एक साथ 5000 रुपए ट्रांसफर होंगे

जो महिलाएं दिसंबर में योजना की 2500 रुपए की पहली किस्त नहीं पा सकी थीं, उन्हें 6 जनवरी को दोनों किस्तों को मिलाकर 5000 रुपए की राशि दी जाएगी। झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, “हमारी सरकार अपने हर वादे को पूरा कर रही है। यह कदम महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।”

झारखंड के इतिहास का सबसे बड़ा समारोह

इस कार्यक्रम में राज्य के 24 जिलों से 3-4 लाख महिलाओं के रांची पहुंचने की संभावना है। नामकुम में आयोजित यह समारोह न केवल ऐतिहासिक होगा, बल्कि झारखंड के विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगा।

  • इस अवसर पर मुख्यमंत्री लाभुकों से सीधे संवाद करेंगे।
  • महिलाओं को डिजिटल माध्यम से खाते में पैसा ट्रांसफर किया जाएगा।
  • यातायात के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

कार्यक्रम में देरी का कारण

पहले यह कार्यक्रम 28 दिसंबर को आयोजित होने वाला था। लेकिन, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के कारण इसे स्थगित कर 6 जनवरी को पुनः निर्धारित किया गया।

हेमंत सरकार का वादा: हर महिला के चेहरे पर मुस्कान

झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करते हुए हेमंत सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि झारखंड की महिलाएं आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनें।

आपकी राय हमें बताएं!

इस योजना को लेकर आपके विचार क्या हैं? इस भव्य आयोजन की चर्चा सोशल मीडिया पर करें और हमें बताएं कि आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं।

8 घंटे लगी रही आग, 10km दूर तक सुनाई पड़ा धमाका, क्या पुलिसवालों की वसूली से हुआ इतना बड़ा हादसा

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हादसे का विवरण

एक दुखद घटना, जो क्षेत्रीय समुदाय को हिला कर रख दिया, इस प्रकार घटित हुई कि आग ने लगभग 8 घंटे तक तेजी से फैलते हुए वातावरण को भस्म कर दिया। यह घटना स्थानीय समयानुसार उजाले के दौरान शुरू हुई, जब शहर के बाहरी इलाकों में एक औद्योगिक इकाई में आग लग गई। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, आग का कारण संभवतः किसी प्रकार की लापरवाही या फिर तकनीकी खराबी हो सकता है। आग लगने की तीव्रता ने स्थानीय लोगों को भी भयभीत कर दिया। जब यह आग भड़कने लगी, तो इसके साथ जोरदार धमाके सुनाई दिए, जो 10 किलोमीटर की दूरी तक महसूस किए गए। इस स्थिति ने लोगों में आतंक फैलाने के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में लोग अपने सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

स्थानीय प्रशासन ने तुरंत प्रतिक्रिया दी, लेकिन आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीमों को भी घटनास्थल पर पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। धुएं और भारी आग के कारण दृश्यता बहुत कम हो गई थी, जिससे बचाव कार्यों में बाधा उत्पन्न हुई। घटनास्थल पर पुलिस के अधिकारियों ने व्यवस्था बनाए रखने और दुर्घटना स्थल से नागरिकों को सुरक्षित निकालने का कार्य किया।

इस घटना के दौरान, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे। कुछ नागरिकों ने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर अधिकारी सही समय पर कार्रवाई नहीं कर पाए, जिससे आग ने तेज़ी से फैलने का अवसर प्राप्त किया। जबकि अन्य के अनुसार, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया। इस संबंध में कई रिपोर्ट और अभिकर्ताओं की चश्मदीद गवाहियों का विश्लेषण किया जाना आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

पुलिस की भूमिका और वसूली का मामला

इस हादसे के संबंध में पुलिस की भूमिका को समझना आवश्यक है, खासकर तब जब घटनाक्रम में वसूली का मुद्दा भी उठता है। प्रारंभ में, पुलिस की मुख्य जिम्मेदारी थी स्थिति को नियंत्रण में रखना और राहत एवं बचाव कार्यों को सुनिश्चित करना। लेकिन घटना की जांच करने पर यह स्पष्ट होता है कि कुछ पुलिसकर्मियों का कार्यक्षेत्र वसूली में भी शामिल था। वसूली की कार्रवाई के दौरान, यदि पुलिस का ध्यान इस प्रकार की गतिविधियों पर केंद्रित रहता है, तो यह स्वाभाविक है कि यह जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि पुलिस के कार्यों का जनता के प्रति नकारात्मक प्रभाव न पड़े। वसूली के दौरान यदि किसी पुलिसकर्मी का आचरण संदेहास्पद होता है, तो इससे पूरी पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं। जांच के दौरान यह पता चला है कि कुछ स्थलों पर पुलिस ने आम जनता से धन इकट्ठा करने की कोशिश की, जो ऐसा प्रतीत होता है कि वे अपने कर्तव्यों को निभा रहे थे।

इसी प्रकार, यदि वसूली के मामलों में अनुपयुक्त कार्यवाही की गई है, तो यह संभावित रूप से हानिकारक साबित हो सकता है। यदि पुलिस की एकाग्रता आपातकालीन स्थितियों के बजाय धन जुटाने में अधिक हो जाती है, तो नागरिकों के प्रति उनकी सेवा का उद्देश्य भुला दिया जाता है। अतः यह आवश्यक है कि ऐसी घटनाओं की जांच निष्पक्षता से हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या वाकई वसूली ने इस बड़े हादसे में योगदान दिया या नहीं। कुल मिलाकर, पुलिस की भूमिका को पूरी तरह से समझने के लिए इन पहलुओं पर विचार करना अति आवश्यक है।

आग से होने वाले नुकसानों का आकलन

आग की घटनाएं अक्सर तात्कालिक क्षति और दीर्घकालिक प्रभाव का कारण बनती हैं। आर्थिक दृष्टिकोण से, इनके परिणाम अल्पावधि में बहुत ही गंभीर हो सकते हैं। अधिकांश समय, आग से संपत्ति का व्यापक नुकसान होता है, जिसका असर व्यक्ति, व्यवसाय और समुदाय पर पड़ता है। संपत्ति के नुकसान में भवन, उपकरण, और अन्य उत्पाद शामिल होते हैं। यह नुकसान दुर्घटना की तीव्रता और सटीकता पर निर्भर करता है। जब आग नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तो वो महंगे फर्नीचर, औद्योगिक मशीनरी, और अनमोल वस्तुओं को भी नष्ट कर सकती है। इस प्रकार से, मालिकों का वित्तीय बोझ बढ़ जाता है, और कुछ लोग अपने व्यवसाय या घर को पूरी तरह से खो सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, आग से जान-माल का नुकसान भी एक गंभीर चिंता का विषय है। दुर्भाग्यवश, आग लगने की घटनाओं में कभी-कभी जान गंवाने की भी घटनाएं होती हैं। यह न केवल मृतकों के परिवारों पर एक भारी मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालता है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक नकारात्मक संकेत होता है। पीड़ित व्यक्ति या परिवार के लिए, इस प्रकार की घटनाएं दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का कारण बन सकती हैं। PTSD जैसे विकारों का विकास महज आग लगने के कारण हो सकता है। यह व्यक्ति की सामाजिक गतिविधियों और सामान्य जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

समाजिक दृष्टिकोण से भी, ऐसे हादसे समुदाय की सुरक्षा, सामंजस्य और सहानुभूति को चुनौती देते हैं। जब लोग एक-दूसरे के प्रति असुरक्षित महसूस करते हैं, तो यह उनके मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर भी असर डाल सकता है।

एक आग की गंभीरता केवल आर्थिक नुकसान में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं में भी होती है। इसलिए, आग लगने की घटनाओं का प्रबंधन और इसे रोकने के उपाय बेहद आवश्यक हैं।

भविष्य की रोकथाम और सुरक्षा उपाय

इस घटना के गंभीर परिणामों को ध्यान में रखते हुए, भविष्य में ऐसे हादसों की रोकथाम के लिए कई प्रभावी सुरक्षा उपायों का कार्यान्वयन आवश्यक है। सबसे पहले, सरकारी नीतियों का पुनरावलोकन करना और उन्हें अधिक प्रभावशाली बनाना महत्वपूर्ण है। सरकार को चाहिए कि वह मौजूदा नियमावली को सख्ती से लागू करे और नए सुरक्षा मानकों को स्थापित करे जो संभावित खतरों को कम कर सके।

सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए सामरिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। इसके अंतर्गत संयंत्रों और उद्योगों में आवश्यक सुरक्षा उपकरणों और तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित करना शामिल है। इससे न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि यह औद्योगिक दुर्घटनाओं की संभावना को भी कम करेगा। सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन, जिसमें कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए, अत्यंत आवश्यक है।

निजी क्षेत्र के प्रयासों को भी इस संदर्भ में महत्व देना चाहिए। कंपनियों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए स्वच्छता, सुरक्षा तथा आपात स्थिति के लिए प्रबंधनों का कार्यान्वयन करना चाहिए। निजी क्षेत्र के लिए वित्तीय प्रोत्साहन भी जरूरी है ताकि वे सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए आवश्यक निवेश कर सकें।

सबसे महत्वपूर्ण, स्थानीय समुदायों के साथ सामंजस्य और सहभागिता बढ़ाना आवश्यक है। जब समुदायों को जागरूक किया जाए और उन्हें आवश्यक जानकारी दी जाए, तब वे आपात स्थितियों में अधिक सक्षम और प्रभावी हो सकते हैं। जनसंवाद और आपसी सहयोग से हम एक सुरक्षित वातावरण का निर्माण कर सकते हैं, जो भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को टालने में सहायक होगा।

खाते में कब आएगा मंईयां सम्मान योजना का पैसा? हेमंत सोरेन सरकार ने बता दी तारीख

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मंईयां सम्मान योजना का अवलोकन

मंईयां सम्मान योजना, झारखंड राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की गई एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाना है। इस योजना को लागू करने का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकें। यह योजना महिलाओं को विकास के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करती है।

इसकी पृष्ठभूमि में, यह स्पष्ट है कि झारखंड में महिलाओं के साथ हो रहे विभिन्न प्रकार के सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर करने के लिए यह योजना आवश्यक थी। मंईयां सम्मान योजना महिलाओं को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और स्वावलंबन को भी बढ़ावा देती है। इस योजना के तहत, पात्र महिलाओं को हर महीने निश्चित राशि का भुगतान किया जाता है, जो उनकी जीवनस्तर में सुधार करने में सहायक होती है।

इस योजना का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराती है। इसके माध्यम से, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि महिलाओं को अपने जीवन में स्थिरता और सुरक्षा मिले। जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं, तो वे परिवार और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अधिक सक्षम होती हैं। इस प्रकार, मंईयां सम्मान योजना का यह सामाजिक पहल के रूप में व्यापक प्रभाव है, जो अंततः समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

हेमंत सोरेन सरकार की घोषणा

हेमंत सोरेन सरकार ने हाल ही में मंईयां सम्मान योजना के तहत धनराशि के वितरण की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। घोषित कार्यक्रम के अंतर्गत, लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में धनराशि का हस्तांतरण किया जाएगा, जिससे उन्हें मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता मिलेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना उन पात्र व्यक्तियों और परिवारों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जिनकी वार्षिक आय एक निश्चित सीमा के नीचे है। योजना के तहत आवेदन करने वाले लाभार्थियों को आवश्यक दस्तावेज और जानकारी प्रदान करने होंगे, ताकि उनकी पात्रता को जल्दी से सत्यापित किया जा सके। इसके बाद, चयनित लाभार्थियों की सूची बनाकर धनराशि की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

निर्धारित समय सीमा के अनुसार, सरकार ने बताया है कि धनराशि का वितरण अगले महीने की 15 तारीख से शुरू होगा। इस घोषणा में धनराशि के वितरण की व्यवस्था और उसकी योजना के साथ जुड़े अन्य पहलुओं को भी स्पष्ट किया गया है। प्रत्येक लाभार्थी को एक निश्चित राशि का वितरण किया जाएगा, जिससे वे अपने प्राथमिक खर्चों को संभाल सके। आर्थिक विशेषज्ञों ने इस पहल की सराहना की है और इसे आर्थिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना है।

हेमंत सोरेन सरकार की इस घोषणा से राज्य के कई परिवारों को उम्मीद है कि उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिलेगी, जो उनके जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होगी। लाभार्थियों को अपनी अपेक्षाओं के बारे में जानकारी रखना और सरकार द्वारा निर्धारित समयसीमा के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक होगा।

किसे मिलेगा लाभ?

मंईयां सम्मान योजना का गठन झारखंड राज्य की सरकार द्वारा उन किसानों के लिए किया गया है, जो आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में हैं। इस योजना का उद्देश्य उन व्यक्तियों को सहायता प्रदान करना है, जो अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं तथा विभिन्न कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इस योजना का लाभ वे किसान उठा सकेंगे, जिनकी वार्षिक आय सीमित है और जिनके पास सीमित अकृषि स्रोत हैं।

योजना के तहत, प्राथमिकता उन किसानों को दी जाएगी, जिनके पास 5 एकड़ से कम कृषि भूमि है। इसके अलावा, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। यह सुनिश्चित किया गया है कि गरीब और जरूरतमंद किसानों को अधिकतर समर्थन मिले, ताकि वे अपनी कृषि गतिविधियों को सुचारू रूप से चला सकें।

लाभार्थियों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, जैसे कि आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र और भूमि की खाता जानकारी। इन दस्तावेजों के माध्यम से यह निश्चित किया जाएगा कि लाभार्थियों में वास्तविक किसान शामिल हैं और उन्हें योजना का लाभ उठाने का पूरा अधिकार है। यही नहीं, योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्थानिय प्रशासन तथा गाँव की पंचायतों की सहभागिता आवश्यक होगी।

अंततः, यह योजना किसानों के जीवन में सुधार लाने और उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के इस प्रयास से झारखंड के ग्रामीण इलाकों में बदलाव आना और किसान समुदाय को मजबूती प्रदान करने की उम्मीद है।

लाभार्थियों के लिए महत्वपूर्ण कदम

मंईयां सम्मान योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करना है। इस योजना में लाभार्थियों के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया को समझना महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, इच्छुक लाभार्थियों को सावधानीपूर्वक सभी आवश्यक दस्तावेजों को इकट्ठा करना चाहिए। जैसे पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और बैंक खाते की जानकारी। यह दस्तावेज योजना के तहत आवेदन के लिए अनिवार्य होंगे।

आवेदन प्रक्रिया को तीन सरल चरणों में विभाजित किया जा सकता है। पहले चरण में, लाभार्थियों को राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना चाहिए, जहां उन्हें मंईयां सम्मान योजना के तहत आवेदन फॉर्म प्राप्त करना होगा। फॉर्म भरने के बाद, निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करें। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी जानकारी सही और पूर्ण हो। दूसरा चरण ऑनलाइन आवेदन सबमिट करना है। लाभार्थियों को आवेदन सबमिट करने के बाद एक पंजीकरण संख्या प्राप्त होगी, जिसे उन्हें सभी भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रखना चाहिए।

तीसरे चरण में, आवेदन की स्थिति को नियमित रूप से जांचना आवश्यक है। लाभार्थियों को यह देखना चाहिए कि क्या उनका आवेदन संख्या सही ढंग से पंजीकृत है और यदि कोई घटनाक्रम अपडेट की आवश्यकता है। इसके अलावा, यदि आवेदन अस्वीकृत होता है, तो सभी संबंधित जानकारी को ध्यानपूर्वक पढ़ें ताकि पुनः आवेदन करने में कोई गलती न हो। योजना की प्रक्रिया के दौरान लाभार्थियों को सजग रहना होगा और किसी भी प्रश्न के लिए स्थानीय प्रशासन या अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।

महिला अंडर-19 एशिया कप की होगी शुरुआत, एशियाई क्रिकेट परिषद ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय

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महिला अंडर-19 एशिया कप की होगी शुरुआत, एशियाई क्रिकेट परिषद ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय

एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) ने कुआलालंपुर में आयोजित कार्यकारी बोर्ड की बैठक में महिला अंडर-19 टी20 एशिया कप के उद्घाटन संस्करण की घोषणा की है। यह टूर्नामेंट एशियाई टीमों की वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने और उनके प्रदर्शन को सुधारने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

एसीसी का यह महत्वपूर्ण निर्णय महिला क्रिकेट के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए लिया गया है। इस टूर्नामेंट के माध्यम से युवा महिला क्रिकेटरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का एक नया अवसर मिलेगा, जिससे वे बेहतर अनुभव और तैयारी प्राप्त कर सकें।

महिला अंडर-19 टी20 एशिया कप का आयोजन खिलाड़ियों को आईसीसी महिला अंडर-19 वर्ल्ड कप के विभिन्न संस्करणों के लिए तैयार करने के मकसद से किया जा रहा है। एशियाई क्रिकेट परिषद का यह कदम एशिया की उभरती हुई क्रिकेट प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करेगा और एशियाई टीमों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार लाएगा।

आयुष्मान भारत का नया कार्ड: रजिस्ट्रेशन जल्द शुरू होंगे, पढ़ें नया अपडेट

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आयुष्मान भारत का नया कार्ड: रजिस्ट्रेशन जल्द शुरू होंगे, पढ़ें नया अपडेट

आयुष्मान भारत योजना में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 70 साल और उससे अधिक उम्र के सभी लोगों को स्वास्थ्य कवरेज देने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से करीब छह करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को फायदा होगा। योजना के तहत इन बुजुर्गों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा, जिससे करीब 4.5 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। अब आयुष्मान भारत योजना के तहत 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों को सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज उपलब्ध होगा। यह कदम चार करोड़ परिवारों में रहने वाले छह करोड़ बुजुर्गों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा।

आयुष्मान भारत के तहत पंजीकरण

इस योजना का लाभ उठाने के लिए बुजुर्गों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। रेल, सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना 70 साल और उससे अधिक उम्र के सभी बुजुर्गों को कवर करेगी।

इस नए कार्ड के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं की नई सुविधा मिलने जा रही है, जिससे उनका इलाज और स्वास्थ्य सुरक्षा और भी सुलभ हो जाएगा।

लोबिन की भाजपा में एंट्री: बढ़ेगी गुटबाजी, तो खिलने से पहले मुरझा सकता है कमल!

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लोबिन की भाजपा में एंट्री: बढ़ेगी गुटबाजी, तो खिलने से पहले मुरझा सकता है कमल!

संताल परगना प्रमंडल के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मचाते हुए, लोबिन हेम्ब्रम ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होकर एक नया राजनीतिक मोड़ लिया है। पूर्व में हरियाली के प्रतीक रहे हेम्ब्रम अब केशरिया रंग में रंग चुके हैं और भाजपा में शामिल होते ही उन्होंने बोरियो विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की बात भी कही है।

संताल परगना प्रमंडल, झारखंड की सत्ता का प्रवेश द्वार माना जाता है। इस प्रमंडल में कुल 18 विधानसभा सीटें हैं और पिछले कुछ चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि जिस दल या गठबंधन का इस क्षेत्र में बर्चस्व रहता है, वही सत्ता पर काबिज होता है। 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इस क्षेत्र में सिर्फ 4 सीटें मिलीं, जबकि झामुमो ने 9 और कांग्रेस ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की।

भाजपा का प्रयास: संताल परगना के एसटी आरक्षित सीटों पर खिले कमल

संताल परगना की 18 सीटों में से 7 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 2019 के चुनाव में झामुमो ने सभी एसटी सीटों पर कब्जा जमाया, जिससे यह क्षेत्र झामुमो का गढ़ बन गया। हालांकि, भाजपा ने भी समय-समय पर यहां सेंधमारी की है। 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले, भाजपा ने झामुमो के टिकट पर एसटी के लिए आरक्षित जामा और बोरियो सीट से 2019 में चुने गए सीता सोरेन और लोबिन हेम्ब्रम को पार्टी में शामिल करा लिया है। भाजपा का उद्देश्य है कि संताल परगना की एसटी आरक्षित सीटों पर कमल खिले, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या इन सीटों पर गुटबाजी बढ़ेगी या फिर पार्टी एकजुटता का पाठ पढ़ाएगी?

लोबिन और ताला के इर्द-गिर्द घूमती रही है बोरियो की राजनीति

साहेबगंज जिले की बोरियो विधानसभा क्षेत्र की राजनीति भाजपा और झामुमो के इर्द-गिर्द घूमती रही है। 2000, 2009, और 2019 के चुनाव परिणामों में झामुमो के लोबिन हेम्ब्रम और 2004 और 2014 के चुनावों में भाजपा के ताला मरांडी बोरियो से विधायक बने। अब दोनों एक ही मंच पर हैं, जिससे 2024 के चुनाव परिणाम पर सवाल खड़ा हो गया है।

राजनीतिक धुरंधर लोबिन बोरियो से लड़ेंगे चुनाव

लोबिन हेम्ब्रम ने भाजपा में शामिल होते ही बोरियो से चुनाव लड़ने की घोषणा की। झामुमो में रहते हुए उन्होंने अपनी ही सरकार को कई बार आईना दिखाया और उन्हें एहसास था कि आगामी चुनाव में झामुमो का टिकट मिलने की संभावना कम है। अब भाजपा में शामिल होकर उन्होंने बोरियो सीट पर टिकट की दावेदारी भी की होगी। हालांकि, भाजपा में शामिल होने के बाद भी लोबिन की राजनीतिक सूझबूझ और निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरने की क्षमता को नकारा नहीं जा सकता।

बढ़ेगी गुटबाजी या फिर पढ़ाया जाएगा एकता का पाठ?

अब सवाल यह है कि लोबिन की भाजपा में एंट्री से पार्टी में गुटबाजी बढ़ेगी या पार्टी एकजुटता को प्राथमिकता देगी? बोरियो विधानसभा में ताला मरांडी फिलहाल चुप हैं, लेकिन 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले सूर्य नारायण हांसदा नाराज बताए जा रहे हैं। हांसदा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के करीबी माने जाते हैं और उन्होंने 2019 में भाजपा के टिकट पर बोरियो से चुनाव लड़ा था।

2019 में त्रिकोणीय मुकाबला था, अब तीनों एक मंच पर

2019 के विधानसभा चुनाव में लोबिन हेम्ब्रम, सूर्य नारायण हांसदा और ताला मरांडी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था, जबकि इस बार तीनों एक मंच पर हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन तीनों कोणों में से कौन एक-दूसरे को सहारा देगा और कौन शीर्ष पर पहुंचने की कोशिश में संघर्ष करेगा। अगर गुटबाजी बढ़ती है, तो बोरियो में कमल खिलने से पहले ही मुरझा सकता है।

सीएम हेमंत सोरेन का विपक्ष पर हमला, आरोप लगाए कि विधायकों को खरीदने के लिए घूम रहे हैं केंद्रीय मंत्री

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सीएम हेमंत सोरेन का विपक्ष पर हमला, आरोप लगाए कि विधायकों को खरीदने के लिए घूम रहे हैं केंद्रीय मंत्री

जमशेदपुर, झारखंड — झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को जमशेदपुर में विपक्ष और केंद्रीय मंत्री पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री कोल्हान क्षेत्र में घूमकर मनरेगा के तहत झारखंड को सबसे कम मजदूरी देने के सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं। सोरेन ने यह भी कहा कि मंत्री विधायकों को खरीदने और पार्टी तोड़ने के लिए भ्रमण कर रहे हैं।

विपक्ष पर गंभीर आरोप

सोरेन ने कहा, “केंद्रीय मंत्री मनरेगा का पैसा अटका कर झारखंड में घूम रहे हैं। वे विधायकों को खरीदने और पार्टी तोड़ने के लिए यहां आ रहे हैं। जब वे कहते हैं कि हमारे पास इतने सांसद और विधायक हैं, तो यह पैसे के बल पर सरकार बनाने का तरीका है। जनता इनको नहीं चुनती, बल्कि पैसे के बल पर ये सत्ता में आते हैं।”

झारखंड की योजनाओं पर भी हमला

मुख्यमंत्री ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उन्होंने झारखंड में डबल इंजन की सरकार के दौरान पेंशन और महिलाओं के लिए कोई मदद नहीं की, जबकि बड़े व्यापारियों के संकट को तुरंत हल किया। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में हर घर को एक लाख रुपये देने की योजना है और किसी से उधार लेने की जरूरत नहीं होगी।

भ्रष्टाचार और योजनाओं की असफलता का आरोप

सोरेन ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने कोरोना महामारी के दौरान फर्जी दवाएं सप्लाई कीं और सत्ता में आने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उन्होंने कहा, “भाजपा चील-कौओं की तरह मंडराने लगी है। उनकी सत्ता के जादूगरों की तरह नोट छापने की मशीनें हैं और वे देश पर कब्जा करना चाहते हैं। जनता ने ऐसे सामंती विचार वालों को करारा जवाब दिया है।”

555 करोड़ की योजनाओं की सौगात

सीएम हेमंत सोरेन ने जमशेदपुर में 555.83 करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात दी। इनमें पूर्वी सिंहभूम के लिए 303.54 करोड़ रुपये और पश्चिमी सिंहभूम के लिए 252.28 करोड़ रुपये की योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को सुधारना और विकास को गति देना है।

राज्यपाल का दौरा

इस बीच, राज्यपाल ने बोरियो का दौरा किया और वहां के योजनाओं की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने जनता से संवाद करते हुए योजनाओं की जानकारी लेने की बात कही है।

मुख्यमंत्री के इस बयान से राजनीतिक माहौल में और गर्मी आ सकती है, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोरों पर हैं।

21 सितंबर को झारखंड आएंगे अमित शाह, परिवर्तन यात्रा का करेंगे शुभारंभ

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21 सितंबर को झारखंड आएंगे अमित शाह, परिवर्तन यात्रा का करेंगे शुभारंभ

रांची, झारखंड — केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 21 सितंबर को झारखंड के दौरे पर आ रहे हैं। इस दिन वह दुमका से भाजपा की परिवर्तन यात्रा की शुरुआत करेंगे। यह यात्रा राज्य के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजरेगी और भाजपा की चुनावी तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

परिवर्तन यात्रा का शुभारंभ

अमित शाह दुमका से भाजपा की परिवर्तन यात्रा को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस यात्रा में भाजपा शासित प्रदेशों के चार मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे, जिनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं। ये मुख्यमंत्री पार्टी कार्यकर्ताओं की हौसला अफजाई करेंगे और यात्रा को सफल बनाने में सहयोग करेंगे।

यात्रा की तैयारी और उद्देश्य

भाजपा ने परिवर्तन यात्रा के सफल आयोजन के लिए राज्य भर में व्यापक तैयारी की है। प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है, जिसमें कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए हैं। इस बैठक में विधानसभा चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र त्रिपाठी, नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी, और अन्य प्रमुख पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहे।

यात्रा का उद्देश्य

भाजपा की परिवर्तन यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य में भ्रष्टाचार, खोखले वायदे, लचर विधि व्यवस्था, महिलाओं के खिलाफ अपराध, बांगलादेशी घुसपैठ और बदलते जनसांख्यिकी जैसे मुद्दों को जनता के सामने लाना है। पार्टी का कहना है कि यह यात्रा इन समस्याओं पर प्रकाश डालेगी और जनता को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जागरूक करेगी।

झारखंड में भाजपा 6 परिवर्तन यात्राओं का आयोजन करेगी, जिनकी शुरुआत दुमका से हो रही है। यह यात्रा पार्टी की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और राज्य में भाजपा की स्थिति को मजबूत करने के लिए की जा रही है।

शिवराज सिंह चौहान का हमला: राहुल गांधी पर हताशा का आरोप, झारखंड सरकार को ‘लूटखंड’ करार

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शिवराज सिंह चौहान का हमला: राहुल गांधी पर हताशा का आरोप, झारखंड सरकार को ‘लूटखंड’ करार

रांची, झारखंड — केंद्रीय मंत्री और झारखंड भाजपा के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने अपने रांची दौरे के दौरान विपक्ष और राज्य सरकार पर तीखा हमला किया। भाजपा कार्यालय में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए चौहान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा।

राहुल गांधी पर आरोप

शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि विदेश जाकर देश की आलोचना करना केवल एक ‘हताश और निराश’ व्यक्ति का काम होता है। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी विदेश में जाकर भारत की छवि को खराब कर रहे हैं। यह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं, बल्कि कुंठित व्यक्ति ही कर सकता है। चुनाव आयोग पर सवाल उठाना भी उनकी हताशा का ही एक हिस्सा है। अटल बिहारी वाजपेयी भी विपक्ष के नेता थे, लेकिन उन्होंने विदेश में जाकर देश की प्रतिष्ठा बढ़ाई। इसके विपरीत, राहुल गांधी अपने ही देश की आलोचना कर रहे हैं।”

हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला

शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार की निंदा करते हुए कहा कि यह सरकार राज्य की प्रचुर जल, वन और खनिज संपदा का “लूटखंड” बना चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गठबंधन सरकार ने झारखंड को बर्बाद कर दिया है और नेताओं के घरों में नोटों का ढेर मिल रहा है। चौहान ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन के पैसे को लेकर सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और जनता अब इस सरकार को बदलने के लिए तैयार है।

चौहान ने भाजपा के चुनावी अभियान को लेकर आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य की जनता ने अब इस सरकार को उखाड़ फेंकने का मन बना लिया है। उनके इस दौरे के दौरान प्रदेश भाजपा की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें चुनावी रणनीतियों पर चर्चा की गई।

चौहान का यह बयान झारखंड विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी की चुनावी तैयारी का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों और विपक्षी नेताओं पर खुलकर हमला बोला।

भाजपा ने झारखंड में सर्वे कराया, नतीजे देखकर नेताओं को हुआ हैरानी

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भाजपा ने झारखंड में सर्वे कराया, नतीजे देखकर नेताओं को हुआ हैरानी

रांची, झारखंड — झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक आंतरिक सर्वे कराया है, जिसके परिणाम ने पार्टी नेताओं को चौंका दिया है। भाजपा 52 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है और हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन के पार्टी में शामिल होने के बाद पार्टी का उत्साह दोगुना हो गया है।

सर्वे के नतीजों के अनुसार, भाजपा को विधानसभा चुनाव में सफलता की उम्मीद जगी है, जो पार्टी की रणनीति और चुनावी तैयारी को बल दे रही है। पूर्व में 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने झारखंड में 60 से अधिक विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की थी, हालांकि विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। फिर भी, भाजपा को लगभग 52 लाख वोट मिले थे। इस बार भाजपा के रणनीतिकार मानते हैं कि विपक्ष में होने के कारण पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का सामना नहीं करना पड़ेगा।

भाजपा के चुनाव प्रभारी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने क्षेत्रीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुए चुनावी अभियान की रणनीति तय की है। पार्टी का लक्ष्य है कि लोकसभा चुनाव में मिले 82 लाख मतों को विधानसभा चुनाव में भी बढ़ाया जाए।

मुख्य मुद्दे: बांग्लादेशी घुसपैठ और बेरोजगारी

भाजपा ने चुनावी मुद्दों पर अपनी रणनीति स्पष्ट की है। संताल परगना और कोल्हान क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा प्रमुख रहेगा। पार्टी का आरोप है कि इन क्षेत्रों में जनसंख्या में बदलाव हो रहा है और आदिवासी समाज की पहचान खतरे में है। भाजपा के आदिवासी नेता स्थानीय भाषा में लोगों को घुसपैठ के नुकसान के बारे में जानकारी देंगे।

वहीं, पलामू प्रमंडल, रांची और धनबाद जैसे शहरी केंद्रों में बेरोजगारी और उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में हुई मौत का मुद्दा भी उठाया जाएगा। पार्टी इन मुद्दों को जनता के बीच प्रमुखता से पेश करके चुनावी लाभ की उम्मीद कर रही है।

भाजपा की रणनीति और सर्वे के नतीजे यह संकेत दे रहे हैं कि पार्टी विधानसभा चुनाव में एक मजबूत चुनौती पेश कर सकती है और संभावित रूप से सत्ता में वापसी कर सकती है।

झारखंड में धार्मिक झंडा विवाद से तनाव, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया

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झारखंड में धार्मिक झंडा विवाद से तनाव, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया

गिरिडीह, झारखंड — झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित सरिया थाना क्षेत्र के केशवारी गांव में दुर्गा मंदिर के सामने इस्लामिक झंडा गाड़े जाने के बाद भारी तनाव उत्पन्न हो गया है। इस घटना के मद्देनजर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए झंडा हटा दिया और इलाके में सुरक्षा के कड़े उपाय किए हैं।

घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय हिंदू समुदाय ने नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान केशवारी और नगर केशवारी के सैकड़ों लोग दुर्गा मंदिर के पास इकट्ठा हो गए और हंगामा करने लगे। स्थानीय पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचकर स्थिति को शांत करने की कोशिश की।

पुलिस ने घटना स्थल से झंडा हटा दिया और इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है। एसडीपीओ धनंजय राम और थाना प्रभारी ने ग्रामीणों को समझाया और उन्हें शांति बनाए रखने की अपील की। इसके अलावा, बीजेपी के प्रखंड अध्यक्ष अजय यादव और जिला मंत्री रजनी कौर भी मौके पर पहुंच गए और स्थिति को संभालने का प्रयास किया।

अजय यादव ने बताया कि इस घटना के संबंध में 21 लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि अगर दो दिनों के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो ग्रामीण थाने का घेराव करेंगे। उन्होंने मामले की शीघ्र जांच और कार्रवाई की मांग की है।

वर्तमान में, पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और सुनिश्चित किया है कि कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखा जाए।

झारखंड विधानसभा चुनाव 2024: एनडीए के तहत जदयू चुनाव लड़ेगा, संजय झा ने किया दावा

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झारखंड विधानसभा चुनाव 2024: एनडीए के तहत जदयू चुनाव लड़ेगा, संजय झा ने किया दावा

झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस) में जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) के शामिल होने की चर्चा गर्मा गई है। झारखंड दौरे पर पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने के बाद जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि जेडीयू आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए के बैनर तले चुनाव लड़ेगा।

संजय कुमार झा ने कहा, “केंद्र और बिहार में हम एनडीए के साथ हैं और झारखंड में भी हम विधानसभा चुनाव एनडीए के साथ मिलकर लड़ेंगे। इस संबंध में बीजेपी के साथ बातचीत जारी है।”

प्रदेश प्रभारी अशोक चौधरी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जनता इस सरकार से तंग आ चुकी है और प्रश्न कर रही है कि अंतिम समय में ‘मंईयां सम्मान’ जैसी योजना क्यों लागू की गई। उन्होंने जोर दिया कि जनता की व्याकुलता को समझते हुए पार्टी जल्द ही सकारात्मक कदम उठाएगी।

इस बीच, जेडीयू की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक पुराना झारखंड विधानसभा भवन में आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी अशोक चौधरी, श्रवण कुमार, प्रदेश अध्यक्ष खीरु महतो सहित कई जिलों के पदाधिकारी शामिल हुए।

जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने सरयू राय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरयू राय पार्टी के अंदर और बाहर एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरेंगे। उन्होंने राय को पार्टी की मजबूती और विस्तार में अहम भूमिका निभाने वाला बताया और कहा कि उनकी सलाह और आशीर्वाद से संगठन को बल मिलेगा।

संजय झा ने सरयू राय की मित्रता और उनके अनुभव को पार्टी के लिए एक मूल्यवान संपत्ति मानते हुए आगामी चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति को और अधिक मजबूत करने का आश्वासन दिया।

हेरहंज पुलिस ने पांच टीएसपीसी उग्रवादियों के घर चिपकाया इस्तिहार

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हेरहंज पुलिस ने पांच टीएसपीसी उग्रवादियों के घर चिपकाया इस्तिहार

हेरहंज थाना क्षेत्र में पुलिस ने टीएसपीसी (टीपरा सशस्त्र जनमुक्ति मोर्चा) के पांच प्रमुख उग्रवादियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। पुलिस ने आज इन उग्रवादियों के घरों पर इस्तिहार चिपकाए, जिसमें उनके खिलाफ चल रहे मामलों की जानकारी दी गई है और उनके गिरफ्तारी की अपील की गई है।

यह कार्रवाई हेरहंज थाना कांड संख्या-17/21, दिनांक-06/05/2021 के तहत की गई, जिसमें उग्रवादियों पर आर्म्स एक्ट और CLA एक्ट के तहत आरोप हैं। अभियुक्तों के नाम इस प्रकार हैं:

  1. पलेंद्र गंझू उर्फ अजीत जी, पिता स्व. दर्शू गंझू
  2. प्रभात जी उर्फ सुखदेव गंझू, पिता जगदेव गंझू
  3. सुदेश गंझू उर्फ सकेंद्र गंझू, पिता बिगन गंझू
  4. प्रमोद गंझू, पिता बंधन गंझू
  5. विशाल गंझू उर्फ तुलसी गंझू, पिता बंधन गंझू

सभी आरोपी ग्राम डोकर, थाना बालूमाथ, जिला लातेहार के निवासी हैं। पुलिस ने इन अभियुक्तों के घरों पर इस्तिहार चिपकाते हुए ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील की है।

इस कार्रवाई के पीछे पुलिस का उद्देश्य इन उग्रवादियों को गिरफ्तार कर कानून के शिकंजे में लाना है और क्षेत्र में शांति स्थापित करना है। पुलिस ने जनता से इन आरोपियों की जानकारी देने की अपील की है ताकि न्याय की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर का रांची दौरा: कई कयासों को मिल रहा बल

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कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर का रांची दौरा: कई कयासों को मिल रहा बल

रांची: कांग्रेस के झारखंड प्रदेश प्रभारी और AICC के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम अहमद मीर आज रात रांची पहुंच गए। उनकी इस अचानक यात्रा ने कई कयासों को जन्म दिया है, खासकर विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर। गुलाम अहमद मीर जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में व्यस्त रहने के बावजूद रांची का दौरा कर रहे हैं।

रांची एयरपोर्ट पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने गुलाम अहमद मीर का गर्मजोशी से स्वागत किया। मीर रात भर रांची में रुकेंगे और अगले दिन सुबह 09 बजे अपनी वापसी करेंगे।

गुलाम अहमद मीर का रांची दौरा क्यों खास माना जा रहा है?

गुलाम अहमद मीर का रांची दौरा खास माना जा रहा है, क्योंकि उनके जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले रांची आना एक महत्वपूर्ण कदम प्रतीत होता है। उनके रांची आगमन ने चुनावी रणनीति और संगठनात्मक तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

मीर ने एयरपोर्ट पर कहा कि उनका रांची आना झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए है। उन्होंने बताया कि राज्य में दो नए सह प्रभारी बनाए गए हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी हाल ही में नियुक्त हुए हैं। मीर का रांची में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक का कार्यक्रम है, जिसमें राज्य में चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की संभावना

गुलाम अहमद मीर ने कहा कि फिलहाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कोई निर्धारित मुलाकात नहीं है, लेकिन रोजाना फोन पर बातचीत होती रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आवश्यक हुआ तो वे अपनी वापसी से पहले मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सकते हैं।

बैठक का मुख्य एजेंडा

पार्टी सूत्रों के अनुसार, गुलाम अहमद मीर आज रात कांग्रेस के सह प्रभारी डॉ. बेला प्रसाद और प्रदेश कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में पार्टी की चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के साथ-साथ राज्य में चल रहे सांगठनिक कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा, अगले कुछ दिनों के लिए कांग्रेस नेताओं को टास्क सौंपे जाएंगे और सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग पर भी चर्चा की जाएगी।

गुलाम अहमद मीर का यह दौरा झारखंड कांग्रेस के लिए आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा और रणनीति को सुसंगत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।