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शादी के बाद पत्नी ने पति से बनाई दूरी, सच्चाई जानकर परिवार हैरान, पुलिस ने भी किया गिरफ्तार

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मैनपुरी, उत्तर प्रदेश: एक अजीबोगरीब घटना में, एक व्यक्ति जिसने मैट्रिमोनियल साइट के जरिए अपनी जीवन संगिनी को पाया था, शादी के तुरंत बाद ही पत्नी के दूर रहने से हैरान रह गया। जब विवाद बढ़ा और पत्नी मायके चली गई, तो पति उसे वापस लाने गया—लेकिन वहां जो सच सामने आया, उसने उसके साथ-साथ पूरे परिवार को चौंका दिया।

झूठ पर आधारित शादी

घिरौर कस्बे के निवासी मोहन कुमार की पहली पत्नी से तलाक हो चुका था। उन्होंने दोबारा शादी करने के लिए एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाई। इसी दौरान शाहजहांपुर के जलालाबाद निवासी रिंकी गुप्ता के परिवार ने शादी का प्रस्ताव रखा।

पत्नी का संदेहास्पद व्यवहार

शादी के बाद मोहन ने देखा कि उनकी पत्नी उनसे दूरी बनाए रखती थी और अक्सर फोन पर व्यस्त रहती थी। कई बार विवाद होने के बाद, वह अपने मायके चली गई। जब मोहन उसे वापस लाने गया, तो उसे धमकाकर भगा दिया गया।

छुपा हुआ सच उजागर

मोहन तब चौंक गए जब उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी पहले से ही शादीशुदा थी और अपने पहले पति के खिलाफ कानूनी विवाद में शामिल थी। जब उन्होंने सच्चाई जानने के लिए पत्नी के परिवार का सामना किया, तो उन्हें दुर्व्यवहार और मारपीट का सामना करना पड़ा।

कानूनी कार्रवाई शुरू

स्थानीय पुलिस से मदद न मिलने के बाद, मोहन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत के आदेश पर सरोज, प्रियंका, राहुल और रिंकी गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने अब इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है और ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से विवाह से पहले गहन पृष्ठभूमि जांच करने की अपील की है।

स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं? झारखंड सरकार दे रही है सुनहरा मौका, जल्दी करें आवेदन

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झारखंड सरकार ने राज्य में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए नई स्टार्टअप पॉलिसी 2023 को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 7 दिसंबर 2023 को हुई कैबिनेट बैठक में इस नई नीति को लागू किया गया। इसके तहत अटल बिहारी वाजपेयी इनोवेशन लैब (ABVIL) का गठन किया गया है, जो स्टार्टअप चयन, इकोसिस्टम को मजबूत करने और इंसेंटिव्स का वितरण करने का कार्य करेगी।

सरकार ने नए और इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज आमंत्रित करने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म http://abvil.jharkhand.gov.in लॉन्च किया है। आवेदन प्रक्रिया 4 फरवरी 2025 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक आवेदक इस पोर्टल पर एप्लीकेंट बनकर अपना स्टार्टअप आइडिया जमा कर सकते हैं।

राज्य का लक्ष्य:

  • नई नीति के तहत 2028 तक झारखंड में 1,000 स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य है।
  • झारखंड को देश के अग्रणी 10 स्टार्टअप फ्रेंडली राज्यों में शामिल करने का उद्देश्य रखा गया है।

आवेदन कैसे करें:

  1. http://abvil.jharkhand.gov.in पर जाएं।
  2. आवेदन फॉर्म भरकर अपना स्टार्टअप आइडिया सबमिट करें।
  3. स्टेट इवैल्यूएशन बोर्ड के जरिए चयन प्रक्रिया 4 फरवरी से शुरू होगी।

सरकार स्टार्टअप्स को फिस्कल और नॉन-फिस्कल इंसेंटिव्स देकर प्रोत्साहित करेगी। यदि आपके पास कोई इनोवेटिव आइडिया है, तो यह मौका आपके लिए शानदार अवसर साबित हो सकता है।

जया बच्चन का प्रयागराज कुंभ हादसे पर हल्ला बोल, पानी की दूषित स्थिति और वीआईपी अरेंजमेंट पर उठाए सवाल

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समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने प्रयागराज कुंभ मेला हादसे को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने सोमवार (3 फरवरी, 2025) को मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस समय कुंभ का पानी सबसे ज्यादा दूषित है क्योंकि वहां शव बहाए गए हैं। उन्होंने सरकार पर जलशक्ति को लेकर झूठे बयान देने और मरने वालों के सही आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया।

जया बच्चन ने कहा, “राज्यसभा में जलशक्ति पर सवाल उठाए गए, लेकिन सरकार ने साफ जवाब नहीं दिया। कुंभ में शवों को पानी में बहा दिया गया है, जिससे पानी दूषित हो गया है। यही पानी लोगों तक पहुंच रहा है और सरकार इस पर कोई सफाई नहीं दे रही है।”

उन्होंने कुंभ में वीआईपी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। जया बच्चन ने कहा कि कुछ लोगों को विशेष ट्रीटमेंट दिया जा रहा है जबकि गरीब तबके के लोगों के लिए कोई सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा, “वीआईपी लोग कुंभ में जाते हैं, नहाते हैं, उनकी तस्वीरें खींची जाती हैं और मीडिया में छपती हैं। लेकिन गरीबों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।”

जया बच्चन ने कुंभ मेले में आने वाले लोगों के आंकड़ों को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, “इतने करोड़ लोग वहां कैसे आएंगे? सरकार झूठ बोल रही है। आम जनता के लिए यह सबसे बड़ा मुद्दा है।”

उन्होंने मीडिया और समाज से अपील की कि इस मुद्दे को उठाया जाए और सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाए। जया बच्चन ने कहा कि कुंभ में जो हुआ है, वह देश की इस वक्त सबसे बड़ी समस्या है और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

कर्नाटक बना नक्सल मुक्त राज्य, अब छत्तीसगढ़ की बारी

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कर्नाटक ने अपनी आखिरी नक्सली लक्ष्मी के आत्मसमर्पण के साथ खुद को नक्सल मुक्त राज्य घोषित कर दिया है। रविवार को लक्ष्मी ने उडुपी के उप आयुक्त विद्या कुमारी और पुलिस अधीक्षक अरुण के सामने बिना शर्त आत्मसमर्पण किया। इस ऐतिहासिक कदम के बाद राज्य पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो गया है।

लक्ष्मी आंध्र प्रदेश में छिपी हुई थी और उस पर उडुपी जिले के पुलिस थानों में 2007-2008 से संबंधित तीन मामले दर्ज थे, जिनमें पुलिस के साथ गोलीबारी, हमले और माओवादी साहित्य फैलाने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, वह ‘ए’ श्रेणी की आत्मसमर्पण उम्मीदवार हैं और आत्मसमर्पण पैकेज के तहत 7 लाख रुपये की हकदार हैं।

लक्ष्मी ने आत्मसमर्पण के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अपील ने उन्हें मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गांव में सड़कें, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

राज्य समर्पण समिति के श्रीपाल ने बताया कि इस साल अब तक 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कर्नाटक के नक्सल मुक्त होने के बाद अब छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने पर सरकार का पूरा फोकस है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। नक्सल विरोधी अभियानों के तहत बड़े नक्सली मारे जा रहे हैं, साथ ही सरेंडर और गिरफ्तारियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है।

राहुल गांधी ने ‘मेक इन इंडिया’ को बताया विफल, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट पर जताई चिंता

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ पहल की आलोचना करते हुए कहा कि यह एक अच्छा विचार था, लेकिन विफल रहा। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2014 में जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 15 फीसदी थी, जो अब घटकर 12 फीसदी रह गई है।

राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी देश की आर्थिक प्रगति के लिए मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज का विकास आवश्यक होता है। उन्होंने अडानी और अंबानी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सर्विस सेक्टर को मजबूत किया, लेकिन प्रोडक्शन कमजोर हो गया है।

राहुल गांधी ने कहा कि वर्तमान में भारत में केवल असेंबलिंग हो रही है, जबकि प्रोडक्शन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि उत्पादन को बढ़ावा देने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

उन्होंने यूपीए और एनडीए दोनों सरकारों की विफलताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि हमें भविष्य में युवाओं के लिए काम करना होगा। उन्होंने इलेक्ट्रिक प्रोडक्ट्स, बैटरियों और इलेक्ट्रिक वाहनों पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने स्कूलों में बच्चों को बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक मोटर्स, रोबोटिक्स और ऑप्टिक्स जैसी नई तकनीकों की शिक्षा देने की सलाह दी।

राहुल गांधी का मानना है कि यदि भारत प्रोडक्शन सिस्टम को मजबूत करने में सफल होता है, तो देश रोजगार के नए साधनों के साथ आगे बढ़ सकेगा।

जिरवाबाड़ी पेट्रोल पंप के पास दुकान चलाने वाले दो दुकानदारों के साथ कबूतर खोपी निवासी व्यक्ति ने मारपीट कर छीने नगद राशि

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साहिबगंज: नगर थाना क्षेत्र के शास्त्री नगर मोहल्ले के रहने वाले दिलीप कुमार साह एवं अमित कुमार साह दोनों पिता ओम प्रकाश साह निवासी सगे भाई जिरवाबाड़ी थाना क्षेत्र के पेट्रोल पंप नीमगाछ के समीप रेडीमेड कपड़े की दुकान चलाने का काम करते हैं। जहां जिरवाबाड़ी थाना क्षेत्र के कबूतर खोपी निवासी व्यक्ति गोधर यादव उर्फ सिकंदर यादव शराब के नशे में धुत होकर दिलीप कुमार साह के दुकान पर आकर अपना मोबाइल फोन चार्ज करने की बात कहने लगता है जहां कपड़ा दुकानदार चार्जर नहीं होने की बात उक्त व्यक्ति से कहता है। उधर मोबाइल फोन चार्ज नहीं करने की बात सुनते ही गोधर यादव उर्फ सिकंदर यादव दिलीप कुमार साह के साथ मारपीट करने लगता है जहां उसने मारपीट करने की जानकारी अपने भाई अमित कुमार साह को दी। उधर अमित कुमार साह को जानकारी मिलने के बाद वो अपने बड़े भाई के दुकान पर जैसे ही पहुंचा वैसे ही गोधर यादव उर्फ सिकंदर यादव ने उसके साथ भी मारपीट करते हुए उसके गल्ले में रखें हुए करीब 13 से 15 हजार रुपए निकाल लिए। आगे घायल दोनों भाइयों ने बताया कि कबूतर खोपी निवासी व्यक्ति गोधर यादव उर्फ सिकंदर यादव के हाथ में हथियार जैसा कुछ था जिससे उसने दोनों भाइयों के सिर पर मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। उधर मारपीट की घटना के बाद दोनों भाई अपनी जान बचाने के लिए पास के ही एक अन्य दुकानदार के घर में जा घुसे जहां उक्त व्यक्ति ने उस दुकानदार के घर में भी घुसकर उसके महिलाओं के साथ बदसलूकी की है। उधर घायल दोनों भाई अपना इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल पहुंचे जहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने फौरन दोनों भाइयों का इलाज किया। जहां इस मारपीट मामले को लेकर घायल दोनों भाइयों ने जिरवाबाड़ी थाना क्षेत्र की पुलिस को लिखित आवेदन देते हुए कानूनी कार्यवाही करने की गुहार लगाई है।

झारखंड: क्या है ऑपरेशन चॉकलेट? झारखंड में पुलिस चला रही स्पेशल अभियान; सामने आई वजह

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ऑपरेशन चॉकलेट का परिचय

ऑपरेशन चॉकलेट, झारखंड में पुलिस द्वारा चलाया जा रहा एक विशेष अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में मादक पदार्थों के सेवन और तस्करी की समस्या को नियंत्रित करना है। झारखंड, अपनी भौगोलिक स्थिति और समाजिक बनावट के कारण, मादक पदार्थों की तस्करी के लिए एक संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है। इस संदर्भ में, पुलिस द्वारा इस अभियान की शुरुआत की गई है ताकि युवाओं को इस नकारात्मक प्रभाव से बचाया जा सके।

इस अभियान की प्रेरणा का मुख्य स्रोत झारखंड में बढ़ती नशे की लत और इसके कारण उत्पन्न हो रहे अपराधों की बढ़ती घटनाएँ हैं। युवा पीढ़ी में मादक पदार्थों के सेवन की प्रवृत्ति ने न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को प्रभावित किया है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर किया है। इसके परिणामस्वरूप, परिवारों में तनाव, कामकाजी क्षमता में कमी और शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट देखी जा रही है।

ऑपरेशन चॉकलेट के प्रमुख उद्देश्यों में मादक पदार्थों की तस्करी के रास्तों की पहचान और उन्हें बंद करना, अवैध व्यापारियों की गतिविधियों की निगरानी करना और स्थानीय समुदायों में नशामुक्ति जागरूकता फैलाना शामिल है। पुलिस द्वारा विभिन्न चरणों में इस अभियान का कार्यान्वयन किया जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम, नियमित निरीक्षण, और समाज के विभिन्न वर्गों के सहयोग से सामूहिक प्रयास शामिल हैं। ये सभी कदम मिलकर झारखंड में मादक पदार्थों के सेवन को कम करने में सहायक बनेंगे।

ऑपरेशन चॉकलेट के प्रमुख तत्व

ऑपरेशन चॉकलेट, जो झारखंड में पुलिस द्वारा चलाया जा रहा एक विशिष्ट कार्यक्रम है, तीन प्रमुख तत्वों पर आधारित है: प्रिवेंशन, एलीडेमेशन, और एंगेजमेंट। इन तत्वों का एकीकृत दृष्टिकोण राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने में अत्यधिक महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

प्रिवेंशन तत्व का प्राथमिक उद्देश्य मादक पदार्थों के उपयोग और तस्करी के घटनाक्रम को रोकना है। यह तत्व जागरूकता फैलाने के माध्यम से कार्य करता है। स्थानीय समुदायों में चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता सुविधाएं उपलब्ध कराना, जवानों को सही मार्गदर्शन करना, और परिवारों को सूचना देना इस रणनीति का हिस्सा हैं। जब लोग मादक पदार्थों के दुष्परिणामों के बारे में ज्यादातर सूचित होते हैं, तो वे संभावित खतरे के प्रति अधिक सतर्क रहते हैं।

एलीडेमेशन, यानी समापन करना, तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब पुलिस विकास में किए गए प्रयासों को अमल में लाना चाहती है। इसमें पुलिस बल की सख्ती से अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है। तालिका में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े लोगों के खिलाफ कई बार छापेमारी की जाती है। यह न केवल तस्करों को दंडित करता है, बल्कि अन्य संभावित अपराधियों के लिए एक नकारात्मक संदेश भी भेजता है।

आखिरकार, एंगेजमेंट तत्व स्थानीय समुदायों के साथ सक्रिय संवाद को बढ़ावा देने पर जोर देता है। इसके अंतर्गत पुलिस और नागरिकों के बीच एक सकारात्मक संबंध स्थापित करने की कोशिश की जाती है। स्थानीय आयोजनों में भाग लेना, तथा स्कूलों और कॉलेजों में संवाद आयोजित करना इस तत्व का हिस्सा हैं। जब समुदाय पुलिस के साथ मिलकर काम करता है, तो यह तस्करी के मामलों की पहचान और रिपोर्ट करने की संभावना को बढ़ाता है।

इस प्रकार, ऑपरेशन चॉकलेट के ये तीन प्रमुख तत्व मिलकर झारखंड में मादक पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण पाने में मदद कर रहे हैं।

सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका

ऑपरेशन चॉकलेट के प्रभावी कार्यान्वयन में सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन संगठनों ने झारखंड राज्य में युवा वर्ग को मादक पदार्थों की लत से बचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों की मेज़बानी की है। सरकारी एजेंसियों ने इस अभियान को सफल बनाने हेतु व्यापक सुरक्षा उपायों के साथ साथ युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए हैं।

गैर-सरकारी संगठनों ने विशेष रूप से सामुदायिक शिक्षा और समर्पित कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया है। ये संगठन खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करते हैं, जो युवाओं को मादक पदार्थों की तस्करी से दूर रखने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। इसके अलावा, ये संगठन अभियान के तहत स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग सेवाएं भी प्रदान करते हैं, जिससे युवाओं को सही मार्गदर्शन मिल सके।

इस सहभागिता का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि कई युवा मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों को समझने में सक्षम हो चुके हैं। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं, जहाँ विशेषज्ञ भाषण देते हैं और युवाओं को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तनों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके अलावा, सामुदायिक स्तर पर किए गए प्रयासों के फलस्वरूप कई स्थानीय लोगों ने युवाओं के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने में मदद की है।

इस प्रकार, सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के समन्वित प्रयासों ने झारखंड में ऑपरेशन चॉकलेट को सफल बनाने में न केवल मदद की है, बल्कि समाज के विभिन्न हिस्सों से भी समर्थन प्राप्त किया है। यह सहयोग विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों के माध्यम से समग्र रूप से झारखंड के समाज को सुरक्षित और सुरक्षित बनाने में सहायक हो सकता है।

निष्कर्ष और भविष्य की दिशा

ऑपरेशन चॉकलेट झारखंड में पुलिस द्वारा चलाया जा रहा एक महत्वाकांक्षी अभियान है, जिसका उद्देश्य सामाजिक विकास और सुरक्षा में सुधार करना है। यह अभियान न केवल पुलिस की कार्रवाई को दर्शाता है, बल्कि क्षेत्र में जागरूकता फैलाने और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने का भी प्रयास करता है। इस ऑपरेशन के अंतर्गत पुलिस ने विभिन्न रणनीतियों का उपयोग किया है, जिनमें सामुदायिक जुड़ाव और विशेष कार्यशालाएँ शामिल हैं। ये गतिविधियाँ न केवल वर्तमान मुद्दों का समाधान करती हैं बल्कि भविष्य में संभावित समस्याओं को भी रोकने में सहायक साबित हो सकती हैं।

ऑपरेशन चॉकलेट का मुख्य लक्ष्य नशे के प्रभाव को कम करना है, जो कि युवाओं और समुदाय के अन्य सदस्यों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। इसके साथ ही, यह अभियान स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम भी चला रहा है, जिससे युवा पीढ़ी नशामुक्ति के प्रति संवेदनशील हो सके। इसके परिणामस्वरूप, लंबे समय में एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज की संभावनाएँ बढ़ती हैं।

वैश्विक स्तर पर, इस तरह के अभियानों का एकत्रित प्रभाव देखा गया है। जब समाज के विभिन्न हिस्से एक साथ मिलकर विजय प्राप्त करने के इच्छुक होते हैं, तो दीर्घकालिक परिवर्तन संभव होता है। झारखंड में ऑपरेशन चॉकलेट केवल एक ऐसा उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि सामुदायिक भागीदारी और पुलिस सहयोग से हमें सकारात्मक परिवर्तन प्राप्त हो सकते हैं।

इस प्रकार, ऑपरेशन चॉकलेट न केवल वर्तमान में समाज को प्रभावित कर रहा है बल्कि भविष्य में भी इसके प्रभाव को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। इस अभियान की सफलता आने वाले समय में एक सुरक्षित और जागरूक समाज के विकास में सहायक सिद्ध होगी।

रूस के खिलाफ एक और देश ने खोला मोर्चा, तैनात किए F-16 फाइटर जेट

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रोमानिया-रूस विवाद: क्या है वजह और ताजा हालात?

दक्षिण-पूर्वी यूरोप का देश रोमानिया रूस के खिलाफ अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते इस क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में रूस द्वारा रोमानिया की सीमा से सटे इलाकों में ड्रोन भेजने की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इन गतिविधियों के बाद रोमानिया ने अपने 86वें एयर बेस से दो F-16 फाइटर जेट तैनात कर दिए हैं।

रूसी ड्रोन पर रोमानिया की कड़ी प्रतिक्रिया

रोमानिया के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि गुरुवार सुबह 3:40 बजे से 5:00 बजे तक दो F-16 फाइटर जेट्स ने आसमानी गश्त की। यह निर्णय रूस के ड्रोन को रोमानियाई सीमा के करीब मंडराते हुए देखने के बाद लिया गया। मंत्रालय ने यह भी बताया कि सीमा से सटे स्थानीय निवासियों को संभावित हवाई खतरे को लेकर चेतावनी दी गई थी। यह अलर्ट लगभग 90 मिनट तक जारी रहा। हालांकि, ड्रोन यूक्रेन के ऊपर ही रहे, लेकिन उनकी नजदीकी ने रोमानिया को सतर्क कर दिया।

ड्रोन को मार गिराने का कानून

डिसंबर में रोमानियाई सरकार ने एक मसौदा कानून को मंजूरी दी थी, जिसके तहत उसकी सेना को हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाले विदेशी ड्रोनों को मार गिराने की अनुमति दी गई है। यह कदम रूस के लगातार हमलों और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

रोमानिया की सुरक्षा रणनीति

रोमानिया का रक्षा मंत्रालय इस घटनाक्रम के बाद लगातार अपने हवाई क्षेत्र में निगरानी मिशन चला रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते उत्पन्न उच्च जोखिम से निपटने के लिए वे पूरी तरह तैयार हैं।

रोमानिया-रूस के संबंध: इतिहास और वर्तमान स्थिति

रोमानिया और रूस के बीच संबंध हमेशा दोस्ती, दुश्मनी और तटस्थता के बीच झूलते रहे हैं। सोवियत संघ के विघटन के बाद 1990 के दशक में ट्रांसनिस्ट्रिया विवाद के चलते दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। वर्तमान में रोमानिया का मास्को में दूतावास और सेंट पीटर्सबर्ग में महावाणिज्य दूतावास है, जबकि रूस का बुखारेस्ट में दूतावास और कॉन्स्टैंटा में महावाणिज्य दूतावास है।

क्यों बढ़ा तनाव?

रूस का यूक्रेन पर आक्रमण और हालिया ड्रोन गतिविधियां इस तनाव का मुख्य कारण हैं। रोमानिया की सीमाओं के पास ड्रोन देखे जाने से सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।

आगे क्या?

रोमानिया ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तत्पर रहेगा। इस घटनाक्रम ने न केवल दक्षिण-पूर्वी यूरोप में सुरक्षा मुद्दों को उजागर किया है बल्कि रूस और उसके पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को भी नई चुनौती दी है।

संघीय बजट 2025 मुख्य बिंदु: आयकर दरों में बदलाव, कृषि और MSME में बड़े निवेश

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finance minister with tax relief for middle class

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को संसद में संघीय बजट 2025-26 प्रस्तुत किया। इस बजट का मुख्य फोकस समावेशी विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और कर सुधारों पर रहा। सरकार का उद्देश्य सभी क्षेत्रों में संतुलित वृद्धि सुनिश्चित करना, उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और मध्य वर्ग को सशक्त बनाना है, साथ ही कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मजबूत करना भी इसमें शामिल है।

संघीय बजट 2025 की प्रमुख घोषणाएँ:

1. बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर

सरकार बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देते हुए संपर्क सुविधाओं को बढ़ाने और आर्थिक वृद्धि को गति देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

🔹 IITs का विस्तार: सरकार पांच IITs, विशेष रूप से IIT पटना में बुनियादी ढांचे का विस्तार करेगी ताकि अधिक छात्रों को समायोजित किया जा सके।
🔹 क्षेत्रीय संपर्क (UDAN योजना): संशोधित उड़ान योजना के तहत 120 नए गंतव्य जोड़े जाएंगे, जिससे अगले 10 वर्षों में चार करोड़ से अधिक यात्रियों को लाभ होगा। विशेष रूप से पर्वतीय, आकांक्षी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में छोटे हवाई अड्डों के विकास को भी समर्थन दिया जाएगा।
🔹 बिहार में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे: बिहार में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, साथ ही पटना हवाई अड्डे और बिहटा में ब्राउनफील्ड हवाई अड्डे के विस्तार की योजना भी बनाई गई है।

2. डिजिटल अर्थव्यवस्था और नवाचार

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने टेक्नोलॉजी, नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं।

🔹 स्टार्टअप्स को कर राहत: वित्त मंत्री ने स्टार्टअप्स के लिए ₹10,000 करोड़ के नए फंड ऑफ फंड की घोषणा की। स्टार्टअप्स के लिए पंजीकरण की अवधि को पाँच वर्ष तक बढ़ा दिया गया है।
🔹 MSME को अधिक सहयोग: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ऋण कवरेज को ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया है। MSMEs विनिर्माण क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

3. सरल कर प्रणाली के लिए कर सुधार

सरकार एक अधिक सरल और पारदर्शी कर प्रणाली बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे करदाताओं को राहत मिलेगी।

(आगे के कर सुधारों की घोषणा का विवरण बजट पेश होने के साथ अद्यतन किया जाएगा।)

4. स्वास्थ्य और शिक्षा पर जोर

सरकार सतत आर्थिक विकास के लिए एक स्वस्थ और शिक्षित आबादी की आवश्यकता को मान्यता देती है।

मेडिकल कॉलेज सीटों का विस्तार: अगले वर्ष में 10,000 नई मेडिकल कॉलेज सीटें जोड़ी जाएंगी, जबकि अगले पाँच वर्षों में 75,000 नई सीटें जोड़ी जाएंगी।
डेकेयर कैंसर सेंटर: अगले तीन वर्षों में जिला अस्पतालों में डेकेयर कैंसर सेंटर स्थापित किए जाएंगे ताकि कैंसर उपचार को अधिक सुलभ बनाया जा सके।


5. किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए समर्थन

कृषि क्षेत्र सरकार की प्राथमिकताओं में बना हुआ है, जिसमें उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को समर्थन देने के लिए कई योजनाएँ शामिल हैं।

➡️ मखाना बोर्ड, बिहार: मखाना के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को सुधारने के लिए एक नया बोर्ड स्थापित किया जाएगा, जिससे बिहार के किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
➡️ पीएम धन-धान्य कृषि योजना: कम उत्पादकता वाले 100 जिलों को इस योजना के तहत कवर किया जाएगा, जिससे 1.7 करोड़ किसानों को लाभ होगा। इसके तहत पंचायत स्तर पर भंडारण क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।
➡️ किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सीमा बढ़ी: किसानों को अधिक सुलभ ऋण देने के लिए KCC की सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है।


6. हरित विकास और जलवायु कार्रवाई

इस बजट में पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए कई ग्रीन पहल की गई हैं।

♻️ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इन्फ्रास्ट्रक्चर: ईवी बैटरी निर्माण के लिए आवश्यक पूंजीगत वस्तुओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में छूट दी जाएगी, जिससे भारत के ईवी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता: 2047 तक भारत 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा विकसित करने की योजना बना रहा है, जो स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बदलाव का एक महत्वपूर्ण कदम है।


7. सामाजिक कल्याण योजनाओं को मजबूत करना

सरकार हाशिए पर मौजूद समुदायों को प्रत्यक्ष लाभकारी योजनाओं के माध्यम से समर्थन देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

🔹 गिग वर्कर्स की पहचान: एक करोड़ गिग वर्कर्स को ई-श्रम पोर्टल के तहत पहचान पत्र और पंजीकरण संख्या मिलेगी, जिससे उनके अधिकार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
🔹 SC/ST महिला उद्यमिता योजना: अनुसूचित जाति/जनजाति की पाँच लाख महिलाओं को अगले पाँच वर्षों में ₹2 करोड़ तक के टर्म लोन देकर उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा।


8. विदेशी निवेश और व्यापार

भारत को एक वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने के लिए सरकार ने विदेशी निवेश और निर्यात को बढ़ावा देने के कई उपाय किए हैं।

🌍 बीमा क्षेत्र में एफडीआई: बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% कर दी जाएगी, जिससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
📈 निर्यात संवर्धन मिशन: निर्यात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और निर्यातकों को ऋण तक बेहतर पहुंच प्रदान करने के लिए एक नया निर्यात संवर्धन मिशन स्थापित किया जाएगा।


9. बजट अनुमान (वित्त वर्ष 2025-26)

📊 कुल प्राप्तियाँ (ऋण को छोड़कर): ₹34.96 लाख करोड़
📊 कुल व्यय: ₹50.65 लाख करोड़

➡️ सरकार का उद्देश्य वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए समावेशी विकास को गति देना है।

 

finance minister with tax relief for middle class

विश्व पुस्तक मेला 2025: रूसी लेखक अलेक्ज़ी का कहना है कि यह आयोजन भारत-रूस शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा

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नई दिल्ली: बहुप्रतीक्षित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला (NDWBF) 2025 1 फरवरी से भारत मंडपम में शुरू हो रहा है। इसे राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) द्वारा भारतीय गणराज्य की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बड़े साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक देशों, 2,000 से अधिक प्रकाशकों और प्रदर्शकों और 1,000 से अधिक वक्ताओं की भागीदारी होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसे शनिवार को उद्घाटन करेंगी।

इस वर्ष का मेला अब तक का सबसे बड़ा है, जिसमें रूस को विशेष रूप से केंद्रित किया गया है। लेखक, विद्वान और प्रकाशक फ्रांस, स्पेन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कोलंबिया जैसे देशों से साहित्यिक चर्चाओं, पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

रूस की मजबूत उपस्थिति

रूस इस मेले का मुख्य देश है और हिंदी, बांग्ला, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं में 1,500 से अधिक किताबें प्रदर्शित करेगा। रूस के माइकल ने ETV भारत से विशेष बातचीत में कहा कि साहित्यिक दुनिया में सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है। “हमने कई पहल की हैं, जिनमें रूसी अनुवादकों का संघ और साहित्यिक अनुवाद संस्थान शामिल हैं, ताकि इस मेले में हमारी उपस्थिति को सुनिश्चित किया जा सके। कुछ अनुवादित किताबें इस कार्यक्रम के दौरान लॉन्च की जाएंगी,” उन्होंने कहा।

रूसी साहित्यकार अलेक्ज़ी वर्लामोव का मानना है कि साहित्य एक देश, उसके लोगों और उसकी संस्कृति को समझने का एक बेहतरीन तरीका है। “हमने भारत में उन किताबों को लाया है जो रूस में महत्वपूर्ण साहित्यिक पुरस्कार जीत चुकी हैं। इस मेले के माध्यम से हम छात्रों से संवाद करेंगे, चर्चा करेंगे और हमारे साझा शैक्षिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर विचार करेंगे,” उन्होंने कहा।

NDWBF 2025: एक वैश्विक साहित्यिक अनुभव

NBT के निदेशक, युवराज मलिक ने ETV भारत से बातचीत में कहा कि NDWBF 2025 अब तक का सबसे बड़ा मेला बनने जा रहा है। उन्होंने कहा, “इस साल हम भारतीय भाषाओं में किताबों की उपस्थिति को और बढ़ा रहे हैं। ‘हम भारतीय लोग’ थीम के तहत भारतीय संविधान को साहित्य के माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा। यह आयोजन न केवल भारत-रूस साहित्यिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंधों को भी बढ़ावा देगा।”

इस वर्ष मेले में विभिन्न भारतीय भाषाओं और विदेशी भाषाओं की किताबें उपलब्ध होंगी, जिसमें कन्नड़, बांग्ला, अंग्रेजी, हिंदी और अन्य भाषाएं शामिल हैं। मलिक ने इस विविधता को वैश्विक अनुभव की ओर एक कदम बढ़ते हुए बताया।

इस मेले में छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त प्रवेश की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, विशेष रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं।

साहित्य, संस्कृति और विचारशील नेताओं का मंच

NDWBF 2025 सिर्फ एक पुस्तक मेला नहीं होगा, बल्कि यह चर्चाओं, बहसों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र बनेगा। अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स कॉर्नर में पुस्तक विमोचन, पैनल चर्चाएं, रीडिंग सत्र, फिल्म स्क्रीनिंग और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

साहित्य, शासी और सिनेमा के प्रमुख व्यक्तित्व, जैसे अभिनेता पंकज त्रिपाठी, खाद्य समीक्षक पुष्पेश पंत, सांसद शशि थरूर, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कवि कुमार विश्वास, और फिल्म निर्माता प्रकाश झा इस उत्सव में अपने विचार साझा करेंगे।

इसके अतिरिक्त, कई समानांतर साहित्य उत्सव होंगे, जिनमें ब्रह्मपुत्र साहित्य उत्सव, प्रभात प्रकाशन उत्सव, भारत साहित्य उत्सव, अपीजय कोलकाता साहित्य उत्सव, पेंगुइन संवाद और द ग्रेट इंडियन बुक टूर शामिल हैं।

मेले में लेखकों का लाउंज और बच्चों का कोना जैसे नए क्षेत्रों की शुरुआत की गई है। लेखकों का लाउंज एक ऐसा स्थान है जहां लेखक पाठकों और अन्य लेखकों के साथ संवाद कर सकते हैं, जबकि बच्चों के कोने में विशेष रूप से कहानियां सुनाने, कला, शिल्प और नृत्य सत्र आयोजित किए जाएंगे।

NDWBF 2025 9 फरवरी को समाप्त होगा।

BCCI अवार्ड्स: सचिन तेंदुलकर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, बुमराह और मंधाना को भी सम्मानित किया गया

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मुंबई: क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर को शनिवार को बीसीसीआई द्वारा कोल. सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। नमण अवार्ड्स समारोह में तेंदुलकर को यह प्रतिष्ठित अवार्ड दिया गया, और वह इस अवार्ड के 31वें प्राप्तकर्ता बने हैं, जिसे 1994 में भारत के पहले कप्तान कोल. सी.के. नायडू के सम्मान में स्थापित किया गया था।

तेंदुलकर, जिन्होंने भारत के लिए 664 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिनमें 200 टेस्ट और 463 वनडे शामिल हैं, के पास सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 15,921 रन और वनडे में 18,426 रन बनाए। वह 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एकदिवसीय क्रिकेट में डबल शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी बने थे। उन्होंने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और 2013 में मुंबई में अपने शानदार करियर को अलविदा कहा।

इसके अलावा, जसप्रीत बुमराह को 2023-24 (पुरुष श्रेणी) का सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर अवार्ड मिला, जबकि महिला क्रिकेट में स्मृति मंधाना को 2024 में 743 रन बनाने के बाद यह अवार्ड मिला, जिसमें चार एकदिवसीय शतक भी शामिल थे।

रवीचंद्रन अश्विन, जिन्होंने 2024 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया और भारत के दूसरे सबसे बड़े विकेट-टेकर्स बने, को उनके योगदान के लिए विशेष अवार्ड से नवाजा गया।

सरफराज खान, जिन्होंने फरवरी 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए 150 रन बनाए, को सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का पुरस्कार दिया गया। वहीं, तनुष कोटियन, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टेस्ट टीम में पहली बार जगह बनाई, को बीसीसीआई घरेलू टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए अवार्ड मिला।

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) ने रिकॉर्ड 42वीं रणजी ट्रॉफी सहित कई खिताब जीतकर बीसीसीआई घरेलू टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का अवार्ड प्राप्त किया। यह अवार्ड MCA के अध्यक्ष अजींकेय नाइक ने समारोह में लिया।

शीर्षक: 1929 को बना ये देश, 95 साल से नहीं जनमा 1 भी बच्चा, फिर भी है फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन

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प्रवेश: घूमने-फिरने की शौकीन रखने वालों को हमेशा की एक एसी जगह की तलाश रहती है जहां जाकर उन्हें नया अनुभव मिले। इसी कड़ी में हम आपको बताएंगे एक एसी जगह के बारे में जो दुनिया का सबसे छोटा स्वतंत्र राज्य है। हैरान कर देगी जानकारी

आज हम आपको जिस देश के बारे में डिटेल में बताने जा रहे हैं वहां हर साल लाखों की संख्या में दुनियाभर से टूरिस्ट घूमने के लिए आते हैं। इस देश से जुड़ी हैरानी वाली बात ये है, कि इस देश के निर्माण से आज तक यहां एक भी बच्चा पैदा नहीं हुआ है।

वेटिकन सिटी हम बात कर रहे हैं इटली रोम में स्थित स्वतंत्र शहर-राज्य वेटिकन सिटी की जिसकी गिनती फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन में की जाती है। दुनिया के सबसे अविश्वसनीय स्थलों में स्थित ये जगह आपको मंत्रमुग्ध कर देगी।

ये है कारण: वेटिकन सिटी को दुनिया की सबसे कम आबादी वाला देश माना जाता है। यहां पूरी आबादी ईसाईयों की है जो कैथोलिक धर्म को मानता है। यहां नागरिकों को अपने धर्म के कारण शादी करने या फिर बच्चे पैदा करने की अनुमति नहीं होती है।

मुख्य रूप से पुजारी वेटिकन सिटी में रहने वाले नागरिक मुख्य रूप से पुजारी होते हैं जिन्हें शादी करने या माता-पिता बनने की इजाजत नहीं होती। हालांकि, अपवाद यहां भी सामने आए हैं। धार्मिक हृदय कहे जाने वाले इस देश की यात्रा आपको जरूर करनी चाहिए।

800 लोगों का देश 44 हज़ार वर्ग मीटर में फैले हुए इस देश में तकरीबन 800 लोग ही रहते हैं। ताजा जानकारी के अनुसार इस छोटे से देश में केवल 30 महिलाएं ही रहती हैं जिनके लिए खास तरह का ड्रेस कोड भी है।

महत्वपूर्ण जानकारी वेटिकन सिटी पोप का निवास स्थान होने के साथ ही कैथोलिक चर्च का ऑफिशियल मुख्यालय भी है। सिस्टिन चैपल की छत, सेंट पीटर्स बासिल

बिजनेसमैन से रिश्ता तोड़ा, मुख्यमंत्री को चुना जीवनसाथी, 124 करोड़ की संपत्ति की मालकिन बनीं यह एक्ट्रेस

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नई दिल्ली:
सिनेमा और राजनीति की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जिनका घटनाक्रम किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगता। कर्नाटक फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित एक्ट्रेस राधिका कुमारस्वामी की जिंदगी भी ऐसी ही कहानी है। 38 साल की इस अभिनेत्री ने न केवल अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया, बल्कि उनकी निजी जिंदगी के फैसलों ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं।


14 साल की उम्र में रखा फिल्मों में कदम

राधिका ने महज 14 साल की उम्र में कन्नड़ फिल्म ‘नीनागागी’ से फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। तब वह नौवीं कक्षा में पढ़ती थीं। इसके बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उन्हें असली पहचान 2002 की फिल्म ‘नीला मेघा शामा’ से मिली। साल 2003 में राधिका ने तमिल फिल्म ‘इयारकाई’ में नैंसी का किरदार निभाया, जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया।


दो शादियां, दोनों परिवार के खिलाफ

राधिका कुमारस्वामी की निजी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ जाकर पहली शादी एक बिजनेसमैन से की थी। हालांकि यह शादी ज्यादा समय तक नहीं चल पाई।

इसके बाद राधिका ने राजनीति की दुनिया में धमाकेदार एंट्री करने वाले कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से शादी कर ली। हैरानी की बात यह है कि कुमारस्वामी राधिका से 27 साल बड़े हैं। इस शादी ने सियासी गलियारों में काफी हलचल मचा दी थी।


124 करोड़ की संपत्ति की मालकिन

राधिका कुमारस्वामी न केवल एक सफल अभिनेत्री हैं, बल्कि वह 124 करोड़ रुपये की संपत्ति की मालकिन भी हैं। फिल्मों के अलावा वह प्रोडक्शन और बिजनेस में भी सक्रिय हैं।


फिल्मी करियर और वर्तमान जीवन

राधिका ने कन्नड़ इंडस्ट्री को कई हिट फिल्में दी हैं। हालांकि शादी के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद उन्होंने वापसी की। आज वह एक सफल अभिनेत्री के साथ-साथ एक खुशहाल जीवन बिता रही हैं।

राधिका कुमारस्वामी की कहानी यह साबित करती है कि जिंदगी में मिले फैसले, चाहे वे जितने भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, इंसान की नियति को बदल सकते हैं।

खूंटी के ढाबे पर दिखीं बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान, मक्के की रोटी और सरसों का साग किया गर्म

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खूंटी, झारखंड:
शुक्रवार शाम खूंटी के एक साधारण से ढाबे में बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के अचानक पहुंचने से लोग हैरान रह गए। सारा अली खान ने यहां करीब आधे घंटे का समय बिताया और अपने साथ लाया हुआ खाना गर्म कराकर खाया। ढाबे के मालिक समेत वहां मौजूद लोगों के लिए यह एक यादगार अनुभव बन गया।


रांची से राउरकेला जा रही थीं सारा

सूत्रों के अनुसार सारा अली खान रांची एयरपोर्ट से सड़क मार्ग के जरिए राउरकेला जा रही थीं, जहां उन्हें एक फिल्म की शूटिंग करनी है। रास्ते में खूंटी के एक ढाबे पर उन्होंने ब्रेक लिया।


ढाबे पर क्या खाया सारा ने?

सारा ने ढाबे में वेटर से मक्के की रोटी और सरसों का साग गर्म करने को कहा, जो वह घर से साथ लेकर आई थीं। इसके अलावा उन्होंने अलग से सलाद, पापड़ मंगवाया। उनके साथ मौजूद मैनेजर और बॉडीगार्ड के लिए फ्रूट्स सलाद, पानी और कॉफी का ऑर्डर दिया गया।


पहचानने में हुई देरी

ढाबे के मालिक विमल जायसवाल ने बताया कि शुरुआत में किसी को नहीं लगा कि यह कोई मशहूर हस्ती हैं। बॉडीगार्ड और मैनेजर के साथ सारा को देखकर लोगों ने सोचा कि कोई अफसर ढाबे पर रुका है। लेकिन बाद में जब पहचान हुई कि यह सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान हैं, तो ढाबे पर मौजूद लोगों में उत्साह बढ़ गया।


फैंस के साथ सेल्फी और खूंटीवासियों का धन्यवाद

जैसे ही लोगों को पता चला कि सारा अली खान ढाबे पर मौजूद हैं, वे उनसे मिलने के लिए जमा हो गए। सारा ने किसी को निराश नहीं किया और सभी के साथ सेल्फी ली।


फिर आएंगी ढाबे पर

ढाबे के संचालक विमल जायसवाल ने बताया कि सारा अली खान ने बातचीत के दौरान कहा कि शूटिंग खत्म होने के बाद लौटते समय वह फिर से इस ढाबे पर रुकेंगी और यहां का खाना जरूर खाएंगी।

यह वाकया खूंटी के लोगों के लिए एक यादगार पल बन गया। सारा का सादगी भरा यह अंदाज लोगों के दिलों में बस गया।

झारखंड के गंगासागर यादव की अघोरी साधु के रूप में वापसी का दावा, DNA टेस्ट की मांग

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प्रयागराज महाकुंभ:
27 साल पहले झारखंड के गंगासागर यादव लापता हो गए थे। परिवार ने उन्हें हर जगह खोजा लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। वक्त बीतने के साथ परिवार ने भी उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन महाकुंभ में कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको चौंका दिया।


अघोरी साधु को देखकर सन्न रह गया परिवार

प्रयागराज महाकुंभ में गंगासागर यादव के एक रिश्तेदार ने एक अघोरी साधु को देखा। साधु को देखते ही रिश्तेदार ने झारखंड में रह रहे यादव के परिवार को सूचना दी। दावा किया गया कि यह साधु कोई और नहीं बल्कि गंगासागर यादव ही हैं।

यह सुनते ही गंगासागर यादव की पत्नी धनवा देवी और उनके दोनों बेटे कमलेश और विमलेश तुरंत प्रयागराज महाकुंभ पहुंच गए। बच्चों ने पिता को पहचानने का दावा किया। परिवार ने कहा कि अघोरी साधु के शरीर पर चोट के वही निशान हैं जो गंगासागर यादव के शरीर पर थे।


परिवार का दावा, मगर साधु ने किया इंकार

अघोरी साधु, जो खुद को राजकुमार बाबा कहते हैं, ने परिवार के दावे को नकार दिया। उन्होंने कहा, “मैं झारखंड का नहीं, बल्कि वाराणसी का रहने वाला साधु हूं। मेरा गंगासागर यादव से कोई संबंध नहीं है।”


परिवार ने की डीएनए टेस्ट की मांग

परिवार ने इस विवाद को सुलझाने के लिए डीएनए टेस्ट की मांग की है। उनका कहना है कि डीएनए जांच ही असली पहचान को साबित करेगी।

चिन्हों और निशानों से पहचान का दावा

परिवार का कहना है कि अघोरी साधु के शरीर पर जो निशान और चोट के दाग हैं, वे गंगासागर यादव के पुराने निशानों से मेल खाते हैं।


महाकुंभ में साधु बाबा पर रखी जा रही है नजर

कुछ परिवारजन वापस झारखंड लौट चुके हैं, जबकि कुछ अभी भी महाकुंभ में ही डटे हुए हैं और बाबा राजकुमार पर नजर रखे हुए हैं।

परिवार ने दिया वचन:

गंगासागर यादव के भाई ने कहा, “अगर डीएनए टेस्ट में हमारा दावा गलत साबित हुआ, तो हम बाबा से हाथ जोड़कर माफी मांग लेंगे।”