Monday 29th of June 2026 06:04:20 PM
Home Blog Page 42

जम्मू-कश्मीर में रोज़ाना 1500 टन कचरा, लेकिन जाता कहाँ है

0

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में दो नगर निगमों और 76 नगरपालिकाओं द्वारा प्रतिदिन 1502 टन ठोस कचरा उत्पन्न किया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से निपटान की कमी के कारण शहरों और कस्बों में कूड़े के ढेर लगते जा रहे हैं।

नगर निकायों के कचरा प्रबंधन की स्थिति
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, श्रीनगर नगर निगम (SMC) प्रतिदिन 525 टन और जम्मू नगर निगम (JMC) 374 टन कचरा उत्पन्न करता है। अन्य 76 नगरपालिकाओं द्वारा कुल 603 टन कचरा प्रतिदिन उत्पन्न किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि इस कचरे का सही प्रबंधन हो भी रहा है या नहीं?

खुले में डंपिंग और पर्यावरणीय खतरे
पर्यावरण कार्यकर्ता राजा मुज़फ्फर भट के अनुसार, यह सारा कचरा खुले लैंडफिल में डंप किया जा रहा है, जिससे न केवल मिट्टी प्रदूषित हो रही है बल्कि स्थानीय निवासियों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है।

“किसी भी नगरपालिका द्वारा कचरे का वैज्ञानिक उपचार नहीं किया जा रहा। नगर पालिकाएँ और नगर निगम इसे खुले में फेंक रहे हैं, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है,” भट ने बताया।

भारत के ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग किया जाना चाहिए। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी कचरे की उचित छंटाई को पर्यावरण के लिए अनिवार्य बताया।

सरकारी प्रयास और अधूरे प्रोजेक्ट्स
श्रीनगर के अचन डंपिंग साइट पर प्रतिदिन 550 टन कचरा जमा होता है। सरकार ने यहाँ वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन यह अब तक शुरू नहीं हो सका।

कश्मीर के शहरी स्थानीय निकाय निदेशक काज़ी सरवर के अनुसार, “कश्मीर के दस नगर निकायों में ठोस कचरा प्रबंधन इकाइयाँ स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि बाकी स्थानों पर कार्य प्रगति पर है। आठ नगरपालिकाओं में भूमि की अनुपलब्धता के कारण यह कार्य अटका हुआ है।”

क्या समाधान हो सकता है?
पर्यावरण विशेषज्ञ ताहिर वानी का कहना है कि सरकार को कचरे को केवल निपटाने की चीज़ समझने के बजाय उसे पुनः उपयोग और ऊर्जा स्रोत में बदलने पर ध्यान देना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2025-2026 के बजट में 78 शहरी स्थानीय निकायों में कचरा प्रबंधन केंद्रों की स्थापना और 4,075 ठोस कचरा प्रबंधन इकाइयों के निर्माण का वादा किया है। लेकिन क्या ये योजनाएँ धरातल पर उतरेंगी या कचरे के साथ यह वादा भी किसी लैंडफिल में दब जाएगा?

क्रिकेट जीत का जश्न या बेकाबू भीड़? हैदराबाद में लाठीचार्ज, कोटा में बवाल

0

कोटा/हैदराबाद: भारत की चैंपियंस ट्रॉफी जीत के बाद रविवार रात क्रिकेट प्रेमियों के उत्साह ने दो शहरों – राजस्थान के कोटा और तेलंगाना के हैदराबाद – में उग्र रूप ले लिया। कोटा में कोचिंग छात्रों ने हिंसा और तोड़फोड़ की, जबकि हैदराबाद में पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।

कोटा: छात्रों का उग्र प्रदर्शन
कोटा के कोरल पार्क क्षेत्र में हजारों कोचिंग छात्र देर रात सड़कों पर उतर आए। जश्न जल्द ही उग्र प्रदर्शन में बदल गया, जहां छात्रों ने पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ दिया और कई होस्टलों के शटर को नुकसान पहुँचाया। कुछ छात्रों ने पोस्टर और बैनर फाड़ दिए, तो कुछ ने होस्टलों के बाहर रखे ग्रेनाइट और गमलों को तोड़ दिया।

गाइडलाइन के बावजूद, जिसमें कहा गया था कि कोई भी कोचिंग छात्र रात 9 बजे के बाद बाहर न निकले, छात्र बड़ी संख्या में बाहर निकल आए। कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें युवाओं को बैरिकेड्स खींचते हुए देखा जा सकता है।

हैदराबाद: लाठीचार्ज से काबू में आई भीड़
हैदराबाद के दिलसुखनगर इलाके में क्रिकेट प्रेमी रात देर तक भारत की जीत का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा हुए। भारी भीड़ के कारण ट्रैफिक जाम हो गया, और कुछ लोगों द्वारा सड़क पर मौजूद बाइकर्स से बदसलूकी करने की शिकायतें भी पुलिस को मिलीं। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर किया।

पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी दी कि किसी भी आयोजन के नाम पर दूसरों को परेशान करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय निवासियों की नाराजगी
कोटा में होस्टल निर्माण कार्य में लगे ज्ञान सुवालका ने बताया कि उपद्रव के दौरान उनके निर्माणाधीन होस्टल के लिए मंगाए गए ग्रेनाइट को छात्रों ने तोड़ दिया, जिससे हजारों रुपये का नुकसान हुआ।

होस्टल संचालक रविंद्र मीना ने बताया कि यह हंगामा करीब डेढ़ घंटे तक चला। उन्होंने कहा कि इस तरह के बेकाबू जश्न से न केवल संपत्ति का नुकसान होता है, बल्कि अन्य छात्रों को भी परेशानी होती है।

“भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता,” सुवालका ने कहा। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि कई छात्र और छात्राएँ इस तरह की घटनाओं से असहज महसूस करते हैं। प्रशासन से इस पर कड़े कदम उठाने की मांग की गई है।

भारत-यूके शतरंज: जयशंकर की चालों से साझेदारी को नई गति मिली

0

लंदन: ब्रिटेन की यात्रा के दौरान, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-यूके संबंधों की बिसात पर महत्वपूर्ण चालें चलीं, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा मिली। उनकी यह यात्रा एक जटिल खेल की तरह रही, जहाँ उन्होंने राजनीतिक, आर्थिक और वैश्विक कूटनीति के कई मोहरे सजाए।

जयशंकर ने अपने ब्रिटिश समकक्ष डेविड लैमी के साथ बातचीत के दौरान भारत-यूके व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को नई दिशा दी। उन्होंने चिवनिंग हाउस में वार्ता की, जहाँ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर प्रगति, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

एक निर्णायक कदम के रूप में, उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात की, जिसमें व्यापार बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय निवेश बढ़ाने पर सहमति बनी। वहीं, उन्होंने गृह सचिव येवेट कूपर और व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स से भी चर्चा की, जिससे वीजा प्रक्रिया में सुधार और कारोबारी सुगमता के उपायों को बल मिला।

भारत की कूटनीतिक बढ़त को और मजबूत करने के लिए जयशंकर ने बेलफास्ट और मैनचेस्टर में दो नए भारतीय वाणिज्य दूतावासों का उद्घाटन किया। यह कदम भारतीय प्रवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे भारत-यूके संबंधों में जन-संबंधों की अहमियत और बढ़ेगी।

यात्रा के अंतिम दिन जयशंकर और लैमी ने टॉटेनहैम हॉट्स्पर स्टेडियम का दौरा किया और एक फुटबॉल मैच देखा, जो दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों की एक अनौपचारिक परिभाषा प्रस्तुत करता है।

इस यात्रा के दौरान हर कदम भारत की कूटनीतिक बढ़त को दर्शाता है, जहाँ जयशंकर ने राजनीतिक, व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए कुशलतापूर्वक अपनी चालें चलीं। यह भारत-यूके संबंधों के भविष्य की दिशा तय करने वाली एक प्रभावशाली यात्रा रही।

भारतीय महासागर कूटनीति: पीएम मोदी की मॉरीशस यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी दो दिवसीय मॉरीशस यात्रा भारत के हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ते रणनीतिक प्रभाव को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह यात्रा भारत-मॉरीशस संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ-साथ चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने, व्यापार को बढ़ावा देने और समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने पर केंद्रित होगी।

भारत और मॉरीशस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा से पहले कहा, “मॉरीशस हमारा करीबी समुद्री पड़ोसी और हिंद महासागर में एक प्रमुख भागीदार है। हमारे गहरे आपसी विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों में साझा विश्वास हमारे संबंधों की ताकत हैं।”

यात्रा के मुख्य बिंदु:

राष्ट्रीय दिवस समारोह: पीएम मोदी 12 मार्च को मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे।
समुद्री सुरक्षा: चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, भारत और मॉरीशस समुद्री रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर देंगे।
विकास परियोजनाएं: भारत मॉरीशस में नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की घोषणा कर सकता है, जिसमें परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
आर्थिक सहयोग: भारत-मॉरीशस CECPA समझौते के तहत व्यापार और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग पर सहयोग: भारत और मॉरीशस वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाने के लिए एक समझौता करेंगे।

भू-राजनीतिक महत्व

इस यात्रा का महत्व इस तथ्य से भी बढ़ जाता है कि चीन मॉरीशस, श्रीलंका और मालदीव में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। हाल ही में चीन ने श्रीलंका के जल क्षेत्र में अपने शोध जहाजों के संचालन पर लगे प्रतिबंध को हटवाने और मालदीव के अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मछली पकड़ने वाले उपकरण लगाने में सफलता पाई है। यह भारत के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा सकता है।

भारत मॉरीशस को समुद्री निगरानी, रक्षा सहयोग और आपदा राहत सहायता प्रदान करता रहा है। मोदी की यह यात्रा इन संबंधों को और अधिक मजबूती देगी।

SC ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को फटकार, 16 साल तक दैनिक वेतनभोगियों को न्याय से वंचित रखने पर जताई नाराजगी

0

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को तीखी फटकार लगाते हुए कहा कि उसने 16 वर्षों तक उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया, जिससे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अनावश्यक कानूनी लड़ाई में फंसे रहे। न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले को “अहंकार और कानून की अवहेलना का प्रत्यक्ष उदाहरण” बताया।

अदालत ने राज्य अधिकारियों के रवैये पर असंतोष व्यक्त किया, जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि 2007 में दिया गया उच्च न्यायालय का आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गया, जबकि पीड़ित कर्मचारी 14 से 19 वर्षों तक सरकारी विभाग में काम कर चुके थे

अदालत की सख्त टिप्पणी और दंड

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए ₹25,000 के जुर्माने को बरकरार रखते हुए कहा कि प्रशासन इसे उस अधिकारी के वेतन से वसूल सकता है, जिसकी लापरवाही के कारण मामला इतने वर्षों तक लंबित रहा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह अधिकारियों पर कड़ा दंड लगाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने पर विचार कर सकती थी, लेकिन चूंकि अवमानना की कार्यवाही अभी भी लंबित है, इसलिए एकल न्यायाधीश को मामले की साप्ताहिक सुनवाई करने का निर्देश दिया गया।

लंबे समय से चली आ रही कानूनी लड़ाई

2006 में ग्रामीण विकास विभाग के दैनिक वेतनभोगियों ने अदालत का रुख किया था, यह मांग करते हुए कि उनकी सेवाओं को SRO 64 (1994) के तहत नियमित किया जाए। हालांकि 2007 में उनके पक्ष में फैसला सुनाया गया था, लेकिन प्रशासन ने इसे लागू करने में 16 साल की देरी की, जिससे कर्मचारी अनिश्चितता और कानूनी परेशानियों में पड़े रहे।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन की अकर्मण्यता और न्यायिक आदेशों की अवहेलना को उजागर किया है। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और सुशासन की कमी को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

राजस्थान के राज्यपाल ने बलात्कारियों के लिए कड़ी सजा का सुझाव दिया

0

भरतपुर: राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को भरतपुर बार एसोसिएशन के शपथ ग्रहण समारोह में बलात्कारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वकालत की। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने सुझाव दिया कि बलात्कारियों को नपुंसक बना देना चाहिए ताकि वे समाज में आसानी से पहचाने जा सकें और इस तरह के अपराधों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में नैतिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि युवाओं में महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा की भावना विकसित हो।

राज्यपाल बागडे ने भारत के नए न्यायिक कानूनों की भी सराहना की, जिनमें भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये कानून देश की न्यायिक प्रणाली को मजबूत करेंगे और अपराधियों के लिए कड़ी सजा सुनिश्चित करेंगे।

इस अवसर पर, राज्यपाल ने बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष रुपेंद्र सिंह और अन्य कार्यकारी सदस्यों को शपथ दिलाई। उन्होंने कानूनी पेशेवरों से न्याय व्यवस्था को मजबूत करने और समाज में न्याय सुनिश्चित करने की अपील की।

IND vs NZ: 12 साल का इंतजार खत्म, भारत ने तीसरी बार चैंपियंस ट्रॉफी पर किया कब्जा!

0

दुबई: टीम इंडिया ने इतिहास रच दिया! रोहित शर्मा की अगुवाई में भारतीय क्रिकेट टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब तीसरी बार अपने नाम कर लिया, जब उन्होंने दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में रविवार, 9 मार्च को खेले गए फाइनल मुकाबले में न्यूज़ीलैंड को पांच विकेट से हराकर 12 साल के सूखे को खत्म किया।

इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में ब्लैककैप्स ने भारत के सामने 252 रनों का लक्ष्य रखा। जवाब में, रोहित शर्मा और शुभमन गिल की सलामी जोड़ी ने तूफानी शुरुआत दी, जिससे भारतीय खेमे में जोश भर गया। दोनों ने पहले विकेट के लिए 105 रनों की साझेदारी की, लेकिन इसके बाद गिल (31) को मिचेल सैंटनर ने चलता किया।

भारत को 122/3 के स्कोर पर मुश्किल का सामना करना पड़ा, लेकिन कप्तान रोहित शर्मा (76 रन) के आक्रामक अंदाज ने टीम को मजबूत स्थिति में ला दिया। मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका था, जब लोअर ऑर्डर के बल्लेबाजों ने कमान संभाली। केएल राहुल और हार्दिक पंड्या की जोड़ी ने दबाव में रहकर शानदार बल्लेबाजी की और आखिरी ओवरों में धमाकेदार चौकों-छक्कों से भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई।

इस जीत के साथ:
✅ भारत ने तीसरी बार चैंपियंस ट्रॉफी जीती (पहली बार 2002, दूसरी बार 2013)
✅ 12 साल के लंबे इंतजार के बाद आईसीसी ट्रॉफी पर कब्जा
✅ रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत का एक और ऐतिहासिक खिताब

दुबई के मैदान पर भारतीय झंडा लहराते हुए खिलाड़ियों ने इस जीत का जश्न मनाया, वहीं दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमी इस एपिक फाइनल को यादगार मान रहे हैं।

लद्दाख में कश्मीर के केसर की खेती, तंगमार्ग बीजों से वैज्ञानिक कर रहे प्रयोग

0

लेह: कश्मीर के पंपोर की खूबसूरत केसर की खेती अब लद्दाख में भी की जाएगी। लद्दाख सरकार और सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (CSIR-IIIM) के सहयोग से यहां केसर की खेती पर प्रयोग किए जा रहे हैं।

लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश के कृषि विभाग ने CSIR-IIIM के तकनीकी समर्थन के साथ इस वर्ष पायलट प्रोजेक्ट के रूप में केसर की खेती शुरू करने का निर्णय लिया है। कृषि सचिव भूपेश चौधरी ने लेह और कारगिल के उपयुक्त स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं।

CSIR-IIIM के विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • लद्दाख में केसर की खेती धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखकर की जा रही है।
  • यहां के जलवायु और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए उन्नत खेती तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
  • तंगमार्ग, श्रीनगर से लाए गए बेहतरीन गुणवत्ता वाले केसर के बीजों का उपयोग किया जा रहा है।
  • किसानों को इस खेती के लिए प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिए जाएंगे।

CSIR-IIIM और कृषि विभाग मिलकर किसानों को बीज उपलब्ध कराएंगे और खेती की प्रक्रिया को आसान बनाएंगे। शुरुआती परीक्षण सफल रहे हैं, और केसर की अच्छी गुणवत्ता देखी गई है। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो लद्दाख के किसान भी केसर की खेती से लाभ उठा सकते हैं।

कारगिल के किसान का अनुभव:
कारगिल के मोहम्मद मेहदी ने 2018 से अपने खेत में केसर की खेती पर प्रयोग किए हैं। उनका कहना है कि ग्रीनहाउस में उगाई गई फसल अच्छी हो रही है, और इसकी गुणवत्ता कश्मीर के केसर जैसी ही है।

लद्दाख में केसर की खेती के लिए आवश्यक जलवायु परिस्थितियों और मिट्टी की उर्वरता को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान जारी है। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो लद्दाख को केसर उत्पादन के एक नए केंद्र के रूप में देखा जा सकता है।

अमेरिका में हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की कांग्रेस ने निंदा की, सख्त कार्रवाई की मांग

0

नई दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार को अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की कड़ी निंदा की और इसे नफरत व असहिष्णुता का अस्वीकार्य कृत्य करार दिया। बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के अनुसार, उनके श्री स्वामीनारायण मंदिर, चिनो हिल्स, सैन बर्नार्डिनो काउंटी में अज्ञात लोगों द्वारा तोड़फोड़ की गई और मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी ग्रैफिटी लिखी गई।

कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग प्रमुख पवन खेड़ा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स में BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर में हुई तोड़फोड़ की कठोरतम शब्दों में निंदा करती है।” उन्होंने कहा कि “इस तरह के नफरत और असहिष्णुता से भरे कृत्य किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं।”

खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महात्मा गांधी के ‘सर्व धर्म समभाव’ के सिद्धांत को अपनाया है और इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

BAPS पब्लिक अफेयर्स ने अपने आधिकारिक पोस्ट में कहा, “एक और मंदिर अपवित्र किया गया, इस बार कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स में। हिंदू समुदाय घृणा के खिलाफ मजबूती से खड़ा है। हम चिनो हिल्स और दक्षिणी कैलिफोर्निया के समुदाय के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि नफरत अपनी जड़ें न जमा सके।” उन्होंने आगे कहा, “हमारी साझी मानवता और आस्था शांति और करुणा को बनाए रखेगी।”

सीतापुर पत्रकार हत्या: क्या राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या में पेशेवर हत्यारों का हाथ?

0

सीतापुर: पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। ऐसा माना जा रहा है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, क्योंकि हमला एक ऐसे स्थान पर किया गया जहाँ दृश्यता कम थी। हाईवे के पुल के ढलान पर हुए इस हमले को राहगीरों द्वारा देख पाना लगभग असंभव था।

हमलावरों ने पूरी योजना के साथ स्थान चुना और बेहद नजदीक से गोली मारी। पुलिस के अनुसार, पहली गोली सीधे उनके चेहरे पर मारी गई, दूसरी उनके मुँह में लगी, और जब तीसरी गोली चलाई गई तो संभवतः उन्होंने अपना हाथ उठाया, जिससे वह गोली उनके हाथ में लगी।

जांच में आई तेजी
आईजी प्रशांत कुमार ने पीड़ित के परिवार से मुलाकात कर आश्वासन दिया कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इमिलिया सुल्तानपुर थाना पुलिस ने लगभग आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनमें दो लेखपाल भी शामिल हैं। हालाँकि, पुलिस अधिकारी इस पर कोई खुलासा नहीं कर रहे हैं। हमलावरों द्वारा अपनाई गई रणनीति से यह आशंका बढ़ गई है कि इस हत्या में पेशेवर अपराधियों का हाथ हो सकता है।

परिवार और पत्रकार संगठनों में आक्रोश
जिले के पत्रकार संगठनों ने पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की और हत्यारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। महोली विधायक शशांक त्रिवेदी और कई अन्य नेता भी जिला अस्पताल पहुँचे और पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की।

तहसीलदार की संदिग्ध कॉल
राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या से कुछ समय पहले तहसीलदार ने उन्हें फोन कर बुलाया था। परिवार के अनुसार, वह घर पर थे जब उन्हें तहसीलदार का कॉल आया और इसके बाद वे मिलने के लिए निकल पड़े। कुछ देर बाद ही उनकी हत्या की खबर आई। तहसीलदार ने उन्हें क्यों बुलाया था, यह अभी भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना के दूसरे दिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और यूपी सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस परिवार के साथ खड़ी है और अगर जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

छत्तीसगढ़ की दो नाबालिग लड़कियां बिहार के रोहतास में रेस्क्यू, 40 से अधिक पीड़िताओं को बचाया गया

0

दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की दो नाबालिग लड़कियों को बिहार के रोहतास जिले से बचाया गया, जहां उन्हें बंधक बनाकर काम करवाया जा रहा था। उनके पिता की मृत्यु हो चुकी थी, और आर्थिक तंगी के कारण उनकी मां उनका पालन-पोषण करने में असमर्थ थी। परिवार की मदद के लिए नौकरी की तलाश में वे मानव तस्करी का शिकार बन गईं।

रोहतास पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम ने तीन दिन पहले एक अभियान के तहत 40 से अधिक पीड़ित लड़कियों को बचाया, जिनमें राजनांदगांव और दुर्ग की भी कई लड़कियां शामिल थीं। इन लड़कियों को वापस लाने के लिए छत्तीसगढ़ से पुलिस टीम को बिहार भेजा गया।

अतिरिक्त एसपी सुखनंदन राठौर ने बताया, “हमें जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, दुर्ग पुलिस की टीम राज्य पुलिस के साथ रोहतास पहुंची। तस्करों को पकड़ने के लिए कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बचाई गई लड़कियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। दुर्ग से तीन अधिकारियों की एक टीम को उनकी वापसी सुनिश्चित करने के लिए भेजा गया है। अब तक चार बच्चों को दुर्ग का पाया गया है और उनके परिवारों से संपर्क किया गया है।”

लड़कियों के परिवार वालों ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है और वे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं ले पाए हैं। “हमारी बेटियां रोजगार की तलाश में दुर्ग से रोहतास गई थीं, लेकिन अब हमें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है,” एक परिजन ने कहा।

दुर्ग पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया कि बचाई गई लड़कियों को परिजनों को सौंपने से पहले उनकी काउंसलिंग कराई जाएगी ताकि वे इस भयावह अनुभव से उबर सकें।

दिल्ली पुलिस ने इंटरनेशनल मोबाइल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

0

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ने एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो दिल्ली-एनसीआर से चोरी किए गए मोबाइल फोन को बांग्लादेश और नेपाल भेजता था। इस मामले में एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया है, जिससे 48 महंगे मोबाइल बरामद किए गए हैं, जिनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 20 लाख रुपये आंकी गई है। यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर के मेट्रो स्टेशनों, बसों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में सक्रिय था और वहीं से मोबाइल चोरी करता था।

पश्चिम बंगाल से जुड़े हैं तार

क्राइम ब्रांच डीसीपी आदित्य गौतम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान अब्दुस के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल का निवासी है। जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह में कई लोग शामिल हैं, जो चोरी के मोबाइल की तस्करी कर उन्हें बांग्लादेश और नेपाल भेजते हैं। क्राइम ब्रांच की साइबर सेल इस गिरोह को पकड़ने में लगी थी और अब्दुस को कोतवाली इलाके से गिरफ्तार किया गया है।

कैसे होता था मोबाइल तस्करी का खेल?

जांच में पता चला कि यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय चोरों और स्नैचर्स से मोबाइल खरीदता था, जिसके लिए उन्हें प्रति मोबाइल 2,000 से 3,000 रुपये दिए जाते थे। इसके बाद, तस्कर इन मोबाइलों को इकट्ठा कर पश्चिम बंगाल ले जाते थे। वहां मोबाइल का सॉफ्टवेयर बदला जाता था और फिर इन्हें गैरकानूनी तरीके से सीमा पार भेजा जाता था। बांग्लादेश में इनकी कीमत 8,000 से 10,000 रुपये प्रति मोबाइल होती थी।

गिरफ्तार आरोपी ने किए कई खुलासे

पूछताछ के दौरान 24 वर्षीय आरोपी अब्दुस ने कबूल किया कि आर्थिक तंगी के कारण वह इस अवैध काम में शामिल हुआ। शुरुआत में वह मोबाइल फोन पार्ट्स के कबाड़ के व्यापार से जुड़ा था, लेकिन बाद में चोरी के मोबाइल के धंधे में लिप्त समीर और सलीम से संपर्क में आया। मुनाफे की संभावना देखकर उसने चोरी के मोबाइल सस्ते दामों में खरीदने और तस्करी करने का काम शुरू कर दिया। अब्दुस ने स्वीकार किया कि पिछले 18 महीनों में उसने दिल्ली से पश्चिम बंगाल तक 800 से अधिक चोरी के मोबाइल तस्करी किए हैं।

गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी

अब साइबर सेल गिरोह के अन्य सदस्यों, खासतौर पर समीर और सलीम, की पहचान कर रही है। पुलिस उनके नेटवर्क को दिल्ली, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक खंगाल रही है। साथ ही, तस्करी के रास्तों का पता लगाया जा रहा है, ताकि पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जा सके।

छावा बॉक्स ऑफिस कलेक्शन डे 22: विक्की कौशल की ऐतिहासिक फिल्म ने पार किया ₹500 करोड़ का आंकड़ा!

0

मुंबई: विक्की कौशल की ऐतिहासिक ड्रामा छावा बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार कमाई जारी रखे हुए है। चौथे हफ्ते में भी यह फिल्म मजबूती से टिकी हुई है और दर्शकों का दिल जीत रही है। छत्रपति संभाजी महाराज की वीर गाथा पर आधारित इस फिल्म को जबरदस्त प्रशंसा मिली है, और अब इसने 22वें दिन भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ₹500 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।

छावा ने ₹500 करोड़ क्लब में बनाई जगह

ट्रेड एनालिस्ट ने सोशल मीडिया पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की पुष्टि करते हुए लिखा,
“500 NOT OUT… #छावा ₹500 करोड़ क्लब में शामिल, हाल के सबसे बड़े #ब्लॉकबस्टर्स में से एक: #पुष्पा2 #हिंदी, #जवान, #स्त्री2, #गदर2, #पठान, #बाहुबली2 #हिंदी और #एनिमल… एक ऐतिहासिक उपलब्धि!”

इसके साथ ही छावा बॉलीवुड की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गया है। फिल्म के चौथे शुक्रवार की कमाई तीसरे मंगलवार, बुधवार और गुरुवार से अधिक रही, जिससे वीकेंड पर और शानदार बिजनेस की उम्मीद की जा रही है।

चौथे हफ्ते की कमाई और तेलुगु रिलीज़

ट्रेड एनालिस्ट के अनुसार, हिंदी वर्जन ने चौथे शुक्रवार को ₹6.30 करोड़ का बिजनेस किया, जिससे भारत में कुल कलेक्शन ₹502.70 करोड़ हो गया। वहीं, तेलुगु डब वर्जन, जो हिंदी रिलीज़ के तीन हफ्ते बाद सिनेमाघरों में आया, ने पहले शुक्रवार को ₹2.63 करोड़ की ओपनिंग ली।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 550+ स्क्रीन्स पर रिलीज़ होने के बाद, फिल्म की कमाई में और इज़ाफा हुआ है। तेलुगु दर्शकों की शानदार प्रतिक्रिया को देखते हुए, छावा का बॉक्स ऑफिस सफर अभी और लंबा चलने की उम्मीद है।

फिल्म के बारे में

छावा में विक्की कौशल ने छत्रपति संभाजी महाराज की भूमिका निभाई है, जबकि रश्मिका मंदाना महारानी यसूबाई के किरदार में नजर आई हैं। यह फिल्म छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर पुत्र संभाजी महाराज के जीवन और उनके मुगलों के खिलाफ संघर्ष की कहानी को दर्शाती है।

लक्ष्मण उतेकर द्वारा निर्देशित इस फिल्म में विनीत कुमार सिंह, अक्षय खन्ना, आशुतोष राणा, दिव्या दत्ता, संतोष जुंनकर और प्रदीप रावत जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं।

क्या दुबई में खेलना भारत के लिए फायदेमंद है? सौरव गांगुली का बड़ा बयान!

0

भारत बनाम न्यूज़ीलैंड चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल से पहले एक अहम सवाल उठा है—क्या पूरे टूर्नामेंट में भारत का सिर्फ दुबई में खेलना उसे अनुचित लाभ देता है? इस पर पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने खुलकर राय दी है। लेकिन क्या यह तर्क वाकई सही है या यह सिर्फ एक धारणा है?

गांगुली का तर्क—कोई अनुचित लाभ नहीं!

गांगुली का मानना है कि भारत को दुबई में खेलने से कोई विशेष फायदा नहीं मिला है। उनका कहना है कि भारतीय टीम सरकार के फैसले के कारण पाकिस्तान में नहीं खेल पाई, और यह बीसीसीआई या टीम इंडिया की इच्छा से नहीं हुआ। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारतीय बल्लेबाज़ पाकिस्तान की सपाट पिचों पर खेलने का अनुभव गंवा रहे हैं, जहां अन्य टीमें 350+ स्कोर आसानी से बना रही हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यहां कोई अनुचित लाभ है। भारत की बैटिंग मजबूत है, हमारे पास अच्छे स्पिनर हैं, लेकिन न्यूज़ीलैंड भी कमज़ोर नहीं है।”

तो क्या सच में कोई फायदा नहीं हुआ?

हालांकि गांगुली का तर्क सही हो सकता है, लेकिन कुछ क्रिकेट विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि—
✅ भारत को पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक ही वेन्यू पर खेलने का फायदा मिला।
✅ खिलाड़ियों को अलग-अलग परिस्थितियों में ढलने की ज़रूरत नहीं पड़ी।
✅ भारतीय टीम के पास दुबई की पिच और परिस्थितियों को बेहतर समझने का अवसर मिला, जबकि अन्य टीमें पाकिस्तान और दुबई के बीच यात्रा कर रही थीं।
✅ भारत ने अपनी टीम संयोजन को दुबई की परिस्थितियों के हिसाब से तैयार किया, जिसमें अतिरिक्त स्पिनर्स शामिल किए गए।

भारत बनाम न्यूज़ीलैंड—क्या कहता है हेड-टू-हेड रिकॉर्ड?

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच आईसीसी टूर्नामेंट्स में कड़ा मुकाबला देखने को मिला है।
➡️ 2000 की चैंपियंस ट्रॉफी (ICC Knockout) फाइनल में न्यूज़ीलैंड ने भारत को हराया था।
➡️ 2019 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भी न्यूज़ीलैंड ने भारत को मात दी थी।
➡️ हालाँकि, हालिया मुकाबलों में भारत न्यूज़ीलैंड पर हावी रहा है और ग्रुप स्टेज में पहले ही उन्हें हराया है।

निष्कर्ष—क्या भारत को लाभ मिला या नहीं?

यह कहना मुश्किल है कि भारत को ‘अनुचित लाभ’ मिला, लेकिन यह ज़रूर कहा जा सकता है कि दुबई की परिस्थितियाँ भारत के पक्ष में ज़रूर रही हैं। न्यूज़ीलैंड ने भी इस पिच पर भारत के खिलाफ मैच खेला है, इसलिए वे भी परिस्थितियों से परिचित हैं।

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या न्यूज़ीलैंड 2000 के इतिहास को दोहरा पाएगा या फिर भारत इस बार चैंपियंस ट्रॉफी की ट्रॉफी उठाएगा!

इंडिया बनाम न्यूजीलैंड चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल: महामुकाबला कब और कहां देखें लाइव स्ट्रीमिंग

0

क्रिकेट की जंग: भारत बनाम न्यूजीलैंड – बदला या फिर से हार?

दुबई: क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक और महा-मुकाबले की घड़ी आ चुकी है! भारत और न्यूजीलैंड के बीच चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का फाइनल मुकाबला 9 मार्च को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मुकाबला सिर्फ एक ट्रॉफी के लिए नहीं, बल्कि बदले की जंग के रूप में भी देखा जा रहा है।

टीम इंडिया इस टूर्नामेंट में अब तक अजेय रही है और पहले ही ग्रुप स्टेज में न्यूजीलैंड को शिकस्त दे चुकी है। लेकिन क्या ब्लैककैप्स इस बार पुराना हिसाब चुकता करेंगे?

राइवलरी का इतिहास: भारत बनाम न्यूजीलैंड के बड़े मुकाबले

  • चैंपियंस ट्रॉफी 2000: जब ICC नॉकआउट टूर्नामेंट के नाम से जाना जाता था, तब फाइनल में न्यूजीलैंड ने भारत को हराकर अपना पहला ICC खिताब जीता था।
  • 2019 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल: मैनचेस्टर में भारत का सपना न्यूजीलैंड ने तोड़ा था, जब महेंद्र सिंह धोनी रन आउट हुए और करोड़ों भारतीय फैंस के दिल टूट गए थे।
  • 2021 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल: न्यूजीलैंड ने भारत को हराकर टेस्ट चैंपियनशिप जीती थी, जिससे भारतीय टीम एक और आईसीसी ट्रॉफी से चूक गई।
  • 2023 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल: इस बार भारत ने न्यूजीलैंड को मात देकर फाइनल में जगह बनाई थी।

अब 2025 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में दोनों टीमें फिर आमने-सामने हैं। क्या भारत अपना बदला पूरा करेगा, या फिर न्यूजीलैंड एक और बड़ा झटका देगा?

मैच की अहम बातें:

  • भारत की ताकत: रोहित शर्मा, विराट कोहली, शुभमन गिल की तिकड़ी इस बार बल्ले से कहर बरपाने को तैयार है। गेंदबाजी में मोहम्मद शमी, वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव पर बड़ी जिम्मेदारी होगी।
  • न्यूजीलैंड की तैयारी: कप्तान मिचेल सैंटनर की टीम में स्पिन और पेस का शानदार संतुलन है। केन विलियमसन, विल यंग, टॉम लैथम और रचिन रविंद्र जैसे बल्लेबाज टीम की रीढ़ हैं।

कब और कहां देखें लाइव स्ट्रीमिंग?

📅 तारीख: रविवार, 9 मार्च 2025
🏟 स्थान: दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, दुबई
📺 लाइव टेलीकास्ट: स्टार स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स 18 नेटवर्क
📡 लाइव स्ट्रीमिंग: जियोसिनेमा और हॉटस्टार

क्या भारत 25 साल बाद न्यूजीलैंड से चैंपियंस ट्रॉफी की हार का बदला ले पाएगा? 9 मार्च को क्रिकेट की सबसे बड़ी जंग देखने के लिए तैयार हो जाइए! 🏆🔥