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भारत-पाक तनाव के बीच गुजरात में बड़ी कार्रवाई: 1,000 से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए, फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह पर भी शिकंजा

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जब भारत पाकिस्तान को सबक सिखाने की तैयारी कर रहा है, उसी वक्त गुजरात में एक और बड़ी चुनौती सामने आई है। गुजरात पुलिस ने एक जबरदस्त अभियान चलाकर 1,024 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

गुजरात सरकार के बयान के मुताबिक, पुलिस ने शुक्रवार देर रात अहमदाबाद और सूरत में एक साथ कार्रवाई करते हुए इन घुसपैठियों को दबोचा। अहमदाबाद से 890 और सूरत से 134 घुसपैठिए पकड़े गए। गुजरात के गृहमंत्री हर्ष संघवी ने इसे राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा ऑपरेशन बताया।

भारत में क्या कर रहे थे ये बांग्लादेशी?
इन घुसपैठियों ने पश्चिम बंगाल से फर्जी दस्तावेज बनवाए थे और गुजरात तक पहुँच गए थे। मंत्री संघवी ने बताया कि कई लोग ड्रग्स, मानव तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों से भी जुड़े हुए पाए गए हैं। हाल ही में गिरफ्तार चार बांग्लादेशियों में से दो अल-कायदा की स्लीपर सेल में काम कर रहे थे।

साफ है — ये लोग न सिर्फ अवैध रूप से भारत में घुसे, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गए। सवाल उठता है:

“अगर अपना देश खुद संभाल नहीं सकते, तो भारत क्यों भागते हो?”
“हिंदुओं से नफरत करते हो, फिर भी भारत में क्यों घुसते हो?”

फर्जी दस्तावेज बनाने वालों पर भी गिरेगी गाज
गृह मंत्री ने कहा कि फर्जी दस्तावेज बनाने वाले नेटवर्क पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। खास तौर पर पश्चिम बंगाल में सक्रिय इस गिरोह की जांच शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि अवैध घुसपैठियों को शरण देने वालों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

पाकिस्तानी घुसपैठियों को भी भगाया जाएगा
गुजरात के पुलिस महानिदेशक विकास सहाय ने कहा कि पकड़े गए लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि के बाद केंद्रीय सरकार और BSF के साथ मिलकर इन्हें जल्द से जल्द बांग्लादेश वापस भेजा जाएगा। साथ ही पाकिस्तानी नागरिकों को भी गुजरात से बाहर निकालने का आदेश दिया गया है।

भारत अब और बर्दाश्त नहीं करेगा!
सालों से ढीली सीमा सुरक्षा की वजह से लाखों बांग्लादेशी भारत में घुस आए। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। जब बांग्लादेश में भारत समर्थक नेता शेख हसीना का तख्तापलट हुआ, तब से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते भी बिगड़ चुके हैं।

अब समय आ गया है कि भारत अवैध घुसपैठ और देशद्रोही गतिविधियों के खिलाफ पूरी ताकत से खड़ा हो।

“यह नया भारत है — न कोई घुसपैठिया बचेगा, न देशद्रोही!”

क्या भारत पाहलगाम हमले का बदला लेगा? विशेषज्ञ ने खोली पाकिस्तान की कमजोरी

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पाहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत में हर जगह एक ही सवाल गूंज रहा है — क्या भारत बदला लेगा? और अगर लेगा, तो कैसे? इसी बीच अमेरिका के मशहूर विदेश नीति विशेषज्ञ प्रोफेसर मुक़्तेदार खान ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है।

भारत-पाकिस्तान युद्ध की कगार पर?
प्रोफेसर मुक़्तेदार खान के अनुसार, पाहलगाम जैसे हमलों के बाद भारत एक बड़े द्वंद्व में है। प्रधानमंत्री मोदी पर जनता का जबरदस्त दबाव है कि पाकिस्तान को करारा जवाब दिया जाए। लेकिन साथ ही, वैश्विक आर्थिक मंदी और अमेरिका की टैरिफ नीतियों के बीच, कोई भी युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

अगर भारत सीमित या छोटे स्तर का हमला करता है, तो इससे पाकिस्तान को फायदा हो सकता है — क्योंकि वहां की आवाम सेना और सरकार के पीछे खड़ी हो जाएगी। लेकिन अगर भारत पूर्ण युद्ध छेड़ता है, तो पाकिस्तान का आर्थिक पतन तय है। एक लंबी जंग पाकिस्तान को 10-15 साल पीछे धकेल देगी। हालाँकि, भारत को भी कुछ आर्थिक नुकसान सहना पड़ेगा।

मोदी के सामने चुनौती:
पीएम मोदी के सामने चुनौती है कि प्रतिक्रिया इतनी छोटी न हो कि पाकिस्तान फायदे में रहे, और इतनी बड़ी भी न हो कि अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ जाए। भारत को ऐसा प्रहार करना होगा जो न पाकिस्तान संभाल पाए, न दुनिया उसमें हस्तक्षेप कर सके।

क्या अमेरिका समर्थन करेगा?
ट्रंप प्रशासन ने भारत के प्रति सहानुभूति दिखाई है। पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग अलग-थलग पड़ चुका है — न OIC, न सऊदी अरब, न UAE और न ईरान कोई भी पाकिस्तान के समर्थन में खुलकर नहीं आना चाहता।

ट्रंप भारत का साथ शब्दों में देगा, लेकिन अमेरिका के आंतरिक हालात देखते हुए वह सीधे हस्तक्षेप से बचना चाहेगा। जब तक भारत कोई बहुत बड़ा कदम नहीं उठाता, तब तक ट्रंप भारत को फ्री हैंड दे सकते हैं।

व्यापार और अमेरिका का नजरिया:
भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर भी ट्रंप की नजर है। भारत ने हाल ही में फ्रांस से 7.4 अरब डॉलर के राफेल विमान खरीदे, जिससे अमेरिका असंतुष्ट है। ट्रंप भारत से उम्मीद करेंगे कि वह व्यापार घाटा कम करे, लेकिन युद्ध के सवाल पर भारत को अभी खुली छूट मिल सकती है।

भारत समिट और भविष्य:
प्रोफेसर मुक़्तेदार खान ने कहा कि हैदराबाद में हो रहा India Summit प्रगतिशील आवाजों के लिए एक बड़ा मंच है। जब दुनिया भर में कट्टरता बढ़ रही है, तब लोकतंत्र के पक्षधर लोगों को एकजुट होना पड़ेगा। भारत इस संघर्ष में एक मजबूत उम्मीद है।

निष्कर्ष:
भारत के पास अब मौका है — एक ऐसा जवाब देने का, जो न केवल पाहलगाम के शहीदों का सम्मान करेगा, बल्कि पाकिस्तान को भी उसकी औकात याद दिलाएगा। समय आ गया है कि नया भारत न तो झुकेगा, न रुकेगा।

पाकिस्तान का ‘इमरजेंसी ड्रामा’: दवाइयों के नाम पर पंजाब में कोकीन-हेरोइन तस्करी का पर्दाफाश

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पाकिस्तान एक बार फिर अपनी नाकामी और दोहरे चरित्र का प्रदर्शन कर रहा है। भारत द्वारा पाहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने के जवाब में, इस्लामाबाद ने गुरुवार को भारत के साथ सभी व्यापारिक संबंध तोड़ने की घोषणा कर दी। अब, पाकिस्तानी स्वास्थ्य एजेंसियां “आपातकालीन तैयारी” का बहाना बनाकर दवाइयों की आपूर्ति सुरक्षित करने की कोशिश कर रही हैं।

Geo News के मुताबिक, पाकिस्तान की ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी (DRAP) ने कोई औपचारिक आदेश तो जारी नहीं किया, लेकिन भारत से दवाओं के आयात रुकने की आशंका से “तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था” शुरू कर दी है। भारत से पाकिस्तान लगभग 30-40% फार्मास्युटिकल कच्चा माल और जीवन रक्षक दवाइयाँ मंगवाता था, जिनमें कैंसर उपचार, एंटी-रेबीज वैक्सीन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज़ शामिल हैं।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पाकिस्तान में असली संकट सिर्फ दवाओं का नहीं, बल्कि ड्रग्स का है। वर्षों से पंजाब के रास्ते अफगानिस्तान, ईरान और दुबई से कोकीन, हेरोइन और अन्य नशीली पदार्थों की अवैध तस्करी पाकिस्तान में हो रही है। अब जब भारत के साथ कानूनी व्यापार बंद हुआ है, तो ये ड्रग माफिया, जो ज्यादातर अनपढ़ और आपराधिक गिरोहों से जुड़े हैं, इस अवसर का फायदा उठाकर नशीली दवाओं का कारोबार बढ़ाने की फिराक में हैं।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने खुद स्वीकार किया है कि भारत से आने वाली कानूनी दवाओं की आपूर्ति बाधित होने से ‘ब्लैक मार्केट’ में नकली और असुरक्षित दवाइयाँ भर सकती हैं। हकीकत में, यह ब्लैक मार्केट पाकिस्तान में पहले से ही कोकीन और हेरोइन के सौदों से भरी हुई है।

पाकिस्तान फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (PPMA) के अध्यक्ष तौकीर-उल-हक ने सरकार से दवा उद्योग को व्यापार प्रतिबंध से छूट देने की गुहार लगाई है। लेकिन सवाल उठता है कि जब पाकिस्तान के भीतर नशे के सौदागर खुलेआम सक्रिय हैं, तो क्या ‘दवाओं’ के नाम पर फिर वही कोकीन और हेरोइन की खेप भारत-पाक बॉर्डर से घुसने की कोशिश नहीं होगी?

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान को अब अपनी कड़वी हकीकत का सामना करना चाहिए। दवाओं के नाम पर ड्रग्स की तस्करी ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि दोनों को ध्वस्त कर दिया है। पाकिस्तान को यदि वाकई सुधार चाहिए, तो उसे सबसे पहले अपने नशे के व्यापार और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों को खत्म करना होगा।

पाहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की चालबाज़ी: रूस और चीन से जांच कराने की मांग

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पाकिस्तान एक बार फिर अपनी आतंकवाद-प्रेमी नीति को छुपाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर नाटक कर रहा है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या के बाद पाकिस्तान अब रूस और चीन से इस हमले की जांच कराने की मांग कर रहा है।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रूसी सरकारी मीडिया ‘आरआईए नोवोस्ती’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि रूस, चीन या पश्चिमी देश एक अंतरराष्ट्रीय जांच टीम बनाकर इस हमले की जांच करें, ताकि यह साबित किया जा सके कि भारत झूठ बोल रहा है या सच।

असल में, पाकिस्तान का यह नया नाटक उसके आतंकवाद के काले चेहरे को छुपाने की एक असफल कोशिश है। हमला जिस संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने किया है, वह पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का ही दूसरा नाम है। ऐसे में पाकिस्तान की खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश एक बेहूदा मजाक से कम नहीं।

हैरानी की बात तो यह है कि पाकिस्तानी उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने इस भयानक नरसंहार को “आज़ादी की लड़ाई” से जोड़ने की कोशिश की। निर्दोष पर्यटकों की हत्या को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ना न केवल आतंकवाद को सही ठहराना है, बल्कि दुनियाभर में असली स्वतंत्रता सेनानियों का भी अपमान है।

इसी बीच, ख्वाजा आसिफ ने एक और हास्यास्पद दावा करते हुए इसे ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ (भारत द्वारा रचा गया षड्यंत्र) करार दिया। एक ओर पाकिस्तान के नेता हमले को आज़ादी की लड़ाई बता रहे हैं और दूसरी ओर उसे भारत की साजिश कह रहे हैं। यह दोहरा रवैया साफ दिखाता है कि पाकिस्तान खुद ही अपने झूठ में फंस चुका है।

विश्लेषकों का भी मानना है कि पाकिस्तान अपने आतंकवादी संगठनों की करतूतों को छुपाने के लिए बेतुके तर्क दे रहा है। अमेरिकी विश्लेषक एंड्रयू कोरिब्को ने कहा कि पाकिस्तान के शीर्ष अधिकारियों के विरोधाभासी बयान उनकी घबराहट और दोष को छुपाने की नाकाम कोशिश को उजागर करते हैं।

साफ है कि पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया को गुमराह करने के लिए ड्रामा कर रहा है। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि पाहलगाम के दोषियों को कठोरतम सजा दी जाएगी, चाहे वो कहीं भी छिपे हों। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान को अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर और बेनकाब किया जाएगा।

भीख में जिंदा बांग्लादेश: जो हिंदुओं से नफरत करता है, फिर भी भारत में घुसपैठ कर अपराध करता है

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भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है, और इसी बीच बांग्लादेश — वह देश जो खुद भीख मांगते हुए खड़ा है — अचानक शांति की बातें करने लगा है। यह वही बांग्लादेश है जहां कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ हिंदुओं से नफरत करती है, लेकिन जब पेट भरने की बारी आती है, तो हजारों अवैध बांग्लादेशी भारत में हिंदू बहुल राज्यों में घुसपैठ कर लेते हैं।

शेख हसीना के पतन के बाद बांग्लादेश एक बार फिर अपने असली रंग में आ गया है। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में चल रही अंतरिम सरकार ने अब खुलेआम भारत विरोधी और पाकिस्तान परस्त नीति अपनानी शुरू कर दी है। वहीं, बांग्लादेशी मुस्लिम कट्टरपंथी भारत में घुसकर छोटे-मोटे अपराध कर रहे हैं, चोरी, बलात्कार, नशाखोरी और मानव तस्करी जैसे अपराधों में लिप्त हैं, और भारतीय कानून व्यवस्था पर बोझ बनते जा रहे हैं।

यह वही लोग हैं, जो बांग्लादेश में हिंदुओं के घर जलाते हैं, मंदिर तोड़ते हैं, और फिर भारत आकर हिंदुओं के बीच रहने का दिखावा करते हैं। जब भी पाकिस्तान आतंकवाद फैलाता है, बांग्लादेशी नेतृत्व ढोंग करता है जैसे वह शांति का दूत हो। असल में, बांग्लादेश अब भी 1971 की गंदी मानसिकता से बाहर नहीं निकला है — जब हिंदुओं का कत्लेआम कर बांग्लादेश को “मुस्लिम राष्ट्र” बनाने की कोशिश की गई थी।

पाहलगाम हमले के बाद जब पूरा भारत आक्रोशित था, तब भी बांग्लादेश ने अपने दोस्त पाकिस्तान को बचाने की कोशिश की। लेकिन सच्चाई यह है कि बांग्लादेश के आम लोग भी अब पाकिस्तान से नफरत करते हैं, क्योंकि उन्हें याद है 1971 में पाकिस्तान ने उनके साथ क्या किया था। फिर भी, बांग्लादेश का नेतृत्व अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए “भारत का दुश्मन” बनकर अपने कट्टर इस्लामी एजेंडे को हवा दे रहा है।

भारत के कई शहरों में लाखों अवैध बांग्लादेशी बिना दस्तावेजों के रहते हैं, स्थानीय जनसंख्या का संतुलन बिगाड़ते हैं, अपराध फैलाते हैं और कट्टरता बढ़ाते हैं। वे हिंदुस्तान की रोटी खाते हैं, लेकिन दिल में जहर भरकर भारत और हिंदुओं के खिलाफ साजिशें रचते हैं। कुछ तो आतंकी संगठनों से भी जुड़े होते हैं, जिन्हें पकड़ने में भारतीय सुरक्षाबलों को जान की बाजी लगानी पड़ती है।

बांग्लादेश जैसे भीखमंगे और आतंक को पालने वाले देश से भारत को अब कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इन्हें हर स्तर पर अलग-थलग करना और अवैध घुसपैठियों को पकड़कर वापस भेजना ही भारत की प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत को अब बांग्लादेश के इस दोहरे चेहरे को पहचान लेना चाहिए — जो एक तरफ दोस्ती का दिखावा करता है, और दूसरी तरफ चुपचाप हिंदुओं को खत्म करने की साजिश रचता है।

सच तो यह है कि बांग्लादेश जैसा मुल्क कभी भी भारत का सच्चा मित्र नहीं हो सकता। यह एक जेहादी मानसिकता वाला देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था भी भीख और तुष्टिकरण की राजनीति पर टिकी है। भारत को अब अपनी सुरक्षा, संस्कृति और जनसंख्या संतुलन के लिए सख्त कदम उठाने का समय आ गया है।

अमेरिका का भारत को समर्थन: ‘गीले डायपर’ वाली ISI पर तुलसी गबार्ड का करारा तंज

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पूर्व कांग्रेस नेता और अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए पाकिस्तान की ISI को बच्चे के गीले डायपर जैसा करार दिया। गबार्ड ने साफ कहा कि अमेरिका भारत के साथ है और आतंकवादियों को ढूंढ निकालने में पूरा सहयोग करेगा।

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर गबार्ड ने लिखा, “हम भारत के आतंकवाद के खिलाफ इस अभियान का समर्थन करते हैं। पाकिस्तान का रवैया वही पुराना है — धमकियों, जिहाद और झूठे नाटकों का।”

डोनाल्ड ट्रंप ने भी पीएम मोदी को कॉल कर अपना समर्थन जताया और पाकिस्तान को एक बार फिर ‘रट्टू तोते’ जैसा करार दिया, जो हर संकट में रोने और धमकी देने के अलावा कुछ नहीं कर सकता।

भारत ने आतंकियों को खत्म करने के लिए व्यापक अभियान शुरू कर दिया है, और अब सीआईए और अमेरिकी एजेंसियां भी पूरी जानकारी और समर्थन के साथ भारत के साथ खड़ी हैं।

पाकिस्तान की ISI, जो खुद को “शेर” समझती थी, अब दुनिया की नजर में ‘गीले डायपर’ वाला बच्चा बन गई है — जो खुद से भी लड़ने में असफल है।

अमेरिकी समर्थन से अब पाकिस्तान के आतंक के कारखाने ध्वस्त होना तय हैं, चाहे ISI कितने भी झूठे पोस्टर या गीदड़ भभकियाँ दे!

“वो तो बहुत बुरा था”: ट्रंप का पाकिस्तान पर ठहाका, कहा – “भारत-पाक आपस में लड़-झगड़ के सुलझा लेंगे”

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न्यूयॉर्क:

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने क्लासिक स्टाइल में पाकिस्तान को ऐसी ‘इज्जत’ दी, जैसी पाकिस्तान खुद अपने मुल्क में नहीं करता।
पहल्गाम आतंकी हमले के बाद पूछे जाने पर ट्रंप ने हंसते हुए कहा:

वो कल का हमला बहुत बुरा था… बहुत बुरा… लेकिन भारत और पाकिस्तान खुद ही निपट लेंगे।

मतलब साफ था — “हमें नहीं फुर्सत तुम्हारे जैसे भीखमंगे देश के झगड़ों में पड़ने की।”


अमेरिका भी उकता चुका है पाकिस्तान से

ट्रंप ने आगे कहा कि:

  • भारत और पाकिस्तान हजार साल से लड़ रहे हैं… शायद उससे भी ज्यादा!

  • जैसे पहले सड़ते रहे, वैसे ही अब भी सड़ते रहेंगे… खुद ही सुलझा लेंगे।

(अनकही बात: ‘हमें क्यों अपना टाइम वेस्ट करना बेकार देश पर?’)

मतलब, पाकिस्तान के आतंकवादी export और toddler जैसे नाटकों को देखकर अब अमेरिका भी थककर बैठ चुका है।
वैसे भी पाकिस्तान अब अमेरिका के लिए वही है जो रेलवे स्टेशन पर चिपकने वाला भिखारी —
ना पूछो, ना बुलाओ, फिर भी आकर पकड़ेगा।


पाकिस्तान का रोने वाला रिकॉर्ड फिर से बजा

जैसे ही पहल्गाम हमला हुआ और भारत ने गरजना शुरू की, पाकिस्तान predictably:

  • “हम न्यूक्लियर बम फोड़ देंगे!”

  • “हम सिंधु नदी पर युद्ध कर देंगे!”

  • “हम पूरी दुनिया को चिल्ला के बताएंगे!”

(Reality check: कोई सुन नहीं रहा।)

पाकिस्तान एक बार फिर साबित कर रहा है कि जब दिमाग से दिवालिया हो और जेब से भी, तब बस धमकी ही बचती है।


ट्रंप का Mood:

अगर सच में ट्रंप के शब्दों का अनुवाद दिल से करें, तो मतलब निकलेगा:

भाई भारत, तुम खुद देख लो… और पाकिस्तान को भी एक लात मार देना अगर ज्यादा भौंके। हमारे पास और भी जरूरी काम हैं।


सच्चाई:

पाकिस्तान अब ऐसा बन चुका है:

  • बिकाऊ आतंक का सुपरमार्केट

  • भीख का CEO

  • दुनिया भर में जलील होने का ब्रांड एम्बेसडर

  • न्यूक्लियर धमकी देने वाला रोता बच्चा

और भारत? धैर्य से देख रहा है कि कब दुनिया खुद पाकिस्तान को एक ‘दंड पत्रिका’ में डाल दे।

पाकिस्तान का “संप्रभुता की रक्षा” की बात: एक भिखारी के हाथ में तलवार—शहबाज शरीफ की युद्ध की धमकी ?

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में एक नाटकीय अंदाज में मंच पर आकर यह घोषणा की कि उनका देश कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले के बाद अपनी “संप्रभुता की रक्षा” करने के लिए तैयार है। हां, वही पाकिस्तान, जो आतंकवाद फैलाने में अधिक समय बिताता है बजाय कि अपने नागरिकों की सुरक्षा करने के, अब अपनी गैर-मौजूद सैन्य शक्ति को दिखाने की कोशिश कर रहा है। शरीफ ने गर्व से कहा, “हमारी वीर सशस्त्र सेनाएँ देश की संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार हैं।” ये बयान उस देश से आ रहा है, जहाँ आतंकवाद के शिविरों से ज्यादा कुछ नहीं है, और जहां “संप्रभुता” का मतलब बस आतंकवादियों को पनाह देना और उनका समर्थन करना है। यह शहबाज शरीफ का वह मजाक है जब वह दुनिया से यह उम्मीद करते हैं कि वे उसे गंभीरता से लेंगे, जबकि उनके अपने लोग अपने संविधान को समझने के लिए भी तैयार नहीं हैं।

आइए इसे विस्तार से समझते हैं: पाकिस्तान, जिसने बार-बार यह साबित किया है कि उसका सैन्य मुख्य रूप से सीमा पार आतंकवाद फैलाने का काम करता है, अब यह मानने लगा है कि वह एक क्षेत्रीय महाशक्ति है और युद्ध के लिए तैयार है। यह हास्यास्पद है! पाकिस्तान के नेता अपने ही देश के भीतर शिक्षा के घटते स्तर और आतंकवाद के बढ़ते स्तर से बेपरवाह दिखते हैं। क्या हम उन्हें दोषी मानें जब शरीफ अबोटाबाद में सैन्य समारोहों में खड़े होकर संप्रभुता की रक्षा की बात करते हैं, जबकि उनकी सेना आतंकवादी समूहों को ट्रेनिंग देने और उनका समर्थन करने में व्यस्त रहती है। यह वही सेना है, जिसका रिकॉर्ड आतंकवाद से लड़ने में उतना ही खराब है, जितना उसका अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में।

लेकिन यह धोखाधड़ी यहीं खत्म नहीं होती। पाकिस्तान, वही देश जिसने दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकवादियों को जन्म दिया, अब भारत पर “आक्रामकता” का आरोप लगा रहा है। क्या मजाक है! पाकिस्तान का कश्मीर पर दावा कोई वैध शासन पर आधारित नहीं है, बल्कि यह आतंकवाद और विद्रोहियों का समर्थन करने पर आधारित है। यह एक ऐसा देश है जहाँ सैन्य और खुफिया एजेंसियाँ आतंकवादी संगठनों के साथ इतनी गहरे जुड़ी हैं कि राज्य और गैर-राज्य कृत्यों के बीच का अंतर मिट चुका है। अब इन आतंकवादियों को “संप्रभुता की रक्षा” का दावा करने का क्या अधिकार है?

और फिर पाकिस्तान का दुस्साहस—जब भारत प्रतिक्रिया देता है, तो पाकिस्तान चीख-चीख कर शिकायत करता है। यह हंसी की बात है। पाकिस्तान के नेताओं को लगता है कि “संप्रभुता की रक्षा” का मुद्दा इतना अहम है कि उन्होंने पूरी तरह से यह भूल लिया है कि उनकी खुद की पहचान दुनिया में आतंकवाद के केंद्र के रूप में बन चुकी है। पाकिस्तान की “संप्रभुता” एक मजाक बन चुकी है—यह केवल एक बहाना है, ताकि वह दुनिया के खिलाफ अपने युद्ध को जारी रख सके, एक और आतंकवादी हमला करने के लिए।

अब बात करते हैं ब्रिटेन की—जो खुद इस गड़बड़ी में पूरी तरह से डूबा हुआ है। वही ब्रिटेन, जो कभी भारत का उपनिवेश था, अब पाकिस्तान को लेकर अपने किए गए गलती का खमियाजा भुगत रहा है। भारतीय हिंदू, जो पढ़े-लिखे, मेहनती और क़ानून का पालन करने वाले होते हैं, उन्हें ब्रिटेन के इमिग्रेशन सिस्टम द्वारा निरंतर ठुकराया जाता है, जबकि पाकिस्तानियों—जो अक्सर ब्रिटेन में पैडोफाइल और आतंकवादी नेटवर्कों से जुड़े होते हैं—को खुले दिल से स्वागत किया जाता है। क्या कमाल का विरोधाभास है! ब्रिटिश अधिकारी अपनी राजनीतिक शुद्धता और सहिष्णुता की आड़ में, उन लोगों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जो ब्रिटेन में कुछ सबसे घिनौने अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं। ब्रिटेन में जो भयंकर प्रक्षिप्ति गैंगे हुए, वे अधिकांशतः पाकिस्तानी नागरिकों से जुड़े थे। और यूरोप में जो आतंकवाद फैलाया गया, उसका नाम पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है।

ब्रिटेन अपने ऐतिहासिक अपराधों का भुगतान कर रहा है, क्योंकि उसने अपनी गलती के परिणामस्वरूप पाकिस्तान को खोला था। अब पाकिस्तान अपने अपराधियों को वापस ब्रिटेन भेज रहा है, और ब्रिटेन ने इस लापरवाही को होने दिया। यह बेशर्मी की पराकाष्ठा है। पाकिस्तान, जो “संप्रभुता की रक्षा” की बातें करता है, वही पाकिस्तान ब्रिटेन में अपना आतंकवादी निर्यात करने के लिए जिम्मेदार है। ब्रिटिश अधिकारियों ने यह सोचा था कि वे पाकिस्तानी प्रवासियों को स्वीकार करके एक अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन अब वे उसी बुरे कर्म का खामियाजा भुगत रहे हैं।

यह समय है कि दुनिया पाकिस्तान को उसके असली रूप में देखे—एक ऐसा देश जो “संप्रभुता” को आतंकवाद के ढकने के लिए इस्तेमाल करता है, जबकि इसके लोग गरीबी, अज्ञानता और धार्मिक उग्रवाद में फंसे हुए हैं। शहबाज शरीफ चाहे जितना भी युद्ध की धमकी दे, पाकिस्तान एक ऐसा भिखारी है जिसके पास एक तलवार है—कोई असली शक्ति नहीं, कोई असली शासन नहीं, बस एक विफल राज्य जो खुद को कुछ और साबित करने की कोशिश कर रहा है। और ब्रिटेन? वही देश जो कभी भारत पर शासन करता था, अब खुद अपनी गलती का भुगत चुका है, पाकिस्तानियों के हाथों जिनकी उसने कभी मदद की थी। क्या एक सही समय पर आकर खुद को जलाने का कर्म है।

सौरव गांगुली ने कहा: पाकिस्तान के साथ सभी क्रिकेट संबंध तोड़ने चाहिए

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हैदराबाद: पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ अपने सभी क्रिकेटिंग संबंध तोड़ लेने चाहिए, चाहे वह ICC टूर्नामेंट हों या एशियन चैंपियनशिप

गांगुली ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,

“100 प्रतिशत, भारत को यह करना चाहिए। सख्त कार्रवाई की जरूरत है। हर साल भारत में आतंकी घटनाएं हो रही हैं, और यह अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”


पृष्ठभूमि में आतंकी हमला

22 अप्रैल को पहलगाम, कश्मीर में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इस घटना की विश्व स्तर पर निंदा हुई, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया


BCCI की प्रतिक्रिया

बीसीसीआई ने भी इस “निर्मम और कायरतापूर्ण” हमले की निंदा की।
IPL 2025 के मैच 41 (सनराइजर्स हैदराबाद बनाम मुंबई इंडियंस) के दौरान

  • एक मिनट का मौन रखा गया,

  • खिलाड़ी काली पट्टियाँ पहनकर खेले,

  • और मैच में कोई संगीत, आतिशबाज़ी या चियरलीडिंग नहीं हुई।
    यह सब पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया।


गांगुली का सख्त रुख

गांगुली का बयान ऐसे समय आया है जब भारत-पाकिस्तान के संबंधों में फिर से तनाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए भारत को खेलों में भी पाकिस्तान का बहिष्कार करना चाहिए

फिर रो पड़ा पाकिस्तान: “पानी रोकोगे तो खून बहेगा” – बिलावल भुट्टो की धमकी का नाटक

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इस्लामाबाद:
जब भी पाकिस्तान को कोई झटका लगता है, तो उसका फेवरेट प्लान है — रोना, धमकी देना, और खुद को दुनिया का सबसे बड़ा शिकार दिखाना
अब, पहल्गाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर कार्रवाई करने की चेतावनी से, पाकिस्तान का दर्द फिर फूट पड़ा है।
पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने घोषणा कर दी —

या तो पानी बहेगा या खून बहेगा!

वाह भई, toddler जैसे रोने का नया लेवल unlocked!

बिलावल ने सिंधु नदी के किनारे खड़े होकर ये भी याद दिलाया कि “हम मोहनजोदड़ो के वारिस हैं”, भूल गए कि उनके खुद के देश में मोहनजोदड़ो को म्यूज़ियम से भी कम अहमियत दी जाती है। इतिहास में झाँकते-झाँकते बिलावल ये भूल गए कि आज का पाकिस्तान दुनिया में ‘आतंकी पालने’ के लिए बदनाम है, और उसकी हालत एक भीख माँगते मुल्क जैसी है।


भारत की कार्रवाई पर पाकिस्तान का toddler tantrum

भारत ने जैसे ही सिंधु जल संधि को निलंबित किया और कूटनीतिक संबंध घटाए, पाकिस्तान ने तुरंत अपना पुराना ड्रामा शुरू कर दिया:

  • “हम शिमला समझौता तोड़ देंगे!” (भाई, वैसे भी निभा कौन रहा था?)

  • “हम हवाई क्षेत्र बंद कर देंगे!” (वैसे भी कौन वहाँ आना चाहता है?)

  • “पानी रोकना युद्ध का ऐलान होगा!” (पहले खुद पीने लायक पानी तो इकट्ठा करो।)


न्यूक्लियर धमकी का पुराना राग

अब बस एक दो दिन और, और बिलावल साहब या कोई और ‘बाजी’ ये भी कह देंगे:

हमारे पास परमाणु बम है!

मतलब हर बार कोई लड्डू नहीं मिलता तो धमकी दे दो जैसे कोई रोता बच्चा मॉल में चॉकलेट के लिए धमकाता है।
दुनिया देख रही है — भिखारी देश, जेहादी लवर्स, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है पाकिस्तान।


सच्चाई:

आतंकी संगठन TRF (Lashkar-e-Taiba का चहेता प्रॉक्सी) खुद इस हमले की जिम्मेदारी ले चुका है।
पर पाकिस्तान अब भी ‘हम भी आतंकवाद के शिकार हैं’ वाला पुराना कैसेट बजा रहा है।
सच तो ये है कि दुनिया भर में अब कोई भी पाकिस्तान की नौटंकी पर भरोसा नहीं करता।
क्योंकि आतंकवाद पालना और फिर खुद को पीड़ित दिखाना — ये कला सिर्फ पाकिस्तान को ही आती है।

पहलगाम आतंकी हमला: कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका

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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर का खूबसूरत शहर पहलगाम, जो हाल ही तक पर्यटकों से गुलजार था, अब वीरान नजर आ रहा है। मंगलवार को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद पर्यटन उद्योग पूरी तरह से ठप हो गया है।

The Resistance Front (TRF) नामक आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसने घाटी में आतंक की रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं।


पर्यटन में आई तेजी पर लगा ब्रेक

2024 में कश्मीर में 2.3 करोड़ से ज्यादा पर्यटक आए थे, और 2025 की गर्मियों में इससे भी अधिक पर्यटक संख्या की उम्मीद थी। G20 टूरिज्म मीटिंग जैसे आयोजनों के चलते घाटी में पर्यटन को बढ़ावा मिला था, लेकिन यह हमला एक बड़ा झटका साबित हुआ।

“आज सभी होटल बंद हैं, दुकानें बंद हैं और सड़कों पर सन्नाटा है,” – एक स्थानीय होटल व्यवसायी।


डर और पलायन की लहर

घटना के बाद हजारों पर्यटक घाटी छोड़कर लौटने लगे। फ्लाइट टिकट्स की कीमत ₹70,000 तक पहुंच गई। एयरलाइंस और ट्रैवल पोर्टल्स को सरकारी निर्देश पर रद्दीकरण शुल्क माफ करना पड़ा।

“फ्लाइट्स पूरी भरकर जा रही हैं लेकिन खाली लौट रही हैं,” – सतिंदर पाल सिंह, फेडरेशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म के सदस्य।


स्थानीय समुदाय की मानवता

पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर हमले को लेकर शोक जताया। स्थानीय लोगों ने संकट में फ्री आवास और कैंसलेशन फीस माफ करके पर्यटकों की मदद की।

दक्षिण कश्मीर के डोडा जिले में मस्जिदों से एकता और शांति का संदेश दिया गया, और व्यापार मंडलों व राजनेताओं ने हमला रोकने में चूक पर सवाल उठाए।


आर्थिक नुकसान और रोजगार संकट

पर्यटन विशेषज्ञ दीपक चौधरी ने बताया कि घरेलू पर्यटन पर सबसे अधिक असर पड़ा है और 500 से ज्यादा होटलों को लाखों का नुकसान हुआ है। एक होटल ने बताया कि केवल दो दिनों में ₹2 लाख से अधिक की बुकिंग रद्द हुई।

“हम 100 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी से शून्य पर आ गए हैं,” – एक होटल प्रबंधक।


सुरक्षा पर सवाल और राजनीतिक संदेश

पहलगाम, अमरनाथ यात्रा का बेस कैंप भी है, जहाँ कड़ी सुरक्षा रहती है। इसके बावजूद इतना बड़ा हमला सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पर्यटन को सामान्य स्थिति का प्रतीक बनाना केंद्र सरकार की रणनीति है, लेकिन यह हमला उस धारणा को झटका देता है।


क्या पर्यटन फिर से पटरी पर लौट पाएगा?

कम किराए के बावजूद पर्यटक घाटी आने से हिचक रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना लंबे समय तक घाटी की छवि और अर्थव्यवस्था पर असर डालेगी

“अब शायद 5% पर्यटक ही आएंगे, 95% लोग डर के कारण नहीं लौटेंगे,” – एक पर्यटन अधिकारी।

अब हर बूंद को तरसेगा पाकिस्तान” – इंदुस जल संधि समाप्त करने पर चिराग पासवान का बड़ा बयान

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सोनीपत: केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारत अब पाकिस्तान को उसकी ही भाषा में जवाब देगा। यह बात उन्होंने कुंडली स्थित NIFTEM (राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही।

चिराग पासवान ने कहा:

हमने इंदुस जल संधि को समाप्त कर दिया है। पहले हमारी छह नदियों का 80% पानी पाकिस्तान को जाता था। अब पाकिस्तान हर एक बूंद के लिए तरसेगा। हमारे नागरिकों के खून की हर बूंद का हिसाब लिया जाएगा।


आतंकी हमले के बाद भारत की सख्त कार्रवाई

चिराग पासवान ने बताया कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पांच कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें से सबसे अहम था इंदुस जल संधि को खत्म करना। इस कदम ने पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी शहीदों का बदला ले चुका है, और इस बार भी आतंक के सरगनाओं को बख्शा नहीं जाएगा


बिहार पर चिराग का फोकस

बिहार की आगामी विधानसभा चुनावों पर चिराग पासवान ने कहा:

मेरा विज़न है – फर्स्ट बिहारी, फर्स्ट बिहार। मैं राजनीति में बिहार के विकास के लिए आया हूं। मेरा लक्ष्य है कि राज्य में रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की कोई कमी न हो।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है क्योंकि “बिहार में मुख्यमंत्री पद खाली नहीं है।” हालांकि, उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार NDA की सरकार बनेगी


NIFTEM की सराहना और स्टार्टअप्स को बढ़ावा

कार्यक्रम “Sulfam” में चिराग पासवान ने NIFTEM की नवाचार क्षमता और कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के संस्थान खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए बताया कि एक और NIFTEM संस्थान को मंजूरी दी गई है। उन्होंने उपस्थित स्टार्टअप्स की सराहना करते हुए कहा कि युवा उद्यमी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अहम योगदान दे रहे हैं।

पहलगाम हमले के बाद एलजी मनोज सिन्हा ने सेना से कहा – आतंकियों और उनके मददगारों का सफाया करें

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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक पहलगाम के बैसरण घास के मैदान में हुए भीषण आतंकी हमले, जिसमें 26 पर्यटक मारे गए और दर्जनों घायल हुए थे, के बाद बुलाई गई थी।

इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के चार आतंकियों पर बताई जा रही है, जिनके स्केच और वांटेड पोस्टर जारी कर दिए गए हैं। पुलिस ने 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है।

एलजी सिन्हा ने सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, उत्तरी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचिंद्र कुमार, डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, और 15 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल प्रशांत श्रीवास्तव के साथ बैठक में कहा:

जो कोई भी इस कायरतापूर्ण और भयावह हमले में शामिल है, वह कहीं भी छुपा हो – उसे खोजकर सजा दी जाए। आतंकवाद और उसके नेटवर्क को जड़ से खत्म करना होगा।”


सेना की रणनीति और सीमा पर स्थिति

बैठक में आतंक के इकोसिस्टम को नष्ट करने, सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय, और लघु एवं दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीतियों पर चर्चा हुई। सेना प्रमुख ने क्षेत्रीय कमांडरों से मिलकर खोज अभियानों और खुफिया जानकारी की समीक्षा करने की योजना बनाई है।

इस बीच, पाकिस्तान द्वारा नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम उल्लंघन के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की है, लेकिन किसी हताहत की सूचना नहीं मिली है।


भारत की कड़ी चेतावनी

पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से सभी द्विपक्षीय संपर्क तोड़ दिए हैं, और सिंधु जल संधि को भी निलंबित कर दिया गया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है – भारत अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

क्या भारत सिंधु नदी का अतिरिक्त पानी रोक सकता है? Pahalgam आतंकी हमले के बाद संधि को किया गया निलंबित

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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, जिसमें कई नागरिक और पर्यटक मारे गए, भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) 1960 को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया है। इस फैसले की जानकारी पाकिस्तान को औपचारिक पत्र के माध्यम से दे दी गई है।

जल संसाधन विशेषज्ञ हिमांशु ठक्कर का कहना है कि भारत के लिए पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब से भारी मात्रा में पानी रोकना अभी संभव नहीं है क्योंकि अधिकतर पावर प्रोजेक्ट रन-ऑफ-रिवर तकनीक पर आधारित हैं। यह तकनीक जल संग्रहण की बजाय बहते पानी की शक्ति से बिजली उत्पन्न करती है।

उन्होंने बताया कि भारत अभी तक अपना 20% हिस्सा भी पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाया है, लेकिन अब नई संरचनाएं बनाकर या मौजूदा परियोजनाओं को संशोधित करके, भारत पाकिस्तान को सूचित किए बिना अधिक पानी रोक सकता है


भारत ने क्यों रोकी सिंधु जल संधि?

भारत के जल संसाधन सचिव देबाश्री मुखर्जी द्वारा पाकिस्तान के मंत्री सैयद अली मुर्तजा को लिखे पत्र में कहा गया है कि पाकिस्तान ने संधि की शर्तों का उल्लंघन किया है। लगातार सीमा पार आतंकवाद भारत के खिलाफ एक बड़ा खतरा बन चुका है और पाकिस्तान का वार्ता से इनकार भी संधि के उल्लंघन में आता है।


संधि का महत्व और पाकिस्तान की निर्भरता

1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि, दुनिया की सबसे सफल जल-साझेदारी संधियों में से एक मानी जाती है। इसमें भारत को रावी, ब्यास, सतलुज नदियों पर अधिकार मिला जबकि सिंधु, झेलम, चिनाब पाकिस्तान को आवंटित की गईं।

पाकिस्तान की 80% कृषि भूमि सिंधु प्रणाली के पानी पर निर्भर है। लाहौर, कराची, मुल्तान जैसे शहर भी इन्हीं नदियों से जल प्राप्त करते हैं।


क्या भारत कर सकता है जल को हथियार?

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत इस फैसले से दो लाभ ले सकता है:

  1. अपने उपयोग के लिए पानी रोक सकता है – जैसे कृषि, ऊर्जा परियोजनाएं

  2. पाकिस्तान को दबाव में लाने के लिए पानी रोककर बाद में भारी मात्रा में छोड़ सकता है, जिससे वहां बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

हालांकि, फिलहाल भारत के पास इतना बड़ा जल भंडारण ढांचा नहीं है, लेकिन भविष्य में इसके निर्माण की संभावना है।

एनएचपीसी के पूर्व निदेशक यूएस साही ने कहा कि अभी गर्मियों में बर्फ पिघलने से जल स्तर ऊंचा रहेगा, लेकिन मानसून के बाद जल प्रबंधन आसान हो जाएगा।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद ओडिशा में हाई अलर्ट, 12 पाकिस्तानी नागरिकों को राज्य छोड़ने का आदेश

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भुवनेश्वर: पहलगाम आतंकी हमले के तीन दिन बाद, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, ओडिशा राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। शुक्रवार को राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी, डीसीपी और विशेष सुरक्षा इकाइयों को निर्देश दिया कि वे सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करें और किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए चौकसी बढ़ाएं।

पुलिस को पांच अहम बिंदुओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं:

  1. हाई अलर्ट स्थिति

  2. गश्त बढ़ाना

  3. सख्त जांच व्यवस्था

  4. सामुदायिक समन्वय

  5. क्विक रिस्पांस टीम की तैनाती

पर्यटन स्थलों, भीड़-भाड़ वाले इलाकों, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, और बस टर्मिनल्स की सुरक्षा प्राथमिकता के तौर पर तय की गई है। मॉल, अस्पताल, सिनेमा हॉल, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। डीजीपी वाईबी खुरानिया ने कहा कि संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।

गश्त बढ़ा दी गई है, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित होटलों और अज्ञात पर्यटन स्थलों पर। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, और पश्चिम बंगाल की सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। हाईवे और मुख्य सड़कों पर भी चेकिंग और नाके लगाए जा रहे हैं। सीसीटीवी के जरिए वाहन गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

स्थानीय समुदायों और संगठनों से संवाद बढ़ाने और खुफिया जानकारी साझा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई के लिए पुलिस तैयार रहेगी। QRT, काउंटर-टेररिस्ट स्क्वॉड, ब्लैक कमांडो और स्पेशल टैक्टिकल यूनिट्स को अलर्ट पर रखा गया है।

इस बीच, ओडिशा पुलिस ने राज्य के विभिन्न जिलों में रह रहे 12 पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान की है। सुरक्षा नियमों के तहत सभी को 48 घंटे के भीतर भारत छोड़ने का नोटिस दिया गया है।

अतिरिक्त डीजी (कानून और व्यवस्था) संजय कुमार जिला अधिकारियों के संपर्क में हैं और केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी चर्चा जारी है।