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भारत में मानसूनी तबाही: बाढ़ ने साँपों को इंसानी बस्तियों के करीब पहुंचाया

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नई दिल्ली:
जहाँ एक ओर देशभर के किसान इस साल जल्दी आई मानसून की बारिश से खुश हैं, वहीं दूसरी ओर इन भारी बारिशों के कारण साँपों की गतिविधियों में भारी वृद्धि हुई है। बाढ़ के कारण साँपों के बिलों में पानी भर गया है, जिससे वे सूखे स्थानों की तलाश में इंसानी बस्तियों में प्रवेश कर रहे हैं। इससे साँप काटने की घटनाओं में तेज़ इजाफा हुआ है, खासकर दक्षिण और मध्य भारत में।

पिछले पाँच दिनों में उत्तर प्रदेश के आगरा, मैनपुरी और हाथरस ज़िलों में तीन नाबालिग बच्चों की साँप काटने से मौत हो गई जबकि दो वयस्क अस्पताल में भर्ती हैं।

डॉ. तामोरिश कोले, आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ और डीपीयू सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के निदेशक ने कहा:

“साँप काटने की यह खामोश महामारी भारत की एक उपेक्षित लेकिन गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ (2020) के अनुसार, यह हर साल लगभग 58,000 लोगों की जान लेती है, और असली आंकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं।”


🐍 भारत में साँप काटने के आँकड़े:

  • हर साल भारत में 3-4 मिलियन साँप काटने के मामले होते हैं।

  • इनमें से लगभग 50,000 मौतें होती हैं, जो वैश्विक मौतों का लगभग आधा हिस्सा है।

  • CBHI रिपोर्ट (2016-2020) के अनुसार औसतन हर साल भारत में 3 लाख केस और 2000 मौतें दर्ज होती हैं

सबसे प्रभावित राज्य:
बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात

राज्यवार आँकड़े:

  • कर्नाटक: 2023 में 6,596 केस, 19 मौतें → 2024 में 13,235 केस, 100 मौतें

  • तमिलनाडु: 2023 में 19,795 केस, 43 मौतें

  • उत्तर प्रदेश (2019–2024): 3,353 मौतें


🌧️ मानसून और साँप काटने का संबंध:

बाढ़ और जलभराव के कारण साँप सूखे स्थानों की ओर भागते हैं — जैसे कि घर, स्कूल, गोदाम, आदि। मानसून के महीनों (जून-सितंबर) में साँपों और इंसानों के बीच मुठभेड़ अधिक होती है।

रेस्क्यू कॉल्स की संख्या भी बढ़ जाती है — कई बार ज़हरीले और गैर-ज़हरीले दोनों प्रकार के साँप शहरों में देखे जाते हैं।


🌍 जलवायु परिवर्तन का प्रभाव:

डॉ. कोले के अनुसार,

“बढ़ते तापमान और अनियमित बारिश के कारण साँपों की सक्रियता का कालखंड बढ़ रहा है। जंगलों की कटाई, शहरीकरण और खेतों के विस्तार ने साँपों के प्राकृतिक आवास को उजाड़ दिया है। अब वे शहरी क्षेत्रों तक आ गए हैं।”


⚠️ भारत के सबसे ज़हरीले साँप (Big Four):

  1. भारतीय कोबरा (Naja naja) – सांस की मांसपेशियों को पक्षाघात करता है

  2. रसेल्स वाइपर (Daboia russelii) – रक्तस्राव, किडनी फेलियर और शॉक

  3. कॉमन करैत (Bungarus caeruleus) – रात में काटता है, लक्षण देर से आते हैं

  4. सॉ-स्केल्ड वाइपर (Echis carinatus) – तेज़, आक्रामक, अंदरूनी रक्तस्राव करता है

देशभर में इन साँपों की मौजूदगी के कारण पॉलीवैलेंट एंटीवेनम (ASV) का उपयोग किया जाता है।


🛡️ सावधानियाँ:

  • खेतों में काम करते समय जूते पहनें

  • रात में टॉर्च का उपयोग करें

  • ज़मीन पर सोने से बचें

  • घर के आसपास सफाई रखें, झाड़ियाँ काटें

  • खिड़कियों और नालियों में जाली लगवाएं, दीवारों की दरारें बंद करें


🩺 प्राथमिक उपचार (First Aid):

  • रोगी को शांत और स्थिर रखें

  • प्रभावित अंग को स्प्लिंट से स्थिर करें

  • घाव को न काटें, चूसे नहीं, जलाएं नहीं, बर्फ न लगाएं

  • टूर्निकेट का उपयोग न करें – यह घातक हो सकता है

  • तुरंत अस्पताल ले जाएं – देरी जानलेवा हो सकती है


🏥 अस्पताल में उपचार:

  • डॉक्टर मरीज की लक्षणों और टेस्ट रिपोर्ट से तय करते हैं कि ज़हर फैला है या नहीं

  • ASV (एंटीवेनम) को शुरुआती घंटों में देना सबसे प्रभावी

  • रक्त परीक्षण, किडनी फंक्शन, हीमोग्लोबिन आदि की जाँच होती है

  • गंभीर मामलों में वेंटिलेटर, डायलिसिस या ब्लड ट्रांसफ्यूज़न की ज़रूरत पड़ सकती है


🇮🇳 राष्ट्रीय प्राथमिकता:

भारत ने 2030 तक साँप काटने से होने वाली मौतों और विकलांगताओं को आधा करने के उद्देश्य से NAPSE (National Action Plan for Prevention and Control of Snakebite Envenoming) शुरू किया है।

योजना के अंतर्गत:

  • इलाज के मानक बनाए जा रहे हैं

  • एंटीवेनम वितरण बेहतर किया जा रहा है

  • डॉक्टरों को प्रशिक्षण

  • जनजागरूकता अभियानों को बढ़ावा दिया जा रहा

इज़राइल ने ईरान के इस्फ़हान परमाणु स्थल पर दोबारा हमला किया: सैन्य अधिकारी का दावा

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जेरूसलम:
इज़राइल ने शनिवार को पुष्टि की कि उसने ईरान के इस्फ़हान स्थित परमाणु केंद्र पर दूसरी बार हवाई हमला किया है। इस हमले में दो प्रमुख सेंट्रीफ्यूज निर्माण इकाइयों को निशाना बनाया गया। इज़राइली सैन्य अधिकारी के अनुसार, यह हमला 13 जून को शुरू हुए संघर्ष के बाद किया गया दूसरा बड़ा हमला था।

एक सैन्य ब्रीफिंग में नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने कहा:

“हमने इस्फ़हान को पहले 24 घंटों में ही निशाना बनाया था, लेकिन अब एक और लहर के तहत हमला किया गया है जिससे हमारी उपलब्धियां और गहरी हुई हैं और वहां के परमाणु ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है।”

⚙️ सेंट्रीफ्यूज का महत्व:

सेंट्रीफ्यूज का उपयोग यूरेनियम को समृद्ध करने के लिए किया जाता है – चाहे वो नागरिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन हो या सैन्य परमाणु हथियार
इज़राइली अधिकारी ने बताया कि उन्होंने हाल के दिनों में इस्फ़हान और अन्य स्थानों पर कई सेंट्रीफ्यूज उत्पादन केंद्रों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है।

📍 इस्फ़हान का परमाणु महत्व:

  • इस्फ़हान ईरान के केंद्रीय क्षेत्र में स्थित है और यहां यूरेनियम कन्वर्ज़न फैसलिटी मौजूद है, जो कच्चे यूरेनियम को प्रोसेस करती है।

  • यहां 2009 में शुरू हुई नाभिकीय ईंधन निर्माण इकाई भी है, जो कम-समृद्ध ईंधन का उत्पादन करती है जिसका उपयोग पावर प्लांट्स में होता है।

  • जुलाई 2022 में, ईरान ने इस स्थान पर नया अनुसंधान रिएक्टर बनाने की योजना की घोषणा की थी।

🔥 पहले दिन के हमलों का विवरण:

13 जून को जब इज़राइल ने पहली बार ईरान पर हवाई हमले किए, तब उसने इस्फ़हान में

  • धात्विक यूरेनियम निर्माण संयंत्र,

  • समृद्ध यूरेनियम को पुनः रूपांतरित करने वाली संरचना,

  • प्रयोगशालाएं और अन्य महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाया था।

☢️ ईरान की प्रतिक्रिया:

ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने दावा किया कि इस्फ़हान में कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ है और रेडिएशन को लेकर कोई चिंता की आवश्यकता नहीं है।

🏗️ अन्य लक्ष्य:

इज़राइल ने इस्फ़हान के अलावा ईरान के दो प्रमुख भूमिगत परमाणु केंद्रों

  1. नतांज़ (Natanz) और

  2. फोर्दो (Fordo)
    को भी निशाना बनाया है।

इज़राइल ने ईरान के तीन सैन्य कमांडरों को मार गिराया, परमाणु योजना दो साल पीछे धकेलने का दावा

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जेरूसलम:
इज़राइल ने शनिवार को दावा किया कि उसने ईरान में अपने अभूतपूर्व हवाई हमलों के दौरान ईरान के तीन शीर्ष सैन्य कमांडरों को मार गिराया है। इनमें क़ोम शहर में स्थित हमास के साथ समन्वय करने वाले वरिष्ठ अधिकारी सईद इज़ादी भी शामिल हैं।

इज़राइली वायुसेना ने कहा कि उसने ईरान के नाभिकीय और सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले किए हैं, जिससे तेहरान की परमाणु बम बनाने की योजना को दो से तीन साल तक टाल दिया गया है।

विदेश मंत्री गिदेओन सार ने जर्मन अखबार Bild को दिए एक साक्षात्कार में कहा:

“हम हर संभव प्रयास करेंगे ताकि इस खतरे को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।”

🔥 हमले की शुरुआत और प्रतिक्रिया:

  • 13 जून को इज़राइल ने ईरान पर अपने हवाई हमले शुरू किए, यह आशंका जताते हुए कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित करने के बेहद करीब है – जिसे ईरान खारिज करता रहा है।

  • इस्फ़हान स्थित परमाणु केंद्र और मिसाइल भंडारण एवं प्रक्षेपण स्थलों को बार-बार निशाना बनाया गया।

🇺🇸 अमेरिकी प्रतिक्रिया:

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान के पास अमेरिकी हवाई हमलों से बचने के लिए अधिकतम दो सप्ताह हैं। उन्होंने कहा:

“अगर कोई जीत रहा है, तो उसे रोकना थोड़ा मुश्किल होता है।”

🤝 यूरोपीय मध्यस्थता विफल:

  • ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के विदेश मंत्रियों ने जिनेवा में ईरानी मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया।

  • लेकिन अराघची ने NBC न्यूज़ से कहा:

“जब तक हम पर हमले जारी रहेंगे, हम अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेंगे।”

💥 हमलों की स्थिति:

  • ईरान के अनुसार: इज़राइली हमलों में कम से कम 350 लोग मारे गए, जिनमें सैन्य अधिकारी, परमाणु वैज्ञानिक और नागरिक शामिल हैं।

  • NGO रिपोर्ट: 657 लोगों की मौत, जिनमें 263 नागरिक भी हैं।

  • इज़राइल के अनुसार: ईरान के जवाबी हमलों में अब तक 25 लोगों की मौत, 450 से अधिक मिसाइलें और 400 ड्रोन दागे जा चुके हैं।

  • हाइफ़ा के अस्पताल ने 19 घायल दर्ज किए हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर है।

⚠️ परमाणु कार्यक्रम और वैश्विक चिंता:

  • IAEA के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने कहा कि ईरान बिना परमाणु हथियार वाला एकमात्र देश है जो 60% तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा है।

  • हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने के लिए सभी जरूरी तत्व नहीं हैं।

🌍 कूटनीतिक हलचल:

  • ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने कहा:

“यह संघर्ष एक बेहद ख़तरनाक मोड़ पर है। हमें क्षेत्रीय युद्ध टालना बेहद ज़रूरी है।”

  • अराघची शनिवार को इस्तांबुल पहुंचे, जहां इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में ईरान-इज़राइल संघर्ष पर चर्चा होनी है।

अहमदाबाद विमान हादसा: डीएनए मिलान और स्कूटर मिलने के बाद लापता गुजराती फिल्म निर्देशक की मौत की पुष्टि

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अहमदाबाद:
12 जून को अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे के बाद से लापता गुजराती फिल्म निर्देशक महेश जिरावाला के मौत की पुष्टि आखिरकार हो गई है। पुलिस ने डीएनए जांच और जली हुई स्कूटर की बरामदगी के आधार पर यह पुष्टि की।

शनिवार को पुलिस को क्रैश साइट के पास जली हुई एक्टिवा स्कूटर मिली, जिसकी पहचान महेश की स्कूटर के रूप में की गई। इसके बाद परिजनों को सूचना दी गई।

34 वर्षीय निर्देशक महेश गिरधरभाई कलावड़िया, 12 जून को अहमदाबाद के नरोड़ा इलाके से अपनी स्कूटर लेकर निकले थे, लेकिन फिर कभी घर नहीं लौटे। उस दिन एयर इंडिया की लंदन जाने वाली फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद के मेघाणीनगर इलाके में मेडिकल कॉम्प्लेक्स पर गिर गई थी, जिसमें 242 में से 241 यात्री और 33 से अधिक ज़मीन पर मौजूद लोग मारे गए थे।

महेश के लापता होने की शिकायत नरोड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई गई थी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और परिजनों से डीएनए नमूने भी लिए।

हालाँकि महेश के भाई कार्तिक कलावड़िया के डीएनए का एक शव से मिलान हो गया था, लेकिन परिवार यह मानने को तैयार नहीं था कि महेश की मौत हो चुकी है।

लेकिन जब PSI चावड़ा (मेघाणीनगर पुलिस स्टेशन) ने IGP कंपाउंड में विमान दुर्घटना स्थल के पास महेश की जली हुई स्कूटर बरामद की, तो परिवार को यकीन हो गया कि महेश अब इस दुनिया में नहीं हैं।

PSI चावड़ा ने कहा:

“जब परिवार ने स्कूटर देखी, तभी वे मान पाए कि महेशभाई की मौत हो चुकी है। इसके बाद ही उन्होंने शव लेने की सहमति दी। हमने उनके अवशेष परिवार को सौंप दिए हैं।”


✈️ विमान हादसे की जानकारी:

  • फ्लाइट संख्या: AI-171

  • एयरलाइन: एयर इंडिया

  • गंतव्य: लंदन

  • हादसे की तारीख: 12 जून, 2025

  • स्थान: मेघाणीनगर, अहमदाबाद

  • मृतकों की संख्या:

    • विमान में: 241

    • ज़मीन पर: 33+

    • जीवित बचे: केवल 1 व्यक्ति

इज़राइल ने ईरान-हामास समन्वयक सईद इजादी को मार गिराया: इज़राइली सेना का दावा

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जेरूसलम:
इज़राइली सेना ने शनिवार को दावा किया कि उसने एक शीर्ष ईरानी कमांडर सईद इजादी को ईरान के क़ुम शहर के पास एयरस्ट्राइक में मार गिराया है। इजादी, ईरान की कुद्स फोर्स में फ़िलिस्तीन कॉर्प्स का कमांडर था और हामास के साथ सैन्य समन्वय का प्रमुख ज़िम्मेदार माना जाता था।

इज़राइल डिफेंस फोर्स (IDF) के अनुसार:

“लड़ाकू विमानों ने क़ुम क्षेत्र में कुद्स फोर्स के फ़िलिस्तीन कॉर्प्स के कमांडर और ईरान तथा हामास के बीच सैन्य समन्वयक सईद इजादी को निशाना बनाकर मार गिराया।”

कुद्स फोर्स ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की विदेशी अभियानों की शाखा है।

इज़राइली अधिकारियों का दावा है कि:

  • इजादी, हामास को लेबनान से संचालित करने और गाज़ा में उसकी सैन्य शाखा को पुनः संगठित करने में अहम भूमिका निभा रहा था।

  • बेहनाम शाह्रियारी, जो कुद्स फोर्स की यूनिट 190 के प्रमुख थे, और

  • अमीनपुर जुदाकी, IRGC की ड्रोन यूनिट के प्रभारी, को भी इज़राइली हमलों में मार दिया गया है।

एक अधिकारी ने कहा:

“जो भूमिका इजादी की हामास के लिए थी, वही भूमिका शाह्रियारी की हिज़्बुल्ला के लिए थी। वह इन आतंकी संगठनों को धन भेजने का काम करते थे।”

जुदाकी को इज़राइल पर किए गए सैकड़ों ड्रोन हमलों का प्रमुख अभियंता बताया गया है।

इज़राइल और ईरान के बीच यह संघर्ष 13 जून से शुरू हुआ, जब इज़राइल ने ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया, यह कहते हुए कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब है

इज़राइल द्वारा की गई इस आक्रामक कार्रवाई में:

  • ईरान के वायु रक्षा तंत्र को नष्ट किया गया,

  • परमाणु स्थलों पर हमले किए गए,

  • और ईरानी सैन्य अधिकारियों की लक्षित हत्या की गई।

अब तक की जानकारी के अनुसार:

  • ईरान में 224 लोगों की मौत हुई है (जिसमें सैन्य अधिकारी, परमाणु वैज्ञानिक और नागरिक शामिल हैं)।

  • इज़राइल में 25 लोगों की मौत ईरानी मिसाइल हमलों में हुई है।

ओडिशा में डायरिया और संदिग्ध हैजा का कहर: 11 की मौत, 400 से अधिक बीमार

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भुवनेश्वर:
ओडिशा में डायरिया और संदिग्ध हैजा (Cholera) के प्रकोप ने अब तक 11 लोगों की जान ले ली है और 400 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं। राज्य सरकार ने इसको लेकर कड़ी रोकथाम और जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 17 जून तक 429 लोग डायरिया से संक्रमित हुए हैं। इनमें से 284 मरीज ठीक होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं, जबकि बाकी का इलाज जारी है। संक्रमित जिलों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • कटक: 145 मरीज

  • भद्रक: 73 मरीज

  • धेनकनाल: 65 मरीज

  • केओंझार: 82 मरीज

  • जाजपुर: 64 मरीज


🛑 राज्य सरकार की कार्रवाई

राज्य के मुख्य सचिव मनोज आहूजा ने मंगलवार को स्थिति की समीक्षा की और सभी प्रभावित जिलों में जागरूकता कार्यक्रम को बढ़ानेजल स्रोतों की नियमित सफाई के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा:

“मानसून के दौरान जलजनित बीमारियों की संभावना अधिक रहती है, इसलिए जल स्रोतों की नियमित शुद्धिकरण और समुदाय में जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है।”

जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे फील्ड स्तर पर स्थिति का आकलन करें और आवश्यक कदम उठाएं।


💬 स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आयुक्त सचिव अश्वती एस. ने बताया:

“सरकारी और निजी कुओं की नियमित सफाई की जा रही है। मरीजों की संख्या में गिरावट आई है और नए मरीजों में लक्षण हल्के हैं। यह जागरूकता अभियान का सकारात्मक असर है कि लोग प्रारंभिक चरण में ही अस्पताल पहुंच रहे हैं।”

उन्होंने बताया कि:

  • राज्य स्तरीय समिति रोज़ स्थिति की समीक्षा कर रही है

  • 24 घंटे नियंत्रण कक्ष सभी प्रभावित जिलों में सक्रिय हैं

ईरान के विदेश मंत्री बोले: इज़राइल का हमला अमेरिका के साथ कूटनीति के साथ ‘विश्वासघात’ है

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जिनेवा:
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों को “कूटनीति के साथ विश्वासघात” बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक शांतिपूर्ण समझौते की ओर बातचीत चल रही थी।

अराघची, जो हमलों की शुरुआत के बाद पहली बार विदेश दौरे पर हैं, ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) को संबोधित करते हुए कहा,

“हम एक महत्वपूर्ण राजनयिक प्रक्रिया के बीच में थे, जब हम पर हमला किया गया। यह इज़राइल द्वारा एक निंदनीय आक्रामकता है।”

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि 15 जून को ओमान में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ के साथ एक बैठक तय थी, लेकिन इज़राइली हमलों के कारण इसे रद्द करना पड़ा।

“हम अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ एक उम्मीद भरा शांतिपूर्ण समझौता करने वाले थे, जो हमारे शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर उठे झूठे सवालों का हल होता। लेकिन इज़राइल का हमला कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून पर बड़ा आघात है।”


💣 इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति:

  • इज़राइल ने कहा कि उसका अभियान ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए है, जबकि ईरान ने इस आरोप को खारिज किया है।

  • ईरान का कहना है कि हमले में अब तक 224 लोग मारे गए, जिनमें सैन्य कमांडर, परमाणु वैज्ञानिक और आम नागरिक शामिल हैं।

  • जवाबी ईरानी हमलों में इज़राइल में 24 लोगों की मौत और सैकड़ों घायल हुए हैं।

अराघची ने कहा,

“यह एक अन्यायपूर्ण युद्ध है जो मेरे देशवासियों पर थोप दिया गया है। इसके तहत परमाणु संयंत्रों पर हमले किए जा रहे हैं, जिससे विकिरण (radiation) का खतरा बढ़ गया है। ये हमले गंभीर युद्ध अपराध हैं।”

उन्होंने वैश्विक समुदाय से आग्रह किया:

“ईरान यह उम्मीद करता है कि आप सभी न्याय और कानून के शासन के पक्ष में खड़े होंगे।”

30 साल पहले ₹500 की रिश्वत लेने वाले सेवानिवृत्त ग्राम लेखपाल को 1 साल की सजा: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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बेंगलुरु:
करीब तीन दशक पहले ₹500 की रिश्वत लेने के आरोप में अब 70 वर्षीय सेवानिवृत्त ग्राम लेखपाल नगेनश डोंडु शिवांगेकर को एक साल की कठोर कैद की सजा सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई है। उन्हें अब बेलगावी के हिंडलगा केंद्रीय जेल में भेज दिया गया है।

यह मामला साल 1995 का है जब बेलगावी जिले के कडोली गांव के किसान लक्ष्मण रुक्कन्ना कटांबले से नगेनश ने उनकी कृषि भूमि के RTC (Record of Rights, Tenancy and Crops) दस्तावेज़ जारी करने के लिए ₹500 की रिश्वत मांगी थी।

लक्ष्मण ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत दी और नगेनश को रंगे हाथों पकड़वाया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।


⚖️ न्यायिक प्रक्रिया:

  • 2006: विशेष अदालत ने नगेनश को दोषी करार दिया और 1 साल की सजा व ₹1,000 जुर्माना लगाया।

  • 2012: कर्नाटक हाईकोर्ट के धारवाड़ सर्किट बेंच ने उन्हें बरी कर दिया।

  • 2025: लोकायुक्त पुलिस की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटा और असली दोष सिद्ध करते हुए सजा बहाल कर दी।


👤 अब लक्ष्मण जीवित नहीं हैं

इस फैसले का इंतज़ार कर रहे किसान लक्ष्मण का 5 साल पहले निधन हो चुका है।
कडोली गांव के लोग उन्हें उनके सामाजिक कार्यों के लिए याद करते हैं, जैसे चेन्नई बाढ़ राहत के लिए ₹5,000 का दान और मेधावी छात्रों को पुरस्कार देना।

लक्ष्मण के मित्र और किसान नेता अप्पासाहेब देसाई ने कहा,

“भले ही देर हुई हो, लेकिन न्याय मिला है। यह फैसला आम जनता के न्याय व्यवस्था में विश्वास को मज़बूत करेगा।

दिल्ली में फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़, 5 गिरफ्तार: 228 मार्कशीट, 27 डिग्री और हजारों फर्जी दस्तावेज बरामद

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नई दिल्ली:
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एक बड़े फर्जी डिग्री सर्टिफिकेट रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस सिलसिले में पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के फर्जी मार्कशीट, डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनाकर छात्रों को बेचते थे।

स्पेशल कमिश्नर (अपराध शाखा) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से दिल्ली और एनसीआर के कोचिंग सेंटरों और एजुकेशन कंसल्टेंसी के जरिए काम कर रहा था। गिरोह के सदस्य छात्रों से भारी रकम लेकर पुरानी तारीखों वाली डिग्रियां और सर्टिफिकेट उपलब्ध कराते थे।


🧾 बरामद सामान:

  • 228 फर्जी मार्कशीट

  • 27 फर्जी डिग्री सर्टिफिकेट

  • 20 फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट

  • 20 मोबाइल फोन और 6 लैपटॉप

जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में 5,000 से अधिक फर्जी डिग्री और दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी मिली, जिनमें BA, BSc, BCom, BTech, BEd, MBA और MA जैसी डिग्रियां शामिल हैं।


👤 मुख्य आरोपी:

गिरफ्तार मुख्य आरोपी विक्की हरजानी है, जो “परमहंस विद्यापीठ” नामक संस्था का मालिक है और NSP (नेताजी सुभाष प्लेस) और रोहिणी में इसका संचालन करता है।
उनके वाहन और दफ्तर से 75 फर्जी डिग्री सर्टिफिकेट बरामद हुए, जिन पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, सिक्किम, मेघालय और तमिलनाडु के विश्वविद्यालयों के नाम थे।

अन्य गिरफ्तार आरोपी:

  • विवेक गुप्ता (नोएडा में 6–7 शिक्षण संस्थानों का संचालन करता है)

  • सतबीर सिंह

  • नारायण जी

  • अवनीश कंसल


🧠 मोডस ऑपरेंडी (कार्यप्रणाली):

  1. कोचिंग सेंटर और टेली-कॉलर्स के ज़रिए छात्रों से संपर्क किया जाता था।

  2. छात्रों की शैक्षिक और व्यक्तिगत जानकारी ली जाती थी।

  3. ये जानकारी फर्जी दस्तावेज बनाने वाले सदस्यों को भेज दी जाती थी।

  4. फर्जी दस्तावेज इस तरह बनाए जाते थे कि वे असली विश्वविद्यालय के प्रमाणपत्रों जैसे दिखें

  5. आरोपी फर्जी नामों और पहचान का इस्तेमाल करते थे, ताकि कानून की पकड़ में न आएं।

  6. रैकेट के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया और छात्रों के इलाकों में पंपलेट्स बांटे जाते थे।


🏫 छात्रों को टारगेट किया जाता था

वे छात्र जिन्हें डिग्री की ज़रूरत थी लेकिन पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए थे, या शॉर्टकट की तलाश में थे, उन्हें ये लोग निशाना बनाते थे।

पुलिस को शक है कि कुछ विश्वविद्यालय कर्मचारियों की मिलीभगत भी हो सकती है, जिन्होंने फॉर्मेट्स या गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराई हो। मामले की जांच जारी है।

“महाप्रभु जगन्नाथ का बुलावा आया”: पीएम मोदी ने ट्रंप का निमंत्रण विनम्रता से ठुकराया

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भुवनेश्वर (ओडिशा):
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का निमंत्रण यह कहकर विनम्रता से ठुकरा दिया कि उन्हें महाप्रभु जगन्नाथ की धरती पर आना है।

जनता मैदान, भुवनेश्वर में आयोजित एक कार्यक्रम में, जो ओडिशा में बीजेपी सरकार के एक वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, पीएम मोदी ने साझा किया कि “महाप्रभु जगन्नाथ की पुकार” उनके लिए सबसे अहम थी।

“सिर्फ दो दिन पहले मैं G7 सम्मेलन के लिए कनाडा में था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुझे फोन किया और कहा — ‘आप कनाडा में हैं, तो वॉशिंगटन भी आ जाइए। साथ में भोजन करते हैं और बातचीत होती है।’ उन्होंने बहुत सम्मान से आमंत्रण दिया।
मैंने राष्ट्रपति का धन्यवाद करते हुए कहा — ‘मेरे लिए महाप्रभु जगन्नाथ की धरती पर आना अधिक आवश्यक है।’
और इस तरह, मैंने उनका निमंत्रण विनम्रता से अस्वीकार कर दिया।”

यह बात सुनकर लाखों लोगों की भीड़ में उत्साह और जयघोष गूंज उठा।


🏛️ एक साल की उपलब्धियों का उल्लेख:

पीएम मोदी ने कहा कि आज (20 जून) का दिन बेहद खास है, क्योंकि ओडिशा में बीजेपी सरकार को एक साल पूरा हो चुका है।

“यह सिर्फ सरकार की सालगिरह नहीं, बल्कि सुशासन की स्थापना की सालगिरह है। यह एक वर्ष जन सेवा और जन विश्वास को समर्पित है। मैं ओडिशा की जनता, मुख्यमंत्री मोहन माझी और उनकी पूरी टीम को हार्दिक बधाई देता हूं।”


🛕 जगन्नाथ मंदिर से जुड़े निर्णयों पर फोकस:

प्रधानमंत्री ने रथ यात्रा की तैयारियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि

“महाप्रभु जगन्नाथ हमारी आस्था और प्रेरणा हैं। नई सरकार बनते ही पुरी श्रीमंदिर के चारों द्वार खोले गए, और रत्न भंडार भी खोला गया।
यह कोई राजनीतिक जीत या हार का विषय नहीं है — यह करोड़ों भक्तों की आस्था का सम्मान है।”


🏥 स्वास्थ्य योजनाओं का विस्तार:

पीएम मोदी ने कहा कि ओडिशा में अब आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और गोपालबंदु जन आरोग्य योजना लागू हो चुकी हैं।

“अब लगभग 3 करोड़ लोग ओडिशा में मुफ्त इलाज का लाभ ले सकेंगे, जो पहले की सरकारों में संभव नहीं हो पाया था।”


🧑‍🌾 आदिवासी विकास पर फोकस:

उन्होंने कहा कि

“बीते वर्षों में कांग्रेस और बीजेडी सरकारों ने आदिवासियों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया।
2014 से पहले 125 से अधिक आदिवासी ज़िले नक्सलवाद की चपेट में थे। हमने उन्हें विकास के रास्ते पर लाने का कार्य किया है।”

अब, नक्सल हिंसा सिर्फ 20 जिलों तक सिमट गई है, और उन्होंने कहा —

“नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करना मोदी की गारंटी है।”

रामकेवल: निज़ामपुर का पहला मैट्रिक पास छात्र — जो कहानी आप जानते हैं, जो संघर्ष आप नहीं जानते

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बाराबंकी (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश का बाराबंकी जिला, जो कभी अफीम की खेती के लिए जाना जाता था, आज 15 वर्षीय रामकेवल के कारण चर्चा में है। उसने यूपी बोर्ड की कक्षा 10वीं की परीक्षा पास करके इतिहास रच दिया। यह इसलिए खास है क्योंकि निज़ामपुर गांव के 78 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी ने मैट्रिक की परीक्षा पास की हो।

रामकेवल ने भले ही सिर्फ 53 प्रतिशत अंक हासिल किए हों, लेकिन इन सेकंड डिवीजन नंबरों के पीछे की कहानी हर किसी की आंखें नम कर देती है।


🌾 गरीबी में जन्मा हौसला:

निज़ामपुर, बाराबंकी से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित एक पिछड़ा गांव है, जिसमें सिर्फ 25 दलित परिवार रहते हैं, जो दिहाड़ी मजदूरी करके गुजारा करते हैं।

रामकेवल के पिता जगदीश रावत दिहाड़ी मजदूर हैं, और मां पुष्पा देवी एक सरकारी स्कूल में रसोइया का काम करती हैं। परिवार में दो छोटे भाई, एक छोटी बहन और एक बड़ी बहन (जो शादीशुदा हैं) हैं।

शैक्षणिक खर्च उठाने के लिए रामकेवल खुद भी शादी-समारोहों में लाइट उठाने और मजदूरी का काम करता था। वह दिन भर काम करने के बाद भी रोज़ 1–2 घंटे पढ़ाई करता, और जो नहीं समझ आता, उसे अगले दिन स्कूल में अपने अध्यापकों से पूछता।


🏫 बिना जूते पैदल स्कूल:

रामकेवल ने गांव के प्राइमरी स्कूल में कक्षा 5 तक पढ़ाई की, फिर पास के गांव में 6वीं से 8वीं कक्षा पूरी की। 9वीं में अहमदपुर गवर्नमेंट इंटर कॉलेज में दाखिला लिया, जो उनके घर से सिर्फ 500 मीटर दूर था, लेकिन पैसे न होने के कारण वह रोज़ नंगे पांव स्कूल जाता

बिजली का कनेक्शन नहीं होने के कारण वह सरकार द्वारा लगाए गए सोलर स्ट्रीटलाइट के नीचे पढ़ाई करता था। खाने और कपड़ों का इंतजाम भी मुश्किल होता था।


👞 पहली बार जूते पहने:

जब परीक्षा परिणाम आया और रामकेवल पास हुआ, तो जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने उन्हें सम्मान समारोह में बुलाया। उनके स्कूल प्रिंसिपल वीके गुप्ता ने उन्हें पहली बार शर्ट, पैंट और जूते दिलवाए। उन्होंने कहा —

“ये मेरे जीवन का सबसे यादगार पल था, जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा।”


💸 खुद कमाकर पढ़ाई की:

शादी-समारोह में लाइट उठाने का काम कर वह प्रत्येक बार 200–300 रुपये कमाता था, जिससे उसने ₹2100 की स्कूल फीस, किताबें और कॉपियां खरीदीं, और जो बचा, वह घर में दे देता।

उनके पिता कभी स्कूल नहीं गए, और मां सिर्फ कक्षा 5 तक पढ़ी थीं।

“घर में कोई पढ़ा-लिखा नहीं था, इसलिए शुरुआत में पढ़ाई बहुत मुश्किल लगी।”


🥇 उद्देश्य बना UPSC पास करना:

जब उन्होंने जाना कि गांव में कोई कभी 10वीं पास नहीं हुआ, तो उन्होंने इसे मिशन बना लिया। कुछ लोगों ने मजाक उड़ाया, कहा,

“पढ़ाई कर के क्या करेगा?”
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

अब उनका सपना है कि इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करके IAS अधिकारी बनें, ताकि अपने गांव और समाज के विकास में योगदान दे सकें।


🔦 नई पीढ़ी को नई रोशनी:

रामकेवल से पहले, निज़ामपुर में सबसे अधिक पढ़ाई किसी ने 8वीं तक की थी। गांव में लगभग 150 लोग हैं, लेकिन ज़्यादातर अनपढ़ हैं। वहां एक प्राइमरी स्कूल है, पर आर्थिक मजबूरियों के कारण ज़्यादातर लोग पढ़ाई अधूरी छोड़ देते हैं।

लेकिन रामकेवल की सफलता ने गांव में उम्मीद की नई किरण जगाई है — अब शिक्षा एक सपना नहीं, हकीकत बनती दिख रही है।

ईरान-इज़राइल संघर्ष: भारत ने शुरू किया ‘ऑपरेशन सिंधु’, पहले चरण में 110 भारतीय छात्रों की वतन वापसी

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नई दिल्ली:
ईरान और इज़राइल के बीच छठे दिन भी जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार ने बुधवार को ‘ऑपरेशन सिंधु’ की शुरुआत की, ताकि ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वतन वापस लाया जा सके। इस युद्ध में अब तक 600 से अधिक लोगों की मौत और हजार से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि पहली उड़ान, जिसमें 110 भारतीय छात्र शामिल हैं, 18 जून की शाम येरवान (आर्मेनिया) से रवाना हुई और 19 जून की तड़के 2 बजे नई दिल्ली पहुंचने की संभावना है।


✈️ ऑपरेशन सिंधु की शुरुआत:

भारत सरकार ने ईरान में बिगड़ते हालात को देखते हुए कई दिनों से तैयारियां शुरू कर दी थीं। भारत की तेहरान स्थित दूतावास और आर्मेनिया में मिशन की निगरानी में, 110 छात्रों को ईरान के उत्तरी हिस्से से सड़क मार्ग द्वारा आर्मेनिया की राजधानी येरवान पहुंचाया गया।

विदेश मंत्रालय ने कहा:

“भारत सरकार ईरान और आर्मेनिया की सरकारों की मदद के लिए आभारी है। हम विदेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।”


🧳 बचाव कार्य की आगे की योजना:

सरकार ने कहा कि भारत दूतावास, तेहरान में मौजूद भारतीयों को लगातार कम खतरे वाले क्षेत्रों में स्थानांतरित कर रहा है और उपलब्ध साधनों के माध्यम से उन्हें वापस लाने का प्रयास कर रहा है।

ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को भारत सरकार द्वारा जारी आपातकालीन हेल्पलाइन से संपर्क में रहने की सलाह दी गई है।


📞 आपातकालीन संपर्क विवरण:

तेहरान में भारतीय दूतावास:

  • कॉल के लिए: +98 9128109115, +98 9128109109

  • व्हाट्सऐप: +98 901044557, +98 9015993320, +91 8086871709

  • बंदर अब्बास: +98 9177699036

  • ज़ाहेदान: +98 9396356649

  • ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in

विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली (24×7 नियंत्रण कक्ष):

  • टोल फ्री: 800118797

  • कॉल: +91-11-23012113, +91-11-23014104, +91-11-23017905

  • व्हाट्सऐप: +91-9968291988

  • ईमेल: situationroom@mea.gov.in


💥 तेहरान पर इज़राइली हमले जारी:

तेहरान पर इज़राइल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ के तहत कई हमले किए हैं, जिनका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को खत्म करना है। तेहरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है और युद्ध के और फैलने की आशंका जताई जा रही है।


👨‍🎓 कश्मीरी छात्रों की सुरक्षित वापसी:

जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने जानकारी दी कि उर्मिया मेडिकल यूनिवर्सिटी से 110 छात्रों को सुरक्षित आर्मेनिया पहुंचाया गया, जिनमें 90 छात्र कश्मीर घाटी से हैं।

“सभी छात्रों की वापसी के टिकट सरकार द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराए गए हैं और दिल्ली से श्रीनगर तक की यात्रा का प्रबंध भी किया जा रहा है।” — जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन

कर्नाटक सरकार के सख्त रुख के चलते बेंगलुरु में बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक, फैसला अब हाईकोर्ट के आदेश पर निर्भर

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बेंगलुरु:
बेंगलुरु में 17 जून (सोमवार) से बाइक टैक्सी सेवाएं बंद हैं और फिलहाल उनके फिर से शुरू होने की संभावना कम दिख रही है, क्योंकि कर्नाटक सरकार ने इन सेवाओं पर प्रतिबंध के फैसले को लेकर सख्त रुख अपनाया है

कर्नाटक के परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बताया कि बाइक और स्कूटर व्यक्तिगत उपयोग के लिए हैं, और उन्हें यातायात सेवाओं के रूप में इस्तेमाल करना अवैध है, क्योंकि यह वाहन पंजीकरण नियमों का उल्लंघन है। साथ ही, इससे ऑटो चालकों की आजीविका पर असर पड़ता है।

“बाइक और स्कूटर किसके लिए होते हैं? व्यक्तिगत उपयोग के लिए, है ना? बेंगलुरु में 1.7 लाख से अधिक ऑटो रिक्शा और 6,500 सार्वजनिक परिवहन बसें हैं। अगर बाइक टैक्सी को अनुमति मिलती है तो इसका सीधा असर इन वैध लाइसेंसधारी ऑटो चालकों पर पड़ेगा।” — रामलिंगा रेड्डी


⚖️ हाईकोर्ट में मामला और कानूनी स्थिति:

कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति श्रीनिवास हरिश कुमार) ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जब तक राज्य सरकार मोटर व्हीकल अधिनियम की धारा 93 के तहत दिशा-निर्देश जारी नहीं करती, बाइक टैक्सी सेवाएं वैध नहीं मानी जा सकतीं

सिंगल बेंच ने 2 अप्रैल 2025 को आदेश देते हुए 6 हफ्तों की मोहलत दी थी, जिसे 15 जून तक बढ़ा दिया गया था।

बाइक टैक्सी कंपनियों — उबर इंडिया, ओला (ANI टेक्नोलॉजीज), और रैपिडो (Roppen) — ने 2024 में कोर्ट से मोटरसाइकिलों को परिवहन वाहनों के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति मांगी थी। अगली सुनवाई 24 जून 2025 को होगी।


🚨 ‘पार्सल सेवा’ के बहाने और पुलिस की सख्ती:

कुछ कंपनियों ने प्रतिबंध को दरकिनार करने के लिए ‘बाइक पार्सल’ और ‘कोरियर सेवा’ के नाम पर सवारी ले जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 130 से अधिक बाइक जब्त कर लीं।


📢 नम्मा बाइक टैक्सी एसोसिएशन की गुहार:

नम्मा बाइक टैक्सी एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

“बेंगलुरु में 25,000 से अधिक परिवारों की आजीविका बाइक टैक्सी पर निर्भर है। यह सेवा विद्यार्थियों, बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए आय का जरिया है। इस पर प्रतिबंध उनके जीविकोपार्जन के अधिकार को छीन रहा है।” — मोहम्मद सलीम, अध्यक्ष, नम्मा बाइक टैक्सी एसोसिएशन

“दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे शहरों में जब बाइक टैक्सी की अनुमति है, तो बेंगलुरु में क्यों नहीं?” — मोहम्मद सलीम


📣 बाइक टैक्सी चालकों की व्यथा:

संजय, नागमंगल से एक कानून के छात्र जो कॉलेज के बाद बाइक टैक्सी चलाते हैं, ने कहा:

“मैं फरवरी से बाइक टैक्सी चला रहा था और ₹10,000-12,000 तक कमा लेता था, जिससे मेरी पढ़ाई और खर्च निकल जाता था। अब सब ठप हो गया।”


👥 यात्रियों का पक्ष:

योगेश, एक अकाउंटेंट ने कहा:

“संजयनगर से एमजी रोड तक ऑटो या टैक्सी ₹140-210 लेते हैं, जबकि बाइक टैक्सी ₹90-100 में पहुंचा देती है। वो भी ट्रैफिक से आसानी से बचकर। सरकार को निर्णय पर फिर से विचार करना चाहिए।”


📚 शहर परिवहन विशेषज्ञ की सलाह:

डॉ एम.एन. श्रीहरि, शहरी परिवहन विशेषज्ञ ने कहा:

“बाइक टैक्सी सेवाएं लास्ट माइल कनेक्टिविटी में मदद कर सकती हैं। सरकार को एक अध्ययन कराकर इस पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए और अगर जरूरी हो तो सुरक्षा और नियमों के साथ अनुमति दी जानी चाहिए।”

पूर्व ओडिशा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को सर्वाइकल आर्थराइटिस का इलाज मुंबई में, 22 जून को होगा इलाज

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भुवनेश्वर:
बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष और ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक को सर्वाइकल आर्थराइटिस (गर्दन की हड्डियों का गठिया) की समस्या के इलाज के लिए मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।

78 वर्षीय पटनायक ने खुद यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के ज़रिए दी। उन्होंने भगवान जगन्नाथ का आभार जताया और ओडिशा की जनता से आशीर्वाद की कामना की।

“चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह पर, मैं इस महीने की 22 तारीख को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में सर्वाइकल आर्थराइटिस के लिए एक प्रक्रिया से गुजरूंगा। मेरे निजी चिकित्सक डॉ. रामाकांत पांडा इस प्रक्रिया का समन्वय कर रहे हैं। भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद और ओडिशा के मेरे भाइयों-बहनों की शुभकामनाओं से, मैं जल्द स्वस्थ होकर लौटने की उम्मीद करता हूं ताकि आप सभी की सेवा करता रहूं।” — नवीन पटनायक


🏥 स्वास्थ्य को लेकर चिंता और समर्थन:

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी ने पटनायक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

“नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक की बीमारी की जानकारी पाकर चिंतित हूं। भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना करता हूं कि उनका इलाज सफल हो और वे जल्द स्वस्थ हों।” — मुख्यमंत्री मोहन माझी


🔧 पार्टी संचालन की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से सौंपी गई:

बीजेडी प्रमुख की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि उनके इलाज के दौरान पार्टी के दिन-प्रतिदिन के कार्य बीजेडी की राजनीतिक मामलों की समिति द्वारा संभाले जाएंगे। साथ ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवी मिश्रा विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय का काम देखेंगे।


🧠 नवीन पटनायक की स्वास्थ्य स्थिति:

सूत्रों के मुताबिक, पटनायक पिछले कुछ समय से सर्वाइकल आर्थराइटिस से पीड़ित हैं। यह समस्या रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है और इसके लक्षणों में हाथों में कंपन, घबराहट, और शारीरिक असहजता शामिल हैं। 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान भी ये लक्षण स्पष्ट रूप से दिखे थे।

करीबी सूत्रों का कहना है कि नवीन पटनायक लंबे समय से इस बीमारी का इलाज दिल्ली और केरल में भी करवा चुके हैं।


क्या है सर्वाइकल आर्थराइटिस?

सर्वाइकल आर्थराइटिस (या सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस) गर्दन की हड्डियों और जोड़ों को प्रभावित करता है। उम्र या अत्यधिक तनाव के कारण जब ये हड्डियां घिस जाती हैं, तो गर्दन में दर्द, अकड़न, और कभी-कभी हाथों में कंपकंपी या कमजोरी हो सकती है। गंभीर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता होती है।

मुंबई का कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल इस तरह की बीमारियों के इलाज के लिए देश के सबसे उन्नत अस्पतालों में से एक है।

समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं, केवल संवाद और कूटनीति से संभव: पीएम मोदी क्रोएशिया में

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ज़ाग्रेब (क्रोएशिया):
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि चाहे यूरोप हो या एशिया, समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से ही निकाला जा सकता है। उन्होंने यह बयान क्रोएशियाई प्रधानमंत्री आंद्रेय प्लेंकोविच के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी साझा प्रेस वक्तव्य में दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने और उनके क्रोएशियाई समकक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों को “तीन गुना गति” देने पर सहमति जताई है।

“हम सहमत हैं कि आतंकवाद मानवता का शत्रु है। लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली शक्तियों के लिए आतंकवाद घातक है। चाहे यूरोप हो या एशिया, समाधान युद्ध से नहीं, संवाद और कूटनीति से ही संभव है,” पीएम मोदी ने कहा।

उनकी यह टिप्पणी इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात की पृष्ठभूमि में आई है।


🔗 रक्षा सहयोग और रणनीतिक भागीदारी पर बल:

बैठक में दोनों नेताओं ने डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा, समुद्री अवसंरचना, पर्यटन और आतिथ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के लिए विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को भी गति देने की योजना बनाई जाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रयासों में क्रोएशिया के समर्थन के लिए आभार जताया और भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने का आह्वान किया।


🌍 आर्थिक गलियारा और व्यापार समझौता:

क्रोएशियाई प्रधानमंत्री प्लेंकोविच ने कहा कि उनका देश भारत-यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का समर्थन करता है और आशा है कि वार्ता जल्द ही पूरी होगी।

“प्रधानमंत्री मोदी का भारत, मध्य-पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाले आर्थिक गलियारे का विचार बेहद प्रभावशाली है। यह क्रोएशिया को मध्य यूरोप के साथ भारत को जोड़ने का एक बेहतरीन अवसर देता है,” उन्होंने कहा।


🎖️ ऐतिहासिक यात्रा:

प्रधानमंत्री मोदी क्रोएशिया की यात्रा पर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने कनाडा से क्रोएशिया पहुंचकर अपने तीन देशों के दौरे का अंतिम चरण पूरा किया।

विशेष सम्मान के तहत, क्रोएशियाई प्रधानमंत्री ने स्वयं एयरपोर्ट पर मोदी की अगवानी की। इसके बाद उन्हें राजकीय स्वागत भी दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलानोविच से भी मुलाकात करेंगे।