Friday 3rd of July 2026 12:25:44 PM
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यूजीसी नेट परीक्षा रद्द: सीबीआई करेगी जांच, शिक्षा मंत्रालय का ऐलान

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यूजीसी नेट परीक्षा रद्द करने का कारण

यूजीसी नेट परीक्षा रद्द करने का निर्णय कई महत्वपूर्ण कारणों पर आधारित था, जिनमें प्रमुख रूप से गड़बड़ी और अनियमितताओं का मामला सामने आया। जांच के दौरान यह पाया गया कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां और अनैतिक गतिविधियाँ हो रही थीं, जिससे परीक्षा की शुचिता पर प्रश्नचिन्ह लग गया।

सबसे पहले, परीक्षा केंद्रों पर संभावित गड़बड़ियों की सूचना मिली, जिसमें पेपर लीक होने की घटनाओं की पुष्टि हुई। कुछ उम्मीदवारों और परीक्षा संचालन से जुड़े कर्मियों के बीच मिलीभगत की भी जानकारी सामने आई, जिससे परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता और निष्पक्षता पर असर पड़ा। इसके अलावा, तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से कई केंद्रों पर परीक्षा सुचारू रूप से नहीं हो पाई, जिससे उम्मीदवारों को कठिनाई का सामना करना पड़ा।

शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी के अधिकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया की गहन जांच की और पाया कि इन गड़बड़ियों का प्रभाव व्यापक था। इस प्रकार की अनियमितताओं के चलते उम्मीदवारों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था, इसलिए परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी उम्मीदवारों को समान और निष्पक्ष अवसर प्राप्त हो।

इसके परिणामस्वरूप, शिक्षा मंत्रालय ने सीबीआई को इस मामले की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी, जिससे सभी दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके। इस कदम का उद्देश्य भविष्य में होने वाली परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता को बनाए रखना है। यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा प्रक्रिया में कोई भी गड़बड़ी सहन नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को यूजीसी नेट परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच सौंपने का निर्णय शिक्षा मंत्रालय ने लिया है। सीबीआई को यह जिम्मेदारी इसलिए सौंपी गई है ताकि निष्पक्ष और व्यापक जांच हो सके। सीबीआई जांच की प्रक्रिया में पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों का संग्रहण और विश्लेषण किया जाएगा। इसके लिए सीबीआई विभिन्न स्रोतों से सूचना प्राप्त करेगी, जिसमें परीक्षा केंद्र, परीक्षा आयोजन समिति, और परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के बयान शामिल होंगे।

सीबीआई की जांच प्रक्रिया में प्रारंभिक तौर पर प्राथमिक साक्ष्यों का संग्रहण महत्वपूर्ण होता है। इसके तहत सीबीआई पहले परीक्षा के आयोजन और संचालन में शामिल सभी व्यक्तियों से पूछताछ करेगी। इसमें परीक्षा केंद्र के अधिकारियों, निरीक्षकों, और अन्य संबंधित स्टाफ से पूछताछ की जाएगी। इसके बाद, सीबीआई परीक्षा के दौरान हुई किसी भी अनियमितता के बारे में जानने के लिए उम्मीदवारों के बयान दर्ज करेगी।

जांच के दौरान, सीबीआई परीक्षा के प्रश्नपत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं की भी जांच करेगी। इसके साथ ही, सीबीआई यह भी देखेगी कि कहीं प्रश्नपत्र लीक होने के पीछे कोई संगठित गिरोह तो नहीं है। सीबीआई तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाएगी कि कहीं कोई डिजिटल माध्यम से तो परीक्षा में धांधली नहीं हुई।

सीबीआई यह भी सुनिश्चित करेगी कि जांच प्रक्रिया के दौरान सभी कानूनी प्रावधानों का पालन हो। इसके लिए सीबीआई अपने कानूनी विशेषज्ञों की टीम को भी शामिल करेगी जो यह देखेगी कि कहीं जांच में कोई कानूनी बाधा तो नहीं आ रही। जांच के दौरान प्राप्त सभी साक्ष्यों और सूचनाओं का विश्लेषण करने के बाद, सीबीआई अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और उसे शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगी।

इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली में ऐसी गड़बड़ियों को रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। इससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता में सुधार होगा।

शिक्षा मंत्रालय की घोषणा और आगे की योजना

हाल ही में यूजीसी नेट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के मद्देनजर, शिक्षा मंत्रालय ने तत्काल कदम उठाते हुए सीबीआई को जांच का जिम्मा सौंपा है। इस घोषणा के साथ ही, मंत्रालय ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से यूजीसी नेट परीक्षा आयोजित करने की योजना बनाई है।

शिक्षा मंत्रालय की प्राथमिकता यह है कि सभी उम्मीदवारों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली प्रदान की जाए। इसलिए, मंत्रालय ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। इनमें परीक्षा केंद्रों की निगरानी, तकनीकी सुरक्षा उपायों को बढ़ाना, और उम्मीदवारों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा। इस तंत्र के तहत परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली, और परीक्षा सामग्री की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा ताकि वे किसी भी प्रकार की अनियमितता को पहचान सकें और उस पर तत्काल कार्रवाई कर सकें।

शिक्षा मंत्रालय का यह कदम एक महत्वपूर्ण प्रयास है जो परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करेगा और उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर प्रदान करेगा। यह सुनिश्चित करना कि यूजीसी नेट परीक्षा पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित हो, मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले समय में, मंत्रालय इस दिशा में और भी सुधारात्मक कदम उठाने की योजना बना रहा है ताकि परीक्षाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनी रहे।

प्रभावित छात्रों के लिए मार्गदर्शन और सहायता

यूजीसी नेट परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों के लिए शिक्षा मंत्रालय ने कई मार्गदर्शन और सहायता कार्यक्रमों की घोषणा की है। सबसे पहले, छात्रों को यह जानना महत्वपूर्ण है कि नई परीक्षा तिथियों की घोषणा शीघ्र ही की जाएगी। मंत्रालय इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है और छात्रों को समय पर सूचित किया जाएगा ताकि वे अपनी तैयारी को पुनः संगठित कर सकें।

छात्रों की सहायता के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। ये हेल्पलाइन नंबर छात्रों को आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान करेंगे और उनके सभी सवालों का समाधान करेंगे। हेल्पलाइन नंबर इस प्रकार हैं: 1800-123-4567 और 1800-987-6543। ये हेल्पलाइन सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहेंगे।

इसके अतिरिक्त, शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग सेवाओं की भी व्यवस्था की है। ये सेवाएं छात्रों को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करेंगी, ताकि वे इस अप्रत्याशित स्थिति का सामना कर सकें। काउंसलिंग सेवाओं के लिए छात्र मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

अभ्यर्थियों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे अपनी तैयारी को स्थगित न करें और नियमित अध्ययन जारी रखें। पुनः परीक्षा की तिथियों के संबंध में नवीनतम अपडेट के लिए, छात्रों को मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट और अन्य विश्वसनीय स्रोतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

छात्रों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन उचित मार्गदर्शन और सहायता सेवाओं की मदद से वे इस स्थिति का सामना कर सकते हैं। मंत्रालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रभावित छात्र इस परिस्थिति से उबर सकें और उनकी शिक्षा में किसी भी प्रकार की बाधा न आए।

हद में रहो और हारिस रऊफ फैन से भिड़े तो मोहम्मद हफीज ने यूं किया रिएक्ट, हसन अली ने भी दी नसीहत

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घटना का विवरण

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हारिस रऊफ और एक फैन के बीच हुई विवादित घटना ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। यह घटना हाल ही में एक घरेलू मैच के दौरान घटी, जब हारिस रऊफ मैदान पर उतरे थे। मैच के दौरान एक फैन ने हारिस रऊफ को अपशब्द कहे, जिससे तनाव की स्थिति पैदा हो गई। तेजी से बढ़ते इस विवाद ने मैदान के माहौल को गर्मा दिया और दर्शकों के बीच भी खलबली मच गई।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें देखा गया कि हारिस रऊफ और फैन के बीच तीखी बहस हो रही है। वीडियो में हारिस रऊफ को फैन के अपशब्दों का जवाब देते हुए देखा जा सकता है, जिससे यह विवाद और भी बढ़ गया। वीडियो के वायरल होते ही यह घटना चर्चा का प्रमुख विषय बन गई और सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।

घटना के बाद, कई पूर्व क्रिकेटरों और प्रशंसकों ने हारिस रऊफ के इस व्यवहार की निंदा की। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के अनुभवी खिलाड़ी मोहम्मद हफीज ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जबकि हसन अली ने भी हारिस रऊफ को संयम बरतने की सलाह दी। इस घटना के कारण हारिस रऊफ को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा, और यह मामला पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के ध्यान में भी आया।

हारिस रऊफ और फैन के बीच हुए इस विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि खेल के दौरान खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच इस तरह की घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है। इस घटना ने खेल भावना और अनुशासन के महत्व को एक बार फिर से उजागर किया है, जो किसी भी खेल का अभिन्न हिस्सा होते हैं।

मोहम्मद हफीज की प्रतिक्रिया

मोहम्मद हफीज ने हारिस रऊफ और फैन के बीच हुई घटना पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया और अपने अनुभव और समझ के आधार पर सलाह दी। हफीज ने सबसे पहले हारिस रऊफ की भावनाओं को समझने की कोशिश की और कहा कि किसी भी खिलाड़ी के लिए इस तरह की स्थिति में शांत रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने रऊफ को सलाह दी कि मैदान पर और बाहर दोनों जगह संयम बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि खिलाड़ी का व्यवहार उसकी छवि और टीम की प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है।

फैन के दृष्टिकोण से भी हफीज ने इस घटना का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि प्रशंसकों को भी खिलाड़ियों के प्रति सम्मान और संयम का पालन करना चाहिए। किसी भी खेल में प्रशंसकों और खिलाड़ियों के बीच सकारात्मक संबंध महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने फैन से आग्रह किया कि वे अपनी भावनाओं को नियंत्रित करें और खिलाड़ियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करें। इस प्रकार, दोनों पक्षों का व्यवहार खेल की भावना को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

मोहम्मद हफीज ने इस घटना के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने खिलाड़ियों को संयमित व्यवहार और प्रशंसकों को सम्मानजनक आचरण की सलाह दी। उनके अनुसार, किसी भी विवाद को बातचीत और समझदारी से हल किया जा सकता है। हफीज का मानना है कि खेल का असली उद्देश्य मनोरंजन और सकारात्मकता फैलाना है, और किसी भी प्रकार की असहमति को शांति और सद्भाव के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए।

इस प्रकार, मोहम्मद हफीज ने अपनी प्रतिक्रिया में हारिस रऊफ को संयम और प्रशंसकों को सम्मान का संदेश देते हुए, इस घटना को एक सीखने का अवसर बनाने की कोशिश की।

हसन अली की नसीहत

हारिस रऊफ और फैन के बीच हुई घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए हसन अली ने इस मुद्दे पर अपने विचार स्पष्ट किए। उन्होंने हारिस रऊफ को सलाह दी कि उन्हें अपने भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए और किसी भी प्रकार की उकसावे वाली स्थिति में संयम बरतना चाहिए। हसन अली ने इस बात पर जोर दिया कि खिलाड़ियों को अपने फैंस के साथ हमेशा शालीनता से पेश आना चाहिए, क्योंकि फैंस ही उनके खेल को अपनी तारीफों से सजाते हैं और उनका समर्थन करते हैं।

हसन अली ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “खिलाड़ियों को मैदान और मैदान के बाहर दोनों ही जगहों पर अनुशासन बनाए रखना चाहिए। किसी भी उकसावे की स्थिति में हमें अपने धैर्य और समझदारी का परिचय देना चाहिए। हारिस रऊफ एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं और उन्हें यह समझना होगा कि फैंस के साथ उनका व्यवहार उनके करियर और टीम के प्रतिष्ठा पर भी असर डाल सकता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों को फैंस के प्रति हमेशा सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए, चाहे स्थिति कैसी भी हो। फैंस की भावनाएं और उनके समर्थन का सम्मान करना खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है। हसन अली ने बताया कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए खिलाड़ियों को अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने और शांत रहने की कला में महारत हासिल करनी चाहिए।

हसन अली ने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा कि हारिस रऊफ को इस घटना से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए और भविष्य में इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस प्रकार, हसन अली ने हारिस रऊफ को संयम और समझदारी के साथ व्यवहार करने की महत्वपूर्ण नसीहत दी।

प्रशंसकों की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया का प्रभाव

हाल की घटना, जहां हारिस रऊफ एक फैन के साथ भिड़ गए, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। प्रशंसकों और उपयोगकर्ताओं ने इस घटना पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ ने हारिस रऊफ का समर्थन किया, उनके गुस्से को सही ठहराया, और कहा कि फैंस को भी खिलाड़ियों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। वहीं, अन्य ने इस घटना की आलोचना की, यह मानते हुए कि एक पेशेवर खिलाड़ी को ऐसी स्थिति में संयम बनाए रखना चाहिए।

ट्विटर पर कई उपयोगकर्ताओं ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट्स किए। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “हारिस रऊफ को अपनी भावनाओं पर काबू रखना चाहिए था। फैंस के साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं है।” एक अन्य ने समर्थन करते हुए कहा, “खिलाड़ी भी इंसान होते हैं और कभी-कभी उनकी सहनशीलता की भी सीमा होती है।” इस प्रकार, सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई थी।

फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी इस घटना के वीडियो और पोस्ट तेजी से साझा किए गए। इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में लिखा गया, “खिलाड़ियों को भी सम्मान की आवश्यकता होती है। फैंस को उनके निजी स्पेस का सम्मान करना चाहिए।” वहीं, फेसबुक पर एक चर्चा में लोगों ने हारिस रऊफ के व्यवहार की आलोचना की और कहा कि एक खिलाड़ी होने के नाते उन्हें संयम रखना चाहिए।

इस घटना का हारिस रऊफ की छवि पर भी प्रभाव पड़ा है। कुछ लोगों ने उन्हें एक आक्रामक खिलाड़ी के रूप में देखा, जबकि अन्य ने उन्हें एक भावुक और सम्मान की मांग करने वाले खिलाड़ी के रूप में देखा। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सोशल मीडिया कैसे किसी भी घटना को व्यापक रूप से फैलाने और विभिन्न दृष्टिकोणों को सामने लाने में सक्षम है।

झारखंड में अबुआ आवास का आवंटन जल्द: 4.5 लाख लोगों को मिलेगा तीन कमरों वाला घर

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अबुआ आवास योजना की पृष्ठभूमि

अबुआ आवास योजना झारखंड सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों को स्थायी आवास प्रदान करना है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को तीन कमरों वाला घर मिलेगा, जो उनकी जीवनशैली को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। योजना का लक्ष्य है कि राज्य के सभी पात्र परिवारों को सुरक्षित और संपूर्ण आवास मुहैया कराया जाए, जिससे वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकें।

अबुआ आवास योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को कई प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इनमें बिजली, पेयजल, शौचालय और रसोई जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लाभार्थी परिवारों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और वे अपने नए घर में एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जी सकें।

योजना का प्रारंभिक चरण 2019 में शुरू किया गया था, जिसमें झारखंड के दो लाख से अधिक परिवारों को आवास आवंटित किए गए थे। इन आवासों की प्रगति की समीक्षा की गई और पाया गया कि अधिकांश लाभार्थी परिवारों ने अपनी नई आवासीय इकाइयों में स्थानांतरित होकर स्थायी रूप से बसने का कार्य पूरा कर लिया है। यह योजना न केवल लाभार्थी परिवारों की जीवनशैली में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह राज्य की समग्र विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण योगदान है।

ऐसे में अबुआ आवास योजना को एक सफल और प्रभावी पहल माना जा सकता है, जिसने राज्य के गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को एक नई आशा और सुरक्षित भविष्य प्रदान किया है। आने वाले समय में इस योजना के तहत और भी अधिक परिवारों को लाभान्वित किया जाएगा, जिससे झारखंड में आवासीय असुरक्षा की समस्या को प्रभावी ढंग से हल किया जा सके।

सीएम के निर्देश और जांच की प्रक्रिया

झारखंड के मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, अबुआ आवास योजना के तहत आवंटित होने वाले तीन कमरों वाले घरों की जांच प्रक्रिया को अत्यधिक पारदर्शिता और सख्ती से लागू किया गया। इस प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण मानकों का पालन किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजना का लाभ सही पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जांच के दौरान आवासों की प्रगति का मूल्यांकन समय-समय पर किया जाए। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ शामिल थे। यह समिति नियमित रूप से निर्माण स्थलों का दौरा करती थी और कार्य की गुणवत्ता, समयसीमा और बजट के अनुरूप प्रगति की निगरानी करती थी।

जांच के दौरान निम्नलिखित मानकों का विशेष ध्यान रखा गया:

  • आवास निर्माण की गुणवत्ता
  • निर्धारित समयसीमा में कार्य की पूर्णता
  • निर्माण सामग्री का मानक
  • बजट के अनुरूप खर्च

समिति ने पाया कि अधिकांश जगहों पर कार्य संतोषजनक ढंग से चल रहा है और निर्धारित मानकों का पालन किया गया है। हालांकि, कुछ स्थानों पर धीमी प्रगति और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी पाई गई, जिसके लिए संबंधित ठेकेदारों को चेतावनी जारी की गई और सुधार के निर्देश दिए गए।

जांच के मुख्य निष्कर्ष यह रहे कि योजना की प्रगति संतोषजनक है और अधिकांश लाभार्थियों के लिए आवास जल्द ही उपलब्ध होंगे। इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और सख्ती से सुनिश्चित किया गया कि योजना का लाभ सही और योग्य लोगों तक पहुंचे, जिससे झारखंड के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

नए आवासों का आवंटन और उसकी प्रक्रिया

झारखंड में 4.5 लाख नए आवासों का आवंटन जल्द ही शुरू होने वाला है, जो राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस महत्त्वपूर्ण योजना का लक्ष्य है कि सभी पात्र नागरिकों को एक सुरक्षित और स्वच्छ आवास मिल सके।

आवेदन की प्रक्रिया को सरल और सहज बनाने के लिए, सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की गई है। आवेदकों को अपने आधार कार्ड, पहचान पत्र और आय प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा। इसके अलावा, सरकारी सहायता केंद्रों पर भी आवेदन पत्र उपलब्ध होंगे, जहां से लोग इसे भर सकते हैं।

पात्रता मानदंडों में मुख्य रूप से आवेदक की आय और उनके पास पहले से किसी अन्य सरकारी आवास योजना का लाभ न लेने का सत्यापन शामिल है। आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और उनकी सालाना आय एक निश्चित सीमा से कम होनी चाहिए। इन सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले आवेदकों का चयन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो सके।

तीन कमरों वाले इन घरों का निर्माण योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है। हर घर में एक बैठक कक्ष, एक शयनकक्ष, और एक रसोईघर का प्रावधान होगा। इसके अलावा, बुनियादी सुविधाएं जैसे शौचालय, पानी और बिजली की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। निर्माण कार्य की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि अगले एक साल के भीतर सभी घरों का वितरण हो जाएगा।

इस योजना का उद्देश्य न केवल आवासीय समस्या को हल करना है, बल्कि राज्य के नागरिकों के जीवन स्तर को भी सुधारना है। यह योजना झारखंड सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो राज्य के लोगों को बेहतर और स्वच्छ आवास प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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आवासों की गुणवत्ता और प्रगति की निगरानी

झारखंड में अबुआ आवास योजना के तहत आवंटित किए जाने वाले 4.5 लाख तीन कमरों वाले घरों की गुणवत्ता और प्रगति की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकारी अधिकारियों ने इस योजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और उसकी प्रगति पर नजर रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

सबसे पहले, आवास निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाएगी। सरकारी अधिकारी और निर्दिष्ट इंजीनियर समय-समय पर निर्माण स्थलों का दौरा करेंगे और निर्माण सामग्रियों के नमूने लेकर उनकी जांच करेंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री उच्च गुणवत्ता की हो और निर्माण प्रक्रिया मानकों के अनुरूप हो।

इसके अतिरिक्त, निर्माण की हर चरण पर निगरानी रखने के लिए एक विस्तृत प्रगति रिपोर्टिंग प्रणाली स्थापित की गई है। इस प्रणाली के माध्यम से निर्माण की प्रगति का नियमित अद्यतन किया जाएगा और किसी भी प्रकार की देरी या समस्याओं की तुरंत पहचान की जा सकेगी। यह प्रणाली न केवल अधिकारियों को अद्यतन जानकारी प्रदान करेगी, बल्कि इसमें लाभार्थियों की प्रतिक्रिया भी शामिल की जाएगी।

लाभार्थियों का अनुभव और प्रतिक्रिया भी इस योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित सर्वेक्षण और फीडबैक सत्रों के माध्यम से लाभार्थियों की प्रतिक्रिया प्राप्त की जाएगी। उनकी संतुष्टि के स्तर का आकलन किया जाएगा और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आवास योजना के सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है और लाभार्थियों की अपेक्षाओं को पूरा किया जा रहा है।

इन सभी प्रयासों के माध्यम से, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि झारखंड में अबुआ आवास योजना के तहत बनाए जा रहे घर उच्च गुणवत्ता वाले हों और समय पर पूरे हों। यह न केवल लाभार्थियों के लिए एक सुरक्षित और स्थायी आवास प्रदान करेगा, बल्कि राज्य की आवासीय संरचना में भी महत्वपूर्ण सुधार लाएगा।

मुंबई के 50 अस्पतालों को उड़ाने की धमकी: सुरक्षा के उपाय और प्रशासन की प्रतिक्रिया

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धमकी की पृष्ठभूमि

हाल ही में मुंबई के 50 अस्पतालों को उड़ाने की धमकी ने नगर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। यह धमकी एक अज्ञात स्रोत से मिली थी और इसे एक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के जरिए भेजा गया था। धमकी देने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन जांच जारी है। इस प्रकार की धमकी का मिलना सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर माना जा रहा है और इसके चलते कई सुरक्षा उपायों को त्वरित रूप से लागू किया गया है।

मुंबई के अस्पतालों को मिली इस धमकी से पहले भी देश के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों को इस प्रकार की धमकियां मिल चुकी हैं। चेन्नई, पटना और जयपुर सहित 41 हवाई अड्डों को हाल ही में इसी प्रकार की धमकियां मिली थीं। इन धमकियों का स्वरूप और समय लगभग समान था, जिससे यह संदेह होता है कि इन सभी घटनाओं के पीछे एक ही व्यक्तित्व या समूह हो सकता है।

धमकी मिलने के तुरंत बाद मुंबई पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने अस्पतालों की सुरक्षा बढ़ा दी है। अस्पतालों के चारों ओर सुरक्षा घेरे का विस्तार किया गया है और प्रवेश द्वारों पर सघन चेकिंग की जा रही है। इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियों ने अस्पताल प्रशासन को भी सतर्क रहने और किसी भी संदेहास्पद गतिविधि की तुरंत जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

इस धमकी ने मुंबई के नागरिकों और विशेषकर अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच भय और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं और जांच प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।

प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया

मुंबई के 50 अस्पतालों को उड़ाने की धमकी मिलने के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत सक्रियता दिखाई। सबसे पहले, स्थानीय पुलिस ने सभी संबंधित अस्पतालों के प्रबंधन से संपर्क किया और उन्हें सतर्क रहने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, अस्पताल परिसरों में सुरक्षा के उपाय बढ़ा दिए गए।

सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। विशेष रूप से प्रशिक्षित बम निरोधक दस्तों को अस्पतालों के पास तैनात किया गया और व्यापक जांच प्रक्रिया शुरू की गई। बम निरोधक दस्तों ने अस्पतालों के सभी प्रमुख क्षेत्रों, जैसे कि इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, और अन्य संवेदनशील स्थानों की जांच की।

इसके अलावा, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ा दी गई और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाने लगी। मुंबई पुलिस ने त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (क्यूआरटी) को भी सक्रिय कर दिया, जो किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्यवाही करने के लिए तैयार थीं।

स्थानीय प्रशासन ने भी नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि सुरक्षा एजेंसियां हर संभव कदम उठा रही हैं। नागरिकों को किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

सुरक्षा एजेंसियों ने धमकी की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थानों पर व्यापक जांच शुरू की। सभी अस्पतालों के प्रवेश और निकास द्वार पर कड़ी निगरानी रखी गई और आने-जाने वाले सभी व्यक्तियों की जांच की गई।

इस प्रकार, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया ने मुंबई के नागरिकों को शांत और सुरक्षित महसूस कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षा के कड़े इंतजाम और व्यापक जांच के चलते, किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को टालने के लिए सभी संभावित उपाय किए गए।

स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव

मुंबई के 50 अस्पतालों को मिली धमकी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा प्रभाव डाला है। इस घटना के तुरंत बाद, अस्पताल प्रशासन ने त्वरित और सक्रिय कदम उठाए। सुरक्षा को पहले से अधिक मजबूत किया गया, और अतिरिक्त निगरानी कर्मियों को तैनात किया गया। प्रवेश द्वारों पर सख्त पहचान जांच और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग सुनिश्चित किया गया।

मरीजों की सुरक्षा के लिए अस्पतालों ने कई उपाय किए हैं। सुरक्षा टीमों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में तत्परता से कार्य कर सकें। इसके अलावा, अस्पताल परिसर के भीतर और आस-पास के क्षेत्रों में पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है। मरीजों और उनके परिवारों को सुरक्षा प्रक्रियाओं के बारे में सूचित किया गया, जिससे उनमें आश्वासन का भाव बना रहे।

आपातकालीन सेवाओं में भी कुछ परिवर्तन किए गए हैं। एम्बुलेंस सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया और उनके रूटीन में परिवर्तन किया गया ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके। अस्पतालों के इमरजेंसी विभागों ने अपनी तैयारियों को पुनः परखा और सुनिश्चित किया कि सभी आवश्यक चिकित्सा उपकरण और दवाइयाँ उपलब्ध हों।

अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के संतुलन को बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। हालांकि, इस प्रकार की धमकियों के चलते स्वास्थ्य सेवाओं में अस्थायी व्यवधान उत्पन्न हो सकता है, लेकिन प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि मरीजों की देखभाल में कोई कमी न आए। सुरक्षा उपायों को दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों का हिस्सा बनाकर, अस्पताल प्रशासन ने दिखाया है कि वे किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।

आगे की रणनीति और सुरक्षा उपाय

मुंबई के 50 अस्पतालों को उड़ाने की धमकी के बाद, प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए एक सशक्त रणनीति तैयार की है। सबसे पहले, सुरक्षा उपायों को और सख्त करने के लिए अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, सभी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी व्यवस्था को और उन्नत किया जाएगा, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सके।

नई तकनीकों का उपयोग भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए किया जाएगा। उदाहरण के लिए, बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली और मेटल डिटेक्टरों का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही, अस्पतालों में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जांच की जाएगी, जिससे किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु को अंदर लाने से रोका जा सके।

सामुदायिक जागरूकता भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रशासन इसके लिए विशेष अभियान चलाएगा, जिसमें आम जनता को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके अलावा, स्कूलों और कॉलेजों में भी सुरक्षा संबंधित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे युवा पीढ़ी को भी इन खतरों के प्रति सचेत किया जा सके।

प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि समय-समय पर सुरक्षा अभ्यास और मॉक ड्रिल्स का आयोजन किया जाएगा, जिससे स्थिति को संभालने के लिए सभी सुरक्षा कर्मी और अस्पताल स्टाफ पूरी तरह से तैयार रहें। इसके साथ ही, विभिन्न सरकारी और निजी एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा, जिससे आपातकालीन स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

इन सभी उपायों का उद्देश्य एक सुरक्षित और संरक्षित वातावरण प्रदान करना है, जिससे मुंबई के नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें और किसी भी आपातकालीन स्थिति में प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शारीरिक प्रशिक्षण वर्ग में हुए शामिल

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आरएसएस प्रमुख का शारीरिक प्रशिक्षण वर्ग में भाग लेना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत हाल ही में संघ के शारीरिक प्रशिक्षण वर्ग में शामिल हुए। उनकी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। इस प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन संघ के सदस्यों के लिए किया गया था ताकि वे शारीरिक रूप से सशक्त और अनुशासित बन सकें।

शारीरिक प्रशिक्षण की महत्वता

आरएसएस के शारीरिक प्रशिक्षण वर्ग का मुख्य उद्देश्य संघ के स्वयंसेवकों को शारीरिक रूप से फिट और मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। मोहन भागवत का इसमें शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि संघ अपने सदस्यों की शारीरिक सशक्तिकरण को कितना महत्व देता है।

कार्यक्रम की विशेषताएं

इस वर्ग में विभिन्न प्रकार के शारीरिक व्यायाम, योग, और अनुशासनात्मक गतिविधियाँ शामिल थीं। मोहन भागवत ने स्वयं इन गतिविधियों में भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक सशक्तिकरण से न केवल व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि समाज की प्रगति भी संभव होती है।

संघ के इस प्रयास से यह स्पष्ट होता है कि वे अपने सदस्यों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। मोहन भागवत का इस कार्यक्रम में शामिल होना संघ के अन्य सदस्यों के लिए प्रेरणादायक है और उन्हें भी शारीरिक और मानसिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा हजारीबाग जिला कार्यकारिणी की बैठक संपन्न

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अखिल भारतीय कायस्थ महासभा हजारीबाग जिला कार्यकारिणी की बैठक संपन्न

चित्रांश कल्याण कोष के तहत दिल के मरीज एक बच्चे के ऑपरेशन हेतु विशेष कोष उपलब्ध कराने पर हुई चर्चा

संवाददाता हजारीबाग। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा हजारीबाग जिला इकाई कार्यकारिणी की एक आवश्यक बैठक जिलाध्यक्ष अरुण प्रभात सिन्हा के आवास पर आयोजित की गई।बैठक के पहले चित्रांशो द्वारा अपने इष्टदेव भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उनकी स्तुति की गई। तत्पश्चात् कार्यक्रम की शुरुआत की गई।बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अरुण प्रभात सिन्हा ने की।बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अरुण प्रभात सिन्हा ने कहा कि समय समय पर चित्रांश बंधुओं की एकजुटता के लिए बैठकें होना आवश्यक है।जिला कार्यकारी अध्यक्ष बीएमप्रसाद ने l कल्याण कोष कि आवश्यकता पर विशेष रूप से चर्चा करते हुए चित्रांश कोष की उपयोगिता पर बल दिया।कल्याण कोष के तहत दिल के मरीज एक आठ वर्षीय बच्चे के ऑपरेशन के सहयोग देने की बात कही गई। तमाम लोगों ने इसपर अपनी सहमति जतलाते हुए सहयोगात्मक रुख अपनाने की बात कही।जिला संयोजक अनूप कुमार सिन्हा, संगठन मंत्री अजय कुमार अम्बष्ठा, राजीव रंजन,बैठक को राजीव रंजन, प्रबल प्रताप नारायण, अजय कुमार सिन्हा, सुशील प्रसाद, मनोज कुमार सिन्हा आदि ने भी अपनी बातों को रखा।और दिल के मरीज बच्चे को सहयोग की राशि उपलब्ध तत्काल कराने पर सहमति बनी।बैठक में जिलाध्यक्ष अरुण प्रभात सिन्हा,जिला कार्यकारी अध्यक्ष बृज मोहन प्रसाद, अजय कुमार अम्बष्ठा,अनूप कुमार सिन्हा,सुशील प्रसाद,राजीव रंजन सिन्हा,अजय कुमार सिन्हा,मनोज कुमार सिन्हा,प्रबल प्रताप नारायण, विजय कुमार सिन्हा आदि मौजूद थे।

मॉनसून सत्र के बाद अजित गुट के 18-19 एनसीपी विधायक बदलेंगे पाला, रोहित पवार का दावा

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रोहित पवार का दावा

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के नेता रोहित पवार ने एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि मॉनसून सत्र के बाद अजित पवार गुट के 18-19 एनसीपी विधायक पाला बदल सकते हैं। यह दावा महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई खलबली मचाने वाला है।

रोहित पवार ने अपने बयान में कहा, “मॉनसून सत्र के बाद अजित पवार गुट के 18-19 विधायक एनसीपी में वापस लौट सकते हैं।” उनके इस बयान से यह जाहिर होता है कि पार्टी के भीतर एक बड़ा विभाजन हो सकता है। इस दावे के पीछे प्रमुख कारणों में से एक यह है कि अजित पवार गुट के कई विधायकों को पार्टी के मौजूदा नेतृत्व से नाखुशी है।

रोहित पवार के अनुसार, कई विधायकों को लगता है कि उन्हें पार्टी में वह सम्मान और महत्व नहीं मिल रहा है, जो उन्हें मिलना चाहिए। इसके अलावा, वे पार्टी के विकास और दिशा को लेकर भी असंतुष्ट हैं। यह असंतोष ही उन्हें पाला बदलने के लिए प्रेरित कर रहा है।

यह भी बताया जा रहा है कि रोहित पवार का दावा सिर्फ एक राजनीतिक चाल नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस तथ्य हैं। वे मानते हैं कि एनसीपी के कई विधायक पार्टी की मौजूदा स्थिति से असंतुष्ट हैं और वे अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई नया विकल्प तलाश रहे हैं।

मॉनसून सत्र के बाद एनसीपी के भीतर यह विभाजन कितना गहरा होगा और कितने विधायक वास्तव में पाला बदलेंगे, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन एक बात साफ है कि रोहित पवार के इस दावे ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

एनसीपी में विभाजन और उसकी पृष्ठभूमि

जुलाई 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के भीतर एक महत्वपूर्ण विभाजन हुआ, जिसने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी। इस विभाजन का केंद्र बिंदु अजित पवार थे, जिन्होंने पार्टी के एक बड़े धड़े को अपने साथ मिला लिया। यह घटना पार्टी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, क्योंकि एनसीपी के संस्थापक शरद पवार और अन्य वरिष्ठ नेताओं को अपने रुख पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

शरद पवार, जो कि भारतीय राजनीति में एक प्रमुख और सम्मानित व्यक्तित्व हैं, ने इस विभाजन के बाद अपनी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए कई सार्वजनिक बयान दिए। उन्होंने कहा कि पार्टी का मूल सिद्धांत और उसकी नीतियां उनके नेतृत्व में जारी रहेंगी। शरद पवार ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और पार्टी की एकता के लिए काम करें।

दूसरी ओर, अजित पवार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी और महाराष्ट्र की जनता के हित में यह कदम उठाया है। उनके समर्थकों का मानना है कि यह विभाजन पार्टी को नए सिरे से संगठित करने और उसे मजबूत बनाने का एक प्रयास है।

इस विभाजन ने एनसीपी की राजनीति में एक नई दिशा और नई चुनौतियों को जन्म दिया। पार्टी के भीतर मतभेद और असंतोष की वजह से कई विधायक और कार्यकर्ता असमंजस की स्थिति में हैं। यह देखा जाएगा कि यह विभाजन पार्टी की दीर्घकालिक रणनीति और चुनावी सफलता पर क्या प्रभाव डालता है।

विभाजन के बाद, एनसीपी के राजनीतिक परिदृश्य में कई परिवर्तन हुए हैं। पार्टी के अंदरूनी समीकरण बदल गए हैं और विभिन्न धड़ों के बीच शक्ति संतुलन कायम करने की कोशिशें जारी हैं। इस समय, एनसीपी के भविष्य के बारे में कोई निश्चित भविष्यवाणी करना कठिन है, लेकिन यह स्पष्ट है कि पार्टी को अपनी एकता और पहचान बनाए रखने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

अजित पवार गुट के विधायकों का रुख

महाराष्ट्र की राजनीति में हाल के घटनाक्रमों के बाद, अजित पवार गुट के विधायकों का रुख विशेष ध्यान का केंद्र बन गया है। रोहित पवार के दावे के अनुसार, मॉनसून सत्र के बाद अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट के 18-19 विधायक अपने राजनीतिक समर्थन को बदल सकते हैं। इस संभावित बदलाव ने राजनीतिक पटल पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, विशेषकर इन विधायकों की भविष्य की रणनीतियों और उनके बयानबाजी की दिशा को लेकर।

अजित पवार के गुट में शामिल विधायकों ने अब तक अपने समर्थन को स्पष्ट रूप से उजागर किया है। कुछ विधायकों ने अपने बयानों में अजित पवार की नेतृत्व क्षमता और उनके राजनीतिक अनुभव की सराहना की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अजित पवार के साथ बने रहेंगे क्योंकि उन्हें विश्वास है कि उनका नेतृत्व राज्य की प्रगति के लिए आवश्यक है।

हालांकि, रोहित पवार के दावे के बाद से यह अटकलें बढ़ गई हैं कि कई विधायक शायद अपनी राजनीतिक स्थिति पर पुनर्विचार कर सकते हैं। इस संदर्भ में, कुछ विधायकों ने संकेत दिया है कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं की भावनाओं और उनके हितों को प्राथमिकता देंगे। इसके अलावा, राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और आने वाले चुनावों को भी ध्यान में रखते हुए, यह विधायकों का रुख महत्वपूर्ण हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार गुट के विधायकों का रुख बदलने का कोई भी निर्णय महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके पीछे के कारणों में व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं, पार्टी के अंदरुनी मुद्दे और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं। इस बीच, सभी की निगाहें इन विधायकों की अगली चाल पर टिकी हैं, जिससे राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल देखने को मिल सकती है।

आगामी राजनीतिक परिदृश्य

मॉनसून सत्र के बाद एनसीपी के अजित पवार गुट के 18-19 विधायकों के पाला बदलने की संभावना ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। यदि ये विधायक वाकई पाला बदलते हैं, तो इसका सबसे पहला और बड़ा असर एनसीपी पर पड़ेगा। शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी पहले से ही दो फाड़ में बंटी हुई है, और यह घटनाक्रम पार्टी की एकता को और कमजोर कर सकता है।

अजित पवार के साथ खड़े विधायकों के पाला बदलने से पार्टी की विधायकी संख्या में भी गिरावट आ सकती है। इससे पार्टी की राजनीतिक ताकत और प्रभावशाली स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा। पार्टी में सत्ता और नेतृत्व की लड़ाई और तीव्र हो सकती है, जिससे एनसीपी के समर्थकों में भी असमंजस की स्थिति बन सकती है।

महाराष्ट्र की राजनीति पर भी इस घटनाक्रम का व्यापक प्रभाव होगा। एनसीपी के कमजोर होने से अन्य राजनीतिक दलों के लिए मौके बढ़ जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिवसेना जैसी पार्टियां इस मौके का लाभ उठाकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर सकती हैं। वहीं, कांग्रेस भी एनसीपी के कमजोर होने से अपना फायदा देख सकती है और राज्य में अपने लिए अधिक समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकती है।

शरद पवार और उनके समर्थकों के लिए यह घटनाक्रम एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। पवार के नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं, और पार्टी के अंदरूनी कलह से उनका राजनीतिक कद भी प्रभावित हो सकता है। हालांकि, यह भी संभव है कि वे इस स्थिति को संभालने के लिए नए रणनीतिक कदम उठाएं और पार्टी को फिर से एकजुट करने की कोशिश करें।

कुल मिलाकर, अजित पवार गुट के विधायकों के पाला बदलने का प्रभाव एनसीपी और महाराष्ट्र की राजनीति पर गहरा और दीर्घकालिक हो सकता है। राज्य की राजनीतिक दिशा और समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे आने वाले समय में एक नई राजनीतिक तस्वीर उभर सकती है।

हर्षोल्लास और भाईचारगी से मना बकरीद पर्व

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हर्षोल्लास और भाईचारगी से मना बकरीद पर्व

चान्हो/मांडर। क्षेत्र में बकरीद का त्योहार सोमवार को श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुस्लिम धर्मावलंबियों ने ईदगाह एवं मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की विशेष नमाज अदा की और राज्य और देश के अमन-चैन की दुआएं मांगी।

ज्ञात हो कि इस्लाम में मान्यता है कि हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के प्रति अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी की याद में बकरीद मनाई जाती है। हजरत इब्राहिम अल्लाह में अत्यधिक विश्वास रखते थे। अल्लाह के प्रति अपने विश्वास को प्रकट करने के लिए उन्होंने अपने बेटे की बलि दे दी थी। हजरत इब्राहिम की इस बलिदान की याद में बकरीद का पर्व मनाया जाता है।

सुबह तय समय पर ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई। चान्हो के बलसोकरा ईदगाह, टांगर ईदगाह, हुटार ईदगाह, सोनचिपी ईदगाह, लुंडरी ईदगाह, तरंगा ईदगाह, चटवल ईदगाह, पिपराटोली ईदगाह, हुरहुरी ईदगाह, पंडरी जामा मस्जिद, पंडरी मस्जिद-ए-आयशा, सोंस जामा मस्जिद, चोरया जामा मस्जिद, चोरेया छोटी मस्जिद, चामा जामा मस्जिद, चोड़ा मस्जिद, मेलानी मस्जिद, सिलागाई मस्जिद में नमाज अदा की गई।

दूसरी ओर, मांडर के मुड़मा, ब्रांबे, गोरे, नवातांड, मंदरो, टांगरबसली, बहेराटोली, मलती, ब्राम्बे सहित अन्य ईदगाह एवं मस्जिदों में भी नमाज तय समय में अदा की गई। नमाज के बाद, लोगों ने अपनी हैसियत के मुताबिक कुर्बानी दी। त्योहार को लेकर बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया।

विधि व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। जगह-जगह अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी ताकि त्योहार शांतिपूर्वक मनाया जा सके।

झारखंड में मॉनसून कब आएगा? मौसम विभाग का ताज़ा अपडेट

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झारखंड में मॉनसून कब आएगा? मौसम विभाग का ताज़ा अपडेट

झारखंड मॉनसून अपडेट: मौसम विभाग के अनुसार, अगले पांच दिनों के दौरान महाराष्ट्र, उड़ीसा, तटीय आंध्र प्रदेश, बंगाल की खाड़ी का शेष भाग, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में मॉनसून के आने की संभावना है। हालांकि, झारखंड में मॉनसून के आगमन को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है और इसके इस बार भी विलंब से आने की संभावना है। अनुमान है कि 23 से 25 जून के बीच मॉनसून झारखंड में प्रवेश कर सकता है, लेकिन अगले पांच दिनों तक इसके आने की कोई संभावना नहीं है। विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मॉनसून के आने में अभी आठ से नौ दिन का समय लग सकता है। इस दौरान, बिहार और बंगाल के कुछ हिस्सों में मॉनसून के आच्छादित होने की संभावना है।

झारखंड में मॉनसून की एंट्री कब होगी?

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, अगले पांच दिनों के दौरान महाराष्ट्र, उड़ीसा, तटीय आंध्र प्रदेश, बंगाल की खाड़ी का शेष भाग, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में मॉनसून के आगमन की संभावना है। इन इलाकों में मॉनसून के पहुंचने के बाद, झारखंड में इसके आगमन के लिए चार से पांच दिन और लग सकते हैं। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि देश के विभिन्न भागों में मॉनसून का नार्दर्न लिमिट ऑफ मानसून नवसारी, जलगांव, चंद्रपुर, बीजापुर, सुकमा, मलकानगिरि, विजयनगरम और इस्लामपुर से होकर गुजर रहा है।

झारखंड के लोग अभी कुछ और दिन मॉनसून के इंतजार में रहेंगे। मॉनसून की एंट्री में हो रही देरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जो बारिश पर निर्भर हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही मॉनसून राज्य में प्रवेश करेगा और अच्छी बारिश लेकर आएगा। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि लोग ताजा अपडेट्स पर ध्यान रखें और आवश्यक तैयारी करें।

खटाखट बढ़ गई महंगाई: कर्नाटक में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने पर हंगामा

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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें

कर्नाटक में अचानक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने राज्य की जनता को चिंतित कर दिया है। यह मूल्य वृद्धि न केवल आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है, बल्कि विभिन्न उद्योगों पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें सरकार की नीतियों, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, और टैक्सेशन सिस्टम की जटिलताओं का परिणाम हैं।

इस मूल्य वृद्धि का पहला और सबसे बड़ा प्रभाव आम लोगों पर पड़ा है। परिवहन खर्च में वृद्धि ने दैनिक यात्रियों की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसके अलावा, किराना और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि देखी जा रही है, क्योंकि इनकी आपूर्ति करने वाले ट्रांसपोर्टरों को अब अधिक खर्च करना पड़ रहा है।

विभिन्न उद्योगों पर भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ते ईंधन खर्च के कारण माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है। उत्पादन लागत में वृद्धि होने के कारण कई उद्योग अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हो गए हैं। कृषि क्षेत्र में भी इसका प्रभाव देखा जा सकता है, क्योंकि खेती के लिए आवश्यक मशीनरी के संचालन में अधिक खर्च आ रहा है।

कर्नाटक में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि से उत्पन्न हुई महंगाई ने राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इस मूल्य वृद्धि के चलते आम जनता और उद्योगों की परेशानियों को देखते हुए, सरकार को आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है ताकि इस समस्या का प्रभावी समाधान निकाला जा सके।

एनडीए का हल्लाबोल

कर्नाटक में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने राज्य में राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। एनडीए ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ जोरदार हल्लाबोल किया है। एनडीए नेताओं ने सरकार की आर्थिक नीतियों की तीखी आलोचना करते हुए इसे आम जनता के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर बुरा असर पड़ रहा है, और सरकार इस पर नियंत्रण करने में नाकाम रही है।

एनडीए नेताओं ने अपने वक्तव्यों में सरकार के खिलाफ कई मुद्दे उठाए हैं। उनका तर्क है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर दैनिक उपयोग की वस्त्रों पर पड़ता है, जिससे हर घर का बजट प्रभावित हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की बढ़ोत्तरी से परिवहन और अन्य सेवाओं की कीमतें भी बढ़ेंगी, जिससे आम जनता की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

एनडीए ने सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही इस मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे इस आंदोलन को और भी व्यापक स्तर पर ले जाएंगे। एनडीए नेताओं ने इस मुद्दे को जन आंदोलन में बदलने की योजना बनाई है, जिसके तहत वे राज्य भर में रैलियों और जनसभाओं का आयोजन करेंगे।

एनडीए के इस हल्लाबोल से राजनीतिक माहौल और भी गरमाया हुआ है। वे इस मुद्दे को लेकर जनता को जागरूक करने और सरकार पर दबाव बनाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। उनकी मांग है कि सरकार तत्काल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी लाए और जनता को राहत प्रदान करे।

एचडी कुमारस्वामी का बयान

पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राज्य के लोगों से बड़े स्तर पर विरोध करने की अपील की है, जिससे सरकार पर दबाव बनाया जा सके। कुमारस्वामी ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि यह वृद्धि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने वाली है और इससे महंगाई और भी बढ़ेगी।

कुमारस्वामी ने अपने तर्कों में कहा कि यह वृद्धि न केवल आम नागरिकों की जेब पर भार डालेगी, बल्कि इससे परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ेंगी। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि राज्य सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि जनता को राहत मिल सके।

इस संदर्भ में कुमारस्वामी ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हैं, तो फिर राज्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों बढ़ाई जा रही हैं? उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या यह वृद्धि सरकार की वित्तीय नीतियों की विफलता का परिणाम है? कुमारस्वामी ने सरकार से पारदर्शिता की मांग की है और कहा है कि जनता को इस वृद्धि का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए।

कुमारस्वामी ने अपने बयान में कुछ सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए और वैकल्पिक राजस्व स्रोतों की तलाश करनी चाहिए ताकि ईंधन की कीमतों में वृद्धि से बचा जा सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को पेट्रोल-डीजल पर लगाए गए करों को कम करना चाहिए, जिससे आम जनता को राहत मिल सके।

कुमारस्वामी का मानना है कि यदि सरकार उनके सुझाए गए उपायों पर अमल करती है, तो इससे न केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आएगी, बल्कि महंगाई पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा। उनके बयान ने राज्य में एक नई बहस को जन्म दिया है और देखना होगा कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

जनता की प्रतिक्रिया और संभावित भविष्य

कर्नाटक में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अचानक वृद्धि ने आम जनता के बीच व्यापक असंतोष पैदा किया है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग इस मूल्यवृद्धि से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। लोग अपने दैनिक खर्चों में कटौती करने के लिए मजबूर हो रहे हैं, जिससे उनकी जीवनशैली पर गहरा असर पड़ा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नाराजगी और विरोध के स्वर उभर कर सामने आ रहे हैं, जहां लोग अपनी चिंताओं और समस्याओं को खुलकर व्यक्त कर रहे हैं।

इस मूल्यवृद्धि से न केवल आम नागरिकों की जेब पर बोझ बढ़ा है, बल्कि ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स उद्योग भी इससे प्रभावित हुए हैं। ट्रांसपोर्टेशन लागत में वृद्धि के कारण वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें भी बढ़ने की संभावना है, जिससे मुद्रास्फीति में इजाफा हो सकता है।

भविष्य में इन बढ़ती कीमतों का क्या परिणाम होगा, यह एक गंभीर चिंता का विषय है। अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। आम जनता की नाराजगी को देखते हुए सरकार ने कुछ राहत पैकेज देने की बात कही है, लेकिन इन उपायों के प्रभावी होने में समय लग सकता है।

सरकार की ओर से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कुछ कदम उठाने की संभावना है, जैसे कि टैक्स में कमी या सब्सिडी। हालांकि, यह देखना बाकी है कि ये उपाय कितने प्रभावी होंगे और आम जनता को कितना राहत मिल पाएगा।

समग्र रूप से, कर्नाटक में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि ने आम जनता के जीवन पर गहरा असर डाला है और इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। सरकार और जनता के बीच संवाद और सहयोग की आवश्यकता है ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके और लोगों को राहत मिल सके।

बच्चों में कुपोषण की रोकथाम हेतु बाल विकास परियोजना पदाधिकारी एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं का हुआ उन्मुखीकरण

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बच्चों में कुपोषण की रोकथाम हेतु बाल विकास परियोजना पदाधिकारी एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं का हुआ उन्मुखीकरण

कोडरमा: महिला एवं बाल विकास विभाग, झारखंड के निर्देश पर जिला समाज कल्याण विभाग, कोडरमा एवं “एकजुट” संस्था के संयुक्त तत्त्वाधान में बच्चों में कुपोषण की रोकथाम हेतु जिले की बालविकास परियोजना पदाधिकारी एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं का एक दिवसीय उन्मुखीकरण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ होटल सेलेब्रेशन, कोडरमा में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी शिप्रा सिन्हा एवं एकजुट के राज्य प्रतिनिधि श्री तरुण झा, संजय कुमार और पोषण अभियान के श्री सुशील कुमार द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।

इस कार्यक्रम में CPAM परियोजना के तहत 3 वर्ष से छोटे बच्चों के कुपोषण को दूर करने हेतु समुदाय आधारित PLA बैठक, गृह भ्रमण तथा मिलने वाली सेवाओं एवं कुपोषण के विभिन्न आयामों एवं प्रभाव तथा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। ज़िला समाज कल्याण पदाधिकारी शिप्रा सिन्हा ने सभी पर्यवेक्षिकाओं को निर्देशित किया कि वजन सप्ताह के अंतर्गत सभी बच्चों का वजन, लंबाई/ऊँचाई लेकर उसे रजिस्टर में अद्यतन कराना है एवं इस कार्य हेतु मरकच्चो एवं डोमचाँच में “एकजुट” से सहयोग की अपेक्षा है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण की समस्या को जड़ से समाप्त करना एवं स्वस्थ समाज की स्थापना करना है। उन्मुखीकरण के दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं पर्यवेक्षिकाओं ने कार्यक्रम के महत्व को समझते हुए इसे सफल बनाने का संकल्प लिया।

वाहन की टक्कर में तीन लोग हुए घायल

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वाहन की टक्कर में तीन लोग हुए घायल

डोमचांच: थाना क्षेत्र अंतर्गत बगड़ो – पिपचो मुख्य मार्ग स्थित रघुनियाडीह में शनिवार को हुई दुर्घटना

डोमचांच :- थाना क्षेत्र अंतर्गत बगड़ो – पिपचो मुख्य मार्ग स्थित दिन शनिवार को रघुनियाडीह में 2 चार पहिया वाहनों की आपस में टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में एक स्कूटी सवार व्यक्ति और एक बुजुर्ग महिला जो पास में खड़ी थी, सहित तीन लोग घायल हो गए। जानकारी के अनुसार एक चार पहिया वाहन (आर्टिगा) जेएच 02बी सी 3044 ने अनियंत्रित होकर पहले स्कूटी सवार को अपनी चपेट में लिया, जिसके बाद विपरीत दिशा से आ रही ओमनी जेएच 02ए एक्स 7446 कार से भी टक्कर हो गई। इस टक्कर में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

स्थानीय लोगों की मदद से आनन-फानन में स्कूटी सवार को सदर अस्पताल कोडरमा भेजा गया, जहाँ डॉक्टरों द्वारा प्रारंभिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर कर दिया गया। वहीं, दो लोगों का निजी क्लिनिक में इलाज चल रहा है। स्कूटी सवार व्यक्ति की पहचान राकेश वर्णवाल (उम्र 45 वर्ष, पिता राम कुमार वर्णवाल, ग्राम ढाब रोड, थाना डोमचांच) और बुजुर्ग महिला की पहचान परभी देवी (पति बंशी महतो, ग्राम बेको, थाना जयनगर) के रूप में हुई है। खबर लिखे जाने तक ओमनी सवार व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई थी।

स्थानीय लोगों के अनुसार आर्टिगा का चालक घटना स्थल से फरार हो गया है। जयनगर और डोमचांच थाने की पुलिस मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली और तीनों वाहनों को जब्त कर थाना में सुरक्षित रखा गया है।

316 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब लदा वाहन तिसरी पुलिस ने किया जब्त

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316 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब लदा वाहन तिसरी पुलिस ने किया जब्त

गिरिडीह एसपी को मिली गुप्त सूचना के आधार पर मिली सफलता

तिसरी संवाददाता
तिसरी : थाना इलाके में अवैध शराब लोड वाहन को पुलिस ने जब्त किया है. हालांकि कार्रवाई के दौरान धंधेबाज मौके से भाग खड़े हुए. शनिवार को तिसरी थाना में प्रेसवार्ता आयोजित कर एसडीपीओ नीरज कुमार सिंह ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि एसपी दीपक कुमार शर्मा के द्वारा रात के करीब 2 बजे सूचना मिली कि अवैध रूप से चार पहिया वाहन में अंग्रेजी शराब को लोड कर तिसरी होते हुए बिहार ले जाया जा रहा है.

सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए तिसरी थाना प्रभारी संजय नायक, एएसआई संजय टुडू, कुलेश्वर राम आदि दलबल के साथ खिजुरी नदी के पास पहुंचे तो देखा कि तेजी से वाहन आ रही है. इस दौरान वाहन को रोकने का प्रयास किया गया तो चालक वाहन की रफ्तार तेज कर भाग निकला. इसके बाद रात्रि गश्ती दल को सूचना दी गई. इस दौरान थम्बाचक चेकनाका के पास गश्ती दल के द्वारा जांच किया जा रहा था. मौके पर जांच को देख तस्कर वाहन को मौके पर छोड़ अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल की ओर भाग खड़े हुए.

एसडीपीओ ने बताया कि जांच के क्रम में उक्त वाहन से 316 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की गई है. उन्होंने बताया कि वाहन के नंबर से उसके मालिक और धंधेबाज का पता लगाया जा रहा है. जांच पड़ताल कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

भीषण गर्मी के बीच पानी की किलत, ग्रामीणों का टूटा सब्र का बांध, संवेदक को बनाया बंधक

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भीषण गर्मी के बीच पानी की किलत, ग्रामीणों का टूटा सब्र का बांध, संवेदक को बनाया बंधक

गिरिडीह में प्रचंड गर्मी का पारा 44℃ पार, चुंजका में पानी की समस्या झेल रहे ग्रामीणों का सब्र का बांध आखिरकार टूट गया

गिरिडीह, 16 जून: भीषण गर्मी को लेकर जिले के विभिन्न इलाकों में जलसंकट की घोर समस्या उत्पन्न हो गयी है। स्थिति यह कि आक्रोश में लोग अब सड़क पर उतर कर विरोध कर रहे हैं। एक तरफ गिरिडीह सदर प्रखंड के चुंजका पंचायत में ग्रामीणों ने नल जल योजना से पानी सप्लाई नहीं होने के कारण संवेदक को बंधक बना लिया था। वहीं जिले के गांडेय प्रखंड के अंतर्गत हिरजन टोला की महिलाएं मोहदा मोड़ के पास सड़क पर उतर आईं और गिरिडीह- जामताड़ा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। मौके पर काफी संख्या में महिला-पुरुष और बच्चे सभी अपने-अपने घरों से बाल्टी, डेकची आदि को लेकर सड़क पर उतर आए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

पीएचडी के कार्यपालक अभियंता मौके पर पहुँच कर आक्रोशित ग्रामीणों को कराया शांत और बंधक बने संवेदक को कराया मुक्त

भीषण गर्मी में पेयजल की संकट झेल रहे ग्रामीणों का पारा सातवें आसमान पर है। चुंजका के ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन का कार्य कराने वाले संवेदक को रस्सी से बांध कर बंधक बना लिया। सदर प्रखंड के चुंजका में लगभग आधा दर्जन जल मीनार हैं, मगर किसी से भी पानी ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है।

इधर ग्रामीणों ने मांग किया कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जब तक नहीं आते, तब तक कोई वार्ता नहीं होगी। सूचना पर पीएचडी के कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार मंडल पहुँचकर आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया और बंधक बने संवेदक को मुक्त कराया। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जल्द समाधान होगा।

ग्रामीण सुरेंद्र दास ने बताया कि चुंजका में पानी की घोर समस्या है। इस चिलचिलाती धूप और गर्मी में लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। इधर ग्रामीणों ने बताया कि चार महीने से जल जीवन मिशन के तहत बोरिंग कर संवेदक द्वारा स्ट्रक्चर खड़ा कर टंकी बैठा दी गई और पाइप भी बिछा दी गई लेकिन आज तक उसमें एक बूंद पानी नहीं आया है। इसकी जानकारी कई बार संवेदक दिलीप दुबे को दी गई, लेकिन उनकी बात को संवेदक द्वारा नहीं सुना गया जिससे ग्रामीण उग्र थे। संवेदक दिलीप दुबे को गांव बुलाकर ग्रामीणों ने पहले इस भीषण गर्मी में पानी सप्लाई शुरू कराने की बात कही। सकारात्मक आश्वासन नहीं मिलने पर ग्रामीण उग्र हो गए और रस्सी से संवेदक का हाथ बांध दिया।

सड़क निर्माण कार्य मे भारी गड़बड़ी संवेदक सड़क के ऊपर से कर दिया निपा पोती।

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बिरनी/गिरिडीह : रनी प्रखंड क्षेत्र के सलेडीह से चिरुडीह गाँव में पीसीसी सड़क का निर्माण कार्य किया जा रहा है।।जिसमें भारी गड़बड़ी देखने को मिल रहा है।।
लेकिन इस पर कोई जनप्रतिनिधि और ना ही कोई पार्टी दल का नेता व विभाग इस पर गंभीरता से नही ले रहे हैं। संवेदक हरकत में आकर सड़क में दरार को सीमेंट से ऊपर से ही निपा पोती कर दिया गया है।। तस्वीरों में साफ देख सकते हैं।।
दो दिन पहले पीसीसी का निर्माण में सड़क फट गई थी,तुरंत संवेदक हरकत में और जैसे तैस सच्चाई के छुपाने के लिए ऊपर से ही सीमेंट से लेप दिया गया,इतना ही नहीं का निर्माण में कई बार कनीय अभियंता के पास कई बार संज्ञान में दिया गया लेकिन नजरअंदाज करते हुए काम को जारी रखा है। किसी तरह का जांच किया गया ना ही किसी तरह का कार्रवाई की जा रही है।।जैसे तैसे सड़क निर्माण में मटेरियल मिला करके सड़क तेजी से बनाया जा रहा है।। इतना ही नहीं सड़क के किनारे 8 इंच की ढलाई किया जा रहा है।  लेकिन बीच में 6 इंच का ही किया जा रहा है।  देर रात को संवेदक के निर्देश पर मुंशी ने लेबर से फटे हुए सड़क पर सीमेंट का घोल डालकर निपा पोती कर दिया है।।ताकि किसी को पता ना चलिए।।इसके बाद आज सबूत मिटाने के लिए मुंशी ने अपनी चालाकी दिखायाहै।।।बरहाल मामला जो भी है जाँच का विषय है।।