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गाय के गोबर से दुर्गंध आने लगे तो समझें, वह समाज से कट चुका है: अखिलेश पर बीजेपी का पलटवार

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने भाजपा को ‘दुर्गंध का स्रोत’ बताते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को बदबू पसंद है, इसलिए वे गौशालाएं खोल रहे हैं, जबकि उनकी पार्टी ने कन्नौज में परफ्यूम पार्क बनवाया। इस बयान पर पलटवार करते हुए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यदि किसी किसान, विशेषकर ग्वालों के बेटे को, गाय के गोबर से दुर्गंध आने लगे तो समझ लेना चाहिए कि वह अपनी जड़ों और समाज से पूरी तरह कट चुका है।

अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला

बुधवार को कन्नौज में मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कन्नौज हमेशा भाईचारे की खुशबू फैलाता आया है, लेकिन भाजपा नफरत की बदबू फैला रही है। मैं कन्नौज के लोगों से अपील करता हूं कि भाजपा की इस बदबू को पूरी तरह खत्म करें। यह कुछ हद तक कम हुई है, लेकिन अगले चुनाव में इसे पूरी तरह मिटा दें, ताकि कन्नौज का रुका हुआ विकास फिर से आगे बढ़ सके।”

“भाजपा को बदबू पसंद, हमें खुशबू”: अखिलेश

अखिलेश यादव ने गौशालाओं और परफ्यूम पार्क की तुलना करते हुए कहा, “उन्हें (भाजपाइयों को) बदबू पसंद है, तभी वे गौशालाएं खोल रहे हैं। हमें खुशबू पसंद है, इसलिए हम कन्नौज में एक परफ्यूम पार्क बना रहे हैं।” उनके इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

केशव प्रसाद मौर्य का करारा जवाब

अखिलेश के बयान पर पलटवार करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “अगर किसान, खासकर ग्वाल के बेटे, को गाय के गोबर से दुर्गंध आने लगे तो समझना चाहिए कि वह अपनी जड़ों और समाज से पूरी तरह कट चुका है।”

उन्होंने आगे कहा, “कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने लिखा था कि यदि किसान के बेटे को गोबर से बदबू आने लगे तो अकाल निश्चित है। आज सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी गोबर से दुर्गंध आ रही है, इसलिए उनकी पार्टी का भी समाप्त होना तय है।”

राजनीतिक बयानबाजी तेज

अखिलेश यादव और भाजपा नेताओं के बीच यह जुबानी जंग लगातार तेज हो रही है। भाजपा का कहना है कि उनकी सरकार किसानों और पशुपालकों के हित में काम कर रही है, जबकि सपा इसे विकास से भटकाने की राजनीति करार दे रही है। चुनावी मौसम में यह बयानबाजी किस ओर जाएगी, यह देखने वाली बात होगी।

भाजपा नेता अनिल टाइगर की हत्या के खिलाफ रांची बंद, मंगला जुलूस हिंसा पर सरकार का जवाब

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भाजपा नेता अनिल टाइगर की बर्बर हत्या के खिलाफ रांची बंद, मंगला जुलूस हिंसा पर सरकार का जवाब

भाजपा नेता अनिल टाइगर की हत्या पर आक्रोश, रांची बंद का आह्वान

भाजपा ग्रामीण जिला महामंत्री एवं पूर्व जीप सदस्य अनिल महतो (टाइगर) की अपराधियों द्वारा गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई। इस घटना से झारखंड में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार इस बर्बर हत्या के विरोध में 27 मार्च को सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक रांची बंद बुलाया गया है।

भाजपा कार्यकर्ताओं से अपील की गई है कि वे अपने मंडलों में समन्वय बनाकर प्रमुख चौक-चौराहों पर एकत्रित हों और शांतिपूर्ण बंद को सफल बनाने में सहयोग करें। भाजपा का कहना है कि यह हत्या कानून-व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

मंगला जुलूस हिंसा पर सरकार ने दिया जवाब

झारखंड के हजारीबाग में रामनवमी के अवसर पर निकाले गए मंगला जुलूस के दौरान मंगलवार रात हुए पथराव और हिंसा को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में अपना जवाब दिया। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि इस घटना में 10 नामित और 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

मंत्री ने बताया कि जुलूस पंच मंदिर चौक से झंडा चौक की ओर बढ़ रहा था, जब एक आपत्तिजनक गाना बजाने को लेकर दो समुदायों के बीच टकराव हो गया और दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दो राउंड हवाई फायरिंग भी की।

स्थिति नियंत्रण में, उपद्रवियों पर होगी कार्रवाई

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि हिंसा में शामिल उपद्रवियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, हजारीबाग में अतिरिक्त पुलिस बल और मजिस्ट्रेट को तैनात कर दिया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि झारखंड में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इस बीच, भाजपा विधायकों ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया और हिंदू त्योहारों के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग की। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह उपद्रवियों पर नरमी बरत रही है।

हजारीबाग पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात करीब 11 बजे जामा मस्जिद चौक के पास यह हिंसा हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इलाके में शांति बहाल कर दी गई है, और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

नक्सली हिंसा में 14 वर्षों में 81% की गिरावट: राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री ने दी जानकारी

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नई दिल्ली: वर्ष 2010 में जब वामपंथी उग्रवाद (LWE) चरम पर था और 1936 घटनाएँ दर्ज की गई थीं, तब से 14 वर्षों में नक्सली हिंसा में 81% की गिरावट आई है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में यह जानकारी दी।

मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2024 में नक्सली हिंसा की कुल 374 घटनाएँ रिपोर्ट की गईं। वहीं, नागरिकों और सुरक्षा बलों की मौतों की संख्या भी 2010 में 1005 से घटकर 2024 में 150 रह गई, जो 85% की गिरावट दर्शाती है।

मंत्री ने बताया कि यह गिरावट 2015 में भारत सरकार द्वारा ‘नक्सलवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना’ को मंजूरी देने के कारण संभव हुई है। इस नीति के तहत सुरक्षा उपायों, विकास कार्यों, और स्थानीय समुदायों के अधिकारों व सुविधाओं को सुनिश्चित करने जैसी बहु-आयामी रणनीति अपनाई गई, जिससे हिंसा में लगातार कमी आई और इसका भौगोलिक विस्तार सिमटता गया।

पिछले छह वर्षों में हिंसा में गिरावट

गृह राज्य मंत्री राय ने बताया कि पिछले छह वर्षों में नक्सली हिंसा में 25% की गिरावट आई है। 2019 में नक्सली हिंसा की 501 घटनाएँ दर्ज की गई थीं, जो 2024 में घटकर 374 रह गईं। 2023 में 485, 2022 में 413, 2021 में 361, 2020 में 470, और 2019 में 501 घटनाएँ दर्ज हुई थीं। इस दौरान मौतों की संख्या भी 26% घट गई (2019 में 202 और 2024 में 150)।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में नक्सली हिंसा में भारी गिरावट आई है, जहाँ 2019 में 166 घटनाएँ दर्ज हुई थीं, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 69 रह गई। बिहार में नक्सली हिंसा के मामलों में भारी कमी आई, जहाँ 2019 में 48 घटनाएँ दर्ज हुई थीं, लेकिन 2024 में यह घटकर केवल दो रह गईं। महाराष्ट्र में 2024 में नक्सली हिंसा के 10 मामले सामने आए, जबकि 2019 में 48 घटनाएँ दर्ज हुई थीं। ओडिशा में भी 2019 में 34 घटनाएँ दर्ज की गई थीं, जो 2024 में घटकर मात्र छह रह गईं।

नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का संकल्प

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में राज्यसभा में कहा था कि केंद्र सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करना है। उन्होंने यह भी बताया कि नक्सल गतिविधियों पर निगरानी रखने और उनके खिलाफ कारगर कार्रवाई करने के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

शाह ने कहा, “हमने ड्रोन निगरानी, सैटेलाइट इमेजिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और मोबाइल फोन गतिविधियों की ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर सुरक्षा बलों को उन्नत खुफिया जानकारी प्रदान की। कॉल लॉग विश्लेषण, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, और उनके परिवारों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए, हमने सुरक्षा बलों को सही स्थानों पर तैनात किया, जिससे हमारे अभियानों में उल्लेखनीय सफलता मिली।”

उन्होंने आगे बताया कि नक्सलियों के संचार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बाधित करने के लिए नवीनतम साइबर तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में सरकार नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने में सफल होगी।

 

अमेरिका ने काला सागर में लड़ाई समाप्त करने के लिए यूक्रेन और रूस के साथ समझौता कराया

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व्हाइट हाउस ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका ने काला सागर में संघर्ष समाप्त करने और सुरक्षित नौपरिवहन सुनिश्चित करने के लिए यूक्रेन और रूस के साथ अलग-अलग बातचीत के माध्यम से एक अस्थायी समझौता कराया है। हालांकि, इस समझौते के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर अभी भी चर्चा जारी है, और क्रेमलिन ने इसे कुछ पश्चिमी प्रतिबंधों को हटाने की शर्त पर आधारित कर दिया है।

यह वार्ता सऊदी अरब की राजधानी रियाद में तीन दिनों तक चली, जिसमें अमेरिकी विशेषज्ञों ने यूक्रेनी और रूसी प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात की। व्हाइट हाउस के अनुसार, इन वार्ताओं के दौरान दोनों पक्षों ने सुरक्षित नौपरिवहन सुनिश्चित करने, बल प्रयोग समाप्त करने और वाणिज्यिक जहाजों के सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग को रोकने पर सहमति जताई।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इस वार्ता को शांति की दिशा में एक प्रारंभिक लेकिन सही कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह एक व्यापक युद्धविराम और निष्पक्ष शांति समझौते की ओर बढ़ने की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, रूस ने इस समझौते को कुछ शर्तों से जोड़ा है। क्रेमलिन ने स्पष्ट किया है कि यदि इस समझौते को लागू करना है, तो रूसी कृषि और खाद्य निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए और रूसी बैंकों को स्विफ्ट भुगतान प्रणाली तक पुनः पहुंच प्रदान की जानी चाहिए।

इससे पहले भी 2022 में संयुक्त राष्ट्र और तुर्की की मध्यस्थता में एक काला सागर शिपिंग समझौता हुआ था, जिसे रूस ने 2023 में वापस ले लिया था। रूस ने यह दावा किया था कि उनके खाद्य और उर्वरक निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के वादे पूरे नहीं किए गए थे, जिससे उनकी वैश्विक व्यापारिक स्थिति प्रभावित हुई। इसके बाद, रूस ने यूक्रेन के समुद्री बंदरगाहों और अनाज भंडारण स्थलों पर बार-बार हमले किए।

अब, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि मास्को काला सागर शिपिंग समझौते को फिर से लागू करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए यह आवश्यक है कि रूस की शर्तों को पूरा किया जाए। दूसरी ओर, अमेरिका ने कहा कि वह रूस को वैश्विक बाजार में वापस लाने, समुद्री बीमा लागत कम करने और रूसी कृषि उत्पादों के लिए भुगतान प्रणाली तक आसान पहुंच देने में सहायता करेगा।

यूक्रेनी रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव ने चेतावनी दी कि यदि रूस इस समझौते का उल्लंघन करता है और पश्चिमी काला सागर में अपने युद्धपोतों की तैनाती जारी रखता है, तो यूक्रेन इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानेगा और आत्मरक्षा का पूरा अधिकार सुरक्षित रखेगा।

इसके अतिरिक्त, अमेरिका और रूस के बीच वार्ता के दौरान यह भी सहमति बनी कि दोनों पक्ष ऊर्जा संरचनाओं पर हमले रोकने के उपाय विकसित करेंगे। इससे पहले, अमेरिका और रूस के बीच एक आंशिक युद्धविराम समझौता हुआ था, जिसमें ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने की प्रतिबद्धता जताई गई थी।

हालांकि, अब तक पूर्ण युद्धविराम पर सहमति नहीं बनी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने युद्धविराम की शर्त के रूप में यूक्रेन को सैन्य सहायता रोकने और सैन्य भर्ती अभियान को निलंबित करने की मांग की है, जिसे यूक्रेन और पश्चिमी सहयोगियों ने अस्वीकार कर दिया है।

इस बीच, यूक्रेन और रूस के बीच ड्रोन और मिसाइल हमले जारी हैं। यूक्रेन ने रूस के रोस्तोव परमाणु संयंत्र से जुड़ी हाई-वोल्टेज पावर लाइन पर हमला किया, जबकि रूस ने यूक्रेन के सूमी क्षेत्र में मिसाइल हमले किए, जिसमें 100 से अधिक लोग घायल हो गए।

रूस ने चेतावनी दी है कि यदि यूक्रेन प्रतिबंध हटाने की शर्त को स्वीकार नहीं करता, तो काला सागर में कोई भी स्थायी शांति समझौता लागू नहीं किया जा सकता। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अभी सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है और शांति समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

सिग्नल ऐप पर अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन की योजना लीक, ट्रंप ने बताया मामूली ‘गड़बड़

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा टीम की लापरवाही को मामूली ‘गड़बड़’ बताया, डेमोक्रेट्स ने जांच की मांग की

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा टीम की ओर से सिग्नल ऐप पर यमन में हौती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य हमले की योजना साझा किए जाने की घटना को एक मामूली ‘गड़बड़’ करार दिया। इस ग्रुप चैट में गलती से एक पत्रकार को जोड़ दिया गया, जिससे यह संवेदनशील जानकारी लीक हो गई। डेमोक्रेट सांसदों ने इस लापरवाही को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया और इस मामले की गहराई से जांच करने की मांग की है।

कैसे हुआ सुरक्षा उल्लंघन?

रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वॉल्ट्ज ने व्हाइट हाउस के 18 वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक ग्रुप चैट बनाई थी, जिसमें यमन में हौती विद्रोहियों पर संभावित हमले से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा हो रही थी। हालांकि, इस चैट में गलती से द अटलांटिक पत्रिका के प्रधान संपादक जेफरी गोल्डबर्ग को भी जोड़ दिया गया। इस गलती के कारण ऑपरेशन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी लीक होने की आशंका बढ़ गई है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वॉल्ट्ज ने इस गलती को स्वीकार करते हुए कहा कि व्हाइट हाउस के तकनीकी विशेषज्ञ इस बात की जांच कर रहे हैं कि पत्रकार की संपर्क जानकारी कैसे जुड़ गई। वॉल्ट्ज ने कहा, “हमने गलती की, लेकिन यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।” हालांकि, इस मामले ने व्हाइट हाउस की सुरक्षा नीतियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या लीक हुई थी गोपनीय जानकारी?

व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि इस ग्रुप चैट में कोई भी गोपनीय या अत्यधिक संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की गई थी। हालांकि, द अटलांटिक की रिपोर्ट के अनुसार, इस ग्रुप चैट में हथियारों के प्रकार, लक्ष्यों और हमले के समय को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी। यदि यह जानकारी लीक होती, तो इससे अमेरिका की रणनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती थी और इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे।

डेमोक्रेट सांसदों ने इस घटना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताते हुए इसकी जांच की मांग की है। सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी की सुनवाई के दौरान डेमोक्रेट सीनेटर जॉन ओसॉफ ने इस लापरवाही को ‘शर्मनाक’ करार दिया और कहा कि यह प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ से पूछा, “क्या यह एक गंभीर गलती नहीं थी?” जिस पर रैटक्लिफ ने असहमति जताते हुए कहा कि इस मामले को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है।

व्हाइट हाउस ने किया बचाव, लेकिन विरोध जारी

ट्रंप प्रशासन ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि यह कोई गंभीर उल्लंघन नहीं था और कोई भी गोपनीय जानकारी साझा नहीं की गई थी। हालांकि, इस मामले ने एक और विवाद को जन्म दे दिया है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने 2016 में हिलेरी क्लिंटन पर निजी ईमेल सर्वर के जरिए गोपनीय जानकारी भेजने के आरोप लगाए थे और उनके खिलाफ कड़ी सजा की मांग की थी।

इस मामले को लेकर पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी कटाक्ष करते हुए कहा, “क्या आप मजाक कर रहे हैं?” और इस खबर के साथ एक आँख घुमाने वाले इमोजी को जोड़ दिया।

सुरक्षा उल्लंघन की गहराई से जांच होगी?

डेमोक्रेट सांसदों ने मांग की है कि इस मामले की गहराई से जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि इस तरह की गलतियां भविष्य में दोबारा न हों। सीनेटर रॉन विडेन ने कहा कि व्हाइट हाउस अधिकारियों की मैसेजिंग एप्लिकेशन के उपयोग की ऑडिट होनी चाहिए।

एफबीआई निदेशक काश पटेल ने इस मुद्दे पर कहा कि वे हाल ही में इस मामले पर जानकारी प्राप्त कर चुके हैं और अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि क्या एफबीआई इस पर कोई औपचारिक जांच शुरू करेगी या नहीं। सीनेटर मार्क वार्नर ने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि यह जानकारी लीक होती, तो अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में पड़ सकती थी।”

ट्रंप प्रशासन पर उठ रहे सवाल

यह घटना ट्रंप प्रशासन के लिए एक और बड़ा झटका साबित हो रही है, क्योंकि इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर्याप्त रूप से मजबूत है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस गलती को हल्के में लिया है, लेकिन इस मामले ने व्हाइट हाउस की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

अब देखना यह होगा कि इस मामले की कितनी गहराई से जांच की जाती है और क्या प्रशासन भविष्य में ऐसे सुरक्षा उल्लंघनों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं।

USCIRF ने भारत को ‘विशेष चिंता वाला देश’ घोषित करने की सिफारिश की; नई दिल्ली ने रिपोर्ट को ‘पक्षपाती’ बताया

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नई दिल्ली: अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की वार्षिक रिपोर्ट पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बुधवार को जारी रिपोर्ट में USCIRF ने भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों और भेदभाव में वृद्धि का आरोप लगाया और अमेरिका सरकार से भारत को ‘विशेष चिंता वाला देश’ (CPC) घोषित करने की सिफारिश की।

नई दिल्ली ने इस रिपोर्ट को ‘पक्षपाती और राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताते हुए कहा कि यह भारत की लोकतांत्रिक और बहुसांस्कृतिक छवि को कमजोर करने का एक सुनियोजित प्रयास है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने कहा,

“USCIRF की लगातार भारत की छवि को खराब करने की कोशिश उसके पूर्व निर्धारित एजेंडे को दर्शाती है, न कि धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर किसी वास्तविक चिंता को। भारत की 1.4 अरब आबादी विभिन्न धर्मों के अनुयायियों से बनी है, जो एक बहुलतावादी ढांचे में सौहार्दपूर्ण ढंग से रहते हैं।”

रिपोर्ट में अमेरिका सरकार से भारत पर लक्षित प्रतिबंध लगाने, कुछ व्यक्तियों और संस्थानों की संपत्तियां फ्रीज करने और MQ-9B ड्रोन जैसे सैन्य सौदों की समीक्षा करने की भी सिफारिश की गई है।

USCIRF ने भारत में आतंकवाद और वित्तीय अपराधों से जुड़े कानूनों—जैसे UAPA और FCRA—का इस्तेमाल नागरिक संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के खिलाफ करने का भी आरोप लगाया है।

विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि USCIRF को खुद ‘चिंता का विषय’ (entity of concern) घोषित किया जाना चाहिए।

बिहार विधानसभा ने लालू प्रसाद यादव के लिए भारत रत्न सिफारिश प्रस्ताव खारिज किया

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पटना: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को झटका देते हुए, बिहार विधानसभा ने बुधवार को वरिष्ठ नेता लालू प्रसाद यादव के लिए भारत रत्न की सिफारिश करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया।

लालू यादव को भारत रत्न देने की मांग लंबे समय से राजद द्वारा उठाई जाती रही है, जिसे पार्टी के वफादार समर्थकों का भी समर्थन मिलता रहा है।

बुधवार को राजद विधायक मुकेश रोशन ने एक बार फिर विधानसभा में यह प्रस्ताव रखा, जिसमें बिहार सरकार से केंद्र सरकार को लालू यादव का नाम सिफारिश करने का आग्रह किया गया।

इस पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार हर साल भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों के लिए सिफारिशें भेजती है, लेकिन इस समय लालू यादव के लिए ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।

“फिलहाल बिहार सरकार के पास लालू यादव के लिए भारत रत्न की सिफारिश करने का कोई प्रस्ताव नहीं है,” विजय चौधरी ने कहा।

उन्होंने मुकेश रोशन से अपना प्रस्ताव वापस लेने का अनुरोध किया, लेकिन जब उन्होंने इनकार कर दिया, तो विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने ध्वनि मत से प्रस्ताव पर निर्णय लिया।

अंततः, बहुमत से इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया, जिससे राजद सदस्यों को निराशा हुई।

2025 बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, इस मांग को एक राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे लालू यादव के प्रति जनता की सहानुभूति बढ़ाने और समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है।

राजद नेताओं और समर्थकों ने विधानसभा के बाहर अपनी असंतोष जाहिर किया।

“लालू यादव ने सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए। इस प्रस्ताव को खारिज किया जाना बेहद निराशाजनक है,” महुआ विधानसभा क्षेत्र से राजद विधायक मुकेश रोशन ने कहा।

ठाणे पुलिस ने एकनाथ शिंदे पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए कुणाल कामरा पर मामला दर्ज किया

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ठाणे: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में शिवसेना प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस के अनुसार, डोंबिवली पुलिस स्टेशन में सोमवार को शिवसेना के एक पदाधिकारी की शिकायत पर कामरा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 356(2) (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्होंने एक ऑनलाइन लिंक खोलने के बाद शिंदे के खिलाफ आपत्तिजनक वीडियो क्लिप देखी।

कामरा ने अपने शो के दौरान 2022 में शिवसेना में हुई टूट पर कटाक्ष करते हुए शिंदे को “गद्दार” कहा था। यह शो मुंबई के एक होटल के बेसमेंट में रिकॉर्ड किया गया था।

इस टिप्पणी और पैरोडी गीत के कारण शिवसेना कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया, जिन्होंने रविवार को स्टूडियो में तोड़फोड़ की। मुंबई पुलिस ने शिवसेना विधायक की शिकायत पर कामरा के खिलाफ मामला दर्ज किया और उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए नोटिस जारी किया।

इसके अलावा, खार क्षेत्र में स्थित हैबिटेट स्टूडियो में तोड़फोड़ करने के आरोप में 40 शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और 12 कार्यकर्ताओं को सोमवार को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, उसी दिन स्थानीय अदालत ने उन्हें जमानत दे दी

बांग्लादेश ने कहा: युनूस-मोदी बैठक प्रस्ताव पर भारत की प्रतिक्रिया का इंतजार

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ढाका: बांग्लादेश ने मंगलवार को कहा कि वह अगले हफ्ते बैंकॉक में होने वाले बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान मुख्य सलाहकार मुहम्मद युनूस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक के प्रस्ताव पर भारत की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है।

विदेश सचिव एमडी जशिम उद्दीन ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हमारी ओर से बैठक के लिए पूरी तैयारी है। अब हम भारत की सकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

ढाका ने इससे पहले भारत को एक पत्र भेजकर बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान युनूस और मोदी के बीच बैठक का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव अगस्त 5, 2024 को बांग्लादेश में शासन परिवर्तन और प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद के तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के बीच दिया गया है।

मोदी और युनूस के अप्रैल 2-4 के दौरान बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है, और ढाका ने इस कार्यक्रम के दौरान उनकी बैठक का प्रस्ताव दिया है।

बांग्लादेश के विदेश सचिव ने स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव है, लेकिन उन्होंने कहा कि यदि दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक होती है तो इसे दूर किया जा सकता है।

यात्रा से पहले, युनूस चीन के बोआओ फोरम फॉर एशिया सम्मेलन में भाग लेने के लिए तीन दिवसीय यात्रा करेंगे, जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की संभावना है। इस दौरान, तेस्ता नदी परियोजना और रोहिंग्या शरणार्थी मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।

GT vs PBKS: ग्लेन मैक्सवेल ने बनाया शर्मनाक रिकॉर्ड, आईपीएल इतिहास में सबसे ज्यादा डक का रिकॉर्ड रोहित शर्मा को पीछे छोड़ा

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अहमदाबाद: पंजाब किंग्स के बल्लेबाज ग्लेन मैक्सवेल ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ खेले गए आईपीएल 2025 के मैच में एक शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। मैक्सवेल आईपीएल इतिहास में सबसे ज्यादा डक (0 पर आउट) दर्ज करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने इस मामले में रोहित शर्मा और दिनेश कार्तिक को पीछे छोड़ दिया।

गुजरात टाइटंस के खिलाफ मुकाबले में पहली ही गेंद पर, मैक्सवेल ने आर साई किशोर के खिलाफ रिवर्स स्वीप खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद को मिस कर गए और एलबीडब्ल्यू आउट हो गए। मैक्सवेल ने श्रेस अय्यर से संक्षिप्त चर्चा के बाद डीआरएस नहीं लिया, जबकि बाद में रीप्ले में दिखा कि गेंद विकेट के ऊपर से जा रही थी।

मैक्सवेल ने आईपीएल में 156.64 की स्ट्राइक रेट से 2771 रन बनाए हैं और उन्हें निचले क्रम में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है।

गुजरात टाइटंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। प्रियांश आर्य ने 47 रनों की तेजतर्रार पारी खेली, जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने नाबाद 97 रन बनाए। शशांक सिंह ने 16 गेंदों में नाबाद 44 रन बनाकर टीम को 243/5 के विशाल स्कोर तक पहुंचाया। गेंदबाजी में आर साई किशोर ने तीन विकेट झटके, जबकि राशिद खान ने एक विकेट लिया।

पंजाब: सुखबीर सिंह बादल गोलीकांड के आरोपी नारायण चौरा को जमानत मिली

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अमृतसर: अमृतसर की अदालत ने शिरोमणि अकाली दल के पूर्व अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर हुए गोलीकांड के आरोपी नारायण सिंह चौरा को जमानत दे दी है। चौर को लगभग 4 महीने जेल में बिताने के बाद जमानत मिली है।

न्यायालय का निर्णय
इस मामले में आरोपी के वकील जसपाल सिंह मांझपुर ने कहा कि नारायण सिंह चौरा पर सुखबीर सिंह बादल की हत्या के प्रयास का आरोप था। पुलिस स्टेशन ई डिवीजन ने इस मामले में अदालत में चालान पेश कर दिया था। आज हुई सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमित घई की अदालत ने नारायण सिंह चौर को जमानत देने का फैसला किया।

जांच पूरी, जेल में रखने का कोई ठोस कारण नहीं
मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। आरोपी के वकील ने बताया कि अमृतसर कोर्ट ने यह मानते हुए जमानत दी कि अब चौर को जेल में रखने का कोई ठोस कारण नहीं है।

क्या था मामला?
यह गोलीकांड दिसंबर 2024 में स्वर्ण मंदिर के परिक्रमा क्षेत्र में हुआ था, जब सुखबीर सिंह बादल भवन के बाहर सेवा कर रहे थे। इसी दौरान नारायण सिंह चौर ने उन पर गोली चलाई, लेकिन वह बाल-बाल बच गए। घटना के बाद स्वर्ण मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने तत्काल चौर को गिरफ्तार कर लिया था।

छत्तीसगढ़: दंतेवाड़ा-बिजापुर सीमा पर मुठभेड़ में 3 नक्सली ढेर, भारी मात्रा में हथियार बरामद

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दंतेवाड़ा: मंगलवार सुबह 8 बजे से दंतेवाड़ा और बीजापुर की सीमा पर सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें तीन नक्सली मारे गए। इनमें दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य सुधीर उर्फ सुधाकर उर्फ मुरली भी शामिल था, जिस पर ₹25 लाख का इनाम था।

भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद
सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ के बाद तीनों नक्सलियों के शव बरामद किए, साथ ही भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जब्त किया। बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी है।

डीआरजी और बस्तर फाइटर्स को मिली बड़ी सफलता
दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय ने कहा, “सुरक्षा बल मंगलवार सुबह दंतेवाड़ा-बिजापुर सीमा पर सर्च ऑपरेशन कर रहे थे, तभी नक्सलियों ने उन पर हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में जवानों ने तीन नक्सलियों को ढेर कर दिया, जबकि अन्य घने जंगलों में भाग गए। जवानों ने तीन शवों के साथ भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है। सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है।”

मुख्यमंत्री व गृहमंत्री ने जताई खुशी
मुठभेड़ में मिली सफलता पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, “भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद अब तक 400 से ज्यादा नक्सलियों का सफाया किया जा चुका है। लगातार हो रहे अभियानों से नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। यह हमारे जवानों की वीरता और साहस का परिणाम है।”

केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए सुरक्षा बलों को और सशक्त किया जाएगा।

नक्सलियों की मौजूदगी की मिली थी गुप्त सूचना
पुलिस के अनुसार, 24 मार्च को उन्हें सूचना मिली थी कि 10-12 नक्सली थाना गीदम क्षेत्र के गिरसपारा, नेलगुड़ा, बोडगा और ईकेली गांवों में मौजूद हैं। इसके बाद एएसपी और डीएसपी के नेतृत्व में डीआरजी और बस्तर फाइटर्स के जवानों को अभियान में लगाया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी विधानसभा के स्वर्ण जयंती समारोह में कहा कि नक्सल प्रभावित लोगों को मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास अपने चरम पर है और जल्द ही छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होगा।

SC कॉलेजियम ने जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सोमवार को एक संकल्प जारी कर केंद्र से जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की। जस्टिस वर्मा को 2021 में दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था, और अब कॉलेजियम ने उन्हें उनके मूल हाई कोर्ट इलाहाबाद में फिर से भेजने का निर्णय लिया है।

सुप्रीम कोर्ट के वेबसाइट पर प्रकाशित बयान में कहा गया है, “सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपनी 20 और 24 मार्च 2025 की बैठक में जस्टिस यशवंत वर्मा, न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भेजने की सिफारिश की।”

आज दिल्ली हाई कोर्ट ने घोषणा की कि जस्टिस वर्मा से संबंधित न्यायिक कामकाज “तत्काल प्रभाव से” रोक लिया गया है, जब तक आगे के आदेश न दिए जाएं। यह निर्णय 14 मार्च को दिल्ली के तुगलक रोड स्थित जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास में आग लगने के बाद, उस स्थान से बड़ी मात्रा में नकद मिलने के आरोपों के बाद लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था, जिसमें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शीरील नागू, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधवाला और कर्नाटका हाई कोर्ट की जज अनु शिवरमन शामिल हैं, ताकि इस मामले की जांच की जा सके।

जस्टिस वर्मा ने आरोपों को सख्ती से नकारते हुए कहा है कि उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा कभी भी उनके आवास के स्टोर रूम में नकद राशि नहीं रखी गई थी। उन्होंने इसे एक साजिश बताया, जिसे उन्हें बदनाम करने के लिए किया गया है।

कॉलेजियम ने 20 मार्च को जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी, जब उसे एक वीडियो मिला था जिसमें कथित रूप से जस्टिस वर्मा के आवास पर नकद जलते हुए दिखाई दे रहे थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस वर्मा के स्थानांतरण का विरोध किया है और इसे एक गंभीर प्रश्न बताया है कि क्या इलाहाबाद हाई कोर्ट को एक “कूड़े का ढेर” मान लिया गया है

पीएलए चीन की सशस्त्र सेना नहीं, बल्कि सीसीपी का अस्तित्व बचाने वाला साधन है

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Chinese People's Liberation Army (PLA) soldiers are seen outside the Great Hall of the People in Beijing on March 3, 2025, ahead of the country's annual legislative meetings known as the "Two Sessions". (Photo by Pedro Pardo / AFP)

हर राष्ट्र के पास अपनी सुरक्षा और संप्रभुता बनाए रखने के लिए एक सशस्त्र बल होता है, जो बाहरी और आंतरिक खतरों से रक्षा करता है। यह बल, जो करदाताओं द्वारा वित्त पोषित होता है, राष्ट्रीय खजाने से चलता है और इसके लिए जिम्मेदार होते हैं चुनावी प्रक्रिया से चुने गए नेता। सामान्यतः, सशस्त्र बल संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं, निर्वाचित सरकार के अधीन होते हैं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए काम करते हैं। लेकिन चीन में स्थिति अलग है, जहां उसकी सशस्त्र सेना का वास्तविक उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा से अधिक, एक राजनीतिक दल (चीनी कम्युनिस्ट पार्टी) के अस्तित्व को सुनिश्चित करना है।

चीन के मामले में, पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) केवल एक सैन्य बल नहीं है, बल्कि यह सीसीपी की राजनीतिक शक्ति को बनाए रखने के लिए एक हथियार बन गई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पार्टी के लिए, पीएलए केवल राष्ट्रीय रक्षा के लिए नहीं है, बल्कि यह पार्टी के आदेशों को लागू करने, उनके सत्ता में बने रहने और अपने शासन के खिलाफ किसी भी विरोध को दबाने का एक उपकरण है। यह व्यवस्था ऐसी है कि चीन में सेना को केवल पार्टी के पक्ष में काम करने की शर्तें दी गई हैं, जहां सशस्त्र बल पार्टी के प्रति निष्ठा रखते हैं, न कि राष्ट्र के प्रति।

सीसीपी की सत्ता को मजबूत करने के लिए, पीएलए और इसके अन्य अंगों को लगातार पार्टी के प्रति वफादारी सिखाई जाती है, और यही कारण है कि 2014 में कई वरिष्ठ जनरलों ने शी जिनपिंग के विचारों को लागू करने की शपथ ली थी। यह निष्ठा सिर्फ आदेशों का पालन नहीं है, बल्कि सैन्य और राजनीतिक शिक्षा का हिस्सा है, जो नियमित सैनिकों को भी दी जाती है। इस प्रकार, सेना केवल पार्टी के निर्देशों को लागू करने के लिए बाध्य है, और इस व्यवस्था में राष्ट्रीय सुरक्षा या नागरिकों की सुरक्षा की प्राथमिकता नहीं है।

चीन में सैनिकों की संख्या में अधिकांश लोग सामान्यत: 66% तक के भर्तियां, यानी ‘कॉन्स्क्रिप्ट’ होते हैं, जिनका जीवन पार्टी और उसकी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित होता है। इन सैनिकों को कभी भी स्वतंत्र रूप से अपनी देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर युद्ध नहीं लड़ा जाता। उनका उद्देश्य केवल पार्टी के आदेशों को पालन करना और शी जिनपिंग और सीसीपी की सत्ता को बनाए रखना है। इसके विपरीत, भारतीय सैनिकों का जीवन राष्ट्र की रक्षा और अपने परिवारों की सुरक्षा के प्रति उनकी निष्ठा और कर्तव्य पर आधारित होता है। भारतीय सेना का उद्देश्य केवल युद्धों में जीत नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और सहायता है।

चीन की सेना का इतिहास भी इसके राजनीतिक उद्देश्य को दर्शाता है। 1989 में तियानमेन स्क्वायर में छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए पीएलए का उपयोग किया गया था। हजारों निर्दोष लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकांश छात्र थे, जो शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसी प्रकार, हॉन्ग कॉन्ग में छात्रों के लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने पर भी पीएलए को उतारा गया था। कोविड-19 महामारी के दौरान भी, पीएलए का उपयोग सख्त लॉकडाउन और जनविरोध को दबाने के लिए किया गया, जहां लोगों को अत्यधिक कड़ी स्थितियों में बंद कर दिया गया और उनपर नजर रखी गई। यह सब इस तथ्य को दर्शाता है कि पीएलए केवल अपने नेताओं के आदेशों के पालन में व्यस्त है, न कि राष्ट्र की रक्षा में।

इसकी तुलना में, भारतीय सेना में सैनिकों की प्रेरणा और निष्ठा अपने देश के प्रति होती है। भारतीय सैनिकों की भावना उनके कर्तव्य और सम्मान पर आधारित होती है। वे न केवल युद्ध के मैदान में अपनी जान की बाजी लगाते हैं, बल्कि किसी भी आपदा या संकट के समय भी पहले सामने आकर मदद करते हैं। कश्मीर से लेकर कारगिल तक, भारतीय सैनिकों ने हर चुनौती का सामना किया है, और उनका प्रेरणा स्रोत उनकी निष्ठा और समर्पण होता है।

इसके विपरीत, चीन की सेना कभी भी सच्चे युद्ध के मैदान में अपनी निष्ठा का प्रदर्शन नहीं कर पाई है। 1962 में, चीन ने भारत के खिलाफ अपनी संख्या बल के आधार पर विजय प्राप्त की थी, लेकिन कभी भी यह स्वीकार नहीं किया गया कि उन्होंने वास्तविक रूप से कितना नुकसान उठाया। इसके अलावा, चीनी सैनिकों को कभी भी जनता के बीच हीरो के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। चीनी सरकार ने अपने सैनिकों को छुपाया और उनके नुकसान को छुपाया, ताकि देश के अंदर कोई असंतोष न पैदा हो सके।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि भारतीय सेना एक राष्ट्रीय सेना है, जो नागरिकों की रक्षा करती है, जबकि पीएलए केवल एक राजनीतिक दल के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए काम करती है। भारतीय सेना का उद्देश्य और प्रेरणा स्पष्ट है: देश की रक्षा और उसकी संप्रभुता को बनाए रखना। वहीं, पीएलए का उद्देश्य केवल सीसीपी और शी जिनपिंग के सत्ता को सुरक्षित रखना है, और यही कारण है कि यह अपने सैनिकों को राष्ट्रीय भावना से प्रेरित करने में असफल है।

एमएस धोनी ने खुलासा किया कि वह किस भाषा में क्रिकेट मैच की कमेंट्री सुनना पसंद करते हैं

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चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) द्वारा मुंबई इंडियंस (MI) को 4 विकेट से शानदार जीत दिलाने के बाद, 24 मार्च 2025 को महान क्रिकेटर एमएस धोनी ने उस भाषा का खुलासा किया जिसमें वह क्रिकेट मैच की कमेंट्री सुनना पसंद करते हैं। धोनी ने कहा कि क्षेत्रीय भाषा की कमेंट्री, खासकर भोजपुरी, उन्हें पुराने समय के रेडियो कमेंट्री की याद दिलाती है।

नो़र अहमद द्वारा चार विकेट लेने और रचन रवींद्र के अर्धशतक की शानदार पारी के बाद CSK ने अपने घरेलू मैदान MA चिदंबरम स्टेडियम पर अपने प्रतिद्वंद्वी को आराम से हराया। मैच के बाद धोनी ने कमेंट्री की भूमिका और इसके महत्व पर अपने विचार साझा किए।

धोनी ने कहा, “मैंने क्षेत्रीय भाषा की कमेंट्री ज्यादा नहीं सुनी है क्योंकि जब हम लाइव मैच देखते हैं, तो रिप्लेज़ सीमित होते हैं और अधिकांश कमेंट्री मैं अंग्रेजी या हिंदी में ही सुनता हूं, जिससे हमें खेल को बेहतर तरीके से विश्लेषण करने में मदद मिलती है।”

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व खिलाड़ियों से मिलने वाली कमेंट्री बहुत महत्वपूर्ण होती है। “वे अलग-अलग टूर्नामेंट और देशों में सैकड़ों मैच कवर करते हैं। उनकी विभिन्न स्थितियों और टीमों के प्रति अपार जानकारी होती है। कमेंट्री सुनने से हमें एक बाहरी दृष्टिकोण मिलता है,” धोनी ने कहा, जो नए विचारों और दृष्टिकोण को प्रेरित करता है।

हालांकि धोनी ने कहा कि वह क्षेत्रीय कमेंट्री सुनते नहीं हैं, लेकिन उन्होंने भोजपुरी कमेंट्री को बहुत उत्साही और रोचक बताया, जो उन्हें पुराने समय के रेडियो ब्रॉडकास्ट की याद दिलाती है। “मैं हरियाणवी कमेंट्री भी सुनना चाहूंगा क्योंकि यह काफी अनोखी होती है,” धोनी ने जोड़ा।

सीजन ओपनर में, धोनी ने केवल 0.12 सेकंड में सूर्यकुमार यादव को स्टंप किया, जो एक यादगार पल था। धोनी उन चार खिलाड़ियों में से एक हैं जो IPL के हर सीजन में हिस्सा ले चुके हैं।