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कैग रिपोर्ट में पुल

पुल-पुलियों के निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई- कैग
पुल-पुलियों के निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई- रिपोर्ट

कैग रिपोर्ट में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बनाए गये पुल-पुलियों के निर्माण में बड़े पैमान पर गड़बड़ी की बात कही गई है. इन पुल और पुलियों का चयन मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत सांसदों और विधायकों की सिफारिशों पर उनकी व्यवहार्यता की जांच किए बिना   किया गया था। ग्रामीण विकास विभाग ने बिना ऑपरेशनल गाइडलाइन्स या सर्वे के इन पुलों के निर्माण की स्वीकृति दी थी।

कैग की रिपोर्ट कहती है कि मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत बनाए गये पुलों की स्वीकृति सिर्फ स्थानीय विधायक या सांसद के कहने पर की गई। यह भी नहीं देखा कि जहां ये बनाये जा रहे हैं, वहां इनकी जरुरत है भी या नहीं । उदाहरण देते हुए कैर रिपोर्ट में कहा गया है कि कोडरमा जिले के केसो नदी पर 13.44 करोड़ की लागत से डेढ़ किलोमीटर के अंदर तीन-तीन पुलों का निर्माण कर दिया गया। ये सरकारी धन की निर्दयता से बर्बादी थी ।

कैग रिपोर्ट कहती है कि ऐसा प्रतीत होता है कि डिपार्टमेंट के पास डीपीआर बनाने के लिए किसी कन्सलटेन्ट को अप्वाइंट करने का कोई नियम-कायदा ही नहीं है। ऐसा लगता है कि इन पुलों को मंजूरी देने वाले मुख्य अभियंता के कार्यालय में भी कोई डिज़ाइन सेल नहीं है, जो इसे सलाहकारों द्वारा प्रस्तुत डीपीआर को स्वीकार करने की सलाह देता। पुलों के डिजायन में अगर कोई फॉल्ट है तो उसे ठीक करने का भी कोई प्रावधान है या नहीं ?अगर वो है भी तो कम से कम हमें कहीं नहीं दिखा ?

महालेखाकर इंदू अग्रवाल ने बताया कि सलाहकारों ने आवश्यक भू-तकनीकी जांच और जल विज्ञान और यातायात डेटा का विश्लेषण नहीं किया । इसका परिणाम ये हुआ कि हमने कुल 42 पुल जो 52. 12 करोड़ की लागत से बने थे, उनमे से 16 में अप्रोच रोड या तो नहीं थे या उनमें भारी खामियां थी। जैसे पुल पर चढ़ने के लिए 90 डिग्री को मोड़ होता है क्या ?  इतना ही नहीं ऑडिट टीम ने यह भी पाया कि 42 में से 28 पुल के अप्रोच रोड की चौड़ाई लगभग आधी कर दी गई थी।

खराब काम करने वाले ठेकेदारों को मिला सबसे ज्यादा काम

महालेखाकर इंदू अग्रवाल ने ऑडिट रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि 2014 से 2019 के दौरान 571 पुलों का निर्माण किया गया। इसमें सरकार ने कुल 13 ठेकेदारों को 251.41 करोड़ का काम दे दिया। एक-एक ठेकेदार को 2 से लेकर 13 प्रोजेक्ट तक दिए गये । जो पुल बन भी गये मेंटेनेन्स के अभाव के कारण किसी के फाउंडेशन के नीचे से बालू का अवैध खनन होता रहा तो किसी के RCC (reinforced cement concrete) में क्रैक पाया गया।  फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान कई तरह की खामियां पाई गईं।

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