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इंडो-पाक तनाव से भागलपुर की रेशम उद्योग पर पड़ा असर, देश के लिए नुकसान सहने को तैयार कारीगर

भागलपुर: भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव का भागलपुर के रेशम उद्योग पर गहरा प्रभाव पड़ा है। देशभर में ‘रेशम नगरी’ के रूप में प्रसिद्ध इस शहर के बुनकर गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

नथनगर के चंपानगर क्षेत्र, जो रेशम उत्पादन का प्रमुख केंद्र है, वहां 10 में से 9 करघे बंद पड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खरीददारों ने अपने ऑर्डर रोक दिए हैं, जिससे करोड़ों रुपये के माल की डिलीवरी अटक गई है।

फिर भी, यहां के बुनकरों और व्यापारियों का कहना है कि देश सर्वोपरि है, और आतंकवाद के खात्मे के लिए वे किसी भी नुकसान को सहने के लिए तैयार हैं।


हवाई क्षेत्र बंद होने से व्यापार प्रभावित

पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान ने हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जिससे मध्य-पूर्व, यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों के रूट बदल गए। इससे फ्लाइट्स रद्द हुईं, समय और ईंधन की लागत बढ़ी, और अंतरराष्ट्रीय आयातकों ने अपने ऑर्डर होल्ड पर रख दिए।

भागलपुर से लगभग ₹100 करोड़ के ऑर्डर फिलहाल अटके हुए हैं। वहीं ₹20 करोड़ मूल्य के उत्पाद परिवहन के इंतजार में पड़े हैं।


उद्योग की हालत दयनीय

रेशम उद्योग से 60,000 से अधिक लोग जुड़े हैं, जिनमें 12,000 पावरलूम मालिक हैं।

  • कारखानों में 90% करघे बंद हैं।

  • जहां पहले 50 लोग काम करते थे, अब महज़ 4-5 लोग काम कर रहे हैं।

  • काम के घंटे 12 से घटकर 4-5 घंटे रह गए हैं।

बुनकर मोहम्मद शमशीर अंसारी ने कहा:

“हमारा गुज़ारा इसी पर है, लेकिन इस समय काम बंद पड़ा है। देश के लिए हर बलिदान मंज़ूर है। पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहिए।”


🇮🇳 देशप्रेम की भावना हावी

फैक्ट्री मालिक तहसीन शहबाद ने कहा:

“बांग्लादेश में भी जब अशांति हुई थी तो हम दुखी हुए थे, लेकिन इस बार नहीं। निर्दोष लोगों की हत्या और सैनिकों की शहादत बर्दाश्त नहीं।”

बुनकर मोहम्मद सलीम अंसारी ने कहा:

“हर बार युद्ध जैसी स्थिति में हमारी रोज़ी-रोटी प्रभावित होती है, लेकिन देश की सुरक्षा पहले है।”


भविष्य की उम्मीद

व्यापारियों ने बताया कि वे अपने उद्योग को बदल भी नहीं सकते क्योंकि इसमें भारी निवेश किया गया है। सभी को हवाई मार्ग खुलने और स्थिति सामान्य होने का इंतज़ार है।

व्यापारी मोहम्मद इब्रार अंसारी ने कहा:

“हम सौ से अधिक करघों को बंद करने को तैयार हैं अगर इससे देश की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।”

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